xossip hindi - गाँव के रंग सास, ससुर, और बहु के संग

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xossip hindi - गाँव के रंग सास, ससुर, और बहु के संग

Unread post by sexy » 06 May 2017 19:26

गाँव के रंग सास, ससुर, और बहु के संग - 4


लेखिका: तृष्णा


भाभी की अगली चिट्ठी अगले ही दिन आ गयी. आजकल मेरे जीवन मे यही एक मनोरंजन का साधन था. अपने कमरे मे छुपकर मैं उसकी चिट्ठी पढ़ने लगी.

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मेरी प्यारी वीणा,

आशा है तुम्हे मेरी चिट्ठियां पढ़ने मे बहुत मज़ा आ रहा है. मुझे तो लिखने मे बहुत ही मज़ा आता है.

कल सुबह तो गज़ब ही हो गया. जिस बात की हम सब ने सिर्फ़ योजना बनाई थी वह सफल हो गयी. अब लगता है हमारे बाकी सब कर्यक्रम आसानी से पूरे होने वाले हैं!

नाश्ते के बाद रोज़ की तरह गुलाबी गरम पानी लेकर तुम्हारे बलराम भैया के कमरे मे गयी. उसने बहुत प्यार से उनका पाँव गीले कपड़े से सेंका.

हैरत की बात यह है की तुम्हारे भैया ने गुलाबी का बलात्कार करने की कोशिश की थी और अब मौका पाते ही उसे जगह जगह पर हाथ लगाते हैं. पर गुलाबी फिर भी उनके पास जाती है उनकी सेवा करने के लिये. मेरे समझाने का शायद कुछ असर हुआ है क्योंकि आज जब मैं दोनो को बाहर से देख रही थी, गुलाबी उनसे काफ़ी खुलकर बात कर रही थी.

"गुलाबी, बहुत सुन्दर लग रही है आज तु?" मेरे उन्होने कहा.
"नही बड़े भैया, हम तो एक नौकरानी हैं." गुलाबी शरमाकर बोली.
"तो क्या नौकरानी लोग सुन्दर नही होते?" उन्होने कहा, "बहुत कटीली जवानी है तेरी, गुलाबी. क्या सुन्दर तेरी कजरारी आंखें हैं. और कितने लुभावने तेरे जोबन हैं. रामु तो तुझे पाकर बहुत खुश होगा?"
"बड़े भैया, ऊ तो न जाने कब से घर पर ही नही हैं." गुलाबी आंखे नीची कर के बोली.
"तो मरद के बिना कैसे सम्भालती है अपनी जवानी को तु?" मेरे पति ने पूछा.
"आप भी क्या कहते हैं, बड़े भैया!" गुलाबी बोली, पर उसकी आवाज़ मे एक कसक थी.

"हर औरत को मर्द की ज़रूरत होती है. है कि नही?" उन्होने पूछा.
"होती है, बड़े भैया." गुलाबी मुस्कुराकर बोली. लग रहा था उसकी लाज काफ़ी कम हो गयी थी.
"और मर्द को तो बहुत ही ज़रूरत होती है जवान औरत की."
"क्यों, भाभी जो हैं आपके लिये." गुलाबी बोली.
"कहाँ रे!" मेरे वह एक ठंडी आह भरकर बोले, "वह तो मेरे पास आती ही नही. जबसे आयी है मेरे साथ सोती भी नही."
"हाय राम! फिर आप कैसे सोते हैं?"
"नींद नही आती है, गुलाबी. 10-15 दिनों से किसी औरत के साथ मिलन नही हुआ है ना." मेरे वह बोले.

मेरे उनके मुंह से चुदाई के बातें सुनकर गुलाबी की आंखें चमक रही थी, पर वह कुछ नही बोली.

"क्यों, गुलाबी, तुझे रात को नींद आती है?" तुम्हारे भैया ने पूछा.
"नही आती." गुलाबी थोड़ा नखरा करके बोली.
"मैं तेरा दर्द समझ सकता हूँ." वह बोले, "तेरा भी तो किसी मर्द के साथ 10-15 दिनों से मिलन नही हुआ है."
"कैसी बातें करते हैं आप, बड़े भैया!" गुलाबी बोली, "हम काहे किसी और मरद के साथ मिलन करें? मेरा मरद तो आने ही वाला है."
"रामु तो जाने कब आयेगा. तु तब तक कैसे जियेगी?"

