कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण

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कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण

Unread post by sexy » 23 Mar 2017 07:38

कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण

शाम के 6.30 बजे थे, मैने नामिता भाभी की डोर बेल बजाई, 2 मिनिट
के बाद दरवाजा खुला, दरवाजे मे भाभी खड़ी थी, मई तो उनको देखते
ही रहे गया, हल्के आसमानी कलर की सिफ्फ़ों की सारी पहेनी थी, उसपे
मॅचिंग लो कट ब्लाउस था, पल्लू तोड़ा साइड मे था. उनकी क्लीवेज लाइन
सफ़फ़ सफ़फ़ दिख रही थी. और दो बड़े बड़े पहाड़ सीधे खड़े थे, दोनो
पहाड़ो मे बिचवाली खाई बहुत ज़्यादा गहेरी थी, क्यो की उनके पहाड़
अम्म औरतो के मुक़ाबले कुछ ज़्यादा ही सामने उभरे हुए थे. (यह
उनका स्टाइल है, हुमेशा घर मे सारी का पल्लू शोल्डर पे क्लीवेज लाइन
से हटा के ही रखती है) मई तो पहेली ही नज़र मे घायल हो गया.

"अरे संजय तुम, आओ आओ, सुनीता ने (मेरी भाभी, गाओं वाली जो मेरी
नेबर है) बताया था की तुम आने वेल हो, मई तुम्हारा ही इंतजार कर
रही थी." भाभी ने मुझे अंदर बुलाया और मुझे अपने दोनो हतह से
पकड़ा और मेरे माथे को चूम लिया. भाभी की ये अदा मुझे बहुत आची
लगी. उंगी जिस्म की गर्माहत की खुसभू से तो मेरे टन बदन मे
ज़ुर्ज़हुरी सी दौड़ गयी.

भाभी ने मुझे पानी ला के दिया. और बोली, "मई भी अभी अभी बॅंक से
आई हून. अक्चा हुवा तुम जल्दी नही आए वरना इंतेजर करना पड़ता
मेरा. तुम थोड़ी देर बैठो तब तक मई चेंज करके आती हून, अगर
तुम्हे भी फ्रेश होना हो तो हो जाओ." भाभी ने मुझे बातरूम दिखाया.
उनके बेडरूम के बगल मे ही बातरूम था, एक डोर उनके बेडरूम मे
खुलता ता और एक हॉल मे. मई फ्रेश होके आया. बहभही चेंज करके आई
थी और हॉल मे ज़्ादू लगा रही थी. मई तो देखते ही रहे गया. बिल्कुल
फ्रीज़ हो गया. भाभी ने बहुत ही पतली पिंक कलर की निघट्य पहनी थी और
अंडर से ब्रा नही पहनी थी. वो ज़ुक के ज़्ादू लगा रही थी और उनके


मदमस्त चूंचियों का निघट्य के खुले गले से पूरा दर्शन मुझे हो
रहा था. मेरे लंड ने तो सलामी देना भी शुरू कर दिया. मेरा उनके घर
मे पहेला ही दिन था. और पहेली ही दिन मुझे इतनी खूबसूरती का दर्शन हो
गया. मई आज तक जिन औरतों को छोड़ा उन्हे याद करने लगा. नामिता
भाभी उन सभी मे बीस थी. भाभी ने मेरे तरफ देखा लेकिन मई तो होश
मे था ही नही, मेरी नज़र तो उनके चूंचियों पे ही टिकी थी. उन्होने मेरी
नज़र का पीछा किया तो पता चला की मई उनका सेकरीट पार्ट देख रहा हून.
तब उनके ध्यान मे आया की उन्होने तो हमेशा की तरहा ब्रा पहनी ही नही
है, अकटुली वो घर मे अकेली रहा करती थी तो गर्मी के दिन होने के कारण
घर मे ब्रा नही पहनती थी, और रोज की तरह अभी भी उन्होने ब्रा नही
पहनी, जब उनके ध्यान मे आया तो ज़्ादू छ्चोड़ के सीधी खड़ी हो गयी,
और मेरी और उनकी नज़र एक हो गयी. मई शर्मा गया और उन्होने एक
मुस्कुरहत दी और जल्दी से बेडरूम मे चली गयी. थोड़ी देर बाद वो
वापस आई तो मैने देखा की उन्होने ब्रा पहेनी हुवी थी. मैने फिर से
उनके बूब्स के तरफ देखा और मुस्कुरा दिया मेरी नज़र और मुस्कुरहत
का मतल्ब वो समझ गयी और वो भी मुस्कुरा दिया.

