आंटी के साथ मस्तियाँ compleet

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007
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Re: आंटी के साथ मस्तियाँ

Unread post by 007 » 09 Nov 2014 09:49



‘इसस्स… आआ… क्या कर रहा है.. छोड़ दे उसे, मैं मर जाऊँगी… तू पीठ पर ही मालिश कर.. नहीं तो मैं चली जाऊँगी।’

‘ठीक है आंटी पीठ पर ही मालिश कर देता हूँ।’ मैं आंटी की टाँगों के बीच में थोड़ा आगे खिसक कर उनकी पीठ पर मालिश करने लगा।

ऐसा करने से मेरा तना हुआ लवड़ा आंटी की चूत से जा टकराया। अब मेरे तने हुए लंड और आंटी की चूत के बीच छोटी सी कच्छी थी।

आंटी की चूत का रस जालीदार कच्छी से निकल कर मेरे लंड के सुपारे को गीला कर रहा था।

मैं आंटी की चूचियों को दबाने लगा और अपने लंड से आंटी की चूत पर ज़ोर डालने लगा। लंड के दबाव के कारण कच्छी आंटी की चूत में घुसने लगी। बड़े-बड़े नितंबों से सिमट कर अब वो बेचारी कच्छी उनके बीच की दरार में धँस गई थी।

आंटी के मुँह से उत्तेजना भरी सिसकारियाँ निकलने लगीं।

मुझसे ना रहा गया और मैंने एक ज़ोरदार धक्का लगाया, मेरे लंड का सुपारा आंटी की जालीदार कच्छी को फाड़ता हुआ उनकी चूत में समा गया।

‘आआहह…ऊई… उई माँ… ऊऊफ़.. यह क्या कर दिया राज… तुझे ऐसा नहीं करना चाहिए.. छोड़ मुझे, मैं तेरी आंटी हूँ… मुझे नहीं मालिश करवानी।’

लेकिन आंटी ने हटने की कोई कोशिश नहीं की। मैंने थोड़ा सा दबाव डाल कर आधा इंच लंड और आंटी की चूत में सरका दिया।

‘अई…ऊई तेरे लवड़े ने मेरी कच्छी तो फाड़ ही दी, अब मेरी चूत भी फाड़ डालेगा।’ मेरे मोटे लवड़े ने आंटी की चूत के छेद को बुरी तरह फैला दिया था।

‘आंटी आप तो कुँवारी नहीं हैं.. आपको तो लंड की आदत है..!’

‘अई… मुझे आदमी के लंड की आदत है घोड़े के लंड की नहीं… चल निकाल उसे बाहर…।’ लेकिन आंटी को दर्द के साथ मज़ा आ रहा था।

उसने अपने चूतड़ों को हल्का सा उचकाया तो मेरा लंड आधा इंच और आंटी की चूत में सरक गया।

अब मैंने आंटी की कमर पकड़ कर एक और धक्का लगाया। मेरा लंड कच्छी के छेद में से आंटी की चूत को दो भागों में चीरता होता हुआ 5 इंच अन्दर घुस गया।

‘आआआआहह… आ….आ. मर गई… छोड़ दे राज फट जाएगी… उई…धीरे राजा… अभी और कितना बाकी है? निकाल ले राज, अपनी ही आंटी को चोद रहा है।’

मैं आंटी की चूचियों को मसलते हुए बोला- अभी तो आधा ही गया है आंटी, एक बार पूरा डालने दो, फिर निकाल लूँगा।’

‘हे राम.. तू घोड़ा था क्या पिछले जनम में… मेरी चूत तेरे मूसल के लिए बहुत छोटी है।’

मैंने धीरे-धीरे दबाव डाल कर तीन इंच और अन्दर पेल दिया।

‘आंटी, मेरी जान थोड़े से चूतड़ और ऊँचे करो ना…!’

