Holi sexi stories-होली की सेक्सी कहानियाँ

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The Romantic
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Re: Holi sexi stories-होली की सेक्सी कहानियाँ

Unread post by The Romantic » 24 Dec 2014 08:51

मां तीनो को लेकर बिलकुल हमारे नजदीक बरामदे पर आ गयी. अब हमें उनकी आवाज भी साफ साफ सुनाई देने लगी थी.. मां – “ये दोनो कौन है..”

बल्लु- मेरे दोस्त है, मै इन्हे दूनिया की सबसे मस्त माल दिखाने लाया हुं.” मां – धत्त ..बोल क्या खायेगा...

बल्लु.. “जो खिलाओगी खाउंगा लेकिन पहले थोडा रंग तो खेल ले..” बल्लु आगे बढा.

मां थोडा पीछे हट् गयी और कहाँ , “ मै तुमसे नाराज हु, तु पीछ्ली होली मे रंग खेलने क्यो नही आया...मै दिन भर तेरा इंतजार करती रही... आज तुझे दो साल के बाद देखा है... लगता है कोई दुसरी मुझसे अछ्छी माल मिल गयी है.. ”

बल्लु झट्के से आगे बढ कर मां को बांहो मे लेकर जकड लिया और कहा.. “ मुझे और कोई माल नही दीखती है, हर समय सिर्फ आपकी मस्त जवानी मेरे आंखो के सामने तैरती रहती है..” बल्लु ने मां की मांसल चुत्तरो को मसलते हुये ओंठो को चुमा और कहा ,

“मालकिन , अब कितना तरपाओगी... पीछले चार सालों से आपको चोदने के लीये तडप रहा हुं.. कितना तडप्पाओगी....अब बरदास्त नही होता है....”

मां भी बल्लु को चुमती रही और कहा ..” दुनिया मे औरत की कमी है क्या...पैसा फेंको तो एक से बढ्कर एक मस्त चूत मिल जायेगी चोदने के लिये ...” और मां ने बल्लु का हाथ पकड्कर अपनी चुची पर दबाया . मां इन छोटे छोटे लडको के सामने चूत और चोदने कि बातें कर रही है...इतना तो तय था कि बल्लु ने मां को अभी तक नही चोदा था. चूंकी आज होली है और आज के दिन मां अपना चूत लोगों के लिये खोलना कर रखती है तो शायद अभी बल्लु से चुदवा ले...मां ने बल्लु से फिर कहा,

“तु साला शादी क्यो नही कर लेता है...एक चूत मिल जायेगी , रोज चोदते रहना अपनी घरवाली को और अपने दोस्तों से भी उसे चूदवाना...” कहते हुये मां ने बल्लु को धक्का दिया और कहा , देख तेरे ये दोस्त चुप-चाप खडे है..इन्हे भी मेरे साथ होली खेलने दे..”

मां की हरकत पर हम सब परेशान थे. उन लडको को नही पता था कि घर के अन्दर उनकी माल का जवान बेटा, ससुर और घरवाला बैठा है और सब देख सुन रहा है.. लेकिन ये रंडी जान बूझ कर हम सब को अपना रंडीपना दीखा रही है.

बल्लु ने अपने दोनो दोस्तो से कहा, “ अरे यार चुप-चाप क्यो खडे हो, अछ्छा मौका है.. इतनी मस्त और हसीन माल के साथ होली खेलने का मौका जल्दी नही मिलेगा...जहां मन करें रंग लगा लो..”

और बल्लु ने खुद अपने पॉकेट् से रंग का पुडिया नीकाला और कुछ रंग हाथ मे लगा कर कुछ पानी लिया और दोनो हाथो मे रगडा . बल्लु का दोनो हाथ गहरा लाल रंग का हो गया और वो मालती की तरफ बढा .

“ चल साला, रानी के ब्लाउज का बट्न खोल दे....”

एक लडके ने दोनो हाथों से मालती की चुची को खुब रगडा और फटा फट सारे बटन खोल दाले...उसने ब्लाउज को अलग किया और तीसरे लडके ने पीछे से ब्लाउज को बदन से बाहर नीकाल दिया.

अब मां कमर से उपर नंगी थी. उसकी मोटी –मोटी गोल गोल चुची उपर –नीचे हो रही थी. बल्लु के दोस्त , एक आगे से और दूसरा पीछे से खुब मसल मसल कर चुचीयों को मसल रहा था... ”क्यों रे कैसा माल है...” बल्लु ने पूछा. ”सच भैया..ऐसा चुची तो मेरी 20-21 साल की दीदी का भी नही है.. ओफ कितना टाइट है और कितना मोता भी....” एक ने कहा और चुची को मसलता रहा.

