खेल खिलाड़ी का compleet

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 16:02

खेल खिलाड़ी का पार्ट--52

गतान्क से आगे............-

"सीयेम साहब,अब जसजीत प्रधान अपने बच्चे की फ़िक्र मे डूबा रहेगा..",अवस्थी ने मधुकर अत्रे को ड्रिंक बना के दी,"..& आप बड़े आराम से अपनी पोज़िशन & मज़बूत कर सकते हैं."

"बात तो सही है अवस्थी जी.",अत्रे ने 1 घूँट भरा,"..बस बच्चा चुनाव के बाद मिले ताकि प्रधान अपने प्रचार पे बिल्कुल भी ध्यान ना दे पाए."

"अब ये तो आप ही के हाथ मे है,सर.",अवस्थी की बात पे दोनो हँसने लगे & शराब के घूँट भरने लगे.

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अजीत ने दिव्या को लोहिया पार्क के बुंगले पे छ्चोड़ा & घर की ओर बढ़ गया.दिव्या की कही बात उसके दिमाग़ मे अभी भी घूम रही थी....क्या ऐसा इत्तेफ़ाक़ हो सकता है कि 2 लोग 1 ही दिन,1 ही समय पे 1 ही बच्चे को अगवा करना चाहें?..चलो मान लिया ऐसा ही हुआ है तो क्या जिसने अनीश को अगवा किया क्या उसे उस लड़के के बारे मे पता था..वो लड़का तो पक्का नौसीखिया था..1 आम जेबकतरा भी उस से ज़्यादा अच्छी प्लॅनिंग करता!..लेकिन पता चला कैसे जबकि वो लड़का तो ऐसा लगता है कि अकेला काम कर रहा था....पोलीस इंटेलिजेन्स का कहना है कि उन्हे इस बाबत कुच्छ नही पता था मगर उस डिपार्टमेंट का हेड तो सीयेम के काफ़ी करीब है..

दिमाग़ मे ये ख़याल कौंधते ही अजीत का विश्वास & मज़बूत हो गया कि हो ना हो ये काम सीयेम का ही किया-कराया है.उसने तय कर लिया कि वो अब इस मामले की तह तक जा के रहेगा.

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अरशद डेवाले के सरोजिनी पार्क मे खड़ा था.काफ़ी बड़े इलाक़े मे फैले ये पार्क काफ़ी खूबसूरत था & शाम के वक़्त प्रेमी जोड़ो के अलावा मा-बाप के साथ बच्चे & सैर करने वाले बूज़रगो से भरा रहता था.अरशद के चेहरे पे नक़ली दाढ़ी & मूँछ थी & आँखो पे चश्मा.पार्क मे 1 आर्टिफिशियल झील भी बनी थी जिसमे बत्तखें भी थी.ये बत्तखें झील के 1 किनारे पे इकट्ठी रहती थी जहा पे लोग उन्हे डबल रोटी खिलाते थे.अरशद ने भी ब्रेड खरीदी & बत्तखो को खिलाने लगा.

"काम अच्छा किया.",उसके बगल मे 1 40-45 बरस का फ्रेंच कट दाढ़ी वाला 5'3" कद का शख्स भी बत्तखो को खाना दे रहा था.

"थॅंक्स.",अरशद ने दबी आआज़ मे जवाब दिया.दोनो इतनी सफाई से दबी आवाज़ मे बात कर रहे थे कि वाहा मुजूद और लोगो को उनकी बात चीत का पता भी ना चला,"मगर ये फोन नंबर वाला क्या चक्कर है?",अरशद ने ब्रेड के आख़िरी टुकड़े पन्छियो को डाले & हाथ झाड़ने लगा.

"हूँ..थोड़ा तफ़सील से बात करनी होगी.",उस शख्स ने भी ब्रेड डालना बंद किया & वाहा से निकल जाके 1 बेंच पे बैठ गया.अरशद उस बेंच की पीठ से लगी दूसरी बेंच पे उसकी ओर पीठ कर के बैठ गया.

"हालात थोड़ा बदल गये हैं.फोन नंबर का मतलब है इन्होने किसी पेशेवर को हमसे डील करने के लिए लगाया है."

"पेशेवर?"

'हाँ.साउत अमेरिका के देशो मे तो किडनॅपिंग बहुत बड़ी इंडस्ट्री है & वाहा ऐसे मामलो मे शिकार के परिवार वाले ऐसे प्रोफेशनल्स को लाते हैं जो किडनॅपर्स से डील करते हैं.अब तुम्हे ये करना है कि कल के बजाय परसो फोन करो & सीधा उस पेशेवर शख्स से बात करने को कहे.माँगे वही रहेंगी जो पहले थी.अगली मुलाकात फोन करने के अगले दिन होगी.और कुच्छ?"

"नही.",दोनो अलग-2 रस्तो से वाहा से निकल लिए.अगर अजीत वाहा मौजूद होता तो उस फ्रेंच कट दाढ़ी वाले को फ़ौरन गिरफ्तार कर लेता क्यूकी वो कोई और नही वही हथियारो का सौदागर था.

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रात 12 बजे प्रोफेसर दीक्षित बंगल के हॉल मे उठ खड़ा हुआ,अच्छा भाई,गुड नाइट.",दिव्या & नामित ने उसे जवाब दिया & वो भी अपने-2 कमरो मे चले गये.नामित ने ताज़ा-2 पोलीस फोर्स जाय्न की थी & बिल्कुल जोश से भरा हुआ था & प्रोफेसर की हर बात सुन तुरंत काम करने लगता था.

प्रोफेसर कमरे मे गया & कपड़े बदले फिर उसने बत्तिया बुझाई & खिड़कियो के पर्दे बराबर किए & बिस्तर पे लेट गया.

"चलो भाई,काम ख़त्म हुआ.",बुंगले के बेसमेंट मे बैठे दोनो पोलीस वालो ने मॉनिटर से आँखे हटाई & अपने हेडफोन उतारे.वैसे भी उनकी शिफ्ट ख़त्म ही होने वाली थी & रात की शिफ्ट वाले बंदे आने वाले थे.प्रोफेसर ने दिन मे ही ये भाँप लिया था कि 12-12 घंटो की 2 शिफ्ट्स मे बेसमेंट मे काम हो रहा है.उसने 12 बजे 1 कार को गेट पे रुकते देखा था.उसमे से 2 आदमी उतरे थे जिन्होने गार्ड से बात की फिर प्रोफेसर के साथ लगाया गया 1 कॉन्स्टेबल उस कार मे बैठ के चला गया मगर वो 2 आदमी उसके साथ नही लौटे.उपरी मंज़िल पे चाइ की चुस्की लेते प्रोफेसर ने सब देखा & अंदाज़ लगा लिया.

ठीक 12.10 पे रात की शिफ्ट के बंदे आके बैठ गये.नाइट विजन कॅमरा भी बहुत सॉफ नही दिखा रहा था पर कमरे के एसी की आवाज़ & प्रोफेसर की नींद मे ली जा रही सांसो की आवाज़ बग्स से सॉफ सुनाई दे रही थी.1 बजे जब नाइट ड्यूटी वालो ने ताश की गद्दी निकाली & ये कह के खेलना शुरू किया कि यार ये कोई मुजरिम तो है नही & ना ही अभी तक किडनॅपर्स का फोन आया है कि ये कुच्छ च्छुपाएगा तो हम क्यू बोर हों!ताश खेलते हैं.

ठीक उसी वक़्त प्रोफेसर उठा & कमेरे पे पहले अपनी कमीज़ डाली & फिर कमरे के बग्स की पवर सप्लाइ काट दी.5 मिनिट बाद दिव्या उसके कमरे मे दाखिल हुई & बिस्तर पे आ उसके साथ चादर के अंदर घुस गयी.प्रोफेसर के जिस्म पे हाथ फिराते ही उसे पता चल गया कि उसका महबूब उसके इंतेज़ार मे पूरी तैय्यारि के साथ लेटा था.उसके जिस्म पे 1 भी कपड़ा नही था.

दिव्या प्रोफेसर के बाई तरफ उस से सॅट के करवट से लेट गयी & बाया हाथ उसके सीने से लेके पेट तक फिराया,"इतनी देर से क्यू आने को कहा था?",उसके बाए कान मे जीभ फिराते हुए वो फुसफुसाई.

"ताकि तुम्हे फुसफुसाना ना पड़े.",प्रोफेसर का दाया हाथ उसकी नाइटी को उठा अंदर घुसा & उसकी छातियो से खेलने लगा.दिव्या ने अपने होंठ अपने प्रेमी के होंठो से लगा दिए.प्रोफेसर ने किस तोड़ने के बाद उसकी नाइटी निकाली & उसे बाते की कैसे उसने बग्स & कैमरे को बेकार कर दिया है.

"आज तो कोई फोन नही आया,अजिंक्या.",अपनी चूचियो को चूस्ते प्रोफेसर के बालो मे उसने अपनी उंगलिया फिराते हुए मज़े मे आँखे बंद कर ली.

"आज तो आना भी नही था.",प्रोफेसर का दाया हाथ उसकी चूत से जा लगा.

"उम्म्म्म....मतलब.",प्रोफेसर की उंगली ने जैसे ही उसकी चूत को कुरेदना शुरू किया दिव्या ने हल्के से अपनी कमर हिलाई.

