सेक्स की पुजारन

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007
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Re: सेक्स की पुजारन

Unread post by 007 » 11 Dec 2014 07:34

सेक्स की पुजारन पार्ट- 7

गतान्क से आगे.............

मिस्टर वेर्मा ने अब मेरी पॅंटी के अंदर हाथ डाल दिया था और मेरी चूत को उपर उपर से सहला रहे थे. उनकी उंगलियाँ और मिस्टर शर्मा की बातें से में बहुत गरम हो रही थी.

‘तुम्हारा कप साइज़ क्या हैं बेटी’

‘जी डबल डी’

‘वाह बहुत खूब. हमे दिखाओ गी ?’ यह कह के मेरे जवाब देने से पहले उन्होने मेरे बटन फटाफट खोल दिए और मेरा शर्ट खोल दिया. मैने ब्रा नहीं पहनी थी मेरी शर्ट के खुलने से मेरे बूब्स दोनो के सामने आ गये. दोनो की आँखों में चमक आ गयी. कुछ कहे बिना ही दोनो मेरे बूब्स पे टूट पड़े. दोनो बूढ़े मेरे बूब्स को ज़ोर से चाटने और चूसने लगे. उनके मूह से ‘स्ल्ल्ल्ल्लर्र्र्र्र्र्र्र्रप्प्प्प्प्प... स्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्लर्र्र्र्र्र्र्र्रप्प्प्प्प्प्प’ की आवाज़े आ रही थी, मेरे दोनो बूब्स उनकी थूक से पूरे गीले हो कर चमक रहे थे. बीच बीच में वो मेरे निपल को दांतो तले काट लेते तो मेरे सारे बदन में करेंट दौड़ जाता. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैने अपने हाथ बढ़ा कर दोनो के पॅंट के उपर से उनके लंड को पकड़ खिच ने लगी. उन्होने तुरंत अपना मूह मेरे बूब्स से हटाए बिना अपनी पॅंट उतार दी.

मैं दोनो के लंड देख के खुश हो गयी. लंड 8 इंच लंबे और मोटे थे बिल्कुल टीचर के लंड जैसे और पूरे टाइट हो कर खड़े हुए थे. दोनो के लंड के बाल पूरे सफेद थे. लंड पर भी काफ़ी झुर्रियाँ(रिंकल्स) थी. मुझे ये लौडे देख के बहुत मज़ा आ रहा था. मुझे दोनो लंड अपने मूह में लेके चूसने का मन कर रहा था. मैने दोनो लंड को पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया. वो दोनो मेरे बूब्स को पागल कुत्तों की तरह नोच रहे थे. मिस्टर वेर्मा मेरी पॅंटी निकाल कर मेरी चूत में अब दो उंगलियाँ डाल कर अंदर बाहर कर रहे थे. उनकी उंगलियाँ मेरी चूत में और दोनो के होठ और जीब मेरे बूब्स पे मुझे दीवाना बना रहा था और में झरने के बहुत करीब थी. अचानक मैने मिस्टर वेर्मा का लंड और ज़्यादा सूजता महसूस किया, वो झरने वाले थे. मैं उनका लंड पूरी ज़ोर से हिलाने लगी, उनके लंड से पानी फव्वारे की तरह निकलना शुरू हो गया. लंड से बहुत सारा पानी निकल रहा था, उनका पूरा लंड और मेरा हाथ गीला हो गया था, धीरे धीरे पानी नीचे बह कर उनके बल्ल को भी पूरा गीला कर दिया. सारे वक़्त उन्होने मेरी चूत में उंगलियाँ हिलाना ज़ारी रखा था अब में झरने के बिल्कुल पास थी. यहा मिस्टर शर्मा भी झरने वाले थे. उन्होने मेरा हाथ उनके लंड से अलग कर दिया और मेरे सामने खड़े होकर अपना लंड मेरे चेहरे के नज़दीक लाकर ज़ोर से उसे हिलाने लगे. में अब झार रही थी. मिस्टर वेर्मा ने तीसरी उंगली मेरी चूत में डाल दी और एक दम तेज़ी से उसे अंदर बाहर करने लगे. मेरे सारे बदन में सनसनी फेल गयी. मैं अपना मूह खोल कर ‘आआअहह.. आआआआआअहह’ करके सिसकियारी भर रही थी और ज़ोर से झार रही थी. उसी वक़्त मिस्टर. शर्मा भी झरने लगे ‘आआहह.... आआआआआआआआहह’ उनके लंड से वीर्य की मेरे चेहरे पे जैसे बारिश होने लगी. उनका वीर्य कुछ मेरे चेहरे पे और कुछ मेरे खुले मूह में गिर रहा था. में अभी भी झार रही थी और ये सारा वीर्य मुझ पर गिरने से में और ज़ोरो से झरने लगी. मिस्टर शर्मा ने ढेर सारा वीर्य मेरे चेहरे पे निकाल दिया. अब वो पूरा झार गये थे और अपने लंड को धीरे धीरे हिला रहे थे. में भी झार चुकी थी. मेरे झार जाने के बाद भी मेरा सारा बदन कपकपा रहा था.

मिस्टर शर्मा के लंड से इतना वीर्य निकला के मेरा सारा चेहरा गीला हो गया और मेरे मूह में भी काफ़ी वीर्य पड़ गया था. मेने मेरे मूह के अंदर के वीर्य एक घुट में पी लिया और शर्मा जी के लंड पे जो थोड़ा वीर्य चिपक के रह गया था उसे मैने अपनी जीब निकाल कर चाट चाट कर सॉफ कर लिया. मिस्टर वर्मा ने मुझे लंड चाट ते देखा और कहा ‘तुम तो बहुत सेक्सी हो बेटी, पर मेरा लंड तो पूरा वीर्य से गीला है. इसको भी चाट के सॉफ करदो’. यह कह कर वो मेरे सामने आ कर खड़े हो गये. उनका लंड अब पूरी तरह बैठ गया था. मैने उनके लंड को हाथ में ले के चाटना शुरू कर दिया. दो मिनूट मैं लंड का सारा वीर्य सॉफ हो गया. इसी दौरान मिस्टर शर्मा ने खड़े हो कर अपने सारे कपड़े उतार दिए थे. उन्होने मेरा शर्ट और स्कर्ट भी उतार कर मुझे पूरा नंगा कर दिया. मिस्टर. वेर्मा ने कहा ‘अब मेरे बॉल से भी वीर्य सॉफ कर दो बेटी’

‘ठीक हैं’ मैने कहा

‘ज़मीन पर बैठों गी तो आसानी होगी’

