बाबुल प्यारे compleet

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raj..
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Re: बाबुल प्यारे

Unread post by raj.. » 16 Oct 2014 05:20

गतान्क से आगे....................

मैं : आह.मेरे बापू.
बापू : ओह छ्हम्मो . मेरी जान..मेरे लौदे की भूखी.
मैं : मेरी जान.ले ले मेरी. मेरे हरामी बाप.आ.ओ.अपनी बेटी की ले रहा है. इतना मोटा डंडा है तेरा. करता रह अंदर बाहर.आगे.पीछे.फफफ्फ़.
बापू : आ.म.बेटी.तेरी चूत कितनीईई.मज़्ज़ेदार है.जितना मुलायम तेरा बदन है.उतनी ही टाइट तेरी चूत है.
मैं : आई.एम्म. टुक.टुक.लेता रह मेरी. आह.मेरी जान्न.मेरे बदन की मालिश तो बहुत करली.अब मेरे अंदर की मालिश भी करो. बापू.कब से आपके लौदे के लिए मर रही हूँ. बापू ने धक्के और तेज़ कर दिए.
मैं : आ.यह.और .और तेज़.और तेज़ डालो बापू.आआआअ..मेरा निकलने वाला है
बापू : उश. ईएश..एयेए.
मैं :आ..ह..म्‍म्माआ.. आआहह मैं पूरी मस्ती मैं.मेरा निकल गया.मुझे इतना मज़ा आज तक नहीं आया था.चूत-रूस निकलते समय मैं तो जन्नत में पहुच गयी थी..जब मेरा ऑर्गॅज़म ख़त्म हुआ तो बापू ने मेरी चूत से अपना लॉडा निकाल लिया.और मेरी चूत के ऊपर झाड़ दिया.उनका गरम गरम सीमेन का मेरी चूत और पेट पर गिरना बहुत अच्छा लगा. हम दोनो थक गये थे .इसलिए झाड़ते ही कुच्छ देर बाद सो गये.
सुबह मेरी आँख खुली तो बापू जाग चुके तह.उनके बाथरूम में नहाने की आवाज़ आ रही थी.मैं पूरी नंगी थी पर बापू मेरे ऊपर चादर डाल गये थे .मैने जल्दी से उठ कर कपड़े पहने और बापू के लिए नाश्ता बनाने लगी.मैने स्कर्ट और टाइट टॉप पहना था.घी ख़तम हो रहा तो मैं शेल्फ पे चढ़ गयी ड्रॉयर में से नया पॅकेट निकालने के लिए.मैं शेल्फ पे चढ़ के घी का पॅकेट ढूंड रही थी तभी बापू रसोई (किचन) में आ गये.
बापू : क्या हुआ.क्या ढूंड रही है.
मैं : बापू वो घी का पॅकेट नहीं मिल रहा था मैं शेल्फ पर खड़ी थी.बापू ज़मीन पर.हमारी शेल्फ इतनी ऊँची नहीं थी इसलिए.बापू का फेस मेरी हिप्स की हाइट तक था...मेरी स्कर्ट काफ़ी छोटी थी जिससे मेरी टांगे नंगी थी..बापू धीरे से मेरे पास आए और मेरी टाँगों पर हाथ फेरने लगे.मैं तो घी निकालने में बिज़ी थी. बापू ने अपना हाथ मेरी स्कर्ट के अंदर डाल लिया.और मेरी हिप्स को प्रेस करने लगे.मैने कुच्छ नहीं कहा.क्यूँ कहती. बापू स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी हिप्स पे किस करने लगे.उन्होने मेरी स्कर्ट हिप्स से ऊपर कर दी.मैने कछी नहीं पहनी थी.मेरी हिप्स पे किस करने लगे.
मैं : ऊ.बापू.
बापू : छ्हम्मो.कल रात तेरे कूल्हों का सेवन (टेस्ट) नहीं किया. बापू मेरे हिप्स/बट्स को जीभ से चाट-ने लगे....बापू शेल्फ पर मेरी टाँगों के बीच में बैठ गये और मेरी चूत पर जीभ मारने लगे.मेरे जिस्म में से एक करेंट सा दौड़ा.
मैं : उउउशश्.ऊ.बापू यह क्या कर रहे हो.
बापू : चुप कर.मुझे नाश्ता करने दे.
मैं : मेरी चूत का नाश्ता.उउउउम.और .चॅटो..एक बेटी नाश्ते में अपने बाप को अपनी चूत से ज़्यादा और क्या दे सकती है..एयाया.पेट भर के खाओ अपनी बेटी की चूत.ऊईए..हाय्य.मेरे पपिताजी..ख़ालो अपनी बेटी की जवान चूत.. उूुउउफफफफफफफफफफफ्फ़... इस्पे आपका ही तो नाम लिखा है.मेरी चूत में अपनी जीभ तो घुस्स्स्ाओ.ऊऊ. बापू मेरी चूत में अपने जीभ घुसा घुसा के चाट-ने लगे.
बापू : चल अब ज़मीन पर आ जा. मैं शेल्फ से उतार के ज़मीन पे आ गयी.बापू ज़मीन पर बैठ गये.मैने खड़े होकर टाँगें खोल ली.बापू ने बैठ कर मेरी टाँगों के बीच अपना मुँह (फेस) दे कर कहा.
बापू : चल अब अपने कूल्हे मेरी तरफ कर. मैने अपनी हिप्स बापू के फेस की तरफ कर दी

