गन्ने की मिठास compleet

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rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 13 Oct 2014 11:40

गन्ने की मिठास--7

गतान्क से आगे......................

निम्मो- वैसे चाची चंदा भी अब बड़ी होने लगी है इसके ब्याह के बारे मे सोचना शुरू कर दो

कामिनी- अरे उस गीता का ब्याह किया था और वह कुतिया तब से यही पड़ी है इसका ब्याह कर दिया तो क्या पता यह भी हमारे सर ही ना आ जाए मे तो कहती हू इन कुतियो को कुँवारी ही पड़ी रहने दे कम से कम कोई कहने वाला तो नही होगा

निम्मो- हस्ते हुए, क्या पता चाची यह कुँवारी है या नही

चंदा- लो दीदी पानी पियो

निम्मो- क्यो री चंदा कभी हमारे खेतो की तरफ भी आ जाया कर मस्त गन्ने चुस्वाउंगी

चंदा- दीदी मुझे तो बाबा बड़े मस्त गन्ने लाकर देते है

निम्मो- अरे तो क्या हुआ कभी हमारे खेत के गन्ने भी चख कर देख, चाची तुमने चूसे है हमारे खेत के गन्ने

कामिनी- अरे कहाँ मुझे तो अपने ही गन्ने चूसने को नही मिल रहे है तेरे खेत के कहा से चुसुन्गि

निम्मो- कामिनी चाची की मोटी जाँघो को सहलाते हुए, कहो तो मे अपने खेत के गन्ने चूसने का इंतज़ाम करू

कामिनी- मुस्कुराकर पहले यह बता तूने चूसे है अपने खेत के गन्ने

निम्मो- अभी तक तो नही

कामिनी- पहले तू तो चूस कर देख ले फिर मुझे चुसवाना,

निम्मो- तो ठीक है मे जल्दी ही तुम्हे अपने खेत का सबसे मोटा गन्ना चुस्वाउंगी अच्छा चाची मे जा रही हू फिर

आउन्गि और फिर निम्मो वापस अपने खेत की ओर चल देती है,

रमिया- आह रामू भैया अब छ्चोड़ दो कही दीदी ना आ जाए

रामू पहले एक बार तू मेरे मुँह पर बैठ जा उसके बाद चली जाना, रामू जल्दी से खाट पर लेट जाता है और रमिया उसके सर की तरफ अपनी गान्ड करके अपनी स्कर्ट उँची करके बैठ जाती है और खुद रामू के लंड को पकड़ कर चाटने लगती है रामू उसके मोटे-मोटे चुतड़ों को खूब कस-कस कर फैलाते हुए उसकी गान्ड के सुराख और उसकी चूत के रस से भीगे छेद को चाटने लगता है, लेकिन जैसे ही निम्मो वहाँ पहुचती है दोनो को उस पोज़िशन मे देख कर उसके पेर वही के वही रुक जाते है और उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है वह जल्दी से गन्ने के पास की झाड़ियो मे च्छूप जाती है और दोनो को देखने लगती है उसकी चूत से पानी बहने लगता है रामू का पूरी तरह तना हुआ मोटा लंड देख कर निम्मो की आँखे फटी की फटी रह जाती है,

हे रब्बा रामू का लोड्‍ा कितना बड़ा है कितना मस्त लग रहा है और इस कुतिया रमिया को देखो कितने प्यार से चाट रही है

इसकी तो आज मे मा से कह कर खाल उधड़वा दूँगी, कामिनी मुझसे कितनी छोटी है और इतने बड़े लंड पर कैसे झूम रही

है, हे राम मे क्या करू और फिर निम्मो अपनी एक उंगली अपने घाघरे मे ले जाकर अपनी चूत की फांको को सहलाती हुई चूत के छेद मे डाल देती है,

रमिया- भैया जीभ अंदर घुसाओ ना उसका कहना था कि रामू अपनी जीभ को उसकी चूत के छेद मे कस कर पेल देता है

जैसे ही रमिया का पानी निकलने को होता है वह रामू का लंड ज़ोर-ज़ोर से चूसना चालू कर देती है और फिर रामू एक दम से उसके मुँह मे अपने पानी की पिचकारी तेज़ी से मारने लगता है और रमिया अपनी चूत को रामू के मुँह मे ज़ोर-ज़ोर से रगड़ते हुए उसके लंड का पानी चूसने लगती है, करीब दो मिनिट बाद दोनो अलग होते है और जल्दी से कपड़े ठीक कर लेते है,

रमिया जैसे ही जाने को होती है सामने से निम्मो आ जाती है,

रमिया- दीदी मे जा रही हू तुम भी चलोगि क्या

निम्मो- नही तू जा मे रामू के साथ शाम तक आउन्गि

रमिया के जाने के बाद, निम्मो-क्यो रे रामू इतना पसीने-पसीने क्यो हो रहा है ज़्यादा काम कर लिया क्या

रामू- अरे नही दीदी बस आज गर्मी कुछ ज़्यादा ही लग रही है

निम्मो- अरे गर्मी लग रही है तो नहा ले कुछ ठंडक हो जाएगी, चल आज मे अपने भैया को नहला देती हू,

रामू- अरे नही दीदी इतनी भी गर्मी नही है और अभी बहुत काम बाकी भी है, तुम्हारा खाना रखा है खा लो

निम्मो खाना खाने लगती है और रामू अपने काम मे जुट जाता है, निम्मो अपनी जाँघो को फैलाए रामू के मजबूत

बदन को घूर रही थी और रामू अपने काम मे लगा हुआ बीच-बीच मे निम्मो की तरफ भी देख लेता था,

निम्मो- अच्छा रामू एक बात पूंच्छू

रामू- हाँ पूंच्छो

निम्मो- तुझे मे ज़्यादा अच्छी लगती हू या रमिया

रामू निम्मो को मुस्कुराकर देखते हुए, अरे दीदी यह भी कोई पुच्छने की बात है, मुझे तो आप ही ज़्यादा अच्छी लगती हो

निम्मो-मुँह बनाते हुए, तो फिर तू मेरी और ध्यान क्यो नही देता

रामू- देता तो हू दीदी

निम्मो- क्या खाक ध्यान देता है दिन भर रमिया के साथ खेतो मे रहता है और रात को घर आकर खा पीकर सो जाता है,

रामू- नही दीदी ऐसा नही है

निम्मो- अच्छा रामू आज हम खेत से अंधेरा होने के बाद चलेगे

रामू- मंद-मंद मुस्कुराते हुए, जैसी तुम्हारी मर्ज़ी, लेकिन सोच लो रात को कही तुम्हे डर तो नही लगेगा

निम्मो- मुझे भला काहेका डर लगेगा

रामू- नही वो क्या है ना खेतो के आस पास रात को काले-काले साप जो निकलते है

निम्मो- अरे बाप रे फिर तो हमे अभी चल देना चाहिए

रामू- हस्ते हुए, अरे घबराओ नही दीदी मे जो हू तुम्हारे साथ, और फिर रामू खेत से निकल कर निम्मो के पास आकर

खड़ा हो जाता है, और फिर अगर तुम्हे डर लगेगा तो तुम्हे मे अपनी गोद मे उठा कर ले चलूँगा,

निम्मो- मुस्कुराते हुए, अच्छा तू क्या इतना बड़ा हो गया है कि अपनी बड़ी बहन को अपनी गोद मे उठा सकता है

रामू- क्यो नही दीदी, अभी तुमने अपने भाई की ताक़त देखी ही कहाँ है मे तो तुम जैसी दो औरतो को अपनी गोद मे उठा सकता हू,

निम्मो- अच्छा तो फिर उठा कर दिखा मे भी तो देखु कि तू मुझे अपनी गोद मे उठा पाता है या नही

उसका इतना कहना था कि रामू अपने एक हाथ को अपनी दीदी के पीछे लेजा कर उसके भारी चुतड़ों को थामते हुए उसे एक हाथ मे कसे हुए अपने कंधे पर लाद लेता है ओए दूसरे हाथ से अपनी बहन के मोटी गान्ड को सहलाते हुए अब बोलो दीदी उठा लिया कि नही,

निम्मो- अरे वाह रामू तूने तो मुझे एक हाथ से ही उठा लिया, अब मुझे टाँगे ही रहेगा या उतारेगा भी.

रामू- दीदी तुम्हारा तो कोई वजन ही नही है दिल कर रहा है तुम्हे ऐसे ही उठाए रहू

दोनो एक दूसरे से बाते करते हुए मस्त हो रहे थे रामू से बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था और उसका लंड धोती के

अंदर झटके मार रहा था.

रामू- दीदी एक बात कहु

निम्मो- क्या

रामू- हरिया काका कह रहे थे कि,

निम्मो- बोल ना क्या कह रहे थे

रामू- रहने दो तुम्हे अच्छा नही लगेगा

निम्मो- अरे नही तू बता मे बुरा नही मानूँगी

रामू- नही दीदी कुछ नही

निम्मो- तू बताता है कि नही

रामू- नही मे कुछ नही कह रहा था

निम्मो- रामू तू बता दे नही तो मे तेरी हरकत मा से कहूँगी

रामू- कौन सी हरकत

निम्मो- वही जो तू अभी कुछ देर पहले रमिया के साथ कर रहा था

निम्मो की बात सुन कर रामू का मुँह खुला का खुला ही रह गया, और उसने अपना सर झुका लिया

निम्मो- अब ज़्यादा भोला ना बन मे सब जानती हू तेरी हर्कतो के बारे मे, अब जल्दी से बता दे मुझे हरिया काका क्या कह

रहे थे मेरे बारे मे नही तो आज मा के हाथ से मार ज़रूर खाएगा तू.

रामू- वो दीदी

निम्मो- पहले इधर मेरे पास आकर बैठ और फिर बता

रामू- धीरे से निम्मो से सॅट कर बैठ जाता है और निम्मो उसकी जाँघो के उपर हाथ रख कर धीरे-धीरे सहलाते हुए अब

बता,

रामू- दीदी हरिया काका कह रहे थे कि तेरी बहन निम्मो की

निम्मो- अरे आगे भी तो बोल

रामू- वह कह रहे थे की तेरी बहन निम्मो की गान्ड बहुत मोटी हो गई है और जब वह चलती है तो उसकी गान्ड बहुत

मटकती है.

निम्मो- तो तू हरिया काका से मेरे बारे मे ऐसी बाते करता है,

रामू- नही दीदी ऐसा वो कह रहे थे,

निम्मो- और क्या कह रहा था

रामू- बस इतना ही

निम्मो- तो फिर तूने क्या कहा

रामू- मेने कुछ नही बोला

निम्मो- सच बता तूने भी उसकी हाँ मे हाँ मिलाई थी ना

रामू- नही-नही दीदी बिल्कुल नही

निम्मो- उसकी जाँघ सहलाते हुए मतलब तुझे मेरी गान्ड अच्छी नही लगती है

रामू- नही दीदी

निम्मो एक दम से रामू का मोटा लंड उसकी धोती के उपर से पकड़ कर, तो फिर तेरा यह मोटा गन्ना क्यो खड़ा है, कमिने

अपनी बहन की जवानी चोदने का मन कर रहा है और कहता है कि तुझे मेरी गान्ड अच्छी नही लगती है, आज घर चल

मे मा को सब बात बता देती हू,

रामू- उसके पाँव पकड़ता हुआ अरे नही दीदी ऐसा मत करना नही तो मा मुझे घर से निकाल देगी,

निम्मो- मंद-मंद मुस्कुराते हुए, एक शर्त पर मे तुझे छ्चोड़ सकती हू

रामू- मुझे तुम्हारी सब शर्त मंजूर है,

निम्मो- ठीक है तो फिर तुझे मुझे अपना गन्ना चुसाना पड़ेगा और फिर निम्मो झट से रामू की धोती के साइड से हाथ डाल

कर उसका खड़ा हुआ लंड एक झटके मे बाहर निकाल लेती है, निम्मो जब रामू के मोटे खड़े लंड को देखती है तो उसकी

आँखो मे चमक और मुँह मे पानी आ जाता है और उसकी चूत का दाना तन कर खड़ा हो जाता है, निम्मो बिना देर किए

झुक कर रामू के लंड को अपने मुँह मे भर कर चूसना शुरू कर देती है, रामू का लंड जैसे ही अपनी बहन के मुँह मे

जाता है रामू से सहन नही होता है और वह जैसे ही अपनी बहन के भरे हुए मोटे-मोटे थनो को अपने हाथ मे भर

कर दबोचता है उसे ऐसा लगता है जैसे उसका पानी अभी निकल जाएगा, क्योकि आज से पहले इतनी कसी हुई जवान लोंड़िया के मस्त चुचे उसने कभी नही दबाए थे, वह पागलो की तरह अपनी दीदी के मोटे-मोटे खरबूजो को खूब कस-कस कर दबाने और मसल्ने लगता है,

उधर निम्मो की हालत तो रामू से भी खराब हो चुकी थी उसकी चूत पानी छ्चोड़-छ्चोड़ कर लह्गे को गीला कर चुकी थी और जब उसने अपने भाई के मस्त भारी-भारी टटटे पकड़ कर सहलाते हुए उसके लंड को चूसना शुरू किया तो उसे इतना मज़ा आया की वह पागलो की तरह रामू के पूरे लंड को अपने मुँह मे भर-भर कर चूसने लगी, रामू अपने हाथो का सारा ज़ोर निम्मो की मस्त चुचियो को मसल्ने मे लगा रहा था और निम्मो अपने भैया के मस्त लंड को मस्ती के साथ चूसे जा रही थी,

निम्मो- रामू तेरा लंड तो बहुत मस्त है रे, ये रमिया ने कैसे ले लिया होगा,

रामू- दीदी रमिया तो फिर भी बड़ी है, तुम तो यह सोचो कि हरिया काका का लंड 16 की चंदा ने कैसे ले लिया होगा, और

फिर मेरा लंड तो तुम्हारी चूत मे बहुत मज़े से जाएगा,

निम्मो- अपनी दीदी की चूत चतेगा

रामू- हाँ दीदी मे तो कब से मरा जा रहा हू तुम्हारी चूत और गान्ड दोनो को जी भर कर चाटना और चोदना चाहता हू

निम्मो- तो फिर ठीक है मे खड़ी हो जाती हू तो नीचे बैठ कर मेरी चूत को चाट ले

निम्मो खड़ी होकर रामू को अपना लहगा उठा कर जैसे ही अपनी फूली हुई चिकनी चूत दिखाती है रामू अपनी बहन की

मस्तानी बुर पर अपना मुँह एक दम से दबा कर पागल कुत्ते की तरह उसकी चूत की फांको को फैला-फैला कर चाटने लगता

है और निम्मो अपने हाथो से रामू का सर अपनी फूली बुर मे दबाने लगती है,

निम्मो- आह रामू आह ओह और ज़ोर से आ ऐसे ही थोड़ा सा और फैला कर चाट भैया बहुत मज़ा आ रहा है और फिर निम्मो अपनी एक टांग उठा कर रामू के कंधे पर रख देती है जिससे उसकी चूत पूरी तरह से रामू के सामने आ जाती है

रामू- वाह दीदी कितनी गुलाबी और फूली हुई चूत है तुम्हारी और फिर रामू अपनी दीदी की चूत को अपनी जीभ से खुरेदने लगता है.