गुलाबी कुछ न बोली.

मेरे उन्होने कहा, "गुलाबी, मेरे पाँव का दर्द तो अब चला ही गया है. ज़रा मेरे कंधे दबा दे ना. बैठे-बैठे बहुत थक जाता हूँ."

गुलाबी आना-कानी किये बगैर तुम्हारे भैया के बगल मे जा बैठी और उनके दायें कंधे को अपने कोमल हाथों से दबाने लगी.

"आह! कितना अच्छा दबा रही है तु!" वह बोले, "ठीक से बैठ ना मेरे पास! मुझसे संकोच कर रही है क्या?"

गुलाबी और थोड़ा करीब होकर बैठी. अब तुम्हारे भैया ने अपना हाथ उसके जांघ पर रखा और घाघरे के ऊपर से सहलाने लगे.

जब गुलाबी ने कुछ नही कहा तो उन्होने उसके घाघरे के नीचे हाथ डालकर उसके नंगे जांघ को सहलाना शुरु किया. गुलाबी सिहर उठी, पर उसने कुछ नही कहा.

हिम्मत बढ़ाकर, तुम्हारे भैया ने दूसरे हाथ को गुलाबी के एक चूची पर रखा और कहा, "गुलाबी, जब कोई मरद तेरे जांघों को सहालत है तुझे मज़ा आता है?"

गुलाबी ने हाँ मे सर हिलाया और उनके कंधे को दबाती रही.

"और मैं जो तेरे जोबन को दबा रहा हूँ, तुझे मज़ा आ रहा है?" कहकर उन्होने गुलाबी के चूची को प्यार से दबाया.

गुलाबी गनगना उठी और उसने हाँ मे सर हिलाया.

मेरे वह समझ गये के लड़की अब पटने ही वाली है. अपना दायाँ हाथ गुलाबी के घाघरे के और अन्दर ले जाकर उन्होने उसके नंगी चूत को छुआ. गुलाबी का सारा शरीर कांप उठा.

धीरे धीरे वह गुलाबी की चूत को सहलाने लगे और बोले, "गुलाबी, तु चड्डी नही पहनती है?"
"नही, बड़े भैया. मेरा मरद मना करता है." गुलाबी अपनी उखड़ी सांसों के बीच बोली.
"क्यों? तेरा मरद तुझे कभी भी कहीं भी चोदता है क्या?"

उनकी अश्लील भाषा को नज़र-अंदाज़ करके गुलाबी ने हाँ मे सर हिलाया.

"कहाँ कहाँ चोदा है रे तुझे रामु ने?" उन्होने पूछा.

बायाँ हाथ चूची दबाये जा रहा था. दायाँ हाथ चूत सहलाये जा रहा था. मेरे उनका लौड़ा खड़ा हो गया था. वे आजकल लुंगी के नीचे चड्डी नही पहन रहे थे, इसलिये लौड़ा तम्बू बनाये खड़ा था.

"कमरे मे." गुलाबी बोली. फिर थोड़ा रुक कर बोली, "खेत मे भी."
"बहुत गरम औरत है रे तु, गुलाबी." मेरे वह बोले, "खेत मे भी चुदाई है? अच्छा यह बता, उस दिन जब मैने तुझे खेत मे प्यार किया था तब तु भाग क्यों गयी थी?"

गुलाबी सर झुकये बैठी रही. उसने कोई जवाब नही दिया.

मेरे उन्होने एक हाथ से अपना लौड़ा पकड़कर हिलाया और गुलाबी से बोले, "देख गुलाबी, तेरी जवानी ने मेरा क्या हाल कर दिया है."

गुलाबी ने पीछे मुड़कर उनके लुंगी मे ढके खड़े लन्ड को देखा और मुस्कुरा दी.

"हाथ लगा के देख ना." मेरे वह बोले, "डर मत."

गुलाबी ने एक कांपते हाथ से उनके लौड़े को पकड़ा और थोड़ा हिलाकर बोली, "बहुत मोटा है, बड़े भैया." उसकी आंखें वासना से लाल हो उठी थी. मेरे वह मज़े मे कसमसा रहे थे.