raj..
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Re: बाबुल प्यारे

Unread post by raj.. » 16 Oct 2014 05:21


बापू : मेरी जान अब तेरे कूल्हों को चखना है. घुटनों के बल हो जा मैं डॉगी स्टाइल में आ गयी जिस-से की मेरी हिप्स आसानी से खुल जाएँ....बापू ने मेरी दोनो हिप्स को पकड़ कर अलग करा.और मेरे हिप्स के बीच के भाग में जीभ मारने लगे...मेरी हिप्स के बीच में बाल हैं.वह उन बालों को भी चाट-ने लगे..धीरे धीरे वह मेरे पीछे का छेद (अशोल) चाट-ने लगे...
मैं : ऊवू.बापू.आइ .लव.यू..आह.कितना अच्छा लग रहा है.इस छेद के बारे में तो मैने खुद भी कभी नहीं सोचा.ऊ.अपनी जीभ डालो इसमें.अपनी बेटी के हर कोई छेद को भोग लो..
मैं : जानेमन आप ज़रा लेट जाओ..मैं आपके मूँह के ऊपर बैठ-ती हूँ बापू लेट गये और मैं बापू के मुँह के ऊपर पॉटी करने की पोज़िशन में बैठ गयी..मैने टीवी पर 69 पोज़िशन देखी थी..बापू मेरा अशोल चाट रहे थे.उसमें जीभ दे रहे थे .मैने बापू की लूँगी उतार दी.उन्होने कच्छा नहीं पहना था.शायद सोच कर आए थे कि अपनी जवान बेटी को फिरसे चोदना है..लूँगी उतार कर मैने बापू का कठोर मोटा लॉडा हाथ में के लिया...फिर थोडा झुक कर मैने लॉडा अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी...
बापू : आ..छ्हम्मो..यह टोन कहाँ से सीखा..यह तो तेरी मा नेभी आज तक नहीं किया
मैं : बापू सीखा कहीं नहीं.सोचा जब आप नाश्ता कर रहे हो तो मैं भी नाश्ता कर लू..जब मैं आपका डंडा चूस्ती हूँ तो आपको कैसा लगता है ?.
बापू : बहुत अच्छा लगता है..चूस्ती रह. मैं फिरसे बापू का लॉडा चूसने लगी और बापू मेरा पीछे का छेद...कुच्छ देर बाद
बापू : चल बेटी..चाटना और चूसना बहुत हो गया.अब घुसाने वाला काम किया जाए..चल अपने दोनो हाथों और घुटनो पर हो जा..घोड़ी (हॉर्स) बन..
मैं : क्यूँ मेरे प्यारे बाबुल.घुसाने के लिए घोड़ी बनने की क्या ज़रूरत है
बापू : तेरे पीछे के छेद में घुसाना है.
मैं : ओह बापू कहाँ कहाँ घुसाएगा.. मैं घोड़ी बन गयी...बापू ने अपना लॉडा मेरे पिछे के छेद पे रखा और धीरे धीरे अंदर करने लगे..मुझे दर्द हो रहा था पर मैं अब कुच्छ भी रोकना नहीं चाहती थी.इसलिए सोचा दर्द से लिया जाए.बापू ने पूरा लॉडा मेरी गंद मे डाल दिया..मैं दर्द से कर्राहा उठी.
मैं : ओह.मेरे गांडू बाप. क्या कर दिया यह..मेरी जान निकाल दी.ऊओ.उउईए.
बापू : मेरी जान थोडा सह ले. फिर बहुत मज़ा आएगा कल रात जैसे. फिर बापू अंदर बाहर अंदर बाहर करने लगे..मेरा दर्द भी कम हो गया
मैं : ऊऊओ. बापू.मारो मेरी .लेलो अपनी बेटी की..चोद दो मुझे.. आगे से भी. पीछे से भी.ऊपर से और नीचे से भी..आई.रात चूत ली थी.अब गंद लेलो.
बापू : साली. अपने बाप से मालिश करवाती है. तेल लगवाती है.. अपने बापू को अपना दूध पिलाती है. और अब अपनी गंद मरवाती है.. बेशरम तेरा बदन बहुत मखमली है. तेरा बाप तेरे जवान बदन का मज़ा लेकर रहेगा.