निम्मो- हे रामू मे पागल हो जाउन्गि और चाट ज़ोर से चाट अपना मुँह डाल दे मेरी चूत मे, रामू कुछ देर तक निम्मो की

चूत को चाटने के बाद उसे पीछे की ओर घुमा कर उसे अपनी झोपड़ी के एक डंडे के सहारे खड़ा करके उसे अपनी गान्ड को

बाहर की ओर निकालने को कहता है और फिर रामू घुटनो के बल अपनी दीदी की गान्ड के पीछे आकर उसका लहगा उपर उठा कर निम्मो को पकड़ा देता है और निम्मो अपने भारी चुतड़ों को और ज़्यादा उभार कर अपने लह्गे को अपने हाथो से थाम कर कमर तक चढ़ा लेती है, अब रामू जब अपनी बहन की गान्ड पर थपकी मारते हुए उसकी गान्ड के पाटो को चीर कर उसकी भूरे रंग की गुदा देखता है और उसकी गुदा से नीचे उसकी फूली फांको वाली रसीली चूत देखता है तो वह सीधे अपनी जीभ से उसकी गुदा से लेकर चूत के तने हुए दाने तक चाटना शुरू कर देता है और निम्मो अपने भारी भरकम

चुतड़ों को अपने भैया के मुँह पर रगड़ने लगती है,

रामू पागल कुत्ते की तरह अपनी दीदी के भारी चुतड़ों को खूब चीर-चीर कर चाटने लगता है, जब रामू अपनी बहन की

गान्ड और चूत चाट-चाट कर लाल कर देता है तब निम्मो सीधी खड़ी होकर अपनी एक टांग रामू की ओर बढ़ा देती है और

रामू उसकी टांग को अपने हाथो मे थाम कर अपने खड़े लंड को अपनी बहन की चूत से भिड़ा कर रगड़ने लगता है,

निम्मो उसके लंड का घर्षण अपनी चूत मे पाते ही पागल हो जाती है और वह रामू के खड़े लंड पर चढ़ने की कोशिश

करने लगती है, तभी रामू उसकी गान्ड मे हाथ डाल कर उसे अपने लंड पर चढ़ा लेता है और उसके लंड का टोपा जैसे ही

निम्मो की खुली चूत के छेद से भिदता है रामू एक तगड़ा झटका मार देता है और उसके लंड का टोपा उसकी बहन की चूत

मे फस जाता है और निम्मो उसके लंड पर चढ़ि कराहने लगती है,

निम्मो- आह रामू मुझे दर्द हो रहा है, मुझे उतार दे

रामू- अरे नही दीदी यह तो थोड़ा सा दर्द है अभी देखना कितना मज़ा आएगा तुम्हे बस धीरे-धीरे मेरे लंड पर बैठने

की कोशिश करो और फिर रामू अपनी बहन की मोटी गान्ड को पकड़ कर अपने लंड पर दबाने लगता है और अपने घुटनो को थोड़ा नीचे करके अपनी कमर का एक जोरदार धक्का निम्मो की उठी हुई चूत मे मार देता है और उसका आधे से ज़्यादा लंड एक दम से उसकी बहन की चूत मे फस जाता है,

निम्मो- आह रामू बहुत मोटा है तेरा उपर से खड़े-खड़े मुझे अपने लंड पर बैठा रहा है बहुत दर्द हो रहा है

रामू- दीदी मेने जब से तुम्हारी फूली हुई चूत को मुतते देखा है तब से ही मेरा दिल कर रहा था कि तुम्हे अपने लंड पर

बैठा कर तुम्हारी चूत फाड़ने का अलग ही मज़ा आएगा, खड़े-खड़े मेरा लंड तुम्हारी चूत मे बहुत कसा हुआ घुस

रहा है चाहो तो देख लो अब तो मेरा लंड धीरे-धीरे तुम्हारी चिकनी चूत मे सरक-सरक कर पूरा अंदर फिट हो गया है,

क्रमशः.............


gataank se aage......................

nimmo- vaise chachi chanda bhi ab badi hone lagi hai iske byah ke bare me sochna shuru kar do

kamini- are us geeta ka byah kiya tha aur vah kutiya tab se yahi padi hai iska byah kar diya to kya pata yah bhi hamare

sar hi na aa jaye me to kahti hu in kutiyo ko kunwari hi padi rahne de kam se kam koi kahne wala to nahi hoga

nimmo- haste huye, kya pata chachi yah kunwari hai ya nahi

chanda- lo didi pani piyo

nimmo- kyo ri chanda kabhi hamare kheto ki taraf bhi aa jaya kar mast ganne chuswaungi

chanda- didi mujhe to baba bade mast ganne lakar dete hai

nimmo- are to kya hua kabhi hamare khet ke ganne bhi chakh kar dekh, chachi tumne chuse hai hamre khet ke ganne

kamini- are kaha mujhe to apne hi ganne chusne ko nahi mil rahe hai tere khet ke kaha se chusungi

nimmo- kamini chachi ki moti jangho ko sahlate huye, kaho to me apne khet ke ganne chusane ka intjam karu

kamini- muskurakar pahle yah bata tune chuse hai apne khet ke ganne

nimmo- abhi tak to nahi

kamini- pahle tu to chus kar dekh le phir mujhe chuswana,

nimmo- to thik hai me jaldi hi tumhe apne khet ka sabse mota ganna chuswaungi achcha chachi me ja rahi hu phir

aaungi aur phir nimmo vapas apne khet ki aur chal deti hai,

ramiya- aah ramu bhaiya ab chhod do kahi didi na aa jaye

ramu pahle ek bar tu mere munh par baith ja uske bad chali jana, ramu jaldi se khat par let jata hai aur ramiya uske sar ki

taraf apni gaanD karke apni skirt unchi karke baith jati hai aur khud ramu ke lund ko pakad kar chatne lagti hai ramu uske

mote-mote chutdo ko khub kas-kas kar phailate huye uski gaanD ke surakh aur uski chut ke ras se bhige ched ko chatne

lagta hai, lekin jaise hi nimmo vahan pahuchti hai dono ko us position me dekh kar uske per vahi ke vahi ruk jate hai aur

uska munh khula ka khula rah jata hai vah jaldi se ganne ke pas ki jhadiyo me chhup jati hai aur dono ko dekhne lagti hai

uski chut se pani bahne lagta hai ramu ka puri tarah tana hua mota lund dekh kar nimmo ki aankhe phati ki phati rah jati

hai,

hay rabba ramu ka loda kitna bada hai kitna mast lag raha hai aur is kutiya ramiya ko dekho kitne pyar se chat rahi hai

iski to aaj me ma se kah kar khal udhadwa dungi, kamini mujhse kitni choti hai aur itne bade lund par kaise jhum rahi

hai, hay me kya karu aur phir nimmo apni ek ungli apne ghaghre me le jakar apni chut ki phanko ko sahlati hui chut ke

ched me dal deti hai,

ramiya- bhaiya jeebh andar ghusao na uska kahna tha ki ramu apni jeebh ko uski chut ke ched me kas kar pel deta hai

jaise hi ramiya ka pani nikalne ko hota hai vah ramu ka lund jor-jor se chusna chalu kar deti hai aur phir ramu ek dam se

uske munh me apne pani ki pichkari teji se marne lagta hai aur ramiya apni chut ko ramu ke munh me jor-jor se ragadte

huye uske lund ka pani chusne lagti hai, karib do minute bad dono alag hote hai aur jaldi se kapde thik kar lete hai,

ramiya jaise hi jane ko hoti hai samne se nimmo aa jati hai,

ramiya- didi me ja rahi hu tum bhi chalogi kya

nimmo- nahi tu ja me ramu ke sath sham tak aaungi

ramiya ke jane ke bad, nimmo-kyo re ramu itna pasine-pasine kyo ho raha hai jyada kam kar liya kya

ramu- are nahi didi bas aaj garmi kuch jyada hi lag rahi hai

nimmo- are garmi lag rahi hai to naha le kuch thandak ho jayegi, chal aaj me apne bhaiya ko nahla deti hu,

ramu- are nahi didi itni bhi garmi nahi hai aur abhi bahut kam baki bhi hai, tumhara khana rakha hai kha lo

nimmo khana khane lagti hai aur ramu apne kam me jut jata hai, nimmo apni jangho ko phailaye ramu ke majboot

badan ko ghur rahi thi aur ramu apne kam me laga hua beech-beech me nimmo ki taraf bhi dekh leta tha,

nimmo- achcha ramu ek bat punchu

ramu- ha puncho

nimmo- tujhe me jyada achchi lagti hu ya ramiya

ramu- nimmo ko muskurakar dekhte huye, are didi yah bhi koi puchhne ki bat hai, mujhe to aap hi jyada achchi lagti ho

nimmo-munh banate huye, to phir tu meri aur dhyan kyo nahi deta

ramu- deta to hu didi

nimmo- kya khak dhyan deta hai din bhar ramiya ke sath kheto me rahta hai aur rat ko ghar aakar kha pikar so jata hai,

ramu- nahi didi aisa nahi hai

nimmo- achcha ramu aaj hum khet se andhera hone ke bad chalege

ramu- mand-mand muskurate huye, jaisi tumhari marji, lekin soch lo rat ko kahi tumhe dar to nahi lagega

nimmo- mujhe bhala kaheka dar lagega

ramu- nahi vo kya hai na kheto ke aas pas rat ko kale-kale sap jo nikalte hai

nimmo- are bap re phir to hame abhi chal dena chahiye

ramu- haste huye, are ghabrao nahi didi me jo hu tumhare sath, aur phir ramu khet se nikal kar nimmo ke pas aakar

khada ho jata hai, aur phir agar tumhe dar lagega to tumhe me apni god me utha kar le chalunga,

nimmo- muskurate huye, achcha tu kya itna bada ho gaya hai ki apni badi bahan ko apni god me utha sakta hai

ramu- kyo nahi didi, abhi tumne apne bhai ki takat dekhi hi kaha hai me to tum jaisi do aurto ko apni god me utha sakta

hu,

nimmo- achcha to phir utha kar dikha me bhi to dekhu ki tu mujhe apni god me utha pata hai ya nahi

uska itna kahna tha ki ramu apne ek hath ko apni didi ke piche lejakar uske bhari chutdo ko thamte huye use ek hath

me kase huye apne kandhe par lad leta hai aue dusre hath se apni bahan ke moti gaanD ko sahlate huye ab bolo didi utha

liya ki nahi,

nimmo- are wah ramu tune to mujhe ek hath se hi utha liya, ab mujhe tange hi rahega ya utarega bhi.

ramu- didi tumhara to koi vajan hi nahi hai dil kar raha hai tumhe aise hi uthaye rahu

dono ek dusre se bate karte huye mast ho rahe the ramu se bardast karna mushkil ho raha tha aur uska lund dhoti ke

andar jhatke mar raha tha.

ramu- didi ek bat kahu

nimmo- kya

ramu- hariya kaka kah rahe the ki,

nimmo- bol na kya kah rahe the

ramu- rahne do tumhe achcha nahi lagega

nimmo- are nahi tu bata me bura nahi manugi

ramu- nahi didi kuch nahi

nimmo- tu batata hai ki nahi

ramu- nahi me kuch nahi kah raha tha

nimmo- ramu tu bata de nahi to me teri harkat ma se kahungi

ramu- kaun si harkat

nimmo- vahi jo tu abhi kuch der pahle ramiya ke sath kar raha tha

nimmo ki bat sun kar ramu ka munh khula ka khula hi rah gaya, aur usne apna sar jhuka liya

nimmo- ab jyada bhola na ban me sab janti hu teri harkato ke bare me, ab jaldi se bata de mujhe hariya kaka kya kah

rahe the mere bare me nahi to aaj ma ke hath se mar jarur khayega tu.

ramu- vo didi

nimmo- pahle idhar mere pas aakar baith aur phir bata

ramu- dhire se nimmo se sat kar baith jata hai aur nimmo uski jangho ke upar hath rakh kar dhire-dhire sahlate huye ab

bata,

ramu- didi hariya kaka kah rahe the ki teri bahan nimmo ki

nimmo- are aage bhi to bol

ramu- vah kah rahe the ki teri bahan nimmo ki gaanD bahut moti ho gai hai aur jab vah chalti hai to uski gaanD bahut

matakti hai.

