खेल खिलाड़ी का compleet

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 08 Nov 2014 17:34

अजीत जीप चला रहा था & दिव्या उसके बगल की सीट पे खामोश बैठी थी.अभी थोड़ी देर पहले लोगो की भीड़ के बीच दोनो को बात करने मे कोई परेशानी नही हो रही थी लेकिन यहा तन्हाई मे दोनो को समझ ही नही आ रहा था कि क्या बोलें!वक़्त के खेल निराले हैं!कुच्छ अरसे पहले ही दोनो तन्हा लम्हो के लिए तरसते थे & आज तन्हाई मिलने पे दोनो परेशान हो उठे थे!

अजीत बीच-2 मे दिव्या को चोर निगाहो से देख रहा था..वो तो और खूबसूरत हो गयी थी & और ज़्यादा दिलकश!..और उसका जिस्म..अफ..जब लॉड्ज के अंदर वो उसके सीने से लग गयी थी & उसकी गोद मे उसकी गंद जब उसके लंड पे दबी थी..ऑश....दिव्या,क्या ज़रूरत थी तुम्हे आज आने की?

दिव्या का हाल भी कुच्छ ऐसा ही था.प्रोफेसर & अजीत के जिस्मो की करीबी ने उसके अंदर की औरत को आज इस कदर जगा दिया था की उसे खुद पे काबू रखना मुश्किल हो रहा था.अजीत के जिस्म के 1-1 पोर को वो पहचानती थी & आज उसका दिल 1 बार फिर उसके साथ की हसरत कर रहा था लेकिन अजीत अब शादीशुदा था & उसके दिल मे अब दिव्या के लिए कैसे एहसास थे उसे पता नही था.दोनो पशोपेश मे थे की दिव्या का घर आ गया.

दिव्या जीप से उतरी,"शाम से कुच्छ खाया नही होगा तुमने.कुच्छ खा लो फिर चले जाना.",दिव्या की आवाज़ कुच्छ ज़्यादा कोमल हो गयी थी & उसकी आँखो मे अजीत को वही पुराना एहसास दिखाई दिया.उसका दिल तो किया कि उसका न्योता काबुल ले.वो जानता था कि 1 बार वो घर के अंदर गया तो फिर वो खुद पे काबू नही रख पाएगा & दिव्या को ज़रूर चोद देगा..तो इसमे बुरा क्या था?..वो भी तो यही चाहती थी नही तो उसने क्यू उसे खाने को बोला था?..वो जाएगा घर के अंदर..दिव्या को भरेगा अपनी बाहो मे & जी भर के प्यार करेगा उसे..,"..ट्ररंनन्न्..!",मोबाइल की घंटी बजी.उसने जेब से फोन निकाला तो देखा की मेघना फोन कर रही थी.वो कुच्छ पॅलो तक बजते मोबाइल को देखता रहा,"हां,मेघना.बोलो...बस थोड़ी देर मे आया.हां.अरे बाबा,बस आ रहा हू.हूँ."

अजीत ने फोन बंद कर जीप से बाहर देखा तो पाया कि दिव्या वाहा नही थी.उसने ठंडी आह भरी & जीप स्टार्ट कर दी.

दरवाज़ा बंद कर उस से पीठ लगाके दिव्या आँखे बंद किए खड़ी थी.जाती हुई जीप की आवाज़ कान मे पड़ी तो उसने आँखे खोली & घर के अंदर चली गयी.मेघना का नाम सुनते ही जैसे वो होश मे आई थी..अजीत की बीवी के फोन से उसका दिमाग़ खराब हो गया था & उसके मूड का सत्यानाश हो गया था लेकिन उसने सोच भी कैसे लिया था कि अजीत अपनी बीवी से बेवफ़ाई करेगा?उसने अपने ऑपरेशन के मैले कपड़े उतारे & बात्ट्च्ब मे पानी भरने लगी.बाथरूम से निकल वो अपने कमरे मे आई & अलमारी खोल कपड़े निकालने लगी की तभी उसकी निगाह मे आईने मे दिख रहे अपने अक्स पे गयी.