भाभी ने खाना बनाया, मई हॉल मे टीवी देख रहा था. भाभी मेरे
पास आई फिर हुँने थोड़ी देर तक बाते की, फिर ओन्ोने कहा "संजय तुम टीवी
देखो तब तक मैं नहा के आती हू. मुझे शँको खाने से पहले
नहाने की आदत है". भाभी ने कपबोर्ड से अपने कपड़े निकले और
सेंटर टेबल पे रख दिए फिर उन्होने सोप निकाला और नहाने चली गयी.
बातरूम से गुनगुनाने की आवज़ आ रही थी. भाभी की आवाज़ इतनी अच्छी तो
नही थी लेकिन उनकी आवाज़ मे प्यसस सफ़फ़ ज़ालकती थी. थोड़ी देर बाद शवर
बंद हो गया, 2 मिनिट बाद भाभी सीने से जाँघो के तोड़ा उपर टके क
बड़ा सा टवल लपेटे हुवे हॉल मे आई शायद वो फिर भूल गयी थी की मई
वाहा मौजूद हून, और हॉल मे लगे हुवे बड़े आईने के सामने खड़ी
हो के गाना गाते हुवे अपने अप को निहारने लगी. मेरा तो फ्यूज़ ही उडद गया.
उनके बड़ी बड़ी बाजुओ से पानी की बूंदे नीचे जा रही थी. गार्डेन से और
च्चती के उपरी हिस्से से आती हुवी बूंदे उनके दोनो सीधे खड़े पहाड़ो
के बीच वाली खाई मे समा रही थी. गोरी गोरी मांसल दूधिया जाँघो से
टपकती हुई पानी की बूंदे मानो मुझे इन्वाइट ही कर रही थी. एब्ब भाभी
गुनगुनाते हुवे पलटी, और पलटते हुवे उन्होने टवल का एक कोना हाथ
मे ले लिया और उसको वो नीच छ्चोड़ने ही वाली थी की उनकी नज़र मुझ पे पड़ी.
वो एकदम से रुक गयी. हतह मे टवल के दो कोने थे. ढीला हो जाने
के कारण एक साइड से टवल तोड़ा नीचे आ गया था, और उनकी यूयेसेस साइड की
चूंची 80% दिख रही थी, यहा तक की निपल के अप्पर वाला ब्राउन हिस्सा भी
नज़र आ रहा था. मेरी तो किस्मत ही खुल गयी थी. भाभी ने मेरी तरफ
देखा और जल्दी जल्दी सेंटर टेबल से कपड़े उठा लिया, मैने देखा की जल्दी
जल्दी मे वो ब्रा और पनटी तो वही छ्चोड़ के गयी है. वो बेडरूम मे
चली गयी. मई उठा और सेंटर टेबल से ब्रा और पनटी उठा ली. ब्रा को सोफे
की चेर के पीछे दल दिया, जिधेर से भाभी बेडरूम मे गयी थी, और
पनटी को बेडरूम के डोर के पास एक कोने मे दल दिया.

कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण

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Re: कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण part2

Unread post by sexy » 23 Mar 2017 07:40

कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण 2

भाभी को ब्रा और पनटी तो मिली नही, लेकिन वो ये बात मुझे कहने मे
हिचक रही थी, और तोड़ा शर्मा भी रही थी, क्यो की मई उनको काँसे कम
70% नंगी देख चुका था. एब्ब और नंगी हो के वो मेरे सामने अपने अप
को लूस कॅरक्टर साबित नही करना चाहती थी. वो सिर्फ़ निघट्य पहन के
ही हॉल मे आ गयी, जब उनकी और मेरी नज़र एक हुवी तो उन्होने एक बहुत ही
सेक्सी स्माइल दी, लेकिन यूयेसेस स्माइल मे तोड़ा शर्मिलपन भी था. और चुपचाप
बिना कुछ कहे वो सोफे के पास और टेबल के पास कुछ ढूनदने लगी.
मैने पूछा, "क्या ढूंड रही हो भाभी?"

"कुछ नही संजय, मेरे कुछ कपड़े थे,"

"लेकिन कपड़े तो अप ले गयी ना"

"हा लेकिन मुझे दूसरे कपड़े चाहिए थे"

उन्हे कुछ- मिला नही तो वो किचन की तरफ जाने लगी, तभी सोफे के चेर के
पास उनके पैर मे कुछ चुबा. उन्होने एक करहा ली
"आआहाआआआआआअ"

"क्या हुवा भाभी"

