रश्मि एक सेक्स मशीन compleet

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raj..
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Re: रश्मि एक सेक्स मशीन

Unread post by raj.. » 11 Oct 2014 17:08

raj sharma stories

रश्मि एक सेक्स मशीन पार्ट -6
गतान्क से आगे.....


वो मेरे सामने अब नंगा खड़ा था. अब बिना कपड़ों के तो वो पूरा ही भालू लग रहा था. उसके पूरे बदन को काले बालों ने इस बुरी तरह ढक रखा था की चेहरे और हथेली के अलावा उसकी चॅम्डी कहीं भी दिखाई नही देती थी.



जांघों के बीच घने काले जंगल के बीच बिल्कुल काला उसका लंड झटके खा रहा था. जैसा ओवर साइज़ वो खुद था वैसा ही विसालकाय उसका लंड था. उसके नीचे लटकती गेंदों का ही साइज़ टेन्निस बॉल की तरह था. उस मूसल लंड से अपनी चुदाई की कल्पना भी बदन मे झुरजुरी पैदा कर देने मे काफ़ी था. हम दोनो एक दूसरे से लिपटे एकदम ब्लॅक आंड वाइट जोड़ी लग रहे थे. उसके लिंग के सामने का टोपा भी काले रंग का था.



“चल इसे प्यार कर. इसे मुँह मे ले कर चाट. तुझे मेरा इंटरव्यू चाहिए ना?”



मैने हां कह कर सिर हिलाया. “ तू इसके लिए बहुत ज़्यादा उतावली है. है ना?”



मैं दोबारा चुपचाप खड़ी रह गयी. उसने आगे बढ़ कर मेरे कंधों पर अपने हाथ रख दिए. मैने अपनी नज़र उसकी नज़र से मिलाई. उसकी नज़रों मे एक आदिम वासना की ज्वाला चमक रही थी. मैने अपने बदन को बिल्कुल ढीला छ्चोड़ दिया और उसके हाथों के दबाव से मेरे घुटने मुड़ते चले गये और उसके सामने मैं घुटनो के बल बैठ गयी.



मेरे चेहरे से दो चार इंच दूर उसका मोटा घोड़े जैसा लंड खड़ा हुया था. उसका लंड इतना काला और भद्दा था की मुझे घिंन आने लगी. मैं बड़ी मुश्किल से अपने जज्बातों को कंट्रोल कर रही थी. उसने मेरे बालों को पकड़ ऐसा झटका दिया की मुझे लगा मेरे बाल टूट कर उसके हाथ मे रह जाएँगे. उसने अपने लंड की एक ज़ोर दार ठोकर मेरे होंठों पर मारी. एक तो उसका लंड पत्थर की तरह सख़्त था उपर से ठोकर इतनी ज़ोर दार थी की मेरा निचला होंठ फट गया और मेरे जीभ ने हल्के से खून का स्वाद चखा. मैने शिकायत भरी नज़रों से उसे देखा.



“मैं मना कब कर रही हूँ. ऐसे जानवरों सी हरकत मत करो.” मैने बनावटी भाव चेहरे पर लाते हुए कहा. ये लोग ख़ूँख़ार बहुत होते हैं लेकिन भगवान ने इनको अव्वल दर्जे का मूर्ख भी बनाया है. जिससे मुझ जैसी कोई भी उन को अपने काबू मे कर सके.



एक पल को लगा कि उसकी आँखों मे खून उतरा आया हो मगर अगले ही पल वो मुस्कुरा दिया. मैने उसके लंड को अपने हाथों से पकड़ लिया और उसे मुट्ठी मे लेकर सहलाने लगी. एक के बाद दूसरा हाथ भी उस काम पर लगा दिया. दोनो हाथ लगाने के बाद भी लंड का आधा हिस्सा बाहर ही था. मैं उसके लिंग के उपर की चॅम्डी को नीचे की ओर सरका कर अपनी उंगलियों से उसके लिंग को छेड़ रही थी.



मैने अपने होंठ खोले और उसकी नज़रों मे झाँकते हुए उसके लिंग को धीरे धीरे अपने मुँह के अंदर डाल लिया. उसकी नज़रों मे उसके चहरे पर अपनी मुराद पूरी होने की खुशी थी. बाप रे बाप क्या लंड था उसका. उसके टोपे को लेने मे ही मेरा मुँह भर गया. मैं उससे ज़्यादा मुँह के अंदर नही कर पा रही थी



मैं उसके लिंग के आगे के बॉल को अपने मुँह मे डाल कर चूसने लगी. मैं किसी तरह उसके लिंग के टोपे पर अपनी जीभ फिरा रही थी. उसका लिंग इतना मोटा था कि मेरे जबड़े दुख गये. मुझे लगा की मेरे होंठों के किनारे उसके लिंग को लेने के चक्कर मे ना फट जाए.



बहुत कोशिश करने पर भी उसका लिंग आधा भी अंदर नही जा पा रहा था. मैं उसी अवस्था मे अपनी जीभ से उसे चाट चाट कर उसको सन्तुस्ति देने लगी.



वो मेरे कंधों को सहला रहा था. उसने मेरे बालों को बिखेर दिया ओए अपनी उंगलियों से मेरे बालों मे हाथ फेरने लगा. मैं उसके लिंग को एक हाथ से पकड़ कर उसे अपने मुँह मे अंदर बाहर कर रही थी. हाथ से इसलिए थाम रखा था जिससे वो अपने लंड को एक उतना ही अंदर कर सके जितना मैं चाहूं.