क्या अजीत की बीवी उस से खूबसूरत थी?..उसके हाथ अपनी छातियों पे चले गये,उसने उन्हे पकड़ के दबाया & फिर छ्चोड़ दिया.छातियाँ इस वक़्त भी तनी हुई थी..उसकी चूचियाँ भी ऐसी कसी होंगी & अजीत उन्हे भी वैसे ही चूस्ता होगा जैसे इन्हे चूस्ता था?..अपने सपाट पेट को देख उसे अपने कसे जिस्म पे थोड़ा गुमान हो आया..क्या मेघना का पेट भी ऐसे ही गोल होगा..उसके पेट पे तो अजीत का हाथ हर वक़्त चिपका रहता था..वो थोड़ा घूमी & अपनी गंद को आईने मे देखा.चौड़ी & कसी ज्नाद को देख उन्हे पकड़ के उसकी चूत मे लंड धकेलते अजीत की तस्वीर उसके ज़हन मे उभर आई..क्या मेघना की गंद भी ऐसी ही होगी..?नही..हो सकता है मेघना उस से भी ज़्यादा सुंदर हो..तभी तो अजीत उसे छ्चोड़ चला गया.उदासी का साया उसके दिल पे आ पड़ा की उसकी नज़र अपने बॅग पे पड़ी जिसे वो शाम को नसीबपुअर जाने से पहले ऑफीस से लाई थी & उसे प्रोफेसर की दी किताब का ख़याल आया.उसने फ़ौरन किताब को निकाला & उसे ले बाथरूम मे चली गयी.

किताब ज़्यादा मोटी नही थी लेकिन थी बड़ी दिलचस्प.दिव्या तो बात्ट्च्ब मे बैठी बस पन्ने पलटते जा रही थी.किताब का हीरो तो विजय नाम का जासूस था लेकिन जो केस वो सुलझाने की कोशिश मे जुटा था वो शबनम की लड़की के गिर्द घूमता था & शब नम क्या लड़की थी!प्रोफेसर दीक्षित ने उसके किरदार का ऐसा खाका खींचा था कि दिव्या को शबनम 1 जीती-जागती लड़की लग रही थी.

उसने प्यार मे 2 लोगो से धोखा खाया था & उन्ही मे से 1 के क़त्ल के इल्ज़ाम मे वो फँसी थी जिससे विजय उसे निकालने की कोशिश कर रहा था.कहानी मे शबनम & उसके प्रेमियो की चुदाई का भी ज़िक्र था & उन्हे पढ़ दिव्या गर्म हो चुकी थी.इस वक़्त शबनम जासूस विजय की बाहो मे उसके बिस्तर मे पड़ी थी.

दिव्या को अचानक अपने जिस्म मे मस्ती का सैलाब उमड़ता महसूस हुआ तो उसका ध्यान अपने बाए हाथ पे गया जो उसकी चूत से लगा उसके दाने से खेल रहा था.प्रोफेसर के लिखने मे जादू था.शबनम & विजय जैसे उसकी आँखो के सामने चुदाई कर रहे थे.बस थोड़ी ही देर पहले ही तो अजीत गया था.आज उसे उमीद थी कि वो ज़रूर उसकी प्यास बुझाएगा मगर उसने उसे मायूस किया था.उस मायूसी को भूलने के लिए उसने किताब पे नज़र गढ़ा दी & अपनी उंगली से अपने दाने को गोल-2 रगड़ने लगी.थोड़ी ही देर मे किताब बाथरूम के फर्श पे थी & वो अपने दाए हाथ से अपनी चूचियो को दबाते हुए अपने दूसरे हाथ से अपने जिस्म की आग को बुझाने की कोशिश कर रही थी.अपने ख़यालो मे वो जिस मर्द से चुद रही थी वो कभी प्रोफेसर की शक्ल इकतियार कर लेता तो कभी अजीत का लेकिन उसके जिस्म को इस से क्या मतलब था की वो किस से चुद रही है.उसे तो बस उसकी उंगली की परवाह थी जो उसे शांत कर रही थी.