"तु रामु का लन्ड चूसती है?" उन्होने पूछा.
गुलाबी ने नही मे सर हिलाया.
"मेरा लन्ड चूसेगी?"
"नही, बड़े भैया." गुलाबी नखरा करके बोली. पर वह अपने छोटे से कोमल हाथ से तुम्हारे भैया के लन्ड को हिलाती रही. उसकी सांसें तेज चल रही थी और उसकी जवान चूचियां चोली मे ऊपर-नीचे हो रही थी.

तुम्हारे भैया बोले, "अच्छा ठीक है. तु मेरे पास आ."

गुलाबी उनकी तरफ़ मुड़कर बैठी तो उन्होने अपना हाथ उसकी चोली मे घुसा दिया और उसकी चूची को मसलने लगे. दूसरे हाथ से फिर उसकी चूत सहलाने लगे. गुलाबी आंखें बंद करके मज़ा ले रही थी. मैं हैरान थी कि मेरे समझाने से कितनी जल्दी यह लड़की पराये मर्द के चुदवाने को तैयार हो गयी थी.

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Unread post by sexy » 08 May 2017 05:26

"ब्रा नही पहनी तु?" तुम्हारे भैया ने गुलाबी से पूछा.
"नही बड़े भैया." गुलाबी ने कहा, "मेरा मरद मना करता है."
"ठीक कहता है रामु. चड्डी और ब्रा मत पहना कर." मेरे वह बोले, "चूची दबाने और चोदने मे आराम होता है. सुन, एक दो दिन मे मैं ठीक हो जाऊंगा और खेत मे जाने लगुंगा. तु मुझे खाना देने आयेगी खेत मे?"
"हाँ, बड़े भैया. हम तो हमेसा आपको खाना देने आते हैं." गुलाबी ने कहा.
"जब तु आयेगी ना, तब तुझे बहुत प्यार से खेत मे चोदुंगा." उन्होने कहा. "वहाँ कोई देखेगा भी नही. बहुत मज़ा पायेगी."

गुलाबी ने कोई जवाब नही दिया तो मेरे वह बोले, "डरती है क्या? रामु तो घर पर है नही. जब तक वह ना आये मुझसे चुदवा के अपनी प्यास बुझा."
"नही, बड़े भैया. ई सब हमसे नही होगा." गुलाबी बोली और अचानक उठ खड़ी हुई.

"क्या हुआ गुलाबी! कहाँ जा रही है?" मेरे वह खीजकर बोले, "साली, अभी तो अपनी चूची दबवा कर मज़ा ले रही थी. अचानक सती-सावित्री होने का शौक कैसे पैदा हो गया?"
"हम सादी-सुदा औरत हैं." गुलाबी बोली, "भाभी हमको ई सब करने को नही कहतीं तो हम कभी नही करते."
"किसने कहा तुझे यह सब करने को?" मेरे उन्होने आश्चर्य से पूछा.

गुलाबी को अपनी गलती का एहसास हुआ तो उसने झेंपकर आंखें नीची कर ली. तुम्हारे भैया की आंखें हैरत से बड़ी बड़ी हो गयी थी. "मीना ने तुझे कहा तु मुझसे अपनी चूची दबवा?"

गुलाबी बिना जवाब दिये दौड़कर कमरे से बाहर निकल आयी. मेरे वह पीछे से बोले, "ठहर साली, जब अगली बार मेरे कमरे मे आयेगी तुझे तेरी भाभी के सामने पटककर चोदुंगा. तब तेरे पतिव्रता होने का नाटक खतम होगा. और तेरी भाभी को भी देख लूंगा. खुद तो मुझसे चुदवाती नही है. अब अपनी नौकरानी को भेजी है मेरा लन्ड खड़ा करने के लिये."

गुलाबी बाहर आयी तो मैने उसे पकड़ा. उसकी सांसें उखड़ी हुई थी, आंखें वासना से लाल थी. मुझे हैरत हुई वह बिना चुदाये बाहर आ कैसे गयी. मैं तो ऐसे हालत मे अपने आप को नही सम्भाल पाती.