आंटी ने अपने भारी नितंब और ऊँचे कर दिए। अब उनकी छाती चटाई पर टिकी हुई थी। इस मुद्रा में आंटी की चूत मेरा लंड पूरा निगलने के लिए तैयार थी।

अब मैंने आंटी के चूतड़ों को पकड़ कर बहुत ज़बरदस्त धक्का लगाया। पूरा 10 इन्च का लवड़ा आंटी की चूत में जड़ तक समा गया।

‘आआहह… मार डाला.. उई… अया… अ..उई… सी..आ… अया…. ओईइ.. मा…कितना जालिम है रे..आह….ऐसे चोदा जाता है अपनी आंटी को.. पूरा 10 इंच का मूसल घुसेड़ दिया..!’

आंटी की चूत में से थोड़ा सा खून भी निकल आया। अब मैं धीरे-धीरे लंड को थोड़ा सा अन्दर-बाहर करने लगा। आंटी का दर्द कम हो गया था और वो भी चूतड़ों को पीछे की ओर उचका कर लंड को अन्दर ले रही थीं।

अब मैंने भी लंड को सुपारे तक बाहर निकाल कर जड़ तक अन्दर पेलना शुरू कर दिया। आंटी की चूत इतनी गीली थी कि उसमें से ‘फ़च-फ़च’ की आवाज़ पूरे कमरे में गूंजने लगी।

‘तू तो उस साण्ड की तरह चढ़ कर चोद रहा है रे.. अपनी आंटी को… ज़िंदगी में पहली बार किसी ने ऐसे चोदा है… अया…आ..अई. ह…उई.. ओह…’

अब मैंने लंड को बिना बाहर निकाले आंटी की फटी हुई कच्छी को पूरी तरह फाड़ कर उनके जिस्म से अलग कर दिया और छल्ले की तरह कमर से लटकते हुए पेटीकोट को उतार दिया।

आंटी अब बिल्कुल नंगी थी। चूतड़ उठाए उनके चौड़े नितंब और बीच में से मुँह खोले निमंत्रण देती, काली लम्बी झाँटों से भरी चूत बहुत ही सुन्दर लग रही थी।

भारी-भारी चूतड़ों के बीच गुलाबी गाण्ड के छेद को देख कर तो मैंने निश्चय कर लिया कि एक दिन आंटी की गाण्ड ज़रूर मारूँगा।

बिल्कुल नंगी करने के बाद मैंने फिर अपना 10 इंच का लवड़ा आंटी की चूत में जड़ तक पेलना शुरू कर दिया। आंटी की चूत के रस से मेरा लंड सना हुआ था। मैंने चूत के रस में ऊँगली गीली करके आंटी की गाण्ड में सरका दी।

‘उई मा… आह …क्या कर रहा है राज?’

‘कुछ नहीं आंटी आपका यह वाला छेद दुखी था कि उसकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा, मैंने सोचा इसकी भी सेवा कर दूँ।’

यह कह कर मैंने पूरी ऊँगली आंटी की गाण्ड में घुसा दी।

‘आआहह…उई…अघ… धीरे भतीजे जी, एक छेद से तेरा दिल नहीं भरा जो दूसरे के पीछे पड़ा है।’ आंटी को गाण्ड में ऊँगली डलवाने में मज़ा आ रहा था।

मैंने ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए।

आंटी शायद दो-तीन बार झड़ चुकी थीं क्योंकि उनकी चूत का रस बह कर मेरे अमरूदों को भी गीला कर रहा था।

15-20 धक्कों के बाद मैं भी झड़ गया और ढेर सारा माल आंटी की चूत में उड़ेल दिया।

आंटी भी इस भयंकर चुदाई के बाद पसीने से तर हो गई थीं। वीर्य उनकी चूत में से बाहर निकल कर टाँगों पर बहने लगा, आंटी निढाल होकर चटाई पर लेट गईं।

‘राज आज तीन महीने तड़पाने के बाद तूने मेरी चूत की आग को ठंडा किया है। एक दिन मैं ग़लती से तेरा ये मूसल देख बैठी थी बस उसी दिन से तेरे लंड के लिए तड़प रही थी… काश मुझे पता होता कि खड़ा होकर तो ये 10 इंच लम्बा हो जाता है।’

