कमसिन कलियाँ compleet

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The Romantic
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Re: कमसिन कलियाँ

Unread post by The Romantic » 11 Dec 2014 04:45

कमसिन कलियाँ--10

गतान्क से आगे..........

(टीना तो पहले से ही आग में जल रही थी। जब से उसने गर्म राड थामी थी, उसके उदर मे हलचल मची हुई थी और नीचे धीमी सी आग जल उठी थी। नग्न स्तनों के मर्दन की वजह से पूरे शरीर में अनजानी सी अकड़न होने लगी थी। राजेश की बात सुन कर सारे शरीर में एक बिजली सी कौंध जाती है। परन्तु…)

टीना: पर पापा…मेरा कास्ट्यूम्…

राजेश: मुख में कपड़े के रोएं जुबान से चिपक जाते है… आज मेरे लिए…उसको रहने दो…

टीना: पर हमारा रूटीन्…एक्सरसाईज में तो ऐसा नहीं है…

राजेश: क्या मेरा बेटा मेरे लिए एक बार बिना एक्ससाइज के अलावा भी मेरे कहने से कुछ और कर सकता है…

टीना: पापा…(राजेश की याचक नजरें देख कर)…चलिए ठीक है…

राजेश: थैंक यू…मुझे पता था कि मेरी बेटी मुझसे बहुत प्यार करती है और वह मेरा दिल रखने के लिए कभी भी मना नहीं करेगी।

(एक बार फिर टीना सीधी हो कर बेड पर लेट जाती है। नग्न पुष्ट सीना और उन पर फुले हुए ऊर्ध्व गुलाबी निप्पल और नीचे एक छोटी सी काटन पैन्टी जो कि एक साईड से पूरी तरह उधड़ गयी है। कमसिन यौवन को अपने बेड पर हिलोरें मारते द्र्श्य को देख राजेश का मन एक बार फिर से मचल उठा।)

राजेश: बेटा उपर लगे आईने में जरा अपने को देखो और खुद की सुन्दरता पर गर्व करो कि तुम्हारा गोरा बदन कैसे साँचे में ढला हुआ है। जो इसको देखे मर मिटे…

(एक बार फिर से राजेश अपने जिस्म से टीना को ढक देता है। इस बार वह जल्दी में है और सीधा टीना के होठों को अपने होंठों मे ले कर चूमने और चूसने लगता है। टीना भी अब पूरी निपुण हो कर राजेश का साथ देती है। टीना की जुबान अपने होठों मे दबा कर चूसता है और कभी अपनी जुबान टीना के होंठों के हवाले कर देता है। काफी देर टीना के गुलाबी होंठों को लाल करने के बाद, राजेश का ध्यान सीधा नग्न सीने पर केन्द्रित हो जाता है। टीना के उन्नत स्तनों को अपने हाथों में भरकर बड़े प्यार से दबाने का क्रम शुरु करता है। टीना के अन्दर की धीमी सुलगती हुई वासना की आग अब भड़कने लगी है।)

टीना: प्पा.उई...पअआ.उ…उ.उफ.उ.उ...न्हई…आह..ह..ह.

(तेज चलती हुई साँसें फूले हुए स्तनों में अजीब सी कँपन ला रहे है और लगातार मर्दन से लाल हो गये है। क्षण भर रुक कर, एक बाज की दायें स्तन को अपने होंठों की गिरफ्त में ले लेता है और सोखना शुरु कर देता है। मुख से निकलती हुई लार पुरे पुष्ट स्तन को नहला देती है। कभी नग्न निप्पल को निशाना बनाता है और कभी पूरे स्तन को निगलने की कोशिश करता है। कभी लम्बवत्त निप्पल को अपनी जुबान के अग्र भाग से छेड़ता है और कभी धीरे से दांतों में ले कर चबा देता है।)

टीना: (भावविभोर हो कर) प्पा.उई...प लीज…काटिएआ.उ…उ.उफ.उ.उ...न्हई…दर्द्…हो…ओ…ता है…

राजेश: …हूँ…हाँ, बेटा…टाक्सिन बनने लगा है क्या?

(दायाँ स्तन छोड़ कर अपना ध्यान बायें स्तन पर केन्द्रित करता है। फिर वही चूमने और चूसने के कार्यक्रम को बायें स्तन के साथ दोहराता है। टीना हर्षोन्मत्त हो कर सिर पटकती है। अबकी बार नग्न होने के कारण टीना के सीने का पोर-पोर अतिसंवेदनशील हो गया है। राजेश का मुख सुडौल स्तनों को पूरी तरह से अपने कब्जे मे ले कर सोखने में लग जाता है। कभी-कभी अपनी जुबान से फुले हुए निप्पलों से छेड़खानी करता है और कभी धीरे से दांतों में ले कर चबा देता है। टीना का शरीर अब उसके काबू मे न रह कर किसी गहरे उन्माद में तड़पता है और उसका योनिमुख भी फिर से एक बार हरकत मे आ कर अपने आप खुल-बन्द होने लगा है। पिघलता हुआ लावा बाहर की ओर बह कर काटन पैन्टी को गीला कर रहा है। राजेश के तनतनाते हुए हथियार ने भी अपने मुख से लार टपकाना आरंभ कर दिया है।)

टीन: उ.उई...पअ.उ…पा.…ल…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह..ह..ह.

राजेश: आह..ह..ह.हाँ

(अपने उन्माद को काबू में कर के राजेश एक बार फिर नीचे की ओर बढ़ कर गीले पैन्टी के हिस्से को मुख मे थाम कर सोखना आरंभ करता है। अपने एक हाथ से टीना की उधड़ी हुई पैन्टी के हिस्से में फँसाता है और उपर की ओर उठाता है जिस की वजह से सारी सिलाई खुदब्खुद खुलती चली जाती है। अति उल्लासित अवस्था में टीना को इसका पता ही नहीं चल पाता है वह सिर्फ बेड पर तड़पती हुई सिर पटक रही है। राजेश धीरे से पैन्टी के उपर वाले सिरे को एक तरफ उठा कर अपने होंठ नग्न योनिमुख के होंठों पर लगा देता है। अपनी उंगलियों से थोड़ा सा योनिमुख को खोलता है और अपनी जुबान से एंठीं हुई घुन्डी को सहलाता है। इस अप्रत्याशित वार से तिलमिला कर एंठीं हुई घुन्डी रक्तिम लालिमा लिए सिर उठा कर खड़ी हो जाती है। कभी अपनी उंगलियों से योनिच्छेद को छेड़ता और कभी जुबान के अग्र भाग से एंठीं हुई घुन्डी को सहला कर ठोकर मारता है। इस दो तरफा वार को ज्यादा टीना बर्दाश्त नहीं कर पायी और उसकी आँखों के सामने तारे नाँचने लगते है। एक झटका ले कर उसकी योनि झरझरा कर बहने लगी। राजेश की जुबान भी चटखारे ले कर अम्रित को पीने में लग जाती है।)

टीना: (जैसे नशे में हो).उई...पअ.उ…पा.…ल…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह..ह..ह.

(टीना के योनिच्छेद पर मुख लगा कर राजेश सारा अम्रित सोखने मे लग जाता है। अपनी जुबान के अग्र भाग को कड़ा कर के अन्दर डालने की कोशिश करता है। कुछ क्षणों में एक बार फिर से लगातार झटके ले कर टीना की योनि में सैलाब आ जाता है जिसको राजेश फिर से चटखारे ले कर पी जाता है। दोनों थकान से निढाल हो कर बेड पर पड़ जाते हैं और अपनी-अपनी तेज चलती हुई साँसों को काबू में लाने की कोशिश करते है। थोड़े समय के बाद राजेश उठ बैठता है।)

राजेश: (टीना के साथ सट कर लेटते हुए) टीना…बेटा…टीना…

टीना: (अपनी साँसों को काबू मे लाती हुई)…हूँ …हाँ

राजेश: आज की एक्सरसाइज कैसी रही…

टीना: (थकी हुई आवाज में) …हाँ…पापा मुझे लग रहा है कि मैं उड़ रही हूँ… (अपने हाथ को नीचे ले जाती है फिर रोंएँदार कटिप्रदेश की नग्नअवस्था का एहसास होता है)…पापा…(चीखते हुए उठ बैठती है और ढकने का प्रयत्न करती है)

राजेश: (भोली सूरत बना कर)…क्या हुआ…अच्छा यह्…देखते ही मै समझ गया था कि मेरी बेटी ने मेरा मन पढ़ लिया था और अपनी पैन्टी को साइड से उधेड़ लिया था जिससे मुझे कोई तकलीफ न हो। बेटा थैंक्स्…।

टीना: (झिझक कर)…नहीं मैनें ऐसा…

राजेश: (नग्न योनिमुख की दरार में से झाँकती हुई रक्तिम घुन्डी को अपनी उँगलियों से सहलाते हुए) अच्छा कुछ न कहो…आज मेरी बेटी ने मेरी बात रख कर दिखा दिया कि वह मुझसे कितना प्यार करती है…