"क्यों रे गुलाबी, क्या हुआ अन्दर?" मैने पूछा.
"भाभी, बड़े भैया फिर हमरे साथ जबरदस्ती कर रहे थे." गुलाबी बोली.
"तु झूठ कब से बोलने लगी रे?" मैने कहा, "मैने तो देखा तु मज़े से अपनी चूची दबवा रही थी और चूत सहलवा रही थी. तु तो उनका लौड़ा भी हिला रही थी."

गुलाबी बोली, "ऊ तो आप हमको बोली करने को इसलिये हम किये."
"और तुझे बिलकुल मज़ा नही आया?" मैने उंगली से उसके मुंह को ऊपर उठाकर पूछा.
"आया, भाभी." गुलाबी धीरे से बोली.
"बड़े भैया का लौड़ा कैस लगा रे?"
"बहुत बड़ा है, भाभी." गुलाबी बोली.
"रामु जितना है?" मैने पूछा.
"उनसे भी बड़ा है." गुलाबी बोली.
"हूं. तो सोच, जब तुझे रामु का लौड़े चूत मे लेना इतना अच्छा लगता है, तो उससे भी बड़ा लन्ड चूत मे लेगी तो कितना मज़ा आयेगा?" मैने पूछा.
"हमे नही पता."
"तो पता कर ले ना!" मैने कहा. "जैसे तेरे बड़े भैया बोले, तु जब उन्हे खाना देने खेत मे जायेगी तब उनसे वहाँ एक बार चुदवा लेना. बस एक बार. मैं कब कह रही हूँ तु उनकी रखैल बन जा!"

गुलाबी चुप रही तो मैने कहा, "ठीक है सोच के देख. बहुत मज़ा देते हैं तेरे बड़े भैया! तु मेरी फ़िकर मत करना. मैं बिलकुल बुरा नही मानुंगी क्योंकि मैं खुद पराये मरद से चुदवाती हूँ."

गुलाबी ने मेरी आंखों मे देखा. मैं मुस्कुरा रही थी. मुझे देखकर वह भी मुस्कुरा उठी और बोली, "भाभी, हम को किसन भैया को नास्ता देने खेत मे जाना है." बोलकर वह रसोई मे चली गयी.


मैं अपने पति देव के कमरे मे घुसी. मुझे देखते ही वह अपने खड़े लौड़े की तरफ़ इशारा करके बोले, "देख रही हो यह? 15 दिनों से ब्रह्मचारी बना बैठा हूँ. तुम्हे तो मुझ पर तरस ही नही आता."

मैने उनके पास जाकर बैठी और बोली, "ब्रह्मचारी और आप? मेरे पीछे आपने गुलाबी की इज़्ज़त लूटने की कोशिश की थी. जैसे मैं कुछ जानती ही नही."

सुनकर तुम्हारे भैया के चेहरे पर हवाईयां उड़ने लगी. "यह क्या कह रही हो तुम, मीना?"
"वही जो गुलाबी ने मुझे बताया." मैने जवाब दिया, "और जो मैने अपनी आंखों से देखा."
"तुमने सब देखा?" वह बोले. काफ़ी डरे लग रहे थे.
"हूं. मेरे पति देव अपनी नौकरानी पर इतने आशिक हैं मुझे पता नही था. बड़े प्यार से सहला रहे थे आप उसकी चूत को!"
"तुम गलत समझ रही हो, मीना!" तुम्हारे भैया बोले.
"इसमे गलत समझने का क्या है जी?" मैने पूछा, "जब एक आदमी खेत मे अपनी शादी-शुदा नौकरानी का बलात्कार करने की कोशिश करता है तो उसकी नीयत का साफ़ पता चल जाता है."

मेरे वह कुछ देर चुप बैठे रहे. उनका लौड़ा अब ढलकर लुंगी मे छुप गया था. फिर वह बोले, "तो फिर गुलाबी क्यों कह रही थी तुमने उसे मुझे से अपनी चूची मलवाने को भेजा है?"
"ठीक ही तो कह रही थी वह." मैने मचलकर कहा.
"तुमने...तुमने सच मे उसे बोला...के वह आकर...मुझसे..."
"हूं!"
"मगर क्यों?"
"ताकि वह थाने मे जाकर आपके ऊपर बलात्कार का केस ना ठोक दे!" मैने कहा. "आपका चरित्र कितना खराब है वह तो मैं समझ ही गयी हूँ. मेरे कहने से आप रुकने वाले तो हो नही. मौका मिलते ही बेचारी गुलाबी को कहीं पटककर चोद लोगे. रोना तो फिर मुझे पड़ेगा ना!"