nimmo- to tu hariya kaka se mere bare me aisi bate karta hai,

ramu- nahi didi aisa vo kah rahe the,

nimmo- aur kya kah raha tha

ramu- bas itna hi

nimmo- to phir tune kya kaha

ramu- me kuch nahi bola

nimmo- sach bata tune bhi uski ha me ha milai thi na

ramu- nahi-nahi didi bilkul nahi

nimmo- uski jangh sahlate huye matlab tujhe meri gaanD achchi nahi lagti hai

ramu- nahi didi

nimmo ek dam se ramu ka mota lund uski dhoti ke upar se pakad kar, to phir tera yah mota ganna kyo khada hai, kamine

apni bahan ki jawani chodane ka man kar raha hai aur kahta hai ki tujhe meri gaanD achchi nahi lagti hai, aaj ghar chal

me ma ko sab bat bata deti hu,

ramu- uske panv pakadta hua are nahi didi aisa mat karna nahi to ma mujhe ghar se nikal degi,

nimmo- mand-mand muskurate huye, ek shart par me tujhe chhod sakti hu

ramu- mujhe tumhari sab shart manjur hai,

nimmo- thik hai to phir tujhe mujhe apna ganna chusana padega aur phir nimmo jhat se ramu ki dhoti ke side se hath dal

kar uska khada hua lund ek jhatke me bahar nikal leti hai, nimmo jab ramu ke mote khade lund ko dekhti hai to uski

aankho me chamak aur munh me pani aa jata hai aur uski chut ka dana tan kar khada ho jata hai, nimmo bina der kiye

jhuk kar ramu ke lund ko apne munh me bhar kar chusna shuru kar deti hai, ramu ka lund jaise hi apni bahan ke munh me

jata hai ramu se sahan nahi hota hai aur vah jaise hi apni bahan ke bhare huye mote-mote thano ko apne hanth me bhar

kar dabochta hai use aisa lagta hai jaise uska pani abhi nikal jayega, kyoki aaj se pahle itni kasi hui jawan londiya ke

mast doodh usne kabhi nahi dabaye the, vah paglo ki tarah apni didi ke mote-mote kharbujo ko khub kas-kas kar dabane

aur masalne lagta hai,

udhar nimmo ki halat to ramu se bhi kharab ho chuki thi uski chut pani chhod-chhod kar lahge ko gila kar chuki thi aur

jab usne apne bhai ke mast bhari-bhari tatte pakad kar sahlate huye uske lund ko chusna shuru kiya to use itna maza

aaya ki vah paglo ki tarah ramu ke pure lund ko apne munh me bhar-bhar kar chusne lagi, ramu apne hatho ka sara jor

nimmo ke mast doodh ko masalne me laga raha tha aur nimmo apne bhaiya ke mast lund ko masti ke sath chuse ja rahi

thi,

nimmo- ramu tera lund to bahut mast hai re, ye ramiya ne kaise le liya hoga,

ramu- didi ramiya to phir bhi badi hai, tum to yah socho ki hariya kaka ka lund 16 ki chanda ne kaise le liya hoga, aur

phir mera lund to tumhari chut me bahut maze se jayega,

nimmo- apni didi ki chut chatega

ramu- ha didi me to kab se mara ja raha hu tumhari chut aur gaanD dono ko jee bhar kar chatna aur chodna chahta hu

nimmo- to phir thik hai me khadi ho jati hu to niche baith kar meri chut ko chat le

nimmo khadi hokar ramu ko apna lahga utha kar jaise hi apni phuli hui chikni chut dikhati hai ramu apni bahan ki

mastani bur par apna munh ek dam se daba kar pagal kutte ki tarah uski chut ki phanko ko phaila-phaila kar chatne lagta

hai aur nimmo apne hatho se ramu ka sar apni phuli bur me dabane lagti hai,

nimmo- aah ramu aah oh aur jor se aah aise hi thodas aur phaila kar chat bhaiya bahut maza aa raha hai aue phir nimmo

apni ek tang utha kar ramu ke kandhe par rakh deti hai jisse uski chut puri tarah se ramu ke samne aa jati hai

ramu- wah didi kitni gulabi aur phuli hui chut hai tumhari aur phir ramu apni didi ki chut ko apni jeebh se khuredne lagta

hai.

nimmo- hay ramu me pagal ho jaungi aur chat jor se chat apna munh dal de meri chut me, ramu kuch der tak nimmo ki

chut ko chatne ke bad use piche ki aur ghuma kar use apni jhopadi ke ek dande ke sahare khada karke use apni gaanD ko

bahar ki aur nikalne ko kahta hai aur phir ramu ghutno ke bal apni didi ki gaanD ke piche aakar uska lahga upar utha kar

nimmo ko pakda deta hai aur nimmo apne bhari chutdo ko aur jyada ubhar kar apne lahge ko apne hatho se tham kar

kamar tak chadha leti hai, ab ramu jab apni bahan ki gaanD par thapki marte huye uski gaanD ke pato ko cheer kar uski

bhure rang ki guda dekhta hai aur uski guda se niche uski phuli phanko waali rasili chut dekhta hai to vah sidhe apni

jeebh se uski guda se lekar chut ke tane huye dane tak chatna shuru kar deta hai aur nimmo apne bhari bharkam

chutdo ko apne bhaiya ke munh par ragadne lagti hai,

ramu pagal kutte ki tarah apni didi ke bhari chutdo ko khub cheer-cheer kar chatne lagta hai, jab ramu apni bahan ki

gaanD aur chut chat-chat kar lal kar deta hai tab nimmo sidhi khadi hokar apni ek tang ramu ki aur badha deti hai aur

ramu uski tang ko apne hatho me tham kar apne khade lund ko apni bahan ki chut se bhida kar ragadne lagta hai,

nimmo uske lund ka gharshan apni chut me pate hi pagal ho jati hai aur vah ramu ke khade lund par chadhne ki koshish

karne lagti hai, tabhi ramu uski gaanD me hath bahr kar use apne lund par chadha leta hai aur uske lund ka topa jaise hi

nimmo ki khuli chut ke ched se bhidta hai ramu ek tagda jhatka mar deta hai aur uske lund ka topa uski bahan ki chut

me phas jata hai aur nimmo uske lund par chadhi karahne lagti hai,

nimmo- aah ramu mujhe dard ho raha hai, mujhe utar de

ramu- are nahi didi yah to thoda sa dard hai abhi dekhna kitna maza aayega tumhe bas dhire-dhire mere lund par baithne

ki koshish karo aur phir ramu apni bahan ki moti gaanD ko pakad kar apne lund par dabane lagta hai aur apne ghutno ko

thoda niche karke apni kamar ka ek jordar dhakka nimmo ki uthi hui chut me mar deta hai aur uska adhhe se jyada lund

ek dam se uski bahan ki chut me phas jata hai,

nimmo- aah ramu bahut mota hai tera upar se khade-khade mujhe apne lund par baitha raha hai bahut dard ho raha hai

ramu- didi mene jab se tumhari phuli hui chut ko mutte dekha hai tab se hi mera dil kar raha tha ki tumhe apne lund par

baitha kar tumhari chut phadne ka alag hi maza aayega, khade-khade mera lund tumhari chut me bahut kasa hua ghus

raha hai chaho to dekh lo ab to mera lund dhire-dhire tumhari chikni chut me sarak-sarak kar pura andar fit ho gaya hai,

kramashah.............

rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 13 Oct 2014 11:42

गन्ने की मिठास--8

गतान्क से आगे......................

निम्मो रामू के लंड पर अपनी टाँगे फैलाए तंगी हुई थी और रामू नीचे से धीरे-धीरे अपने मोटे लंड को अपनी बहना

रानी की चूत मे पेल रहा था, जब रामू उसे अपनी गोद मे उठाए-उठाए थक गया तब उसने निम्मो को खाट पर लाकर लेटा

दिया और उसकी दोनो जाँघो को फैला कर एक झटके मे अपना लंड अंदर पेल दिया और फिर खूब कस-कस कर निम्मो को

चोदने लगा, अब निम्मो को भी मज़ा आने लगा था और वह रामू के लंड की ओर अपने चूतड़ उठाने लगी थी,

निम्मो- आह आह रामू तू कितना अच्छा चोद्ता है ऐसे ही मुझे चोद्ते रहना, आह और ज़ोर से खूब कस कर चोद आह आह

रामू सतसट अपने लंड को अपनी दीदी की चूत मे मारने लगता है और उसका लंड बड़ी चिकनाहट के साथ आगे पिछे होने

लगता है. रामू अपनी बहन पर पूरी तरह लेट कर उसके रसीले होंठो को चूमने लगता है और एक हाथ से उसकी चुचियों को

मसल्ने लगता है, करीब 10 मिनिट तक रामू अपनी बहन को चोदने के बाद उसकी चूत मे अपना पानी छ्चोड़ देता है और

निम्मो आह-आह करती हुई रामू से पूरी तरह चिपक जाती है और उसकी चूत से भी पानी बहने लगता है,

निम्मो- अपनी जाँघो को फैला कर रामू को दिखाती हुई देख रामू तूने मेरी चूत फाड़ कर रख दी

रामू- दीदी अब तो मे इस चूत को रोज फाड़ुँगा

निम्मो- मुस्कुराती हुई तू बहुत बदमाश है तूने रमिया को कैसे पटा लिया, अब तो तू उसे रोज चोद्ता है ना

रामू- अरे दीदी अभी उसे चोदे दो तीन दिन ही हुए है पर जब मे उसे चोद्ता हू तो ऐसा लगता है किसी छोटी सी लोंड़िया को चोद रहा हू और जब तुम्हे चोद्ता हू तो ऐसा लगता है जैसे किसी जवान औरत को चोद रहा हू,

निम्मो- तो तुझे ज़्यादा मज़ा किसे चोदने मे आया है

रामू- दीदी मज़ा तो दोदो को चोदने मे आता है पर तुम्हारी चूत मारने मे एक अलग ही मज़ा मिला है, सच तो यह है

दीदी मेरा लंड शुरू से ही औरतो को देख कर जल्दी खड़ा हो जाता है क्योकि उनका पूरा बदन भरा हुआ रहता है और खास

कर उनके भारी चूतड़ मुझे पागल कर देते है,

निम्मो- अच्छा यह बता तुझे कामिनी चाची कैसी लगती है, उसके चूतड़ तो मुझसे भी भारी है,

रामू- अच्छी है पर उसका चेहरा तुम्हारे जैसा सुंदर नही है,

निम्मो- अरे तुझे कौन सा उसका चेहरा चूमना है, तू तो यह बता उसकी मोटी गान्ड तुझे कैसी लगती है, अगर चाची तुझसे

चुदवाये तो चोदेगा,

रामू- मुस्कुराते हुए, दीदी तुम कहोगी तो चोद दूँगा

निम्मो- मुस्कुराकर अच्छा ठीक है तेरी यह इच्छा जल्दी ही पूरी हो जाएगी

रामू- वो कैसे

निम्मो- बस तू मुझ पर छ्चोड़ दे और अगर तुझे चंदा को चोदना हो तो उसके लिए भी मेरे पास एक उपाय है

रामू- वह क्या दीदी

निम्मो- चल पहले मे मुँह हाथ धो लेती हू और अब शाम भी हो चुकी है हम रास्ते मे चलते-चलते बात करेगे.

निम्मो अपने हाथ पाँव धोकर आ जाती है और रामू बचा हुआ काम ख़तम करके निम्मो के साथ घर की ओर चल देता है

निम्मो के भारी चुतड़ों को थामे हुए रामू उसके साथ चलने लगा उसकी आँखो के सामने उसकी बहन की गदराई जवानी

नाच रही थी वह निम्मो से पूरी तरह सटा हुआ चल रहा था,

अंधेरा लगभग हो ही चुका था, हल्की-हल्की ठंडी हवाए चलना शुरू हो चुकी थी,

रामू- दीदी डर लग रहा है क्या

निम्मो- नही रे मुझे तो थोड़ी-थोड़ी ठंड लग रही है

रामू- ठीक है थोड़ी दूर और चलना है और क्या

निम्मो- रामू मुझे पेशाब लगी है,

रामू- उसे देख कर, कही भी कर लो दीदी

निम्मो अपना घाघरा उठा कर बैठ जाती है और मूतने की कोशिश करने लगती है, रामू उसके पीछे जाकर खड़ा हो जाता है

अपनी बहन की मोटी गान्ड देख कर उसका लंड तन जाता है और वह अपनी बहन के पीछे बैठ कर

रामू- क्या हुआ दीदी नही आ रहा क्या

निम्मो- हा रे, लेकिन आ जाएगा

उसकी बात सुनते ही रामू अपने हाथ को उसकी मोटी गान्ड के नीचे से डाल कर सीधे उसकी कातीली चूत को अपने हाथो मे जाकड़ लेता है उसकी इस हरकत से निम्मो सिहर जाती है और तभी रामू अपनी दीदी की चूत के दाने को धीरे-धीरे मसल्ने लगता है तभी निम्मो की चूत से फुहार निकलने लगती है और रामू एक दम से हाथ हटा लेता है फिर रामू अपना हाथ वापस चूत पर रख देता है और निम्मो का पेशाब रुक जाता है, रामू फिर से निम्मो की चूत के फुदकते दाने को छेड़ देता है और निम्मो फिर से मूतने लगती है, जब निम्मो मूत कर खड़ी होती है तभी रामू उसे अपनी बाँहो मे भर कर उसके गालो को चूमता हुआ,

रामू- दीदी एक बार यही गन्नो के बीच मे तुम्हे चोदना चाहता हू, घर जाने के बाद मोका मिलना मुश्किल है,

और फिर रामू निम्मो को अपनी बाँहो मे भर कर उसे चूमते हुए अपने हाथो से उसकी नंगी गान्ड को मसल्ते हुए उसे