टीना: (एक सिसकारी ले कर)…पापा आप तो बड़े वो हो…

राजेश: (रक्तिम घुन्डी को उंगलियों से छेड़ते हुए) मुझे सच बताना तुम्हें पहला दौर अच्छा लगा या दूसरा दौर्…।

टीना: (हल्की सी दबी आवाज में) दूसरा दौर्…

राजेश: मै जानता हूँ…(इतना कह कर टीना को अपने आगोश में भर लेता है)…कपड़ों के बिना एक्सरसाइज करने से ज्यादा टाक्सिन बनता है, आज यह बात भी भलि-भाँति हम दोनों ने सीख ली…है न्…

टीना: (झिझकते हुए) हाँ पापा…

राजेश: (बहुत दुखी मन से)…पर बेटा तुम्हारा तो रूटीन हो गया परन्तु मै तो ऐसे ही रह गया…अब तो नहीं कर सकते हैं क्योंकि तुम्हारी मम्मी के आने का समय हो गया है।

टीना: हाँ पापा…(चिड़ाते हुए)…पर क्या हुआ…आज जहाँ पर छोड़ा है कल वहीं से शुरु करेंगे…मै जाऊँ…

राजेश: हाँ बेटा…परन्तु जाने से पहले मुझे तुम्हें जी भर कर देखने दो…

(टीना बेड पर खड़ी होती है। राजेश एक बार प्यार भरी नजरों से टीना के नग्न जिस्म के एक-एक अंग को निहारता है। फिर फटी हुई पैन्टी को नीचे खींच कर अलग कर लेता है। धीरे से टीना की योनि को चूमता है और दरार पर अपनी जुबान फेरता है। टीना को अपनी गोद मे खींचकर उसके होंठों को चूमता है और फिर नग्न स्तनों को अपने मुख मे ले कर सोखता है।)

टीना: (चंचलता से) क्या बात है पापा…मन नहीं भरा…मम्मी आने वाली है…(तभी दरवाजे की घंटी बजती है। दोनों सहम कर इधर-उधर देखते है। राजेश जल्दी से अपना कास्ट्यूम उतारने की कोशिश करता है लेकिन अकड़े हुए लिंगदेव उसकी कोशिश को नाकाम कर देते है। घबराहट में बिना सोचे समझे अपना हाथ अन्दर डाल कर गुस्से से फनफनाते हुए लिंगदेव को बाहर निकालता है। उपर की खाल पीछे खिंचने से फूला हुआ लाल रंग का कुकुरमुत्ते नुमा सिर आसमान की ओर निशाना लगाता हुआ सामने आ जाता है। राजेश बेध्यानी में उसे गरदन से मुठ्ठी में पकड़ कर एक दो करारे झटके देता हुआ अपनी लुगीं को ढूँढता है। अचानक राजेश की नजर जड़वत खड़ी टीना पर पड़ती है जो भौचक्की सी लाल टोपी वाले को घूर रही है।)

राजेश: (अपनी मुठ्ठी में लिंगदेव को पकड़े हुए) टीना…टीना…बेटा जल्दी से अपने कमरे मे जा कर कपड़े पहन लो…मै दरवाजा खोलता हूँ…कहाँ खो गयी हो…बेटा यह (अपने लिंग को हिलाते हुए) तुम्हारा खिलौना है बाद में देख लेना…अभी जाओ…

(एक बार फिर से घंटी बजती है। टीना जैसे नींद से जागती है और तुरन्त अपने कमरे की ओर भागती है। राजेश को सामने मेज पर तह की हुई लुंगी दिखती है जिसे जल्दी से लपेट कर बाहर दरवाजे की ओर भागता है। और दरवाजा खोलता है……)

सीन-18

(राजेश दरवाजा खोलता है तो सामने थकी हुई मुमु को खड़ी पाता है। मुमु के हालत देख कर राजेश उसे अन्दर आने के लिए जगह देता है। मुमु सीधे जा कर धम्म से सोफे पर जा कर पसर जाती है।)

राजेश: बहुत थकी हुई लग रही हो?

मुमु: हाँ, लेकिन बहुत मजा आ रहा है…तुम लोग क्या कर रहे थे…बहुत देर लगा दी दरवाजा खोलने में…

राजेश: टीना कुछ देर पहले उपर अपने कमरे में फ्रेश होने चली गयी थी और मै नहाने के लिये बाथरूम में जा रहा था तभी तुम्हारी घंटी बजी। बस कपड़े रख कर आ रहा था कि तुमने दूसरी बार घंटी बजा दी…

मुमु: मै बहुत थक गयी हूँ…खाने का क्या करें…आज बाहर से मंगा लेते है।

राजेश: भई, ऐसा कब तक चलेगा…

मुमु: प्लीज्…कुछ दिन बरदाश्त कर लो…

राजेश: ठीक है…मैं पंचगुनी रेस्टोरेन्ट को फोन पर आर्डर दे देता हूँ, पन्द्र्ह मिनट में डिलीवरी की गारंटी है। तुम हाथ मुँह धो कर रेडी हो जाओ…

(इतना कह कर फोन करने अपने कमरे में चला जाता है। मुमु सोफे पर सिर टिका कर आँखे मुंदे पड़ी रहती है। थोड़ी देर बाद दरवाजे की घंटी बजती है तब मुमु की नींद टूटती है। मुमु जा कर दरवाजे को खोल कर पैक्ड खाने की डिलीवरी लेती है। डाईनिंग टेबल पर खाना सजाती है।)

मुमु: टीना…टीना…खाना लग गया है। (कह कर बाथरूम की ओर रुख करती है)

(थोड़ी देर के बाद, सब डाइनिंग टेबल पर इकट्ठे हो कर खाना खाते हैं। खाना खाने के बाद टीना अपने कमरे में चली जाती है और राजेश और मुमु अपने कमरे में सोने चले जाते है।)

मुमु: मुझे आज नींद की गोली दे दो क्योंकि मै बहुत थक गयी हूँ…

राजेश: मुमु, तुम अब बहुत ज्यादा इन गोलियों पर डिपेन्ड करने लगी हो…यह अच्छी बात नहीं है।

मुमु: डौली बता रही थी कि कुछ दिनों में मुझे इस वर्कआउट की आदत हो जाएगी तब मुझे इन गोलियों की जरूरत नहीं पड़ेगी।

राजेश: ठीक है…दराज में से ले लो…मैं टीना के पास जाता हूँ। आज डाइनिंग टेबल पर बहुत चुप थी, तुमने भी तो उससे कोई बात नहीं की…लगता है वह नाराज है।

मुमु: प्लीज्…तुम उसको कुछ दिन सँभाल लो…अरररे…मैं तो बिलकुल भूल गयी…आज उसके स्कूल से फोन आया था कि कल सुबह उसको स्कूल जाना है क्योंकि कल बोर्ड की परीक्षा के फार्म भरे जाएँगे।

राजेश: तुम अब बता रही हो…

मुमु: आज कल हम मिल कहाँ रहे है…प्लीज क्या तुम कल उसको सुबह स्कूल छोड़ दोगे क्योंकि स्कूल बस नहीं चलेगी।

राजेश: ठीक है, तुम थक गयी हो सो जाओ…मै टीना के पास जा रहा हूँ। देखूँ कि कहीं सो तो नहीं गयी। (कह कर कमरे से बाहर आ जाता है और किसी से फोन पर बात करने के लिए नम्बर मिलाता है।)

राजेश: हैलो…हाँ डार्लिंग मैं बोल रहा हूँ…कैसी हो…कुछ दर्द कम हुआ…(उधर से करीना की आवाज आती है)

करीना: अंकल्…सौरी…मेरे प्रीतम…अब ठीक है…दर्द तो नहीं है…

राजेश: तो फिर कुछ देर के लिए चाँदनी रात में मुहब्बत का इजहार करने के लिए आ जाओ…

करीना: नहीं, अभी तो सब जाग रहें है…और मुझको कल स्कूल जाना है फार्म भरने के लिए…क्या टीना को नहीं बताया…उसको भी तो जाना है…

राजेश: हाँ उसको भी जाना है…पर तुम्हें मेरी याद नहीं आ रही है। मै ही पागल हूँ जो तुम्हारी याद में तड़प रहा हूँ…

करीना: नहीं…यह बात नहीं है, आप नहीं जानते कि जब से आँख खुली है तब से सिर्फ कल रात की बात सोच-सोच कर पागल हुई जा रही हूँ…मगर्…क्या करूँ…

राजेश: तुम फिकर न करो…तुम जल्दी से ठीक हो जाओ फिर तो तुम्हें मै रात भर सोने नहीं दूँगा…एक किस तो फोन पर दे दो फिर मै आराम से सो जाउँगा…

