बात एक रात की compleet

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Nov 2014 03:39

बात एक रात की--5

गतान्क से आगे.................

इधर राज अपने कमरे में वापिस आ जाता है.

“गुरु नही आएगा…वो थका हुआ है…”

“तो मैं कौन सा उसे बुला रही थी…तुम ही चाहते थे उसे बुलाना.” नगमा ने कहा.

“क्यों अच्छे से नही मारी थी क्या गान्ड गुरु ने तुम्हारी पिछली बार जो ऐसे कह रही हो.”

“मुझे बहुत दर्द हुआ था राज…इसीलिए तो मैं दुबारा वाहा से नही करूँगी…”

“ये खूब कहा…तू मेरी गर्ल फ्रेंड है…गुरु को तो गान्ड दे दी…मुझे देने से मना कर रही है.”

“तुम ही लाए थे उस दिन उसे वरना मैं कभी नही होने देती ऐसा…”

“चल छ्चोड़ ये सब आ ना घूम जा…आज बहुत मन कर रहा है गान्ड मारने का, देखूं तो सही कि इसमे कैसा मज़ा आता है.” राज ने नगमा के चुतड़ों पर हाथ रख कर कहा.

“आगे से करो ना…वाहा ऐसा कुछ अलग नही है.” नगमा ने कहा.

“मुझे एक बार टेस्ट तो कर लेने दे…”

“नही मुझे दर्द होता है वाहा.”

“कुछ नही होगा…मैं गुरु से सीख कर आया हूँ.”

“क्या सीख कर आए हो.”

“यही कि गान्ड कैसे मारनी है.”

“मुझे नही करना ये सब…आगे से करते हो तो ठीक है वरना मैं चली…मुझे सुबह बहुत काम देखने हैं…लेट हो रही हूँ.”

“तू तो कहती थी कि सारी रात रहेगी मेरे साथ.”

“तो तुमने कौन सा बताया था कि तुम ये सब करोगे…”

“तो तुमने गुरु को क्यों डालने दिया था गान्ड में”

“वो उसने मुझे बातो में फँसा लिया था बस…वरना मेरा कोई इरादा नही था.”

“ह्म्म…यार ऐसे मत तडपा मान जा ना.” राज ने नगमा को बाहों में भर के कहा.

“ठीक है एक शर्त पर…दुबारा नही करूँगी…ये पहली और आखरी बार होगा.”

“ठीक है मंजूर है मुझे…” राज ने हंस कर कहा. उसकी आँखो में चमक आ गयी थी.

नगमा जो कि पूरी तरह नंगी थी उल्टी घूम कर पेट के बल लेट गयी.

“ऐसे नही…कुतिया बन जाओ…गान्ड मारने का मज़ा कुत्ता-कुत्ति बन कर ही आएगा.”

नगमा ने पोज़िशन ले ली और बोली, “भो-भो”

“ये क्या है…”

“तुम्ही तो कह रहे थे कुतिया बन जाओ…अब तुम भी कुत्ते की तरह ही करना ओके…” नगमा ने हंस कर कहा.

“वह यार क्या आइडिया है…तू सच में हॉट आइटम है…मज़ा आएगा तेरी गान्ड मार कर.”

“अब मारेगा भी या बकवास ही करता रहेगा, मेरा मूड बदल गया तो मैं कुछ नही करने दूँगी.”

“ओके…ओके…बस डाल रहा हूँ…वो मैं गुरु की बताई बाते सोच रहा था. उसने मुझे बताया था कि कैसे करना है.”

“गुरु को छ्चोड़ो…उसने बहुत दर्द किया था मुझे…तुम अपने दिमाग़ से काम लो…आराम से धीरे से डालो.”

“अरे हां यही तो गुरु भी कह रहा था…अच्छा ऐसा करो दोनो हाथो से अपनी गान्ड के पुथो को फैला लो, लंड को अंदर जाने में आसानी होगी.” राज ने अपने लंड पर थूक रगड़ते हुए कहा.

