दामिनी compleet

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rajaarkey
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Re: दामिनी

Unread post by rajaarkey » 23 Dec 2014 08:41

दामिनी--35

गतान्क से आगे…………………..

मम्मी तो इतनी मस्त थी ये सब देख , अपनी चूत सहला सहला कर उनका तो पानी छूट रहा था ...

फिर भैया पायल आंटी के गर्म गर्म होंठों , जीभ और मुँह की चुदाई से रोक नहीं पाए अपने को और पायल आंटी की मुट्ठी से जकड़े लौडे को झटका देते देते उनके मुँह में झडने लगे ....पायल आंटी ने पूरे का पूरा अंदर ले लिया ..उसे पी गयीं ..गले से नीचे उतारती गयीं ....और जो भी थोड़ा उनके होंठों और ठुड्डी में लगा था जीभ से चाट गयीं

और इधर पापा भी धक्के पे धक्का लगाते लगाते उनकी पीठ जकड़ते हुए अपना लंड उनकी चूत में धंसाए झाड़ते जा रहे थे ....झाड़ते जा रहे थे और पायल आंटी तो दो दो लंड की चुदाई के सिहरन से मस्ती में चीत्कार रही थी ....और झड़ती जा रही थी .....उनकी चूतड़ उछाल रही थी ..."उईईईईई माअं ....हाँ ...आज मेरी चूत को शांति मिली .....उफफफ्फ़ ....आआआआआआआआआआः ...." और पायल आंटी भैया के लौडे को मुँहे में लिए लिए उनकी जांघों पर अपना सर रख दिया..

और अंत में मैने भी भैया के मुँह में अपना चूत रस छोड़ना शुरू कर दिया ....

हम सब लंबी लंबी साँसें ले रहे थे और एक दूसरे पर ढेर थे और एक दूसरे के बदन के स्पर्श का आनंद ले रहे थे ......

तभी मम्मी के पैरों की पायल की खनक सुनाई दी ...वह पापा के मुरझाए लौडे को अपने पैरों के तलवों से जाकड़ , सहला रही थी ... पैर के हीलने से पायल की मधुर खनक की आवाज़ ने सब को फिर से मदहोशी के आलाम से वापस जगाया ....

पापा का लौडा भी अपनी नींद से धीरे धीरे जाग रहा था .." ओह डार्लिंग ...तुम्हारा भी जवाब नहीं कम्मो..तुम्हारे हर अंग से सेक्स बोलता है ....उफफफ्फ़ ..क्या मस्त हैं तुम्हारे पैरों का कमाल और उन से निकलती मधुर संगीत ....तुम सही में सेक्स की देवी हो.."

और उन्होने मम्मी को गले से लगाते हुए चूमना शुरू कर दिया ..

" क्या करूँ अभय..तुम्हारा लौडा भी तो कितना मस्त है ...जो इसे छू ले और अंदर ले वोई जान सकता है इसका कमाल ..क्यूँ पायल मैने ठीक कहा ना.."" मम्मी ने पायल आंटी को आँखें मारते हुए कहा .

"हाँ कम्मो ..तुम ने ठीक कहा ....क्या लौडा है और क्या चुदाई है अभय की...चूत के एक एक कोने को चोद डालता है ..पूरी चूत भर उठती है ..दोनों बाप बेटे को तुम ने अच्छी ट्रैनिंग दी है चोदने की .....देखो ना मेरी चूत अभी भी फडक रही है ...... " पायल आंटी ने मस्ती लेते हुए कहा ..

मैने देखा उनका चूत सही में अभी भी मस्ती से कांप रहा था ....

फिर मम्मी ने पापा का लंड अपने हाथों में लिया और सहलाने लगी ...और उनके हाथ की चूड़ीयाँ खनकने लगीं ....उफ्फ क्या अंदाज़ था उनका ...एक मुट्ठी नीचे और उसके उपर दूसरी मुट्ठी और एक के बाद एक मुट्ठी उनके लौडे की चॅम्डी को उपर नीचे करती और चूड़ीयाँ खनक जातीं ...बहुत ही सेक्सी अंदाज़ था ....

पापा का लौडा एक दम कड़क हो मम्मी के हाथों में लहरा रहा था....

मम्मी की आँखों में मस्ती टपक रही थी ...." भाई मैं तो अब रुक नहीं सकती ..अभय तुम लेटे रहो मैं तुम्हें चोदून्गि ...." और उन्होने पायल आंटी की तरफ देखते हुए कहा " किसी को कोई ऐतराज़ ..??"