करीना: प्रिय्…मम्मी बुला रहीं है (किस की आवाज आती है और फोन कट जाता है)

(राजेश मुस्कुराते हुए सीड़ीयाँ चड़ता हुआ टीना के कमरे के पास पहुँच कर रुक जाता है। धीरे से दरवाजा खोलता है तो बेड खाली पड़ा है। इधर-उधर देखता है तो उसे टीना कहीं नहीं दिखाई देती है। बाथरूम के दरवाजे से कान लगा कर सुनता है तो टीना के नहाने की आवाज आ रही है। आश्वस्त हो कर राजेश बेड पर लेट जाता है और टीना का इन्तजार करता है। नहाती हुई टीना के जिस्म के बारे मे सोच कर उसका लिंग एक बार फिर से सिर उठाने लगता है। थोड़ी देर के बाद सिर्फ टावल लपेटे टीना बाहर आती है। सामने आँखे मूंदे राजेश को बेड पर लेटे देख कर चौंक जाती है।)

टीना: पापा…आप यहाँ…(शरारती स्वर में)…क्या नींद नहीं आ रही…

राजेश: (आँखें मलता हुआ)…हाँ नींद में तुम्हारे ही सपने देख रहा था…बेटा…कल तुम्हें स्कूल जाना पड़ेगा…अभी तुम्हारी मम्मी ने बताया कि तुम्हारे स्कूल से फोन आया था…

टीना: (बेड के नजदीक आ कर गुस्से में) क्यों अभी तो हमारी छुट्टियाँ चल रही हैं, यह स्कूल वाले पागल हो गये है…

(राजेश प्यार से टीना को अपनी ओर खींचता है और पास में बिठाता है। टीना की नग्न पीठ पर पानी की बूँदें धीरे से रिस रही है। राजेश प्यार से पीठ पर हाथ से बूँदें हटाता हुआ…)

राजेश: बेटा ऐसे नहीं बोलते…कल तुम्हारी बोर्ड की परीक्षा का फार्म भरा जाएगा…इस लिए तुम्हें स्कूल बुलाया है (कहते हुए कमर में हाथ डाल कर अपने उपर खींच लेता है। टीना अपने को छुड़ाने का प्रयास करती है लेकिन राजेश उसे अपने आगोश में भर कर अपने साथ लिटा लेता है। टीना के शरीर से उठती हुई भीनी-भीनी साबुन की सुगन्ध बेडरूम का समा और भी मादक बना देती है।)

टीना: पापा…छोड़िए न्… (अपने को छुड़ाने का प्रयास करती हुई)…मुझे चेंज करना है…

(राजेश टीना को पकड़ कर करवट लेता है और टीना को अपने नीचे ले आता है। इसी खींचतान में टीना का टावल खुल जाता है। टीना को छोड़ कर राजेश उसके नग्न जिस्म को एक बार फिर से निगाहों से पीने की कोशिश करता है।)

टीना:…उफ…पापा आपने मुझे एक बार फिर से…(कहते हुए झेंप गयी और अपने हाथों से नीचे की ओर कर के ढकने का प्रयत्न किया)

राजेश: ऐसी तो कोई नयी चीज नहीं है जो मैनें नहीं देखी है। बचपन में तुम्हें बहुत नहलाया है। अभी कुछ देर पहले ही मैने तुम्हें इसी अवस्था मे देखा है…फिर क्यों छुपाने की कोशिश कर रही हो…

टीना: अब मैं बड़ी हो गयी हूँ…

राजेश: हाँ यह तो सही बात है…बचपन में तुम्हारा सीना सपाट था पर आज यह (एक स्तन को सहलाते हुए और फिर उसके गुलाबी निप्पल को तरेड़ते हुए) सुडौल और उन्नत हो कर मुझे चिड़ा रहे है। यह कमर (हाथ फिराते हुए नितंबों तक ले जाते हुए) पहले सीधी थी पर अब कितना सुन्दर कुल्हे पर कटाव बन रहा है।

टीना: पापा…

राजेश: क्यों क्या हुआ…चेहरा तो वही है पर पंखुड़ियों से गुलाबी होंठ (झुक कर टीना के होंठों पर अपने होंठों की मौहर लगाता है) की लालिमा और भी निखर गयी है। और (पेट से योनि तक अपनी उंगली से रेखांकित करते हुए) सबसे ज्यादा बदलाव इधर हुआ है।

टीना: (शर्माते हुए पाँव सिकोड़ती हुई) पापा…क्या बदलाव आया है…

राजेश: (टीना के पाँव खोलते हुए और योनिमुख पर उँगलियॉ फिराते हुए) पहले यह ज्वालामुखी सुप्त अवस्था में था पर अब लावा उगलने की क्षमता रखता है…

टीना: न न…करिए…(एक बार फिर से पाँव सिकोड़ती है और फिर से राजेश अपने पाँव से टीना के पाँव खोलता है)…पापा…मुझे चुभ रहा है…

राजेश: क्या चुभ रहा है…

टीना: (ठुनकती हुई) आप भी न…इसे पीछे करिए…

राजेश: बेटा, प्लीज इसको तुम अपने हाथों से पीछे कर दो…(राजेश का एक हाथ उन्नत उभारों के मर्दन में लगा हुआ था और दूसरा हाथ योनि में छुपे सीप के मोती को छेड़ने मे लीन है)… तुम्हें तो पता है कि मेरे दोनों हाथ काम पर लगे हुए है।

(गुस्से से भन्नायें लिंगदेव बार-बार नग्न योनिच्छेद पर ठोकर मार रहे है। टीना कसमसाती हुई अपना सीधा हाथ दोनों शरीरों के बीच में डालती हुई लिंगदेव को अपनी उँगलियों में थामने की कोशिश करती है। इस बीच टीना के तपते होंठों को अपनें होंठों की गिरफ्त में लेकर राजेश उनका सारा रस सोखने में लग जाता है। झटके खाते हुए लिंगदेव की गरदन जैसे ही टीना की उँगलियों में आती है लिंगदेव और भी तन्ना कर रौद्र रूप धारण कर लेते है। टीना को लगता है कि उसने एक जिवित परन्तु तपती हुई लोहे की सलाख अपने हाथ में पकड़ ली है। उधर राजेश कभी पंखुड़ियों से होंठों को चूमता है कभी टीना के कान के नीचे गरदन पर अपने होंठों से वार करता है। टीना भी एक नये उन्माद में बहकती जा रही है। एक तरफ तो राजेश की लगातार उसके अंगों के साथ छेड़खानी और दूसरी ओर उसके हाथ में बैचेन जिवित तपती हुई सलाख।)

क्रमशः


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Re: कमसिन कलियाँ

Unread post by The Romantic » 11 Dec 2014 04:46

कमसिन कलियाँ--11

गतान्क से आगे..........

टीना: ...पअ.उ…पा.…ल…उफ.उ.उ.आह..ह..ह.

राजेश: बेटा यह नया खिलौना कैसा लगा…

टीना:पअ.पा.बह…त…उफ.उ.उ.ल..गर्म…हो रहा है…आह..ह.

राजेश: (अपने को टीना से अलग करते हुए) बेटा एक काम कल पर टाल दिया था…उसे अभी पूरा कर लेते है…

(टीना की मदहोशी टूटती है तो नजर अपने हाथ पर जाती है तो एक आठ-नौ इंच लंबा और तीन इंच का घेराव लिए, उपर की खाल पीछे खिंचने से फूला हुआ लाल रंग का कुकुरमुत्तेनुमा सिर और उसकी आँख के उपर बैठी हुई ओस की बूँद दिखाई देती है। अवाक् हो कर टीना इस रहस्मयी हथियार को अपनी उँगलियों में थाम कर गौर से देखती रह जाती।)

राजेश: टीना क्या यही बदमाश तुम्हें परेशान कर रहा था…

टीना: (बिना गरदन छोड़े)…हूँ…

राजेश: बेटा इसकी सिर पर लगी हुई आँख पर जो मोती पड़ा है…उसे अपनी जुबान से साफ कर दो…यह पहला मोती प्योर प्रोटीन का खजाना होता है…

टीना: (झिझकती है)…न…(लिंगदेव की गरदन छोड़ने लगती है परन्तु राजेश अपने हाथ को टीना के हाथ पर रख कर कस कर अपना लिंग थाम लेता है)

राजेश: बेटा…प्लीज तुमने वादा करा था…

(टीना झुकती हुई अपनी जुबान को लिंगदेव के सिर पर फिरा कर ओस की बूँद को साफ़ कर देती है)

टीना: बस्…अब हो गया…

राजेश: बेटा…तुम्हें अपनी सेहत का ख्याल हो न हो, पर मुझे तो तुम्हारे द्वारा निकाला गया टाक्सिन पीना है…(कहते हुए अपना कुर्ता और लुंगी उतार फेंकता है। दोनों के नग्न जिस्म आमने-सामने है। टीना शर्मा कर नजरें चुराती हुई राजेश के बालिष्ठ शरीर को निहारती है।)

टीना: पापा…यह आप क्या कर रहे…

(राजेश घूम कर अपनी पोजीशन बदल कर टीना के पाँवों की ओर कर लेता है। अपने घुटनों को खोल कर बीच में से टीना के पाँव खींचकर उसकी योनि को अपने मुख के सामने ले आता है।)

राजेश: बेटा इस क्रिया को 69 पोजीशन कहते है… (और कहते हुए अपने जिस्म से टीना का बदन ढक देता है। पहले जुड़ी हुई संतरे की फाँकों चूमता हुआ अपनी गर्म साँसो का वार करता है और फिर उन फाँकों को प्यार से खोल कर अकड़ी हुई घुन्डी पर अपनी जुबान टिका देता है।)

टीना: .उई...माँ….पा.प.…पा…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह.....