में ज़मीन पर घुटनो तले बैठ गई. मिस्टर वेर्मा ने अपना एक पैर सोफा पर रख दिया ताकि मुझे उनके बॉल चाटने में आसानी हो. मैने जीब निकाल कर उनके बॉल चूमते और चाटते सॉफ करना शुरू कर दिया. मिस्टर शर्मा मुझे बॉल चाटते देख अपने लंड को हिला कर धीरे धीरे खड़ा कर रहे थे. मिस्टर. वेर्मा भी अपने लॉड को धीरे धीरे हिला कर खड़ा कर रहे थे. मेने चाटते हुए अब मिस्टर वेर्मा के बॉल सॉफ कर दिए और अपना सिर उपर किया. शर्मा जी और वेर्मा जी के लंड अब आधे खड़े हो गये थे.शर्मा जी ने मेरा स्कर्ट अपने हाथों में ले कर मेरे चेहरे से अपना वीर्य सॉफ कर दिया. दोनो ने अपने लंड मेरे चेहरे के नज़दीक ला कर मेरे गालो पर रगड़ने लगे. दो बड़े बड़े गरम लंड मेरे चेहरे पर एक साथ महसूस कर के मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैने अपना मूह खोल के अपनी जीब पूरी बाहर कर दी. ‘लगता हैं बिटियाँ रानी को लंड चखना हैं’ यह कह के मिस्टर शर्मा ने अपना आधा खड़ा लंड मेरे मूह में दे दिया और में उसे मस्त होके चूसने लगी. मेरे चूसने से उनका लंड मेरे मूह मे मैने सुजता महसूस किया. एक ही मिनिट में लंड पूरा कड़क हो गया था. मैने उसे मूह से निकाल कर मिस्टर वेर्मा का लंड चूसने लगी. उनका भी लंड मेरे मूह में जाते ही सूजने लगा और पूरा टाइट हो गया.

अब दोनो के लंड पूरे टाइट हो गये थे. मिस्टर शर्मा ने तुरंत ही मुझे खड़ा कर लिया.

मिस्टर. वेर्मा को देखते हुए उन्होने कहा ‘अब हम बिटियाँ रानी की चुदाई करेंगे’.

उन्होने मुझे सोफा पर कुतिया की तरह बिठा दिया. और मेरे पीछे बैठ के मेरी चूत को चाटने लगे. इस तरह से चूत चटवा कर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मेरी चूत चाटते चाटते वो अपनी नाक मेरे गांद के छेद पे रगड़ रहे थे. में पागल हो रही थी मुझे अब अपनी चूत में लंड चाहिए था. में आँखें बंद कर के ‘आआअहह.... आआआआआहह’ कर रही थी . में मिस्टर शर्मा को मुझे चोदने को कहना चाहती थी पर मुझे शरम आ रही थी.

मिस्टर. शर्मा ने आख़िर चूत चाटना बंद कर दिया. मेरी चूत पूरी गीली हो गयी थी. उन्होने अपना लंड मेरी चूत के छेद पे रखा. मैने 8 इंच के लंड से सिर्फ़ एक बार चुदाई की थी उसके अलावा तो सिर्फ़ विवक के 4 इंच के लंड के साथ खेली थी. मैं भूल गयी थी कि मेरी छोटी सी चूत में 8 इंच का लंड जाने से कितना दर्द होता हैं. शर्मा जी ने एक ज़ोरदार धक्के से अपने आधा लंड मेरी चूत में डाल दिया. में चिल्ला उठी ‘आआऐईइ’. शर्मा जी ने अपने मोटे लंड से मुझे 4 इंच तक चोदना शुरू किया. दो मिनिट में ही मेरा दर्द चला गया और मुझे मज़ा आने लगा. ‘अब दर्द कम हुआ बेटी?’ शर्मा जी ने पूछा.

‘हां’

मैं सोच रही थी कि कितने आछे गेंटल्मन हैं कि मेरे दर्द का ख्याल रख रहे हैं. असल में वो सिर्फ़ इसलिए जानना चाहते थे ताकि वो और लंड घुसेड के मुझे और दर्द दे. मेरे हां कहते ही उन्होने और एक ज़ोरदार धक्का मारा और उनका पूरा लंड मेरी चूत को चीरते हुए अंदर घुस गया. में दर्द से ज़ोर से चिल्ला बैठी ‘आआऐईईइ.....’. तभी मिस्टर. वेर्मा मेरे सामने आ गये और मेरे बाल पकड़ के मेरा सर उपर कर दिया और अपना लंड मेरे मूह में डाल दिया. में अब ‘म्‍म्म्मममममम.. म्‍म्म्मममम’ कर चिल्लाने की कोशिश कर रही थी. मिस्टर. शर्मा अब मुझे लगातार धक्के लगा रहे थे.

‘आआअहह.. बहुत टाइट हो तुम बेटी आआआआअहह’

मिस्टर वेर्मा अपना पूरा लंड मेरे मूह में ठुसने की कोशिश कर रहे थे. मेरे बॉल पकड़ के उन्होने मेरा सर हिलने से रोक लिया था. आख़िर थोड़ी देर ज़ोर लगाने के बाद उनका पूरा लंड मेरे मूह में घुस गया. सारे वक़्त मिस्टर. शर्मा अपने तगड़े लंड से मेरी चूत को चोद रहें थे. मेरा दर्द अब कम होने लगा. मुझे डॉग्गी स्टाइल में चुदाई का अब बहुत मज़ा आ रहा था. पूरे 8 इंच का लंड मेरे अंदर बाहर हो रहा था इससे मुझे पता चला कि विवेक से चुदाई कर के मैने भूल की थी. मेरा चूत का दर्द अब बिल्कुल चला गया था और ज़िंदगी में पहली बार असली चुदाई का मज़ा आ रहा था. मिस्टर वेर्मा मेरे मूह को ज़ॉरो से पूरे 8 इंच लंड से चोद रहे थे. इससे मुझे तकलीफ़ तो हो रही थी पर चुदाई का मज़ा इतना था कि मुझे इसकी कोई परवाह नही थी.

मिस्टर शर्मा अपने दोनो हाथो से मेरी गांद मसल रहें थे. उन्होने ऐसा करते करते अपनी एक उंगली मेरी गांद में डाल दी. उंगली डाल के उन्होने अपने लंड के धक्कों के साथ उंगली भी अंदर बाहर करने लगे. इस से मेरा मज़ा और भी बढ़ गया और में अपनी गांद पीछे धकेल धकेल के मिस्टर शर्मा के धक्को का जवाब देने लगी. ‘लगता हैं बिटिया रानी को बहुत मज़ा आ रहा हैं’

ये कह के मिस्टर शर्मा ने धक्को की रफ़्तार और बढ़ा दी. में झार ने के बहुत करीब थी और मिस्टर शर्मा की इस हरकत से अब मेरा झरना शुरू हो गया. मिस्टर वेर्मा और मिस्टर शर्मा का भी झरना शुरू हो गया था. दोनो ‘आआआआअहह..... आआआआअहह’ करके आवाज़े निकाल रहें थे.

