आंटी के साथ मस्तियाँ compleet

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007
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Re: आंटी के साथ मस्तियाँ

Unread post by 007 » 09 Nov 2014 09:46

आंटी के साथ मस्तियाँ-4

‘ओह.. अब समझी भतीजे जी मेरी कच्छी के पीछे क्यों पागल हैं.. इसीलिए तो कहती हूँ तुझे एक सुन्दर सी बीवी की जरूरत है।’

‘लेकिन मैं तो अनाड़ी हूँ। आपने तो वादा करके भी कुछ नहीं बताया। उस दिन आप कह रही थीं कि मर्द अनाड़ी हो तो लड़की को सुहागरात में बहुत तकलीफ़ होती है। आपका क्या मतलब था? आपको भी तकलीफ़ हुई थी?’

‘हा राज, तेरे अंकल अनाड़ी थे। सुहागरात को मेरी साड़ी उठा कर बिना मुझे गर्म किए चोदना शुरू कर दिया। अपने 8′ लम्बे और 3′ मोटे लंड से मेरी कुँवारी चूत को बहुत ही बेरहमी से चोदा। बहुत खून निकला मेरी चूत से। अगले एक महीने तक दर्द होता रहा।’

मेरा लंड देखने के बाद से आंटी काफ़ी उत्तेजित हो गई थी और बिल्कुल ही शरमाना छोड़ दिया था।

‘लड़की को गर्म कैसे करते हैं आंटी?’

‘पहले प्यार से उससे बातें करते हैं। फिर धीरे-धीरे उस के कपड़े उतारते हैं। उसके बदन को सहलाते हैं। उसकी होंठों को और चूचियों को चूमते हैं, फिर प्यार से उसकी चूचियों और चूत को मसलते हैं। फिर हल्के से एक ऊँगली उसकी चूत में सरका कर देखते हैं कि लड़की की चूत पूरी तरह गीली है। अगर चूत गीली है, इसका मतलब लड़की चुदने के लिए तैयार है। इसके बाद प्यार से उसकी टाँगें उठा कर धीरे-धीरे लंड अन्दर डाल देते हैं। पहली रात ज़ोर-ज़ोर से धक्के नहीं मारते।’

‘आंटी उस फिल्म में तो वो कालू उस लड़की की चूत चाटता है, लड़की भी लंड चूसती है। कालू उस लड़की को कई तरह से चोदता है। यहाँ तक की उसकी गाण्ड भी मारता है।’

‘अरे बुद्धू, ये सब पहली रात को नहीं किया जाता, धीरे-धीरे किया जाता है।’

‘आंटी, अंकल भी वो सब आपके साथ करते हैं?’

‘नहीं रे.. तेरे अंकल अनाड़ी थे और अब भी अनाड़ी हैं। उनको तो सिर्फ़ टाँगें उठा कर पेलना आता है। अक्सर तो पूरी तरह नंगी किए बिना ही चोदते हैं। औरत को मज़ा तो पूरी तरह नंगी हो कर ही चुदवाने में आता है।’

‘आंटी आपको नंगी हो कर चुदवाने मे बहुत मज़ा आता है?’

‘क्यों मैं औरत नहीं हूँ? अगर मोटा तगड़ा लंड हो और चोदने वाला नंगी करके प्यार से चोदे तो बहुत ही मज़ा आता है।’

‘लेकिन अंकल का लंड तो मोटा-तगड़ा होगा। पर.. हाँ मेरे लंड की बराबरी नहीं कर सकता है।’

‘तुझे कैसे पता?’

‘मुझे तो नहीं पता, लेकिन आप तो बता सकती हैं।’

‘मैं कैसे बता सकती हूँ? मैंने तेरा लंड तो नहीं देखा है।’ आंटी ने बनते हुए कहा।

मैं मन ही मन मुस्कराया और बोला- तो क्या हुआ आंटी.. कहो तो अभी आपको अपने लंड के दर्शन करा देता हूँ, आप नाप लो किसका बड़ा है।’

‘हट बदमाश..!’