कुच्छ देर तक उसके लंड को चूसने के बाद उसका बदन अकड़ने लगा. और लगा की बस अब उसका वीर्य निकलने वाला ही है. मैं भी चाहती थी की उसका निकल जाए जिससे कुच्छ पलों के लिए मुझे राहत मिल सकती है. मगर उसने भी शायद मेरे इरादे को भाँप लिया था. उसने मेरे सिर को बालों से पकड़ कर एक झटका दिया और मैं पीछे की ओर गिर पड़ी. मैं ज़मीन पर पड़े पड़े हाँफ रही थी और उसकी निस्तुरता से घबरा रही थी.



वो मेरे पास ज़मीन पर घुटने मोड़ कर बैठ गया. फिर उसने झपट कर मुझे कमर से पकड़ कर किसी खिलोने की तरह उपर उठाया. मेरी कमर ज़मीन से डेढ़ फुट उपर उठ गयी. अब सिर्फ़ मेरा सिर ज़मीन पर टीका हुया था. मेरी टॅनजेंट उसके कंधे पर रखी हुई थी. उसने मेरी योनि को अपने चेहरे के सामने करके उसे किसी कुत्ते की तरह चाटने लगा. उसके खुरदुरे होंठ मेरी नरम योनि के उपर खलबली मचा रहे थे.



“स्लूर्र्रप…स्लर्प” की आवाज़ के साथ वो मेरी योनि से बह रहे रस को चाट कर सॉफ कर रहा था. उसके किसी भूखे की तरह मेरी योनि पर टूट पड़ने के कारण मेरा बदन बुरी तरह हिल रहा था. बीच बीच मे मेरा सिर ज़मीन से रगड़ ख़ाता. मैं उसके सिर को अपनी गिरफ़्त मे लेकर अपने बदन को उसका सहारा देना चाहती थी मगर वो मुझे इस तरह करने ही नही दे रहा था. बार बार मेरे उठे हाथों को झटक देता. उसकी लाल ला आँखों से डरकर मैने अपनी कोशिशों पर रोक लगा दी. मगर मैं चाह कर भी अपने जिस्म मे बढ़ती उत्तेजा को रोक नही पा रही थी. मैं जानती थी की मेरा अपने जिस्म के उपर से कंट्रोल ख़तम होता जा रहा है. और बहुत जल्दी ही मेरी उत्तेजना रस के रूप मे बह निकलने वाली है.



वो अपनी जीभ को जितना हो सकता था उतना अंदर करने लगा. उसकी बड़ी बड़ी मूच्छें मेरी झांतों के उपर चिपक सी गयी थी.



“ऊऊओफफफफफफ्फ़….हा..हा….म्‍म्म्मम….हा” मैं उत्तेजना मे च्चटपटाने लगी और उसके सिर को अपने हाथों से अपनी योनि पर दबा दिया. मेरी उंगलियाँ उसके बालो मे धँस गयी और टाँगें छत की ओर उठ गयी थी.



“लो….ले लो इसमे से जो भी ले सकते हो ले लो. मैं तो तुम्हारी रांड़ बन ही गयी हूँ अब किसी बात पर क्या सोचना…” मैं उत्तेजना मे बड़बड़ाती जा रही थी.



वो जितना अंदर हो सकता था अपना जीभ डाल कर मेरे उस अमृत कुंड को माथे दे रहा था. मैं उत्तेना से च्चटपटा रही थी. कभी अपनी चूचियो को मसल्ने लगती तो कभी अपनी कमर को उचकाने लगती, कभी उसके सिर को अपनी जांघों के बीच दबा कर उसको पूरा अपने अंदर समा लेने की कोशिश करती तो कभी उत्तेजना मे अपनी टाँगों को हवा मे फेंकने लगती. वो मेरी हालत से बेख़बर अपने काम मे लगा हुआ था. बस अब मुझसे और अधिक उत्तेजना सहन नही हुई और मेरी सारी गर्मी लावा के रूप मे मेरी योनि के अंदर बह निकली. वो इस पर भी रुका नही अब तो उसकी हरकतों मे उसकी दो उंगलियाँ भी शामिल हो गयी जिनसे वो मेरी योनि के उपर मेरी क्लिट को कुरेद रहा था.



वो किसी औरत को किस तरह अपने काबू मे किया जा सकता है बहुत अच्छि तरह जानता था. वो जानता था कि कैसे और क्या करने से औरत अपनी भावनाओ को त्याग कर किसी की गुलाम बनने को भी तयार हो सकती है.



मैं वापस उत्तेजित हो गयी थी. वो तो जैसे भूल ही चुक्का था कि आगे भी कुच्छ करना है. मैने उसके बालों मे अपनी उंगलियाँ पिरो दी और बालों से पकड़ कर उसके सिर को पीछे धकेला. उसका काला चेहरा मेरे योनि रस से सना हुआ और भी डरावना लग रहा था.



“ऊओह अब बस करो. मैं और बर्दस्त नही कर सकती. मेरे जिस्म से आग निकल रही है. प्लीईएज इसे अपने पानी से बुझा दो.” मैने उसके बलों को पकड़ कर अपनी ओर खींचा तो वो मेरे पास आ गया. मैने कोहनी के बल ज़मीन से उठते हुए अपनी जीभ से उसके चेहरे को चाट चाट कर साफ करने लगी. मैं अपनी जीभ से उसके चेहरे को स्लर्प स्लर्प करके चाट रही थी. वो मेरे दोनो ब्रेस्ट को थामे उन्हे अपने हाथों से सहला रहा था. वो मेरे निपल्स को अपनी उंगलियों से कुरेद रहा था. मैने कुच्छ देर बाद अपने होंठ उसके मोटे भद्दे होंठों पर रख दिए और पूरी तरह समर्पित भाव से उससे लिपट गयी. मैने अपनी एक टांग उपर मोड़ कर उपर उठाया और उससे तंगराजन के खड़े लंड को सहलाने लगी.