बाथरूम मे 1 लंबी आ गूँजी & दिव्या टब मे पड़ी लुंबी साँसे लेने लगी.उसके जिस्म को थोड़ा सुकून तो मिला था.वो टब से निकली,जिस्म पे तौलिया लपेटा & किताब उठा अपने बिस्तर पे लेट गयी & आगे की कहानी पढ़ने लगी.

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क्रमशः...........

raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 08 Nov 2014 17:35

KHEL KHILADI KA paart--22

gataank se aage..............

apne khilaf ho rahi sazisho se bekhabar jasjit pradhan raat ke 1 baje apne ghar me dakhil ho raha tha.bas 2 dino baad hi use nomination ka parcha bharna tha & siyasi gehma-gehmi bilkul charam pe thi.aise me use ghar pe rehne ka waqt hi nahi mil pa raha tha.vo dabe panv apne bedroom me pahuncha,vo nahi chahta tha ki uske pyare biwi-bachcho ki nind me koi khalal pade.apne kamre me ghuste hi uski nigah bistar pe bekhabar soyi Anjali pe padi.gehri nind me sanso ke utar-chadhav se upar neeche hota uska seena use apne paas bulate se lage magar pehle use pane bachcho ko dekhne ka khayal aaya.

vo muskurata hua palta & bachhco ke kamre me chala gaya.abhi 4 mahine pehle hi 1 interior decorator se usne bachcho ka kamra decorate karwaya tha.night lamp ki halki roshni me bhi deewaro pe bane cartoons & gadiyo ki tasvire saaf dikh rahi thi.kamre ke 2 single beds pe uske dono bete soye hue the-1 pe Anish & dusre pe Ankur.dono bachche kitne masoom lag rahe the.usne bari-2 dono ke sar pe hath fera & vapas apne kamre me aa gaya.

anjali ki nighty uske ghutnoe ke upar tak aa gayi thi & uski mast janghe uske pati ko bhi josh me la rahi thi.tabhi anjali ne karwat badli & apni chaudi gand apne pati ki taraf kar di.jasjit ka lund uske underwear me kulbulane laga & usne fauran apne kapde utar diye.vo anjali ke peechhe apni dayi karwat se let gaya & uski gand sehlane hi wala tha ki uska mobile baj utha.raat ke sannate ko chirti mobile ki ghanti ko usne fauran shant kiya,"hello.",vo fusfusaya & kamre ke dusre kone pe chala gaya.

"kya hai?abhi fone kyu kiya?",uska lund sikud chuka tha & mathe pe shikan pad gayi thi.

"hun..",jasjit ne baye hath se fone pakda tha & daye se apna lund tham liya tha,"..hun..hath me....hun....bahut zor se..",jasjit ke chehre pe josh ki parchhayi fir se aa gayi thi & vo apna lund hila raha tha.thodi der tak vo bas haan na me jawab deta raha,"..kal..haan,pakka!".usne fone band kar diya & anjali ki or dekha.uski nind nahi khuli thi.vo apna lund hilate uske karib pahuncha & uske peechhe let gaya.

"uumm....!",anjali ki nind khuli & vo aankhe band kiye muskurayi.pati ke nange jism ka ehsas apni gand pe hote hi uske dil me bhi masti bhar gayi & usne uske kapde nikalte hatho ki madad kar karwat li & apne honth uske hotho se satati uski baaho me gum ho gayi.

