कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और compleet

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raj..
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Re: कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और हनीमून

Unread post by raj.. » 06 Nov 2014 07:35

शादी सुहागरात और हनीमून--23

गतान्क से आगे…………………………………..

जब उसने कस कस के मेरे जोबन को चूमा, मेरे मन सागर के मनोज उरोज खिल उठे.

बस मेरा मन कर रह था अब वो 'करें' और ना तड़पाये उनके हाथो और होंठो का स्पर्श पा के मेरे पैरो की हिम्मत ज़रा ज़्यादा ही बढ़ गयी थी. वो अपने आप ही उनके कंधो के आसान पे सवार हो गये. पहले बिछुए की झनेकार , फिर पायल की झनेक और थोड़ी देर मे मेरी पूरी देह से संगीत झड़ने लगा था. जब उसने मेरी कलाई पकड़ी तो चूड़ियो की चूर मूर और चुम्मा लेना साथ,

झूमर का झनझन, हर के हिलने की आवाज़ भी इसमे शामिल हो गयी. और जब वह मेरी कमर उठा के धक्का देता तो मेरी करधनि की रुन झुन भी इसमे शामिल हो जाती. और सिर्फ़ मेरे बिछुए, पायल, करधन, चूड़िया, झूमर और हर ही नहिजाब वो मेरे नितंबो को पकड़ के कस के, लगभग पूरी तरह बाहर निकाल के धक्का देता, और उसका मोटा सख़्त लिंग मेरी कसी, किशोर, 24 घंटे पहले तक अक्षत योनि मे उसे कस कस के रगड़ते, फैलाते घुसतातो मेरी चीख निकल जाती. कभी चीख कभी सिसकिया, कभी उह कभी आहा मेरी देह का संगीत लगातार. लग रहा था बहुत दिनो से पड़े हुए सितार को किसीने उठा लिया हो और उसे छेड़ दिया हो. आज मैं भी शरमाते हुए ही सही, उसके सुर मे सुर मिलने की कोशिश कर रही थी. वो मुखड़े पे तो मैं अंतरे पे. और वो भी कभी द्रुत तो कभी विलंबित, कभी मेरे रसीले जोबन को पकड़ के दबाते सहलाते,

कुचलते मसलते, कस कस के तेज़ी से धक्के लगाते, मेरी चीखो और सिसकियो की परवाह किए बिना और कभी खूब धीरे, धीरे मेरे योनि के अंदर सहलाते वो घुसता और मज़े से मेरी जान निकल जाती. सच मे इससे बड़ा सुख कोई नही हो सकता सब कुछ भूल के. और आज वो भी कभी मेरी कमर पकड़ के, कभी कलाई थाम के, कभी कस के नितंबो को पकड़ के और कभी कस कस के मेरे मद मस्त रसीले किशोर उभारो का रस लेते. और जब उन्हे लगता कि संगीत अपने शीर्ष पे पहुँच रहा है तो थोड़ी देर कमर को आराम देउनेके होंठ और उंगलिया मोर्चा समहाल लेते. कभी वो मेरे रसीले होंठो, गालो को चूमते, चूसाते और कभी कच कचा के काट लेते. और उनके हाथ जो इस के लिए न जाने कब से भूखे थे, मेरे किशोर जोबन सहलाते, प्यार करते,

उसे कस कस के दबा देते, मसल देते, मेरे कड़े खड़े चूचुक पिंच कर देते. और इतने देर मे ही मैं कभी अपने नितंबो को उचका के, कभी कस के उन्हे अपनी ओर खींच के कभी उनके कंधो मे नाख़ून गढ़ा के इशारा करती और हमारे देह संगीत की सरिता फिर से बहने लगती. बहुत देर तक इसी तरह सुख लेने के बाद कब हम किनारे की ओर पहुँचने वाले थे तो धीरे धीरे बजने वाले सुर तेज हो गये झाला बजने लगा, देर तक और जब हम झाडे भी तो साथ साथ देर तक हर 'बूँद' मैं अपने अंदर महसूस करती रही. मेरी देह इतनी शिथिल पड़ गयी बहुत देर तक हम दोनो एक दूसरी की बाहो मे लिपटे पड़े रहे.

कुछ देर बाद उन्होने मुझे सहारा देके उठाया और बिस्तर के सिरहाने के सहारे अध लेता बैठा दिया. आज मुझे इसकी फिकर नही थी कि मेरी देह रज़ाई से धकि नही है, या मेरी जाँघो के बीच मेरे उनके रस की बूंदे अभी तक बह रही है.