तंगराजन की लंबाई काफ़ी होन्ट की वजह से उसका लिंग मेरी नाभि के पास ठोकरें मार रहा था. वो मेरे सिर को पकड़ कर मेरे होंठों को अपने खुरदुरे होठों पर रगड़ रहा था. मैने अपने होंठों को फटने से रोकने के लिए अपनी जीभ निकाल कर उसके मुँह मे डाल दिया और उसके जीभ को अपनी जीभ से सहलाने लगी.



“ तो फिर शुरू करें इंटरव्यू?” तंगराजन ने मुझसे हंसते हुए पूछा.



“मैं आपको पूरी तरह जानने की ही तो कोशिश कर रही हूँ. देखना है इस पहाड़ जैसे बदन मे ताक़त कितनी है. किसी कोमल सी औरत को कितना मसल सकता है? जीत आपकी होती है या मुझ जैसी नाज़ुक महिला की.” मैने उसके लिंग को थामते हुए कहा.



“अच्च्छा तो मुझे चॅलेंज कर रही हो? आज तक कोई भी औरत मेरे लंड को पूरी तरह अंदर समा कर मेरा वीर्य अपनी चूत मे नही भर पाई. चल तुझे भी आजमा कर देखते हैं कितनी बड़ी छिनाल बन सकती है तू.” उसने अपने लिंग को आगे पीछे खींचते हुए कहा.



“ ठीक है. लेकिन तसल्ली से करोगे जिससे मुझे भी मज़ा आए. मैं भी संभोग करना चाहती हूँ रेप नही. तुम्हारा लंड किसी घोड़े के जैसा है.”



“ किसी गुलाम को अपनी राय देने की कोई छूट नही है. कोई और होती ना तो अब तक उसकी चूत मे गरम सरिया डाल कर आर पार कर चुक्का होता. मगर तुझमे कुच्छ है जो मुझे किसी भी तरह की ज़्यादती करने से रोक रहा है. शायद मेरा दिल तुझ पर आ गया है.” फिर मेरी योनि को अपनी मुट्ठी मे भर कर मसल्ते हुए कहा,” चल खोल अपनी चूत को…..हां और खोल…..हाँ हाँ उसे अपने हाथों से खोल कर दिखा कि कैसी है.” दोस्तो कहानी अभी बाकी है आपका दोस्त राज शर्मा
क्रमशः....

raj..
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Re: रश्मि एक सेक्स मशीन

Unread post by raj.. » 11 Oct 2014 17:09

raj sharma stories

रश्मि एक सेक्स मशीन पार्ट -7
गतान्क से आगे....


मैने वहीं लेट कर अपनी टाँगों को जितना हो सकता था उतना फैला दिया. फिर अपनी उंगलियों से अपनी योनि के मुँह को खोल दिया. उसकी आँखों के सामने मेरी योनि फैली हुई थी. मैने अपनी टाँगों को मोड़ कर अपनी कमर को कुच्छ उपर उठा लिया.



“लो ये देखो मेरी चूत. पसंद आई?” मैं पूरी तरह किसी छिनाल की तरह हरकतें कर रही थी. अच्च्छा हुआ की मेरी जान पहचान का कोई आस पास नही था वरना उसको विस्वास करना मुश्किल हो जाता कि मैं एक इतनी पढ़ी लिखी इतने अच्छी फॅमिली की ब्यहता इस तरह की दो टके की किसी रांड़ की तरह भी हरकतें कर सकती हूँ. वो मेरी दोनो जांघों के पास घुटने मोड़ कर बैठ गया.



“एम्म्म बहुत सुंदर. तुझे क्या चाहिए मेरी रांड़?” उसने मुझे किसी वेश्या की तरह संबोधन किया,” बता अपने मालिक से तुझे क्या चाहिए?”



“मंमुझे…..मुझे अपना लंड दे दो. आआअहह एम्म्म एयेए मुझे चोदो…कस कस कर चोदो……मेरी चूत को अपने लंड से छिल कर उधेड़ कर रख दो. इतना चोदो कि मैं अपने पैरों पर भी खड़ी ना हो सकूँ.” मैने उसके सामने अपनी उंगलियों को अपनी योनि मे अंदर बाहर करते हुए कहा. मैं उसके सामने बहुत दिलेर बन रही थी मगर असल मे मे उसके लंड को देख कर मन ही मन दर से काँप रही थी. उसका लिंग मैने नाप कर भी देखा था. उसका लिंग मेरी नाभि तक आ रहा था. पता नही आज मेरी क्या हालत होने वाली थी. मैं बुरी तरह फँस गयी थी अब बचने का कोई रास्ता नही था. मुझे जो बचा सकते थे वो सब मुझसे हज़ारों मिले दूर थे और मैं इस पहाड़ सरीखे आदमी से बेकार ही पंगे ले रही थी.



“देखा है इसका साइज़? तेरे मुँह से तो नही निकल आएगा ना?” उसने अपने उस घोड़े समान लंड पर हाथ फेरते हुए कहा.



“अच्च्छा होगा कल सबको पता चल जाएगा कि तंगराजन ने मुझे चोद चोद कर मार डाला. वैसे घबराओ नही. अगर तुम्हारा लंड घोड़े के जैसा है तो मेरी योनि भी कम नही. अगर मैने तुम्हारा सारा रस चूस कर इन कटोरों को खाली नही कर दिया तो कहना.” कहते हुए मैने उसके लंड के नीचे लटकती गेंदों को सहलाया.