‘अगर आप दर्शन नहीं करना चाहती तो कम से कम मुझे तो अपनी चूत के दर्शन एक बार करवा दीजिए। सच आंटी मैंने आज तक किसी की चूत नहीं देखी।’

‘चल नालायक.. तेरी शादी जल्दी करवा दूँगी… इतना उतावला क्यों हो रहा है।’

‘उतावला क्यों ना होऊँ? मेरी प्यारी आंटी को अंकल सारी-सारी रात खूब जम कर चोदें और मेरी किस्मत में उनकी चूत के दर्शन तक ना हो। इतनी खूबसूरत आंटी की चूत तो और भी लाजवाब होगी। एक बार दिखा दोगी तो घिस तो नहीं जाओगी। अच्छा, इतना तो बता दो कि आपकी चूत भी उतनी ही चिकनी है जितनी फिल्म में उस लड़की की थी?’

‘नहीं रे, जैसे मर्दों के लंड के चारों तरफ बाल होते हैं वैसे ही औरतों की चूत पर भी बाल होते हैं। उस लड़की ने तो अपने बाल शेव कर रखे थे।’

‘आंटी तब तो जितने घने और सुन्दर बाल आपके सिर पर है उतने ही घने बाल आपकी चूत पर भी होंगे? आप अपनी चूत के बाल शेव नहीं करती?’

‘तेरे अंकल को मेरी झांटें बहुत पसंद हैं इसलिए शेव नहीं करती।’

‘हाय आंटी.. आपकी चूत की एक झलक पाने के लिए कब से पागल हो रहा हूँ और कितना तड़पाओगी?’

‘सबर कर, सबर कर… सबर का फल हमेशा मीठा होता है।’ यह कह कर बारे ही कातिलाना अंदाज में मुस्कराती हुई नीचे चली गईं।

मेरे लंड के दुबारा दर्शन करने के बाद से तो आंटी का काफ़ी बुरा हाल था।

एक दिन मैंने उनके कमरे में मोटा सा खीरा देखा। मैंने उसे सूंघ कर देखा तो खीरे में से भी वैसी ही महक आ रही थी जैसी आंटी की कच्छी में से आती थी। लगता था आंटी खीरे से ही चूत की भूख मिटाने की कोशिश कर रही थीं।

मुझे मालूम था की गंदी पिक्चर भी वो कई बार देख चुकी थीं। अंकल को गए हुए तीन महीने बीत गए थे।

घर में मोटा-ताज़ा लंड मौज़ूद होने के बावज़ूद भी आंटी लंड की प्यास में तड़प रही थीं।

मैंने एक और प्लान बनाया। बाज़ार से एक हिन्दी का बहुत ही कामुक उपन्यास लाया जिसमें भतीजे-आंटी की चुदाई के किस्से थे। उस उपन्यास में आंटी अपने भतीजे को रिझाती है। वो जानबूझ कर कपड़े धोने इस प्रकार बैठती है कि उसके पेटीकोट के नीचे से भतीजे को उसकी चूत के दर्शन हो जाते हैं। ये उपन्यास मैंने ऐसी जगह रखा, जहाँ आंटी के हाथ लग जाए।

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Re: आंटी के साथ मस्तियाँ

Unread post by 007 » 09 Nov 2014 09:47



एक दिन जब मैं कॉलेज से वापस आया तो मैंने पाया कि वो उपन्यास अपनी जगह पर नहीं था। मैं जान गया कि आंटी वो उपन्यास पढ़ चुकी हैं।

अगले इतवार को मैंने देखा कि आंटी कपड़े गुसलखाने में धोने के बजाय बरामदे के नलके पर धो रही थीं। उन्होंने सिर्फ़ ब्लाउस और पेटीकोट पहन रखा था।

मुझे देख कर बोलीं- आ राज बैठ… तेरे कोई कपड़े धोने है तो देदे।

मैंने कहा- मेरे कोई कपड़े नहीं धोने हैं।

मैं आंटी के सामने बैठ गया। आंटी इधर-उधर की गप्पें मारती रहीं। अचानक आंटी के पेटीकोट का पिछला हिस्सा नीचे सरक गया।

सामने का नज़ारा देख कर तो मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई।

आंटी की गोरी-गोरी माँसल जाँघों के बीच में से सफेद रंग की कच्छी झाँक रही थी। आंटी जिस अंदाज में बैठी हुई थीं उसके कारण कच्छी आंटी की चूत पर बुरी तरह कसी हुई थी।