"ऐसे मामलो मे फोन कभी 1 दिन बाद आता है,कभी 4 तो कभी 7..",प्रोफेसर उसकी मोटी चूचियों को बारी-2 से चूस रहा था,"..किडनॅपर्स शिकार के परिवार को बिल्कुल कमज़ोर कर देना चाहते हैं ताकि वो उनकी माँग मान ले & उसके बाद भी अगवा हुआ इंसान कब मिलेगा ये भी तभी पक्का होता है जब किडनॅपर्स को अपने ना पकड़े जाने का बिल्कुल यकीन हो जाए..",प्रोफेसर उसकी चूचियो को छ्चोड़ उसके पेट से होता हुआ उसकी चूत पे पहुँचा तो दिव्या ने थोड़ा बाए घूमते हुए उसके तगड़े लंड को अपने मुँह मे भर लिया,"..ये मामले लंबे खिंचते हैं.कभी 10-15 दिन तो कभी महीनो....ओह्ह्ह्ह..!",दिव्या ने उसके नड़ो को मुँह मे भर बहुत ज़ोर से चूस लिया था.प्रोफेसर ने भी अब केस की बातें छ्चोड़ी & पूरी तरह से दिव्या के उपर आ अपना मुँह उसकी चूत से लगाया & अपने लंड से उसका मुँह भर दिया.

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"क्या कर रही हो जानेमन?",भैया जी का फोन देख नीना मुस्कुराइ थी & सोते हुए मुकुल के बगल से उठ दूसरे कमरे मे जाके दरवाज़ा बंद कर बिस्तर पे लेट गयी थी.

"आप..?",उसने थोड़ा घबराने का नाटक किया.

"मैने कहा था ना जानेमन 12 बजे फोन करूँगा."

"हां..पर.."

"क्या हुआ?तुम्हारा पति वही है क्या?"

"हां."

"जगा है."

"नही.सो रहे हैं."

"तो फिर घबरा क्यू रही हो?बात करो ना!"

"नही,अभी नही..कही वो जाग गये तो ग़ज़ब हो जाएगा.",नीना ने फिर डरने का नाटक किया & भैया जी का लंड बिल्कुल तन गया.उन्होने उसे सहला के शांत किया.

"नही जागेगा जानेमन.तुम्हारे जैसी हसीना के होते वो सो रहा है..ऐसा बेवकूफ़ इंसान अभी नही जागेगा.वो छ्चोड़ो ये बताओ क्या कर रही थी?सोने से पहले उसने तुम्हे चोदा था क्या?"

"धत!",नीना ने शरमाने का नाटक किया.उसका दिल तो कर रहा था कि पेट पकड़ के ज़ोर-2 से हँसे.भैया जी जैसा आदमी भी वासना मे ऐसा बेवकूफ़ हो सकता था,उसे तो पता ही नही था!

"क्या हुआ?"

"कैसी बातें करते हैं?"

"तो क्या तुम चुदाई नही करती.आज दिन मे ही तो मेरा लंड तुम्हारी चूत मे था."

"ओफ्फो..मैं नही बात करती आपसे..कैसी गंदी बाते कर रहे हैं?"

"ये गंदी बाते हैं जानेमन मगर दिन मे तो तुम्हे काफ़ी मज़ा आया था."

"वो नही..आप जो अभी बोल रहे थे..वो लफ्ज़..छीयियी..!",अब तो भैया जी का लंड बिल्कुल बेचैन हो गया.नीना का शरमाना उन्हे बिल्कुल असली लगता था & दिन की चुदाई & उसकी अदाएँ याद आते ही उन्होने लंड को मज़बूती से पकड़ा & हिलाने लगे.

"क्यू?..तुम नही बोलती..ये सब..तुम्हारा पति नही बोलता ऐसे..तो तुम क्या बोलती हो..अपनी चूत को बताओ..!"

"प्लीज़..ऐसी बाते करेंगे तो मैं फोन काट दूँगी!"

"अच्छा बाबा नही करूँगा..चलो ये बताओ कल कितने बजे आ रही हो?",नीना ने तय कर लिया था कि अब वो कम से कम 3 दिन भैया जी से नही मिलेगी तो उसने बहाना बनाया.

"बलदेव जी,कल तो मैं नही मिल सकती.आप तो मेरे घर की हालत जानते ही हैं इस वक़्त.कल बहुत काम है..1 बार शॉपिंग भी जाना है फिर मेरे बेटे ने 1 स्कूल प्ले मे भाग ले लिया है तो उसकी कॉस्ट्यूम लेने कल होटेल महरजा मे 1 स्टोर है,वाहा जाना होगा..तो कल तो मुमकिन नही हो पाएगा.परसो देखेंगे."

"ठीक है..जैसा तुम कहो मगर इस वक़्त तो मेरी प्यास बुझा दो.दिल करता है तुम्हारी चूत मे अभी अपना लंड घुसा दूँ & सुबह तक चोद्ता रहू तुम्हे..!"

"ओफ्फो..आप फिर से वही सब बोलने लगे!",इस बार नीना की आवाज़ मे भैया जी को मस्ती की खनक भी सुनाई दी.

"तुम्हे देख के अब कुच्छ और बोलने का जी नही करता,मेरी रानी.तुम भी सोचो की मेरा लंड तुम्हारी चूत मे है....कैसा लग रहा है तुम्हे?",भैया जी ज़ोर-2 से लंड हिला रहे थे.

"अरे..लगता है उनकी नींद खुल गयी है..कल बात करेंगे..बाइ!",उसने फोन काट दिया & भैया जी तड़प्ते रह गये.नीना का हंसते-2 बुरा हाल था.उसने तो सपने मे भी नही सोचा था कि भैया जी को बुद्धू बनाना इतना आसान होगा.

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"सर,उस वॅन की फिंगरप्रिंट रिपोर्ट्स आ गयी हैं.",अजीत डीसीपी वेर्मा के कॅबिन मे दाखिल हुआ.

"किसी से मॅच करती हैं?"

"यस सर.",अजीत ने कुच्छ काग़ज़ अपने बॉस को थमाए,"..वरुण अवस्थी नाम का 1 लड़का था जोकि अभी-2 सज़ा काट के बाहर आया है.ये है उसकी डीटेल्स."

"गुड,अजीत.इसके पास तो वजह भी है प्रधान के बेटे को किडनॅप करने की."

"सर,अभी यहा आते हुए मैने उस कार डीलर को वरुण अवस्थी की तस्वीर भी दिखाई थी & उसने भी उसे पहचान लिया."

"ग्रेट!चलो,कुच्छ तो सुराग मिला.",दकप वेर्मा पिच्छले 3 दिनो मे पहली बार मुस्कुराए.

"मगर सर इस लड़के से तो बच्चे को और 2 लोगो ने ले लिया था."

"इसी के साथी होंगे वो?"

"सर,आपको दिव्या ने कुच्छ नही कहा?"

"नही.",अजीत ने उन्हे दिव्या की कही बात बताई.

"हूँ..",वेर्मा साहब सोच मे पड़ गये,"..उसकी बात भी ठीक लगती है & फिर इस लड़के ने खुद को छिपाने की कोशिश क्यू नही की?..खैर जो भी हो..अजीत इस लड़के को हमे अपनी हिरासत मे लेना ही है.उसी से कुच्छ आगे का सुराग मिल सकता है.इसकी फोटो सारे थानो मे सर्क्युलेट करवा दो & हां ..पोलीस आर्टिस्ट से इसके हुलिया बदलने के पासिबल स्केचस भी बनवा लेना."

"सर.",अजीत ने काग़ज़ उठाए & उनके हुक्म की तामील करने चला गया.

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महाराजा होटेल 1 5 स्टार होटेल था जिसकी लॉबी के साथ ही कुच्छ स्टोर्स बने थे.नीना उन्ही मे से 1 से श्लोक की कॉस्ट्यूम खरीद के निकली ही थी कि किसी ने उसका रास्ता रोक लिया.

"नमस्ते.",भैया जी उसके सामने मुस्कुराते खड़े थे.नीना चौक गयी थी.

"ना-नमस्ते..आप यहाँ?'

"जहाँ आप वाहा हम.",भैया जी धीरे से बोले & उसे लिफ्ट्स की ओर ले जाने लगे,"आइए."

"कहा ले जा रहे हैं?",नीना ने धीरे से कहा,"आज नही,प्लीज़.",लिफ्ट आ गयी & भैया जी उसे अंदर ले गये.लिफ्ट खाली थी.नीना ने आज कत्थई रंग की साड़ी & स्लीव्ले ब्लाउस पहना था जिसका गला & बॅक काफ़ी गहरे थे.भैया जी ने लिफ्ट मे दाखिल होते ही उसे बाहो मे भर लिया & उसके चेहरे को चूमने लगे.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--52

gataank se aage............-

"CM sahab,ab Jasjit Pradhan apne bachche ki fikr me dooba rahega..",Awasthi ne Madhukar Atre ko drink bana ke di,"..& aap bade aaram se apni position & mazbut kar sakte hain."

"baat to sahi hai awasthi ji.",atre ne 1 ghunt bhara,"..bas bachcha chunav ke baad mile taki pradhan apne prachar pe bilkul bhi dhyan na de paye."

"ab ye to aap hi ke hath me hai,sir.",awasthi ki baat pe dono hansne lage & sharab ke ghunt bharne lage.

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Ajit ne Divya ko Lohia Park ke bungle pe chhoda & ghar ki or badh gaya.divya ki kahi baat uske dimagh me abhi bhi ghum rahi thi....kya aisa ittefaq ho sakta hai ki 2 log 1 hi din,1 hi samay pe 1 hi bachche ko agwa karna chahen?..chalo maan liya aisa hi hua hai to kya jisne Anish ko agwa kiya kya use us ladke ke bare me pata tha..vo ladka to pakka nausikhiya tha..1 aam jebkatra bhi us se zyada achhi planning karta!..lekin pata chala kaise jabki vo ladka to aisa lagta hai ki akela kaam kar raha tha....police intelligence ka kehna hia ki unhe is babat kuchh nahi pata tha magar us department ka head to CM ke kafi karib hai..

dimagh me ye khayal kaundhate hi ajit ka vishwas & mazbut ho gaya ki ho na ho ye kaam CM ka hi kiya-karaya hai.usne tay kar liya ki vo ab is mamle ki teh tak ja ke rahega.

