raj sharma stories मस्त घोड़ियाँ compleet

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rajaarkey
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Re: raj sharma stories मस्त घोड़ियाँ

Unread post by rajaarkey » 11 Nov 2014 04:21

मस्त घोड़ियाँ--3

गतान्क से आगे........................

मनोहर- आओ बेटी आओ पर कोई भी बात करने से पहले मुझसे एक बार डिसकस ज़रूर कर लेना,

सपना- आप बेफ़िक्रा रहिए सर, सपना आपकी सारी मनोकामनाए पूर्ण करेगी, आपने जो गिफ्ट मे हमे ज़मीन दी है उसकी कीमत सपना ज़रूर आपको फुल मज़ा देकर चुकाएगी, और अब मेरा अगला मिशन बस यही होगा कि आप जिसको चाहते है वह आपकी बाँहो मे हो,

मनोहर सपना को बड़े गौर से देखता ही रह गया और सपना संगीता के रूम मे चली गई,

संगीता- अरे सपना तू क्या बात है आज सुबह-सुबह मेरी याद कैसे आ गई

सपना- आज मैं तुझे मस्त करने के मूड से आई हू और फिर सपना संगीता की स्कर्ट मे हाथ डाल कर उसकी चूत को अपने हाथो से पकड़ कर मसल देती है,

संगीता-मुस्कुराते हुए अरे तू पागल हो गई है या सुबह-सुबह तूने कोई मोटा लंड देख लिया है

सपना- मेरी रानी खूब तगड़ा लंड देखा भी है और लिया भी है और अगर तुझे बता दू कि किसका मोटा लंड अपनी चूत मे लिया है तो तू मुझसे बिल्कुल वैसे ही जलमरेगी जैसे कोई अपनी सौतन से जलता है,

संगीता -अच्छा ऐसा किसका लंड ले लिया तूने

सपना- अपना कान इधर ला मैं धीरे से तुझे बता देती हू

संगीता अपना कान सपना के मूह के पास लाती है और सपना उसके कान मे कहती है तेरे पापा मनोहर का लंड लिया है मैने,

संगीता- हट झूठी कही की, मैं ही मिली हू तुझे सुबह-सुबह

सपना- संगीता के मोटे-मोटे दूध को अपने हाथो मे भर कर दबाते हुए तेरे दूध की कसम मेरी रानी कल तेरे पापा ने मुझे खूब हुमच-हुमच कर चोदा है, और फिर सपना संगीता को सारी बात बता देती है,

संगीता- आह थोड़ा धीरे दबा ना सपना तू तो मेरी जान निकालने पर तुली है, और फिर संगीता भी सपना की एक चुचि को अपनी मुट्ठी मे भर कर मसल देती है,

सपना- मेरी रानी मैं तो बहुत धीरे दबा रही हू पर जब तेरे पापा का लंड पीछे से मेरी चूत को खोल-खोल कर भीतर घुस रहा था और वह तब जिस तरह से मेरे मोटे-मोटे चुचे मसल रहे थे अगर उस तरह से तेरे पापा तेरे इन चुचो को मसल दे तो तू मस्त होकर उनके मूह मे अपनी चूत रख देगी,

सबगीता- क्या पापा का लंड बहुत मोटा है

सपना- तू खुद ही देख लेना मैने तो अभी तक इतना तगड़ा लंड कभी नही खाया

संगीता- मूह बनाते हुए मैं कैसे देख पाउन्गि

संगीता- अरे मेरी जान यही तो खूसखबरी है तेरे लिए कि तेरे पापा ने जब मुझको चोदा था तब जानती है वह मुझे क्या समझ कर चोद रहे थे,

संगीता- क्या समझ कर

सपना- तेरे पापा मुझे बार-बार संगीता बेटी कह कर मेरी चूत मार रहे थे, और फिर सपना ने संगीता की चूत मे एक उंगली डाल कर दबाते हुए सच मेरी जान तेरे पापा तुझे नंगी करके खूब कस-कस कर चोदना चाहते है, अब तू फिकर ना कर जल्दी ही तेरी चूत को भी तेरे पापा ज़रूर चोदेन्गे,

संगीता- अपने हाथो से अपनी चूचियाँ दबाते हुए, तू सच कह रही है सपना क्या सचमुच पापा तुझसे कह रहे थे कि वह अपनी बेटी संगीता को चोदना चाहते है

सपना- हाँ मेरी रानी और तो और उनका लंड भी तेरे नाम पर बहुत झटके मार रहा था

संगीता- पर एक बात समझ मे नही आई की तूने पापा से कैसे चुदवा लिया और तू उनके पास पहुचि कैसे

सपना - मेरी रानी यह सब मत पुच्छ यह सब बिज़्नेस की बाते है कभी मोका लगा तो बताउन्गि