थोड़ी देर तक हम ऐसे ही बैठे रहे फिर अचानक उन्हे कुछ याद आया और उन्होने पलंग की साइड टेबल सेमेरी आँखे उन्होने बंद करा दी थी. जब मेने आँखे खोली तो खुशी से मेरा मन भर आया.. कितने प्यारा कुंदन का सेट, बहुत ही इंट्रिकेट मिनेकारी,

डायम्मड के साथ इमेरल्ड, रूबी और सब मोर की डिजाइन के, हर, टॅप्स, अंगूठी, जाड़ाउ कंगन छितकी चाँदनी मे वो और भी अच्छे लग रहे थे. हर तो उन्होने उसी समय पहने दिया. मारे खुशी के मेने उन्हे अपनी बाहो का हार पहना दिया और कस कस के चूम लिया. कितनी अच्छी पसंद है आपकी, मैं बोल पड़ी.

"तभी तो तुम्हे पसंद किया. "वो हंस के बोले.

raj..
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Re: कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और हनीमून

Unread post by raj.. » 06 Nov 2014 07:36

"धत्त" मैं क्या बोलती.

कस के उन्होने मुझे भी अपनी बाहों मे बाँध लिया और कस कस के मेरी पलको, होंठो को चूमते हुए बोले,

"मुझे तुमसे कुछ कहना है.. "

"मुझे भी कुछ कहना है"मैं भी हल्के से चूमती बोली.

"पहले आप. "

"पहले आप. "

"पहले आप. पहले आप कहते कही गाड़ी ने छूट जाय तो चलो मैं ही बोलता हू. "वो बोले. तुम्हारी दो बुराया बुरा तो नही मनोगी पहले मैं सहम रहा था कि.. लेकिन अब हम आपस मे घुल मिल गये है तो अगर तुम कहो. "वो बोले.

"बोलिए ना.. "मेने कह तो दिया. कौन सी बात, मैं एकदम सहम गयी थी.

"तुम्हारे लिए जिंदगी भर की परेशानी की बात है लेकिन शुरू मे कह दे तो अच्छा रहता है है ना. "वो गमभीरता से बोले.

मैं चुप सहमी उनकी बात का इंतजार करती रही. और वो इंतजार करते रहे. थोड़ी देर बाद बोले,

"पहली बात तो ये तुम बहुत अच्छी हो. खैर इसमे परेशानी की कोई बात नही परेशानी ये है कि तू मुझे बहुत बहुत बहुत बहुत अच्छी लगती है. जबसे तुम्हे देखा है बस मन करता है कि.. तुम मेरे पास रहो मैं तुम्हे देखता रहू, और तुम्हारी ज़ुल्फो से खेलता रहू (मेरे खुले लंबे गेसुओ मे उंगली डाल के वो रुके,

थोड़ा और हिम्मत जुटाई और बोले), तुम्हारे होंठो को चूमता रहू, तुम्हारे इन रसीले उरोजो को"(आगे बोलने की हिम्मत वो नही जुटा पाए लेकिन उनके हाथो ने मेरी 'चुनमुनिया' को दबोच के बता दिया. ) वो कुछ देर तक मुझे चूमते रहे और कस के मेरे कुछ सहलाते रहे, फिर मुझेसे अचानक उन्होने पूछा,

"तुम्हे मालूम है मेरी उमर.. "

"हाँ 23 साल होने वाली है"

उन्होने मेरे सामने अपना दाया हाथ बढ़ा के बोले,

"ज़रा मेरी जीवन रेखा देखो"मैं तो एक दम घबडा गई, हे क्या बात है. मम्मी की तरह मेने भी देव पीर मना डाले. और जब मेने हिम्मत कर हाथ पे नज़र डाली,

खूब लंबी, मोटी और बिना किसी कट पीट के स्वस्थ और लंबे जीवन की पाइचायक..

"ठीक तो है मैने चिंतित स्वर मे बोला.

"यही तो परेशानी है मेरी आयु बहुत लंबी है और मुझे कोई रोग सॉक नही होने वाला है. "

"ये तो अच्छी बात है.. आप को मेरी उमर लग जाय. आप को क्यो कुछ हो. "उन्हे बाहों मे भर के मैं बोली.