“इनमे जितना माल भरा है पूरा खाली करके ही जाउन्गि यहाँ से.” मैने उसकी गेंदों को मुट्ठी मे भर कर दबाते हुए कहा.



“ तीन दिन मे तो पता नही अपने कदमो पर भी जाएगी या नही.” कह कर उसने मेरी टाँगों को छत की ओर उठा कर अपने हाथों से पकड़ा. उसने मेरी टाँगों को फैला दिया. जब उसने उन्हे छ्चोड़ा तो मैं अपनी टाँगों को उसी अवस्था मे फैलाए रही. उसने एक हाथ से मेरी योनि के होंठों को दो बार सहलाया फिर उनके बीच अपनी उन मोटी मोटी उंगलियाँ डाल कर मेरी योनि को फैलाया. दूसरे हाथ से अपने लंड के सूपदे को मेरी योनि के बीच रख कर मेरी ओर देखा. मैने उसे देखता पा कर एक घबराई हुई मुस्कुराहट दी. उसने अपने बेस बॉल के बाट के समान तने लिंग को मेरी योनि के मुँह पर टीका कर अपने हाथ वहाँ से हटा दिए. वो मुझ पर झुकने लगा तो मैने अपने हाथ उठा कर उसके सीने पर रख कर उसके इरादों को रोका. उसने अपने दोनो हाथों से मेरे निपल्स पकड़ लिए और उन्हे अपनी उंगलियों मे किसी चिमटे की तरह पकड़ कर इतनी ज़ोर से उमेटा की मेरी जान ही निकल गयी. मैं ना चाहते हुए भी गला फाड़ कर चीख उठी और उसी के साथ उसने एक धक्के मे अपने लिंग का सूपड़ा मेरी चूत मे डाल दिया.



अभी मुझे शादी की हुए ही कितने दिन हुए थे. मेरी योनि किसी कुँवारी लड़की की तरह टाइट थी. जैसे ही उसके लिंग का टोपा मेरी योनि की दीवारों को चीरता हुआ अंदर गया तो मुझे अपने निपल्स से उठता दर्द कुच्छ भी नही लगा. मैं दुगनी ज़ोर से चीख उठी “ ऊऊऊओह….म्‍म्माआआअ…….मररररर गइईई……. आआआआअहह …..माआआआ”



वो हँसने लगा, “ क्या हुआ अभी तो बस दरवाजा ही खोला है अभी तो पूरा अंदर घुसना है.”



“बस बस मैं नही ले सकतिईईई….बाआअप्रीई……क्याआ सीईईज़े हाईईईई……चीरकर रख दिया लगता है. बुसस्स्स्स बाबाआअ……मुझीईए माआफ़ करूऊऊ”



उसने अपने दोनो हाथ दंड पेलने की मुद्रा मे मेरे सीने के दोनो ओर बिस्तर पर रखा और मेरी नज़रों मे नज़रें डाले हुए एक धक्का और मारा.



“ऊऊऊओह…….क्याआआ……करतीईए हूऊऊ……..मुहीईए छ्छूद डूऊऊ…..माआआ……….मेरिइईई माआआ मुझीईए बचाअऊऊ….” मैं दर्द से तड़पने लगी. ऐसा लग रहा था मानो मेरे सीने मे किसीने खंजर भोंक दिया हो. मैं अपनी एडियाँ रगड़ने लगी. उसके सीने को पीछे धकेलने लगी. मगर वो मुझसे हर मामले मे दुगुना से भी ज़्यादा था. मैं कमजोर, नाज़ुक सी लड़की. तब मेरा वजन मुश्किल से पचास-बावन किलो था और वो 130 किलो से भी उपर पहाड़ सा दिख रहा था. उसने मेरे पूरे वजूद को धक लिया था. मुझे सॉफ लग रहा था कि इस बोझ को मैं अपने मे समा नही सकूँगी और मेरे प्राण निकल जाएँगे.



अभी तो सिर्फ़ आधे के करीब ही उनका लंड अंदर तक प्रवेश पा सका था. मेरी योनि की दीवारें चीरती हुई लग रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे कोई मोटा खंभा मेरी योनि मे घुसेड़ा जा रहा हो.



वो हँसे जा रहा था. “क्या हुआ मेरी छिनाल. तू तो बड़ा अकड़ रही थी कुच्छ देर पहले अब क्या हुआ हवा निकल गयी सारी? अब क्यों रो पीट रही है.”



“ आअहह…..मंमुझसीई ग़लतीीइ हो गाईए हाीइ. माआफ़ काअर दो. उस्स समाअय येयी पूओरररीि तराआाः खड़ाअ नहिी हुआअ थाअ इसलिईए पटाआ नहिी थाअ कीईईईई कितनाअ भयानाक हाईईइ.”मैने गिड गीडाते हुए कहा” प्लीईईससस्स मुझीईए छ्ूऊऊद डूऊऊ. मैईईईईईई तुम्हाआराअ राअस्स मूओं सीए चूऊवस चूवस काअर निकाअल डूंगगीइिईईई. प्लीईईआसए चचोड़ दूऊव मुझीई. प्लीईएआसीए….”



वो तो रुकने के मूड मे नही था उसने उसी मुद्रा मे अपने बदन को हवा मे टिकाए हुए अपनी कमर को उपर की तरफ खींचा. ऐसा लगा की मेरी योनि भी उसके लिंग से चिपकी हुई उपर खींचती जा रही है और मेरी कमर बिस्तर छ्चोड़ कर उसकी कमर से चिपकी हुई उपर उठ गयी. फिर “पक” की आवाज़ के साथ उसका लिंग मेरी योनि से बाहर निकल आया और मैं बिस्तर पर गिर पड़ी. ऐसा लगा जैसे मेरी योनि एक दम खाली हो गयी थी.