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Re: Holi sexi stories-होली की सेक्सी कहानियाँ

Unread post by The Romantic » 24 Dec 2014 08:52

दुसरा जो पीछे से चुची मसल रहा था , कहा “ बल्लु भैया, घुन्डी ( नीपल) तो देखो, इतना लम्बा ना तो तेरी मां का है ना मेरी मा का... मै आज भी दोनो का दूध चुस कर आया हुं...उन दोनो की चुची पीचक गयी है, पुल पुल हो गया है..और ये देखो क्या मस्त है... हम तीनो रात भर चूसते रहेंगे तो भी कडा का कडा ही रहेगा .. भैया मै एक बार चुची को चुंसु. “

“जल्दी से दोनो एक एक चुची का दूध पी लो..तब तक मै अपनी रानी को रंग लगाता हुं. “ बल्लु ने कहा और दोनो हाथो से पहले गालों पर रंग लगाया और ओंठों को बार बार चुसता रहा और बाकी दोनो लडके एक एक घुंडी को मुह मे लेकर चुची दबा दबा कर पुरा मजा ले रहे थे.. बल्लु बार बार हाथों मे रंग लेता था, कभी लाल, कभी नीला, कभी हरा और कभी पीला और थोडी ही देर मे मेरी मां एक रंगीन पोस्टर बन गयी.

“बेटा, तुम लोगों ने बहुत दूध पी लिया अब जरा असल माल का मजा लो॥ जल्दी से साया खोलो और चूत का दर्शन करो..”

बल्लु ने कहा और एक लडके ने झट्के से साया का नाडा खोलना दिया और मेरी मां बिल्कुल नगी थी. साया के खूलते ही तीनो मालती के उपर लट्क गये और मां तीनो को खुश करने मे लग गयी. वो पैर फैला कर खडी हो गयी . क़ोई चुची मसल रहा था तो कोई चूत मे अंगुली घुसेर कर मजा ले रहा था. एक चुत्तरो को सहला रहा था. तीनो बारी बारी से अपनी जगह बदल रहे और मां उन तीनो को अपनी जवानी का जलवा दीखा रही थी. एक 35-36 साल कि मस्त जबान औरत तीन कम उम्र के लडको को नंगी जवानी दिखा दिखा कर मस्ता रही थी. दोनो छोटे लडके चुची और चूत से खेल रहे थे और बल्लु मालती को रंगने मे व्यस्त था. उसने मां को उलत पलत कर उसकी पीठ, छाती, जांघे, कमर , चुत्तर सबको लाल पीले हरे रंग से रंग डाला. यहा तक की उसने बुर की पत्तीयो को भी फैला फैला कर रंग डाला. मां पांव चियार कर लेटी थी. तीनो लडके बारी बारी से चूत मे अंगुली पेल पेल कर मजा ले रहे थे. अचानक बल्लु खडा हुआ और फटा फट नंगा हो गया. हम सब दंग रह गये. बल्लु का लौडा मेरे और दादाजी के लौडे से लम्बा और मोटा था. बल्लु ने लौडे को हिलाते हुये कहा,

“मालकिन, देखो तुने मेरी क्या हालत बना दी है.. तेरी चूत को याद कर कर ये लौडा इतना बडा हो गया है...अब तो इसे अपनी बूर मे घुसाकर इसकी प्यास बुझा दो.... चोदने दो मालकिन....”

और बल्लु मां के नजदीक गया. मां ने उसका लौडा पकड कर हिलाने लगी और कहा ,

“तु हमेशा गलत समय पर आता है.. अब मालिक लोग आने बाले है...और फिर इन बच्चो के सामने कैसे चुदवाउंगी...कभी अकेले आना ...प्यार से इसे बूर का रस पिलाउंगी.. अभी मुझे इसका रस पीने दे... “ मां खुब जोर जोर से लंड हिलाने लगी और उधर उन दोनो लडको ने भी अपने सारे कपडे उतार दिये और अपने अपने लंड को मां के बूर से रगडने लगे. शायद उन बच्चो को नहीं मालुम था कि चुदाई कैसे की जाती है... मां बल्लु क लंड हिलाती रही और 3-4 मिनट के बाद बल्लु का लंड पानी फेंकने लगा. बल्लु का सारा विर्य मां के गालों पर चिपक गया . उधर दोनो लडके बूर मे अपना लौडा रगड रहे थे और उन्होने भी माल उगल दिया. इतना ही नही, उन दोनो लडको ने बूर को रगडा और झुक कर बूर को चुमा.

जब तीनो ठंडे हो गये तो मां उठी और उनको कपडे पहन ने को कहा और खुद किचन मे चली गयी . तभी बाबुजी ने धीरे से कहा , “ ओह , साली चुदवाई क्यो नही ..मै तो चुदाई देखना चाह्ता था...”