“थोडा सा मेरे वाहा भी थूक लगा देना…” नगमा ने सर घुमा कर कहा और अपने चुतड़ों को राज के लंड के लिए फैला लिया.

“हां-हां लगा रहा हूँ पहले अपने हथियार को तो चिकना कर लू. चिंता मत कर तेरी गान्ड को चिकनी करके ही मारूँगा.” राज ने बहके-बहके अंदाज में कहा.

“वैसे तुम्हे आज ये सब करने का भूत कैसे सवार हो गया.”

“गुरु ने मुझे बताया था कि उसे तेरी गान्ड मार के बड़ा मज़ा आया था. तभी से मैं भी लेने को तड़प रहा था.” राज ने जवाब दिया.

“वैसे मुझे ज़्यादा मज़ा नही आया था.”

“कोई बात नही अब आएगा मज़ा तुझे.” राज ने कहा

राज ने नगमा के होल पर ढेर सारा थूक गिरा दिया और उस पर अपने लंड को रगड़ने लगा.

“आह… धीरे से डालना…” नगमा सिहर उठी.

“अभी तो तेरे छेद को चिकना कर रहा हूँ. चिंता मत कर धीरे-धीरे ही अंदर डालूँगा.” राज ने कहा.

नगमा की गान्ड को अच्छे से चिकना करने के बाद राज ने अपने लंड को नगमा की गान्ड पर तान दिया. जैसी की किसी के सर पे बंदूक रखते हैं.

“मैं आ रहूं हूँ तुम्हारे अंदर.” राज ने कहा और अपने लंड को हल्का सा धक्का दिया.

“ऊऊई मा मर गयी…निकालो इसे बाहर मुझसे नही होगा.”

खेल बिगड़ता देख राज ने अपने लंड को पूरा का पूरा नगमा की गान्ड में धकेल दिया. “अगर बाहर निकालना ही है तो पूरा डाल कर निकालूँगा. एक बार अच्छे से गान्ड में लंड डालने का मज़ा तो ले लू” राज ने खुद से मन ही मन कहा.

“नहियीईई ये क्या कर रहे हो राज…निकालो इसे मैं मर जाउन्गि…तुमने तो एकदम से पूरा डाल दिया.”

“सॉरी नगमा…वो लंड चिकना होने के कारण खुद-बा-खुद अंदर फिसल गया.”

“झूठ बोल रहे हो तुम…तुम तो अपने गुरु के भी बाप निकले…निकालो वरना मैं फिर कभी तुम्हारे पास नही आउन्गि.”

“अच्छा थोड़ा रूको तो सही…मुझे ठीक से अहसास तो होने दे कि मैं तेरी गान्ड के अंदर हूँ.”

“तेरे अहसास के चक्कर में मैं मर जवँगी.”

“ऐसा कुछ नही होगा धीरज रखो…” राज ने नगमा के सर पर हाथ फिरा कर कहा.

नगमा छटपटाती रही पर राज ने अपने लंड को बाहर नही निकाला.

rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Nov 2014 03:39

कुछ देर बाद नगमा का दर्द कम हो गया और वो बोली, “तुम बहुत खराब हो.”

“आराम है ना अब.”

“हां…पर मैं तुम्हे करने नही दूँगी…निकालो बाहर,.”

“ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी.”

राज ने अपना लंड नगमा की गान्ड की गहराई से बाहर की तरफ खींचा. लेकिन इस से पहले कि वो पूरा बाहर आ पाता एक झटके में उसे पूरा का पूरा फिर से अंदर धकेल दिया. राज के आँड नगमा की गान्ड पर जा कर सॅट गये.

“ऊओयइी….तुम नही मानोगे.”

“बिल्कुल नही…बड़े दिन से तम्मानना थी तेरी गान्ड मारने की. आज अच्छे से मार कर ही दम लूँगा.”

“आहह…धीरे से मारो ना फिर…तुम तो ज़ोर से डाल रहे हो.” नगमा ने कहा

“क्या करूँ कंट्रोल ही नही होता.”

“आगे से तुम्हारे पास नही आउन्गि मैं.” नगमा ने गुस्से में कहा.