सपना- अब मैं जा रही हू मैं तो तुझे यही सब बताने आई थी

संगीता- वह तो ठीक है पर तू इतनी जल्दी कहाँ जा रही है

सपना- अरे मेरे पापा का फोन आया था उन्हे मुझसे कुछ काम है, उसके बाद सपना वहाँ से चली जाती है

सपना के जाने के बाद मनोहर भी सपना के पीछे-पीछे घर के बाहर चल देता है और यह सब नज़ारा बहुत देर से संध्या अपने रूम से देख रही थी, वह उठ कर संगीता के रूम मे जाती है और जैसे ही अंदर घुसती है उसे देख कर संगीता जल्दी से अपनी पेंटी के अंदर से अपने हाथ को बाहर निकाल लेती है,

संध्या- अरे मेरी बन्नो रानी सहलाओ-सहलाओ अपनी इस कुँवारी चूत को लेकिन मुझे भी तो पता चले कि मेरी गुड़िया रानी किसके लंड की कल्पना करके यह सब कर रही है,

संगीता- तुम भी ना भाभी जब देखो मज़ाक

संध्या- अच्छा मैं मज़ाक कर रही हू तो मेरे सर पे हाथ रख के कसम खा कि तू बिना किस के लंड को सोच कर अपनी चूत सहला रही थी,


rajaarkey
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Re: raj sharma stories मस्त घोड़ियाँ

Unread post by rajaarkey » 11 Nov 2014 04:22

संगीता- हस्ते हुए अपनी भाभी की मस्त चुचियो को दबोच कर भाभी तुम भैया का लंड दिन रात पाती हो फिर भी तुम्हारा मन नही भरता है,

संध्या- संगीता की चूत मे उंगली डाल कर मसल्ते हुए मेरी जान जब तू इस कुँवारी चूत मे कोई मोटा लंड ले लेगी तब फिर कहना कौन सही है या कौन ग़लत, अब तुझे मैं एक राज की बात बताने वाली हू पर उसके लिए तुझे अपने कमरे से बुआ के कमरे मे देखने का कोई जुगाड़ करना होगा,

संगीता- मगर क्यो

संध्या- तू पहले वह अलमारी को थोड़ा आगे करने मे मेरी मदद कर उसके पीछे भी एक दरवाजा है ना जो बंद रहता है बस उसी दरवाजे से हमे वह नज़ारा देखने को मिलेगा जिसके बारे मे मैं तुझे बताने आई हू,

संगीता- कौन सा नज़ारा भाभी

संध्या- तू जानती है तेरे पापा तेरी बुआ को पूरी नंगी करके खूब कस-कस कर चोद्ते है

संगीता- अपना मूह खोले अपनी भाभी की ओर देखने लगती है,

संध्या- क्या हुआ तुझे मेरी बात पर यकीन नही आ रहा है

संगीता- यह हो ही नही सकता भाभी

संध्या- तो ठीक है रात को मैं तेरे रूम मे आउन्गि फिर तू देखना मैं जो कह रही हू वह सही है या नही, और फिर संध्या संगीता की चूत को सहलाते हुए अब बता तेरा मन लंड लेने का कर रहा है ना,

संगीता- सीसियते हुए, आह हाँ भाभी लेकिन मुझे कौन चोदेगा, तुम्हारे तो मज़े है जब जी करता है जाकर भैया के मोटे लंड पर कूद लेती हो और मैं हू कि तड़पति रहती हू,

संध्या- उसकी बुर मे अपनी दो उंगलिया पेल कर, सच संगीता तेरे भैया का लंड बहुत मस्त है जब वह मुझे चोद्ते है तो मस्त कर देते है, सच मेरी जान एक बार उनका लंड जिसकी चूत मार दे वह जिंदगी भर उनके लंड की प्यासी हो जाएगी, बोल तू चुदवाएगी अपने भैया से,

संगीता- आह आह पर भाभी यह कैसे हो सकता है,

संध्या- तू नही जानती तेरे भैया आजकल तुझे पूरी नंगी करके चोदने के लिए कितना तड़प रहे है

संगीता- आह ओह भाभी धीरे करो और तुम कितना झूठ बोलती हो भैया मेरे बारे मे ऐसा कभी नही कह सकते

संध्या- अच्छा तुझे यकीन नही है तो मैं तुझे सबूत देती हू जा चुपके से मेरे रूम मे जाकर देख तेरे भैया क्या कर रहे है,

संगीता- नही मैं नही जाउन्गि मुझे डर लगता है

संध्या- अरे डरती क्यो है अच्छा मेरे साथ चल लेकिन पहले धीरे से झाँक कर देखना वह क्या कर रहे है

जब संगीता और संध्या दोनो रोहित के रूम मे पहुचती है तब संगीता धीरे से अंदर झाँक कर देखती है और अंदर देखते ही उसके होश उड़ जाते है उसके भैया उसकी गुलाबी रंग की पेंटी को अपने लंड से लगाए अपने मोटे लंड को मसल रहा था और बीच-बीच मे अपनी कुँवारी बहन की पेंटी को अपने मूह और नाक मे लगा-लगा कर खूब कस-कस कर सूंघ रहा था,