(राजेश अपनी जुबान से घुन्डी के उपर घिसाव आरंभ करता है। बेबस हुई टीना इस वार से हतप्रभ रह जाती है। राजेश अपने होठों से टीना की योनि को अपने कब्जे में ले कर बार-बार अपनी जुबान को कड़ा करके योनिच्छेद के अन्दर डालने का प्रयास करता है। उधर उत्तेजना में तड़पती टीना के चेहरे और होंठों पर तन्नाये हुए लिंगदेव भँवरें की भाँति बार-बार चोट मारते है।)

टीना: उ.उई...प.पअ…पा.…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह.....

(राजेश की जुबान योनि की गहराई और लम्बाई नापने की कोशिश मे वार पर वार कर रही थी और टीना के हाथ में कैद लिंगदेव ने भी अपने फूले हुए सिर को पूरी तरह उघाड़ दिया है। क्षण भर रुक कर, दो तरफा वार शुरु करता है। एक तरफ जुबान का वार योनिच्छेद पर, दूसरी ओर लिंगदेव का फूला हुआ नंगा सिर टीना के होंठों को खोलने पर आमादा हो रहा है। ऐसे दो तरफा वार को टीना बरदाश्त नहीं कर पायी और असीम आनंद में झटके खाते हुए अपने होंठ खोल दिये। राजेश तो बस इसी क्षण की आस में बैठा था, जैसे ही होंठों के बीच थोड़ी सी जगह बनी हल्का सा जोर लगाते हुए लिंगदेव के सिर से टीना के मुख को सीलबन्द कर दिया। राजेश की जु्बान ने तो अकड़ी हुई घुन्डी को ठोकर मार-मार कर लाल कर दिया था। दूसरी ओर अपनी उँगली को योनि के मुहाने में फँसा कर अन्दर टटोलना आरंभ कर दिया। इस वार को टीना बरदाश्त नहीं कर पायी और एक बड़ा झटका खा कर बाँध तोड़ कर झरझराती हुई बह निकली।

करीना: .गग…गगगू...म…गूग.गअँ.न्ई…आह.....

(साँस घुटती हुई लगी तो टीना ने पूरा मुख खोल दिया, राजेश ने वक्त की नजाकत को समझते हुए थोड़ा और अन्दर सरका दिया। बेबस टीना पुरी ताकत से राजेश को उपर से हटाने की कोशिश करती, पर राजेश अपने लिंग पर दबाव बढ़ा कर उसे और अन्दर खिसका देता। कुछ मिनट यह मुख के अन्दर-बाहर का दौर चलता रहा और लगातार लिंग के नंगे सिर पर टीना के होंठों के घर्षण से झट्के के साथ उबलता हुआ लावा टीना के गले मे बेरोकटोक बहने लगा। साँस लेने के लिए टीना जल्दी से सारा गटक गयी परन्तु राजेश ने तो नल ही खोल दिया था। टीना तो एक बार पहले भी भुगत चुकी थी इस लिए जल्दी से सारा गटकने में लग गयी। तूफान आ कर थम गया। दो नग्न जिस्म लता कि भाँति एक दूसरे के साथ लिपट कर अपनी-अपनी तेज चलती हुई साँसो को काबू करने मे लग गये। कुछ देर बाद्…)

राजेश: बेटा…थैक्स्…तुमने अपना वादा पूरा किया…

टीना: (राजेश के सीने से लिपट कर)…हूँ…यह बहुत ही…(सिकुड़ते हुए लिंगदेव को सहलाते हुए)…नौटी है।

राजेश: (टीना के सीने के उभारों को सहलाते हुए) बेटा…तुम्हें प्यार की भाषा भी सिखानी पड़ेगी क्योंकि कब तक तुम…इसे, उसको, आदि बोलोगी…

टीना: (शर्माते हुए)…पापा…इसको क्या कहते है…

राजेश: बेटा, कल ट्रेनिंग के दौरान बताऊँगा…अब सो जाओ क्योंकि कल सुबह तुम्हें स्कूल जाना है…

टीना: हाँ…पापा…क्या आप मेरे साथ यहीं पर सोओगे…

राजेश: (एक बार फिर से टीना को कस के बाँहों मे भर कर) हाँ बेटा…कल सुबह तुम्हें जल्दी उठाना है, इस लिए मै यहीं पर सो जाता हूँ…(टीना के होंठों के साथ एक बार फिर से खिलवाड़ करने के बाद)…स्वीट ड्रीम्स…

(राजेश अपने होंठों के बीच एक निप्पल को दबा कर और टीना अपनी मुठ्ठी में लिंगदेव को जकड़ कर एक दुसरे के साथ लिपट कर सो जाते है।)

सीन-19

(सुबह के पाँच बज रहे है। आसमान सूर्य की लालिमा में नहा रहा है। राजेश के मोबाइल का अलार्म बजने से राजेश की नींद टूटती है। नग्न अवस्था में टीना पीठ करके सो रही है और राजेश का एक हाथ टीना के स्तन पर और दूसरा हाथ टीना के सिर के नीचे, एक पाँव टीना के कुल्हे पर और ठीक दो नितंबों के जोड़ के बीचोंबीच फँसे हुए सुबह के प्रेशर में तन्नायें हुए लिंगदेव ने राजेश के लिए बड़ी अजीब स्थिति पैदा कर दी थी। रात की कहानी राजेश की आँखों के सामने एक हसीन ख्वाब की तरह दोहरा गयी। अलार्म की आवाज ने टीना को भी जगा दिया, बिना कुछ बोले अपनी माँसल जाघों के बीच में फँसी हिलकोरे लेती हुई जिवित चीज को हाथ से महसूस करती है।)

राजेश: बेटा…सुबह हो गयी…उठ जाओ…

टीना: (कुनमुनाती हुई) अभी नहीं…(अपनी योनि के सामने निकले हुए अंग को मुठ्ठी में जकड़ कर)……

राजेश: बेटा…आह्…(हाथ में लिए हुए स्तन को जोरों से दबाते हुए धीरे से आगे की ओर धक्का देते हुए)…टीना बेटा स्कूल जाना है…(एक बार फिर से धक्का देता हुआ टीना की मुठ्ठी को अपने हाथ से साधते हुए)…

टीना:…आह्…पापा…

राजेश: (लघुशंका के लिए दबाव बढ़ता हुआ)…बेटा…अभी इस नालायक को जाने दो…प्लीज…

टीना: (करवट ले कर राजेश की ओर मुख करके) क्या हुआ पापा…

राजेश: (जल्दी से उठते हुए) अगर अभी नहीं तो फिर कभी नहीं…

(भाग कर टीना के बाथरूम में जाता है और टीना अंगड़ाई ले कर सामने लगे आईने में अपने नग्न जिस्म को निहारती है। रात की बात को याद कर शर्म से मुख पर लाली बिखर जाती है। थोड़ी देर में राजेश मुँह धो कर बाथरूम से बाहर निकलता है। जमीन पर पड़ी लुंगी को उठा कर अपने इर्द-गिर्द लपेटता है और टीना की ओर बड़ता है।)

राजेश: बेटा…तुम तैयार हो जाओ…मै नीचे जा कर नाश्ता बनाता हूँ क्योंकि तुम्हारी मम्मी अभी सो रही होगी…(कहते हुए टीना के होंठों को चूम कर कमरे के बाहर चले जाता है। टीना बाथरूम की ओर बड़ जाती है।)