"नही परेशानी की बात तुम्हारे लिए है. तुम इतनी अच्छी लगती हो कि तुम्हे प्यार किए बिना मेरा मन नही मानता. एक बार करता हू तो मन करता है कि फिर दुबारा. मैं कम से कम 73 साल तक यानी अगले 50 साल तक तो तुम्हे इसी तरह प्यार करूँगा. अगर साल मे 300 दिन जोड़ो, 5 दिन तुम्हारी मासिक छुट्टी के काट के भी, तो अगले 50 साल मे पंद्रह हज़ार दिन"और ये कहते हुए उनके हाथ कस कस के मेरे जोबन का मर्दन कर रहे थे और उनकी एक उंगली भी मेरी योनि मे घचघाच जा रही थी, उनका इरादा बताते हुए. फिर हल्के से मेरे रसीले होंठो को काटते हुए उन्होने अपनी बात जारी रखी, तो अगर मैं 4 बार रोज करूँ तो साथ हज़ार बार यानी कम से कम पचास हज़ार बार, ये तुम्हारे अंदर"

"अपना अब फिर से पूरी तरह उत्थित लिंग को मेरी नितंबो के बीच उचकाते उन्होने बात पूरी की, "तो कम से कम पचास हज़ार बार तो मैं तुम्हे कच कचा के प्यार करूँगा ही. "झूठ झूठ झूठे कही के. मेने सोचा. चार बार कैसे, पिछले 24 घंटे मे 7 बार ये 'कर'चुके है और ये तो अभी शुरुआत है. तो फिर 50 हज़ार बार कैसे, एक लाख से भी ज़्यादा होगा. लेकिन मुझे क्या, मेरी भी तो यही हालत है,. एक बार वो करते है तो फिर मन करता है दुबारा लेकिन ये बात मैं कैसे कहती, मेने उसी तरह कहा जिस तरह कह सकती थी. अपनी देह की भाषा मे.

मेने कस के अपने नितंबो से उनके ठोकर दे रहे खड़े, फनफंाते लिंग को दबा के इशारा किया कि मैं तैयार हू. मेरे योनि ने खुद को उनकी उंगली पर सिकोड लिया और अपने मादक उरोज उनके चौड़े सीने से दबाते, कस के मेने उनके होंठो पे एक चुम्मि ले ली. मुझे कस के चूम के बोले,

raj..
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Re: कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और हनीमून

Unread post by raj.. » 06 Nov 2014 08:27

"आई लव यू"(24 घंटे लग गये उन्हे ये कहने मे, आलसी) लेकिन अब धीरे धीरे मेरी ज़ुबान भी बोलने लगी थी.

"मी टू"मेने कहा.

एक बार फिर उन्हे चूम के मैं हल्के से बोली,

"मुझे भी कुछ कहना है, "

मेरे अधरो को आज़ाद कर मेरे पलको को चूम के वो बोले, बोलो ना.

"तुम्हारे मेरा मतलब आप"

"उंह उंह, तुम ही बोलो ना, तुम्हारे मूह से तुम सुनना अच्छा लगता है. "उन्हे मुझे कच कचा के चूमने का एक बहाना मिल गया था. जब मेरे होंठ आज़ाद हुए तो मैं फिर उन्हे कस के बाहो मे भर के हिचकिचाती, अदा से बोली,

"मुझे भी दो बाते कहानी है. एक तो ये जो लड़का है ना, "उनकी नाक पकड़ के मैं बोली, "मुझे बहुत बहुत अच्छा लगता है. बहुत बहुत तो पहली बात ये कि आप उसे कभी किसी चीज़ के लिए मना मत करिएगा, ये मेरा बहुत प्यारा सा चोने सा, सोने सोने, ये जो भी मुझेसे कहना चाहे माँगना चाहे, लेना चाहे, करना चाहे,

आंड आइ मीन एनितिंग एनितिंग, आप इसे करने दीजिएगा, मन भर. प्लीज़ प्रॉमिस मी. "

"प्रॉमिस लेकिन डू यू रियली मीन एनितिंग. "वो बोले.

"हाँ, आइ मीन एनितिंग. "मैं भी हंस के बोली. और हाँ एक बात और जो इस लड़के को अच्छा लगता है न वो मुझे भी बहुत अच्छा लगता है. "

"एक बात और मुझे कहानी है, "कस के मुझे अपनी बाहो मे भींच के वो बोले,

"तुम जो चाहे कहो, जैसे कहो जो बात करने को कहो मुझे मंजूर है लेकिन मुझे ये चाहिए, तुम्हारे रसीले होंठ"मेरे होंठो को उंगली से छू के वो बोले. हाँ, ह्ल्के से बोली मैं. "और ये चाहिए तुम्हारे ये मस्त उरोज, "कस के मेरे उभारो को दबा के उन्होने माँगा. हाँ हाँ.. सिसक़ियो के साथ मेने हामी भरी. और तुम्हारे ये "मेरी बुरी तरह गीली हो चुकी योनि को दबोच के वो बोले( अभी भी थोड़ी हिचक उनमे बची थी जो चाह के भी वो नही बोल पा रहे थे, भाभी ने मुझे समझाया था कि कभी कभी लड़की को ही मर्द बनना पड़ता है, शरम दूर करने के लिए).