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Arshad Devalay ke Sarojini Park me khada tha.kafi bade ilake me faile ye park kafi khubsurat tha & sham ke waqt premi jodo ke alawa maa-baap ke sath bachche & sair karne vale buzrugo se bhara rehta tha.arshad ke chehre pe naqli dadhi & moonchh thi & aankho pe chashma.park me 1 artificial jhil bhi bani thi jisme battakhen bhi thi.ye battakhen jhil ke 1 kinare pe ikkathi rehti thi jaha pe log unhe double roti khilate the.arshad ne bhi bread kharidi & battakho ko khilane laga.

"kaam achha kiya.",uske bagal me 1 40-45 baras ka french cut dadhi vala 5'3" kad ka shakhs bhi battakho ko khana de raha tha.

"thanx.",arshad ne dabi aaaz me jawab diya.dono itni safai se dabi aavaz me baat kar rahe the ki vaha mujood aur logo ko unki baat chit ka pata bhi na chala,"magar ye fone number vala kya chakkar hai?",arshad ne bread ke aakhiri tukde panchhiyo ko dale & hath jhaadne laga.

"hun..thoda tafsil se baat karni hogi.",us shakhs ne bhi bread dalna band kiya & vaha se nikal jake 1 bench pe baith gaya.arshad us bench ki pith se lagi dusri bench pe uski or pith kar ke baith gaya.

"halaat thoda badal gaye hain.fone number ka matlab hai inhone kisi peshevar ko humse deal karne ke liye lagaya hai."

"peshevar?"

'haan.South America ke desho me to kidnapping bahut badi industry hai & vaha ise mamlo me shikar ke parivar vale aise professionals ko laate hain jo kidnappers se deal karte hain.ab tumhe ye karna hai ki kal ke bajay parso fone karo & seedha us peshevar shakhs se baat karne ko kahe.maange vahi rahengi jo pehle thi.agli mulakat fone karne ke agle din hogi.aur kuchh?"

"nahi.",dono alag-2 rasto se vaha se nikal liye.agar ajit vaha maujood hota to us french cut dadhi vale ko fauran giraftar kar leta kyuki vo koi aur nahi vahi hathyaro ka saudagar tha.

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raat 12 baje Professor Dixit bungle ke hall me uth khada hua,achha bhai,good night.",divya & Namit ne use jawab diya & vo bhi apne-2 kamro me chale gaye.namit ne taza-2 police force join ki thi & bilkul josh se bhara hua tha & professor ki har baat sun turant kaam karne lagta tha.

professor kamre me gaya & kapde badle fir usne battiya bujhayi & khidkiyo ke parde barabar kiye & bsitar pe let gaya.

"chalo bhai,kaam khatm hua.",bungle ke basement me baithe dono police valo ne monitor se aankhe hatayi & apne headphone utare.vaise bhi unki shift khatm hi hone wali thi & raat ki shift vale bande aane vale the.professor ne din me hi ye bhanp liya tha ki 12-12 ghanto ki 2 shifts me basement me kaam ho raha hai.usne 12 baje 1 car ko gate pe rukte dekha tha.usme se 2 aadmi utre the jinhone guard se baat ki fir professor ke sath lagaya gaya 1 constable us car me baith ke chala gaya magar vo 2 aadmi uske sath nahi laute.upri manzil pe chai ki chuski lete professor ne sab dekha & andaz laga liya.

thik 12.10 pe raat ki shift ke bande aake baith gaye.night vision camera bhi bahut saaf nahi dikha raha tha par kamre ke AC ki aavaz & professor ki nind me li ja rahi sanso ki aavaz bugs se saaf sunai de rahi thi.1 baje jab night duty valo ne tash ki gaddi nikali & ye keh ke khelna shuru kiya ki yaar ye koi mujrim to hai nahi & naa hi abhi tak kidnappers ka fone aaya hai ki ye kuchh chhupayega to hum kyu bore hon!tash khelte hain.

thik usi waqt professor utha & camere pe pehle apni kamiz dali & fir kamnre ke bugs ki power supply kaat di.5 minute baad divya uske kamre me dakhil hui & bistar pe aa uske sath chadar ke andar ghus gayi.professor ke jism pe hath firate hi use pata chal gaya ki uska mehboob uske intezar me puri taiyyari ke sath leta tha.uske jism pe 1 bhi kapda nahi tha.

divya professor ke bayi taraf us se sat ke karwat se let gayi & baya hath uske seene se leke pet tak firaya,"itni der se kyu aane ko kaha tha?",uske baaye kaan me jibh firate hue vo phusphusayi.

"taki tumhe phusphusana na pade.",professor ka daya hath uski nighty ko utha andar ghusa & uski chhatiyo se khelne laga.divya ne apne honth apne premi ke hotho se laga diye.professor ne kiss todne ke baa uski nighty nikali & use batay ki kaise usne bugs & camere ko bekar kar diya hai.

"aaj to koi fone nahi aaya,Ajinkya.",apni chhatiyo ko chuste professor ke balo me usne apni ungliya firate hue maze me aankhe band kar li.

"aaj to aana bhi nahi tha.",professor ka daya hath uski chut se ja laga.

"ummmm....matlab.",professor ki ungli ne jaise hi uski chut ko kuredna shuru kiya divya ne halke se apni kamar hilayi.

"aise mamlo me fone kabhi 1 din baad aata hai,kabhi 4 to kabhi 7..",professor uski moti chhatiyo ko bari-2 se chus raha tha,"..kidnappers shikar ke parivar ko bilkul kamzor kar dena chahte hain taki vo unki mang maan le & uske baad bhi agwa hua insan kab milega ye bhi tabhi pakka hota hai jab kidnappers ko apne na pakde jane ka bilkul yakin ho jaye..",professor uski choochiyo ko chhod uske pet se hota hua uski chut pe pahuncha to divya ne thoda baye ghumte hue uske tagde lund ko apne munh me bhar liya,"..ye mamle lumbe khinchte hain.kabhi 10-15 din to kabhi mahino....ohhhh..!",divya ne uske nado ko munh me bhar bahut zor se chus liya tha.professor ne bhi ab case ki baaten chhodi & puri tarah se divya ke upar aa apna munh uski chut se lagaya & apne lund se uska munh bhar diya.

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"kya kar rahi ho janeman?",Bhaiya ji ka fone dekh Nina muskurayi thi & sote hue Mukul ke bagal se uth dusre kamre me jake darwaza band kar bistar pe let gayi thi.

"aap..?",usne thoda ghabrane ka natak kiya.

"maine kaha tha na janeman 12 baje fone karunga."

"haan..par.."

"kya hua?tumhara pati vahi hai kya?"

"haan."

"jaga hai."

"nahi.so rahe hain."

"to fir ghabra kyu rahi ho?baat karo na!"

"nahi,abhi nahi..kahi vo jag gaye to gazab ho jayega.",nina ne fir darne ka natak kiya & bhaiya ji ka lund bilkul tan gaya.unhone use sehla ke shant kiya.

"nahi jagega janeman.tumhare jaisi haseena ke hote vo so raha hai..aisa bevkuf insan abhi nahi jagega.vo chhodo ye batao kya kar rahi thi?sone se pehle usne tumhe choda tha kya?"

"dhat!",nina ne sharmane ka natak kiya.uska dil to kar raha tha ki pet pakad ke zor-2 se hanse.bhaiya ji jaisa aadmi bhi vasna me aisa bevkuf ho sakta tha,use to pata hi nahi tha!

"kya hua?"

"kaisi baaten karte hain?"

"to kya tum chudai nahi karti.aaj din me hi to mera lund tumhari chut me tha."

"offoh..main nahi baat karti aapse..kaisi gandi baate kar rahe hain?"

"ye gandi baate hain janeman magar din me to tumhe kafi maza aaya tha."

"vo nahi..aap jo abhi bol rahe the..vo lafz..chhiii..!",ab to bhaiya ji ka lund bilkul bechain ho gaya.nina ka sharmana unhe bilkul asli lagta tha & din ki chudai & uski adayen yaad aate hi unhone lund ko mazbuti se pakda & hilane lage.

"kyu?..tum nahi bolti..ye sab..tumhara pati nahi bolta aise..to tum kya bolti ho..apni chut ko batao..!"

"please..aisi baate karenge to main fone kaat dungi!"

"achha baba nahi karunga..chalo ye batao kal kitne baje aa rahi ho?",nina ne tay kar liya tha ki ab vo kam se kam 3 din bhaiya ji se nahi milegi to usne bahana banaya.

"baldev ji,kal to main nahi mil sakti.aap to mere ghar ki halat jante hi hain is waqt.kal bahut kaam hai..1 baar shopping bhi jana hai fir mere bete ne 1 school playe me bhag le liya hai to uski costume lene kal Hotel Mahraja me 1 store hai,vaha jana hoga..to kal to mumkin nahi ho payega.parso dekhenge."

"thik hai..jaisa tum kaho magar is waqt to meri pyas bujha do.dil karta hai tumhari chut me abhi apna lund ghusa doon & subah tak chodta rahu tumhe..!"

"offoh..aap fir se vahi sab bolne lage!",is baar nina ki aavaz me bhaiya ji ko masti ki khanak bhi sunai di.

