ये कैसा परिवार !!!!!!!!!

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007
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Re: ये कैसा परिवार !!!!!!!!!

Unread post by 007 » 21 Dec 2014 10:01

सुरेश ने एसा क्यों किया क्या वो प्लेबाय है ... क्या वो मुझसे कुछ चाहता है ..लेकिन मेरे पास सब कुछ है मैं उसे सब दूँगी...........

सुरेश घर वापस आ गया तो पता चला कि कल उसकी साली जी आ रही है . इंटरव्यू देने के लिए . सुनकर तो जैसे थोड़ी देर के लिए सुरेश का चेहरा कमल के समान खिला नज़र आने लगा था. और मुस्कुराहट को रत्ना देख न्ही पाई..

सुरेश : चलो यार आज कुछ समान खरीद लाते है और बाहर ही खाना भी खा लेंगे कल तो साली साहिबा आ रही है उनके लिए भी कुछ चीज़े खरीद लाएँगे

रत्ना: वाह जी साली की बात सुनते ही तुम एसे उच्छल रहे हो जैसे कि मेरी न्ही तुम्हारी बहन आ रही है

सुरेश: अरे अभी मेरी बहन से तुमने पूछा ही कहा है वो जो चीज़ है तुम्हारी बहन तो उसके आसपास्स भी न्ही है

रत्ना: अब तुम मुझे गुस्सा दिला रहे हो

सुरेश; मैं सच कह रहा हूँ

रत्ना: मेरी बहन ज़्यादा सुंदर है

सुरेश: ये तो अप्प्नि बहन से कहो कि मेरे सामने कपड़े उतार कर दिखाए फिर मैं अप्प्नि बहिन की तस्वीर से मिला कर देखूँगा की कोन ज़्यादा सुंदर है

रत्ना: चलो देख्नेगे , अभी चले !!!!!!!!!!!!!1

सुरेश: हाँ चलो...

रत्ना और सुरेश बस स्टॅंड पहुच कर न्यू देल्ही के लिए बस मैं बैठ जाते है रात के 9.00 बज चुके थे और ड्राइवर ने गाड़ी आगे बढ़ा दी थी..अंदर की लाइट बंद कर देने के कारण अंदर पूरा अंधेरा था रत्ना को तो लॅडीस होने के कारण सीट मिल गई थी लेकिन सुरेश को भीड़ मैं उस डीटीसी मैं खड़ा ही रहना था यू तो वो बाइक से ही जाते थे कही लेकिन आज रत्ना की ज़िद थी कि हम बस से चलेंगे.

सुरेश रत्ना पर बहुत गुस्सा आ रहा था क्योंकि रत्ना को सीट दे दी थी उस बूढ़े आदमी ने जिसकी एज लगभग 70 साल थी हाथ कांप रहे थे लेकिन चेहरे से खूब गोरा था.. सुरेश सामने देख रहा था.. लेकिन अंधेरे मैं 1 हाथ रत्ना की जाँघ [थाइ] सहला रहा था रत्ना को तो समझ न्ही आ रहा था कि ये कैसे हो सकता है सैकड़ो लोगो से भरी बस मैं एक पापा की उमर का आदमी उसके साथ कैसे एसा कर सकता था लेकिन सुरेश ने जब देखा तो जैसे उसके अंदर का कामी पुरुष जाग उठा . रत्ना उससे कुछ कहना चाहती थी लेकिन सुरेश जैसे मज़ा ले रहा था इस सीन का और इशारे मैं उसने कहा कि "होने दो जो रहा है" . बुड्दे ने धीरे धीरे अप्प्ने हाथ का दबाव बढ़ा दिया था जो कि अब साफ तौर पर रत्ना को महसूस रहा था . वो कुछ कहना चाहती थी लेकिन सुरेश के इशारे ने उसे चुप करा रखा था. बुड्दे ने अंधेरे का फ़ायदा उठा कर एक हाथ अब रत्ना की जाँघो के बीच रख दिया और अप्प्नि उंगली चलाने लगा सुरेश को मज़ा आ था... तभी मेडिकल आ गया और एक शॉर्ट स्कर्ट पहने हुए अल्ट्रा मॉडर्न गर्ल बस मैं चढ़ि सारी सीट्स फुल थी तो सीधी बात कि उसे खड़ा होना था और वो खड़ी हुई भी तो सुरेश के " इकके " के सामने .. लेकिन रत्ना का अब बहुत बुरा हॉल था हाथ ज़रूर बुड्ढे थे लेकिन स्पर्श ने उसे गीला कर दिया था और अब उसे चुदाई की ज़रूरत थी...इधर वो लड़की सुरेश के समान से अपनी दुकान लगा के खड़ी थी सुरेश लोड हो चुका था अंधेरे का फ़ायदा उठना ज़रूरी था उनके लिए सुरेश ने अप्नी 2 उंगलियाँ उसकी स्कर्ट मे डाल दी. लड़की बिल्कुल भी न्ही चौकी जैसे कि वो तो आदि थी उसकी और सुरेश के लिए समझना बिल्कुल मुस्किल न्ही था कि "लाइन क्लियर है" सुरेश ने अप्प्नि 2 उंगलियाँ साइड से होते हुए उसकी पॅंटी मैं घुसा दी . लड़की बहुत बुरी तरह से चौंक गयी . शायद आज तक नितंब तो बहुत सहलाए गये थे उसके लेकिन गॅंड मैं उंगली किसी ने भी न्ही की थी. लड़की ने पीछे मूड कर देखा लेकिन सुरेश की मुस्कुराहट से वो जैसे मान गई थी और सुरेश से चिपक कर खड़ी हो गई फिर सुरेश ने धीरे से पॅंटी नीचे कर दी और उंगलिसे चूत को सहलाने लगा लड़की मदहोश होने लगी.. और 2 मिनूट बाद सुरेश को महसूस हुआ की लड़की झाड़ चुकी थी सुरेश का हाथ पूरा गीला हो चुका था . और लड़की की सिसकारिया बस के महॉल को अजीब ब्ना ही थी. कुछ लोगो की नज़रे भी घूमी लेकिन लड़की ने तुरंत कॉंटरोल किया और अगले ही स्टॉप पर उतर गई सुरेश बड़बड़ाया " साली खड़े लुक्ड़ पर धोखा दे गई"