उठा कर गन्नो के बीच लेजा कर थोड़ा झुका कर खड़ा कर देता है, निम्मो दो गन्नो के डंडे को पकड़े हुए अपनी मोटी

गान्ड उभार कर खड़ी हो जाती है और रामू अपने मस्त लंड को मसलता हुआ उसे अपनी बहन की फूली हुई फांको से भरी

गुलाबी चूत मे फसा कर एक मोटी गान्ड को अपने हाथो मे अच्छी तरह थाम कर एक तगड़ा धक्का मारता है और उसका

मोटा लंड आधे से ज़्यादा उसकी दीदी की चूत मे धस जाता है,

रामू धीरे-धीरे अपनी दीदी के पके आमो की तरह कसी चुचियो को दबाना शुरू कर देता है और अपनी कमर के तगड़े

धक्के नीचे की तरफ अपनी दीदी की मस्तानी गान्ड मे मारने लगता है, कुछ देर तक रामू अपने लंड के धक्के एक रफ़्तार से अपनी दीदी की फूली हुई चूत मे मारता रहता है लेकिन कुछ देर बाद वह अपनी बहन के उठे हुए पेडू को अपने हाथो मे

थाम कर कस-कस कर अपनी दीदी की चूत मे अपना मूसल जैसा लंड ठोकने लगता है और निम्मो इस तरह की जोरदार चूत ठुकाई से मज़ा पाते हुए अपनी मोटी गान्ड को पूरी ताक़त से अपने भाई के लंड पर मार रही थी, रामू ने अपनी दीदी के मोटे-मोटे कसे दूध को कस-कस कर दबाते हुए उसकी चूत मे अपने लंड को पेलता रहा,

कुछ देर बाद रामू ने अपनी दीदी को सामने करके उसे अपनी गोद मे चढ़ा कर अपने लंड पर बैठा लिया और अपने लंड को

अपनी दीदी की चूत मे तबीयत से मारते हुए उसके भारी चुतड़ों को सहलाता रहा, निम्मो पूरी मस्ती मे आ चुकी थी और

अपने छ्होटे भाई के लंड पर चढ़ कर इस तरह से चूत मरवाने के कारण उसकी चूत मे एक मीठी खुजली शुरू हो गई और

उसने अपनी फूली चूत को अपने भाई के लंड पर खूब कस-कस कर मारना शुरू कर दिया और नीचे से रामू ने भी अपनी दीदी की चूत मे अपने लंड को पेलना शुरू कर दिया और फिर निम्मो एक दम से अपने भाई के सीने से कस कर चिपक जाती है और उसकी चूत से ढेर सारा पानी बह कर रामू के लंड पर आ जाता है और रामू भी एक लंबी पिचकारी अपनी दीदी की चूत मे मार कर उसकी चूत को अपने लंड पर कस कर चिपका लेता है,

निम्मो- रामू आज बहुत मस्त मज़ा आया है तू बड़ा मस्त चुड़क्कड़ बन गया है, तुझसे जो भी औरत अपनी चूत

मरवाएगी वह एक दम मस्त हो जाएगी,

रामू- दीदी तुम्हारा जिस्म इतना भरा हुआ है कि मे रात भर तुम्हे नंगी करके चोद सकता हू, तुम्हे देखते ही मेरा लंड

खड़ा हो जाता है,

निम्मो- हस्ते हुए अच्छा और किसे देख कर तेरा लंड खड़ा होता है,

रामू- दीदी अब तुमसे क्या च्छुपाना मेरा लंड तो कामिनी चाची की मोटी गान्ड देख कर भी खड़ा हो जाता है

निम्मो- और इसके अलावा

रामू- इसके अलावा फिर चंदा और रमिया को अगर नंगी देखता हू तो मेरा लंड खड़ा हो जाता है

निम्मो- अच्छा और यह बता कभी मा को देख कर भी तेरा लंड खड़ा होता है, मा की मोटी गान्ड तो सबसे ज़्यादा चोदने

लायक नज़र आती है, मा को देख कर तो तेरा लंड ज़रूर खड़ा होता होगा,

रामू- हा मा को जब नहाते देखता हू तो ज़रूर लंड खड़ा हो जाता है

निम्मो- मा को कभी पूरी नंगी देखा है तूने, अगर तू मा को पूरी नंगी देख ले तो आज रात ही तू उसे इस कदर चोदने के

लिए पागल हो जाए कि क्या बताऊ,

रामू- नही दीदी मा को पूरी नंगी तो मेने कभी नही देखा लेकिन उनकी मोटी-मोटी गोरी जाँघो की भरी हुई जवानी देख

कर जब मे पूरे जिस्म की कल्पना करता हू तो मेरा लंड झटके मारने लगता है,

निम्मो- रामू तू रात को मा की तरफ ही सोता है ना, कही ऐसा तो नही कि रात को जब मा सो जाती होगी तो तू उनकी मोटी गान्ड से अपने लंड को सटा कर उनकी गान्ड को रगड़ता और दबाता होगा,

रामू- नही दीदी मेने अभी तक तो ऐसा नही किया है,

निम्मो- हस्ते हुए रामू कहीं रात को मा तुझसे अपनी गान्ड तो नही मरवाती है ना, पता चले हमे कुछ पता ही नही है

और आधी रात को तू चुपचाप पड़े-पड़े ही अपना लंड मा की मोटी गान्ड मे तेल लगा कर डाल देता हो,

रामू- हस्ते हुए तुम भी ना दीदी, कहाँ क़ी बात कहाँ ले गई मेरी भला हिम्मत है मा को हाथ लगाने की,

निम्मो- अरे बेटा जब भारी चूतड़ देख कर लंड खड़ा हो जाता है तब वह नही सोचता कि यह मोटे-मोटे चोदने लायक

चूतड़ किसके है, तेरा मन अगर मा की गान्ड और उसकी फूली हुई पाँव रोटी जैसी चूत मारने का मन हो तो बता हो सकता है मे कुछ मदद कर सकु,

रामू अपने मोटे लंड को मसल्ते हुए दीदी तुमने आज मा के नंगे जिस्म के बारे मे मुझसे इतनी बात कह गई कि मेरा लंड

पूरी तरह तन कर फिर से चूत मारने का इरादा बना रहा है,

निम्मो- अरे तू फिकर ना कर अगर तेरा इतना ही मन मा की गान्ड मारने का कर रहा है तो बता मे कुछ ना कुछ करती हू,

रामू- दीदी मा को पूरी नंगी करके अपने बदन से चिपकाने के लिए तो मे मरा जा रहा हू मुझे तो मा जब कह दे मे

उसे चोदने के लिए तैयार हू,

निम्मो- अच्छा चल अब चुप हो जा घर पहुच रहे है और सुन रमिया से यह सब बात मत करना उसे अभी अकल नही है,

रामू- तुम फिकर ना करो दीदी और फिर रामू अपनी दीदी के मोटे-मोटे दूध को अपने हाथ से दबाकर उसके होंठो को एक बार कस कर चूमता है और फिर दोनो घर के अंदर पहुच जाते है, और जब अंदर का नज़ारा देखते है तो दोनो की निगाहे एक दूसरे से मिलती है और दोनो के होंठो पर मुस्कान फैल जाती है और जब दोनो दुबारा सामने देखते है तो

सुधिया दीवार से टिकी हुई थी और उसका घाघरा उसकी जाँघो तक चढ़ा हुआ था और रमिया अपनी मा की मोटी मुलायम

जाँघो को तेल लगा कर मालिश कर रही थी, सुधिया ने जब दोनो को देखा

सुधिया- आ गये तुम दोनो

निम्मो- क्या हुआ मा पेर दर्द कर रहे है क्या

सुधिया- हा रे थोड़ी अकड़न महसूस हो रही थी तो मेने रमिया से कहा चल थोड़ा तेल मालिश ही कर दे शायद आराम मिल

जाए,

निम्मो- अरे मा रमिया के नाज़ुक हाथो से क्या आराम मिलेगा, तुम्हारी जाँघो की मालिश तो सख़्त हाथो से होगी तो ही

तुम्हे मज़ा आएगा, मे तो कहती हू तुम रामू से मालिश करवा लिया करो, वह जब अपने मर्दाना हाथो से कस कर

तुम्हारी जाँघो की मालिश करेगा तो देखना तुम्हारा बदन मस्त हो जाएगा,

सुधिया- चल अभी थका हारा आया है बेचारा, मे फिर कभी उससे मालिश करवा लूँगी,

निम्मो- रमिया तू जा रामू और मेरे लिए पानी ले आ मा की मालिश मे कर देती हू और फिर निम्मो अपनी मा की गोरी पिंदलियो को सहलाने लगती है और रामू हाथ मुँह धोने चला जाता है,

निम्मो- मा तुझे कभी बापू की याद भी सताती होगी ना

सुधिया- अरे बेटी सताती भी है तो उससे क्या होगा, तेरा बापू उपर से आ तो नही जाएगा मेरी खेरियत पुच्छने, तेरा बापू

होता तो अब तक तेरा ब्याह हो चुका होता और दो तीन बच्चे भी हो गये होते,

निम्मो- मा ब्याह लायक तो रामू भी हो गया है

सुधिया- हा हो तो गया है पर पहले तेरा ब्याह करना ज़रूरी है उसके बाद ही रामू का होगा

निम्मो- मा आज तो कामिनी चाची भी अपने खेतो मे आई थी और तेरे बारे मे भी पुंछ रही थी

सुधिया- अरे उसके घर जाना ही बेकार है वह कमीना हरिया जब भी मुझे देखता है कुत्ता ऐसे घूरता है जैसे खा

जाएगा, वह बड़ा ही कमीना है इस उमर मे भी वह औरतो के चुतड़ों को दिन भर घूरता रहता है,

निम्मो- तो क्या मा वह तुम्हे भी घूरते है

सुधिया- क्यो तुझे भी देख रहा था क्या

निम्मो- हा मा मुझे जब भी मिलते है बस कभी मेरी छातीयो को और कभी मेरे पिछे देखने लगते है

सुधिया- तू उस हरामी से बच कर रहा कर उसकी नीयत का कोई भरोसा नही है उसकी खुद की बेटी मीना जब से ससुराल

छ्चोड़ कर आई है दिन रात घर मे ही घुसी रहती है

रात को निम्मो लेटी थी लेकिन उसकी चूत उसे सोने नही दे रही थी और रामू और उसके बीच मे उसकी मा लेटी हुई थी, निम्मो को बड़ी मुश्किल से नींद आई और सुबह जब वह सोकर उठी तब तक रामू और रमिया खेतो की ओर जा चुके थे,

सुधिया- उठ जा घोड़ी सूरज सर पर चढ़ चुका है और तू ऐसे सो रही है जैसे रात भर ठीक से तुझे नींद ना आई हो

निम्मो- मा रामू चला गया क्या

सुधिया- हा और शायद रात को भी ना आए उसे खेतो की मेड मे खुदाई करके वहाँ थोड़ी-थोड़ी दूर पर पोधे लगाने है

और उस टूटी हुई झोपड़ी की मरम्मत भी करना है,

निम्मो- कुछ सोच कर मा रमिया तो शाम को आ जाएगी ना

सुधिया- हाँ वह तो आ जाएगी

निम्मो- तो मा शाम को मे भी खेतो मे चली जाउ क्या

सुधिया- तू वहाँ क्या करेगी और फिर तुझे जल्दी ही नींद आने लगती है वहाँ कहाँ सोएगी

निम्मो- अरे मा खाट है ना रामू काम करेगा और मे उससे बाते करते हुए उसकी बोरियत दूर कर दूँगी

सुधिया- तेरी जैसी मर्ज़ी हो कर मे चली नहाने

निम्मो- मा तुम नंगी होकर नहाती हो या नही

सुधिया- हस्ते हुए मेरी कोई उमर है नंगी होकर नहाने की

निम्मो- तो मा किस उमर मे नंगी होकर नहाना चाहिए

सुधिया- मुस्कुराते हुए, मे तो जब तेरी उमर की थी तब ज़रूर नंगी होकर नहाती थी,

निम्मो अपनी मा से ज़्यादा से ज़्यादा रंगीन बाते करने का प्रयास कर रही थी लेकिन वह ज़्यादा कुछ नही कह पा रही थी

उसने मन मे सोचा क्यो ना कामिनी चाची के मध्यम से मा के ज़ज्बात जाना जाय,

उधर रामू जब हरिया काका के खेत के पास से निकला तब

कामिनी- का है रामू आज निम्मो को साथ नही लाए,

रामू- नही चाची वह तो सो रही थी और मे इधर आ गया, पर दो दिन से हरिया काका नज़र नही आ रहे है कही बाहर

गये है क्या,

कामिनी- बाहर गये थे बेटा लेकिन शाम तक आ जाएगे

रामू की नज़र बार-बार कामिनी की नंगी कमर और उसके गुदाज मसल पेट की ओर जा रही थी क्यो कि कामिनी ने नाभि के काफ़ी नीचे से साडी पहनी हुई थी और उसका उठा हुआ गोरा चिट्ठा पेट इस तरह नज़र आ रहा था कि किसी का भी लंड खड़ा हो जाए,

उधर कामिनी भी कई दिनो से ठीक से चुदी नही थी और उसका मन भी तबीयत से लंड लेने का कर रहा था और वह रामू से बात करते हुए धीरे-धीरे अपने मसल पेट पर हाथ फेर रही थी, रामू का लंड झटके मारने लगा था,

रामू- चाची एक बात पुच्छना थी

कामिनी- हा बोल क्या पुच्छना है

रामू रमिया की ओर देख कर रमिया तू चल मे अभी थोड़ी देर मे आता हू, रमिया रामू की बात सुन कर जाने लगती है