“बस…बस….तंगराजनजी……बस..और नही” मैं अपने हाथों को उनकी छाती पर रख कर रुकने के लिए इशारा किया. मगर उसने उस मूसल लंड को मेरी योनि पर टीका कर मेरी मन्नतो की परवाह किए बगैर एक ज़ोर दार झटके मे तीन चौथाई लंड मेरी योनि मे थोक दिया. उसे रोकने के लिए खुले मेरे होंठ जैसे खुले के खुले रह गये. मेरी आँखें उलट गयी. और मैं बेहोशी की आगोश मे जाते जाते रह गयी. इतना जबरदस्त दर्द हुआ मानो मेरे बदन मे कोई कील ठोकी जा रही हो. मुँह से गर्र्र गर्र्रर के आवाज़ें निकली और मेरा बदन शिथिल पड़ गया था. कुच्छ देर बाद बदन मे खून का संचार हुआ और मैं रो पड़ी. मैं चीखने चिल्लाने लगी. उसे दुहाई देने लगी और छ्चोड़ दें छूटने लिए गिड़गिदाने लगी. मगर वो पूरा राक्षस बन चुक्का था. मेरी चीख पुकार की परवाह किए बगैर वो वापस अपने लंड को बाहर की ओर खींचा. उसका लंड अब बाहर निकलते समय भी मेरी योनि को इतना छील रहा था कि मैं दर्द से दोहरी हुई जा रही थी. अब मुँह से सिर्फ़ कराहें ही निकल रही थी.



“आआआहमम्म्ममाआआअ…ऊऊओफफफफफफफफ्फ़…..उईईईईईईईईई…अममाआआअ….म्‍म्

म्मम्मूऊऊ……..” पता नही क्या बड़बदाए जा रही थी.



अब उसने मेरी टाँगों को वापस फैलाया और अपने लिंग को योनि के मुहाने पर रखा. मैने देखा की मेरी योनि का मुँह भी खुला का खुला रह गया है. अंदर से लाल गुफा साफ दिखने लगी थी. उसके मुँह को अपने लिंग से ठोक कर चौड़ा कर दिया था. पता नही वापस मेरी योनि पहले जैसी हो भी पाएगी या नही. पता नही जीवन मेरी इस फटी हुई योनि को देख कर क्या सोचे. वो इस बात को किस तरह ले कि उसकी नयी नवेली बीवी बुरी तरह चुद कर वापस आइ है. मैं गहरी गहरी साँसे लेती हुई पड़ी रही. इस बार मैने किसी तरह की कोई हरकत नही की. मेरी आँखों के कोरों से आँसू बहते हुए ज़मीन पर गिर रहे थे.



उसने मुझे अपनी ओर खींचा. मेरी पीठ खुरदूरी ज़मीन पर रगड़ खा कर कई जगह से छिल गयी. अब मुझे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था. बहुत तीस मार ख़ान समझ रही थी अपने आपको. जब ये असाइनमेंट मिला तो फूली नही समा रही थी. आज मुझे अपने इरादों पर पछतावा हो रहा था. सारी हेकड़ी ख़तम हो गयी थी. अब तो मैं यही मना रही थी कि अगर यहाँ से जिंदा लौट गयी तो फिर कभी इस तरह के मामलों मे अपने आप को इन्वॉल्व नही करूँगी.



उसकी हरकतें देख कर कोई भी नही कह सकता था कि वो कि नॉर्मल इंसान है. उसने मेरे गाल्लों पर बहते अन्सूओ को चॅटा और मेरी बेबसी पर हँसने लगा.



“हाहाहा…..तंगराजन से मिलेगी….हाहाहा…..उसका इंटरव्यू लेगी……हाहाहा….. उसके बारे मे दुनिया को बताएगी……. पोलीस को इनफॉर्म करेगी……हाहहहाहा…..क्या हुआ मेरी चिड़िया अब क्यों रो रही है. अब कहाँ गया तेरी हिम्मत…तेरा साहस…….. तू क्या सोच कर आए थी? कि होगा कोई मरियल सा आदमी जिसे अपने रूप योवन के जाल मे फाँस कर बेदम कर देगी और तू जैसा चाहेगी वैसा उसे नचा लेगी. लेकिन यहाँ तो उल्टा हो रहा है. ले अब इसे झेल देखता हूँ कितना दम है तुझमे.”



मैने अपने बदन को ढीला छ्चोड़ दिया और सख्ती से आँखें बंद कर उसके आक्रमण का इंतेज़ार करने लगी. मेरे जबड़ों के बीच मैने अपने होंठों को सख्ती से दाब लिया. उसने अपने लिंग को वापस वहीं लगाया और अगला धक्का इतना जबरदस्त था कि मुझे अपने अंदर कुच्छ फटता हुया लगा. ऐसा लगा की लंड ने अंदर कोई घाव कर दिया है. मैं बेहोशी की अंधेरी गलियों मे भटक गयी. मेरे दाँत दर्द से होंठों पर कस गये. मैं बेहोश हो चुकी थी. पता नही कितनी देर तक मैं बेहोश रही.



जब होश आया तो मैने तंगराजन को अपने लंड से मेरी बुरी तरह चुदाई करते हुए पाया. मेरा पूरा जिस्म उसके हर धक्के से काँप जाता. मैने सामने दीवार पर लगी घड़ी पर देखा करीब पाँच मिनिट तक मैं बेहोश रही थी.