“सॉरी बाबा ग़लती हो गयी…अब मैं धीरे-धीरे करूँगा.”

राज धीरे-धीरे अपना लंड नगमा की गान्ड में रगड़ता रहा. कुछ ही देर में दोनो की साँसे फूलने लगी. और राज के धक्को की स्पीड खुद-बा-खुद तेज होती चली गयी.

“सॉरी अब धीरे से करना मुस्किल हो रहा है…बहुत मज़ा आ रहा है…क्या कहती हो… बना दूं तूफान मैल तुम्हारी गान्ड को.”

“ठीक है पर जल्दी ख़तम करना मुझसे सहा नही जा रहा.”

राज ने अपने धक्के तेज कर दिए…वो अपने चरम के करीब था. कोई 2 मिनट तेज-तेज धक्के मारने के बाद वो नगमा की गान्ड में झाड़ गया.

“आआहह मज़ा गया कसम से…गुरे ठीक कहता था…तेरी गान्ड बड़ी मस्त है.”

“हटो अब…मुझे लेटना है…थक गयी हूँ इस पोज़िशन में.”

राज बहुत खुश था आख़िर उसकी मुराद जो पूरी हो गयी थी…..

………………………………………..

पद्‍मिनी अभी भी जाग रही है. रात के 2:30 हो गये हैं.

पर मोहित के ख़र्राटों की गूँज पूरे कमरे में गूँज रही है.

“कम्बख़त मुझे मुसीबत में फँसा कर खुद चैन से सो रहा है"

ऐसे-जैसे रात बीत रही थी पद्‍मिनी मन ही मन राहत की साँस ले रही थी. 4 बजने को थे. कमरे में अभी भी मोहित के ख़र्राटों की आवाज़ गूँज रही थी. पद्‍मिनी रात भर आँखे खोले बैठी रही. भूल कर भी उसकी आँख नही लगी. जैसे हर बुरा सपना बीत जाता है ये रात भी बीत ही रही थी. कब 5 बज गये पता ही नही चला.

'क्या मुझे चलना चाहिए...पर सर्दी का वक्त है सड़के अभी भी शुन्सान ही होंगी. मुझे 6 बजने तक वेट करना चाहिए. उस वक्त शायद कोई ऑटो मिल जाए. जहा इतना वेट किया थोड़ा और सही.' पद्‍मिनी ने सोचा.

अचानक कमरे का दरवाजा ज़ोर-ज़ोर से खड़कने लगा. मोहित गहरी नींद में था उसे कुछ सुनाई नही दिया. 'कौन हो सकता है...मुझे क्या लेना होगा कोई मोहित की पहचान वाला...पर मोहित उठ क्यों नही रहा' पद्‍मिनी ने सोचा.

क्रमशः..............................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Nov 2014 03:39

BAAT EK RAAT KI--5

gataank se aage.................

idhar Raj apne kamre mein vaapis aa jaata hai.

“guru nahi aayega…vo thaka hua hai…”

“to main kaun sa use bula rahi thi…tum hi chaahte the use bulaana.” Nagma ne kaha.

“kyon achche se nahi maari thi kya gaanD guru ne tumhaari peechli baar jo aise kah rahi ho.”

“mujhe bahut dard hua tha Raj…isiliye to main dubaara vaha se nahi karungi…”

“ye khub kaha…tu meri girl friend hai…guru ko to gaanD de di…mujhe dene se mana kar rahi hai.”

“tum hi laaye the us din use varna main kabhi nahi hone deti aisa…”

“chal chhod ye sab aa na ghum ja…aaj bahut man kar raha hai gaanD maarne ka, dekhun to sahi ki isme kaisa maja aata hai.” Raj ne nagma ke chutdon par haath rakh kar kaha.

“aage se karo na…vaha aisa kuch alag nahi hai.” Nagma ne kaha.

“mujhe ek baar taste to kar lene de…”

“nahi mujhe dard hota hai vaha.”

“kuch nahi hoga…main guru se seekh kar aaya hun.”