बूढ़े ने रत्ना को इतना गरम कर दिया था कि रत्ना की साडी भीग गई थी स्टॉप आ चुका था और ड्राइवर ने लाइट ओन की लेकिन उससे बहुत पहले ही बस खाली हो गई थी और रत्ना देख ही न्ही सकी कि किस की उंगलिया उसे इतनी देर तक चोदती रही .कोन था वो.... रत्ना और सुरेश भी उतर का बाहर आ गये

सुरेश: मज़ा ले रही थी

रत्ना : मैं ?????

सुरेश : न्ही तो क्या वो मेरी गंद मैं उंगली कर रहा था?

रत्ना: मैं तुम्हारी वज़ह से चुप थी न्ही तो एसा तमाचा मारती उसके कि जिंदगी भर याद रखता

सुरेश: अच्छााआआ........

रत्ना : और न्ही तो क्या

सुरेश : तुम तो मज़ा ले रही थी पूरी भीगी हुई हो

रत्ना: अब मैं क्या करू कोई करेगा तो गीली तो हो ही जाउन्गि चाहे गुस्से से ही कोई गुड खाएगा तो क्या वो कड़वा लगेगा गुड तो मीठा ही होता है ना

सुरेश : खूब गुड खाने लगी हो लौटते हुए भी बुड्दे के बगल मैं बैथोगी

रत्ना: न्ही अभी हम लोग मूवी देखेंगे फिर घर चलेंगे

रत्ना इस "गूची" इस वक़्त बिल्कुल भट्टी की तरह तप रही थी और उसे शांत करना रत्ना को बहुत भारी पड़ रहा था राह चलते रत्ना अपपनी चूत को साडी के उप्पेर से सहलाती जा रही थी लेकिन लोग सड़क पर थे और रत्ना शरम की वज़ह से 1 या 2 बार से ज़्यादा न्ही खुज़ला पा रही थी .इसलिए उंगली लगते ही उसकी भूक और भी बढ़ गई थी लेकिन आब इतनी जल्दी घर पहुचना मुमकिन न्ही था क्योंकि कमला नगर {न्यू देल्ही } से महरौली तक पहुचने मैं 2 घंटे तो लग ही जाने थे .इसलिए रत्ना ने सजेस्ट किया कि सुरेश चलो हम मूवी देखते है ..सुरेश मूवी देखने के लिए हॉल तक गया बट अनफॉर्चुनॉट्ली शो स्टार्ट हो चुक्का था और नो एंट्री का बोर्ड लग चुका था ... लेकिन रत्ना की गर्मी भयानक हो चुकी थी जैसी की रत्ना ने एक साथ कई वियाग्रा ले ली थी और अब उसके लिए चलना भी मुस्किल हो रहा था तभी उसे एक पब्लिक टाय्लेट दिख गया और रत्ना " महिला सौचलय" की साइड चली गई सुरेश भी पीछे से " पुरुष प्रसाधन" की तरफ गया और वही से होते हुए अंदर रत्ना के टाय्लेट मैं पहुच गया और रत्ना तो जैसे पागल ही थी उसने बुरी तरह से सुरेश को झींझोड़ डाला और उसकी पॅंट का हुक लगभग उखाड़ दिया " और हाथ डॉल कर लिंग को बाहर खींच लिया और अपपने नरम होंठो से चूवसने लगी..