"कुछ नही, शहेड कुछ चुबा", फिर उन्होने नीचे से ब्रा उठाई, उनके
हाट मे ब्रा लटक रही थी और मई देख के हसने लगा, फिर उन्होने भी
मुस्कुरा दिया और ब्रा को पीछे छुपा लिया, मैने कहा, भाभी मिल गया ना
कपड़ा, फिर मैने उनके जाँघो के बिच देख के कहा "लगता है एक कपड़ा
बाकी है मिलने का?" उसपे वो उनकी हस्सी रोक नही पे और वो किचन मे
जाने लगी, मई बेडरूम की तरफ बड़ा, और हतह मे उनकी पनटी ले ली, मैने
अपने आँखो के कोने से देखा की भाभी किचन की डोर पे ही खड़ी हो के
मुझे देख रही है. मैने ऐसे शो किया की मुझे पता नही है की वो
देख रही है, फिर मैने उनकी पनटी को अपने नाक से लगा लिया और खुश्बू
का मज़ा लेने लगा, उनका मुँह तो खुला का खुला रहे गया, यह सूब देख
के, शायद मई इतनी जल्दी ये सब करूँगा ये उन्होने एक्सपेक्ट नही किया था.
उनकी पनटी मे हल्की सी उनके छूट के और पेशाब की मिलीजुली एक मादक
खुसबू के साथ साथ वॉशिंग पाउडर की खूबू आ रही थी, क्यो की पनटी
धूलि हुवी थी इश्स लिए उनकी छूट की खुसभू का पूरा मज़ा तो नही आया.
लेकिन मुझे बहुत अच्छा लगा. भाभी ने किचन से आवाज़ लगाई...

"संजयययययययी... क्या कर रहे हो..."

"कुछ नही भाभी.... बस अप का एक और कपड़ा मिल गया.... "



और मई अपने हतहो मे उनकी पनटी ले के किचन मे चला गया. उन्होने
देख के मुस्कुरा दिया और कहा, “बड़े नॉटी हो गये हो देवेर्जी.. लगता
है बहुत खेले हुए हो.”. उहोने देवेर्जी पे जो सेक्सी अंदाज़ मे ज़ोरे दिया तो
मेरे तो होश ही उडद गये.मैने कहा “भाभी अप मुझे संजय की बजाए
इसी स्टाइल मे देवेर्जी कहा करो जैसा की अभी कहा.” वो मेरे इश्स बात पे
हँसने लगी. बोली "ठीक है अगर तुम्हे पसंद है तो यही कहूँगी लेकिन
मुझे संजय बड़ा पसंद है."|
मैने कहा क्या पसंद है भाभी आपको???"

वो मेरे बात का मतलब समाज़ गयी, और कहा की "मुझे संजय कहेना
पसंद है, संज्ज़े बुद्धू."

पनटी अभी भी मेरे हाथ मे थी और एब्ब मैने उनको ध्यान से देखा
अप्पर से नीचे तक, उस निघट्य मे उनके बदन की सब गोलाई सॉफ दिख रही
थी.. उनकी चूंचियो को ब्रा की ज़रूरत ही नही थी.. निघट्य से उनके छ्होटे
निपल बाहर मुँह निकले हुए थे.. पीछे से छूतदो के उभर और
मांसल जाँघो का शेप सॉफ नज़र आ रहा था. और मई सोचने लगा इन
मांसल जाँघो के बीच मे उनकी छूट के बारे मे. ज़रूर पवरोती की तरह
फूली हुई होगी. मुझे तो वो तो मानो सेक्स की देवी लग रही थी, गोल चेहरा,
खुले बॉल, मोटी गार्डेन, उभरा सीना, गोल गोल चिकने और गोरी भुजाए,
पहाड़ो जैसे साइड से ताने हुई चूंचिया, उनके बिच ब्रा ना होने पर भी
एक गहेरी कहयी. उनकी निघट्य बहुत पतली थी जिसके कारण उनके बदन का
गोरा हिस्सा उसमे से पूरा दिखाई दे रहा था.. उनके सीने से होते हुई
मेरी नज़र और नीचे गयी और मैने देखा … बहुत ही मुलाएँ सपाट
पेट (उनका पेट बाहर नही निकाला होने के कारण वो मोटी की बजाए गड्राए
बदन वाली एक सेक्सी औरत लगती थी) उसके नीचे बड़े कोट के बोटों जैसे
उनखी सेक्सी गहरी नाभि, नाभि से होते हुवे उनके सेक्सी छूट की तरफ एक
पतले बालो की लाइन गयी हुवी थी, उनके छूट शायद पूरी सॉफ थी,, उनकी
कमर बहुत पतली थी काँसे शायद 27-28 की थी. और चूतड़ तो बस पूछो
मत, उभरे हुए गोलाई लिए और आकर्षक थे, उनकी टाँगे भी बहुत चिकनी
थी, बिल्कुल केले के खंबे जैसी चिकनी. मई तो सीधे उनकी छूट के ख्यालो
मे खो गया सोचा उनकी छूट का कलौर पिंक होगा, और छूट के गुलाबी
अम्म औरतो से छोटे और चिपके होंगे (उनका डाइवोर्स करीब 8साल पहले
हो चक्का था और मेरे गाओं वाली भाभी ने बताया की वो तभी से अकेली
रहती है), छूट काफ़ी टाइट होगी, छूट का च्छेद बहुत छोटा होगा, बीच
मे जो दाना था वो एकद्ूम लाल, शायद भाभी रोज उसको अपने नाखूनओ से
कुरेड़ती होगी. मई उन्ही ख्यालो मे खोया था और मेरा लंड पंत के अंदर
से बाहर आन एके लिए अंगड़ाई लेने लगा था. उन्होने देखा की मई उनके
सारे बदन को घूर रहा हून, फिर उन्होने अपने अप को देखा और तब उनको
ख़याल आया की आरे अब्बी भी उन्होने सिर्फ़ निघट्य ही पहेनी है. उन्होने ज़हात
से मेरे हाथो से पनटी चीन ली और किचन टेबल पे पड़ी हुई ब्रा उठाई
और बेडरूम की तरफ चल पड़ी, तभी मैने कहा, "भाभी एब्ब क्या फायेदा",