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Ajit,Divya & Professor Dixit abhi bhi nasibpura me hi khade the.kuchh kagazi karvai thi jise usi waqt nibtana zaruri tha.operation ke baad ilake ka thanedar & us ilake ka ACP bhi vaha pahunch gaye the.un dono ko is baat ki khunnas thi ki crime branch valo ne unhe pehle koi ittila nahi di,"Mr.Chauhan,kam se kam aapko mujhe to ittila deni chahiye thi?",vaha ka ACP ajit ke samne khada tha.

"ye aap bhi jante hain & main bhi ki yaha ke hawaldar,thanedar & inspector & kuchh aur log bhi in sabse paise ugahte rehte hain varna itna bada prostitution ring aise chal sakta tha.",uski baat se ACP ne gardan ghuma li,"..ab aapke liye to routine operation hota ki hume kuchh anti-social elements ko aane valo chunavo ke madde nazar pakadna hai lekin aaphi ke maathat joki in gundo se paise khate hain unhe bas itna surag dete ki aaj yaha kahi raid padni vali hai & humara pura operation shuru hone se pehle hi khatm ho jata."

"fir bhi..yaha goliya chali kisi shehri ko kuchh ho jata to jawabdehi to humari hoti."

"na koi shehri aahat hua na koi nuksan hua.sare gunde pakde gaye 1 ko chhod kar to fir ab itna pareshan kyu ho rahe hain aap?c'mon,take it easy!",ajit ne uske kandhe pe hath rakha & muskurata hua vaha se chala gaya.

"professor..",divya uske bagal me baith gayi,"..aapne pistol chalana kaha se seekha?"

"divya ji,aisi kahaniya bina research ke to nahi likh sakta.yu samajhiye ki kahnaiyo ko thoda bharose layak banane ke liye hi ye sab seekha."

"lekin himmat ki training to nahi li hogi aapne!sach,professor aapki jitni tarif ki jaye kam hai.kitne policevalo ko us waqt vo tarkib nahi sujhti jo aapne aazmayi."

"par vo aadmi nikal gaya ajit ji ke hatho se."

"haan,lekin professor ajit ka operation to bahut kamyab raha hai."

"& humara?"

"aapka idea yaha bhi kaam kar gaya,professor.zara sochiye main agar ACP Mathur banke aati to ajit ka operation to fail hota hi hume bhi shayad kuchh pata nahi chalta.ab to Gulabo se hume dusre lutere ke bare me bhi pata chal gaya.maine gulabo ko bola hai ki kal daftar aa jaye."

"mehnat to aapne ki divya ji.forensic report se aap hi ne surag nikale the."

"magar aapki madad ke bina ye mumkin nahi tha.",bolte hue divya ko bhi ehsas hua ki vo professor ka shukriya ada kar rahi hai..us professor ka jis se vo kal tak behad chidhti thi,itna ki uski shakl dekhna use gavara nahi tha & aaj..itni jaldi halaat itne badal gaye the.

"shukriya.mohtarma!",professor khade ho apne seene pe hath rakh divya ke samne jhuk gaya to divya hans padi,"..achha ab main chalta hu.aap kaise jayengi?"

"inhe main chhod dunga.",ajit vaha aa gaya tha.

"ok.bye!",professor ne ajit se hath milaya & divya ja hath leke halke se chum liya,"..aapke jaisi hasin khatun ke munh se tarif sun banda apne aape me nahi hai & ye gustakhi kar raha hai.",bas 2 din pehle agar professor ne ye harkat ki hoti to divya ne use 1 karara tamacha jad diya hota magar aaj divya ko hansi aa gayi & galo pe lali bhi bhikhar gayi.

"dilchasp shakhs malum hota hai.",ajit jate hue professor ko dekh raha tha,"lekhak hai,diler hai & khubsurti ka kadradan bhi!",ajit ghuma & divya ko dekha.