"tumhe dekh ke ab kuchh aur bolne ka ji nahi karta,meri rani.tum bhi socho ki mera lund tumhari chut me hai....kaisa lag raha hai tumhe?",bhaiya ji zor-2 se lund hila rahe the.

"are..lagta hai unki nind khul gayi hai..kal baat krenge..bye!",usne fone kaat diya & bhaiya ji tadapte reh gaye.nina ka hanste-2 bura haal tha.usne to sapne me bhi nahi socha tha ki bhaiya ji ko buddhu banana itna aasan hoga.

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"sir,us van ki fingerprint reports aa gayi hain.",ajit DCP Verma ke cabin me dakhil hua.

"kisi se match karti hain?"

"yes sir.",ajit ne kuchh kagaz apne boss ko thamaye,"..Varun Awasthi naam ka 1 ladka tha joki abhi-2 saza kaat ke bahar aaya hai.ye hai uski details."

"good,ajit.iske paas to vajah bhi hai pradhan ke bete ko kidnap karne ki."

"sir,abhi yaha aate hue maine us car dealer ko varun awasthi ki tasvir bhi dikhayi thi & usne bhi use pehchan liya."

"great!chalo,kuchh to surag mila.",DCP verma pichhle 3 dino me pehli baar muskuraye.

"magar sir is ladke se to bachche ko aur 2 logo ne le liya tha."

"isi ke sathi honge vo?"

"sir,aapko divya ne kuchh nahi kaha?"

"nahi.",ajit ne unhe divya ki kahi baat batayi.

"hun..",verma sahab soch me pad gaye,"..uski baat bhi thik lagti hai & fir is ladke ne khud ko chhipane ki koshish kyu nahi ki?..khair jo bhi ho..ajit is ladke ko hume apni hirassat me lena hi hai.usi se kuchh aage ka surag mil sakta hai.iski foto sare thano me circulate karwa do & haan ..police artist se iske huliya badalne ke possible sketches bhi banwa lena."

"sir.",ajit ne kagaz uthaye & unke hukm ki taamil karne chala gaya.

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maharaja hotel 1 5 star hotel tha jiski lobby ke sath hi kuchh stores bane the.nina unhi me se 1 se Shlok ki costume kharid ke nikli hi thi ki kisi ne uska rasta rok liya.

"namaste.",bhaiya ji uske samne muskurate khade the.nina chauk gayi thi.

"na-namaste..aap yahan?'

"jahan aap vaha hum.",bhaiya ji dhire se bole & use lifts ki or le jane lage,"aaiye."

"kaha le ja rahe hain?",nina ne dhire se kaha,"aaj nahi,please.",lift aa gayi & bhaiya ji use andar le gaye.lift khali thi.nina ne aaj katthai rang ki sari & sleeveless blouse pehna tha jiska gala & back kafi gehre the.bhaiya ji ne lift me dakhil hote hi use baaho me bhar liya & uske chehre ko chumne lage.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 16:02

खेल खिलाड़ी का पार्ट--53

गतान्क से आगे............-

"छ्चोड़िए ना..प्लीज़....आहह..कोई आ जाएगा....ऊहह..नही..आज नही..मुझे देर हो जाएगी..ऊव्व..!",भैया जी उसे बाहो मे भरे पागलो की तरह चूम रहे थे.उनके हाथ नीना की लगभग नंगी पीठ पे चल रहे थे & होंठ उसके खूबसूरत चेहरे पे.तभी लिफ्ट का बीपेर बजा तो दोनो अलग हो गये.

तीसरी मंज़िल पे 1 वेटर चढ़ा & दोनो के आगे खड़ा हो गया.भैया जी नीना की गंद सहलाने लगे तो नीना ने घबराते हुए अर्ज़ी भरी निगाहो से उन्हे देखा.दिल ही दिल मे उसे बहुत अच्छा आ रहा था.भीया जी ने इस तरह होटेल आके उसे चौंका दिया था मगर अब उसे इस खेल मे बहुत मज़ा आ रहा था.

वेटर पाँचवी मंज़िल पे निकल गया तो भैया जी ने उसे फिर से दबोच लिया.छटी मंज़िल पे वो उसे लिफ्ट से बाहर ले आए & गलियारे मे आगे बढ़ने लगे,"प्लीज़ बलदेव जी..जाने दीजिए ना..!"

"बस थोड़ी देर की ही तो बात है,नीना.",भैया जी उसे गलियारे के आख़िर मे ले गये जहा 2 लिफ्ट्स थी.उन्होने बटन दबाया तो लिफ्ट खुल गयी.अंदर जाते ही उन्होने नीना को फिर से बाहो मे भर लिया & उसके होंठो को चूमने लगे.हाथो मे पॅकेट होने की वजह से नीना उन्हे अपने से अलग नही कर पा रही थी.

भैया जी की आतुर ज़ुबान उसके नर्म होंठो को मना रही थी की वो अपनी हया छ्चोड़ें & उसे अंदर आने दें ताकि वो उसकी ज़ुबान से मिल सके.नीना की ना-नुकर के बावजूद उन्होने उसके होंठो को मना ही लिया & उनके खुलते ही नीना की नर्म ज़ुबान को अपनी ज़ुबान से छेड़ने लगे.

तभी बीपेर बजा & दरवाज़ा खुल गया तो नीना घबरा के उनसे छिटकने लगी मगर उन्होने उसे जकड़े ही रहा & लिफ्ट से बाहर आए.लिफ्ट सीधा ए2 माले पे 1 प्राइवेट सूयीट मे खुली थी जहा दाखिल होते ही भैया जी ने उसके हाथो के बोझ को हल्का किया & उसे अपने सीने से लगा लिया.

उसकी मांसल कमर को मसल्ते हुए को उसके गुलाबी होंठो का रस पीने लगे,"उम्म..प्लीज़ समझिए ना!देर हो जाएगी तो मैं क्या जवाब दूँगी?",सैय्यद की क़ैद मे फँसी बुलबुल के जैसी नर्म आवाज़ मे बोलती नीना भैया जी के जोश को पल-2 बढ़ा रही थी.

"मेरी जान..",उन्होने उसके गाल चूमे,"..मेरी रानी..",उसकी ठुड्डी को चूमा,"..बेफ़िक्र रहो..तुम्हे क्या लगता है कि तुम्हे ख़तरे मे डाल मैं तुम्हे खोने की बेवकूफी करूँगा!कभी नही..बस सारी बदगुमानी भूल इस लम्हे का लुत्फ़ उठाओ & मुझे अपने हुस्न मे डूब जाने दो."

भैया जी ने उसकी कमर को सहलाते हुए उसकी गर्दन चूमते हुए उसके ब्लाउस से झाँक रहे बड़े से क्लीवेज पे जैसे ही होंठ रखे नीना उनसे छिटक के दूर जाने लगी की तभी जैसे किसी चीज़ ने उसे रोका.उसने गर्दन घुमाई तो देखा कि भैया जी के हाथो मे उसका आँचल है.

"छ्चोड़िए ना!",नीना उनकी ओर घूमी & दाए हाथ से आँचल को पकड़ के खींचा.उसका बाया हाथ उसकी सारी से ढँकी चूत के बिल्कुल उपर था.भैया जी ने उसे सर से पाँव तक निहारा,मस्ती से तमतमाया उसका चेहरा उन्हे शर्म से लाल लगा,सॅटिन के स्लीव्ले ब्लाउस से छलक रही उसकी छातियो को देख के उन्होने अपनी ज़ुबान को होंठो पे फिराया & जब उसके चिकने पेट पे उसकी गोल नाभि के नीचे उसका छ्होटा सा गोरा हाथ उसकी चूत पे रखा दिखा तो उनके कदम खुद बा खुद उसकी ओर बढ़ गये.

नीना की साँसे तेज़ हो गयी & उसका सीना बड़े ही पूर्कशिष अंदाज़ मे लहरो की तरह हिलोरे लेने लगा.उसने नज़रे नीची कर ली.भैया जी उसके आँचल को समेटते हुए उसके करीब आ रहे थे.उसके नज़दीक आ उन्होने बाए हाथ मे उसका आँचल को थामा दाया हाथ पकड़ा तो आँचल फर्श पे गिर गया.उन्होने दाए हाथ से नीना की ठुड्डी उपर की तो नीना ने शर्म का नाटक करते हुए आँखे बंद ही रखी.

भैया जी ने उसके आँचल को खींचा तो नीना को मजबूरन आगे आना पड़ा & उसका जिस्म अपने प्रेमी से सॅट गया.पेट पे उनके मोटे लंड का कडपन महसूस करते ही उसकी चूत कसमसाने लगी.भैया जी ने नीना की ठोडी थाम उसके होंठो को चूमना शुरू किया.उनका हाथ सरक के नीचे आया & उसकी कमर को लपेट वो उसे बड़ी शिद्दत के साथ चूमने लगे.इस बार नीना ने उनका साथ दिया & उनकी जीभ का थोड़ी गर्मजोशी के साथ इस्तेक्बाल किया.

उसकी इस हरकत से भैया जी खुशी से पागल हो उठे & उन्होने उसकी कमर मे अटकी सारी को निकालने की कोशिश की तो नीना ने उन्हे परे धकेला & उनकी ओर पीठ कर खड़ी हो गयी.भैया जी ने उसे पीछे से थाम लिया & उसके पेट को सहलाने लगे & उसकी गर्दन पे दाई तरफ चूमने लगे.नीना ने उनके हाथो पे अपने हाथ रख दिए मानो उन्हे रोकने की कोशिश कर रही हो.