"हाँ हाँ मुझे मंजूर है बस दो बाते ये मेरे रसीले होंठ, मादक उरोज और मस्त योनि,

मेरी सारी देह, तन मन सब आप ही की है आप के लिए. बस आगे से आप दुबारा मत मांगिएगा, जब चाहे जैसे चाहे, जितनी बार चाहे. हाँ लेकिन अगर आप माँगेंगे तो इजाज़त खुल के मागनी पड़ेगी, ये वो नही चलेगा. ये वो बोलने का काम मेरा है. "

इतने खुला आमंत्रण देने मे मेरी सारी ताक़त और हिम्मत निकल गयी थी, और मैं अधलेति हो गयी, तकिये के सहारे. जो बात, जो आमंत्रण देने मे मेरी ज़ुबान झिझक रही थी, वो इशारा मेरी जाँघो ने खुल कर. अच्छी तरह फैल कर दे दिया.

वो मेरी खुली जाँघो के बीच थे और उनका मोटा कड़ा लिंग मेरे उत्तेजित कांप रहे भागोश्ठो के बीच,

मेरे पत्थर की तरह कड़े जोबन को पकड़ के वो बोले,

"थेल दू.. . "

ना की मुद्रा मे मेने सर हिलाया.

"पेल दू"वो मुस्करा के बोले.

"हाँ"मैं खुश हो के कस के मैं बोली और साथ मे मेने अपने नितंब भी उचका दिए.

फिर क्या था मेरे किशोर जवानी के उभारो को कस के मसलते, कुचलते, उन्होने वो करार धक्के दिए कि मेरी जान निकल गई, मस्ती से. उनका वो मोटा लिंग मेरी योनि मे इतनी तेज़ी से घुसा, मेरी योनि की गीली दीवालो को रगड़ता. थोड़ी देर तक इसी तरह डालने,घुसेड़ने के बाद उन्होने पैंतरा बदला. मेरे जोबन को अभी भी मुक्ति नही मिली,

लेकिन एक हाथ अब मेरे कमर पे था. मेने भी अब उन्हे अपनी बाहों मे भींच रखा था. मेरी दोनो टांगे भी उठ के उन के कमर के चारो ओर. जहाँ से उनका हाथ हटा था वो निपल अब उनके होंठो के बीच था और वो इतने कस कस के चूस रहे थे कि बड़ी देर तक वो इसी तरह थेलते रहे, पेलते रहे. उनका मोटा लिंग घचघाच,

घचघाच मेरी रसीली योनि के अंदर बाहर और वो भी गपगाप गपगाप उसे घोंट रही थी तभी उन्होने मुझे अपनी शक्तिशाली बाहो के सहारे पकड़ के मुझे उपर उठा लिया. और अब मैं उनकी गोद मेबैठी, मेरी जांघे पूरी तरह फैली, टांगे उनके कमर के चारो ओर कस के लिपटी और मेने बाहो मे उन्हे कस के जाकड़ रखा था.

लिंग अंदर योनि मे धंसा हुआ और मेरे कुछ कस कस के उनकी चौड़ी छाती से रगड़ खाते थोड़ी देर तक हम दोनो ऐसे ही बैठे रहे, फिर उन्होने मेरी कमर पकड़ के हौले हौले अंदर बाहर धक्के लगाने शुरू किए. मुझे लगा जैसे मस्त पुरवाई चल रही और मैं झूले पे बैठी, और वो झोते लगा रहे हो. मेने भी उनका साथ देने की कोशिश की लेकिन ज़ोर ज़ोर से धक्के नही लगा पा रही थी. फिर भी उनकी गोद मे बैठ के,

रति क्रिया का यह अनोखा स्वाद था. योनि के अंदर रगड़ के जिस तरह मोटा लिंग जा रहा था और साथ मे चुंबन, आलिंगन जोबन की रगड़ाई, मसालाई और अब धीरे धीरे मेरे कमर मे भी जोश आ रहा था. बहुत देर तक हम लोग इसी तरह प्यार करते रहे.