तुम्हारे भैया को मेरी बात समझ मे नही आयी.

मैने कहा, "आपको गुलाबी को जबरदस्ती चोदना ना पड़े इसलिये उसे मैं आपके लिये पटा रही हूँ. पट जायेगी तो खुद ही चुदवा लेगी आपसे."

मेरे उनको अपने कानों पर विश्वास नही हुआ. "यह क्या कह रही तो तुम, मीना? एक पत्नी होकर तुम मेरे लिये गुलाबी को पटा रही हो?"
"तो क्या हुआ." मैने कहा, "गुलाबी को चोद लोगे तो क्या मुझे प्यार करना बंद कर दोगे?"
"नही, मीना! मैने तुम्हे प्यार करना कभी बंद नही करुंगा." वह बहुत गंभीरता से बोले.
"मै जानती हूँ. और मैं यह भी देख रही हूँ कि गुलाबी पर आपका कितना दिल आ गया है. वह है ही ऐसी चीज़ - इतनी जवान, भोली, और मनचली. काफ़ी सुन्दर है और उसकी चूचियां भी बहुत कसी कसी हैं. किसी भी मर्द का मन करेगा उसे चोदने का."
"मीना, तुम मेरे लिया इतना बड़ा त्याग करने को तैयार हो?" उन्होने पूछा.
"अपने पति के सुख का खयाल मैं नही रखूंगी तो कौन रखेगा?" मैने हंसकर कहा और उनके लुंगी मे हाथ डालकर उनके लौड़े को हिलाने लगी. लन्ड फिर से खड़ा हो गया.

"तुम कितनी अच्छी हो, मीना!" वह बोले और मेरी पीठ को सहलाने लगे.
"आप भी पति कुछ बुरे नही हैं!" मैने कहा, "मुझे विश्वास है कि किसी दिन मुझसे कोई भूल-चूक हो गयी, तो आप भी मेरे लिये ऐसा ही त्याग खुशी खुशी करेंगे."
"कैसे भूल-चूक, मीना?" वह सतर्क होकर बोले.
"जैसी भूल-चूक आप गुलाबी के साथ कर रहे हैं." मैने ने आंख मारकर कहा.
"कैसी बातें करती हो, तुम!"
"क्यों, मैं कोई भूल-चूक नही कर सकती क्या?" मैने पूछा, "मैं एक जवान औरत हूँ. देखने मे बुरी भी नही हूँ. और आपको तो पता है मुझमे चुदाई की भूख कितनी ज़्यादा है. अगर मैं किसी और मर्द से चुदवा बैठूं, तो आप क्या मुझे प्यार करना बंद कर देंगे?"

तुम्हारे भैया मेरी बात सुनकर गनगना उठे. मेरे हाथ को पकड़कर अपने लन्ड पर चलाने लगे और छत की तरफ़ देखते हुए कल्पनाओं मे खो गये. शायद कल्पना मे मुझे किसी और मर्द के साथ चुदाई करते देख रहे थे.

कुछ देर बाद वह बोले, "नही मीना, तुम चाहे कोई भी गलती करो, मैं तुम्हे प्यार करना बंद नही करुंगा."
"आप कितने अच्छे हैं!" मैने कहा और उनके होठों को चूम लिया. फिर मैं उठकर बाहर जाने लगी.

"हे भगवान, तुम फिर जाने लगी!" तुम्हारे भैया चिल्लाये.
"आपका पैर तो पहले ठीक हो जाये, फिर जितना चाहे चोद लेना मुझे!" मैने कहा और कमरे के बाहर निकल आयी.
"इन औरतों ने तो मेरा दिमाग ही खराब कर दिया है!" वह मेरे पीछे से चिल्लाये, "भगवान कसम! जो अगली औरत मेरे कमरे मे आयी उसे चोदे बिना नही छोड़ूंगा!"

वीणा, मज़े की बात यह है कि उनके कमरे मे जाने वाली अगली औरत तुम्हारी मामीजी थीं.