भैया जी उसकी नाभि को कुरेदने लगे तो उसने दबी-2 आहें भरनी शुरू कर दी.भैया जी समझ गये कि अब वो मस्त हो रही है.उन्होने काफ़ी देर तक उसके पेट के साथ खिलवाड़ किया.नीना अब उनके जिस्म से अड़ के खड़ी थी & हाथ पीछे ले जा उनके बालो & चेहरे को सहला रही थी.उसकी मदहोशी का फ़ायदा उठाके भैया जी ने फ़ौरन उसकी कमर मे हाथ डाल उसकी सारी को निकाल दिया.नीना जैसे नींद से जागी & छिटक के थोड़ी दूर पर्दे के पास जा खड़ी हुई & भैया जी की तरफ शर्म,खुमारी & बनावटी गुस्से से देखा.

"क्या हुआ?",भैया जी मुस्कुराए.

"आप बड़े वो हैं..",ये घिसा-पिटा डाइलॉग बोलते वक़्त नीना ने कैसे खुद को हँसने से रोका ये वही जानती थी,"..मेरी सारी क्यू निकाली?"

"तो तुम भी हमारा कुर्ता निकाल दो.",वो उसके सामने खड़े हो गये & बाहे उपर कर दी,"लो.",नीना शर्मा के जाने लगी तो उन्होने रोक के इसरार किया.नीना ने शरमाते हुए नज़रे नीची रखते हुए उनका कुर्ता निकाल दिया.छ्होटे से कद की नीना जब पंजो पे उचक लंबे चौड़े भैया जी का कुर्ता निकाल रही थी तो उसकी छातियो को देख के ऐसा लग रहा था जैसे वो उसके ब्लाउस से निकलने को तड़प रही हैं.

कुर्ता निकलते ही भैया जी ने उसे सीने से लगा लिया & प्यार से उसकी पीठ पे हाथ फेरने लगे.उनके सीने पे हाथ जमाए नीना ने चेहरा बाई ओर घुमा गाल उनके जिस्म से सटा दिया तो भैया जी ने उसके हाथ पकड़ उन्हे अपनी कमर पे बाँधा & उसे अपने आगोश मे भर लिया.नीना ने शर्मीली लड़की के नाटक को जारी रखते हुए उनके बालो भरे चौड़े सीने मे चेहरा च्छूपा लिया.

"अब क्यू इतना शर्मा रही हो,मेरी रानी?",भैया जी ने उसके बालो को चूमा.

"तो क्या आपकी तरह बेशर्म बन जाऊं?",नीना ने उनके सीने मे चेहरा च्छुपाए हुए कहा.

"प्यार मे कैसी शर्म जानेमन!",भैया जी ने उसके पेटिकोट के हुक्स को 1 झटके मे खोला तो वो उसके कदमो के गिर्द फ्रश पे गिर गया.नीना ने सीने से सर उठाया & फिर गुस्से से देखा.

"आप समझते क्यू नही?बहुत देर हो जाएगी!",भैया जी मरून पॅंटी मे कसी उसकी गंद को दबा रहे थे.

"कोई देर-वेर नही होगी.",उन्होने उसकी पॅंटी मे हाथ घुसा के उसकी गंद को दबाया तो उसने उनके हाथ को पकड़ पॅंटी से निकाल दिया.

"सब जानती हू.1 बार शुरू हो जाएँगे तो फिर मुझे भी पागल कर देंगे!",नीना अपनी कही बात पे जैसे खुद ही शर्मा गयी & 1 बार फिर अपने आशिक़ के सीने मे चेहरा च्छूपा लिया.भैया जी हंसते हुए उसकी गंद सहलाने लगे.

उनके हाथ उपर आए & नीना के ब्लाउस & ब्रा के हुक्स खोलने लगे तो नीना ने उन्हे रोकना चाहा. वो सर झुका उसे चूमने लगे & उसके ब्लाउस & ब्रा को निकालने लगे.नीना की दाई बाँह तो उनके आगोश मे दबी थी मगर बाई को उसने मोड़ अपने कपड़ो को उतारने से रोकना चाहा तो भैया जी ने उसकी मनुहार करते हुए उसके गोरे गालो को चूमते हुए उसके क्लीवेज पे मुँह रख दिया.

चूचियो पे मर्दाने लबो की गर्माहट ने नीना के अरमानो को अब बिल्कुल जगा दिया & उसकी बाँह खुद बा खुद नीची हो गयी.भैया जी ने उसके कपड़े निकाले & उसकी चूचियो को चूमने लगे.नीना की आहे मस्त होने लगी.भैया जी ने बगल की मेज़ से 1 रिमोट उठाके उसे दबाया तो पीछे का परदा हट गया & 1 फ्लोर टू सीलिंग शीशे की दीवार दिखी जिस से बाहर का नज़ारा दिख रहा था.

नीना की पीठ उन्होने उस शीशे की दीवार से लगा दी & उसकी चूचियो को हाथो मे भर चूसने लगे.नीना के हाथ उन्हे रोकने की कोशिश करते-2 अब बेचैनी से खरोंछने लगे थे.भीया जी उसकी चूचियो को देख के अपना होश खो चुके थे & उन्हे दबा-2 के चूसे जा रहे थे.नीना बस गर्म हुए जा रही थी & अपनी गंद को शीशे पे दबाए जा रही थी.

भैया जी नीचे होते हुए उसकी नाभि चाट रहे थे.उसकी पॅंटी को हाथ लगाते ही नीना का हाथ उनका सर पे आ गया & उनके बाल खींच उठाने की कोशिश करने लगा.भैया जी ने उसकी पॅंटी ज़रा सी नीची की & उसकी चूत की दरार की बिल्कुल शुरुआत पे हल्के से चूमा.ऐसा करते ही नीना की परेशान चूत ने पानी छ्चोड़ दिया.

भैया जी ने फ़ौरन उसकी पॅंटी उतरी & झड़ती हुई नीना की चूत चाटने लगे.नीना की चूत से बह रहे पूरे रस को चाटने के बाद वो खड़े हुए & उसका हाथ अपने पाजामे पे रख दिया तो नीना ने हाथ खींच लिया & चेहरा बाई तरफ घुमा शीशे से लगा लिया.

"पकडो ना!",भैया जी ने खुद ही अपना पाजामा खोला & नीना का दाया हाथ थाम उसे लंड पे लपेट दिया & उसके दाए गाल को चूमने लगे.नीना धीरे-2 शर्म से आँखे बंद कर लंड को हिलाने लगी.भैया जी ने उसे बाहो मे भर लिया & उसके चेहरे को चूमने लगे.नीना के कोमल हाथो मे उनका लंड अब चूत मे घुसने को बेताब हो उठा.भैया जी ने नीना का हाथ लंड से हटाया & उसकी टाँगे फैलाई.

"यहा नही..",नीना ने शरमाते हुए आगे हो उनका बाया कंधा चूम लिया,"..उधर चलिए.",उसने बिस्तर की ओर इशारा किया.

"क्यू?यहा क्या बुराई है?",भैया जी ने टाँगे फैला उसकी चूत मे उंगली की.

"उम्म्म्मम.....लगता है सारा शहर हमे देख रहा है.",उसने नाटक करते हुए शीशे के पीछे दिख रहे डेवाले की ओर इशारा किया तो भैया जी हंस पड़े & उसकी दाई टांग उठा झुक के लंड उसकी चूत मे घुसा दिया.

"ऊव्वववव....आराम से कीजिए..आहह...आन्न्न्नह..उन्हुऊऊन्न्ह..!",भैया जी उसकी जाँघ थामे उसके चेहरे,होंठ & गर्दन चूमते धक्के लगाने लगे.

कुच्छ देर तो भाय्या जी नीना की दाई टांग उठाए खड़े-2 ही उसे चोद्ते रहे.नीना उनकी उपरी बाहे थामे उनसे चुद्ते हुए आहे भर रही थी.उसके बाद भैया जी ने उसकी जाँघो को थाम उसे उठा लिया & फिर खड़े हुए ही उसकी चुदाई करने लगे.नीना उनके गले के गिर्द बाहें डाले उनसे चिपटि उनके धक्को से मस्त हो हवा मे उड़ रही थी.

भैया जी को उसकी गंद को पकड़े उसे चूमते हुए झूलते हुए उसे चोदने मे बड़ा मज़ा आ रहा था.जब नीना के मुँह मे उन्होने अपनी जीभ घुसा तो जिस्म की मदहोशी से बहाल नीना ने भी बड़ी आतूरता से उनसे ज़ुबान लड़ाई.भैया जी का दिल इस बात से और मस्त हो उठा & उनके धक्के और तेज़ हो गये मगर अगले ही पल नीना की मस्ती इस कदर बढ़ गयी को वो उसे झेल नही पाई & उसने किस तोड़ दी & अपना सर उपर हवा मे उठाते हुए उनके बाल नोचते हुए उनकी बाहो मे ही उचकने लगी.

भैया जी समझ गये कि उनकी माशुका झाड़ रही है.उन्होने उसकी गर्दन से अपने तपते होंठ चिपकाए & उसे वैसे ही चोद्ते रहे.नीना जब झड़ने की खुमारी से बाहर आई तो वो उसे लेके सोफे पे बैठ गये & हाथो से उसकी गंद को पकड़ उसे उपर-नीचे करने लगे.

नीना ने फिर से शर्मीली लड़की का नक़ाब अपने चेहरे पे डाल लिया & आगे झुक के अपना चेहरा उनके दाए कंधे पे रख दिया मानो अपने प्रेमी का उसकी गंद को तोलना उसे भा तो रहा है मगर देखने मे उसे लाज आ रही है.भैया जी तो अब पूरी तरह से उसके जाल मे फँस चुके थे.उन्होने उसके गाल को चूमना शुरू कर दिया & उसी सोफे पे लेट गये.