"hun.",divya jate hue professor ko dekh rahi thi.usne ajit ko dekha & uski jeep ki or badh gayi,uske hotho pe abhi bhi muskan thi.

ajit jeep chala raha tha & divya uske bagal ki seat pe khamosh baithi thi.abhi thodi der pehle logo ki bheed ke beech dono ko baat karne me koi pareshani nahi ho rahi thi lekin yaha tanhai me dono ko samajh hi nahi aa raha tha ki kya bolen!waqt ke khel nirale hain!kuchh arse pehle hi dono tanha lamho ke liye taraste the & aaj tanahi milne pe dono pareshan ho uthe the!

ajit beech-2 me divya ko chor nigaho se dekh raha tha..vo to aur khubsuart ho gayi thi & aur zyada dilkash!..aur uska jism..uff..jab lodge ke andar vo uske seene se lag gayi thi & uski god me uski gand jab uske lund pe dabi thi..ohhhh....divya,kya zarurat thi tumhe aaj aane ki?

divya ka haal bhi kuchh aisa hi tha.professor & ajit ke jismo ki karibi ne uske andar ki aurat ko aaj is kadar jaga diya tha ki use khud pe kabu rakhna mushkil ho raha tha.ajit ke jism ke 1-1 por ko vo pehchanti thi & aaj uska dil 1 baar fir uske sath ki hasrat kar raha tha lekin ajit ab shadishuda tha & uske dil me ab divya ke liye kaise ehsas the use pata nahi tha.dono pashopesh me the ki divya ka ghar aa gaya.

divya jeep se utri,"sham se kuchh khaya nahi hoga tumne.kuchh kha lo fir chale jana.",divya ki aavaz kuchh zyada komal ho gayi thi & uski aankho me ajit ko vahi purana ehsas dikhayi diya.uska dil to kiya ki uska nyota kabul le.vo janta tha ki 1 baar vo ghar ke andar gaya to fir vo khud pe kabu nahi rakh payega & divya ko zarur chod dega..to isme bura kya tha?..vo bhi to yehi chahti thi nahi to usne kyu use khane ko bola tha?..vo jayega ghar ke andar..divya ko bharega apni baaho me & ji bhar ke pyar karega use..,"..trrnnnn..!",mobile ki ghanti baji.usne jeb se fone nikala to dekha ki Meghna fone kar rahi thi.vo kuchh palo tak bajte mobile ko dekhta raha,"haan,meghna.bolo...bas thodi der me aaya.haan.are baba,bas aa raha hu.hun."

ajit ne fone band kar jeep se bahar dekha to paya ki divya vaha nahi thi.usne thandi aah bhari & jeep start kar di.

darwaza band kar us se pith lagake divya aankhe band kiye khadi thi.jati hui jeep ki aavaz kaan me padi to usne aankhe kholi & ghar ke andar chali gayi.meghna ka naam sunte hi jaise vo hosh me aayi thi..ajit ki biwi ke fone se uska dimagh kharab ho gaya tha & uske mood ka satyanash ho gaya tha lekin usne soch bhi kaise liya tha ki ajit apni biwi se bewafai karega?usne apne operation ke maile kapde utare & bathtub me pani bharne lagi.bathroom se nikal vo apne kamre me aayi & almari khol kapde nikalne lagi ki tabhi uski nigah me aaine me dikh rahe apne aks pe gayi.