फूली हुई चूत का उभार मानो कच्छी को फाड़ कर आज़ाद होने की कोशिश कर रहा हो। कच्छी चूत के कटाव में धँसी हुई थी। कच्छी के दोनों तरफ से काली-काली झांटें बाहर निकली हुई थीं।

मेरे लंड ने हरकत करनी शुरू कर दी। आंटी मानो बेख़बर हो कर कपड़े धोती जा रही थीं और मुझसे गप्पें मार रही थीं।

अभी मैं आंटी की टांगों के बीच के नज़ारे का मज़ा ले ही रहा था कि वो अचानक उठ कर अन्दर जाने लगीं।

मैंने उदास होकर पूछा- आंटी कहाँ जा रही हो?’

‘बस एक मिनट में आई…’

थोड़ी देर में वो बाहर आईं। उनके हाथ में वही सफेद कच्छी थी जो उन्होंने अभी-अभी पहनी हुई थी।

आंटी फिर से वैसे ही बैठ कर अपनी कच्छी धोने लगी। लेकिन बैठते समय उन्होंने पेटीकोट ठीक से टांगों के बीच दबा लिया।

यह सोच कर कि पेटीकोट के नीचे अब आंटी की चूत बिल्कुल नंगी होगी मेरा मन डोलने लगा। मैं मन ही मन दुआ करने लगा कि आंटी का पेटीकोट फिर से नीचे गिर जाए। शायद ऊपर वाले ने मेरी दुआ जल्दी ही सुन ली।

आंटी का पेटीकोट का पिछला हिस्सा फिर से नीचे गिर गया। अब तो मेरे होश ही उड़ गए। उनकी गोरी-गोरी मांसल टाँगें साफ नजर आने लगीं।

तभी आंटी ने अपनी टांगों को फैला दिया और अब तो मेरा कलेजा ही मुँह में आ गया।

आंटी की चूत बिल्कुल नंगी थी।

गोरी-गोरी सुडौल जाँघों के बीच में उनकी चूत साफ नजर आ रही थी। पूरी चूत घने काले बालों से ढकी हुई थी, लेकिन चूत की दोनों फांकों और बीच का कटाव घनी झांटों के पीछे से नजर आ रहा था।

चूत इतनी फूली हुई थी और उसका मुँह इस प्रकार से खुला हुआ था, मानो अभी-अभी किसी मोटे लंड से चुदी हो।

आंटी कपड़े धोने में ऐसे लगी हुई थीं मानो उन्हें कुछ पता ही ना हो।

मेरे चेहरे की ओर देख कर बोलीं- क्या बात है रामू, तेरा चेहरा तो ऐसे लग रहा है जैसे तूने साँप देख लिया हो?

मैं बोला- आंटी साँप तो नहीं… लेकिन साँप जिस बिल में रहता है उसे जरूर देख लिया।

‘क्या मतलब? कौन से बिल की बात कर रहा है?’

मेरी आँखें आंटी की चूत पर ही जमी हुई थीं।

‘आंटी आपकी टांगों के बीच में जो साँप का बिल है ना.. मैं उसी की बात कर रहा हूँ।’

‘हाय..उई दैया.. बदमाश.. इतनी देर से तू ये देख रहा था? तुझे शर्म नहीं आई अपनी आंटी की टांगों के बीच में झाँकते हुए?’

यह कह कर आंटी ने झट से टाँगें नीचे कर लीं।

‘आपकी कसम आंटी इतनी लाजवाब चूत तो मैंने किसी फिल्म में भी नहीं देखी। अंकल कितनी किस्मत वाले हैं। लेकिन आंटी इस बिल को तो एक लम्बे मोटे साँप की जरूरत है।’

आंटी मुस्कुराते हुए बोलीं- कहाँ से लाऊँ उस लम्बे मोटे साँप को

‘मेरे पास है ना एक लम्बा मोटा साँप। एक इशारा करो, सदा ही आपके बिल में रहेगा।’