मुझे अपने नितंबो के बीच चिपचिपा वीर्य महसूस हुआ. मैने अपनी उंगली से उस जगह को च्छुआ और जब उस उंगली को सामने लाकर देखा तो मेरे होश उड़ गये. जिसे मैं चिपचिपा वीर्य समझ रही थी वो मेरा खून था. मेरी झिल्ली तो सुहाग रात को ही टूट चुकी थी तो फिर ये? क्या कोई जख्म हो गया है. क्या सच मे मेरी चूत को तंगराजन ने फाड़ कर रख दिया है. मैं डर कर बिलख बिलख कर रोने लगी.



“ क्या हुआ?” तंगराजन दो पल के लिए रुका, “ क्या हुआ? क्यों रो रही है?” मैने रोते हुए अपनी उंगली उसे दिखाई. तो वो हँसने लगा.



“ तेरी चुदाई पूरी हो जाए फिर डॉक्टर को दिखा देंगे. ऐसा मेरे साथ संभोग करती हर लड़की के साथ होता है.” कह कर वो वापस मेरी चुदाई मे लग गया. वो बड़े ही ज़ोर से धक्के लगा रहा था. उसके हर धक्के से मैं कई इंच उपर खिसक जाती. ज़मीन पर रगड़ खाते रहने से मेरी पीठ भी बुरी तरह जल रही थी. कोई पंद्रह मिनिट तक इस तरह चोदने के बाद उसने मेरे अंदर से अपना लिंग खींच कर बाहर निकाला.



उसने मुझे एक झटके मे उल्टा कर दिया. फिर उसी अवस्था मे घुटने के बल बैठे बैठे उसने मेरी कमर के इर्द गिर्द अपनी बाँहें डाल कर मेरी कमर को अपनी ओर खींचा. मेरे नितंब किसी टेंट की तरह उपर उठ गये. मैने अपनी बाँहे बिस्तर पर टीका दी. अब उसने पीछे से कुच्छ पल मेरे नितंबों को सहलाया. फिर मेरे गुदा को अपनी जीभ से चटा. उसके बाद उसने अपने लिंग को मेरी योनि पर फिराया. मैं उत्तेजना मे फूँक रही थी. मैने खुद अपने हाथों से अपनी योनि की फांकों को अलग कर के उसके लंड के लिए रास्ता साफ किया. अब मुझे उसकी चुदाई मे मज़ा आ रहा था. अब मैं खुद भी उसकी ठुकाई खूब एंजाय कर रही थी. दोस्तो कहानी अभी बाकी आपका दोस्त राज शर्मा
क्रमशः....

raj..
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Re: रश्मि एक सेक्स मशीन

Unread post by raj.. » 11 Oct 2014 17:10

रश्मि एक सेक्स मशीन पार्ट -8
गतान्क से आगे....


“लो….डाल दो मेरी इस फटी चूत मे अपना लंड. मुझे चोद चोद कर मार डालो. अब ये गर्मी सहन नही हो रही है. उफफफफ्फ़ मेरी चूत मे जबरदस्त खुजली हो रही है. इसे अपने लंड से रगड़ रगड़ कर शांत करो.” मैने उसके लंड को अपनी चूत के मुँह पर रख कर अपने नितंबों को पीछे धकेला. उसके लिंग का टोपा वापस मेरी योनि मे घुस गया. अब हम दोनो इतने गीले हो गये थे कि इस बार जब उसका लंड पूरा अंदर तक घुसा तो मुझे दर्द नही हुआ.



अब वो मुझे पीछे की ओर से ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा. हर धक्के के साथ मेरे दोनो स्तन बुरी तरह हिल रहे थे. मैने आगे खिसक कर सामने लगे उसके बिस्तर के उपर अपना आधा बदन रख दिया. अब भी मेरे घुटने ज़मीन पर ही टिके हुए थे मगर अब मेरे स्तन बिस्तर से चिपके हुए थे. वो उसी अवस्था मे मेरी चूत मे बिना किसी रुकावट, बिना किसी थकान के धक्के पर धक्के मारे जा रहा था.



डूस मिनिट से उपर मुझे इसी तरह चोदा फिर मुझे किसी बिना हाड़ मास की गुड़िया की तरह उठा कर बिस्तर पर पटक दिया. उसने वापस मुझे मुँह के बल बिस्तर पर गिरा कर सिर्फ़ मेरे नितंबों को हवा मे उँचा कर दिया और अपने घुटनो को कुच्छ मोड़ कर पीछे से मेरी योनि पर इतनी ज़ोर का झटका मारा कि मैं “ऊऊओह” कर उठी और बिस्तर चरमरा कर टूट गया. हम वापस ज़मीन पर थे मगर उसने एक पल को भी मुझे साँस लेने नही दिया. वो भूखे शेर की तरह मेरी चुदाई मे ही व्यस्त था. मेरा अनगिनत बार रस छ्छूट चुका था. अब मेरा पूरा बदन दुखने लगा था. जी कर रहा था जितनी जल्दी हो सके उसका वीर्य निकल जाए.



पंद्रह मिनूट बाद जब वो अचानक रुका तो मैं बिस्तर पर वैसी हुई पड़ी हुई थी.



“चल…. अब तू मुझे चोद….मेरे उपर आ जा.” उसने अपना लंड बाहर निकालते हुए कहा.



“नही….नही….मुझे माफ़ करो….मेरे जिस्म मे अब ताक़त नही बची कि तुम्हारे उपर आकर तुम्हे चोद सकूँ.” मैने उससे हारते हुए कहा, “तुम्हारी जैसी मर्ज़ी उसी तरह चोद कर खल्लास हो जाओ. मगर मुझे माफ़ करो.”