वो बोली "कैसा फायेदा देवेर्जी, ज़रा खुल के कहो ना.."

"भाभी अप के हाथो मे जो यह 2 कपड़े है वो पहनने जा रही हो ना
बेडरूम मे."

"हा प्यारे देवेर्जी... क्यो.. नही पहनु क्या.........?"

"अरे भाभी जो च्छुपाने की लिए यह पहनने जा रही हो, वो तो हुँने सूब
कुछ देख लिया, और अभी नही, जब आया तभी देख लिया, फिर एब्ब हुंसे इन्हे
चीफ़ा के करेगी भी क्या.."

"प्यारे देवेर्जी.. ह्यूम पता है की अप देख चुके है, और अभी भी अप इन्हे
ही घूर रहे है.. और अभी आपका मान नही भरा है.. लेकिन मई इन्हे अपपसे
छुपाने के लिया नही पहन रही हू..."

"तो फिर भाभी...."
" आप ने तो सूब कुछ देख लिया.. एब्ब क्या आप यह च्चहते हो की दूसरे भी
यह सूब देखे..., इन सूब को दूसरो की नज़ारो से च्छुपाने की लिए पहन रही
हू संजे..."

"तभी भाभी ने कहा "संजय किसी को बताना मत हा...."

"क्या नही बताना है भाभी"

"यही जो कुछ तुमने देखा"

"क्या भाभी, मई संजा नही, मैने तो ऐसा कुछ देखा नही ..ज़रा खुल के
बताओ ना"

"अरे बाबा यही की तुमने मुझे नहाने के बाद जिसस हालत मे देखा और
मैने अंडर से कुछ नही पहेना उसके बारे मे कहे रही हून…
समझे. और तुम आज ही आए हो इसलिए मई इसे भूल जाती हून कीट उम घर पर
हो.. अकटुली मैं घर मे अकेली रहेती हून, तो मुझे ऐसे ही रहेने की
अददात पद चुकी है, और वैसे भी शाम को कोई आता नही है, इश्स लिए
नहाने के बाद मई हुमेशा टवल मे ही आती हू और हॉल मे ही चांग
करती हून, आईने मे देख के आप ना सारा बदन टवल निकल के साफ करती
हू, अभी तुम आज ही आई हो ना तो मुझे अभी तुम्हारी आदत नही पड़ी है,
मुझे लगा की मई अकेली ही हून इसी लिए यह सूब अंजाने मे हो गया."

"नही भाभी, बिल्कुल नही किसी को नही बतौँगा लेकिन जो कुछ हुवा अच्छा
हुवा. और हा आप आप नी स्टाइल चेंज मत करो, अभी भी आप रोज हमेशा की


तरह ही चेंज किया करो और नाहया करो, मुझे कोई प्राब्लम नही है
इससमे."

भाभी ने गुस्से मे कहा "क्या मतलब? क्या कहे रहे हो संजय?"

"श भाभी मेरे मतलब था की जो भी होता है अच्छे के लिए होता है
ना."

भाभी अभी बेडरूम के डोर पे ही खड़ी थी, और उनके हाथो मे पनटी और
ब्रा लटक रही थी, मई उनके बहुत करीब खड़ा था. तभी किसी की आवाज़ आई
"ओहूऊऊ सॉरी सॉरी... नामिता मुझे नही पता था की तुम बूससी हो..." एक
निहायट ही खूबसूरत, गोरी गोरी, पतली सी औरत लगभग 32 की होंगी, आप ने
आँखो पे एक हाथ रखते हुवे, और भाभी के हाथो मे लटकी हुवी ब्रा
और पनटी के ट्राफ् इशारा करते हुवे, बड़े ही नटखत और सेक्सी अंदाज़ मे
भाभी को चिढ़ते हुवे कहा "लगता है मुझे बाद मे आना च्चािए,
है ना नामिता, आप लोग चलने दीजिए आप ना प्रोग्राम, मई जा रही हू.."