‘हट नालायक…’ ये कह कर आंटी कपड़े सुखाने छत पर चली गईं।

ज़ाहिर था कि ये करने का विचार आंटी के मन में उपन्यास पढ़ने के बाद ही आया था।



अब तो मुझे पूरा विश्वास हो गया कि आंटी मुझसे चुदवाना चाहती हैं।

मैं मौके की तलाश में था जो जल्दी ही हाथ आ गया।

तीन दिन बाद कॉलेज में बॉडी-बिल्डिंग की प्रतियोगिता थी। मैंने खूब कसरत और मालिश करनी शुरू कर दी थी।

आंटी भी मुझे अच्छी खुराक खिला रही थीं।

एक दिन आंटी नहा रही थीं और मैं अपने कमरे में मालिश कर रहा था। मैंने सिर्फ़ अंडरवियर पहन रखा था, इतने में आंटी नहा कर कमरे में आ गईं।

वो पेटीकोट और ब्लाउज में थीं।

मैंने आंटी से कहा- आंटी ज़रा पीठ की मालिश कर दोगी?

आंटी बोलीं- हाँ… हाँ.. क्यों नहीं, चल लेट जा।

मैं चटाई पर पेट के बल लेट गया। आंटी ने हाथ में तेल ले कर मेरी पीठ पर लगाना शुरू कर दिया।

आंटी के मुलायम हाथों का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था।

पीठ पर मालिश करने के बाद चलने को हुई तो मैं बोला- कर ही रही हो तो पूरे बदन की मालिश कर दो ना… आपके हाथ की मालिश होने पर मैं ज़रूर बॉडी-बिल्डिंग प्रतियोगिता में जीत जाऊँगा।

‘ठीक है कर देती हूँ, चल उल्टा हो कर लेट जा।’

मैं पीठ के बल लेट गया। आंटी ने पहले मेरे हाथों की मालिश की और फिर टाँगों की शुरू कर दी।

जैसे-जैसे मेरी जांघों के पास पहुँची, मेरी दिल की धड़कन तेज़ होने लगी।

मेरा लंड धीरे-धीरे हरकत करने लगा।

अब आंटी पीठ पर और लंड के चारों तरफ जांघों पर मालिश करने लगीं।

मेरा लंड बुरी तरह से फनफनाने लगा। ढीले लंड से भी अंडरवियर का ख़ासा उभार होता था। अब तो यह उभार फूल कर दुगना हो गया।

आंटी से यह छुपा नहीं था और उनका चेहरा उत्तेजना से लाल हो गया था।

कनखियों से उभार को देखते हुए बोलीं- राज, लगता है तेरा अंडरवियर फट जाएगा.. क्यों क़ैद कर रखा है बेचारे पंछी को.. आज़ाद कर दे…! और यह कह कर खिलखिला कर हँस पड़ीं।

‘आप ही आज़ाद कर दो ना आंटी इस पंछी को… आपको दुआएँ देगा।’

‘ठीक है मैं इसे आज़ादी देती हूँ।’ ये कहते हुए आंटी ने मेरा अंडरवियर नीचे खींच दिया।

अंडरवियर से आज़ाद होते ही मेरा 8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा लंड किसी काले कोबरा की तरह फनफना कर खड़ा हो गया।

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Re: आंटी के साथ मस्तियाँ

Unread post by 007 » 09 Nov 2014 09:48

आंटी के तो होश ही उड़ गए। चेहरे की हँसी एकदम गायब हो गई, उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। मैंने पूछा- क्या हुआ आंटी? घबराई हुई सी लगती हो।’

‘बाप रे… ये लंड है या मूसल..! किसी घोड़े का लंड तो नहीं लगा लिया..? और ये अमरूद..! उस साण्ड के भी इतने बड़े नहीं थे।’

‘आंटी इसकी भी मालिश कर दो ना।’ आंटी ने ढेर सा तेल हाथ में लेकर खड़े हुए लंड पर लगाना शुरू कर दिया, बड़े ही प्यार से लंड की मालिश करने लगीं।

‘राज तेरा लंड तो तेरे अंकल से कहीं ज़्यादा बड़ा है… सच तेरी बीवी बहुत ही किस्मत वाली होगी… एक लम्बा-मोटा लंड औरत को तृप्त कर देता है। तेरा तो…!’