मां किचन से वापस आयी तो उसके हाथ मे खाने पीने का सामान था.. मां ने अपने हाथों से उन तीनो को खीलाया और साथ ही उनसे फिर चुची और चूत मसलवाई..

“मालकिन, कब आंउ , चोदने .. “ बल्लु ने बूर को मसलते हुये पुछा.

“देख अभी विनोद आया हुआ है , 15-20 दिनो मे वो चला जायेगा फिर आना ..पहले तुम चोदना और मेरी चूत का मजा लेना . मेरी चूत तुमको पसन्द आये तो बाद मे इन दोनो को भी लेकर आना...इनको दूध पीलाउंगी और तु मुझे चोदना और हां खबरदार , अगर मुझसे पहले किसीको चोदा तो मै अपना बूर भी देखने नही दुंगी.”

और कुछ देर के बाद मां नंगी ही तीनो को दरवाजे के बाहर तक छोड आयी. बल्लु ने मां को इस तरह से रंग दिया था कि कोई ये नही बोल सकता था कि वो नंगी है.

दरवाजा बंद करने के बाद मां सीधा कमरे की ओर आने लगी तो हम तीनो बाहर आ गये . इससे पहले कि हम कुछ कहे , मां ने कहा,

“ आप लोगों को ये मुफ्त का सिनेमा अछ्छा लगा कि नही. “ उसने अपनी चुची को सहलाया और कहा , “बल्लु ने कितना मेहनत से मेरे बाडी को रंगा है.. मै आज ऐसे ही रहुंगी सिर्फ मुह साफ करना परेगा..”

“लेकिन तुमने लौडा बूर मे क्यो नही लिया..हमारे लंड से भी बडा और मोटा लंड था,, बहुत मजा आता उस लंड से तुम्हारी चुदाई देखने मे...” बाबुजी ने कहा ..

“साला, पिछले चार साल से मेरे चूत के चक्कर मे है... साले को सब मजा देती हुं बस अब तक चोदने नही दिया..आज अगर तुम लोग घर मे नही रहते तो शायद मै तीनो से चुदवाती ...खैर अब आप लोग नहा लो... “

मां बाथ रूम गयी और दस मिनट के बाद वापस आई. उसने सिर्फ मुह का रंग हटाया था . बाकी सारे शरीर पर रंग वैसे का वैसे ही लगा था. काले काले झांट भी रंगीन हो गये थे. मां अब बिलकुल नंगी घुम रही थी..इस लिये हमें उसे चोदने की जल्दी नही थी... मां कि हरकतो से यह पता चल गया था कि आज वो हम तीनो ( बेटा, घरवाला और ससुर) को पुरा मस्ती देने के मूड मे है...

मै यह इंतजार कर रहा था कि मां कब हम तीनो के पास आये और कहे कि “ मुझे चोदो.”

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Re: Holi sexi stories-होली की सेक्सी कहानियाँ

Unread post by The Romantic » 24 Dec 2014 08:52

हुम तीनो मर्द बारी बारी से नहा लिये. मन तो हमारा भी कर रहा था कि नंगे ही रहे लेकिन घर मे और भी मर्द थे इस लिये हम तीनो ने कपडे पहन लिये. मां पिछले एक घंटे से ज्यादा समय से नंगी ही घूम रही थी. चेहरे को छोड कर साली का पुरा बदन रंगा हुआ था. मां ने खाना परोसा .हम सब ने जिद्द करके मां को अपने साथ ही बीठाया. हम तीनो उसकी रंगीन मस्त गदराई जवानी को देख देख कर खाना खाते रहे और मां हमें अपना चूत पुरा खोलकर दिखाती रही. खाना खाते खाते देखा कि मां बार बार अपने शरीर को खुजला रही है..कभी पेट को, कभी गालो को, कभी चुची को तो कभी चूत को... ”बहु, क्या हुआ...इतना क्यो खुजला रही हो...” दादाजी ने पूछा.

“लगता है , रंग काट रहा है..इतना देर तक रंग शरीर पर लगा रहेगा तो काटेगा ही..” दादाजी ने फिर कहा.. ”अछ्छा होगा कि तुम रंग साफ कर लो..नही तो कही कुछ दाग –उग ना रह जाये, “

दादाजी ने अपनी बहु से कहा , “ बेटी तेरी मस्त गदरायी जवानी पर कोई भी दाग अछा नही लगेगा....जा रानी तु रंग साफ कर ले...हम सब ये बरतन बासन साफ कर लेंगे...”

हम सब ने खाना खतम किया और सब बरतन उठाकर किचन मे ले गये. दादाजी ने फिर कहा, “जा बेटी रंग साफ कर ले...और ऐसा कर आंगन में ही नहा ...”