"अरे प्रभा, आओ आओ ना, कहा चली.. तुम भी ना बस... तुम्हे तो हेर जघा
सूब कुछ वही प्रोग्राम ही दिखता है... आओ अंडर .. तुम जो कुछ समझहह
रही हो वैसा कुछ भी नही हो रहा है यहा. आओ तुम्हे मई मिलवती हू..
यह है संजय, सुनीता का मुँह बोला देवेर.. यहा नौकरी करने आया है,
रहने का प्राब्लम है इसलिए अभी ये यही रहेगा," यह बात सुनते ही प्रभा
की आँखो मे चमक आ गयी, और भाभी और प्रभा की आँखो आँखो मे
ही बात हुवी और दोनो मुस्कुराने लगी, मेरी कुछ समझहह मे नही आया.

कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण[ 2/b]

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Re: कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण part3

Unread post by sexy » 23 Mar 2017 07:42

कायदा सेक्स कथा माझ्या मराठी बहीण3

फिर प्रभा ने कहा.. "अक्चा तो तभी सुनीता यहा आती नही है.. भाई जिसका
इतना हॅंडसम देवेर हो वो कहा किसी के पास जाएगी. पति के साथ ऐसा
हॅंडसम देवेर फ्री, बाइ वन गेट वन फ्री, बड़े मज़े है प्रभा के तो.."

भाभी ने मुझे कहा, "संजय यह प्रभा है, मेरी पड़ोसन और हम
दोनो एक ही बॅंक मे कम करते है. और यह भी ‘अकेली’ रहेती है." भाभी
ने ‘अकेली’ पे कुछ ज़्यादा ही जोरे दिया था.

तभी प्रभा भाभी ने कहा "मेरे पति देल्ही मे सर्विस करते है, वो
महीने मे 1 या 2 बार आते है." पता चला की उनका भी कोई बच्चा नही
है.

प्रभा भाभी ने कहा, "संजय, ज़रा हमारा भी ख़याल रखना, सिर्फ़ आप नी
भाभी मे ही मशगूल मत रहेना, रिश्टेमए एब्ब तो हम भी आपकी भाभी
है."

मुझे कुछ समझ मे नही आया. मेरे चेहरे की कन्फ्यूषन को भाँपते
हुवे नामिता भाभी ने कहा "संजय तुम इसकी बतो पे ध्यान मत दो, बस


इसकी तो यह आदत ही है, कुछ भी बोलती रहेती है." फिर भाभी ने मुझे कहा,
की तुम जा के अर्रम करो हमे कुछ कम है, हम यही हॉल मे कंप्यूटर पे
कम कर रहे है. तुम मेरे बेडरूम मे सो जाओ, क्यो की एब्ब तक प्रिया के
कमरे की सफाई नही की है, और वो जब से मुंबई मम्मी पापा के पास
गयी है, तब से वो कमरा बंद ही पड़ा है. (प्रिया भाभी की सबसे
छोटी सिस्टर है, मुझसे 2 साल छ्होटी है, लेकिन मई उसको 1 साल से नही मिला
हून, लास्ट टाइम 1 साल पहेले जब वो दीवाली पे हुमारे गाओं भाभी के पास
आई थी तब मिले थे). भाभी के बेडरूम के खिड़की से कंप्यूटर की
स्क्रीन देखी जा सकती थी, और कंप्यूटर पे कम करने वेल को बेड पे लेते
हुवे को देख पाना मुस्किल था, और कंप्यूटर पे बैठने वेल की पीट खिड़की
की तरफ आती थी. मई शॉर्ट और त शर्ट पहन के सोया.तभी नामिता भाभी और प्रभा भाभी की आवाज़ सुनी. नामिता भाभी
प्रभा से कह रही थी जब भी भानु तौर पर जाता है तेरे तो मज़े हो जाते
है.. कल तो बêते को तुमने 11 बेक मेरे घर भेज दिया और रात के 8.30 पर
बुलाया.. और हन कल तो कोई दूसरा था .. रवि या शंकर जैसा नही दिखा..
कौन था? कोई नया है क्या? लेकिन तेरी हालत खराब कर दी थी.. तू जब बêते
को लेने आई तो बहुत ताकि लग रही थी.. चलने मे भी तकलीफ़ थी ना?”
प्रभा ने चाहक कर कहा.. “अरे मत पूंछ ये राकेश था.. भानु का
दोस्त.. होली के दिन से लगा था.. लेकिन बहुत स्लो था.. मैने भी उसे कभी
पल्लू गिरा कर कभी गांद मटका कर बहुत इशारे किए तब कल उसने हिम्मत
की.. मैने तो उम्मीद छ्चोड़ दी थी… लेकिन कल उसे मालूम नही था की भानु
तौर पर है.. और दो दिन पहले ही उसने भानु से कहा था की आज 12 बजे
वो आएगा. कल भानु अचानक तौर पर गया और इसे बताना भूल गये..
मई जानती थी की राकेश आएगा.. सोचा देखती हून अकेले मे क्या करता है..
लेकिन क्या बतौ.. ये तो भूखा शेर निकला.. क्या छोड़ता है.. छाई देने गयी
तो जो हाथ पकड़ा इसने.. उसके बाद मेरे कपड़े उतरे और रात के 8 बजे
बातरूम मे ले जा कर छोड़ने तक मुझे नंगी ही रखा.. क्या लंड है
उसका.. 10 मीं मे तय्यार और बहुत जबरदस्त छोड़ता है. इसके जैसे लंबा
और मोटा तो रवि या शंकर का भी नही है. राकेश का लंड मेरे मुँह
मे बहुत मुश्किल से ले रही थी.. और वो भी दबा कर अंदर धकेल रहा
था. चूसने के बाद तो और मोटा और सख़्त हो गया था.. मई तो दर रही थी
की कैसे छूट मे लूँगी.. लेकिन उसने मुझसे कहा फ्रिड्ज से मखखां ले
आओ.. फिर पूरा 100ग्राम का पॅक आप ने लंड पर और मेरी छूट मे लगाया
और मेरी कुंचियों और निपल पर भी.. श उसकी याद आते हिमेरी छूट फिर
से गीली हो रही है.. सोच रही थी आज उसे बुला लून.. अब तो मेरे बêते की भी
छूत्टिया शुरू हो गयी है.. इसलिए आज भी मेरा भाई उसे आप ने साथ ले गया
है. अब वही रहेगा 10 दिन तक.. मुझे राकेश के लंड की याद आते ही उसकी
चुदाई याद आ जाती है…वैसे रवि का ठीक है लेकिन शंकर छोड़ने मे
रवि से ज़्यादा अच्छा है और बहुत देर तक छोड़ता है. लेकिन ये तो उन सबसे
आयेज निकला जैसा लंड वैसी ही धमाकेदार चुदाई.. मई तो ना जाने कितनी
बार झड़ी. पहली बार जब उसने मेरी छूट मे डाला तो मुझे लगा छूट
जैसे फट रही हो.. और दर्द भी .. लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा था. उसने 5बार छोड़ा मुझे.. अलग अलग तरीके से.. मई तो रवि और शंकर की
चुदाई भूल गयी.. वैसे पिछले शनिवार को ही शंकर आया था.. उसने
भी मेरे चूंचियों पर निशान बना कर मसला.. और कल राकेश ने
छोड़ा..”