उसने वापस मुझे बिस्तर पर पीठ के बल पटक दिया और मेरे टाँगों को अपने कंधे पर रख कर मेरी टाँगों के बीच आ गया. उसका लंड वापस मेरी योनि मे घुसा कर मेरी खाल खींचने लगा. कुच्छ देर तक मुझे इस तरह चोदने के बाद मेरी टाँगों को अपने कंधे पर से उतार दिया और मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदते हुए मेरे स्तनो को अपनी मुट्ठी मे थाम लिया और मेरे उपर पसर गया. उस पहाड़ सरीखे आदमी का वजन अपने उपर आया तो मेरे फेफड़ों से सारी हवा निकल गयी. मुझे लगा कि वजन से मेरी एक दो पसलियां आज ज़रूर चटक जाएँगी. तभी उसने मेरे एक स्तन को बुरी तरह से काट लिया. मैं दर्द से च्चटपटाने लगी. और उसी वक़्त इसके लंड से पिचकारी के रूप मे रस की धारा बह निकली. मेरी चूत मे गर्म गर्म लावा बहने लगा.



जब तक उसका सारा वीर्य निकलने के बाद लंड सिकुड कर मेरी चूत से बाहर नही निकल आया तब तक वो मेरे उपर ही पसरा रहा. मैं दुआएँ दे रही थी कि अब वो मुझे छ्चोड़ दे. एक घंटे से उपर की चुदाई मे मेरा एक एक अंग टूट रहा था.



मैं निढाल हो कर वहीं लेट गयी. मैने अपनी आँखें बंद कर ली और अपनी सांसो को नियंत्रित करने लगी. पूरा बदन पसीने से भीगा हुआ था. बदन पर कुच्छ जगह वीर्य भी लगा था. मेरी खुली चूत से वीर्य बाहर रिस रहा था. मेरे नितंब, जंघें सब तंगराजन के वीर्य से गीली थी.



मैं कुच्छ देर बाद उठ कर नाहकार अपने बदन को सॉफ करना चाहती थी की तभी अचानक किसी ने गले पर लगे पट्टे की चैन को खींच कर एक झटका दिया. मैने हड़बड़ा कर अपनी आँखें खोली. सामने किसी दैत्य की तरह तंगराजन खड़ा था.



“चल उठ यहाँ से मेरे सोने का वक़्त हो गया है.” कह कर वो मुझे लगभग खींचता हुआ ले जा कर कमरे की एक दीवार पर बने खूँटे से बाँध दिया. तभी एक आदमी कमरे मे आया.



“डॉक्टर चलो इसको दवाई दे दो.” तंगराजन ने उससे कहा. मैं समझ गयी कि वो वहाँ का कोई डॉक्टर है.



वो मेरी टाँगों के पास घुटने मोड़ कर बैठ गया. उसने एक हाथ से मेरी एक नंगी टांग पकड़ी तो मैने शर्मा कर अपनी टाँग को सिकोड ली.



“घबराओ मत ये अक्सर होता है. जो भी औरत पहली बार तंगराजन से सेक्स करती उसकी योनि फट ही जाती है. इसका है ही इतना मोटा. मैने कई बार इसको कहा भी कि थोड़ा सम्हल कर किया करो मगर ये मानता ही नही. इसलिए जब भी कोई औरत इसके बेडरूम मे घुसती है तो मैं दरवाजे के बाहर संभोग ख़तम होने का इंतेज़ार करता हूँ.” कह कर उसने मेरी टाँगों को फैला कर मेरी योनि का मुआयना किया. मैं शर्म से लाल हो रही थी. उसने अपने हाथ मे ग्लव्स पहन कर मेरी योनि को दो उंगलियों से खोला फिर दोनो उंगलियाँ अंदर डाल कर उन्हे अंदर अच्छि तरह फिराया. दोनो उंगलियों को जब बाहर निकाला और उन्हे अच्छि तरह देखा. उंगलियों पर खून के कुच्छ कतरे लगे हुए थे.



“घबराओ नही…..जखम ज़्यादा नही है. दवाई लगा देता हूँ और खाने के लिए भी कुच्छ दवाई दे दूँगा सुबह तक दम चुस्त हो जाओगी. और दोबारा तांगा के साथ सेक्स के लिए तैयार हो जाओगी.” कहते कहते वो मुस्कुरा दिया तो मैं भी एक दर्दीली मुस्कान को होंठों पर आने से नही रोक सकी.



डॉक्टर ने अपनी उंगलियों से चूत के अंदर कुच्छ दवा लगाई और फिर दो टॅबलेट मुझे खाने को दी. मैने वो खा ली. डॉक्टर उठ कर बाहर चला गया. जाते जाते मेरे एक नग्न स्तन को मुट्ठी मे पकड़ कर दबाता हुया कह गया,



“नाउ यू आर रेडी बेब फॉर अनदर हार्ड फक. एंजाय युवर स्टे.”



तंगराजन ने दरवाजा बंद कर दिया और टूटे बेड को ठीक कर उस पर पसर गया. वो लेटा हुआ भी किसी पहाड़ से कम नही लग रहा था. मैं कुच्छ देर तो यही सोचती रही कि महिलाएँ कितनी पॉवेरफ़ुल्ल होती हैं जो ऐसे राक्षासो को भी अपनी नाक रगड़ने पर मजबूर कर देती हैं.



अगले ही पल उसकी नाक बजने लगी. मैं अपने आप को किसी पालतू जानवर की तरह चैन से बँधा हुआ पा रही थी. वहीं दीवार से सॅट कर लेट जाने के अलावा और कोई चारा नही था. मैं इतनी थॅकी हुई थी की लेटते ही नींद लग गयी. मैं वहीं ठंडी ज़मीन पर नंगी ही सो गयी.