तभी दूसरी और से चंदा आ जाती है और

चंदा- मा मे भी रमिया दीदी के खेत पर जाउ

कामिनी- ठीक है जा, और फिर रमिया और चंदा खेत की ओर जाने लगते है

कामिनी- मन मे सोच रही थी कि रामू शायद उससे कोई मीठी-मीठी बाते करने वाला है, हाँ रामू अब कहो क्या कह

रहे थे

रामू- चाची वो हरिया काका की चिलम यहाँ रखी है क्या

कामिनी- उसे देख कर का तू भी चिलम पीने लगा है

रामू- अरे चाची एक दिन काका ने पिला दी तब से बड़ा दिल कर रहा है

कामिनी- अच्छा तू खत पर बैठ मे देखती हू और फिर कामिनी झोपड़ी मे जाकर हरिया की चिलम उठा लाती है और रामू

को देते हुए ले मिल गई,

रामू- लगता है काका लेकर नही गये

कामिनी- अरे उसके पास इसके सिवा काम ही क्या है जहाँ खड़ा हो जाता है वही उसके हुक्के पानी का इंतज़ाम हो जाता है

रामू- चाची मे पी लू पर आप मा से नही कहना

कामिनी- अरे नही रे तू फिकर काहे को करता है पी ले और फिर कामिनी उसके बगल मे बैठ जाती है

रामू- चिलम पीने लगता है और नशे मे उसका लंड और भी तगड़े तरीके से तन जाता है

क्रमशः.............



gataank se aage......................

nimmo ramu ke lund par apni tange phailaye tangi hui thi aur ramu niche se dhire-dhire apne mote lund ko apni bahna

rani ki chut me pel raha tha, jab ramu use apni god me uthaye-uthaye thak gaya tab usne nimmo ko khat par lakar leta

diya aur uski dono jangho ko phaila kar ek jhatke me apna lund andar pel diya aur phir khub kas-kas kar nimmo ko

chodane laga, ab nimmo ko bhi maza aane laga tha aur vah ramu ke lund ki aur apne chutd uthane lagi thi,

nimmo- aah aah ramu tu kitna achcha chodta hai aise hi mujhe chodte rahna, aah aur jor se khub kas kar chod aah aah

ramu satasat apne lund ko apni didi ki chut me marne lagta hai aur uska lund badi chiknahat ke sath aage pichhe hone

lagta hai. ramu apni bahan par puri tarah let kar uske rasile hontho ko chumne lagta hai aur ek hath se uske doodh ko

masalne lagta hai, karib 10 minute tak ramu apni bahan ko chodane ke bad uski chut me apna pani chhod deta hai aur

nimmo aah-aah karti hui ramu se puri tarah chipak jati hai aur uski chut se bhi pani bahne lagta hai,

nimmo- apni jangho ko phaila kar ramu ko dikhati hui dekh ramu tune meri chut phad kar rakh di

ramu- didi ab to me is chut ko roj phadunga

nimmo- muskurati hui tu bahut badmash hai tune ramiya ko kaise pata liya, ab to tu use roj chodta hai na

ramu- are didi abhi use chode do teen din hi huye hai par jab me use chodta hu to aisa lagta hai kisi choti si londiya ko

chod raha hu aur jab tumhe chodta hu to aisa lagta hai jaise kisi jawan aurat ko chod raha hu,

nimmo- to tujhe jyada maza kise chodane me aaya hai

ramu- didi maza to dodo ko chodane me aata hai par tumhari chut marne me ek alag hi maza mila hai, sach to yah hai

didi mera lund shuru se hi aurto ko dekh kar jaldi khada ho jata hai kyoki unka pura badan bhara hua rahta hai aur khas

kar unke bhari chutd mujhe pagal kar dete hai,

nimmo- achcha yah bata tujhe kamini chachi kaisi lagti hai, uske chutd to mujhse bhi bhari hai,

ramu- achchi hai par uska chehra tumhare jaisa sundar nahi hai,

nimmo- are tujhe kaun sa uska chehra chumna hai, tu to yah bata uski moti gaanD tujhe kaisi lagti hai, agar chachi tujhse

chudwaye to chodega,

ramu- muskurate huye, didi tum kahogi to chod dunga

nimmo- muskurakar achcha thik hai teri yah ichcha jaldi hi puri ho jayegi

ramu- vo kaise

nimmo- bas tu mujh par chhod de aur agar tujhe chanda ko chodna ho to uske liye bhi mere pas ek upay hai

ramu- vah kya didi

nimmo- chal pahle me munh hath dho leti hu aur ab sham bhi ho chuki hai hum raste me chalte-chalte bat karege.

nimmo apne hath panv dhokar aa jati hai aur ramu bacha hua kam khatam karke nimmo ke sath ghar ki aur chal deta hai

nimmo ke bhari chutdo ko thame huye ramu uske sath chalne laga uski aankho ke samne uski bahan ki gadrai jawani

nach rahi thi vah nimmo se puri tarah sata hua chal raha tha,

andhera lagbhag ho hi chuka tha, halki-halki thandi hawaye chalna shuru ho chuki thi,

ramu- didi dar lag raha hai kya

nimmo- nahi re mujhe to thodi-thodi thand lag rahi hai

ramu- thik hai thodi dur aur chalna hai aur kya

nimmo- ramu mujhe peshab lagi hai,

ramu- use dekh kar, kahi bhi kar lo didi

nimmo apna ghaghra utha kar baith jati hai aur mutne ki koshish karne lagti hai, ramu uske piche jakar khada ho jata hai

apni bahan ki moti gaanD dekh kar uska lund tan jata hai aur vah apni bahan ke piche baith kar

ramu- kya hua didi nahi aa raha kya

nimmo- ha re, lekin aa jayega

uski bat sunte hi ramu apne hath ko uski moti gaanD ke niche se dal kar sidhe uski katili chut ko apne hatho me jakad

leta hai uski is harkat se nimmo sihar jati hai aur tabhi ramu apni didi ki chut ke dane ko dhire-dhire masalne lagta hai

tabhi nimmo ki chut se fuhar nikalne lagti hai aur ramu ek dam se hath hata leta hai phir ramu apna hath vapas chut par

rakh deta hai aur nimmo ka peshab ruk jata hai, ramu phir se nimmo ki chut ke fudakte dane ko ched deta hai aur

nimmo phir se mutne lagti hai, jab nimmo mut kar khadi hoti hai tabhi ramu use apni banho me bhar kar uske galo ko

chumta hua,

ramu- didi ek bar yahi ganno ke beech me tumhe chodna chahta hu, ghar jane ke bad moka milna mushkil hai,

aur phir ramu nimmo ko apni banho me bhar kar use chumte huye apne hatho se uski nangi gaanD ko masalte huye use

utha kar ganno ke beech lejakar thoda jhuka kar khada kar deta hai, nimmo do ganno ke dande ko pakde huye apni moti

gaanD ubhar kar khadi ho jati hai aur ramu apne mast lund ko masalta hua use apni bahan ki phuli hui phanko se bhari

gulabi chut me phasa kar ek moti gaanD ko apne hatho me achchi tarah tham kar ek tagda dhakka marta hai aur uska

mota lund adhe se jyada uski didi ki chut me dhas jata hai,

ramu dhire-dhire apni didi ke pake aamo ki tarah kase doodh ko dabana shuru kar deta hai aur apni kamar ke tagde

dhakke niche ki taraf apni didi ki mastani gaanD me marne lagta hai, kuch der tak ramu apne lund ke dhakke ek raftar se

apni didi ki phuli hui chut me marta rahta hai lekin kuch der bad vah apni bahan ke uthe huye pedu ko apne hatho me

tham kar kas-kas kar apni didi ki chut me apna musal jaisa lund thokne lagta hai aur nimmo is tarah ki jordar chut

thukai se maza pate huye apni moti gaanD ko puri takat se apne bhai ke lund par mar rahi thi, ramu ne apni didi ke

mote-mote kase doodh ko kas-kas kar dabate huye uski chut me apne lund ko pelta raha,

kuch der bad ramu ne apni didi ko samne karke use apni god me chdha kar apne lund par baitha liya aur apne lund ko

apni didi ki chut me tabiyat se marte huye uske bhari chutdo ko sahlata raha, nimmo puri masti me aa chuki thi aur

apne chhote bhai ke lund par chadh kar is tarah se chut marwane ke karan uski chut me ek mithi khujli shuru ho gai aur

usne apni phuli chut ko apne bhai ke lund par khub kas-kas kar marna shuru kar diya aur niche se ramu ne bhi apni didi

ki chut me apne lund ko pelna shuru kar diya aur phir nimmo ek dam se apne bhai ke sine se kas kar chipak jati hai aur

uski chut se dher sara pani bah kar ramu ke lund par aa jata hai aur ramu bhi ek lambi pichkari apni didi ki chut me mar

kar uski chut ko apne lund par kas kar chipka leta hai,

nimmo- ramu aaj bahut mast maza aaya hai tu bada mast chudakkad ban gaya hai, tujhse jo bhi aurat apni chut

marwayegi vah ek dam mast ho jayegi,

ramu- didi tumhara jism itna bhara hua hai ki me rat bhar tumhe nangi karke chod sakta hu, tumhe dekhte hi mera lund

khada ho jata hai,

nimmo- haste huye achcha aur kise dekh kar tera lund khada hota hai,

ramu- didi ab tumse kya chhupana mera lund to kamini chachi ki moti gaanD dekh kar bhi khada ho jata hai

nimmo- aur iske alawa

ramu- iske alawa phir chanda aur ramiya ko agar nangi dekhta hu to mera lund khada ho jata hai

nimmo- achcha aur yah bata kabhi ma ko dekh kar bhi tera lund khada hota hai, ma ki moti gaanD to sabse jyada chodane

layak najar aati hai, ma ko dekh kar to tera lund jarur khada hota hoga,

ramu- ha ma ko jab nahate dekhta hu to jarur lund khada ho jata hai

nimmo- ma ko kabhi puri nangi dekha hai tune, agar tu ma ko puri nangi dekh le to aaj rat hi tu use is kadar chodane ke

liye pagal ho jaye ki kya batau,

ramu- nahi didi ma ko puri nangi to mene kabhi nahi dekha lekin unki moti-moti gori jangho ki bhari hui jawani dekh

kar jab me pure jism ki kalpna karta hu to mera lund jhatke marne lagta hai,

nimmo- ramu tu rat ko ma ki taraf hi sota hai na, kahi aisa to nahi ki rat ko jab ma so jati hogi to tu unki moti gaanD se

apne lund ko sata kar unki gaanD ko ragadta aur dabata hoga,

ramu- nahi didi mene abhi tak to aisa nahi kiya hai,

nimmo- haste huye ramu kahi rat ko ma tujhse apni gaanD to nahi marwati hai na, pata chale hame kuch pata hi nahi hai

aur aadhi rat ko tu chupchaap pade-pade hi apna lund ma ki moti gaanD me tel laga kar dal deta ho,

ramu- haste huye tum bhi na didi, kaha ki bat kaha le gai meri bhala himmat hai ma ko hath lagane ki,

nimmo- are beta jab bhari chutd dekh kar lund khada ho jata hai tab vah nahi sochta ki yah mote-mote chodane layak

chutd kiske hai, tera man agar ma ki gaanD aur uski phuli hui panv roti jaisi chut marne ka man ho to bata ho sakta hai

me kuch madad kar saku,

ramu apne mote lund ko masalte huye didi tumne aaj ma ke nange jism ke bare me mujhse itni bat kah gai ki mera lund

puri tarah tan kar phir se chut marne ka irada bana raha hai,

nimmo- are tu fikar na kar agar tera itna hi man ma ki gaanD marne ka kar raha hai to bata me kuch na kuch karti hu,

ramu- didi ma ko puri nangi karke apne badan se chipkane ke liye to me mara ja raha hu mujhe to ma jab kah de me

use chodane ke liye taiyar hu,

nimmo- achcha chal ab chup ho ja ghar pahuch rahe hai aur sun ramiya se yah sab bat mat karna use abhi akal nahi hai,

ramu- tum fikar na karo didi aur phir ramu apni didi ke mote-mote doodh ko apne hath se dabakar uske hontho ko ek bar

kas kar chumta hai aur phir dono ghar ke andar pahuch jate hai, aur jab andar ka najara dekhte hai to dono ki nigahe ek

dusre se milti hai aur dono ke hontho par muskan phail jati hai aur jab dono dubara samne dekhte hai to

sudhiya deewar se tiki hui thi aur uska ghaghra uski jangho tak chadha hua tha aur ramiya apni ma ki moti mulayam

jangho ko tel laga kar malish kar rahi thi, sudhiya ne jab dono ko dekha

sudhiya- aa gaye tum dono

nimmo- kya hua ma per dard kar rahe hai kya

sudhiya- ha re thodi akdan mehsus ho rahi thi to mene ramiya se kaha chal thoda tel malish hi kar de shayad aaram mil

jaye,

nimmo- are ma ramiya ke najuk hatho se kya aaram milega, tumharai jangho ki malish to sakht hatho se hogi to hi

tumhe maza aayega, me to kahti hu tum ramu se malish karwa liya karo, vah jab apne mardana hatho se kas kar

tumhari jangho ki malish karega to dekhna tumhara badan mast ho jayega,

sudhiya- chal abhi thaka hara aaya hai bechara, me phir kabhi usse malish karwa lungi,

nimmo- ramiya tu ja ramu aur mere liye pani le aa ma ki malish me kar deti hu aur phir nimmo apni ma ki gori pindliyo

ko sahlane lagti hai aur ramu hath munh dhone chala jata hai,

nimmo- ma tujhe kabhi bapu ki yaad bhi satati hogi na

sudhiya- are beti satati bhi hai to usse kya hoga, tera bapu upar se aa to nahi jayega meri kheriyat puchhne, tera bapu