लेकिन वो तो नेवल खिलाड़ी थे. तरह तरह से रस लेने वाले उन्होने मुझे हल्के से बिस्तर पे अध लेटा कर दिया, वो उसी तरह बैठे, मेरी जांघे उसी तरह उनके चारो ओर लिपटी और वो सख़्त लिंग मेरी योनि मे धंसा हुआ. अब एक बार फिर उन्होने मुझे, मेरे भागोश्ठो को छेड़ना शुरू कर दिया. मैं सिहर रही थी, सिसक रही थी, कमर उचका रही थी, लेकिन उन्हे तॉजैसे मुझे तड़पाने मे ही मज़ा मिल रहा था. और अचानक उनकी उंगली ने मेरी क्लिट, मेरी भागनासा छू दी और फिर तो मुझे जैसे 440 वॉल्ट का करेंट लग गया हो. मस्ती से मैं सिहर रही थी, अपने नितंब पटक रही थी,

चीख रही थी पर वो उसका मोटा लिंग मुझे और मद होश बना रहा था. और वो, जैसे किसी शरारती बच्चे को कोल बेल का बटन हाथ लग जाए और वो उसे बार बार दबा कर तंग कर रहा हो. उनकी उंगलिया कभी मेरे निपल को फ्लिक करती और फिर आके मेरे क्लिट को छू देती, छेड़ देती, दबा देती. थोड़ी देर मे जब तक उनको इसका अहसास हुआ, मेरी देह पत्ते की तरह कांप रही थी. उन्होने मेरी कमर पकड़ के कस कस के ठेलना शुरू कर दिया. थोड़ी ही देर मे मैं झाड़ रही थी.

वो कुछ देर तक तो रुके रहे लेकिन फिर. उनके होंठो और उंगलियो ने, हल्के हल्के मुझे चूमना सहलाना शुरू किया. वो मस्ती मे बेहोश भी कर सकती थी और होश मे वापस भी ला सकती थी.

क्रमशः……………………….
शादी सुहागरात और हनीमून--23

gataank se aage…………………………………..

jab usne kas kas ke mere joban ko chuma, mere man sagar ke manoj uroj khil uthe.

bas mera man kar rah tha ab wo 'karem' aur ne tadapare unke hatho aur hontho ka sparsh pa ke mere pairo ki himmat jara jyada hi badh gayi thi. wo apne aap hi unke kmdho ke asan pe savar ho gaye. pahale bichuye ki jhanekar , fir paral ki jhanek aur thodi der me meri puri deh se sangeet jhairaane laga tha. jab usne meri kalai pakadi to chudiyo ki chur mur aur chumma lena sath,

jhumar ka jhanejhane, har ke hilane ki avaj bhi isame shamil ho gayi. aur jab vah meri kamar utha ke dhakka deta to meri karadhani ki run jhun bhi isame shamil ho jati. aur sirf mere bichuye, paral, karadhan, chudiya, jhumar aur har hi nahijab wo mere nitambo ko pakad ke kas ke, lagabhag puri tarah bahar nikal ke dhakka deta, aur uska mota sakht ling meri kasi, kishor, 24 ghante pahale tak akshhat yoni me use kas kas ke ragadate, failate ghusatato meri chikh nikal jati. kabhi chikh kabhi sisakiya, kabhi uh kabhi ahameri deh ka sangeet lagatar. lag raha tha bahut dino se pade hue sitar ko kisine utha liya ho aur use ched diya ho. aaj main bhi sharmate huye hi sahi, uske sur me sur milawne ki koshish kar rahi thi. wo mukhade pe to main amtare pe. aur wo bhi kabhi drut to kabhi vilambit, kabhi mere rasile joban ko pakad ke dabate sahalate,

kuchalate masalate, kas kas ke teji se dhakke lagate, meri chikho aur siskiyo ki paravah kiye bina aur kabhi khub dhire, dhire mere yoni ke andar sahalate wo ghusata aur maje se meri jaan nikal jati. sach me isase bada sukh koyi nahi ho sakathias sab kuch bhul ke. aur aaj wo bhikabhi meri kamar pakad ke, kabhi kalai tham ke, kabhi kas ke nitambo ko pakad ke aur kabhi kas kas ke mere mad mast rasile kishor ubhaaro ka ras lete. aur jab unhe lagata ki sangeet apne shirshh pe pahunch raha hai to thodi der kamar ko aram deuneke honth aur ungaliya morcha smhal lete. kabhi wo mere rasile hontho, galo ko chumate, choosate aur kabhi kach kacha ke kaat lete. aur unke hath jo is ke liye n jane kab se bhukhe the, mere kishor joban sahalate, pyar karte,