मई प्रभा की बाते सुन रहा था. मैने मान ही मान सोचा साली चुड़क्कड़
मेरे लंड से पाला पड़ेगा तो सारे लंड भूल जाएगी.. अंदर घुसा कर
झड़ना भूल जौंगा.

तभी नामिता भाभी ने कहा “रवि से फिर दोस्ती हो गयी क्या?” प्रभा ने
कहा “हन रे उसने सॉरी बोला.. मैने भी सोचा मई भी तो उसके अलावा
शंकर से छुड़वा रही हून फिर उसने और किसी को छोड़ लिया तो क्या बुरा
किया.. और उसने उसी दिन मुझे 3 बार छोड़ा.. शायद शंकर की ने से 2
दिन पहले.” नामिता भाभी मुस्कुराइ और कहा तू तो किस्मेट वाली है.. अब तो
3-3 लंड तेरे नसीब मे है और भानु का लंड तो है ही.” और दोनो ज़ोर से
हँसने लगी. प्रभा ने कहा तू क्यो नही किसी से चुड़वति?” नामिता भाभी
बोली अरे वैसा छोड़ने वाला मिलेगा तो ज़रूर छुड़वा लूँगी.”
प्रभा भाभी नेकहा, "तेरे तो मज़े हो गये नामिता, है क्या चिकना और
हंसोमे लड़का पकड़ा तूने. एब्ब तो तेरी हेर रत सुहगगगगगग......" तभी
भाभी ने प्रभा भाभी के मुँह पे हाथ रख दिया. और बोली "टुजे कोई
शरम आती है या नही, जो मुँह मे आता है बक देती है. वो प्रभा से 2
साल छोटा है, मेरे लिए तो और भी बहुत छोटा है, और ज़रा धीरे, कही ओ
जाग रहा होगा तो. उसने यह सारी बाते सुन ली तो वो क्या सोचेगा, की मई
आसीवासे औरत हून." तभी प्रभा भाभी चुप हो गयी और वो भाभी
का इशारा समझ गयी, की भाभी आप ने आपप को मेरे सामने आक्ची औरत
बने रहेना चाहती है.