hota to ab tak tera byah ho chuka hota aur do teen bachche bhi ho gaye hote,

nimmo- ma byah layak to ramu bhi ho gaya hai

sudhiya- ha ho to gaya hai par pahle tera byah karna jaruri hai uske bad hi ramu ka hoga

nimmo- ma aaj to kamini chachi bhi apne kheto me aai thi aur tere bare me bhi punch rahi thi

sudhiya- are uske ghar jana hi bekar hai vah kamina hariya jab bhi mujhe dekhta hai kutta aise ghurta hai jaise kha

jayega, vah bada hi kamina hai is umar me bhi vah aurto ke chutdo ko din bhar ghurta rahta hai,

nimmo- to kya ma vah tumhe bhi ghurte hai

sudhiya- kyo tujhe bhi dekh raha tha kya

nimmo- ha ma mujhe jab bhi milte hai bas kabhi meri chhaateeyo ko aur kabhi mere pichhe dekhne lagte hai

sudhiya- tu us harami se bach kar raha kar uski neeyat ka koi bharosa nahi hai uski khud ki beti meena jab se sasural

chhod kar aai hai din rat ghar me hi ghusi rahti hai

rat ko nimmo leti thi lekin uski chut use sone nahi de rahi thi aur ramu aur uske beech me uski ma leti hui thi, nimmo ko

badi mushkil se neend aai aur subah jab vah sokar uthi tab tak ramu aur ramiya kheto ki aur ja chuke the,

sudhiya- uth ja ghodi suraj sar par chadh chuka hai aur tu aise so rahi hai jaise rat bhar thik se tujhe neend na aai ho

nimmo- ma ramu chala gaya kya

sudhiya- ha aur shayad rat ko bhi na aaye use kheto ki med me khudai karke vahan thodi-thodi dur par podhe lagane hai

aur us tuti hui jhopadi ki marammat bhi karna hai,

nimmo- kuch soch kar ma ramiya to sham ko aa jayegi na

sudhiya- ha vah to aa jayegi

nimmo- to ma sham ko me bhi kheto me chali jau kya

sudhiya- tu vahan kya karegi aur phir tujhe jaldi hi neend aane lagti hai vahan kaha soyegi

nimmo- are ma khat hai na ramu kam karega aur me usse bate karte huye uski boriyat dur kar dungi

sudhiya- teri jaisi marji ho kar me chali nahane

nimmo- ma tum nangi hokar nahati ho ya nahi

sudhiya- haste huye meri koi umar hai nangi hokar nahane ki

nimmo- to ma kis umar me nangi hokar nahana chahiye

sudhiya- muskurate huye, me to jab teri umar ki thi tab jarur nangi hokar nahati thi,

nimmo apni ma se jyada se jyada rangeen bate karne ka prayas kar rahi thi lekin vah jyada kuch nahi kah pa rahi thi

usne man me socha kyo na kamini chachi ke madhyam se ma ke jajbat jana jay,

udhar ramu jab hariya kaka ke khet ke pas se nikla tab

kamini- ka hai ramu aaj nimmo ko sath nahi laye,

ramu- nahi chachi vah to so rahi thi aur me idhar aa gaya, par do din se hariya kaka najar nahi aa rahe hai kahi bahar

gaye hai kya,

kamini- bahar gaye the beta lekin sham tak aa jayege

ramu ki najar bar-bar kamini ki nangi kamar aur uske gudaj masal pet ki aur ja rahi thi kyo ki kamini ne nabhi ke kaphi

niche se sadi pahni hui thi aur uska utha hua gora chittha pet is tarah najar aa raha tha ki kisi ka bhi lund khada ho jaye,

udhar kamini bhi kai dino se thik se chudi nahi thi aur uska man bhi tabiyat se lund lene ka kar raha tha aur vah ramu se

bat karte huye dhire-dhire apne masal pet par hath pher rahi thi, ramu ka lund jhatke marne laga tha,

ramu- chachi ek bat puchhna thi

kamini- ha bol kya puchhna hai

ramu ramiya ki aur dekh kar ramiya tu chal me abhi thodi der me aata hu, ramiya ramu ki bat sun kar jane lagti hai

tabhi dusri aur se chanda aa jati hai aur

chanda- ma me bhi ramiya didi ke khet par jau

kamini- thik hai ja, aur phir ramiya aur chanda khet ki aur jane lagte hai

kamini- man me soch rahi thi ki ramu shayad usse koi meethi-meethi bate karne wala hai, ha ramu ab kaho kya kah

rahe the

ramu- chachi vo hariya kaka ki chilam yahan rakhi hai kya

kamini- use dekh kar ka tu bhi chilam pine laga hai

ramu- are chachi ek din kaka ne pila di tab se bada dil kar raha hai

kamini- achcha tu khat par baith me dekhti hu aur phir kamini jhopadi me jakar hariya ki chilam utha lati hai aur ramu

ko dete huye le mil gai,

ramu- lagta hai kaka lekar nahi gaye

kamini- are uske pas iske siva kam hi kya hai jahan khada ho jata hai vahi uske hukke pani ka intjam ho jata hai

ramu- chachi me pi lu par aap ma se nahi kahna

kamini- are nahi re tu phikar kahe ko karta hai pi le aur phir kamini uske bagal me baith jati hai

ramu- chilam pine lagta hai aur nashe me uska lund aur bhi tagde tarike se tan jata hai

kramashah.............

rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 13 Oct 2014 11:43

गन्ने की मिठास--9

गतान्क से आगे......................

कामिनी- क्यो रे रामू निम्मो कह रही थी कि तेरे गन्ने बहुत मोटे और बड़े-बड़े है

रामू- हाँ चाची वो तो है

कामिनी- मुस्कुराते हुए कही तूने निम्मो को अपना गन्ना चूसा तो नही दिया

रामू- अरे चाची निम्मो दीदी तो रोज गन्ना चुस्ती है, कल भी तो इसी लिए आई थी

कामिनी- तो मुझे कब चूसाएगा

रामू- जब तुम कहो

कामिनी- मेरा मन तो अभी चूसने का कर रहा है पर मेरे पेट मे ना जाने क्यो सुबह से थोड़ा दर्द बना हुआ है ज़रा

हाथ लगा कर देख कही पेट उखड़ तो नही गया है और फिर कामिनी रामू का हाथ पकड़ कर अपने पेट पर रख लेती है और

रामू नशे मे मस्त होकर जब कामिनी चाची के गुदाज पेट को अपने हाथो मे भर कर मसलता है तो उसका लंड पूरी

तरह धोती फाड़ने को तैयार हो जाता है,

रामू- मंद-मंद मुस्कुराते हुए उसके पेट को हल्के-हल्के मसल कर चाची यह तो सच मच उखड़ा हुआ लग रहा है इसी

लिए तो दर्द है इसमे,

कामिनी- तो रामू थोड़ी सी मसाज कर दे ना

रामू अच्छा ठीक है तो आप इस खाट पर लेट जाओ

कामिनी- यहाँ नही खाट पर अच्छे से ताक़त नही लग पाएगी इसलिए झोपड़ी के अंदर ज़मीन पर बिच्छा कर मसाज कर तो

ठीक रहेगा

रामू- अच्छा ठीक है आप चलो झोपड़ी के अंदर मे पेशाब करके आता हू

कामिनी झोपड़ी के अंदर चली जाती है और रामू झोपड़ी के दूसरी तरफ जाकर जब अपनी धोती सरकाकर अपना खड़ा लंड

बाहर निकालता है तो कामिनी छुप कर उसके मोटे लंड का नज़ारा करके पागल हो जाती है और उसकी चूत रामू के लंड के लिए तड़प उठती है,

कामिनी- हे रब्बा कितना मोटा और लंबा लंड है रामू का, इसका लंड तो हरिया के लंड से भी मोटा दिख रहा है अगर यह

एक बार मुझे तबीयत से चोद दे तो मेरा तो रोम-रोम मस्त हो जाएगा, आज बहुत दिन बाद किसी का लंड देख कर बड़ी चुदास सी उठने लगी है,

कामिनी तुरंत अपनी चूत को अपनी साडी के उपर से दबोचते हुए देख रही थी, जब रामू वापस आने लगा तो कामिनी ने जल्दी से एक चटाई बिच्छा कर अपने पेटिकोट का नाडा खोल दिया और साडी से अपने पेटिकोट को च्छुपाकर लेट गई,

कामिनी- कितनी देर लगा दी रामू पेशाब करने मे,

रामू- हाँ चाची बहुत जोरो की लगी थी,

कामिनी- चल बेटा अब जल्दी से मेरे पेट का दर्द भी ठीक कर दे, देख कितना कड़ा हो रहा है मेरा पेट,

और फिर कामिनी रामू का हाथ पकड़ कर उसे अपने गुदाज नंगे पेट पर रख लेती है, रामू अपनी चाची के मुलायम उठे

हुए पेट को अपने हाथो से सहलाते हुए अपनी उंगलियो को नाभि के उपर से दबाते हुए नीचे चाची की चूत की ओर लेजाता

है और उसकी नाभि से चार अंगुल नीचे लेजाकार वापस उपर की ओर लाता है, उसकी इस हरकत से कामिनी की चूत से पानी आ जाता है और उसके दोनो पेर कभी उपर कभी नीचे होने लगते है और जैसे-जैसे रामू का हाथ चलता है वैसे-वैसे चाची के पेर उपर नीचे होने लगते है,

रामू का लंड धोती मे पूरी तरह तना हुआ था और वह चाची की गदराई जवानी को देखते हुए उसके मसल नंगे पेट को

सहला रहा था,

रामू- चाची पेट के बल लेट जाओ मे ज़रा कमर की मालिश कर दू तो पेट मे ज़्यादा आराम मिलेगा,

कामिनी- ठीक है बेटा और कामिनी पलट कर पेट के बल लेट जाती है और रामू उसकी मस्त कमर को सहलाता हुआ अपने हाथ से एक बार तो चाची की मोटी गान्ड को च्छू लेता है, चाची की साडी पेरो से उठ कर उसके घटनो के उपर तक चढ़ चुकी थी और रामू चाची की गोरी नंगी टाँगो को देख-देख कर खूब तबीयत से चाची की कमर और कमर के उपर गान्ड तक का हिस्सा दबोचने लगा था, जब रामू चाची की कमर और गान्ड के बीच के हिस्से को नीचे की और दबाता तो चाची की चूत मे एक अलग ही मिठास पेड़ा होती थी जैसे उसे किसी मोटे गन्ने को चूसने पर पेदा होती है,

कामिनी- रामू तू जब कमर के थोड़ा नीचे की तरफ दबाता है ना तो मुझे बड़ा आराम मिलता है,

रामू ने कामिनी की बात को सुन कर उसकी दोनो गान्ड के बीच तक दबाना शुरू कर दिया उसकी नंगी उंगलिया जब चाची की नंगी गान्ड के छेद तक सरक कर जाती तो चाची का पूरा बदन सिहर उठता था और रामू का दिल करता कि अपनी पूरी उंगली चाची की मोटी गान्ड मे घुसा दे,

कामिनी- रामू तेरी उंगलियो मे बड़ी जान है बड़ा अच्छा लग रहा है बेटे

रामू- चाची अभी पूरी ताक़त देखी ही कहाँ है आपने आप कहो तो थोड़ी ताक़त लगा कर मालिश कर दू आपके बदन का

रोम-रोम खिल उठेगा,

कामिनी- कर दे बेटा, आज मे तुझसे अच्छी मालिश करवा लेती हू

फिर क्या था रामू ने अपने दोनो हाथो से चाची के भारी भरकम चुतड़ों को अपने हाथो मे भर कर दबोचने लगा

और चाची किसी कुतिया की भाटी अपनी गान्ड मटकाने लगी थी, रामू ने जैसे ही चाची के पेटिकोट से अंदर हाथ डाला रामू की उंगलियो सीधे चाची की गहरी गान्ड की खाई मे घुस गई और जब रामू का हाथ चाची की कसी हुई गुदा पर पड़ा तो चाची ने अपनी गुदा एक दम ढीली कर दी और जैसे ही रामू की एक उंगली गुदा को सहलाने लगी चाची ने अपनी गुदा को फिर से सिकोड लिया और रामू की उंगली चाची की गुदा मे फस गई, रामू ने थोड़ी ताक़त लगा कर अपनी उंगली चाची की गान्ड मे उतार दी और चाची एक दम से मस्त हो गई,

रामू ने चाची की साडी और पेटिकोट को उसकी गदराई गान्ड से नीचे सरका दिया और जब चाची की गोरी मस्त गान्ड पूरी नंगी नज़र आने लगी तब रामू ने उसकी गान्ड को फैलाकर सीधे अपनी जीभ उसकी गान्ड मे डाल कर उसे चाटने लगा, कामिनी से बर्दास्त नही हुआ और उसने रामू की धोती के उपर से ही उसके मोटे लंड को पकड़ लिया और पागलो की तरह मसल्ने लगी, रामू ने चाची की नंगी गान्ड को थोड़ा उपर उठा कर उसकी चूत की फांको मे अपना मुँह लगा कर चाटने लगा और चाची आह आह करती हुई सीसीयाने लगी,

लगभग दो मिनिट तक रामू ने उसकी बुर को फैला-फैला कर खूब चाता उसके बाद रामू ने

चाची को सीधा लेटा कर देर ना करते हुए अपने लंड को चाची की चूत मे एक झटके मे पूरा अंदर भर दिया और चाची

ने अपनी दोनो टॅंगो को उठा कर पूरी तरह फैला लिया, रामू चाची की चूत मे सतसट धक्के मारने लगा और चाची

नीचे से अपने चूतड़ उठा-उठा कर रामू के लंड पर मारने लगी,

रामू उकड़ू बैठ कर चाची की चूत मे खूब कस-कस कर धक्के मार रहा था और चाची बड़बड़ा रही थी,