use kas kas ke daba dete, masal dete, mere kade khade chuchuk pinch kar dete. aur itane der me hi main kabhi apne nitambo ko uchaka ke, kabhi kas ke unhe apni or khinch ke kabhi unke kmdho me nekhun gada ke ishara karati aur hamare deh sangeet ki sarita fir se bahane lagati. bahut der tak isi tarah sukh lena ke baad kab ham kinere ki or pahunchane vale the to dhire dhire bajane vale sur tej ho gaye jhala bajane laga, der tak aur jab ham jhade bhi to sath sath der tak har 'bund' main apne andar mahsus karati rahi. meri deh itani shithil pad gayibahut der tak ham dono ek dusari ki baaho me lipate pade rahe.

kuch der baad unhone mujhe sahara deke uthaya aur bistar ke sirahane ke sahare adh leta baitha diya. aaj mujhe isaki fikar nahi thi ki meri deh rajayi se dhaki nahi hai, ya meri jaangho ke beech mere unke ras ki bunde abhi tak bah rahi hai.

thodi der tak ham aise hi baithe rahe fir achanek unhe kuch yaad aya aur unhone palmg ki side tebal semeri ammkhe unhone band kara di thi. jab mene ankhe kholi to khushi se mera man bhar aya.. kitane pyara kundan ka set, bahut hi intriket minekari,

dayammd ke sath imerald, rubi aur sab mor ki dijain ke, har, taps, anguthi, jadau kmgan chitaki chandani me wo aur bhi achche lag rahe the. har to unhone usi samay pahane diya. mare khushi ke mene unhe apni baaho ka har pahane diya aur kas kas ke chum liya. kitani achchi pasand hai apaki, main bol padi.

"tabhi to tumhe pasand kiya. "wo hans ke bole.

"dhatt" main kya bolati.

kas ke unhone mujhe bhi apni baho me baandh liya aur kas kas ke meri palako, hontho ko chumate hue bole,

"mujhe tumase kuch kahane hai.. "

"mujhe bhi kuch kahane hai"main bhi halke se chumati boli.

"pahale aap. "

"pahale aap. "

"pahale aap. pahale aap kahate kahi gadi ne chut jay to chalo main hi bolata hu. "wo bole. tumhari do buraiya bura to nahi manogipahale main saham raha tha ki.. lekin ab ham apas me ghul mil gaye hai to agar tum kaho. "wo bole.

"boliy ne.. "mene kah to diya. kaun si baat, main ekadam saham gayi thi.

"tumhare liye jindagi bhar ki pareshani ki baat hai lekin shuru me kah de to achcha rahata hai hai ne. "wo gmbhirata se bole.

main chup sahami unki baat ka intajar karati rahi. aur wo intajar karte rahe. thodi der baad bole,

"pahali baat to ye tum bahut achchi ho. khair isame pareshani ki koyi baat nahi pareshani ye hai ki tu mujhe bahut bahut bahut bahut achchi lagati hai. jabase tumhe dekha hai bas man karata hai ki.. tum mere paas raho main tumhe dekhata rahu, aur tumhari julfo se khelata rahu (mere khule lambe gesuo me ungali daal ke wo ruke,

thoda aur himmat jutayi aur bole), tumhare hontho ko chumata rahu, tumhare in rasile urojo ko"(age bolane ki himmat wo nahi juta pare lekin unke hatho ne meri 'chunmuniya' ko daboch ke bata diya. ) wo kuch der tak mujhe chumate rahe aur kas ke mere kuch sahalate rahe, fir mujhese achanek unhone poocha,

"tume malum hai meri umar.. "

"ha 23 saal hone vali hai"

unhone mere saamne apane daya hath badha ke bole,

"jara meri jivan rekha dekho"main to ek dam ghabada gai, he kya baat hai. mammi ki tarah mene bhi dev pir maan dale. aur jab mene himmat kar hath pe najar dali,

khub lambi, moti aur bina kisi kaat pit ke svasth aur lambe jivan ki paaichayak..

"theek to haimene chintit svar me bola.

"yahi to pareshani haimeri ayu bahut lambi hai aur mujhe koi rog sok nahi hone vala hai. "

"ye to achchi baat hai.. ap ko meri umar lag jay. aap ko kyo kuch ho. "unhe baho me bhar ke main boli.