थोड़ी देर बाद प्रभा भाभी ने कहा, "तो करे शुरू आप ना प्रोग्राम", मई
यह सुन के चौंक गया. मई सोचने लगा की प्रभा भाभी किस प्रोग्राम
की बात कर रही है." तभी भाभी ने कहा की पहेले देख लो कही संजय जाग
तो नही रहा है. प्रभा भाभी बोली, अभी देख के आती हून. मैने यह
सुनते ही आप नी आँखे बंद कर ली. और पीठ के बाल लेता रहा, दोनो भाभियो की
बाते सुनके, और नामिता भाभी के बड़े बड़े बूब्स और नंगा जिस्म देख
के पहेले ही मेरे लंड टाइट खड़ा हो गया था. इश्स वजाहा से मेरे शॉर्ट
मे टेंट लग गया था. प्रभा जैसे ही कमरे मे आई, उसने मेरे तरफ
देखा, मैने हल्की सी आँख खुली रखी थी, जो की देखने वेल को लगेगा की
सोया हुवा हू लेकिन मई उसको देख सकता था. वो मेरे आप ्पर ज़ुकी उसकी
गरम शंसे मेरे गेर्दन को च्छू रही थी. वो तोड़ा और नीचे ज़ुकी तो
मेरा खड़ा लंड उसके पेत को टच हो गया, मेरे सारे बदन मे
ज़ुर्ज़हुरी दौड़ गयी, और मेरा लंड जो पहेले से ही टाइट था और ज़्यादा
हार्ड हो गया, और तोड़ा ज़ाटके भी मरने लगा, न प्रभा ने मेरे लंड की
हलचल आप ने पेत पे महसूस की तो उशे बहुत अक्चा लगा, जैसे उसकी मान
की मारद पूरी हो गयी हो, एब्ब वो मेरे लंड की तरफ मूडी, उसे पूरा एेकिनहो गया था की मई सो रहा हून, उसने शॉर्ट के आप ्पर से ही मेरे लंड को
सहलाया, मुझे मानो बिजली का ज़्ातका लग गया हो, लेकिन मेरी हालत ऐसी थी
की मई कुछ कर भी नही सकता था, क्यो की मई उनको यह साबित करना चाह
रहा था की मई सोया हू, जिस से की मई उनका प्रोग्राम देख साकु. एब्ब वो
मेरी जाँघो को सहेलने लगी मेरी हालत और ज़्यादा खराब हो रही थी, वो
तोड़ा आयेज बादने ही लगी थी की, नामिता भाभी अंदर आ गयी और उसने
प्रभा को एक चिकोटी निकली, और कहा "मुझे पता था की तुम ज़रूर कोई ना
कोई हरकत करोगी, इसी लिए तुम्हारे पीछे पीछे छल्ली आई. एब्ब चलो भी
या प्रोग्राम नही करना है." प्रभा तो सूब कुछ अभी ही कर लेना चाहती
थी, लेकिन प्रोग्राम का नामे सुनते ही ओ फ़ौरन उठ के खड़ी हो गयी. और
वो दोनो हॉल की तरफ चल पड़ी, प्रभा ने कहा "नामिता संजय का लंड तो
बहुत बड़ा है और बहुत मोटा भी, और जब टाइट होता है तो बहुत सकत्ता
लगता है. मुझे तो लगता है इसका लंड राकेश से ज़्यादा बड़ा है और कैसा
पंत से उपर खड़ा था. ऐसे लंड से तो छूट का कचूमर निकल जाएगा..
वैसे चुदाई कैसी करता ये देखना पड़ेगा." ये कहकर प्रभा ने एक
लंबी सांस ली.नामिता भाभी बोली, "अक्चा तो तुम उसका लंड भी देख के आई
! तुम तो बड़ी बेशरम हो, पहेले ही दिन सूब कुछ कर लॉगी क्या? वैसे
मुझे सुनीता ने बतलाया है की उसका लंड बहुत लंबा और मोटा है.. वो
भी उसे लेना चाहती है लेकिन मौका नही मिला.. अब मेरे घर आ कर लेगी.
और संजय बहुत शर्मिला है ना.. मुझे ही उसकी शरम तोड़नी है.. लेकिन
धीरे धीरे. वैसे तुझे जल्दबाज़ी नही करनी चाहिए"

प्रभा : "अरे नही नामिता, वो तो मैने आप ्पर से ही देख लिया, और शॉर्ट के
आप ्पर से ही च्छू लिया. जी तो कर रहा था निकल के देख लून और खूब
चुस्सू, लेकिन तुम आ गयी ना".

एब्ब मई खिड़की से देखने लगा, प्रभा ने कहा “नामिता हो जा शुरू, और
भाभी ने नेट कनेक्ट किया, और वो दोनो सरफिंग करने लगी, मैने देखा की
उनके स्क्रीन पे अडल्ट साइट खुल रही है, उसमे मेट्यूर्ड विमन के साथ टीन
बाय्स के सेक्स करते हुवे फोटो’स थे, प्रभा और नामिता भाभी एक एक पिक
के आप ्पर कॉमेंट करती जा रही थी. " एक पिक मे 35 साल की एक औरत 18 साल के
लड़के का लंड मुँह मे ले के चूस रही थी, यूयेसेस औरत की चूंचिया बहुत
बड़े बड़े थे और उसकी कमर पतली थी, नामिता भाभी ने कहा, "है
प्रभा, देखो इस पिक मे तुम क्या मज़े से लंड च्छुस रही हो, और देखो
वो तुम्हारी चूंचिया भी दबा रहा है" प्रभा ने कहा, "हा नामिता,
बोहोट मज़ा आया मुझे तुम्हारे देवेर संजय का लंड चुसते हुवे, (पिक
वेल लड़के को वो संजय कहे रही थी, याने की मई) और तुम उसको छोटा
कहे रही थी ना, ज़रा देख कैसे छूट मे उंगली भी दल रहा है और साथ
मे मेरे चूंचियो को डब्बा भी रहा है, और देख लंड चुस्वा के कैसे
खुश हो रहा है"