मिस्टर. वेर्मा ज़ॉरो से अपना लंड मेरे मूह में अंदर बाहर कर रहें थे और पानी निकाल रहें थे, इतना ढेर सारा पानी निकल रहा था कि में पूरा निगल नही पाई और मेरे मूह के साइड से वो नीचे बहने लगा. मिस्टर. शर्मा का लंड भी मेरी चूत में वीर्य निकाल रहा था. चूत में गरम वीर्य का एहसास हो के मेरा झरना और बढ़ गया. में जैसे जन्नत में पहुच गयी थी. लगभग 5 मिनिट तक हम तीनो ऐसे ही झरते रहें. मिस्टर शर्मा ने इतना सारा वीर्य निकाला कि वीर्य मेरी चूत से निकल के मेरे पैरो पे नीचे बहने लगा.

आख़िर तीनो का झरना बंद हुआ. दोनो नें अपना लंड मेरे अंदर ही रखा. कुछ देर बाद दोनो के लंड बैठ गये और दोनो ने लंड बाहर निकाले. में थक के सोफा पे लेट गयी. मिस्टर शर्मा और मिस्टर वेर्मा भी थक के सोफा पे बैठ गये.

कुछ देर बाद मिस्टर. वेर्मा ने मुझ से कहा

‘अरे बेटी तुम्हारे तो सारे शरीर पे वीर्य चिपक के सूख गया हैं. तुम ऐसा करो जल्दी से शवर लेलो’

‘ठीक हैं’

में शवर की तरफ जाने लगी. दोनो मेरे जवान नंगे जिस्म को देख रहे थे. में सोच रही थी कि ये दोनो कितने आछे गेंटल्मन थे और मुझे कितना मज़ा दिया दोनो ने. पता नही क्यूँ डिज़िल्वा ने कहा कि दोनो जंगली जानवर हैं. में जानती नही थी कि मिस्टर शर्मा मेरी छोटी सी गोरी गांद को देख कर क्या प्लान बना रहें थे और कुछ ही देर में मुझे पता चलने वाला था कि वो कितने जंगली थे और में उन जानवरों का शिकार बनने वाली थी...

में शवर के नीचे जा कर खड़ी हो गयी और अपने आप को पानी से सॉफ करने लगी. मेने अपने पूरे बदन पर साबून रगड़ रगड़ के ठीक से सॉफ किया. दस एक मिनिट में पूरी सॉफ हो कर में शवर से निकलने के लिए तैयार हो गयी. मैं मूडी तो मैने देखा कि मिस्टर वेर्मा और मिस्टर शर्मा दोनो बाथरूम में आ गये थे और मुझे नहाते हुए मेरा नंगा जवान जिस्म अपनी आखों से पी रहे थे. दोनो के चेहरे से एक हल्की सी मुस्कान और आँखों में हवस थी. उनके लंड आधे खड़े थे. उनको मुझे घूरते देख मैने सोचा क्यों ना में उनको थोड़ा और मज़ा दूं. मैने दूसरी तरफ मूड गयी और झुक के उनके सामने अपनी गांद को दोनो हाथो से फैला कर मसल्ने लगी. मेरी पानी से चमकती गांद दोनो को पागल बना रही थी. मुझे दोनो के सामने अपने नंगे बदन की नुमाइश करके बहुत मज़ा आ रहा था. मैने एक उंगली अपनी गांद में डाल दी तो मेरे मूह से ‘आआआहह… म्‍म्म्मममममम…’ की सिसकियारी निकल गयी. अब में अपनी उंगली को अपनी गांद में अंदर बाहर करने लगी. मुझे अब बहुत सेक्स चढ़ गया था दोस्तो मैं सेक्स की पुजारन तो बन ही चुकी थी कुछ देर ऐसा करने के बाद मैने गांद से उंगली निकाल दोनो की तरफ मूड गयी. मैने देखा तो दोनो के लंड अब पूरे कड़क हो कर खड़े थे और वो अपने लंड को धीरे धीरे सहला रहें थे. मैं दोनो हाथों से अपने बूब्स दबाने लगी और अपने निपल को खीचती रही. में अब बिल्कुल पागल हो रही थी. मुझे फिर से चुदाई करनी थी. वहाँ मिस्टर शर्मा और मिस्टर वेर्मा भी मेरी जवानी लूटने के लिए उतावले हो रहे थे. दोस्तो कैसा लगा ये पार्ट हमारी सेक्स की पुजारन और भी मस्ती मे आती जेया रही मुझे तो लगता है अब शरमाजी और वर्मा जी इसकी गान्ड का भी उद्घाटन करने वाले है आगे जानने के पढ़ते रहिए सेक्स की पुजारन आपका दोस्त राज शर्मा

क्रमशः..........


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Re: सेक्स की पुजारन

Unread post by 007 » 11 Dec 2014 07:34

Sex ki pujaaran part- 7

gataank se aage.............

Mr Verma ne ab meri panty ke andar haath daal diya tha aur meri chut ko upar upar se sehla rahey the. Unki ungliyan aur Mr Sharma ki baatein se mein bahut garam ho rahi thi.

‘tumhara cup size kya hain beti’

‘ji double d’

‘wah bahut khoob. Humey dikhao gi ?’ Yeh keh ke mere jawab dene se pehle unhone mere button phataphat khol diye aur mera shirt khol diya. Maine bra nahin pehni thi mere shirt ke khulne se mere boobs dono ke saamne aa gaye. Dono ki aankhon mein chamak aa gayi. Kuch kahey bina hi dono mere boobs pe toot pade. Dono budhe mere boobs ko zor se chaatne aur choosne lage. Unke muh se ‘Slllllrrrrrrrrrpppppp... sllllllllrrrrrrrrrppppppp’ ki awaazey aa rahi thi, mere dono boobs unki thuk se poore gile ho kar chamak rahe the. Beech beech mein woh mere nipple ko datoon tale kaat lete toh mere sare badan mein current daud jata. Mujhe bahut maza aa raha tha. Maine apne haath badha kar dono ke pant ke upar se unke lund ko pakad khich ne lagi. Unhone turant apna muh mere boobs se hatai bina apni pant utar di.