हे रामू तेरा लंड बहुत मोटा और लंबा है रे बहुत मज़ा आ रहा है ऐसे ही चोद तुझे तो औरतो को चोदने की अच्छी

कला मालूम है कहाँ से सीखा है यह सब कही तू किसी मस्त औरत को चोद्ता तो नही है हाय ऐसे ही मार और तेज मार आह मेरी चूत आज तूने पूरी तरह फाड़ दी है,

रामू- चाची नंगी औरत को देख कर तो मेरा हथियार पूरी तरह तन जाता है मे तो कब से तुम जैसी भरे बदन की

औरत को कस कर चोद्ना चाहता था वह मोका आज लगा है और फिर रामू ने चाची की गान्ड के नीचे हाथ डाल कर उसके

भारी चुतड़ों को अपने हाथो मे थाम कर तबीयत से उसकी चूत मारना शुरू कर दी, उसका लंड पानी छ्चोड़ने का नाम ही

नही ले रहा था और उसे चोदने मे बड़ा मज़ा आ रहा था,

रामू- चाची जितनी भारी औरत को चोदो उतना ही ज़्यादा मज़ा मिलता है,

चाची- आह अरे कमिने सबसे भारी चूतड़ और भोसड़ा तो तेरी खुद की मा का है एक बार अपनी मा को क्यो नही चोद लेता

तुझे इतना मज़ा आएगा कि तू दिन रात उसी की गान्ड मे अपना मुँह डाले रहेगा,

रामू- अरे चाची मा तुम्हारी तरह मुझसे चुदवाती ही कहाँ है एक बार चुद्वा ले तो उसे भी पता चल जाएगा कि उसके

बेटे का लंड कितना मस्त है,

कामिनी- तो क्या तू अपनी मा पर चढ़ना चाहता है

रामू- धक्के की स्पीड तेज करते हुए हाय चाची मे तो कब से चोदने के लिए मरा जा रहा हू जब से उसके भारी चुतड़ों

को देखा है तब से बस यही दिल करता है कि उसकी गान्ड को पूरी नंगी करके खूब कस-कस कर चोदु,

रामू ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा और चाची उससे चिपक कर उसे पागलो की तरह चूमने लगी और फिर रामू ने उसकी गान्ड

को कस कर थामते हुए दस बड़े धक्के ऐसे मारे कि चाची का पानी छूट गया पर रामू अभी भी प्यासा ही रहा,

चाची- बेटा ज़रा सा रुक जा मेरा तो हो गया तेरा कब होगा

रामू- चाची तुम्हारे मरद की चिलम इतनी जोरदार है कि एक बार लंड खड़ा हो जाता है तो बैठने का नाम ही नही लेता है

लो इसे थोड़ा चूस कर ही आराम दो और फिर कामिनी रामू के लंड को मुँह मे भर कर चूसने लगी और रामू अपनी उंगलियो से धीरे-धीरे चाची की गान्ड को दबाने लगा,

रामू- चाची मेरा मन तो अब तुम्हारी गान्ड मारने का कर रहा है,

चाची- नही बेटा मेरी गान्ड मत मारना मुझे बड़ी तकलीफ़ होती है एक बार हरिया ने जबरन मेरी गान्ड मे लंड डालने की

कोशिश की थी और मुझे बड़ा दर्द हुआ और मेने तब से उसे अपनी गान्ड छुने भी नही दी है, तुझे अगर गान्ड ही मारना

है तो अपनी मा की चोदना उसकी गान्ड तो बहुत मोटी और मस्त है,

रामू- चाची मा की गान्ड तो जब मिलेगी तब मिलेगी लेकिन आज तो मेरा पानी निकालना है

चाची- मे तेरा पानी चूस-चूस कर निकाल देती हू

रामू- अरे नही चाची तुम कितना ही चूसो यह पानी बिना कस-कस कर ठोके नही निकलने वाला है, मुझे अपनी गान्ड मे ही

अपना पानी निकालने दो,

चाची- नही रामू मे तेरे घोड़े जैसे लंड को अपनी गान्ड मे नही ले सकती हू,

रामू- अच्छा तो फिर एक काम करो अपनी बेटी चंदा को बुला कर उसकी चूत मारने दो

चाची - अरे नही रामू अभी तो वह बहुत छोटी है 16 साल की तो है वह तेरा लंड कैसे बर्दस्त करेगी

रामू- चाची जब वह हरिया काका का लंड बड़े मज़े से ले लेती है तो फिर मेरा लंड क्यो नही ले पाएगी, तुम उसे छोटी

समझ रही हो और वह तुमसे भी ज़्यादा मस्त होकर अपनी चूत अपने बाप से मरवाति है,

चाची- यह क्या कह रहा है रामू ऐसा नही हो सकता है

रामू- तुम्हारी कसम चाची मेने अपनी आँखो से हरिया काका को उसकी चूत मारते हुए देखा था,

चाची- कितना हरामी है हरिया तभी तो मे सोचु कुछ दिनो से मेरी तरफ देख भी नही रहा है,

रामू- अब जाओ और चंदा को बुला कर यहाँ ले आओ

चाची- बेटा पहले एक बात सच-सच बता, क्या तूने रमिया को चोदा है

रामू- हाँ चोदा है लेकिन तुम यह बात किसी से कहना नही

चाची- तो फिर एक काम कर अपने खेत मे जाकर रमिया और चंदा दोनो को नंगी करके खूब चोद और मुझे थोड़ी देर

यही पड़े रहने दे मे थोड़ा आराम कर लू वैसे भी तूने मेरी चूत इतनी ज़ोर से चोदि है कि मुझसे उठा नही जा रहा है,

रामू- मुस्कुराते हुए यह तो तुम ठीक कह रही हो चाची रमिया और चंदा को एक साथ नंगी करके जब मे अपने सीने से

चिपकाउँगा तो अलग ही मज़ा आएगा, और फिर रामू अपने खेतो की ओर चल देता है,

रामू जब वहाँ पहुचता है तो रमिया और चंदा दोनो खाट पर बैठी-बैठी गन्ना चूस रही थी और रामू दोनो के बीच

जा कर बैठ जाता है और

रामू- तुझे पता है रमिया चंदा को एक दिन चींटे ने काट लिया था तब इसे बहुत सूजन हो गया था, क्यो चंदा है ना

चंदा- हाँ

रामू- अच्छा चंदा अब दिखा तो और रामू उसकी छोटी सी स्कर्ट उठा कर उसकी गुलाबी चूत को च्छू कर देखने लगता है

चंदा अपने हाथ से अपनी चूत ढकने लगती है तो रामू उसे खाट पर लेटा कर, अरे चंदा रुक तो रमिया को भी तो देखने

दे और फिर रामू चंदा की दोनो फांको को फैला कर उसकी चूत का गुलाबी छेद अपनी उंगलियो से सहलाते हुए, देख

रमिया यहाँ काटा था चंदा को चींटे ने,

रमिया- फिर क्या हुआ था भैया

रामू- फिर क्या हरिया काका ने चंदा का सारा जाहंर चूस-चूस कर निकाल दिया था क्यो चंदा

चंदा- हाँ भैया और बाबा इतना अच्छे से चूस-चूसे कर जाहंर निकाल रहे थे कि मुझे तो बड़ा मज़ा आया था

रामू- चंदा अब भी यहाँ दर्द रहता है क्या

चंदा- हा भैया दर्द तो रहता है पर बाबा इसमे अपना मोटा लंड डाल कर दूर कर देते है फिर तो बस मज़ा ही मज़ा आता

है, उसकी बात सुनते ही रामू उसकी चूत मे अपनी जीभ डाल कर उसके पानी को चाट लेता है,

रमिया- भैया मेरी चूत भी चाट ना

चंदा- नही भैया पहले मेरी चूत को अच्छे से चाट लो फिर रमिया दीदी की चाट लेना

रामू- तुम फिकर ना करो मे दोनो की चाट लेता हू एक काम करो चलो झोपड़ी मे चल कर आराम से चाटूँगा पर यह बताओ

मेरा लंड पहले कॉन चुसेगा,

उसकी बात सुनते ही दोनो उठ कर खड़ी हो जाती है और फिर रामू जब अपने लंड को धोती से बाहर निकालता है तो रमिया और चंदा दोनो उसके लंड के गुलाबी टोपे को अपनी जीभ से सहलाने लगती है और रामू मस्ती मे आकर दोनो को चूम लेता है

रमिया और चंदा दोनो खाट के नीचे घुटनो के बल बैठ कर रामू को खाट पर बैठा कर उसके लंड को कभी रमिया अपने

मुँह मे भर लेती है और जब वह बाहर निकालती है तो चंदा उसे अपने मुँह मे भर लेती है, दोनो पागल कुतिया की तरह

रामू के मोटे लंड को झपट-झपट कर चूसने लगती है और रामू अपने दोनो हाथो मे उन दोनो के कसे हुए दूध

को दबोचने लगता है, दोनो लोंदियो के दूध खूब कसे हुए और सख़्त थे जिन्हे मसल्ने मे रामू को बड़ा मज़ा आ

रहा था, रामू कभी रमिया की चुचि और कभी चंदा की चुचि को अपने मुँह मे भर कर चूसने लगा था,

कुछ देर बाद रामू दोनो को झोपड़ी के अंदर ले जाकर पहले रमिया को ज़मीन पर पीठ के बल लेटा देता है और फिर चंदा

को भी रमिया के उपर उल्टा सुला देता है अब रामू के सामने नीचे उसकी बहन रमिया की खुली हुई गुलाबी चूत और उसके

उपर चंदा की मस्तानी गान्ड और चूत नज़र आ जाती है और रामू अपनी लंबी जीभ निकाल कर दोनो की चूत और गान्ड को पागलो की तरह खूब ज़ोर-ज़ोर से चाटने और चूसने लगता है, दोनो लोंड़िया एक दूसरे से चिपक कर एक दूसरे के होंठो को चूसने लगती है,

चंदा- हाय भैया ऐसे ही चाट

रमिया- चंदा तेरी जीभ का स्वाद तो बड़ा रसीला है

चंदा- तो दीदी मेरी जीभ को अपने मुँह मे भर कर चूसो ना जब नीचे से रामू भैया मेरी चूत चूस्ते है और उपर से

तुम मेरी जीभ चुस्ती हो तो बड़ा मज़ा आता है आह आह ओह मा मर गई रे,

रामू लगातार दोनो की चूत और गान्ड का छेद फैला-फैला कर अपनी जीभ से खूब कस-कस कर चूस रहा था और दोनो

लोंड़िया एक दूसरे से पूरी तरह चिपकी हुई एक दूसरे की जीभ चूस रही थी, तभी रामू ने पास मे रखा तेल अपने लंड पर

लगा कर अपने लंड के सूपदे को चंदा की चूत मे लगा कर एक कस कर धक्का मार दिया और रामू का लंड ककच की आवाज़ के साथ चंदा की चूत को फाड़ता हुआ अंदर समा गया और चंदा के मुँह से ओह मा मर गई रे जैसे शब्द निकलने लगे,

रामू ने देर ना करते हुए दोनो लोंदियो को कस कर थामते हुए दूसरा झटका इस कदर मारा कि उसका मोटा लंड चंदा की

चूत मे पूरा फिट हो गया और चंदा ने कस कर रमिया को जाकड़ लिया,

क्रमशः.............

GANNE KI MITHAS--9

gataank se aage......................

kamini- kyo re ramu nimmo kah rahi thi ki tere ganne bahut mote aur bade-bade hai

ramu- ha chachi vo to hai

kamini- muskurate huye kahi tune nimmo ko apna ganna chusa to nahi diya

ramu- are chachi nimmo didi to roj ganna chusti hai, kal bhi to isi liye aai thi

kamini- to mujhe kab chusayega

ramu- jab tum kaho

kamini- mera man to abhi chusne ka kar raha hai par mere pet me na jane kyo subah se thoda dard bana hua hai jara

hath laga kar dekh kahi pet ukhad to nahi gaya hai aur phir kamini ramu ka hath pakad kar apne pet par rakh leti hai aur

ramu nashe me mast hokar jab kamini chachi ke gudaj pet ko apne hatho me bhar kar masalta hai to uska lund puri

tarah dhoti phadne ko taiyar ho jata hai,

ramu- mand-mand muskurate huye uske pet ko halke-halke masal kar chachi yah to sach much ukhda hua lag raha hai isi

liye to dard hai isme,

kamini- to ramu thodi si masaj kar de na

ramu achcha thik hai to aap is khat par let jao

kamini- yahan nahi khat par achche se takat nahi lag payegi isliye jhopadi ke andar jameen par bichha kar masaj kar to

thik rahega

ramu- achcha thik hai aap chalo jhopdi ke andar me peshab karke aata hu

kamini jhopadi ke andar chali jati hai aur ramu jhopadi ke dusri taraf jakar jab apni dhoti sarkakar apna khada lund

bahar nikalta hai to kamini chhup kar uske mote lund ka najara karke pagal ho jati hai aur uski chut ramu ke lund ke liye

tadap uthti hai,

kamini- hay rabba kitna mota aur lamba lund hai ramu ka, iska lund to hariya ke lund se bhi mota dikh raha hai agar yah

ek bar mujhe tabiyat se chod de to mera to rom-rom mast ho jayega, aaj bahut din bad kisi ka lund dekh kar badi chudas

si uthne lagi hai,

kamini turant apni chut ko apni sadi ke upar se dabochte huye dekh rahi thi, jab ramu vapas aane laga to kamini ne jaldi

se ek chatai bichha kar apne petikot ka nada khol diya aur sadi se apne petikot ko chhupakar let gai,