"अब तुम चोदो हमे.",उन्होने नीना को सीधा बिठाया & उसकी चुचि मसली.जवाब मे नीना 1 हया भारी मुस्कान देते हुए उनके सीने पे झुक गयी & अपना चेहरा उनके चेहरे के दाई तरफ सटा के च्छूपा लिया.

"हिलाओ अपनी गंद.",उन्होने उसकी गंद की फांको को दबाते हुए उन्हे फैला दिया.

"मुझे शरम आती है.",नीना का नाटक जारी था.

"अपने पति के साथ ऐसे नही चुदी कभी?",भैया जी ने उसका दाया कान काटते हुए उसकी गंद की दरार पे उंगली फिराई तो नीना चिचुन्क उठी.

"उन..हुंग....वो तो बस उपर से ही करते हैं."

"कमाल है!तुम्हारे जैसी परी को वो अलग अंदाज़ मे नही चोद्ता.मैं तो तुम्हे हर रोज़ नये ढंग से चोद्ता.कभी उपर कभी नीचे..कभी आगे कभी पीछे..",उन्होने उसकी गंद के छेद मे उंगली घुसा दी तो नीना उठ बैठी & उनके उपर से हटने लगी."

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--53

gataank se aage............-

"Chhodiye na..please....aahhhh..koi aa jayega....oohhhh..nahi..aaj nahi..mujhe der ho jayegi..ooww..!",Bhaiya ji use baaho me bhare paglo ki tarah chum rahe the.unke hath nina ki lagbhag nangi pith pe chal rahe the & honth uske khubsurat chehre pe.tabhi lift ka beeper baja to dono alag ho gaye.

teesri manzil pe 1 waiter chadha & dono ke aage khada ho gaya.bhaiya ji nina ki gand sehlane lage to nina ne ghabrate hue arzi bhari nigaho se unhe dekha.dil hi dil me use bahut achha aa raha tha.bhiya ji ne is tarah hotel aake use chaunka diya tha magar ab use is khel me bahut maza aa raha tha.

waiter panchvi manzil pe nikal gaya to bhaiya ji ne use fir se daboch liya.chhathi manzil pe vo use lift se bahar le aaye & galiyare me aage badhne lage,"please Baldev ji..jane dijiye na..!"

"bas thodi der ki hi to baat hai,nina.",bhaiya ji use galiyare ke aakhir me le gaye jaha 2 lifts thi.unhone button dabaya to lift khul gayi.andar jate hi unhone nina ko fir se baaho me bhar liya & uske hotho ko chumne lage.hatho me packet hone ki vajah se nina unhe apne se alag nahi kar paa rahi thi.

bhaiya ji ki aatur zuban uske narm hotho ko mana rahi thi ki vo apni haya chhoden & use andar aane den taki vo uski zuban se mil sake.nina ki na-nukar ke bavjood unhone uske hotho ko mana hi liya & unke khulte hi nina ki narm suban ko apni zuban se chhedne lage.

tabhi beeper baja & darwaza khul gaya to nina ghabra ke unse chhitakne lagi magar unhone use jakde hi raha & lift se bahar aaye.lift seedha a2 maale pe 1 private suite me khuli thi jaha dakhil hote hi bhaiya ji ne uske hatho ke bojh ko halka kiya & use apne seene se laga liya.

uski mansala kamar ko masalte hue co uske gulabi hotho ka ras pine lage,"umm..please samajhiye na!der ho jayegi to main kya jawab dungi?",saiyyad ki qaid me phansi bulbul ke jaisi narm aavaz me bolti nina bhaiya ji ke josh ko pal-2 badha rahi thi.

"meri jaan..",unhone uske gaal chume,"..meri rani..",uski thuddi ko chuma,"..befikr raho..tumhe kya lagta hai ki tumhe khatre me daal main tumhe khone ki bevkufi karunga!kabhi nahi..bas sari badgumani bhul is lamhe ka lutf uthao & mujhe apne husn me doob jane do."

bhaiya ji ne uski kamar ko sehlate hue uski gardan chumte hue uske blouse se jhank rahe bade se cleavage pe jaise hi honth rakhe nina unse chhitak ke door jane lagi ki tabhi jaise kisi chiz ne use roka.usne gardan ghumai to dekha ki bhaiya ji ke hatho me uska aanchal hai.

"chhodiye na!",nina unki or ghumi & daye hath se aanchal ko pakad ke khincha.uska baya hath uski sari se dhanki chut ke bilkul upar tha.bhaiya ji ne use sar se panv tak nihara,masti se tamtamaya uska chehra unhe sharm se laal laga,satin ke sleeveless blouse se chhalak rahi uski chhatiyo ko dekh ke unhone apni zuban ko hotho pe firaya & jab uske chikne pet pe uski gol nabhi ke neeche uska chhota sa gora hath uski chut pe rakha dikha to unke kadam khud ba khud uski or badh gaye.

nina ki sanse tez ho gayi & uska seena bade hi purkashish andaz me lehro ki tarah hilore lene laga.usne nazre neechi kar li.bhaiya ji uske aanchal ko sametate hue uske karib aa rahe the.uske nazdik aa unhone baye hath me uska aanchal ko thama daya hath pakda to anachal farsh pe gir gaya.unhone daye hath se nina ki thuddi upar ki to nina ne sharm ka natak karte hue aankhe band hi rakhi.

bhaiya ji ne uske aanchal ko khincha to nina ko majburan aage aana pada & uska jism apne premi se sat gaya.pet pe unke mote lund ka kadapan mehsus karte hi uski chut kasmasane lagi.bhaiya ji ne nina ki thodi tham uske hotho ko chumna shuru kiya.unka hath sarak ke neeche aaya & uski kamar ko lapet vo use badi shiddat ke sath chumne lage.is baar nina ne unka sath diya & unki jibh ka thodi garmjoshi ke sath istekbal kiya.

uski is harkat se bhaiya ji khushi se pagal ho uthe & unhone uski kamar me atki sari ko nikalne ki koshish ki to nina ne unhe pare dhakela & unki or pith kar khadi ho gayi.bhaiya ji ne use peechhe se tham liya & uske pet ko sehlane lage & uski gardan pe dayi taraf chumne lage.nina ne unke hatho pe apne hath rakh diye mano unhe rokne ki koshish kar rahi ho.

bhaiya ji uski nabhi ko kuredne lage to usne dabi-2 aahen bharni shuru kar di.bhaiya ji samajh gaye ki ab vo mast ho rahi hai.unhone kafi der tak uske pet ke sath khilwad kiya.nina ab unke jism se ad ke khadi thi & hath peechhe le ja unke baalo & chehre ko sehla rahi thi.uski madhoshi ka fayda uthake bhaiya ji ne fauran uski kamar me hath daal uski sari ko nikal diya.nina jaise nind se jagi & chhitak ke thodi door parde ke paas ja khadi hui & bhaiya ji ki taraf sharm,khumari & banawati gusse se dekha.

"kya hua?",bhaiya ji muskuraye.

"aap bade vo hain..",ye ghisa-pita dialogue bolte waqt nina ne kaise khud ko hansne se roka ye vahi janti thi,"..meri sari kyu nikali?"

"to tum bhi humara kurta nikal do.",vo uske samne khade ho gaye & baahe upar kar di,"lo.",nina sharma ke jane lagi to unhone rok ke israr kiya.nina ne sharmate hue nazre neechi rakhte hue unka kurta nikal diya.chhote se kad ki nina jab panjo pe uchak lambe chaude bhaiya ji ka kurta nikaal rahi thi to uski chhatiyo ko dekh ke aisa lag raha tha jaise vo uske blouse se nikalne ko tadap rahi hain.

kurta nikalte hi bhaiya ji ne use seene se laga liya & pyar se uski pith pe hath ferne lage.unke seene pe hath jamaye nina ne chehra bayi or ghuma gaal unke jism se sata diya to bhaiya ji ne uske hath pakad unhe apni kamar pe bandha & use apne agosh me bhar liya.nina ne sharmili ladki ke natak ko jari rakhte hue unke baalo bhare chaude seene me chehra chhupa liya.

"ab kyu itna sharma rahi ho,meri rani?",bhaiya ji ne uske baalo ko chuma.

"to kya aapki tarah besharm ban jaoon?",nina ne unke seene me chehra chhupaye hue kaha.

"pyar me kaisi sharm janeman!",bhaiya ji ne uske petticaot ke hooks ko 1 jhatke me khola to vo uske kadmo ke gird frash pe gir gaya.nina ne seene se sar uthaya & fir gusse se dekha.

"aap samajhte kyu nahi?bahut der ho jayegi!",bhaiya ji maroon panty me kasi uski gand ko daba rahe the.

"koi der-wer nahi hogi.",unhone uski panty me hath ghusa ke uski gand ko dabaya to usne unke hath ko pakad panty se nikal diya.