"nahi pareshani ki baat tumhare liye hai. tum itani achchi lagati ho ki tumhe pyar kiye bina mera man nahi maneta. ek baar karata hu to man karata hai ki firadubara. main kam se kam 73 saal tak yani agale 50 saal tak to tumhe isi tarah pyar karunga. agar saal me 300 din jodo, 5 din tumhari masik chutti ke kaat ke bhi, to agale 50 saal me pandrah hajar din"aur ye kahate hue unke hath kas kas ke mere joban ka mardan kar rahe the aur unki ek ungali bhi meri yoni me ghachaghach ja rahi thi, unka irada batate hue. fir halke se mere rasile hontho ko katate hue unhone apni baat jari rakhi, to agar main 4 baar roj karum to sath hajar baar yani kam se kam pachas hajar bar, ye tumhare andar"

"apne ab fir se puri tarah utthit ling ko meri nitambo ke beech uchakate unhone baat puri ki, "to kam se kam pachas hajar baar to main tumhe kach kacha ke pyar karunga hi. "jhuth jhuth jhuthe kahi ke. mene socha. char baar kaise, pichale 24 ghante me 7 baar ye 'kar'chuke hai aur ye to abhi shuruat hai. to fir 50 hajar baar kaise, ek lakh se bhi jyada hoga. lekin mujhe kya, meri bhi to yahi halat hai,. ek baar wo karte hai to fir man karata hai dubara lekin ye baat main kaise kahati, mene usi tarah kaha jis tarah kah sakati thi. apni deh ki bhashha me.

mene kas ke apne nitambo se unke thokar de rahe khade, fanefnete ling ko daba ke ishara kiya ki main taiyaar hu. mere yoni ne khud ko unki ungali par sikod liya aur apne madak uroj unke chaude sine se dabate, kas ke mene unke hontho pe ek chummi le li. mujhe kas ke chum ke bole,

"ai lav yu"(24 ghante lag gaye unhe ye kahane me, aalasi) lekin ab dhire dhire meri juban bhi bolane lagi thi.

"mi tu"mene kaha.

ek baar fir unhe chum ke main halke se boli,

"mujhe bhi kuch kahane hai, "

mere adharo ko ajad kar mere palako ko chum ke wo bole, bolo ne.

"tumhare mera matalab aap"

"umh umh, tum hi bolo ne, tumhare muh se tum sunene achcha lagata hai. "unhe mujhe kach kacha ke chumane ka ek bahane mil gaya tha. jab mere honth ajad huye to main fir unhe kas ke baaho me bhar ke hichakichati, ada se boli,

"mujhe bhi do baate kahani hai. ek to ye jo ladaka hai ne, "unki nek pakad ke main boli, "mujhe bahut bahut achcha lagata hai. bahut bahutato pahali baat ye ki aap use kabhi kisi cheej ke liye mane mat kariyega, ye mera bahut pyara sa chone sa, sone sone, ye jo bhi mujhese kahane chahe mangane chahe, lena chahe, karane chahe,

and I mean anything anything, aap ise karna dijiyega, man bhar. please promise me. "

"promise lekin do you really mean anything. "wo bole.

"ha, I mean anything. "main bhi hans ke boli. aur ha ek baat aur jo is ladake ko achcha lagata hai n wo mujhe bhi bahut achcha lagata hai. "

"ek baat aur mujhe kahani hai, "kas ke mujhe apni baaho me bhinch ke wo bole,

"tum jo chahe kaho, jaise kaho jo baat karane ko kaho mujhe mmjur hai lekin mujhe ye chahiye, tumhare rasile honth"mere hontho ko ungali se chu ke wo bole. ha, hlke se boli main. "aur ye chahiye tumhare ye mast uroj, "kas ke mere ubhaaro ko daba ke unhone maanga. ha ha.. sisakiyo ke sath mene hami bhari. aur tumhare ye "meri buri tarah gili ho chuki yoni ko daboch ke wo bole( abhi bhi thodi hichak uneme bachi thi jo chah ke bhi wo nahi bol pa rahe the, bhabhi ne mujhe samajhaya tha ki kabhi kabhi ladaki ko hi mard banane padata hai, sharam dur karane ke liye).