(सुबह के आठ बज रहे हैं। राजेश नहा कर तैयार हो गया है और रसोई में नाश्ता बनाने में लीन है। टीना भी अपनी स्कूल की यूनीफार्म में तैयार हो कर नीचे आ कर राजेश का हाथ बटाती है। एक बार राजेश टीना पर नजर डालता है तो उसके अल्हड़ कमसिन बदन को स्कूल युनीफार्म मे देखता रह जाता है। सफेद रंग के टाप मे टीना के उभार बाहर आने के लिए मचलते हुए दिखते है। घुटने से उपर तक की नीली स्कर्ट केले सी चिकनी टाँगों का प्रदर्शन कर रही है। दोनों सारा सामान उठा कर डाईनिंग टेबल पर सजा देते हैं और साथ बैठ कर नाश्ता करते है। बीच-बीच में राजेश और टीना एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देते है)

राजेश: आज यूनीफार्म तुम बहुत सुन्दर दिख रही हो…कल रात…

टीना: पापा…आज कैसी एक्सरसाईज होगी…

राजेश: आज तुम्हारी छुपी हुई माँसपेशियों की एक्सरसाइज करेंगें…बेटा जल्दी से अपना नाश्ता खत्म करो तुम्हें देर हो रही है…

टीना: पापा…मेरा नाश्ता तो खत्म हो गया…अब कुछ भी नहीं खा सकूँगी…(कहते हुए टेबल से उठ जाती है)

राजेश: ठीक है…सब कुछ ऐसे ही रहने दो…तुम्हारी मम्मी अपने आप साफ कर लेगीं…(कहते हुए वह भी टेबल से उठ खड़ा होता है) जाओ अपना बस्ता उठा कर ले आओ…

(टीना भाग कर अपना बस्ता उठा कर ले आती है और बाहर दरवाजे की ओर जाने लगती है)

राजेश: बेटा…तुम्हारा बिल्…आखिर तुमने नाश्ता किया है…

टीना: (मुस्कुराती हुई राजेश की ओर बढ़ती है) कैश या काईन्ड्…

(राजेश कुछ जवाब न देते हुए टीना का चेहरा अपने हाथों में थाम कर उसके होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त मे ले लेता है। कभी निचले होंठ को चूसता है और कभी अपनी लपलपाती जिबहा को कँपकँपाते हुए लबों पर फिराता है। राजेश के हाथ भी अपने काम में लग जाते है। कभी तो टीना के उन्नत सीने के साथ खिलवाड़ करते है और कभी पीछे नितंबों की मालिश करते है। टीना भी उतने ही उत्साह के साथ पलट कर राजेश का साथ देती हुई लिपट जाती और अपने निचले हिस्से से राजेश के उठते हुए हथियार से रगड़ती और पीसने की कोशिश करती है। राजेश पीछे से नितंबों को दबाते हुए टीना की स्कर्ट के अन्दर हाथ डाल कर अपनी दो उंगलियों को टीना की पैन्टी मे फँसा कर पैन्टी को नीचे पिंडुलियों तक घसीट देता है।)

टीना: आ…ई पा…पा यह…क्या किया…अब देर नहीं हो रही है…

राजेश: बेटा… (नीचे जमीन पर पड़ी हुई पैन्टी को अपनी जेब में रखते हुए)…तुम्हारे स्कूल का रास्ता कार से लगभग तीस मिनट में पूरा होगा…तब तक्… अब चलेँ क्या… (दरवाजे की ओर बड़ जाता है।)

(कार की आगे की सीट पर टीना और राजेश बैठे हुए है। टीना की स्कर्ट जाँघों तक खिंचीं हुई और राजेश का एक हाथ स्टीयरिंग पर और दूसरा हाथ टीना की योनिच्छेद के साथ छेड़खानी में लगा हुआ है।)

टीना: (छिपे हुए मोती के ऊपर लगातार घर्षण से) .उई... माँ…. पा.प.… पा… उफ.उ.उ.ल .. न्हई… आह.....(झरझरा कर बहने लगी)

राजेश: बेटा…तभी मैने तुम्हारी स्कर्ट को समेट कर अलग कर दी थी कि कोई दाग न लग जाए (योनिमुख पर उँगली फिराते हुए)…तुम अपने हाथ से इस नालायक की भी मालिश कर दो… (टीना अपने हाथ से पैन्ट की जिप खोल कर राजेश के हथियार को बाहर निकालती है। अपनी उँगलियों में थाम कर धीरे से कुकुरमुत्तेनुमा सिर का अनावरण करती है।)

टीना: यह इतना बड़ा कैसे हो जाता है…जब सुबह बाथरूम में गये थे तो बहुत विकराल रूप धारण किये हुए था परन्तु जब बाहर आये थे तो यह सिकुड़ कर छोटा हो गया था…अब फिर से देखो…कैसे तन्नायें हुए है…

राजेश: बेटा, अगर मेरा टाक्सिन निकल गया तो सारा मेरी पैन्ट पर गिरेगा और दाग लग जाएगा…फिर मै दफ्तर कैसे जाउँगा…बेटा तुम अगर मेरी मदद करो तो…

टीना: बताइए …

राजेश: अगर तुम झुक कर अपने मुख से इसको ढक दो तो जैसे ही टाक्सिन निकलेगें तो तुम्हारे मुख में गिरेगें जिसे तुम गटक जाना इस से मेरे कपड़े खराब नहीं होंगें… प्लीज्…यह एक्सरसाईज तो नहीं है परन्तु इस तरअह तुम अपने पापा की मदद कर सकोगी…

टीना: पापा…आप हमेशा मुझको…ठीक है…

(टीना झुक कर लिंगदेव का सिर अपने मुख में ले लेती है और अपनी जुबान से लिंगदेव को सहलाती है। राजेश धीरे से टीना के सिर को पकड़ कर उपर और फिर नीचे का मोशन सिखाता है। टीना इशारा समझ कर धीरे धीरे वही मोशन को दोहराती है। राजेश बामुश्किल अपने को काबू में रख कर कार ड्राइव करता है। लगातार टीना के गुलाबी होंठों और जुबान के घर्षण से राजेश के अन्दर का ज्वालामुखी अपना उग्र रूप धारण कर लेता है।)

राजेश: मर गये… टीना जल्दी से उठो…

टीना: (हड़बड़ाते हुए उठती हुई) क्या हुआ…पापा…

राजेश: सामने देखो…तुम्हारी सहेली ने हमारी कार पहचान ली है…हाथ के इशारे से रुकने के लिए कह रही है…

टीना: करीना…यहाँ पर कैसे…गाड़ी मत रोकना पापा…

राजेश: न बेटा…(कहते हुए करीना के करीब ला कर गाड़ी रोक दी और पीछे का दरवाजा खोल कर अन्दर आने के लिए आमंत्रित किया) …यहाँ कैसे खड़ी हो बेटा…

करीना: हाय अंकल, हाय टीना…थैंक गाड्…आप मिल गये…वर्ना आज बड़ी परेशानी हो जाती…मेरी कार खराब हो गयी और भैया मेकेनिक को लेने गये हुए हैं…

टीना: (कुछ चिड़ते हुए) यार इस खटारा कार को अपने पापा से कह कर बदल दे…

करीना: यार मेरे भैया तो कई बार कह चुके हैं, पर पापा है कि मानते नहीं। सरकारी कार को यूज करने से मना करते हैं…पर यह बता तू नीचे हो कर क्या सो रही थी… मुझे तो सिर्फ अंकल ही दिखे…

टीना: (झेंपते हुए) नहीं यार…मेरे बालों का बैन्ड नीचे गिर गया था वही उठा रही थी। अच्छा अब स्कूल आ गया है…जल्दी से सामान समेट ले…

करीना: हाँ यार्…

(राजेश स्कूल के गेट पर कार रोकता है। दोनों लड़कियाँ अपना-अपना बस्ता उठाए कार से नीचे उतरती हैं। टीना सीधी गेट की तरफ जाती है…राजेश की तरफ करीना आती है)

करीना: थैंक्स…(फुसफुसा कर)…डार्लिंग…

राजेश: (झेंपते हुए)…मेन्शन नाट्…प्रिय्… जरा टीना को रोको और मेरे पास भेजना…पैसे लेना तो भूल गयी…

(करीना भाग कर टीना को रोकती है और राजेश की ओर इशारा कर के उसे वापिस भेजती है। टीना दौड़ कर राजेश के पास आती है।)

राजेश: बेटा तुम पैसे लेना भूल गयीं थी…(हाथ में एक सौ रुपये का नोट थमाते हुए)…एक और जरूरी बात है…अपना हाथ खिड़की के अन्दर डालो…(टीना अपना हाथ बड़ाती है तो राजेश उसके हाथ में सुबह वाली पैन्टी रख देता है…अगर बिना इसको पहने चली जाती तो जो कार की सीट पर फैला हुआ है वही तुम्हारी क्लास की सीट पर फैल जाता।

टीना: पापा, करीना कह रही थी कि आपकी जिप खुली हुई है...