‘आंटी आप किस बीवी की बात कर रही हैं? इस लंड पर सबसे पहला अधिकार आपका है।’

‘सच.. देख राज, मोटे-तगड़े लंड की कीमत एक औरत ही जानती है। इसको मोटा-तगड़ा बनाए रखना। जब तक तेरी शादी नहीं होती मैं इसकी रोज़ मालिश कर दूँगी।’

‘आप कितनी अच्छी हैं आंटी, वैसे आंटी इतने बड़े लंड को लवड़ा कहते हैं।’

‘अच्छा बाबा, लवड़ा.. सुहागरात को बहुत ध्यान रखना। तेरी बीवी की कुँवारी चूत का पता नहीं क्या हाल हो जाएगा। इतना मोटा और लम्बा लौड़ा तो मेरे जैसों की चूत भी फाड़ देगा।’

‘यह आप कैसे कह सकती हैं? एक बार इसे अपनी चूत में डलवा के तो देखिए।’

‘हट नालायक।’ आंटी बड़े प्यार से बहुत देर तक लंड की मालिश करती रहीं। जब मुझसे ना रहा गया तो बोला- आंटी आओ मैं भी आपकी मालिश कर दूँ।’

‘मैं तो नहा चुकी हूँ।’

‘तो क्या हुआ आंटी मालिश कर दूँगा तो सारी थकावट दूर हो जाएगी, चलिए लेट जाइए।’

आंटी को मर्द का स्पर्श हुए तीन महीने हो चुके थे, वो थोड़े नखरे करने के बाद मान गईं और पेट के बल चटाई पर लेट गईं।

‘आंटी ब्लाउज तो उतार दो.. तेल लगाने की जगह कहाँ है, अब शरमाओ मत.. याद है ना.. मैं आपको नंगी भी देख चुका हूँ।’

आंटी ने अपना ब्लाउज उतार दिया। अब वो काले रंग के ब्रा और पेटीकोट में थीं।



मैं आंटी की टाँगों के बीच में बैठ कर उनकी पीठ पर तेल लगाने लगा। चूचियों के आस-पास मालिश करने से वो उत्तेजित हो जाती थीं।

फिर मैंने ब्रा का हुक खोल दिया और बड़ी-बड़ी चूचियों को मसलने लगा। आंटी के मुँह से सिसकारी निकलने लगीं। वो आँखें मूंद कर लेटी रहीं।

खूब अच्छी तरह चूचियों को मसलने के बाद मैंने उनकी टाँगों पर तेल लगाना शुरू कर दिया।

जैसे-जैसे तेल लगाता जा रहा था, पेटीकोट को ऊपर की ओर खिसकाता जा रहा था। मेरा अंडरवियर मेरी टाँगों में फंसा हुआ था, मैंने उसे उतार फेंका।

आंटी की गोरी-गोरी मोटी जांघों के बीच में बैठ कर बड़े प्यार से मालिश की।

धीरे-धीरे मैंने पेटीकोट आंटी के नितंबों के ऊपर सरका दिया। अब मेरे सामने आंटी के विशाल चूतड़ थे।

आंटी ने छोटी सी जालीदार नाइलॉन की पारदर्शी काली कच्छी पहन रखी थी जो कुछ भी छुपा पाने में असमर्थ थी।

ऊपर से आंटी के चूतड़ों की आधी दरार कच्छी के बाहर थी, फैले हुए मोटे चूतड़ करीब पूरे ही बाहर थे।

चूतड़ों के बीच में कच्छी के दोनों तरफ से बाहर निकली हुई आंटी की लम्बी काली झाँटें दिखाई दे रही थीं।

आंटी की फूली हुई चूत के उभार को बड़ी मुश्किल से कच्छी में क़ैद कर रखा था। मैंने उन मोटे-मोटे चूतड़ों की जी भर के मालिश की, जिससे कच्छी चूतड़ों से सिमट कर बीच की दरार में फँस गई।

अब तो पूरे चूतड़ ही नंगे थे। मालिश करते-करते मैं उनकी चूत के आस-पास हाथ फेरने लगा और फिर फूली हुई चूत को मुट्ठी में भर लिया।

आंटी की कच्छी बिल्कुल गीली हो गई थी।