"ha ha mujhe mmjur hai bas do baateye mere rasile honth, madak uroj aur mast yoni,

meri sari deh, tan man sab aap hi ki hai aap ke liye. bas age se aap dubara mat mangiyega, jab chahe jaise chahe, jitani baar chahe. m ha lekin agar aap mangenge to ijajat khul ke magani padegi, ye wo nahi chalega. ye wo bolane ka kaam mera hai. "

itane khula amantran dene me meri sari takat aur himmat nikal gayi thi, aur main adhaleti ho gayi, takiye ke sahare. jo baat, jo amantran dene me meri juban jhijhak rahi thi, wo ishara meri jaangho ne khul kar. achchi tarah fail kar de diya.

wo meri khuli jaangho ke beech the aur unka mota kada ling mere uttejit kamp rahe bhagoshhtho ke beech,

mere patthar ki tarah kade joban ko pakad ke wo bol,

"thel du.. . "

ne ki mudra me mene sar hilaya.

"pel du"wo muskara ke bole.

"ha"main khush ho ke kas ke main boli aur sath me mene apne nitamb bhi uchaka diye.

fir kya tha mere kishor javani ke ubhaaro ko kas ke masalate, kuchalate, unhone wo karare dhakke diye ki meri jaan nikal gai, masti se. unka wo mota ling meri yoni me itani teji se ghusa, meri yoni ki gili divalo ko ragadata. thodi der tak isi tarah dalane,

ghusedane ke baad unhone paintara badala. mere joban ko abhi bhi mukti nahi mili,

lekin ek hath ab mere kamar pe tha. mene bhi ab unhe apni baho me bhinch rakha tha. meri dono taange bhi uth ke un ke kamar ke charo or. jaha se unka hath hata tha wo nipal ab unke hontho ke beech tha aur wo itane kas kas ke choos rahe the ki badi der tak wo isi tarah thelate rahe, pelate rahe. unka mota ling ghachaghach,

ghachaghach meri rasili yoni ke andar bahar aur wo bhi gapagap gapagap use ghot rahi thi tabhi unhone mujhe apni shaktishali baaho ke sahare pakad ke mujhe upar utha liya. aur ab main unki god mebaithi, meri jaanghe puri tarah faili, taange unke kamar ke charo or kas ke lipati aur mene baaho me unhe kas ke jakad rakha tha.

ling andar yoni me dhansa hua aur mere kuch kas kas ke unki chaudi chati se ragad khate thodi der tak ham dono aise hi baithe rahe, fir unhone meri kamar pakad ke haule haule andar bahar dhakke lagane shuru kiye. mujhe laga jaise mast puravai chal rahi aur main jhule pe baithi, aur wo jhote laga rahe ho. mene bhi unka sath dene ki koshish ki lekin jor jor se dhakke nahi laga pa rahi thi. fir bhi unki god me baith ke,

rati kriya ka yah anokha svad tha. yoni ke andar ragad ke jis tarah mota ling ja raha tha aur sath me chumban, alingan joban ki ragadayi, masalayi aur ab dhire dhire mere kamar me bhi josh aa raha tha. bahut der tak ham log isi tarah pyar karte rahe.

lekin wo to neval khilaadi the. tarah tarah se ras lena vale unhone mujhe halke se bistar pe adh leta kar diya, wo usi tarah baithe, meri jaanghe usi tarah unke charo or lipati aur wo sakht ling meri yoni me dhansa hua. ab ek baar fir unhone mujhe, mere bhagoshhtho ko chedane shuru kar diya. main sihar rahi thi, sisak rahi thi, kamar uchaka rahi thi, lekin unhe tojaise mujhe tadapane me hi maja mil raha tha. aur achanek unki ungali ne meri clit, meri bhaganesa chu di aur fir to mujhe jaise 440 volt ka karemt lag gaya ho. masti se main sihar rahi thi, apne nitamb patak rahi thi,

chikh rahi thi par vousaka mota ling mujhe aur mad hosh bane raha tha. aur wo, jaise kisi shararati bachche ko kal bel ka batan hath lag jaye aur wo use baar baar daba karatang kar raha ho. unki ungaliya kabhi mere nipal ko flik karati aur fir ake mere clit ko chu deti, ched deti, daba deti. thodi der me jab tak unko isaka ahasas hua, meri deh patte ki tarah kamp rahi thi. unhone meri kamar pakad ke kas kas ke thelane shuru kar diya. thodi hi der me main jhad rahi thi.

wo kuch der tak to ruke rahe lekin fir. unke hontho aur ungaliyo ne, halke halke mujhe chumane sahalawne shuru kiya. wo masti me behosh bhi kar sakati thi aur hosh me vapas bhi la sakati thi.

kramashah……………………….