(राजेश हड़बड़ा कर पैन्ट की जिप की ओर देखता है तो झेंप जाता है क्योंकि जिप के मुहाने से लाल टोपी धरे लिंगदेव मुँह निकाले बाहर की हवा खा रहे हैं। टीना यह द्र्श्य देख कर खिलखिला कर हँस पड़ती है। राजेश जल्दी से जिप लगाता है।)

राजेश: बेटा…करीना ने सिर्फ खुली हुई जिप नहीं देखी परन्तु इसको भी देख लिया है…

टीना: तो…

राजेश: वह तुमसे बहुत सारे सवाल करेगी…क्या जवाब दोगी…।

टीना: हम तो सिर्फ लंच टाइम पर ही मिलेंगे…पर अब मुझे भी चिन्ता हो रही है कि वह मुझ पर शक करेगी…।

राजेश: टीना तुम चिन्ता मत करो…बस कहना कि तुमने कुछ भी नहीं देखा…

टीना: ठीक है…पर पापा मै घर कैसे जाऊँगी…आज स्कूल बस भी नहीं चलेगी।

राजेश: जैसे ही तुम्हारा फार्म का काम खत्म हो जाए, तुम मुझे फोन कर देना तो मै तुम्हें घर छोड़ दूँगा।

टीना: हाँ यह ठीक रहेगा…(अपने स्कूल के गेट की तरफ बड़ जाती है)…

(राजेश कार स्टार्ट करता है और अपने आफिस की दिशा में निकल जाता है। स्कूल में…टीना और करीना लंच टाइम में साथ-साथ बैठी हुई हैं।)

क्रमशः


The Romantic
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Re: कमसिन कलियाँ

Unread post by The Romantic » 11 Dec 2014 04:46

कमसिन कलियाँ--12

गतान्क से आगे..........

करीना: आज मैनें कुछ देखा…क्या तूने भी देखा…

टीना: क्या देखा…

करीना: अंकल की खुली हुई जिप…तुने कुछ नहीं देखा…जब तू नीचे से बैन्ड उठा रही थी तब तूने कुछ भी नहीं देखा…

टीना: नहीं तो…तूने क्या देखा…बता न…

करीना: (शर्म से लाल होती हुई) अगर किसी को नहीं कहेगी तो…

टीना: पागल है, भला मै किसी से क्यों कहूँगी…बता न…

करीना: यार…कैसे बताऊँ…अंकल का टूल खुली हुई जिप में से बाहर झाँक रहा था…बहुत मोटा और लंबा है, यार…

टीना: अच्छा जी, तूने उसकी लंबाई और मोटाई इतनी जल्दी नाप ली…(हँसते हुए)…कहीं मेरे पापा के साथ कुछ…

करीना: (झेंपती हुई) अन्दाजा लगा रही हूँ…मैनें तो यह सोचा कि तू नीचे बैठ कर उसके साथ खेल रही थी…

टीना: पागल है क्या…(बात बदलते हुए) तेरा फार्म का काम खत्म हो गया हो तो मेरे साथ चल…

करीना: यार मैं तो यही सोच रही थी कि वापिस घर कैसे जाऊँगी क्योंकि भैया ने तो पहले ही कह दिया था कि लौट्ने का इंतजाम मुझे खुद ही करना होगा वह नहीं आयेंगे…थैंक्स यार

टीना: एक शर्त पर्…मेरे पापा को सेड्यूस करने की कोशिश मत करना…मैं जानती हूँ तू बहुत दिनों से उनके सपने देख रही है और आज तो तूने उसके साक्षात दर्शन कर लिये हैं…

करीना: क्या कह रही है…पागल हो गयी…भला मै क्यों उनके सपने देखूँगी…

टीना: तो मै अंधी हूँ क्या…हमेशा तेरी नजर पापा की लुंगी के उपर ही रहती है।

(राजेश की कार आते हुए दिखती है। दोनों गेट की ओर भागती है। राजेश दोनों को देख कर अपना हाथ हिला कर इशारा करता है।)

टीना: पापा क्या हम करीना को भी घर पर छोड़ दें उसकी कार नहीं आयी है…

राजेश: क्यों नहीं…लेकिन पहले तुम्हें छोड़ूगाँ फिर लौट कर इसको छोड़ते हुए आफिस निकल जाऊँगा। करीना, तुम्हें जल्दी तो नहीं है…

करीना: नहीं अंकल…आप मुझे बाद में ड्राप कर देना…

टीना: आओ चलें, करीना तू पीछे बैठ जा…

(दोनों को बिठा कर राजेश अपनी कार को घर की ओर मोड़ लेता है।)

राजेश: थैन्क्स करीना…

करीना: किस बात के लिए…पर फिर भी…यू आर वेलकम

राजेश: (मुस्कुराते हुए) सुबह तुमने मुझे शर्मिन्दगी से बचा लिया…अगर तुम्हारी नजर मेरी जिप पर नहीं पड़ती तो दफ़्तर में मेरा बहुत मजाक उड़ता।

टीना: पापा…यह तो इसकी खासियत है…हमेशा इसकी नजरें नीचे की ओर ही रहती है… और जाने क्या-क्या देख लेती है।

करीना: (झेंपते हुए) रहने दे…अंकल यह मजाक कर रही है। मेरी नजर तो अचानक पड़ गयी थी।

राजेश: कोई बात नहीं, आज ज्यादा कुछ नहीं देखा होगा…

टीना: नहीं पापा…(करीना पीछे से टीना की कमर नोचती है)…उई…क्या कर रही है…

करीना: नहीं अंकल…यह तो ऐसे ही बक-बक कर रही है…टीना प्लीज और कोई शैतानी मत कर ओर चुपचाप बैठ जा…

राजेश: टीना…इसने और क्या देख लिया…

टीना: कुछ खास नहीं परन्तु जो भी देखा था उसे बहुत अच्छा लगा…

राजेश: अच्छा भई, ऐसा क्या देख लिया जो करीना को बहुत अच्छा लगा…मुझे भी तो बताओ…ऐसी क्या चीज है मेरे पास करीना जो तुम्हें बहुत अच्छी लगी है…

(करीना का मुख शर्म से लाल हो गया और टीना के होंठों पर एक कुटिल मुस्कान तैर गयी। इसी बीच राजेश नें अपने घर के अहाते में लेजा कर कार खड़ी कर दी और टीना की ओर रुख किया)

राजेश: बेटा मुझे जल्दी से आफिस पहुँचना है…तुम उतरो यहाँ पर्…मै करीना को चोद…सौरी छोड़ कर शाम तक वापिस आता हूँ…

(टीना बाय कहती हुई घर के दरवाजे की ओर जाती है और राजेश कार को बैक कर वापिस सड़क की ओर मुड़ता है।…)

सीन-20

(सड़क पर आने के बाद राजेश कार को स्लो कर के एक पेड़ के नीचे ले जा कर खड़ी कर देता है।)

करीना: आपने कार यहाँ क्यों रोक दी…

राजेश: डार्लिंग अब तो आगे आ जाओ…वर्ना लोग मुझे तुम्हारा ड्राईवर समझेंगे…

करीना: (मुस्कुराते हुए) प्रिय मैं आगे आ गयी तो तुम ड्राईव किये बिना मानोगे तो नहीं…खैर (कहते हुए आगे की सीट पर आ कर बैठ जाती है)…अब बताइए कि क्या अब ड्राईव करेंगें…

राजेश: (अपनी ओर खींचते हुए) अब तो बहुत सारी ड्राईविंग करनी है… (कहते हुए कार को आगे बढ़ाता है)

करीना: प्रिय…आज आपका वह सिर ऊठा कर बाहर की हवा खा रहा था…

राजेश: वह कौन…(जिप खोल कर अपने सुप्त अवस्था में हथियार को बाहर निकाल कर करीना की ओर देखते हुए)…यह…

करीना: डार्लिंग…अब आफिस जाने की जल्दी नहीं है…

राजेश: पहले थी परन्तु अब नहीं है…मैं आफिस से आधे दिन की छुट्टी लेकर आया था…

करीना: अच्छा जी, क्या बात हो गयी…अगर मैं अपने आप घर चली जाती तो आप क्या करते…

राजेश: तुम्हारे को तुम्हारे घर से लेकर कहीं बाहर घुमाने ले जाता…क्यों अगर मैं बुलाता तो नहीं आती क्या…

करीना: हाँ…(राजेश के हथियार को सहलाते हुए) प्रिय तुम्हें तो पता है कि अब मैं तुम्हारे प्यार में पूरी तरह से पागल हो चुकी हूँ…

राजेश: कहाँ चले…तुम्हें देर तो नहीं होगी…कब तक घर पहुँचना है…

करीना: जहाँ भी ले चलो…सात बजे शाम तक…क्योंकि मेरी कोचिंग क्लास है…

राजेश: (खुशी से) ग्रेट्…आज तुम्हें मैं एक ऐसी जगह ले चलता हूँ कि तुम्हें लगेगा कि स्वर्ग में आ गयी हो…। अब दर्द तो नहीं है…