Mein dono ke lund dekh ke khush ho gayi. lund 8 inch lambe aur mote the bilkul teacher ke lund jaisey aur pure tight ho kar khade hue the. Dono ke lund ke baal pure safed the. Lund par bhi kafi zhuriya(wrinkles) thi. Mujhe ye laudey dekh ke bahut mazaa aa raha tha. Mujhe dono lund apne muh mein leke choosne ka man kar raha tha. Maine dono lund ko pakad kar hilana shuru kar diya. Woh dono mere boobs ko pagal kutton ki tarah noch rahe the. Mr Verma ne meri panty nikal kar meri chut mein ab do ungliyaan daal kar andar bahar kar rahe the. Unki ungliyaan meri choot mein aur dono ke hooth aur jheeb mere boobs pe mujhe diwana bana raha tha aur mein jharne ke bahut kareeb thi. Achanak maine Mr Verma ka lund aur zaada soojta mehsoos kiya, woh jharne vale the. Main unka lund poori zor se hilaney lagi, unke lund se pani phuware ki tarah nikalna shuru ho gaya. Lund se bahut sara pani nikal raha tha, unka pura lund aur mera haath gila ho gaya tha, dheerey dheerey pani niche beh kar unke ball ko bhi poora gila kar diya. Saare waqt unhone meri chut mein ungliyan hilana zari rakha tha ab mein jharne ke bilkul paas thi. Yaha Mr Sharma bhi jharne vaale the. Unhone mera haath unke lund se alag kardiya aur mere saamne khade hokar apna lund mere chehre ke nazdik laakar zor se use hilaane lage. Mein ab jhar rahi thi. Mr Verma ne teesri ungli meri chut mein daal di aur ek dum tezi se use andar bahar karney lage. Mere saare badan mein sansani phel gayi. Mein apna muh khol kar ‘aaaaahhhhh.. aaaaaaaaaaahhhhh’ karke siskiari bhar rahi thi aur zor se jhar rahi thi. Usi waqt Mr. Sharma bhi jharne lage ‘aaaahhhh.... aaaaaaaaaaaaaaaahhhh’ unke lund se virya ki mere chehre pe jaise baarish hone lagi. Unka virya kuch mere chehre pe aur kuch mere khule muh mein gir raha tha. Mein abhi bhi jhar rahi thi aur ye sara virya mujh par girne se mein aur zoro se jharne lagi. Mr Sharma ne dher saaraa virya mere chehre pe nikaal diya. Ab woh pura jhar gaye the aur apne lund ko dheerey dheerey hila rahe the. Mein bhi jhar chuki thi. Mere jhar jaane ke baad bhi mera sara badan kapkapa raha tha.

Mr Sharma ke lund se itna virya nikla ke mera sara chehra gila ho gaya aur mere muh mein bhi kafi virya pad gaya tha. Mene mere muh ke andar ka virya ek ghut mein pee liya aur Sharma jee ke lund pe jo thoda virya chipk ke reh gaya tha use mein apni jheeb nikaal kar chaat chaat kar saaf kar liya. Mr Varma ne mujhe lund chaat te dekha aur kaha ‘Tum to bahut sexy ho beti, par mera lund to poora virya se gila hai. Isko bhe chaat ke saaf kardo’. Yeh keh kar woh mere saamne aa kar khade ho gaye. Unka lund ab poori tarah baith gaya tha. Maine unke lund ko haath mein le ke chaatna shuru kar diya. Do minut main lund ka saara virya saaf ho gaya. Issi dauran Mr Sharma ne khade ho kar apney sarey kapdey utaar diye the. Unhone mera shirt aur skirt bhi utaar kar mujhe poora nanga kar diya. Mr. Verma ne kaha ‘Ab mere ball se bhi virya saaf kar do beti’

‘thik hain’ maine kaha

‘Zameen par baithon gi to aasani hogi’

Mein zameen par ghutno tale baith gai. Mr Verma ne apna ek pair sofa per rakh diya taki mujhe unke ball chaatne mein aasaani ho. Maine jheeb nikaal kar unke ball chumte aur chaate saaf karna shuru kar diya. Mr Sharma mujhe ball chaate dekh apne lund ko hila kar dheere dheere khada kar rahe the. Mr. Verma bhi apne laude ko dheere dheere hila kar khada kar rahe the. Meine chaatte hue ab Mr Verma ke ball saaf kar diye aur apna sir upar kiya. Sharma ji aur Verma ji ke lund ab aadhe khade ho gaye the.Sharma ji ne mera skirt apne haathon mein le kar mere chehre se apna virya saaf kar diya. Dono ne apne lund mere chehre ke nazdik la kar mere gaaloon par ragadne lage. Do bade bade garam lund mere chehre per ek saath mahsoos kar ke mujhe bahut mazaa aa rahaa tha. Maine apna muh khol ke apni jheeb poori bahar kar di. ‘Lakta hain bitiyaan raani ko lund chakhna hain’ yeh keh ke Mr Sharma ne apna adha khada lund mere muh mein de diya aur mein use mast hoke chusne lagi. Mere chusne se unka lund mere muh me maine sujta mehsoos kiya. Ek hi minute mein lund pura kadak ho gaya tha. Maine use muh se nikalke Mr Verma ka lund chuusne lagi. Unka bhi lund mere muh mein jaate hi sujne laga aur pura tight ho gaya.

Ab dono ke lund pure tight ho gaye the. Mr Sharma ne turant hi mujhe khada kar liya.

Mr. Verma ko dekhte hue unhone kaha ‘Ab hum bitiyaan rani ki chudaai karenge’.

Unhone mujhe sofa par kutti ki tarah bitha diya. Aur mere peeche baith ke meri chut ko chaatney lagey. Is tarah se chut chatva kar mujhe bahut mazaa aa rahaa tha. Meri chut chaatey chaatey woh apna naak mere gaand ke ched pe ragad rahe the. Mein paagal ho rahi thi mujhe ab apni chut mein lund chaahiye tha. Mein aankhein band kar ke ‘aaaaahhh.... aaaaaaaaaahhhh’ kar rah ithi . Mein Mr Sharma ko mujhe chodney ko kehna chahti thi par mujhe sharam aa rahi thi.