"sab janti hu.1 baar shuru ho jayenge to fir mujhe bhi pagal kar denge!",nina apni kahi baat pe jaise khud hi sharma gayi & 1 baar fir apne aashiq ke seene me chehra chhupa liya.bhaiya ji hanste hue uski gand sehlane lage.

unke hath upar aaye & nina ke blouse & bra ke hooks kholne lage to nina ne unhe rokna chaha.vi sar jhuka use chumne lage & uske blouse & bra ko nikaalne lage.nina ne ki dayi banh to unke agosh me dabi thi magar bayi ko usne mod apne kapdo ko utarne se rokna chaha to bhaiya ji ne uski manuhar karte hue uske gore galo ko chumte hue uske cleavage pe munh rakh diya.

chhatiyo pe mardane labo ki garmahat ne nina ke armano ko ab bilkul jaga diya & uski banh khud ba khud neechi ho gayi.bhaiya ji ne uske kapde nikale & uski chhatiyo ko chumne lage.nina ki aahe mast hone lagi.bhaiya ji ne bagal ki mez se 1 remote uthake use dabaya to peechhe ka parda hat gaya & 1 floor to ceiling shishe ki deewar dikhi jis se bahar ka nazara dikh raha tha.

nina ki pith unhone us shishe ki deewar se laga di & uski choochiyo ko hatho me bhar chusne lage.nina ke hath unhe rokne ki koshish karte-2 ab bechaini se kharonchne lage the.bhiya ji uski choochiyo ko dekh ke apna hosh kho chuke the & unhe daba-2 ke chuse ja rahe the.nina bas garm hue ja rahi thi & apmni gand ko shishe pe dabaye ja rahi thi.

bhaiya ji neeche hote hue uski nabhi chaat rahe the.uski panty ko hath lagate hi nina ka hath unka sar pe aa gaya & unke baal khinch uthane ki koshish karne laga.bhaiya ji ne uski panty zara si neechi ki & uski chut ki darar ki bilkul shuruat pe halke se chuma.aisa karte hi nina ki pareshan chut ne pani chhod diya.

bhaiya ji ne fauran uski panty utari & jhadti hui nina ki chut chaatne lage.nina ki chut se beh rahe pure ras ko chaatne ke baad vo khade hue & uska hath apne pajame pe rakh diya to nina ne hath khinch liya & chehra bayi taraf ghuma shishe se laga liya.

"pakdo na!",bhaiya ji ne khud hi apna pajama khola & nina ka daya hath tham use lund pe lapet diya & uske daye gaal ko chumne lage.nina dhire-2 sharm se aankhe band kar lund ko hilane lagi.bhaiya ji ne use baaho me bhar liya & uske chehre ko chumne lage.nina ke komal hatho me unka lund ab chut me ghusne ko betab ho utha.bhaiya ji ne nina ka hath lund se hataya & uski tange failayi.

"yaha nahi..",nina ne sharmate hue aage ho unka baya kandha chum liya,"..udhar chaliye.",usne bistar ki or ishara kiya.

"kyu?yaha kya burai hai?",bhaiya ji ne tange faila uski chut me ungli ki.

"ummmmm.....lagta hai sara shehar hume dekh raha hai.",usne natak karte hue shishe ke peechhe dikh rahe Devalay ki or sihara kiya to bhaiya ji hans pade & uski dayi tang utha jhuk ke lund uski chut me ghusa diya.

"ooww...aaram se kijiye..aahhhh...aannnnhhhh..unhuuunnhhh..!",bhaiya ji uski jangh thame uske chehre,honth & gardan chumte dhakke lagane lage.

Kuchh der to Bhaiyya ji Nina ki dayi tang uthaye khade-2 hi use chodte rahe.Nina unki upri baahe thame unse chudte hue aahe bhar rahi thi.uske baad bhaiya ji ne uski jangho ko tham use utha liya & fir khade hue hi uski chudai karne lage.nina unke gale ke gird baahen dale unse chipti unke dhakko se mast ho hawa me ud rahi thi.

bhaiya ji ko uski gand ko pakde use chumte hue jhulate hue use chodne me bada maza aa raha tha.jab nina ke munh me unhone apni jibh ghusai to jism ki madhoshi se behal nina ne bhi badi aaturata se unse zuban ladai.bhaiya ji ka dil is baat se aur mast ho utha & unke dhakke aur tez ho gaye magar agle hi pal nina ki masti is kadar badh gayi ko vo use jhel nahi payi & usne kiss tod di & apna sar upar hawa me uthate hue unke baal nochte hue unki baaho me hi uchakne lagi.

bhaiya ji samajh gaye ki unki mashuka jhad rahi hai.unhone uski gardan se apne tapte honth chipkaye & use vaise hi chodte rahe.nina jab jhadne ki khumari se bahar aayi to vo use leke sofe pe baith gaye & hatho se uski gand ko pakad use upar-neeche karne lage.

nina ne fir se sharmili ladki ka naqab apne chehre pe daal liya & aage jhuk ke apna chehra unke daye kandhe pe rakh diya mano apne premi ka uski gand ko tolna use bha to raha hai magar dekhne me use laaj aa rahi hai.bhaiya ji to ab puri tarah se uske jaal me phans chuke the.unhone uske gaal ko chumna shuru kar diya & usi sofe pe let gaye.

"ab tum chodo hume.",unhone nina ko seedha bithaya & uski chhatiya masli.jawab me nina 1 haya bhari muskan dete hue unke seene pe jhuk gayi & apna chehra unke chehre ke dayi taraf sata ke chhupa liya.

"hilao apni gand.",unhone uski gand ki fanko ko dabate hue unhe faila diya.

"mujhe sharam aati hai.",nina ka natak jari tha.

"apne pati ke sath aise nahi chudi kabhi?",bhaiya ji ne uska daya kaan kaatate hue uski gand ki darar pe ungli firayi to nina chichunk uthi.

"un..hunh....vo to bas upar se hi karte hain."

"kamal hai!tumhare jaisi pari ko vo alag andaz me nahi chodta.main to tumhe har roz naye dhang se chodta.kabhi upar kabhi neeche..kabhi aage kabhi peechhe..",unhone uski gand ke chhed me ungli ghusa di to nina utha baithi & unke upar se hatne lagi."

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kaamuk kahaaniyaan

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 16:03

खेल खिलाड़ी का पार्ट--54

गतान्क से आगे............-

"अरे..तुम तो बुरा मान गयी!",उन्होने उसकी जंघे पकड़ उसे खुद से अलग होने से रोका,"..मैं तो बस छेड़ रहा था..चलो अब नाराज़गी छ्चोड़ो & शुरू करो..करो ना!",भैया जी के काफ़ी इसरार के बाद नीना ने अपनी कमर हिलाना शुरू किया.भैया जी आहे भरते उसकी तारीफ के कसीदे पढ़ते उसकी चूचियो से खेलने लगे.थोड़ी ही देर मे नीना की रफ़्तार बढ़ने लगी & उसकी खुमारी भी.

"उन्ह..उन्न्ह...ऊहह...आननह...!",तेज़ आहे भरते हुए वो अपने आशिक़ के लंड पे उसके सीने को मसल्ते हुए कूद रही थी.खुमारी कुच्छ और बढ़ी तो नीना सर झटकने लगी & भैया जी के सीने को खरोचने लगी.1 बार फिर वो उनके लंड से झाड़ रही थी.झाड़ते ही वो उनके सीने पे गिर गयी & लंबी- साँसे लेने लगी.भैया जी उसकी कमर को थाम नीचे से धक्के लगाने लगे.

"अब हो गया.अब जाने दीजिए ना..ऊव्ववव..!",नीना 1 बार फिर अपनी खुमारी से बाहर आई.

"अभी कैसे जानेमन!अभी तो तुम्हे & मस्त होना है.",भैया जी उचक के उसकी 1 मोटी चूची पीने लगे.

"प्लीज़..अब बहुत देर हो गयी है..मैं क्या जवाब दूँगी..आईययईई....घर पे...उफफफफफ्फ़..!",भैया जी को भी एहसास हुआ कि सच मे काफ़ी वक़्त हो गया था लेकिन वो मजबूर थे.नीना के जिस्म का उनपे अजीब सा नशा चढ़ गया था.चुनाव की वजह से वो बहुत ज़्यादा मसरूफ़ थे मगर फिर भी वो आज उस से मिलने से खुद को रोक नही पाए थे.उन्होने उसकी कमर थामते हुए उसे अपने साथ उठाया & बिस्तर पे ले गये.

अपने नीचे लिटाते हुए उन्होने उसकी चुदाई जारी रखी.जाने देने की मिन्नतो का नाटक करती नीना उनके धक्को से फिर से पागल होने लगी.इस बार उसने अपनी टाँगे उठाके उनकी कमर पे लपेट दी & बेचैनी से अपने हाथ उनकी पीठ पे चलाने लगी.भैया जी उसके मस्ती मे डूबे चेहरे को देखते हुए,चूमते हुए धक्के तेज़ कर रहे थे.उनके आंडो मे वही मीठा दर्द होने लगा जो कल भी नीना की चुदाई करते वक़्त हुआ था.उनके जिस्म मे खुशी के लहर दौड़ पड़ी & वो बहुत शदीद धक्के लगाने लगे.कमरे मे अब दोनो की आहो का शोर फैल गया.दोनो 1 दूसरे को चूम रहे थे,काट रहे थे.उनके हाथ 1 दूसरे के जिस्मो पे बेताबी से घूम रहे थे & नीना के नाख़ून उसके आशिक़ की गंद मे धँस गये थे.वो अब सूबक रही थी.

भाय्या जी ने उसकी गंद को दबोच लिया & अपना सर उठा लिया & आहे भरते हुए धक्के लगाने लगे.नीना भी सुबक्ते हुए कमर उचका रही थी की तभी वो बिस्तर से उठते हुए अपने प्रेमी से चिपक गयी & वो भी उसके उपर झटके खाते हुए झड़ने लगे.दोनो साथ-2 अपने सफ़र के अंजाम तक पहुँच गये थे.

झड़ने के थोड़ी देर बाद ही नीना ने भैया जी को अपने उपर से धकेला & करवट ले तकिये मे मुँह च्छूपा सिसकने लगी.