संगीता अंदर झाँक कर देखने मे मस्त थी तभी संध्या उसे अंदर की ओर धकेल कर बाहर भाग जाती है,

संगीता एक दम से अपने भैया से टकरा जाती है और रोहित उसे देख कर एक दम से हड़बड़ा जाता है, संगीता की नज़रे रोहित के मोटे लंड पर टिक जाती है और रोहित अपनी बहन की मस्त जवानी को देखने लगता है, संगीता एक दम पलट कर मुस्कुराते हुए बाहर जाने लगती है तभी रोहित उसका हाथ पकड़ लेता है,

संगीता- अपने भैया की आँखो मे देख कर थोड़ा मुस्कुराती है और जब अपनी नज़रे नीचे करके उसके लंड को देखती है तो थोड़ा शरमाते हुए, भैया छ्चोड़ो ना और अपना हाथ छुड़ाने लगती है

रोहित- संगीता सुन तो, संगीता एक झटके मे रोहित से हाथ छुड़ा कर अपनी भाभी संध्या के पिछे दौड़ती है और संध्या घर के बाहर की तरफ भागती है और एक दम से बाहर का दरवाजा खुलता है और संध्या सीधे मनोहर की बाँहो मे समा जाती है,


rajaarkey
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Re: raj sharma stories मस्त घोड़ियाँ

Unread post by rajaarkey » 11 Nov 2014 04:22

अचानक इस तरह अपनी बहू को अपनी बाँहो मे आया देख मनोहर अवसर का फ़ायदा उठा कर संध्या को अपनी बाँहो मे कस लेता है और तब मनोहर को अपनी बहू की मस्त कठोर और बड़ी-बड़ी चुचियो का एहसास होता है और उसका लंड खड़ा हो जाता है,

पिछे से संगीता खड़े-खड़े ज़ोर-ज़ोर से हस्ने लगती है और संध्या मनोहर से दूर हटते हुए मुस्कुरकर संगीता को मारने के लिए हाथ का इशारा करके अपने रूम मे घुस जाती है जहा रोहित अपना लंड पकड़े खड़ा हुआ था, तभी बाहर का नज़ारा देख कर रोहित और संध्या दोनो एक दूसरे से चिपक जाते है, बाहर मनोहर ने अपनी बेटी को देख कर उसे अपनी ओर आने के लिए हाथ बढ़ाया और संगीता दौड़ कर अपने पापा की बाँहो मे समा गई,

संगीता अपने पापा के सीने से चिपकी हुई थी और मनोहर उसके भारी चूतादो को अपने हाथो से सहलाता हुआ कहता है क्या बात है हमारी बेटी आज कल अपने पापा से कितना दूर रहने लगी है और फिर मनोहर संगीता को अपनी गोद मे बैठा कर उसके गालो को कभी चूमने लगता है कभी उसके होंठो पर अपने हाथ की उंगलिया फेरते हुए उससे बाते करने लगता है,

रोहित- संध्या पापा से पहले मुझे संगीता को चोदना है प्लीज़ कुछ करो ना,

संध्या- तुम फिकर ना करो अगर पापा ने संगीता की चूत से लंड भिड़ा भी दिया तो तुम्हारे खातिर मे संगीता को हटा कर उनके लंड के सामने अपनी चूत रख दूँगी और संगीता की चूत को तुम्हारे हवाले कर दूँगी, और तुम्हारे पापा की इतनी हिम्मत नही कि संगीता के लिए वह मुझे छ्चोड़ दे अभी उन्होने मेरे बदन पर सिवाय साडी के देखा ही क्या है,

रोहित- मेरी रानी तुम्हे कितना ख्याल है अपने पति का

संध्या- तुम्हारी चाहत के आगे जो भी आएगा उसे मैं अपने आगोश मे ले लूँगी लेकिन तुम्हारी ख्वाहिशो को टूटने नही दूँगी, बस वक़्त का इंतजार करो,

पापा ने संगीता की मोटी गुदाज जाँघो पर हाथ फेरते हुए कहा, बेटी आजकल तुम जीन्स नही पहनती हो या फिर तुम्हारे पास के सब खराब हो गये है,

संगीता- नही पापा जीन्स मे पूरा शरीर कसा रहता है मुझे तो मज़ा नही आता मुझे तो कुछ खुले कपड़े पहनने मे अच्छा लगता है,

पापा- संगीता की कमर मे हाथ डाल कर उसे अपने सीने से लगाते हुए, बेटी मैं तो इसलिए कह रहा था कि तुम्हारे बदन के हिसाब से तुम्हे अच्छा लगता और कुछ नही,

संगीता- मुस्कुराते हुए ठीक है पापा आप कहते है तो पहन लूँगी,

क्रमशः......................