007
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Re: ये कैसा परिवार !!!!!!!!!

Unread post by 007 » 21 Dec 2014 10:08

सुरेश को तो स्वर्ग मिल गया था करीब 3 मिनूट चूसने के बाद सुरेश को लगा कि वो झड़ने वाला है तो उसने रत्ना के मूह को बाहर की तरफ हटाने की कोशिस की .क्योंकि रत्ना कभी कम स्वॉलो न्ही करती थी उसे उल्टियाँ हो जाती थी इसलिए सुरेश उसका मूह बाहर हटा रहा था लेकिन रत्ना को समझ न्ही आ रहा था और उसने अपपना मूह न्ही हटाया और सुरेश उसके मूह के अंदर ही झाड़ गया और रत्ना को 1 सेसेंड के लिए अजीब लगा लेकिन वो उसे निगल गई और फिर आहिस्ते से लिंग चूसने लगी लेकिन सुरेश का प्रेशर अब न्ही बन रहा था 10 मिनूट तक ठीक से चूसने के बाद कही जाकर वो फिर से सुरेश को तैयार कर चुकी थी और अबबकी बार अपपना मूह दीवार की ओर करके खड़ी हो गई लगभग 100 डिग्री के आंगल पर इस तरह रत्ना की फुददी सुरेश के पप्पू पर आकर छू रही थी और सुरेश ने 2 बार धीरे धीरे रत्ना के चूत द्वार पर छुआ रत्ना पागल हो गई और बोली सुरेश पागल मत बनाओ प्लीज़ कर दो .. मुझसे सहा न्ही जाता प्ल्ज़.. लेकिन सुरेश को सुनाई न्ही पड़ रहा था.. रत्ना फिर गिड़गिदई सुरेश मैं सब कुछ कर दूँगी तुम जो कहोगे मैं करूँगी मैं विभा का रोल प्ले करके तुमसे कर्वौन्गि लेकिन प्लीज़ अभी कर दो..

सुरेश को मन माँगी मुराद मिल रही थी वो तो हमेशा से विभा के सपने देखता था और उससे कहता था कि मैं तुम्हे विभा समझ करके चोदना चाहता हूँ लेकिन रत्ना इनकार करदेटी थी करना हो तो मेरे साथ करो न्ही तो जाओ विभा को ले लाओ...

लेकिन आज रत्ना खुद ही ऑफर दे रही थी

सुरेश : लेकिन मैं एक चीज़ और भी चाहता हूँ

रत्ना; क्या ?

सुरेश : जब विभा नहाएगी तो तुम मुझे छिप्कर देखने दोगि !!

रत्ना: हाँ हाँ देखने दूँगी, अभी करो प्लीज़

सुरेश ने तरस खाकर ही सही उसके लिप्स ओपन किए और सरका दिया . फुददी इतनी गीली थी रखते ही सटाक से अंदर और रत्ना को लगा जैसे की लोहा चला गया है अंदर. सुरेश के धक्के धीरे धीरे उसे हवा की सैर करवा रहे थे और एक पल एसा आया जब "फ्लाइट लॅंड" कर गई. दोनो लोग आराम से फारिग हुए और रत्ना "महिला साइड " और सुरेश 2 मिनूट बाद "पुरुष साइड" से निकल आया .

उसके बाद उनलोगो ने कुछ समान खरीदा और घर पहुच गये ..आज विभा को आना था इंटरव्यू के लिए और सुरेश की खुशी का ठिकाना न्ही था विभा की बॉडी क्या मस्त थी 5.3 कुल मिलकर एक मॉडेल जैसी थी अगर हाइट थोड़ा सा और होती तो..

चलिए अब अगले पार्ट मैं देखते है सुरेश जी क्या करेंगे विभा का..............

क्रमशः........................


Jemsbond
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Re: ये कैसा परिवार !!!!!!!!!

Unread post by Jemsbond » 21 Dec 2014 10:11

Repped to you bro with love and affection