kamini- kitni der laga di ramu peshab karne me,

ramu- ha chachi bahut joro ki lagi thi,

kamini- chal beta ab jaldi se mere pet ka dard bhi thik kar de, dekh kitna kada ho raha hai mera pet,

aur phir kamini ramu ka hath pakad kar use apne gudaj nange pet par rakh leti hai, ramu apni chachi ke mulayam uthe

huye pet ko apne hatho se sahlate huye apni ungliyo ko nabhi ke upar se dabate huye niche chachi ki chut ki aur lejata

hai aur uski nabhi se char angul niche lejakar vapas upar ki aur lata hai, uski is harkat se kamini ki chut se pani aa jata

hai aur uske dono per kabhi upar kabhi niche hone lagte hai aur jaise-jaise ramu ka hath chalta hai vaise-vaise chachi ke

per upar niche hone lagte hai,

ramu ka lund dhoti me puri tarah tana hua tha aur vah chachi ki gadrai jawani ko dekhte huye uske masal nange pet ko

sahla raha tha,

ramu- chachi pet ke bal let jao me jara kamar ki malish kar du to pet me jyada aaram milega,

kamini- thik hai beta aur kamini palat kar pet ke bal let jati hai aur ramu uski mast kamar ko sahlata hua apne hath se

ek bar to chachi ki moti gaanD ko chhu leta hai, chachi ki sadi pero se uth kar uske ghtno ke upar tak chadh chuki thi aur

ramu chachi ki gori nangi tango ko dekh-dekh kar khub tabiyat se chachi ki kamar aur kamar ke upar gaanD tak ka hissa

dabochne laga tha, jab ramu chachi ki kamar aur gaanD ke beech ke hisse ko niche ki aur dabata to chachi ki chut me ek

alag hi mithas peda hoti thi jaise use kisi mote ganne ko chusne par peda hoti hai,

kamini- ramu tu jab kamar ke thoda niche ki taraf dabata hai na to mujhe bada aaram milta hai,

ramu ne kamini ki bat ko sun kar uski dono gaanD ke beech tak dabana shuru kar diya uski nangi ungliya jab chachi ki

nangi gaanD ke ched tak sarak kar jati to chachi ka pura badan sihar uthta tha aur ramu ka dil karta ki apni puri ungli

chachi ki moti gaanD me ghusa de,

kamini- ramu teri ungliyo me badi jan hai bada achcha lag raha hai bete

ramu- chachi abhi puri takat dekhi hi kaha hai aapne aap kaho to thodi takat laga kar malish kar du aapke badan ka

rom-rom khil uthega,

kamini- kar de beta, aaj me tujhse achchi malish karwa leti hu

phir kya tha ramu ne apne dono hatho se chachi ke bhari bharkam chutdo ko apne hatho me bhar kar dabochne laga

aur chachi kisi kutiya ki bhati apni gaanD matkane lagi thi, ramu ne jaise hi chachi ke petikot se andar hath dala ramu ki

ungliyo sidhe chachi ki gahri gaanD ki khai me ghus gai aur jab ramu ka hath chachi ki kasi hui guda par pada to chachi

ne apni guda ek dam dhili kar di aur jaise hi ramu ki ek ungli guda ko sahlane lagi chachi ne apni guda ko phir se sikod

liya aur ramu ki ungli chachi ki guda me phas gai, ramu ne thodi takat laga kar apni ungli chachi ki gaanD me utar di aur

chachi ek dam se mast ho gai,

ramu ne chachi ki sadi aur petikot ko uski gadrai gaanD se niche sarka diya aur jab chachi ki gori mast gaanD puri nangi

najar aane lagi tab ramu ne uski gaanD ko phailakar sidhe apni jeebh uski gaanD me dal kar use chatne laga, kamini se

bardast nahi hua aur usne ramu ki dhoti ke upar se hi uske mote lund ko pakad liya aur paglo ki tarah masalne lagi, ramu

ne chachi ki nangi gaanD ko thoda upar utha kar uski chut ki phanko me apna munh laga kar chatne laga aur chachi aah

aah karti hui sisiyane lagi,

lagbhag do minute tak ramu ne uski bur ko phaila-phaila kar khub chata uske bad ramu ne

chachi ko sidha leta kar der na karte huye apne lund ko chachi ki chut me ek jhatke me pura andar bhar diya aur chachi

ne apni dono tango ko utha kar puri tarah phaila liya, ramu chachi ki chut me satasat dhakke marne laga aur chachi

niche se apne chutd utha-utha kar ramu ke lund par marne lagi,

ramu ukdu baith kar chachi ki chut me khub kas-kas kar dhakke mar raha tha aur chachi badbada rahi thi,

hay ramu tera lund bahut mota aur lamba hai re bahut maza aa raha hai aise hi chod tujhe to aurto ko chodane ki achchi

kala malum hai kaha se sikha hai yah sab kahi tu kisi mast aurat ko chodta to nahi hai hay aise hi mar aur tej mar aah

meri chut aaj tune puri tarah fad di hai,

ramu- chachi nangi aurat ko dekh kar to mera hathiyar puri tarah tan jata hai me to kab se tum jaisi bhare badan ki

aurat ko kas kar chodna chahta tha vah moka aaj laga hai aur phir ramu ne chachi ki gaanD ke niche hath dal kar uske

bhari chutdo ko apne hatho me tham kar tabiyat se uski chut marna shuru kar di, uska lund pani chhodne ka nam hi

nahi le raha tha aur use chodane me bada maza aa raha tha,

ramu- chachi jitni bhari aurat ko chodo utna hi jyada maza milta hai,

chachi- aah are kamine sabse bhari chutd aur bhosda to teri khud ki ma ka hai ek bar apni ma ko kyo nahi chod leta

tujhe itna maza aayega ki tu din rat usi ki gaanD me apna munh dale rahega,

ramu- are chachi ma tumhari tarah mujhse chudwati hi kaha hai ek bar chudwa le to use bhi pata chal jayega ki uske

bete ka lund kitna mast hai,

kamini- to kya tu apni ma par chadhana chahta hai

ramu- dhakke ki speed tej karte huye hay chachi me to kab se chodane ke liye mara ja raha hu jab se uske bhari chutdo

ko dekha hai tab se bas yahi dil karta hai ki uski gaanD ko puri nangi karke khub kas-kas kar chodu,

ramu tabadtod dhakke marne laga aur chachi usse chipak kar use paglo ki tarah chumne lagi aur phir ramu ne uski gaanD

ko kas kar thamte huye das bara dhakke aise mare ki chachi ka pani chhut gaya par ramu abhi bhi pyasa hi raha,

chachi- beta jara sa ruk ja mera to ho gaya tera kab hoga

ramu- chachi tumhare marad ki chilam itni jordar hai ki ek bar lund khada ho jata hai to baithne ka nam hi nahi leta hai

lo ise thoda chus kar hi aaram do aur phir kamini ramu ke lund ko munh me bhar kar chusne lagi aur ramu apni ungliyo se

dhire-dhire chachi ki gaanD ko dabane laga,

ramu- chachi mera man to ab tumharai gaanD marne ka kar raha hai,

chachi- nahi beta meri gaanD mat marna mujhe badi takleef hoti hai ke bar hariya ne jabran meri gaanD me lund dalne ki

koshish ki thi aur mujhe bada dard hua aur mene tab se use apni gaanD chhune bhi nahi di hai, tujhe agar gaanD hi marna

hai to apni ma ki chodna uski gaanD to bahut moti aur mast hai,

ramu- chachi ma ki gaanD to jab milegi tab milegi lekin aaj to mera pani nikalna hai

chachi- me tera pani chus-chus kar nikal deti hu

ramu- are nahi chachi tum kitna hi chuso yah pani bina kas-kas kar thoke nahi nikalne wala hai, mujhe apni gaanD me hi

apna pani nikalne do,

chachi- nahi ramu me tere ghode jaise lund ko apni gaanD me nahi le sakti hu,

ramu- achcha to phir ek kam karo apni beti chanda ko bula kar uski chut marne do

chachi - are nahi ramu abhi to vah bahut choti hai 16 sal ki to hai vah tera lund kaise bardast karegi

ramu- chachi jab vah hariya kaka ka lund bade maze se le leti hai to phir mera lund kyo nahi le payegi, tum use choti

samajh rahi ho aur vah tumse bhi jyada mast hokar apni chut apne bap se marwati hai,

chachi- yah kya kah raha hai ramu aisa nahi ho sakta hai

ramu- tumharai kasam chachi mene apni aankho se hariya kaka ko uski chut marte huye dekha tha,

chachi- kitna harami hai hariya tabhi to me sochu kuch dino se meri taraf dekh bhi nahi raha hai,

ramu- ab jao aur chanda ko bula kar yahan le aao

chachi- beta pahle ek bat sach-sach bata, kya tune ramiya ko choda hai

ramu- ha choda hai lekin tum yah bat kisi se kahna nahi

chachi- to phir ek kam kar apne khet me jakar ramiya aur chanda dono ko nangi karke khub chod aur mujhe thodi der

yahi pade rahne de me thoda aaram kar lu vaise bhi tune meri chut itni jor se chodi hai ki mujhse utha nahi ja raha hai,

ramu- muskurate huye yah to tum thik kah rahi ho chachi ramiya aur chanda ko ek sath nangi karke jab me apne sine se

chipkaunga to alag hi maza aayega, aur phir ramu apne kheto ki aur chal deta hai,

ramu jab vahan pahuchta hai to ramiya aur chanda dono khat par baithi-baithi ganna chus rahi thi aur ramu dono ke beech

ja kar baith jata hai aur

ramu- tujhe pata hai ramiya chanda ko ek din chinte ne kat liya tha tab ise bahut soojan ho gaya tha, kyo chanda hai na

chanda- ha

ramu- achcha chanda ab dikha to aur ramu uski choti si skirt utha kar uski gulabi chut ko chhu kar dekhne lagta hai

chanda apne hath se apni chut dhakne lagti hai to ramu use khat par leta kar, are chand aruk to ramiya ko bhi to dekhne

de aur phir ramu chanda ki dono phanko ko phaila kar uski chut ka gulabi ched apni ungliyo se sahlate huye, dekh

ramiya yahan kata tha chanda ko chinte ne,

ramiya- phir kya hua tha bhaiya

ramu- phir kya hariya kaka ne chanda ka sara jahanr chus-chus kar nikal diya tha kyo chanda

chanda- ha bhaiya aur baba itna achche se chus-chuse kar jahanr nikal rahe the ki mujhe to bada maza aaya tha

ramu- chanda ab bhi yahan dard rahta hai kya

chanda- ha bhaiya dard to rahta hai par baba isme apna mota lund dal kar dur kar dete hai phir to bas maza hi maza aata

hai, uski bat sunte hi ramu uski chut me apni jeebh dal kar uske pani ko chat leta hai,

ramiya- bhaiya meri chut bhi chato na

chanda- nahi bhaiya pahle meri chut ko achche se chat lo phir ramiya didi ki chat lena

ramu- tum fikar na karo me dono ki chat leta hu ek kam karo chalo jhopdi me chal kar aaram se chatunga par yah bataao

mera lund pahle kon chusega,

uski bat sunte hi dono uth kar khadi ho jati hai aur phir ramu jab apne lund ko dhoti se bahar nikalta hai to ramiya aur

chanda dono uske lund ke gulabi tope ko apni jeebh se sahlane lagti hai aur ramu masti me aakar dono ko chum leta hai

ramiya aur chanda dono khat ke niche ghtno ke bal baith kar ramu ko khat par baitha kar uske lund ko kabhi ramiya apne

munh me bhar leti hai aur jab vah bahar nikalti hai to chanda use apne munh me bhar leti hai, dono pagal kutiya ki tarah

ramu ke mote lund ko jhapat-jhapat kar chusne lagti hai aur ramu apne dono hatho me un dono ke kase huye doodh

ko dabochne lagta hai, dono londiyo ke doodh khub kase huye aur sakht the jinhe masalne me ramu ko bada maza aa

raha tha, ramu kabhi ramiya ki chuchi aur kabhi chanda ki chuchi ko apne munh me bhar kar chusne laga tha,

kuch der bad ramu dono ko jhopadi ke andar le jakar pahle ramiya ko jamin par pith ke pal leta deta hai aur phir chanda

ko bhi ramiya ke upar ulta sula deta hai ab ramu ke samne niche uski bahan ramiya ki khuli hui gulabi chut aur uske

upar chanda ki masatni gaanD aur chut najar aa jati hai aur ramu apni lambi jeebh nikal kar dono ki chut aur gaanD ko

pagalo ki tarah khub jor-jor se chatne aur chusne lagta hai, dono londiya ek dusre se chipak kar ek dusre ke hontho ko

chusne lagti hai,

chanda- hay bhaiya aise hi chato

ramiya- chanda teri jeebh ka swad to bada rasila hai

chanda- to didi meri jeebh ko apne munh me bhar kar chuso na jab niche se ramu bhaiya meri chut chuste hai aur upar se

tum meri jeebh chusti ho to bada maza aata hai aah aah oh ma mar gai re,

ramu lagatar dono ki chut aur gaanD ka ched phaila-phaila kar apni jeebh se khub kas-kas kar chus raha tha aur dono

londiya ek dusre se puri tarah chipki hui ek dusre ki jeebh chus rahi thi, tabhi ramu ne pas me rakha tel apne lund par

laga kar apne lund ke supade ko chanda ki chut me laga kar ek kas kar dhakka mar diya aur ramu ka lund kacch ki aawaj

ke sath chanda ki chut ko phadta hua andar sama gaya aur chanda ke munh se oh ma mar gai re jaise shabd nikalne lage,

ramu ne der na karte huye dono londiyo ko kas kar thamte huye dusra jhatka is kadar mara ki uska mota lund chanda ki

chut me pura fit ho gaya aur chanda ne kas kar ramiya ko jakad liya,

kramashah.............