raj..
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Re: बाबुल प्यारे

Unread post by raj.. » 16 Oct 2014 05:22


मैं : तो मैं भी तो यही चाहती हूँ. आआ..मेरे बापू मेरे हर एक छेद में अपना मोटा डंडा घुसाएँ. मेरे छेदो को अपने डंडे से रोज़ साफ करें. एक दूसरे के बदन को रोज़ भोगें.
बापू : अफ तेरे यह बड़े बड़े गोरे कूल्हे. तेरी मीठी गंद..
मैं : ईईईई. पीछे का छेद ना होता तो कितना मज़ा अधूरा रह जाता. कितनी मीठी दर्द है अपने बाप से गंद मरवाने में. कुच्छ देर मेरी गंद मारने के बाद बापू ने गंद से निकाल कर लॉडा मेरी फुददी में डाल दिया और फिर शुरू हो गये.
मैं : अया.श.बापू.मेरा एक भी छेद ना छोड़-ना.
बापू : छ्हम्मो.मेरी जानेमन..मेरी प्यारी बेटी.. तेरा हर छेद माखन है. तेरा बदन भी माखन है
मैं : मेरे बेटी चोद बापू. मेरी जान..चोद दो अपनी जवान बेटी को.. लेलो इसकी. मारलो इसकी. बेरहम बन जाओ.बेशरम बन जाओ..
बापू : मेरी मस्त बेटी.रोज़ मुझे अपना दूध पिलाएगी ना.. मेरी मलाई खाएगी ना
मैं : बापू और तेज़. मैं निकालने वाली हूँ. और तेज़. एस.आआययययय मैं निकल गयी.. कुच्छ देर बाद बापू ने मेरी फुददी से लॉडा निकाला.और लॉडा मेरे मुँह के पास ले आए. मैने उनका लॉडा मुँह में डाल कर उनकी सारी मलाई खाली. अब मैं और बापू जब मम्मी नहीं होती तो घर में प्यार करते हैं. और जब मम्मी होती हैं तो खेत में. बापू को अब अप'नी बीवी में कोई दिलचस्पी नहीं रही थी. रह'ती भी कैसे उन्हें जो 16 साल की मस्त और जवान बेटी जो मिल गयी थी.
दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा अब आपसे बीदा चाहता हूँ फिर मिलेंगे एक मस्त कहानी के साथ
एंड