Mr. Sharma ney aakhir chut chaatna band kar diya. Meri chut puri gilli ho gayi thi. Unhoney apna lund meri chut ke ched pe rakha. Mainey 8 inch ke lund se sirf ek baar chudaai kit hi uske alaava to sirf Vivk ke 4 inch ke lund ke saath kheli thi. Main bhul gayi thi ki meri choti si chut mein 8 inch ka lund jaaney se kitna dara hota hain. Sharma ji ney ek zordaar dhake se apnay aadha lund meri chut mein daal diya. Mein chilla uthi ‘aaaaaiiii’. Sharma ji ney apney motey lund se mujhe 4 inch tak chodna shuru kiya. Do minute mein hi mera dard chala gayaa aur muujhe mazaa aaney lagaa. ‘Ab dard kam hua beti?’ Sharma ji ne pucha.

‘haan’

Main soch rahi thi ki kitney ache gentleman hain ki mere dard ka khyaal rakh rahe hein. Asal mein woh sirf isliye jaanna chahte they taki woh aur lund ghusedke mujhe aur dard de. Mere haan kehte hi unhoney aur ek zordar dhakka maaraa aur unka pura lund meri chut ko chirtey hue andar ghus gayaa. Mein dard se zor se chilla baithi ‘aaaaaiiiiii.....’. Tabhi Mr. Verma mere saamne aa gaye aur mere baal pakad ke mera sar upar kar diya aur apna lund mere muh mein daal diya. Mein ab ‘mmmmmmmmm.. mmmmmmm’ kar chillaney ki koshish kar rahi thi. Mr. Sharma ab mujhe lagaataar dhakke lagaa rahey the.

‘aaaaahhhhh.. bahut tight ho tum beti aaaaaaaaahhh’

Mr Verma apna pura lund merey muh mein thusney ki koshish kar rahey the. Mere baal pakad ke unhoney mera sar hilney se rok liya tha. Aakhir thodi der zor lagaaney ke baad unka pura lund mere muh mein ghus gayaa. Saare waqt Mr. Sharma apney tagde lund se meri chut ko chod rahein they. Mera dard ab kam honey lagaa. Mujhe doggi style mein chudaai ka ab bahut mazaa aa rahaa tha. Pure 8 inch ka lund mere andar baahar ho rahaa tha issey mujhe pataa chala ki Vivek se chudaai kar ke mainey bhul ki thi. Mera chut ka dard ab bilkul chalaa gayaa tha aur zindagi mein pehli baar asli chudaai ka mazaa aa rahaa tha. Mr Verma merey muh ko zorro se pure 8 inch lund se chod rahey they. Isse mujhey takleef to ho rahi thi par chudaai ka mazaa itna tha ki mujhe iski koi parvaah nahi thi.

Mr Sharma apney dono haaton se meri gaand masal rahein they. Unhoney aisaa karte karte apni ek ungli meri gaand mein daal di. Ungli daal ke unhoney apney lund ke dhakkon ke saath ungli bhi andar baahar karney lagi. Is se mera mazaa aur bhi bhad gayaa aur mein apni gaand peeche dhakel dhakel ke Mr Sharma ke dhakko ka jawaab dene lagi. ‘Lagta hain betiyaa rani ko bahut mazaa aa rahaa hain’

Ye keh ke Mr Sharma ne dhakko ki raftaar aur bhadaa di. Mein jhar ne ke bahut kareeb thi aur Mr Sharma ki ye harkat se ab mera jharna shuru ho gayaa. Mr Verma aur Mr Sharma ka bhi jharna shuru ho gayaa tha. Dono ‘aaaaaaaaahhhhhhh..... aaaaaaaaahhhhhhh’ karke aawaazey nikaal rahein they.

Mr. Verma zorro se apna lund mere muh mein andar baahar kar rahein they aur paani nikaal rahein they, itna dher saaraa pani nikal rahaa tha ki mein pura nigal nahi paayi aur mere muh ke side se woh neeche behney lagaa. Mr. Sharma ka lund bhi meri chut mein virya nikaal rahaa tha. Chut mein garam virya ka ehsaas ho ke mera jharna aur badh gayaa. Mein jaise jannat mein pahuch gayi thi. Lagbhag 5 minute tak hum teeno aisey hi jharte rahein. Mr Sharma ne itna saaraa virya nikaala ki virya meri chut se nikal ke mere pairo pe neechey behney lagaa.

Aakhir teeno ka jharna band hua. Dono nein apna lund merey andar hi rakhaa. Kuch der baad dono ke lund baith gaye aur dono ne lund baahar nikaaley. Mein thak ke sofa pe let gayi. Mr Sharma aur Mr Verma bhi thak ke sofa pe baith gaye.

Kuch der baad Mr. Verma ne mujh se kahaa

‘Are beti tumharey to saare shareer pe virya chip ke suk gayaa hain. Tum aisa karo jaldi se shower karlo’

‘thik hain’

Mein shower ki taraf jaaney lagi. Dono mere jawaan nange jism ko dekh rahe the. Mein soch rahi thi ki ye dono kitney ache gentleman the aur mujhe kitna mazza diya dono ne. Pata nahi kyun Desilva ne kaha ki dono junglee jaanwar hain. Mein jaanti nahi thi ki Mr Sharma meri choti si gori gaand ko dekh kar kya plan bana rahein they aur kuch hi der mein mujhe pata chalney waalaa tha ki woh kitney junglee they aur mein un jaanwaron kaa shikaar banne waali thi...

Mein shower ke neeche ja kar khadi ho gayi aur apne aap ko paani se saaf karne lagi. Meine apne poore badan par saaboon ragad ragad ke thik se saaf kiya. Dus ek minute mein poori saaf ho kar mein shower se nikalne ke liye taiyaar ho gayi. Main mudi to maine dekha ki Mr Verma aur Mr Sharma dono bathroom mein aa gaye the aur mujhe nahaate hue mera nanga jawaaan jism apni aakhon se pee rahe the. Dono ke chehre se ek halki si muskan aur aankhon mein hawas thi. Unke lund aadhey khadey they. Unko mujhe ghoorte dekh maine socha kyon na mein unko thoda aur maza doon. Mainey doosri taraf mud gayi aur jhuk ke unke saamne apni gaand ko dono haaton se phailaa kar masalne lagi. Meri paani se chamakti gaand dono ko paagal banaa rahi thi. Mujhe dono ke saamney apney nange badan ki numaaish karke bahut mazaa aa rahaa tha. Mainey ek ungli apni gaand mein daal di to mere muh se ‘aaaaaahhhh… mmmmmmmmm…’ kis siskiyaari nikal gayi. Ab mein apni ungli ko apni gaand mein andar baahar karney lagi. Mujhe ab bahut sex chad gayaa tha. Kuch der aisa kernay ke baad mainey gaand se ungli nikal dono ki tarak mud gayi. Mainey dekha to dono ke lund ab pure kadak ho kar khade the aur woh apney lund ko dheerey dheerey sehlaa rahein the. Main dono haathon se apney boobs dabaney lagi aur apney nipple ko kheechti rahi. Mein ab bilkul paagal ho rahi thi. Mujhe phir se chudaai karni thi. Wahaan Mr Sharma aur Mr Verma bhi meri jawaani lutney ke liye utaavle ho rahey they.

kramashah..........