‘तो आंटी आपने पहले क्यों नहीं कहा। आपको तो अच्छी तरह मालूम था कि मैं आपकी चूत का दीवाना हूँ। औरत तो ऐसी बातें बहुत जल्दी भाँप जाती हैं।’

‘लेकिन मेरे राजा.. औरत ये तो नहीं कह सकती कि आओ मुझे चोदो। पहल तो मर्द को ही करनी पड़ती है और फिर मैं तो तेरी आंटी हूँ।’

‘ठीक है आंटी अब तो मैं आपको रोज़ चोदूँगा।’

‘मैं कब मना कर रही हूँ? एक बार तो तूने चोद ही दिया है, अब क्या शरमाना? इतना मोटा लम्बा लंड तो बहुत ही किस्मत से नसीब होता है। जब तक तेरी शादी नहीं हो जाती तेरे लंड का मैं ख्याल करूँगी। इसको मोटा-ताज़ा बनाए रखने के लिए मैं तेरे लंड की रोज़ मालिश कर दूँगी। अच्छा अब मुझे जाने दे मेरे राजा, तूने तो मेरी चूत का बाजा ही बजा दिया है।’

उसके बाद आंटी उठ कर नंगी ही अपने कमरे में चली गईं।

जाते समय उनके चौड़े भारी नितंब मस्ती में बल खा रहे थे। उनके मटकते हुए चूतड़ देख कर दिल किया कि आंटी को वहीं लिटा कर उनकी गाण्ड में अपना लवड़ा पेल दूँ।

अगले दिन बॉडी-बिल्डिंग की प्रतियोगिता थी। मैंने ये प्रतियोगिता इस साल फिर से जीत ली, अब मैं दूसरी बार कॉलेज का बॉडी-बिल्डिंग चैम्पियन हो गया।

मैं बहुत खुश था, घर आ कर मैंने जब आंटी को यह खबर सुनाई तो उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा।

‘आज तो जश्न मनाने का दिन है, आज मैं तेरे लिए बहुत अच्छी-अच्छी चीज़ें बनाऊँगी। बोल तुझे क्या इनाम चाहिए?’

007
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Re: आंटी के साथ मस्तियाँ

Unread post by 007 » 09 Nov 2014 09:50

‘आंटी आप जानती हैं.. मैं तो सिर्फ़ इसका दीवाना हूँ, ये ही दे दीजिए।’ मैं आंटी की चूत पर हाथ रखता हुआ बोला।

‘अरे वो तो तेरी ही है… जब मर्ज़ी आए ले लेना, आज तू जो कहेगा वही करूँगी।’

‘सच आंटी.. आप कितनी अच्छी हो।’ यह कह कर मैंने आंटी को अपनी बांहों में भर लिया और अपने होंठ आंटी के रसीले होंठों पर रख दिए।

मैं दोनों हाथों से आंटी के मोटे-मोटे चूतड़ सहलाने लगा और उनके मुँह में अपनी जीभ डाल कर उनके होठों का रस पीने लगा।

ज़िंदगी में पहली बार किसी औरत को इस तरह चूमा था।

आंटी की साँसें तेज़ हो गईं।

अब मैंने धीरे से आंटी की सलवार का नाड़ा खोल दिया और सलवार सरक कर नीचे गिर गई।

‘राज, तू इतना उतावला क्यों हो रहा है ? मैं कहीं भागी तो नहीं जा रही। पहले खाना तो खा ले, फिर जो चाहे कर लेना। चल अब छोड़ मुझे।’

यह कह कर आंटी ने अपने आप को छुड़ाने की कोशिश की।

मैंने उनके कुर्ते के नीचे से हाथ डाल कर आंटी के चूतड़ों को उनकी सॉटिन की कच्छी के ऊपर से दबाते हुए कहा- ठीक है आंटी जान, छोड़ देता हूँ.. मगर एक शर्त आपको माननी पड़ेगी।’

‘बोल क्या शर्त है ?’