“kya seekh kar aaye ho.”

“yahi ki gaanD kaise maarni hai.”

“mujhe nahi karna ye sab…aage se karte ho to theek hai varna main chali…mujhe subah bahut kaam dekhne hain…let ho rahi hun.”

“tu to kahti thi ki saari raat rahegi mere saath.”

“to tumne kaun sa bataaya tha ki tum ye sab karoge…”

“to tumne guru ko kyon daalne diya tha gaanD mein”

“vo usne mujhe baato mein phansa liya tha bas…varna mera koi iraada nahi tha.”

“hmm…yaar aise mat tadpa maan ja na.” Raj ne nagma ko baahon mein bhar ke kaha.

“theek hai ek shart par…dubaara nahi karungi…ye pahli aur aakhri baar hoga.”

“theek hai manjoor hai mujhe…” Raj ne hans kar kaha. Uski aankho mein chamak aa gayi thi.

Nagma jo ki puri tarah nangi thi ulti ghum kar pet ke bal let gayi.

“aise nahi…kutiya ban jao…gaanD maarne ka maja kutta-kutti ban kar hi aayega.”

Nagma ne position le li aur boli, “bho-bho”

“ye kya hai…”

“tumhi to kah rahe the kutiya ban jao…ab tum bhi kutte ki tarah hi karna ok…” nagma ne hans kar kaha.

“vah yaar kya idea hai…tu sach mein hot item hai…maja aayega teri gaanD maar kar.”

“ab maarega bhi ya bakwaas hi karta rahega, mera mud badal gaya to main kuch nahi karne dungi.”

“ok…ok…bas daal raha hun…vo main guru ki bataayi baate soch raha tha. usne mujhe bataaya tha ki kaise karna hai.”

“guru ko chhodo…usne bahut dard kiya tha mujhe…tum apne deemag se kaam lo…araam se dheere se daalo.”

“arey haan yahi to guru bhi kah raha tha…achcha aisa karo dono haatho se apni gaanD ke putho ko fhaila lo, lund ko ander jaane mein asaani hogi.” Raj ne apne lund par thuk ragadte hue kaha.

“thoda sa mere vaha bhi thuk laga dena…” nagma ne sar ghuma kar kaha aur apne chutdon ko Raj ke lund ke liye faila liya.

“haan-haan laga raha hun pahle apne hathiyaar ko to chikna kar lu. Chinta mat kar teri gaanD ko chikni karke hi maarunga.” Raj ne bahke-bahke andaaj mein kaha.

“vaise tumhe aaj ye sab karne ka bhut kaise sawaar ho gaya.”

“guru ne mujhe bataaya tha ki use teri gaanD maar ke bada maja aaya tha. Tabhi se main bhi lene ko tadap raha tha.” Raj ne jawaab diya.

“vaise mujhe jyada maja nahi aaya tha.”

“koi baat nahi ab aayega maja tujhe.” Raj ne kaha

Raj ne nagma ke hole par dher saara thuk gira diya aur us par apne lund ko ragadne laga.

“aah… dheere se daalna…” nagma sihar uthi.

“abhi to tere ched ko chikna kar raha hun. Chinta mat kar dheere-dheere hi ander daalunga.” Raj ne kaha.

Nagma ki gaanD ko achche se chikna karne ke baad Raj ne apne lund ko nagma ki gaanD par taan diya. Jaisi ki kisi ke sar pe bandook rakhte hain.

“main aa rahun hun tumhaare ander.” Raj ne kaha aur apne lund ko halka sa dhakka diya.

“ooooyiii ma mar gayi…nikaalo ise baahar mujhse nahi hoga.”

Khel bigadta dekh Raj ne apne lund ko pura ka pura nagma ki gaanD mein dhakel diya. “agar baahar nikaalna hi hai to pura daal kar nikaalunga. Ek baar achche se gaanD mein lund daalne ka maja to le lu” Raj ne khud se man hi man kaha.

“nahiiiiii ye kya kar rahe ho Raj…nikaalo ise main mar jaaungi…tumne to ekdam se pura daal diya.”