पायल आंटी ने हंसते हुए कहा " नो ऑब्जेक्षन्स मी लॉर्ड....अपने पति को चोद ने में मुझे क्या ऐतराज़ , और तुम ने कितनी मेहनत की इसे खड़ा करने में ..बस चोद डाल कम्मो ..हम सब देखते हैं ..."

और फिर मम्मी पापा के तननाए लौडे पर अपनी फूली फूली और गुलाबी फांकों वाली चूत को रखते हुए बैठ गयीं .....उफफफ्फ़ क्या नज़ारा था .....उनका पूरा चूत धँस गया ...पापा का लौडा पूरा अंदर था ....मम्मी बस उस पर सवार उपर नीचे , उपर नीचे उछल रही थी और उनके गले का हार , उनके कान की बलियाँ सभी उछल रहे थे ...और मम्मी एक अजीब ही मस्ती में थी ...उनके झट्के से उनके कमर का कमरबन्द भी झटके ख़ाता नीचे लहराते हुए पापा के सुपाडे से छू जाता और पापा इस स्पर्श से सिहर उठ ते ...चूत और गहनों से उनकी चुदाई ..मम्मी ही कर सकतीं थी ..पापा की मस्ती बढ़ती जाती ....वह कराह उठ ते ...कांप उठ ते मम्मी के हर धक्के से और इधर मम्मी भी आँखें बंद किए चूत के हर कोने में पापा के लंड का अहसास ले रही थी .....बीच बीच में पापा भी अपनी कमर उठा उठा कर उनके धक्कों से मिलाते हुए अपना धक्का भी लगा देते .......

.हम सब इस चुदाई को देख देख मस्ती में थे ....और भैया मुझे और पायल आंटी को अगल बगल दबाए दोनों हाथों से चुचियाँ मसल रहे थे और हमे बारी बारी चूमे जा रहे थे ...और मैं और पायल आंटी उनके लौडे को सहलाए जा रहे थे..उनका कड़क और तननाया लौडा ....उफफफफ्फ़ क्या मस्ती थी ...आज तो बस हम सब इस चुदाई ..चुसाइ के खेल में डूबे थे ..ऐसी मस्ती हमें कभी नहीं आई थी ..हम दोनों की चूत से भी लगातार पानी रीस रहा था ....

और भैया का लौडा हवा में लहरा रहा था ...इतना कड़क था के हिल रहा था ....मुझ से रहा नहीं गया ..मैं भैया के बगल से उठी और अपनी टाँगें उनके दोनों ओर रखते हुए उनके लौडे पर बैठ गयी ..चूत इतनी गीली थी मेरी और लौडा उनका इतना टाइट ..मेरे चूतड़ तक मेरी चूत धँस गयी .फतच से ..और मैं सिहर गयी ....भैया ने मुझे और जाकड़ लिया अपने से और पायल आंटी ने मेरी फैली चूतड़ के बीच से मेरी गंद में अपनी उंगली में थूक लगाते हुए पेल दी ......आआआः ...मैं चिहुक गयी ..इस से मेरी चूत और फैल गयी ....और चूत गीली होती गयी ..पानी बहे जा रहा था और मैं भैया के लंड पर उछल उछल कर बैठ ती जाती ..

और मम्मी पापा तो बस अपने में खोए थे .मम्मी के पायल और चूड़ियों का खनकना जारी था ..जोरों से पापा की चुदाई हो रही थी ....माँ मेरे बाप को चोद रही थी और बहेन अपने भाई को ....और आंटी मेरी गान्ड में उंगली किए जा रही थी और अपनी चूत भी मसल रही थी...

rajaarkey
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Re: दामिनी

Unread post by rajaarkey » 23 Dec 2014 08:42

ये दूसरा दौर चुदाई का था ...बड़ा हसीन और संगीतमय ..मम्मी कराह रही थी , पापा चिल्ला रहे थे ....मैं मस्ती में रो रही थी ....गान्ड और चूत दोनों की खूजली मिटा रही थी ....

और फिर सब शांत हो गया .....जैसे तूफान के बाद ...इस तूफ़ानी चुदाई के बाद ...पापा मम्मी की गहने के स्पर्श से बुरी तरह सिहरते हुए झाड़ते जा रहे थे और मम्मी अपनी चूत धंसाए उन से चिपकी थी ....मैं भी भैया से चिपकी थी और चूतड़ उछाले जा रही थी और पायल आंटी सोफे पर टाँगें फैलाए झड़ती जा रही थी ...सोफे पर नदी बह रही थी उनकी चूत से ...

कमरा वीर्य और चूत रस की सोंधी सोंधी महक से भर उठा था ...हमारी तेज़ साँसों से हमारे अंदर समाए जा रहा था....