“ठीक है बाबुजी...आप जैसा बोलीये...” मां ने मेरी ओर देख और कहा ,

“चल बेटा, तीन चार बालटी पानी आंगन मे रख दे...”

मां बीच आंगन मे बैठ् गयी और मै फटा फट चार बालटी पानी लाकर मां के पास रख दिया. मां ने नहाना शुरु किया और अपने बॉडी पर साबुन रगड रगड कर नहाने लगी..लेकिन बल्लु का रंग बहुत पक्का था.

“लगता है, मै ये सब रंग साफ नही कर पाउंगी ...आप लोग भी मुझे साफ करो. “ मां ने कहा . हम तीनो तो इसी इंतजार मे थे. हम अपने कपडे उतारने लगे तो मां ने मना कर दिया और कहा,

“अगर आप लोग नंगे होईयेगा तो मै सारे कपडे पहन लुंगी.” वो खडी हो गयी और अपनी चूत को ढंक लिया.

“ठीक है रानी, हम नंगे नही होगे.. तुम ही अपना जवानी हमें दीखाती रहो.. “ दादाजी ने कहा. वो मां के सामने गये और एक साबुन हाथ मे लेकर दोनो हाथो से मां की पीठ और चुत्तर पर रगडने लगे. मां खडी थी और दादाजी आराम से नंगे शरीर पर साबुन लगा रहे थे और पानी भी डाल रहे थे.

“तुम दोनो क्या देख रहे हो? तुम लोग भी लगाओगे तो जल्दी साफ हो जायेगा..” मां ने हमारी ओर देखते हुये कहा. मैने और बाबुजी ने दादाजी कि तरह सिर्फ जांघिया पहन कर मां के पास गये और मै मा की चूत और जांघ पर साबुन लगाने लगा और बाबुजी ने चुची को साफ करना शुरु किया. करीब आधे घंटे से ज्यादा समय तक हम तीनो मां की एक एक माल को रगडते रहे और आखिरकार मां बिल्कुल साफ हो गयी. पहले की तरह उनका अंग अंग चमकने लगा . हम तीनो ने साबुन लगाते लगाते और पानी से साफ करते करते कई बार बूर और गांड मे अंगुली पेल कर मां की जमकर चुदाई की. मां भी इतनी गरम हो गयी थी की हम तीनो उसको रगड रहे थे और वो रंडी सिसकारती मारती हुई मजा ले रही थी. अपने को समभालने के बहाने उस कुतिया ने कई बार जांघिया के उपर से हमारा लौडा सहलाया. हम तीनो का लौडा जांघिया को फाड कर निकलने को तैयार था

नहाने के बाद मां और भी हसीन और मालदार लग रही थी. मेरा तो मन कर रहा था कि साली रंडी को वही बाबुजी और दादा के सामने पटक कर चोद दालुं. शायद दादा भी यही चाह रहे थे तभी वो बहुत प्यार और आराम से अपनी बहु के सुडौल बदन को तौलियी से पोंछ रहे थे. पोंछते पोंछते दादा ने कहा ,

“बेटी, तेरी प्यारी सी चूत इन झांटों ने ढक कर रख्खी है.. कुछ भी नही दीखता है.. तेरा घरवाला कुछ बोलता नही.....मैने तो तेरी सास ( दादीजी) को कभी भी झांट बढाने नही दिया और दादाजी ने मां के पैंरो के पास बैठ कर चूत को चूमा और दोनो हाथो से झांट अलग कर बूर की फांक को फैलाया कहा, .

“ कितना प्यारा माल है...चुमने और चाट्ने का मन करता है... लेकिन इन झांटो के बीच बूर चुसने और चाट्ने मे मजा नही आयेगा. “

दादा ने फिर बूर को फैलाया और अन्दर के गुलाबी माल को चुमा. दादा खडे हो गये और मां के दोनो गालो को अपने हाथों मे दबाया और खुब प्यार से चुची मसल मसल कर चुमा. मां को सहलाते हुये दादा ने कहा ,

“लगता है तेरा घरवाला कभी तेरी चूत को चुसता नही है... तो फिर तुम्हे चूत का मजा तो अभी तक मिला ही नही होगा...रानी चुदाई से ज्यादा मजा चूत चटवाने मे आता है... चूत साफ कर ले फिर तुझे ऐसा मजा दुंगा कि बूर चाटने के लीये लोगों से खुशामद करती रहेगी.”

दादा ने मां को फिर से चुमा और अलग हट गये. मां हम लोगों के सामने पैर चियार कर बैठ गयी. कुछ देर हम तीनो की तरफ देख कर कहा..

“आप लोग अपने को मर्द कहते हो ! दो घंटे से एक रंडी नंगी घर मे घुम रही है..लंड के लीये तरस रही है और तुम नामर्द लोग बस उपर उपर मजा ले रहो हो..”