kya ajit ki biwi us se khubsurat thi?..uske hath apni chhatiyo pe chale gaye,usne unhe pakad ke dabaya & fir chhod diya.chhatiya is waqt bhi tani hui thi..uski chhatiya bhi aisi kasi hongi & ajit unhe bhi vaise hi chusta hoga jaise inhe chusta tha?..apne sapat pet ko dekh use apne kase jism pe thoda guman ho aaya..kya meghna ka pet bhi aise hi gol hoga..uske pet pe to ajit ka hath har waqt chipka rehta tha..vo thoda ghumi & apni gand ko aaine me dekha.chaudi & kasi gnad ko dekh unhe pakad ke uski chut me lund dhakelte ajit ki tasvir uske zehan me ubhar aayi..kya meghna ki gand bhi aisi hi hogi..?nahi..ho sakta hai meghna us se bhi zyada sundar ho..tabhi to ajit use chhod chala gaya.udasi ka saya uske dil pe aa pada ki uski nazar apne bag pe padi jise vo sham ko nasibpuar jane se pehle office se layi thi & use professor ki di kitab ka khayal aaya.usne fauran kitab ko nikala & use le bathroom me chali gayi.

Kitab zyada moti nahi thi lekin thi badi dilchasp.Divya to bathtub me baithi bas panne palatate ja rahi thi.kitab ka hero to vijay naam ka jasus tha lekin jo case vo suljhane ki koshish me juta tha vo Shabnam ki ladki ke gird ghumta tha & shab nam kya ladki thi!Professor Dixit ne uske kirdar ka aisa khaka khincha tha ki divya ko shabnam 1 jeeti-jagti ladki lag rahi thi.

usne pyar me 2 logo se dhokha khaya tha & unhi me se 1 ke qatl ke ilzam me vo fansi thi jisase vijay use nikalne ki koshish kar raha tha.kahani me shabnam & uske premiyo ki chudai ka bhi zikr tha & unhe padh divya garm ho chuki thi.is waqt shabnam jasus vijay ki baaho me uske bistar me padi thi.

divya ko achanak apne jism me masti ka sailab umadta mehsus hua to uska dhyan apne baye hath pe gaya jo uski chut se laga uske dane se khel raha tha.professor ke likhane me jadu tha.shabnam & vijay jaise uski aankho ke samne chudai kar rahe the.bas thodi hi der pehle hi to Ajit gaya tha.aaj use umeed thi ki vo zarur uski pyas bujhayega magar usne use mayus kiya tha.us mayusi ko bhulane ke liye usne kitab pe nazar gada di & apni ungli se apne dane ko gol-2 ragadne lagi.thodi hi der me kitab bathroom ke farsh pe thi & vo apne daye hath se apni chhatiyo ko dabate hue apne dusre hath se apne jism ki aag ko bujhane ki koshish kar rahi thi.apne khayalo me vo jis mard se chud rahi thi vo kabhi professor ki shakl ikhtiyar kar leta to kabhi ajit ka lekin uske jism ko is se kya matlab tha ki vo kis se chud rahi hai.use to bas uski ungli ki parwah thi jo use shant kar rahi thi.

bathroom me 1 lumbi aah gunji & divya tub me padi lumbi sanse lene lagi.uske jism ko thoda sukun to mila tha.vo tub se nikli,jism pe tauliya lapeta & kitab utha apne bistar pe let gayi & aage ki kahani padhne lagi.

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क्रमशः...........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 08 Nov 2014 17:36

खेल खिलाड़ी का पार्ट--23

गतान्क से आगे..............

"क्या बोला इसने अभी तक?",अजीत इनटेरगेशन रूम मे दाखिल हुआ जहा 2 इनस्पेक्टर मुर्शिद से पुच्छ-ताछ कर रहे थे.

"कुच्छ नही,सर.बस 1 ही रट लगाए हुए है कि ये तो अपने दोस्तो के साथ लॉड्ज के कमरे खाली होने का इंतेज़ार कर रहा था.सभी के लिए पिंकी बार से लड़किया आने वाली थी वाहा."

"अच्छा.",अजीत ने अपनी कमीज़ की आस्तीने चढ़ा ली & मुर्शिद के करीब आया जोकि कमरे के बीचोबीच 1 कुर्सी पे बैठा था.

"तो वो आदमी वाहा क्या कर रहा था?",उसने अपना बाया पैर कुर्सी के दाए हत्थे पे रख दिया & मुर्शिद को घूरा.