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Re: सेक्स की पुजारन

Unread post by 007 » 11 Dec 2014 07:35

सेक्स की पुजारन पार्ट- 8

गतान्क से आगे.............

मिस्टर शर्मा मेरी नज़दीक आ गये और ‘अब मुजसे नहीं रहा जाता’ कह के मुझे उठा लिया. उठा के वो मुझे कमरे में ले जाने लगे. कमरे में जाने से पहले मैने देखा के मिस्टर वेर्मा शवर के नीचे खड़े हो कर साबुन से अपनी गांद सॉफ कर रहे थे. मुझे समझ में नहीं आया कि वो ऐसा क्यूँ कर रहें हैं. बेडरूम में आ के मिस्टर शर्मा ने मुझे बिस्तर पे फेक दिया और सीधे मेरे पैर फैला कर मेरी चूत को उपर उपर से चाटने लगे. मिस्टर वेर्मा भी दो मिनिट में आ गये और मेरे बूब्स चूसने लगे.

कुछ मिनिट ऐसा करने के बाद मिस्टर वेर्मा ने अपने घुटनो तले मेरे सर के बाजू में बैठ के अपना लंड मेरे होटो पे रगड़ ने लगे. मैने अपने होठ खोलके अपनी जीब बाहर निकाल दी ताकि वेर्मा जी अपना लंड उस पे रगड़ सके. ऐसा कुछ मिनूटों तक चलता रहा में बहुत गरम हो गयी थी. मिस्टर वेर्मा ने अब हट के अपना एक पैर उठा कर मेरे सिर को दोसरे साइड पे कर दिया. अब उनके बॉल मेरे माथे को छू रहे था और उनका लंबा लंड मेरी नाक, खुले होंठ और जीब पे रगड़ रहा था. शर्मा जी ने अपनी जीभ अब एक झटके में पूरी मेरी चूत में डाल दी, मैं ‘आआआहह…. म्‍म्म्ममममममममम’ करके ज़ोर से सिसकारिया भरने लगी. उनकी जीब पूरी मेरी चूत में घुसी हुई थी और वो अपनी जीब को उपर नीचे हिला रहे थे. में पागल हो रही थी. मिस्टर वेर्मा यहा मेरे उपर थोड़ा और आगे बढ़े और अपने बड़े बॉल्स मेरे होटो पे रख दिए. मैं अपने होठ खोल के उनके बॉल चूमने और चाटने लगी. उन्हों ने अपने दोनो हाथो से मेरे बूब्स दबोचना शुरू कर दिया और मैने अपना मूह पूरा फैला कर उनके बॉल जितने समा सके उतने अपने मूह मे लेके ज़ोर से चूसने लगी. मेरा ऐसा करने पर मिस्टर वेर्मा के मूह से आअहह निकल पड़ी. कुछ मिनूटों तक में उनके बॉल इसी तरह चूस्ते रही, मिस्टर. शर्मा मेरी चूत अब और ज़ोरो से चाट रहे थे और मेरे मूह से ‘म्‍म्म्मममह. ...म्‍म्म्मममह’ की सिसकियारी निकल रही थी. फिर अचानक मिस्टर वेर्मा ने अपने बॉल मेरे मूह से निकाल दिए और थोड़ा उपर होके अपने गांद का छेद मेरे होटो के नज़दीक ला कर नीचे बैठने लगे.

मुझे पता चल गया के वो चाहते थे कि मैं उनके गांद के छेद को चाटलू. पर ये मुझे नही करना था और मैने अपना सिर मोड़ लिया.

‘क्या हुआ बेटी ’

‘मैं ऐसा नहीं करूँगी, मुझे गंदा लगता हैं’

‘फिकर मत करो बेटी. मैने स्नान करने के वक़्त इससे साबुन से बहुत साफ कर के रखा हैं’. तब मुझे समझ में आया की मिस्टर. वेर्मा अपनी गांद पे साबुन क्यूँ लगा रहें थे.

’नहीं यानी नही. में नही करूँगी

यह सुन कर मिस्टर. शर्मा ने मेरी चूत से अपनी जीब निकाल दी और कहा ‘बेटी यह ग़लत बात हैं. ऐसे ज़िद नहीं करते. अगर तुम वेर्मा की गांद नहीं चाटोगी तो में भी तुम्हारी चूत नहीं चाटूंगा’

‘प्लीज़ मिस्टर शर्मा, अपनी जीब फिर से अंदर डालो मुझे बहुत मज़ा आ रहा हैं’

‘मज़ा आ रहा हैं ना. अगर तुम्हे मज़ा लेना हैं तो मज़ा देना भी तो पड़ता हैं ना. ऐसा करो मैं तुम्हारी चूत चाटू तब तक तुम उसकी गांद के छेद को थोड़ा थोड़ा उपर से चाट लो, ठीक हैं’

‘मैने कह दिया ना नहीं मतलब नहीं’.

‘देखो बेटी ज़िद नही करते. अगर तुम वेर्मा की गांद चॅटो गी तो वेर्मा तुम्हारे बूब्स को अच्छी तरह से चोदेगा’

मुझे समझ में नहीं आया की बूब्स को कैसे चूदेन्गे ? ’वो कैसे होता हैं’ मैने पूछा

‘तुम उसकी गांद को चॅटो और वो तुम्हे तुम्हारे बूब्स चोद के दिखाता हैं. ठीक हैं ?’

‘ठीक हैं’ मैने कहा. ‘लेकिन अगर आप बंद करदेंगे तो मैं भी बंद कर दूँगी’

‘ठीक है बेटी. चलो शुरू हो जाओ’ यह कह के मिस्टर शर्मा ने मेरी चूत को फिरसे चाटना शुरू कर दिया.