सुबह तंगराजन के उठाने पर आँख खुली. वो मुझे उसी तरह चैन थामे हुए उन मकानो के एक साइड पर बने एक तालाब तक ले गया. उसने वहाँ मेरी जंजीर छ्चोड़ दी. उसका इशारा समझ कर मैं उस तलब मे प्रवेश कर अपने बदन को रगड़ रगड़ कर नहाई.



“मुझे कुच्छ तो पहनने दो. मुझे इस हालत मे इतने आदमियों मे शर्म आती है.” मैने तालाब के अंदर से ही उससे विनती की.



“ तू मेरी गुलाम बनने को राज़ी हुई है. अब तो तीन दिन बाद ही कुच्छ पहनने को मिलेगा तुझे. तू ऐसे ही अच्छि लगती है. और इस हालत मे तू यहाँ से भागने का भी नही सोचेगी. वैसे तुझे शरमाने की ज़रूरत नही है. मेरे आदमियों मे इतनी जुर्रत नही है कि मेरी पर्मिशन के बिना एक बार तुझे आँख उठा कर भी देख लें.”



बाहर आने के बाद वो मुझे उसी हालत मे साथ लेकर उन लोगों मे घूमता रहा. वो हर जगह मुझे किसी गुलाम की तरह नंगी हालत मे घूमता रहा. चाहे वो उनका शूटिंग रंगे हो या व्यायामशाला. वो किसी मीटिंग मे भी जाता तो मुझे नंगी हालत मे सब लोगों के बीच ले जाता. जब वो सबके साथ कोई मीटिंग कर रहा होता तो मेरा काम होता कि उसके पैरों के पास बैठ कर उसके लंड को चूसना. लेकिन ये बात तो मैने अच्छि तरह महसूस कि की वहाँ के लोग उसे किसी देवता से कम नही मानते थे और किसी की क्या जुर्रत जो मुझे नज़र भर भी देख ले.



मैने अपनी शर्म हया बिल्कुल छ्चोड़ दी थी. अख़बार मे च्चापने के लिए तंगराजन ने अपनी कई तस्वीर मुझसे खिंचवाई और मेरी कुच्छ नंगी तस्वीरे अपने पास रखने के लिए खींची. मुझे अपने साथ वॉकमॅन ले जाने की छ्छूट थी. जिसमे मैं उसके साथ अपने कॉन्वर्सेशन टेप करती. जिसे बाद मे कलम बद्ध करने का इरादा था. मैं तीन दिन उनके साथ थी. उनके काम उनके तौर तरीके और उनके मीटिंग्स सब मे मैं बे रोकटोक जाती थी. मैने काफ़ी कुच्छ समझा उनके और उनके संगठन के बारे मे. मैं ये जान कर हैरान थी कि ये जंगली जानवरों से दिखने वाले असल जिंदगी मे कितने बुद्धिमान और सॉफ विचारों वाले थे.



उसके बाद उसने कई बार मुझे चोदा. तीन दिन मे मैं उसके लिंग की आदि बन गयी थी. हर वक़्त मेरी योनि मे उसके लंड को पाने के लिए खुजली मचती रहती थी. मैने भी उससे जम कर चुडवाया. यहाँ तक की तीन दिन बाद जब मैं अपने शहर वापस लौटी तो मैं प्रेग्नेंट थी. मेरे पेट मे तंगराजन का बीज था.



टीन दिन बाद जब तंगराजन ने आकर मेरे कपड़े मुझे दिए और मेरे गले पर बँधे पट्टे को खोल दिया तो मेरी आँखों मे आँसू आ गये. सच तो ये था की इन तीन दिनो मे मैं तंगराजन की मर्दानगी पर मर मिटी थी. मैं तंगराजन के चौड़े सीने से लिपट कर रोने लगी. उसने मेरे आँसुओं से भरे चेहरे को उठाया और मेरे होंठों पर एक प्यारी सी किस दी.



“ नही मैं इतनी जल्दी यहाँ से नही जाना चाहती. मैं यहीं कुच्छ दिन और रहना चाहती हूँ.” मैने रोते हुए उससे कहा.



“नही रश्मि तुम यहाँ नही रह सकती. ये हमारी ऑर्गनाइज़ेशन के नियमो के खिलाफ है. तुम्हे जो चाहिए था मिल गया. मुझे जो चाहिए था मिल गया. अब बाइ कह देने मे ही हमारी भलाई है.” तंगराजन ने मेरे पूरे बदन पर अपना हाथ फिराते हुए कहा.



“मैं तुम्हे नही भूल सकती. अब दोबारा कब मिलोगे? वादा करो दोबारा मुझसे मिलोगे.” मैने उसके हाथ को अपनी हथेलियों मे थाम लिया. उसने धीरे से अपने हाथ मेरी पकड़ से आज़ाद कर लिए.



“ अब हम कभी नही मिलेंगे. मैं भी तुम्हे कभी नही भूलूंगा. मगर तुमसे भी पहले मेरे लिए कुच्छ है जो मैं नही छ्चोड़ सकता.” तंगराजन के आवाज़ मे पहले तो काफ़ी नर्मी थी मगर अपनी बात ख़तम करते करते उसमे सख्ती आ गयी.



“ठीक है मुझे अलविदा कहने से पहले प्लीज़ एक बार अच्छे से प्यार करो.” वो मेरे निवेदन को सुन कर मुस्कुरा दिया. मैं उसके सीने से लिपट गयी. दोस्तो कहानी अभी बाकी आपका दोस्त राज शर्मा
क्रमशः....