"वो भी कमरा खाली होने का इंतेज़ार कर रहा था,साहब.उस से पहले मैने उसे..-",बात पूरी करने से पहले ही मुर्शिद कमरे की पीछे की दीवार से जा टकराया,अजीत की लात ने उसे वाहा पहुचेया था.

"देख मुर्शिद,मुझे सब्र लफ्ज़ का मतलब नही पता.खास कर तुझ जैसे कीड़ो के मामले मे तो सब्र करने का मतलब मुझे समझ ही नही आता इसलिए 1 आख़िरी मौका देता हू सच बता कि तुझे उस हथ्यारो के कारोबारी का पता कैसे चला & तू किस काम के लिए उस से हथ्यार खरीद रहा था.बोल!"

"साहब,आप क्या कह रहे हो मुझे कुच्छ नही पता.मैं सच कहता हू मैं कोई हथ्यार नही खरीद रहा था."

"ठीक है.",कमरे मे 3-4 हवलदार भी खड़े थे,अजीत उनसे मुखातिब हुआ,"तुम मे से 1 इसे नंगा करो & दूसरा ज़रा वो लेके आओ.",1 हवलदार मुस्कुराता बाहर चला गया.

"साहब..साहब..मैं सच कह रहा हू..मैं कुच्छ नही जानता.",गिड़गिदते मुर्शिद को नंगा कर 3 हवलदरो ने उसे कमरे की छत से उल्टा टांग दिया.

"चलो अब भरो.",मुर्शिद ने जब तक अजीत की बात को समझा & घबराहट से चिल्लाया तब तक हवलदरो ने उसकी गंद के च्छेद मे लाल मिर्च पॉडर को भरना शुरू कर दिया था.मुर्शिद चीख रहा था.

"मुर्शिद,ये शुरुआत है.तू जानता नही दर्द कितने रूपो मे तुझसे मिलने आएगा.इस दर्द से च्छुतकारा तेरे हाथ मे ही है.बता दे सच बात."

"आहह..बताता हू..इनको रोको..आहह....!",अजीत के इशारे पे मुर्शिद को नीचे उतरा गया.

"1 आदमी आया था हमारे पास & उसी ने बोला था कि हम तैय्यार रहें चुनाव मे हमारी ज़रूरत पड़ सकती है.उसने हमे पैसे दिए & उस आर्म्स डीलर का नाम बताया."

"वो क्या काम करवाना चाहता था तुमसे?"

"मैने पुचछा तो उसने बोला की पहले समान ख़रीदो फिर बताउन्गा."

"उस से मिलने का तरीका क्या था?वो तुम्हारे पास आता था कि तुम्हे बुलाता था?"

"पहली बार तो वो खुद आया था."

"तुम्हारे पास किसने भेजा था उसे?तुम्हे लगा नही कि वो पोलीस या फिर तुम्हारे किसी दुश्मन का आदमी है."

"साहब,1 मुनिसिपल कॉर्पोरेटर है कादर.मैने उसके लिए काम किया है.उसी का नाम लेके आया था वो."

"उस डीलर से कैसे मिले तुम?"

"उसके बारे मे भी उसी इंसान ने बताया था.मैने उसको बोला कि मेरा आदमी इतनी जल्दी हथ्यारो का बंदोबस्त नही कर पाएगा तो उसने ही उसकी & हमारी मीटिंग फिक्स कराई थी."

"वो आदमी अगली बार कब मिलने वाला था तुमसे."

"जी,आज सुबह ही."

"सर,कल की रेड की खबर तो उसी वक़्त फैल गयी थी & अभी तक तो वो कही च्छूप भी गया होगा."

"हूँ & फिर ये भी हो सकता है कि उस आर्म्स डीलर ने उसे सावधान कर दिया हो.उसका भी कुच्छ पता नही चला है ना अभी तक?"

नही सर."

"हूँ."

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