मैने स्क्रीन पे पिक गौर से देखा, उसमे कोई गोरी अमेरिकन औरत किसी गोरे
लड़के के साथ यह सूब करते हुवे दिख रही थी. मई समझ गया की दोनो


भाभीया पिक को आप ने आप का पिक मॅन के बाते कर रही है. फिर उन्होने
दूसरे पिक को फुल स्क्रीन किया, उसमे एक औरत एक 18 साल के लड़के का लंड
आप ने छूट मे घुसाए हुवी थी.उूव क्या पोज़ थी, मैने बहुत ब्लू फिल्म
देखी है लेकिन यह पोज़ पहेली बार देख रहा था. उसमे वो औरत
घुटनो के बाल पैर पीछे मोड़ के सीधी बैठी थी और उसके दोनो हाथ बेड
पे पीछे की तरफ करके रखे थे, उसके पैर उसके चूतड़ को टच हो रहे
थे और वो पूरी तरह से हंतो पे ज़ोर दे के अद्ध लेती पोज़ मे थी और उसका
दोनो जंगे फैली हुवी थी. वो बिल्कुल किसी मेंढक की तरहा बैठी थी. (मैने
ही इस पोज़ को मेन्डक आसान का नामे दिया है.) और यूयेसेस लड़के ने आप ना एक
हाथ उसके कमर मे डाला हुवा था और एक हाथ मे उसका बॉल पकड़े हुवे
थे, लड़के के मुँह मे औरत के निपल्स थे, और नीचे छूट मे लंड
घुसा हुवा था, औरत ने चेहरा ऐसा बनाया हुवा था की उसके छूट मे
मोटा लंड घुसने की वजह से बहुत दर्द हो रहा हो.
हो गया था की मई सो रहा हून, उसने शॉर्ट के आप ्पर से ही मेरे लंड को
सहलाया, मुझे मानो बिजली का ज़्ातका लग गया हो, लेकिन मेरी हालत ऐसी थी
की मई कुछ कर भी नही सकता था, क्यो की मई उनको यह साबित करना चाह
रहा था की मई सोया हू, जिस से की मई उनका प्रोग्राम देख साकु. एब्ब वो
मेरी जाँघो को सहेलने लगी मेरी हालत और ज़्यादा खराब हो रही थी, वो
तोड़ा आयेज बादने ही लगी थी की, नामिता भाभी अंदर आ गयी और उसने
प्रभा को एक चिकोटी निकली, और कहा "मुझे पता था की तुम ज़रूर कोई ना
कोई हरकत करोगी, इसी लिए तुम्हारे पीछे पीछे छल्ली आई. एब्ब चलो भी
या प्रोग्राम नही करना है." प्रभा तो सूब कुछ अभी ही कर लेना चाहती
थी, लेकिन प्रोग्राम का नामे सुनते ही ओ फ़ौरन उठ के खड़ी हो गयी. और
वो दोनो हॉल की तरफ चल पड़ी, प्रभा ने कहा "नामिता संजय का लंड तो
बहुत बड़ा है और बहुत मोटा भी, और जब टाइट होता है तो बहुत सकत्ता
लगता है. मुझे तो लगता है इसका लंड राकेश से ज़्यादा बड़ा है और कैसा
पंत से उपर खड़ा था. ऐसे लंड से तो छूट का कचूमर निकल जाएगा..
वैसे चुदाई कैसी करता ये देखना पड़ेगा." ये कहकर प्रभा ने एक
लंबी सांस ली.नामिता भाभी बोली, "अक्चा तो तुम उसका लंड भी देख के आई
! तुम तो बड़ी बेशरम हो, पहेले ही दिन सूब कुछ कर लॉगी क्या? वैसे
मुझे सुनीता ने बतलाया है की उसका लंड बहुत लंबा और मोटा है.. वो
भी उसे लेना चाहती है लेकिन मौका नही मिला.. अब मेरे घर आ कर लेगी.
और संजय बहुत शर्मिला है ना.. मुझे ही उसकी शरम तोड़नी है.. लेकिन
धीरे धीरे. वैसे तुझे जल्दबाज़ी नही करनी चाहिए"