‘शर्त यह है कि आप अपने सारे कपड़े उतार दीजिए, फिर हम खाना खा लेंगे।’ मैं आंटी के होंठ चूमता हुआ बोला।

‘क्यों तू किसी ज़माने में कौरव था.. जो अपनी आंटी को द्रौपदी की तरह नंगी करना चाहता है?’ आंटी मुस्कुराते हुए बोलीं।

मैं आंटी की कच्छी में हाथ डाल कर उनके चूतड़ों को मसलते हुए बोला- नहीं आंटी.. आप तो द्रौपदी से कहीं ज़्यादा खूबसूरत हैं और मैंने अपनी प्यारी आंटी को आज तक जी भर के नंगी नहीं देखा।’

‘झूट बोलना तो कोई तुझसे सीखे, कल तूने क्या किया था मेरे साथ? बाप रे.. साण्ड की तरह… भूल गया?’

‘कैसे भूल सकता हूँ मेरी जान… अब उतार भी दो ना।’ यह कहते हुए मैंने आंटी का कुर्ता भी ऊपर करके उठा दिया। अब वो सिर्फ़ ब्रा और छोटी सी कच्छी में थीं।

‘अच्छा तेरी शर्त मान लेती हूँ, लेकिन तुझे भी अपने कपड़े उतारने पड़ेंगे।’

और आंटी ने मेरी शर्ट के बटन खोल कर उतार दिया।

इसके बाद उन्होंने मेरी पैन्ट भी नीचे खींच दी।

मेरा लौड़ा अंडरवियर को फाड़ने की कोशिश कर रहा था। आंटी मेरे लौड़े को अंडरवियर के ऊपर से सहलाते हुए कहा- राज, ये महाशय क्यों नाराज़ हो रहे हैं?

‘आंटी नाराज़ नहीं हो रहे, बल्कि आपको इज़्ज़त देने के लिए खड़े हो रहे हैं।’

‘सच.. बहुत समझदार है।’ यह कहते हुए आंटी ने मेरा अंडरवियर भी नीचे खींच दिया।

मेरा लौड़ा फनफना कर खड़ा हो गया। आंटी के मुँह से सिसकारी निकल गई और वो बड़े प्यार से लौड़े को सहलाने लगीं।

मैंने भी आंटी की ब्रा का हुक खोल कर आंटी की चूचियों को आज़ाद कर दिया।

फिर मैंने दोनों चूचकों को बारी-बारी से चूसा और आंटी की कच्छी को नीचे सरका दिया।

गोरी-गोरी जांघों के बीच में झांटों से भरी आंटी की चूत बहुत ही सुन्दर लग रही थी।

‘अब तो मैंने तेरी शर्त मान ली, अब मुझे खाना बनाने दे।’ ये कह कर वो रसोई की ओर चल पड़ीं।

ऊफ़.. क्या नज़ारा था.. गोरा बदन, चूतड़ों तक लटकते घने बाल, पतली कमर और उसके नीचे फैलते हुए भारी नितंब, सुडौल जांघें और उन मांसल जांघों के बीच घनी लम्बी झांटों से भरी फूली हुई चूत।

चलते वक़्त मटकते हुए चूतड़ और झूलती हुई चूचियाँ बिल्कुल जान लेवा हो रही थीं।

आंटी रसोई में खाना बनाने लगीं।

मैं भी रसोई में जा कर आंटी के चूतड़ों से चिपक कर खड़ा हो गया।

मेरा लौड़ा आंटी के चूतड़ों की दरार में फँसने की कोशिश करने लगा।

मैं आंटी की चूचियों को पीछे से हाथ डाल कर मसलने लगा।

‘छोड़ ना मुझे, खाना तो बनाने दे।’ आंटी झूटमूट का गुस्सा करते हुए बोलीं और साथ ही में अपने चूतड़ों को इस प्रकार पीछे की ओर उचकाया कि मेरा लौड़ा उनके चूतड़ों की दरार में अच्छी तरह समा गया और चूत को भी छूने लगा।