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Unread post by sexy » 08 May 2017 05:27

किशन सुबह-सुबह खेत मे काम देखने गया था. जब गुलाबी उसके लिये नाश्ता लेकर चली गयी, तब मुझसे अन्दर का हाल पूछकर सासुमाँ तुम्हारे भैया के कमरे मे गई.

जाते ही देखा कि उनका लौड़ा तो खड़ा होकर लहरा रहा है और वह हाथ से लौड़े को पकड़कर मुठ मार रहे हैं. अपनी माँ को देखते ही उन्होने खड़े लन्ड को अपनी लुंगी मे छुपा लिया और बोले, "माँ तुम, यहाँ!"

सासुमाँ ने हंसकर लुंगी मे खड़े उनके लन्ड को देखा और कहा, "तेरा यह हाल बहु ने किया है, या गुलाबी ने?"

माँ के सामने उनकी तो बोलती बंद हो गई. बस हाथ से अपने लन्ड तो दबाकर लुंगी मे छुपाने लगे.

"अरे बोल ना! इतना शरमा क्यों रहा है?" सासुमाँ बोली, "अब तु एक आदमी बन गया है. तुझसे मैं ऊंच-नीच, दुनिया-दारी की बातें कर सकती हूँ."

मेरे उन्होने थूक गटका और पूछा, "माँ, तुम्हे गुलाबी के बारे मे किसने बताया?"
"बहु ने, और किसने."
"मीना ने तुम्हे भी बता दिया?"
"तो क्या हुआ." सासुमाँ बोली, "मै कोई अनछुई कली हूँ क्या जो सुनकर शरम से मर जाऊंगी?"
"तो तुमने उसे क्या कहा?"
"मैने बहु को कहा कि मेरा बेटा जवान मर्द है और उसे भी और मर्दों की तरह औरत की भूख होती है." सासुमाँ बोली, "गुलाबी तुझे भा गयी है. इसमे अचरज की क्या बात है अगर तुने उसके साथ जबरदस्ती की है."

तुम्हारे भैया ने अपनी माँ के मुंह से कभी ऐसी बातें नही सुनी थी. हैरान होकर बोले, "फिर मीना ने क्या कहा?"
"बहु को कोई ऐतराज़ नही है." सासुमाँ बोली, "वह गुलाबी को समझा रही है तेरे साथ संबंध बनाने की लिये. बहुत अच्छी बहु है हमारी. लाखों मे एक है!"

सासुमाँ अब जाकर अपने बेटे के पास पलंग पर बैठ गई. उनका आंचल ढलक रहा था और ब्लाउज़ के ऊपर से उनके विशाल चूचियों के बीच की घाटी दिखाई दे रही थी. तुम्हारे भैया की हालत इतनी खराब थी कि अपनी माँ की चूचियों को भी नज़रों से पीये जा रहे थे.

"क्या देख रहा है रे?" सासुमाँ ने पूछा.
"नही, कुछ नही!" उन्होने कहा और अपनी नज़रें फेर ली.
"सच मे, बलराम, औरत के भूख ने तुझे पागल ही बना दिया है." सासुमाँ हंसकर बोली, "तु तो अपनी माँ पर भी बुरी नज़र डाल रहा है! ठहर, मैं बात करती हूँ बहु से. गुलाबी राज़ी हो या ना हो, बहु का तो फ़र्ज़ बनता है तेरी प्यास बुझाने का!"
"नही माँ!" उन्होने कहा, "ऐसी बात नही है."
"अरे इतना शरमा क्यों रहा है?" सासुमाँ बोली, "तु एक जवान मर्द है. औरत के जोबन पर तेरी नज़र जाना तो स्वभाविक ही है. चाहे वह जोबन मेरा ही क्यों न हो."

फिर अपने आंचल को और थोड़ा नीचे कर के बोली, "वैसे एक ज़माने मे तुने तो मेरे दूध से बहुत खेला है."
"तब मैं बच्चा था, माँ." तुम्हारे भैया बोले.
"हाँ, पर तु जब मेरे दूध से खेलता था और चूसता था, मुझे मज़ा तो आता ही था." सासुमाँ बोली, "तुझे तो पता है, औरत को उसके जोबन दबवाने मे बहुत मज़ा आता है. बहु कह रही थी तुने आज गुलाबी के जोबन से बहुत खेला है?"