“sorry nagma…vo lund chikna hone ke kaaran khud-ba-khud ander phisal gaya.”

“jhut bol rahe ho tum…tum to apne guru ke bhi baap niklne…nikaalo varna main phir kabhi tumhaare paas nahi aaungi.”

“achcha thoda ruko to sahi…mujhe theek se ahsaas to hone de ki main teri gaanD ke ander hun.”

“tere ahsaas ke chakkar mein main mar jaaungi.”

“aisa kuch nahi hoga dheeraj rakho…” Raj ne nagma ke sar par hath phira kar kaha.

Nagma chatpataati rahi par Raj ne apne lund ko baahar nahi nikaala.

Kuch der baad nagma ka dard kam ho gaya aur vo boli, “tum bahut kharaab ho.”

“araam hai na ab.”

“haan…par main tumhe karne nahi dungi…nikaalo baahar,.”

“theek hai jaisi tumhaari masrji.”

Raj ne apna lund nagma ki gaanD ki gahraayi se baahar ki taraf kheencha. Lekin is se pahle ki vo pura baahar aa pata ek jhatke mein use pura ka pura phir se ander dhakel diya. Raj ke aand nagma ki gaanD par ja kar sat gaye.

“ooohhhyyiii….tum nahi maanoge.”

“bilkul nahi…bade din se tammanna thi teri gaanD maarne ki. Aaj achche se maar kar hi dam lunga.”

“aahhh…dheere se maaro na phir…tum to jor se daal rahe ho.” Nagma ne kaha

“kya karun control hi nahi hota.”

“aage se tumhaare paas nahi aaungi main.” Nagma ne gusse mein kaha.

“sorry baba galti ho gayi…ab main dheere-dheere karunga.”

Raj dheere-dhjeere apna lund nagma ki gaanD mein ragadata raha. Kuch hi der mein dono ki saanse phoolne lagi. Aur Raj ke dhakko ki speed khud-ba-khud tej hoti chali gayi.

“sorry ab dheere se karna muskil ho raha hai…bahut maja aa raha hai…kya kahti ho… bana tu toofan mail tumhaari gaanD ko.”

“theek hai par jaldi khatam karna mujhse saha nahi ja raha.”

Raj ne apne dhakke tej kar diye…vo apne charam ke karib tha. koi 2 minat tej-tej dhakke maarne ke baad vo nagma ki gaanD mein jhad gaya.

“Aaaahhh maja gaya kasam se…gure theek kahta tha…teri gaanD badsi mast hai.”

“hato ab…mujhe letna hai…thak gayi hun is position mein.”

Raj bahut khus tha aakhir uski muraad jo puri ho gayi thi…..

………………………………………..

Padmini abhi bhi jaag rahi hai. Raat ke 2:30 ho gaye hain.

Par mohit ke kharanto ki gunj pure kamre mein gunj rahi hai.

“kambakhat mujhe musibat mein phansa kar khud chain se so raha hai"

aise-jaise raat beet rahi thi padmini man hi man raahat ki saans le rahi thi. 4 bajne ko the. Kamre mein abhhi bhi mohit ke kharanto ki awaaj gunj rahi thi. Padmini raat bhar aankhe khole baithi rahi. Bhul kar bhi uski aankh nahi lagi. Jaise har bura sapna beet jaata hai ye raat bhi beet hi rahi thi. Kab 5 baj gaye pata hi nahi chala.

'kya mujhe chalna chaahiye...par sardi ka vakt hai sadke abhi bhi shunsaan hi hongi. Mujhe 6 bajne tak wait karna chaahiye. Us vakt shaayad koi auto mil jaaye. Jaha itna wait kiya thoda aur sahi.' padmini ne socha.

Achchaanak kamre ka darvaaja jor-jor se khadakne laga. Mohit gahri neend mein tha use kuch shunaayi nahi diya. 'kaun ho sakta hai...mujhe kya lena hoga koi mohit ki pahchaan wala...par mohit uth kyon nahi raha' padmini ne socha.

Kramashah..............................