मैने अपना सिर सीधा कर लिया. मिस्टर वेर्मा ने अपनी गांद धीरे से नीचे कर ली और गांद का छेद मेरे होंठो के करीब ला दिया. मैने अपने होठ खोल के अपनी जीभ धीरे से बाहर कर ली और धीरे से उपर उपर से थोड़ा थोड़ा चाटना शुरू कर दिया. ‘थोड़ा ज़ोर से चॅटो बिटियाँ’ मिस्टर वेर्मा ने कहा. ‘नहीं पहले आप करने वाले थे वो करिए‘. ‘ठीक हैं’ यह कह के मिस्टर वेर्मा ने अपना लंड मेरे दोनो बूब्स के बीच में रख कर मेरे दोनो बूब्स अपने हाथो से साइड से उनके लंड पे दबा दिए और धीरे धीरे अपना लंड बूब्स के बीच रगड़ने लगे. अपनी उंगलियों से वो मेरे निपल खिच रहे थे. उनका गरम गरम लंड मेरे बूब्स के बीच और मेरे निपल का खिचना और साथ ही मिस्टर शर्मा का ज़ॉरो से मेरी चूत चाटना, ये सब एक साथ महसूस कर के मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था. मैने सोचा कि ये दोनो मुझे इतना मज़ा दे रहे हैं तो मेरा भी फर्ज़ हैं की मैं उनको खुश करू. यह सोच के मैने मिस्टर वेर्मा की गांद को थोड़ा ज़ोर से चाटना शुरू कर दिया, उनके गांद के छेद में भी काफ़ी सफेद बाल थे और उन बाल से मुझे थोड़ी गुदगुदी हो रही थी. उन्होने वाकेइ अपनी गांद अछी तरह से सॉफ की थी. मिस्टर. शर्मा अब ज़ोरो से मेरी चूत चाट रहे थे. में पागल सी हो रही थी. मैने भी अपनी जीब को मिस्टर. वेर्मा की गांद के छेद पे ज़ोर दे कर अंदर डाल दिया. मिस्टर. वेर्मा के मूह से ‘आआआआआआआहह’ करके आवाज़ निकल गयी ‘बहुत अच्छे बेटी, और ज़ोर से चॅटो’. मैने अपनी जीब को मिस्टर. वेर्मा की गांद में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. मिस्टर. वेर्मा पागल हो रहे थे और ‘आआआहह....आआआआहह’ की आवाज़े निकाल रहे थे. मुझे आश्चर्या हो रहा था कि में इस बुड्ढे आदमी की गांद में अपनी जीब डाल के हिला रही थी पर मुझे ज़रा भी बुरा नहीं लग रहा था. उपर से मुझे मज़ा आ रहा था. कुछ मिनूटों तक हम तीनो ऐसा ही करते रहे. मिस्टर. वेर्मा मेरे बूब्स के बीच लंड रगड़ते रहे और में अपनी जीब उनकी गांद में पूरा डाल के हिलाती रही. इतनी देर जीब को कड़क रख के गंद के छेद में रखने से अब मेरी जीब में दर्द होने लगा था. मैने उसे बाहर निकाला. मिस्टर वेर्मा ने कहाँ ‘अंदर से मत निकालो बेटी, बहुत मज़ा आ रहा हैं’

‘अब मुझ से और नही होगा, जीब को कड़क रखते रखते मुझे दर्द हो रहा हैं’

‘ठीक हैं मेरी गांद के अंदर नहीं लेकिन छेद को चाटना बंद मत करो’

‘ठीक हैं’ कहके मैने उनके गांद के छेद को चाटना ज़ारी रखा.

‘थोड़ा ज़ोर से चॅटो बेटी. और अपने होठ भी लगाओ उससे’. मेने अपने होंठ आगे कर के उनके गांद के छेद को होंठो से चूमने लगी और ज़ोर से चाटने लगी.

कुछ मिनूटों के बाद मिस्टर. शर्मा ने मेरी चूत से जीब निकाल दी. मैं सोच ही रही थी की वो अब क्या करेंगे की उन्होने मेरी दोनो टांगे उठा कर अपने कंधे पे डाल दी और मुझे अपनी गांद के छेद पे उनका लंड रगड़ता महसूस हुआ.

मैने सोचा के अगर उनका इतना बड़ा लंड मेरी गांद में घुसा तो में तो मर जाऊंगी. मैने तो सिर्फ़ एक बार विवेक का छोटा सा लंड अपनी गांद में लिया था और वो भी बहुत मुश्किल से. मुझे पता नही चला लेकिन वेर्मा और शर्मा ने एक दूसरे को इशारा कर के तैयार कर दिया था. में कुछ कहूँ उससे पहले ही मिस्टर. वेर्मा ने अपनी गांद और नीचे कर ली और पूरी तरह मेरे चेहरे पर बैठ गये और अपनी गांद का छेद मेरे चेहरे पे रगड़ने लगे. मैने अपना सर हटाने या मोड़ ने की कोशिश की पर उनका पूरा वजन मुझ पे था और मैं अपना सर बिल्कुल हिला नही पा रही थी. मिस्टर. शर्मा ने एक बहुत ज़ोर का धक्का मारा और मुझे उनका लंड 4 इंच तक मेरे गांद मे जाता महसूस हुआ. मे ज़ोर से चीखना चाहती थी पर मेरा मूह तो मिस्टर वेर्मा की गंद से दब गया था. मिस्टर शर्मा ने अपने लंड को थोड़ा अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और मेरा दर्द कम हो गया. लेकिन में जानती थी के किसी भी वक़्त वो अपना बाकी का लंड भी मेरी गांद में डाल ही देंगे. और ऐसा ही हुआ. उन्होने और एक ज़ोरदार धक्का लगाया और उनका लंड पूरा का पूरा मेरी गांद में चला गया. मेरी आँखों से आँसू बह रहे थे, में अपने हाथो से कभी मिस्टर शर्मा तो कभी मिस्टर वेर्मा को मार के हटाने की कोशिश कर रही थी पर उनपर कोई असर नही हुआ, में दर्द से छटपटा रही थी. वो अब खुशी से ‘आआआआअहह... आआआआआआआअहह’ चिल्ला कर मेरी गांद में अपना लंड धीरे धीरे अंदर बाहर कर रहे थे. ‘बहुत टाइट हैं बिटियाँ रानी, लगता हैं कभी गांद नही मरवाई आआआआहह..’.

यहाँ मिस्टर वेर्मा ज़ोर से मेरे दोनो बूब्स को दबा कर बीच में अपना लंड रगड़ रहे थे, इस रगड़ने के साथ उनका गंद का छेद भी मेरे होटो और नाक पे ज़ॉरो से रगड़ रहा था. इस रगड़ने से मेरी नाक थोड़ी सी उनके गांद के छेद मे घुस जाती. मेरी जीब अभी भी मेरे मूह से बाहर थी और इसकी वजह से उनका छेद और मेरा मूह गीला हो गया था.