आंटी की चूत इतनी गीली थी कि मेरा लौड़े के आगे का भाग भी आंटी की चूत के रस में सन गया।

इतने में आंटी कुछ उठाने के लिए नीचे झुकी तो मेरे होश ही उड़ गए।

आंटी के भारी चूतड़ों के बीच से आंटी की फूली हुई चूत मुँह खोले निहार रही थी।

मैंने झट से अपने मोटे लौड़े का सुपारा चूत के मुँह पर रख कर एक ज़ोर का धक्का लगा दिया, मेरा लौड़ा चूत को चीरता हुआ 3 इंच अन्दर घुस गया।

‘आआ…….ह… क्या कर रहा है राज? तुझे तो बिल्कुल भी सबर नहीं… निकाल ले ना…।’

लेकिन आंटी ने उठने की कोई कोशिश नहीं की।


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Re: आंटी के साथ मस्तियाँ

Unread post by 007 » 09 Nov 2014 09:51



मैंने आंटी की कमर पकड़ कर थोड़ा लंड को बाहर खींचा और फिर एक ज़ोर का धक्का लगाया। इस बार तो करीब 8 इंच लौड़ा आंटी की चूत में समा गया।

‘आ…आ..आ…आ. .आ ..वी मा..आआ.. मर गई, छोड़ ना मुझे, पहले खाना तो खा ले।’ आंटी सीधी हुई पर लौड़ा अब भी चूत में धंसा हुआ था। मैंने पीछे से हाथ डाल कर आंटी की चूचियां पकड़ लीं।

‘आंटी, आप खाना बनाइए ना आपको किसने रोका है?’

उसके बाद आंटी उसी मुद्रा में खाना बनाती रहीं और मैं भी आंटी की चूत में पीछे से लौड़ा फँसा कर आंटी की पीठ और चूतड़ों को सहलाता रहा।

‘चल राज खाना तैयार है, निकाल अपने मूसल को।’ आंटी अपने चूतड़ पीछे की ओर उचकाते हुए बोलीं।

मैंने आंटी के चूतड़ पकड़ कर दो-तीन धक्के और लगाए और लौड़े को बाहर निकाल लिया। मेरा पूरा लंड आंटी की चूत के रस से सना हुआ था।

आंटी ने टेबल पर खाना रखा और मैं कुर्सी खींच कर बैठ गया।

‘आओ आंटी, आज आप मेरी गोद में बैठ कर खाना खा लो।’

‘हाय राम तेरी गोद में जगह कहाँ है? एक लम्बी सी तलवार निकली हुई है।’ आंटी मेरे खड़े हुए लंड को देखती हुई मुस्कुरा कर बोलीं।

‘आंटी आपके पास म्यान है ना.. इस तलवार के लिए।’ यह कहते हुए मैंने आंटी को अपनी गोद में खींच लिया।

आंटी की चूत बुरी तरह से गीली थी और मेरा लौड़ा भी चूत के रस में सना हुआ था।

जैसे ही आंटी मेरी गोद में बैठीं मेरा खड़ा लौड़ा आंटी चूत को चीरता हुआ जड़ तक धँस गया।

‘अईया…आआहह. .ऊऊहह …अया .. कितना जंगली है रे तू… 10 इंच लम्बा मूसल इतनी बेरहमी से घुसेड़ा जाता है क्या?’

‘सॉरी आंटी.. चलो अब खाना खा लेते हैं।’

हमने इसी मुद्रा में खाना खाया। खाना खाने के बाद जब आंटी झूठे बर्तन रखने के लिए उठीं तो मेरा लंड ‘फ़च्च’ की आवाज़ के साथ उनकी चूत में से बाहर आ गया।

बर्तन समेटने के बाद आंटी आईं और बोलीं- हाँ तो भतीजे जी अब क्या इरादा है?

‘अपना इरादा तो अपनी प्यारी आंटी को जी भर के चोदने का है।’ मैंने कहा।

‘तो अभी तक क्या हो रहा था?’