हम सब मदहोश थे....

क्या समा था ड्रॉयिंग रूम में ...मम्मी और पापा एक दूसरे पर नीचे कालीन पर पड़े थे ..मम्मी ,पापा के सीने से चिपकी थी ...और आँखें बंद किए पापा के सीने की गर्मी का मज़ा ले रहीं थी ..उनके चेहरे पर हमेशा की तरह एक मदभरी मुस्कान थी ...और मुँह खुला ...

और बड़े सोफे पर पायल आंटी और मैं भैया के दोनों ओर अपनी अपनी टाँगें सामने रखी टेबल पर फैल्लाए उन से चिपके थे और भैया हम दोनों को अपने बाहों में लिए अपना होंठ कभी मेरे गालों पर रख देते तो कभी पायल आंटी के गालों पर ...दोनों का स्वाद ले रहे थे ...

सब का चेहरा कितना रिलॅक्स्ड था ...इतनी मस्त चुदाई और चूत की घिसाई हुई थी ...

जहाँ प्यार से चुदाई होती है वहाँ का माहौल भी बड़ा प्यारा होता है..आज का माहौल इसका जीता जागता उदाहरण था .

तभी मम्मी ने अपनी आँखें खोलीं और अपने चारों ओर निघाहे दौड़ते हुए हम सब को देखा ...और उनके चेहरा और भी खील उठा ..खास कर पायल आंटी को देख ....पायल आंटी अपनी टाँगें और चूत फैलाए अपने आप को भैया की बाहों में छोड़ दिया था ..जैसे उन्होने अपनी पूरी जिस्म उनके हवाले कर दी हो ....और ये कहना चाहती हों के जो जी चाहे कर लो ...जैसे भी चाहे चोद लो ....."

'"क्यूँ पायल सब ठीक तो है ना ..? कैसी लगी आज की चुदाई ..??"

" मत पूछ कामिनी ..तुम ने क्या माहौल बनाया है अपने घर का ..बाहर वाले भी यहाँ घरवाले बन जाते हैं...उफफफफफ्फ़ ..मत पूछ बस इतनी मस्ती और मज़ा मुझे कभी नहीं आया ..मन करता है ..इन दो लौन्डो को अपने अंदर हमेशा के लिए रख लूँ ....क्या लंड है और क्या चुदाई ... "

" रोका किस ने है मेरी रानी ...घुसा ले ना दोनों लंड एक साथ अपनी चूत और गान्ड में ....और ले ले मज़ा ...."

" हाई ..हाई ..क्या आइडिया है कामिनी .....एक साथ दो दो लंड .....उईईईईईईईईईईईईईईई ..मैं तो सिर्फ़ सोचते ही लगता है झाड़ जाउन्गि ...मान ना पड़ेगा कामिनी ...तुम सही में सेक्स की देवी ही नहीं ..सेक्स की पुजारन भी हो ...."पायल आंटी ने भैया को चूमते हुए मम्मी से कहा ..

" हे हे हे हे....पर अभी तेरी ये सेक्स की पुजारन पेट की पुजारन बन ने वाली है ...भाई इतनी मस्त चुदाई के बाद मुझे तो भूख लग रही है ..मैं कुछ खाने पीने का इंतज़ाम करती हूँ ..."मम्मी ने हंसते हुए कहा .

rajaarkey
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Re: दामिनी

Unread post by rajaarkey » 23 Dec 2014 08:42

तब तक पापा भी अपनी मदहोशी से वापस होश में आ गये थे उन्होने मम्मी की हाँ में हाँ मिलाया और उनके साथ किचन की ओर चल पड़े .

मम्मी अपनी पायल खन्काति , कमर लचकाती , गान्ड मतकती अपनी मदमस्त चाल से आगे थी और पापा उनके पीछे ...

और इधर हम तीनों सोफे पर एक दूसरे से खेल रहे थे ...भैया के मुरझाए लौडे को दोनों बारी बारी से सहलाते ..चूस्ते और भैया एक हाथ से मेरी और दूसरे हाथ से पायल आंटी की सुडौल और गुदाज चुचियाँ मसल रहे थे..

10 -15 मिनूटों के बाद मम्मी और पापा बाहर आए किचन से ..मम्मी के हाथ में बड़ा सा ट्रे था ..जिस पर तीन चार बड़े प्लेट्स थे..एक में फ्राइड चिकन थी ..एक में कुछ नमकीन एक में फ्राइड फिश ..... और पापा के हाथ में भी ट्रे था और उस में था बढ़िया फ्रेंच वाइन की बॉटल्स और ग्लासस ....

क्रमशः……………………..