करीना: अगर हो भी तो क्या तुम मानोगे…

राजेश: प्रिय ऐसा फिर कभी न कहना…मेरे लिए तुम बहुमूल्य हो और तुम्हारी हल्की सी खरोंच भी मेरे लिए बहुत तकलीफदेह है…

करीना: (राजेश के गले लिपटते हुए) सौरी…मुझे मालूम है। उस रात को अपने गेस्ट रूम में जिस तरीके से आपने मुझे ट्रीट किया मै तो उसी दिन से आपकी हो गयी थी। अब दर्द तो नहीं है परन्तु जरा डर लगता है…

राजेश: (करीना के गालों को चूमते हुए) देखो अब कभी भी तुम्हें दर्द नहीं होगा…पहली बार सभी को इस दर्द को सहना पड़ता है बस उसके बाद जीवन भर का मजा है…करीना डार्लिंग जब तक हम उस जगह पहुँचते तुम इस को प्यार तो कर लो…

(करीना झुक कर अर्धसुप्त लिंगदेव को मुख मे ले कर जगाने में लग जाती है। राजेश का एक हाथ सरक कर स्कर्ट के अन्दर चला जाता है। करीना अपने होंठों से कुकुरमुत्तेनुमा सिर का अनावरण करती है और पंखुड़ियों से कोमल होंठों का स्पर्श पा कर लिंगदेव भी धीरे से अपना रौद्र रूप धारण कर लेते है। इधर राजेश की उँगली भी संतरें की फांको को खोल कर सख्त हुए बीज पर जोर आजमइश शुरू कर देती है। दोनों जिस्मों में बस लपटें नहीं निकल रहीं है बाकी वासना की आग में पूरे झुलस रहे है।)

राजेश: करीना तुम्हारें होंठों में तो जादू है…जैसे ही तुम्हारे होंठों का स्पर्श होता है मेरा फौलादी लौ…अंग पिघलने लगता है…आह्…ऐस्…से ही…

(करीना ने अपना पुरा ध्यान सिर्फ एक ही कार्य पर केन्द्रित कर रखा है। अपनी लपलपाती जीभ से सिर से लेकर पुरे गरदन तक की मालिश कर रही है और होंठों से सिर के उठे हुए भाग को घिस रही है। लिंगदेव के पोर-पोर की मालिश और लगातार सिर पर वार से तीसरी आँख खुलने को बेताब हो रही है। करीना का सिर पकड़ कर राजेश एक झटके के साथ नीचे की ओर दबा देता है जिस से पुरा नौ इंची हथियार मुख से होता हुआ गले तक धँस जाता है और करीना के गले की माँसपेशियाँ का कँपकँपाता स्पर्श लिंगदेव के सिर को जकड़ कर सोखने से सुबह से दबा हुआ ज्वालामुखी फट पड़ता है और बहुत देर से उबलता हुआ लावा करीना के गले में झरझरा कर बहने लगता है। इस प्रकार के विस्फोट का एहसास राजेश को अपने जीवन में पहली बार हुआ है। काफी देर तक लगातार बहने के बाद राजेश अपना शिश्न करीना के मुख से निकालता है। करीना अलग हो कर राजेश कि ओर देखते हुए अपने होंठों पर जुबान फिराती है।)

करीना: (राजेश को आँखे मूंदे और निढाल पड़े हुए देख कर)…अंकल क्या हुआ?

राजेश: (धीरे से आँख खोलते हुए) करीना आज का दिन मुझे हमेशा याद रहेगा…पहले एकाकार में जो स्तिथि तुम्हारी थी आज वह मैनें महसूस की है…हाँ अब पूरे होश में हूँ…चलो चलते है

करीना: प्रिय…यह तुम्हारा प्यार है…

(राजेश अपनी सीट को ठीक करता है और कार स्टार्ट करके आगे बढ़ाता है। कुछ देर के बाद अपने फार्महाउस पर पहुँचकर बन्द गेट के सामने ले जा कर रोकता है और हार्न बजा कर गेट खुलवाता है। कार को अपनी कोटेज के सामने लेजा कर रोकता है और फिर करीना को नीचे उतरने का इशारा करते हुए जल्दी से जा कर दरवाजे पर पड़ा ताला खोलता है। पीछे-पीछे करीना भी आकर खड़ी हो जाती है। दोनों काटेज के अन्दर प्रवेश करते है)

करीना: अंक…डार्लिंग यह किसकी जगह है…बहुत सुन्दर नजारा है…

राजेश: (करीना को अपने आगोश में ले कर) प्रिय्…यह किस की जगह नहीं है…यह सिर्फ चुदाई की जगह है। किस तो (करीना के होंठों पर उँगली फिराते हुए) कहीं पर भी कर सकते है…

करीना: यह चु…ई, क्या कहा था आपने…

राजेश: काम-क्रीड़ा को चुदाई कहते है। जो कि आज हम शाम के सात बजे तक यहाँ पर करेंगें। डार्लिंग… सबसे पहले…भूख लग रही है, तुम्हारा क्या हाल है…

करीना: जो आपने पिलाया है उस से तो मेरी भूख बढ़ गयी है…परन्तु यहाँ पर खाने का क्या इंतजाम है…

राजेश: यहाँ पर सब कुछ का इंतजाम है…तुम बोलो तो सही…

(दीवार पर लगी हुई बेल बजाता है। कुछ देर में एक देहाती सी नवयौवना आती है। करीना को स्कूल यूनीफार्म में देख कर ठिठक कर दरवाजे पर रुक जाती है। करीना भी उसको देख कर झेंप जाती है। दोनों एक दूसरे को आँखों से नापती है। जहाँ करीना अभी जिस्मानी परिपक्वता की ओर बड़ रही थी वहाँ नवयौवना का जिस्म अपने पूरे यौवन पर था। बदन पर छोटी सी लो कट चोली और लहराता हुआ लहँगा, गले मे एक चाँदी की हँसुली और नाक मे गोल सी नथ पहने हुए अपने उभरे हुए सीने को झीने से दुप्पटे से ढकती हुई करीना की ओर टिकटिकी लगा कर देख रही थी।)

राजेश: सुन्दरी…क्या हुआ। यह करीना है। और करीना यह सुन्दरी है। यह हमारे केअरटेकर की लड़की है। अन्दर आजा…

सुन्दरी: (झिझकते हुए अन्दर आ कर) काहे…बाबू बहुत दिनों में आए…(जरा आँखे मटकाती और मुस्कुराती हुई)…अब स्कूल की तितलियों का स्वाद लग गया है…

राजेश: (आँखे तरेरते हुए)…हाँ तेरी जुबान कैची की तरह चलती है। जल्दी से खाने का इंतजाम कर, हमें भूख लग रही है। जब तक खाना आता है…कुछ अभी पीने का इंतजाम कर… करीना, क्या पीना चाहोगी- हार्ड या सोफ्ट्…

करीना: (आँखों मे शैतानी भर कर)…हार्ड तो पी कर आई हूँ, कुछ सोफ्ट हो जाए।

राजेश: (सुन्दरी को आँख मार कर) इनके लिए कोक आन द राक्स और मेरे लिए वोद्का…जल्दी से ले कर आ।

(सुन्दरी मुस्कुरा कर इठलाती हुई बाहर निकल जाती है। राजेश अपनी ओर करीना को खींचकर सीने से लगा लेता है और धीरे से उसके होंठों को चूमता है। करीना भी उसका बड़े उत्साह से साथ देती है। दोनों अपने कार्य में लीन हो कर बेड पर लेट जाते है।)

राजेश: करीना…इस जगह का कभी भी टीना या उसकी मम्मी से जिकर नहीं करना। यह मेरी प्राइवेट जगह है। आज के बाद…हम यहीं पर मिला करेंगें।

करीना: यह सुन्दरी कैसी बातें करती है…क्या आपने इसके साथ भी…

राजेश: मै तुमसे झूठ नहीं बोलूँगा। हाँ मैनें इसके साथ भी कभी-कभी कर लेता हूँ। इसके बाप ने इसे अपनी पत्नी बना कर रखा हुआ है।

करीना: ओ गाड…इसके फादर ने…क्यों

राजेश: सेक्स एक जरूरत है। इसकी माँ नहीं है…जब यह दस साल की थी तब से यह अपने बाप के साथ उसकी दुलहन कि तरह रहती है।

करीना: वेरी स्ट्रेंज्…फिर आपके साथ कैसे…इसके बाप नें मना नहीं किया।

राजेश: छोड़ो यह सब…इसके बारे में फिर कभी बताऊँगा, आज हमारे पास समय कम है। जब कभी तुम एक दो दिन के लिए यहाँ पर रुकोगी तो विस्तार से इसकी कहानी सुनाऊँगा। (करीना के ब्लाउज के हुक खोलते हुए) तुम अपनी यूनीफार्म बदल लो और एक साड़ी लपेट लो। अगली बार मै तुम्हारे साईज के कपड़े ला कर रख दूँगा…