‘अभी तक तो सिर्फ़ ट्रेलर था, असली पिक्चर तो अब चालू होगी।’ कहते हुए मैंने नंगी आंटी को अपनी बांहों में भर के चूम लिया और अपनी गोद में उठा लिया।

मैं खड़ा हुआ था, मेरा विशाल लंड तना हुआ था और आंटी की टाँगें मेरी कमर से लिपटी हुई थीं।

आंटी की चूत मेरे पेट से चिपकी हुई थी और मेरा पेट आंटी की चूत के रस से गीला हो गया था।

मैंने खड़े-खड़े ही आंटी को थोड़ा नीचे की ओर सरकाया जिससे मेरा तना हुआ लंड आंटी की चूत में प्रविष्ट हो गया।

इसी प्रकार मैं आंटी को उठा कर उनके कमरे में ले गया और बिस्तर पर पीठ के बल लिटा दिया।

आंटी की टाँगों के बीच में बैठ कर मैंने उनकी टाँगों को चौड़ा किया और अपने लंड का सुपारा उनकी चूत के मुँह पर टिका दिया।

अब आंटी से ना रहा गया- राज, तंग मत कर… अब और नहीं सहा जाता… जल्दी से पेल… जी भर के चोद मेरे राजा… फाड़ दे मेरी चूत को…!’

मैंने एक ज़बरदस्त धक्का लगाया और आधा लंड आंटी की चूत में पेल दिया।

‘आआआअ… आईययइ…ह…अह… मार गई मेरी माँ… आह.. फट जाएगी मेरी चूत… आ.. इश्स… इससस्स..उई… आआआः… खूब जम के चोद मेरे राजा.. कितना मोटा है रे तेरा लंड… इतना मज़ा तो ज़िंदगी भर नहीं आया… आ…आआहह।’ आंटी इतनी ज़्यादा उत्तेजित हो गई थीं कि अब बिल्कुल रंडी की तरह बातें कर रही थीं।

मैंने थोड़ा सा लंड को बाहर खींचा और फिर एक ज़बरदस्त धक्के के साथ पूरा जड़ तक आंटी की चूत में पेल दिया।

मेरे अमरूद आंटी के चूतड़ों से टकराने लगे। मैं आंटी की सुन्दर चूचियों को मसलने और चूसने लगा और उनके रसीले होठों को भी चूसने लगा।

आंटी चूतड़ उछाल-उछाल कर मेरे धक्कों का जबाब दे रही थीं।

पाँच मिनट की भयंकर चुदाई के बाद आंटी पसीने से तर हो गई थीं और उनकी चूत दो बार पानी छोड़ चुकी थी।

‘फ़च… फ़च.. फ़च…’ की आवाज़ से पूरा कमरा गूँज़ रहा था।

आंटी की चूत में से इतना रस निकला कि मेरे अमरूद तक गीले हो गए।

मैंने आंटी के होंठ चूमते हुए कहा- आंटी मज़ा आ रहा है ना ? नहीं आ रहा तो निकाल लूँ।

‘चुप बदमाश.. खबरदार जो निकाला… अब तो मैं इसको हमेशा अपनी चूत में ही रखूँगी…!’

‘आंटी आपने कभी अंकल का लंड चूसा है?’

‘नहीं रे, कहा ना तेरे अंकल को तो सिर्फ़ टाँगें उठा कर चोदना आता है, काम-कला तो उन्होंने सीखी ही नहीं।’

‘आपका दिल तो करता होगा मर्द का लौड़ा चूसने का?’

‘किस औरत का नहीं करेगा? औरत तो ये भी चाहती है कि मर्द भी उसकी चूत चाटे।’

‘आंटी मेरी तो आपकी चूत चूसने की बहुत तमन्ना है।’ मैंने अपना लंड आंटी की चूत में से निकाल लिया और मैं पीठ के बल लेट गया।

‘आंटी आप मेरे ऊपर आ जाओ और अपनी प्यारी चूत का स्वाद चखने दो।’ मैंने आंटी को अपने ऊपर खींच लिया।