मिस्टर शर्मा का लंड, अब मेरी गांद को चीरते हुए तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा था. मुझे उन दोनो को रोकना था लेकिन उन दोनो ने मुझे ऐसे जाकड़ के रखा था के में कुछ नहीं कर पा रही थी. वो दोनो दस मिनिट तक मुझे इसी तरह से चोदते रहे. मेरा दर्द थोड़ा कम होने ही लगा था कि मिस्टर शर्मा झरने के करीब आ गये और जंगली जानवर की तरह मेरी गांद को और ज़ोर से चोदने लगे. मेरा दर्द दो गुना बढ़ गया. वो ज़ोर से चिल्ला रहे थे ‘आआआअहह..... आआआआआआअहह’ उनके लंड से पानी निकलना शुरू हो गया. मिस्टर वेर्मा के मेरे बूब्स दबाने से मुझे अब बूब्स में भी दर्द हो रहा था और अब वो भी झरने लगे थे, उन्होने मेरे बूब्स और ज़ोर से साइड से दबाए और ज़ोर से मेरे बूब्स चोदने लगे. उन्होने अपनी गांद भी और ज़ोरो से मेरे चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दिया. अब हरेक धक्के पे मेरा पूरा नाक उनके गंद के छेद में चला जाता था. वो भी ‘आआआअहह..... आआआआआआअहह’ चिल्ला रहे थे और उनके लंड से भी पानी निकल के मेरे पेट पे गिरने लगा. दोनो तकरीबन तीन या चार मिनिट तक ऐसे ही चिल्लाते रहे और झरते रहे और ढेर सारा वीर्य निकालते रहे. फिर दोनो ने धक्का लगा ना बंद किया. मिस्टर शर्मा ने फिर भी अपना लंड मेरी गांद से नही निकाला और अंदर ही रखा. मिस्टर वेर्मा ने आख़िर मेरे चेहरे से अपनी गांद हटा दी. उन्होने अपने लंड पे लगा बाकी वीर्य मेरे एक बूब पे घिस के सॉफ किया. दो मिनिट बाद जब मिस्टर शर्मा का लंड पूरा बैठ गया तो मेरी गांद से निकाला और उन्होने मेरे दूसरे बूब पे लंड को घिस के सॉफ कर दिया. मेरा चेहरा पूरा लाल था और मेरे आखों से अभी भी दर्द के आसू बह रहे थे लेकिन वेर्मा और शर्मा मे से किसी ने मुझे कोई सहानीभूति दिखाई. उन्होने मुझे कोई इस्तेमाल की गयी चीज़ की तरह वहाँ ही छोड़ के, अपने कपड़े उठा के बगल की रूम में चले गये जहाँ डिज़िल्वा बैठा था. में दर्द के मारे वाहा पर ही पड़ी रही.

मुझे बाजू के कमरे से आवाज़ सुनाई दे रही थी.

‘मान गये डिज़िल्वा. क्या लड़की है. आज तक तूने ऐसा माल कभी डेलिवर नही किया, ज़्यादातर तू कोई सस्ती रांड़ को स्कूल की ड्रेस में ले आता हैं. दो या तीन बार स्कूल की लड़की लाया भी हैं तो बिल्कुल काली कलूटी. पर ये मानसी की तो तारीफ करू उतनी कम हैं. इतनी टाइट चूत और गांद और क्या चिकनी सूरत. कितने पैसे हुए’

‘बस दोनो बीस बीस हज़ार दे दो’

‘बीस हज़ार? बात तो पाँच की हुई थी’

‘हुई तो थी पर वो तो एक घंटे के लिए. तुम दोनो तो उसको चार घंटे से चोद रहे हो’

ये बात सुनकर शर्मा और वेर्मा हँसने लगे.

’क्या करे माल ही कुछ ऐसा हैं. अगर घर पे बीवी इंतेज़ार ना करती होती तो हम यहाँ पर ही रह जाते. तुम बीस बीस हज़्ज़ार हमारे खाते मे जोड़ दो’

‘ओके जी. आप लोगो से बिज़्नेस करने में यह ही अछी बात हैं. आप लोगो को माल की कीमत का अंदाज़ा लगाना आता हैं, अगर इससे फिर कभी चोदना हो तो सिर्फ़ एक फोन करदेना’

मैं ये बातें सुन कर हैरान हो गयी. डिज़िल्वा ने मुझे बेवकूफ़ बनाया था. पहले तो उसने मुझे दो जवान मर्द का लालच दे के मनाया. फिर टॅक्सी में मेरी चूत से खेल के मुझे गरम कर दिया ताकि में किसी से भी चुदवाने को तैयार हो जाउ. और फिर ये पैसे की बात. साले ने मुझे रांड़ बना दिया था.

शर्मा जी और वेर्मा जी के जाने के बाद डिज़िल्वा कमरे में आया.

‘कैसा लगा मेरी जान, मज़ा आया’.

मैने डिज़िल्वा को चिल्ला कर कहा ‘साले कुत्ते, तूने मुझे बेवकूफ़ बनाया और मेरा फयडा उठाया और उन दोनो से पैसे लिए’

डिज़िल्वा बेफिकर हो कर बोला ‘अरे वाह, बहुत नखरे मत कर. में सब सुन रहा था. उन दोनो से ज़्यादा तो तूने मज़े लिए हैं तू तो ऐसे बात कर रही हैं जैसे तुझे मज़ा नहीं आया.’

‘कुछ भी हो तुमने मुझे झूट कहा और उनसे पैसे लिए. ऐसे गंदी चीज़ मैं फिर कभी नही करूँगी. और में तुमसे अब कभी नहीं मिलूँगी. तुझ जैसे आदमी की मुझ से मिलने की हसियत ही नहीं हैं’. मेरे मूह से बात निकलते ही मुझे पछतावा हो गया. में जानती थी कि डिज़िल्वा ने हेसियत की बात सुन के विवेक को कैसे मारा था.

हेसियत की बात सुनते ही देसील्वा गुस्से से लाल हो गया था.

‘साली अब दिखा ता हूँ मैं तुझे मेरी हसियत.’ ये कह के डिज़िल्वा ने अपना पॅंट नीचे कर दिया और अपना दस इंच का मोटा लंबा लंड बाहर निकाला....क्या बात है दोस्तो अपनी सेक्स की पुजारन अब तक तो आठ इंच के लंड से चुदति आई है क्या वो दस इंच का लंड बर्दास्त कर पाएगी जानने के लिए पढ़ते रहे सेक्स की पुजारन

वैसे दोस्तो किसी ने एक शेर कहा है

चूत री चूत तूने खाए बेगाने पूत

जो होती बीघा चार तो देती देश उजाड़

इस शेर के बारे मे आपकी क्या राय है ज़रूर बताना

आपका दोस्त राज शर्मा

क्रमशः..........