(दरवाजे पर हल्के से खंखारने की आवाज होती है। करीना जल्दी से अपने कपड़े ठीक करते हुए बेड से उतरती है। सुन्दरी हाथ में ट्रे लिए खड़ी हुई मुस्कुरा रही है।)

राजेश: आजा…बेड पर ही लगा दे।

सुन्दरी: (आँखे मटकाती हुई) आप नाह्क ही…आप आराम से लेटी रहो…(कहते हुए राजेश के करीब आ जाती है)

राजेश: सुन्दरी…तेरे पास कोई साड़ी है क्या, करीना कुछ देर कपड़े बदल कर आराम करेगी…

सुन्दरी: मेरे पास तो सिर्फ लहंगा और चोली है। एक दुपट्टा भी है। मालकिन तो इस दुपट्टे से भी काम चला लेंगीं। (बड़ी बेशर्मी से सुन्दरी अपने दुप्पटे को अपने सीने से उतार कर करीना की ओर फेंक देती है। राजेश की नजर उसकी चोली मे बाहर झाँकते हुए नग्न वक्षस्थल पर पड़ती है तो वह एक गहरी साँस लेते हुए धीरे से अपने हथियार को पकड़ कर दबाते हुए सुन्दरी को घूरता है)… आप अपना गला तर करिए मै खाना ले कर आती हूँ।

(राजेश कोक की बोतल करीना के हाथ में थमाता है। अपना ग्लास उठा कर वोदका का सिप लेता है।)

राजेश: कैसा लग रहा है…

करीना: बिलकुल घर जैसा…कुछ अजीब सा टेस्ट है…

राजेश: इसमें मैनें थोड़ी वोदका मिलवा दी है…इस की वजह से तुम्हारी टेन्शन थोड़ी कम हो जाएगी…(राजेश के हाथ एक बार फिर से करीने के जिस्म की हर गोलाई को नापने मे लग जाते है)

करीना: (धीरे से कोक का सिप लेती हुई) आप मुझसे सच में प्यार करते है कि सिर्फ मेरे शरीर को भोगना चाहते हैं…।

राजेश: (करीना के होंठों को चूमते हुए) करीना डार्लिंग तुम्हारा भोग तो मै झुरमुटों के पीछे कर चुका हूँ। आज तुम्हारा यहाँ पर होना मेरे प्यार की निशानी है…

करीना: (थोड़ी सी वोदका के सुरूर में) तो फिर हम किस का इंतजार कर रहे है…(कहते हुए अपना अधखुले ब्लाउज को खोलती हुई)…अब मुझसे यह दूरी बर्दाश्त नहीं हो रही है।

राजेश: तुम से क्या…(हाथ में खाने की ट्रे लिए तभी सुन्दरी का आगमन)…सारा सामान मेज पर लगा दे और फिर तेरी छुट्टी…जब जरूरत होगी बुला लेंगें…

(सुन्दरी जल्दी से सारा सामान मेज पर लगा देती है और कमरे के बाहर अपने कूल्हे मटकाती हुई निकल जाती है। राजेश अपनी बाँहों मे ब्रा और स्कर्ट पहने करीना को उठा कर मेज पर ले आता है। राजेश मेज पर बैठी करीना की स्कर्ट के पीछे के हुक खोल कर नीचे सरका देता है और फिर अपने कपड़े भी उतार फेंकता है। पूरी तरह नग्न अवस्था में बेड के पास जा कर ड्रिंक्स की ट्रे उठा कर ला कर मेज पर रख देता है। करीना सिर्फ ब्रा और पैन्टी में खड़ी हो कर चुपचाप देखती है। राजेश कुर्सी पर बैठ कर करीना को अपनी गोदी में बिठाता है और फिर दोनों पुष्ट गोलाईयों को सहलाता है।)

राजेश: प्रिय…अब खाना खा लेते हैं क्योंकि अब आगे लम्बी रेस दौड़नी है…

करीना: हाँ, बिलकुल…

(थोड़ा दबता हुआ गेहुँआ रंग, तीखे नयन-नक्श, सफेद ब्रा में अधढके 38’ साइज के उन्नत और सुडौल उरोज, भरपूर कटाव लेती हुई कमर और वी-शेप कि सफेद रंग की काटन पैन्टी, करीना के अंग-अंग से कमसिन जवानी बेकरारी से मचलती हुई प्रतीत हो रही है। पूरी तरह से नग्न गोरा और बालिष्ट जिस्म, घुंघराले बालों के बीच में मोटे से पाईप की तरह बाहर लटकता हुआ अर्धसुप्त अवस्था में गुप्तांग, सब कुछ मिला कर राजेश कामदेव का स्वरूप लग रहा है। दोनों नये युगल जोड़े की तरह प्यार से एक दूसरे के साथ चुहल करते हुए खाना खाते है। बीच-बीच में अपनी ड्रिंक्स से सिप लेते है। खाने के बाद राजेश अपनी बाँहों मे भर कर करीना को बेड पर ले आता है।)

राजेश: डार्लिंग, अपनी-अपनी ड्रिंक्स अब बाट्म्स अप कर लेते है…नहीं ठहरो…ऐसे नहीं…

(राजेश ब्रा के हुक खोल कर करीना के पुष्ट उरोजों का अनावरण करता है। बची हुई वोदका को धीरे से बाँये स्तन पर उँडेलता है और बड़ी शीघ्रता से स्तनाग्र को अपने मुख में भर कर बहती हुई वोदका को पीने की कोशिश करता है। परन्तु पीता कम है, लेकिन स्तनाग्र को अपने मुख से सोखता ज्यादा है। ऐसा ही वह दाँयें स्तन के साथ दोहराता है। थोड़ी देर तक क्रमवार करीना के स्तनों के साथ खेलता है। हर्षोन्मत हो कर करीना की सिस्कारियाँ भी कमरे में गूँजने लगती हैं।)

करीना: प्रि…य… उह्…उह्…आ…आह्…यह क्य्…या क…र न न…हीं रहे

(राजेश सरकते हुए पैन्टी के सिरे में उँगलियॉ अटकाते हुए नीचे की ओर खींचता हुआ बाहर निकाल फेंकता है। केले जैसी चिकनी टांगों पर अपने होंठों की मौहर लगाता हुआ जांघो को चूमता हुआ योनिद्वार पर अपनी जुबान से ठोकर मारता है। अपनी उंगलियों से संतरे की फांकों सी होंठों को धीरे से खोल कर अकड़े हुए गुलाबी बीज को बची हुई वोदका से नहलाता है फिर उसको अपनी जुबान से चाट-चाट कर लाल कर देता। मोती सा सीप इस वार से रोद्र रूप लेकर फूल कर कुप्पा हो जाता है। करीना भावातिरेक हो कर राजेश का सिर पकड़ कर अपनी योनिमुख पर कस दबाती है और अपने अन्दर उफनते हुए ज्वालामुखी रोकने की कोशिश करती है। लेकिन राजेश है कि पूरी उघड़ी हुई दरार पर अपने मुख से वार पर वार किये जा रहा है)

करीना: नहीं…न…हीं, उह्…उह्…आ…आह्…यह क्य्…या क…र न न…हीं…

(करीना आनंदातिरेक की सारी हदें पार करती हुई एक झटके के साथ ढेर हो जाती है और फिर कई सारे हल्के झटके लेते हुए योनिमुख से प्रेमरस की वर्षा कर देती है। राजेश भी गिद्ध की तरह सहस्त्र्धारा पर टूट पड़ता है और प्रेमरस की एक-एक बूँद को वोदका की तरह गटक जाता है। करीना अपनी तेज चलती हुई साँसों को काबू में करती है और राजेश के सिर को अपनी गोद में रख कर उसके होठों को चूमते हुए अपने प्रेमरस का स्वाद चखती है।)

राजेश: जानेमन…कैसा लगा। आज मैं बहुत नशे में हूँ…पहले वोदका और उस पर तुम्हारे प्रेमरस का काकटेल…

करीना: (भावावेश में) स्वर्गिम…खुले आसमान में उड़ रही हूँ…अब मेरी बारी है…(कहते हुए राजेश के तन्नायें हुए हथियार को प्यार से सहलाती है और कुकुरमुत्ते से सुपाड़े को अपने मुख में भरती है।)

राजेश: जानेमन…इसको अपने मुख से अच्छी तरह नहला दो…(कहते हुए अपना आधा लिंग करीना के गले में धँसा देता है।)

(करीना लिंगदेव की गरदन को पकड़ कर सोखना आरंभ करती है। बहुत देर से उफनता हुआ लावा इस वार से धधक उठता है। राजेश धीरे से करीना को अपने से अलग करता है और अपने को शान्त करने का प्रयत्न करता है।)

क्रमशः