तुम्हारे भैया फटी-फटी आंखों से देखते हुए अपनी माँ की बातों को सुन रहे थे. सासुमाँ की रसीली बातें सुनकर उनका लन्ड उनके हाथ के काबू मे ही नही रह रहा था.

"अरे बोल ना!" सासुमाँ हंसकर बोली, "बहुत कसे कसे लगते हैं गुलाबी के जोबन. बहुत मज़ा आया होगा तुझे? मर्दों की रुचि मैं खूब समझती हूँ. तेरे पिताजी को भी कसे कसे जोबन बहुत पसंद हैं. किसी ज़माने मे वह मेरे जोबन को पगालों की तरह दबाते थे. और मुझे स्वर्ग का मज़ा आता था. पर अब मुझमे गुलाबी और मीना बहु जैसी बात कहाँ! उनकी नज़र तो अब गुलाबी और मीना बहु के जवान गोलाइयों को नापती रहती हैं!"

अपनी माँ की बातों को सुनकर तुम्हारे भैया जैसे गनगना उठे. कांपती आवाज़ मे बोले, "माँ, तुम कैसी बातें कर रही हो आज?"
"अरे ऐसे ही मन हुआ तुझसे बातें करूं! तु भी अकेले बिस्तर पर पड़े पड़े ऊब जाता होगा." सासुमाँ बोली, "बहु और गुलाबी तो रसोई मे व्यस्त रहती हैं. तुझे समय कैसे देंगी? सोचा मैं ही तेरा मनोरंजन कर दूं!"

तुम्हारे भैया की हालत देखने लायक थी. 10-15 दिनों से उन्होने कोई चूत नही मारी थी. मैं और गुलाबी पास आकर चूची दबवा रहे थे, चूत मसलवा रहे थे, उनका लन्ड भी हिला रहे थे, पर अपनी चूत नही दे रहे थे. और यहाँ उनकी माँ आकर अपना आंचल गिराकर ऐसी रसीली बातें कर रही थी. उनकी सारी कोशिशों के बावजूद उनका लौड़ा काबू मे नही रह रहा था. वह अपने घुटने मोड़कर अपनी जांघों के बीच अपने खड़े लन्ड को दबा के रखने की कोशिश कर रहे थे.

उनके दयनीय हालत को देखकर, सासुमाँ बोली, "अरे तु ऐसे क्यों पड़ा हुआ है? पेट मे दर्द है क्या?"
"नही माँ." वह बोले.
"तो सीधे होकर आराम से लेट ना!" सासुमाँ बोली और उनको पकड़कर सीधा करने लगी.
"नही, माँ, मैं ऐसे ही ठीक हूँ!" वह अपने जांघों मे अपने खड़े लन्ड को दबाये बोले.

तुम्हारे मामीजी ने अपने बेटे के लुंगी मे नज़र डाली और कहा, "अच्छा, तु इसकी वजह से शरमा रहा है! अरे मैने अपनी जवानी के दिनो मे ऐसे औज़ार बहुत देखे हैं!"
"क्या!" मेरे उनका मुंह खुला का खुला रह गया.
"क्यों मैं कभी जवान नही थी क्या?" सासुमाँ बोली.
"मेरा मतलब....तुमने कहा...तुमने ऐसे औज़र....बहुत देखे हैं..." वह बोले.
"हाँ देखे हैं ना...बहुत से देखे हैं. और उनसे खेला भी है." सासुमाँ बोली, "मै जवानी मे मीना बहु की तरह बहुत नटखट थी. अब तुझे क्या बताऊं, तु तो बेटा है मेरा, पर बहुत जी करता है काश उन दिनो के मज़े फिर से ले पाती."

कुछ देर के लिये सासुमाँ जैसे सपनों मे खो गयी. फिर अपने बेटे को बोली, "अरे तु अब भी वैसे ही पड़ा है? चल सीधे होकर लेट."

तुम्हारे भैया न चाहते हुए भी सीधे होकर लेट गये. अब उनका लौड़ा लुंगी को तम्बू बनाकर खड़ा हो गया.