"अरे,क्या हो गया?",भैया जी उसकी बाँह पकड़ उसका चेहरा अपनी ओर करने की कोशिश करने लगे मगर नीना उनकी ना सुनते हुए सुबक्ते ही रही,"ओफ्फो!चुप हो जाओ,नीना.बताओ तो सही बात क्या है?",इस बार भैया जी ने उसे अपनी ओर घुमा ही लिया.

"कुच्छ नही.मुझे जाने दीजिए.",नीना बिस्तर से आँसू पोन्छ्ते उठने लगी.

"ऐसे कैसे जाने दू!",भैया जी ने नीना की बाँह पकड़ ली,"चलो,बताओ.",नीना रूठने का नाटक करती रही & कुच्छ देर बाद ही मानी.

"आपके लिए तो मैं बस 1 खिलोना हू..",नीना हाथो मे चेहरा च्छूपा सिसकने लगी,"..बस मुझसे खेल लिए.मैं जानती हू आप वो कभी नही करेंगे जिसका भरोसा आपने मुझे दिलाया है!",नीना गुस्से से बोली है.

"ऐसे क्यू सोच रही हो?",भैया जी उसके अचानक बदले रुख़ को समझ नही पा रहे थे & यही तो नीना की चाल थी.वो उन्हे हर वक़्त यू ही उलझाए रखना चाहती थी.

"कल से बस कह रहे हैं कि भैया यानी जेठ जी नही जीतेंगे मगर ऐसा नामुमकिन मुमकिन कैसे होगा ये तो बता नही रहे!"

"तुम जान के क्या करोगी!परेशान क्यू होती हो?..कहा ना हो जाएगा.",भैया जी ने उसे फिर से आगोश मे लेने की नाकाम कोशिश की.

"जाइए!छ्चोड़िए मुझे..समझूंगी कि मेरी बदक़िस्मती थी..लेकिन अब नही मिलूंगी आपसे.",नीना बिस्तर से उतरने लगी तो भैया जी ने उसे खींच के बिस्तर पे लिटा दिया.

"ये क्या हो गया है तुम्हे!",उन्होने उसके चेहरे को सहलाया.वो बहुत परेशान लग रहे थे.नीना को फिर ना च्छू पाने के ख़याल ने उन्हे पागल कर दिया था.

"अच्छा सुनो..",उन्होने उसके बाल सहलाए,"..जसजीत का बेटा अगर चुनाव से पहले मिल जाता है तो वोटर्स सिम्पेथि उसे मिल जाएगी इसलिए बेटा चुनाव के बाद मिले ये ज़रूरी है.मैं इस कोशिश मे लगा हू कि किसी तरह पोलीस से पहले बच्चा मेरे हाथ लग जाए.",भैया जी ने आजतक जो नही किया था वो 1 औरत के जिस्म की हवस मे आज कर दिया.

उनकी कामयाबी का 1 बहुत बड़ा राज़ ये था कि उनके दाए हाथ को नही पता होता था कि बाया क्या कर रहा है.आज तक ना जाने कितनी औरतो को उन्होने चोदा था.राम्या तो उनकी पार्टी की ही थी मगर उसे भी वो कुच्छ नही बताते थे.और तो और उनकी बीवी को कुच्छ नही पता चल पता था क्यूकी उनका नियम था कि अपनी चालें & राज़ किसी को भी ना बताना मगर नीना के जिस्म की वासना मे अंधे हो आज उन्होने अपना ये नियम आज तोड़ दिया था.

"..मैं पोलीस के अपने सूत्रो के ज़रिए ये पता लगाने की कोशिश कर रहा हू.",उन्होने उसकी चूचियो को सहलाया,"..वैसे अभी तक किडनॅपर्स का कुच्छ फोन नही आया ना?"

"नही,और आपने टीवी पे देखा नही क्या?"

"क्या?..वो फोन नंबर?"

"हां."

"हां,तो बात तो जसजीत ही करेगा ना?"

"नही,पोलीस ने किसी प्रोफेसर को ढूंड निकाला है जोकि शायद इस काम का एक्सपर्ट है."

"क्या?",भैया जी चौंक उठे.अपने पोलिसेवाले की खबर लेनी ही पड़ेगी उन्होने सोचा.हर महीने पैसे लेने मे सबसे आगे रहता है,ट्रान्स्फर रुकवाना हो तो दिन-रात उनके पैरो मे बैठा रहता है & इतनी बड़ी बात च्छुपाई!

"हूँ..तो अब तो बता दिया ना मैने कि मैं सब कुच्छ करूँगा उसे हराने के लिए.अब तो नाराज़ नही हो?",नीना ने इनकार मे सर हिलाया & उठ के अपने कपड़े पहनने लगी.भैया जी बिस्तर पे लेटे आगे के बारे मे सोचते रहे.

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अरशद ने अर्म्से डीलर के बताए दिन शाम को उसी नंबर पे फोन किया,"हेलो,मुझे उस आदमी से बात करनी है जो मुझसे डील करेगा.",कॉल लेने वाली ऑपरेटर को पसीना आ गया.वो समझ गयी थी कि सैकड़ो बकवास कॉल्स के बाद अब सही कॉल आई है.

"जी,आप लाइन पे रहिए.",उसने फ़ौरन कॉल फॉर्वर्ड की.

"हेलो.",दिव्या & नामित के साथ बैठ के शाम की चाइ पीते प्रोफेसर ने लपक के पहली ही घंटी पे फोन उठाया.

"अनीश प्रधान हमारे क़ब्ज़े मे है.उसकी सलामती चाह..-"

"1 मिनिट दोस्त,2 दिन से मैं बकवास कॉल्स सुन-2 के पागल हो गया हू.हर कोई कहता है कि उसे अनीश का पता मालूम है.तुम मुझे कल शाम तक इस सवाल का जवाब दे दो & अगर जवाब सही हुआ तो मैं तुम्हारी माँगे उसके पिता तक पहुँचा दूँगा.ओके",प्रोफेसर ने फोन रख दिया.

"आपने फोन रख दिया!",नामित की आँखे हैरत से फटी हुई थी.दिव्या का मुँह भी आश्चर्य से खुला था.

"हाँ,तो क्या तुम्हारी फोर्स के हिम्मती मगर कामकल लोगो से उसे डरा देता क्या!",प्रोफेसर अपनी चाइ ख़त्म करने मे जुट गया.कंट्रोल रूम मे बैठे पोलीस के एक्सपर्ट्स ने 8 सेकेंड के भीतर ही पकड़ लिया था कि कॉल कहाँ एक्सटेन्षन इलाक़े के 1 बूथ से की जा रही थी.15 सेकेंड होते-2 1 बाइक पे नज़दीकी थाने का 1 इनस्पेक्टर तेज़ी से उस बूथ की ओर बढ़ा & 35 सेकेंड होते हुए वाहा पहुँच गया मगर प्रोफेसर ने कॉल 30 सेकेंड मे ही काट दी थी & उन्ही 5 सेकेंड्स मे नकली दाढ़ी-मूँछ & चश्मे मे अरशद वाहा से निकल चुका था.

डीसीपी वेर्मा अपने दोस्त के तरीक़ो से अच्छी तरह से वाकिफ़ थे & अपने डिपार्टमेंट के बाकी लोगो के हैरत & खिज भरे कॉमेंट्स सुन बस मुस्कुरा रहे थे.

"वेर्मा जी,ये क्या बकवास कर रहा है अजिंक्या!",जेसीपी सिंग ने उन्हे अपने कॅबिन मे तलब किया.

"सर,आप परेशान मत होइए.ये उसका तरीका है."

"भाड़ मे गया उसका तरीका!मुझे उस से बात करनी है अभी इसी वक़्त!",वो गुस्से से दहाड़े.

"सर.",वेर्मा जी ने पीच्चे खड़े कॉन्स्टेबल को इशारा किया तो उसने बुंगले पे कॉल लगवाई.

"प्रोफेसर साहब,ज़रा हमे समझाने की तकलीफ़ करेंगे की आपने फोन क्यू काटा?"

"सर,मैं आपका गुस्सा समझ सकता हू मगर पहले आप मेरे 1 सवाल का जवाब दें.आपको बच्चा सही-सलामत चाहिए या नही?"

"हां."

"तो सर,आपको क्या लगता है कि जो आदमी फोन कर रहा था उसने अपने पकड़े जाने की सूरत नही सोची होगी?",अब सिंग साहब सोच मे पड़ गये.

"सर,उसे हम पकड़ लेते मगर शायद बच्चे को खो देते.हम ये ना भूलें तो बेहतर होगा सर की अपने को ख़तरे मे देख ये दरिंदे उस बच्चे की जान लेने मे 1 पल को भी ना हिचकचेंगे.आप परेशान ना हों,वो कल ज़रूर फोन करेगा."

"ठीक है,अजिंक्या.जैसा तुम कह रहे हो वैसा ही हो.",प्रोफेसर बहुत तेज़ दिमाग़ था,ये बात उन्हे माननी ही पड़ी.उसने 1 ही रात मे सारे बग्स नाकाम कर दिए थे & पोलीस को भनक भी नही लगी थी.अब आज बुंगले से बाहर निकला ही नही कि उन बग्स को ठीक किया जा सके.उन्हे हँसी भी आई.

"क्या हुआ,सर?",अपने सीनियर को चुप-चाप ऐसे हंसते देख वेर्मा साहब थोड़ा चिंतित हो गये.उन्होने काम के दबाव मे कयि लोगो को दिमागी बीमारियो से जूझते देखा था.

"हूँ..कुच्छ नही.यू मे गो नाउ."

"सर."

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अनीश का डर अब थोड़ा कम हो गया था.वो आदमी उस से कुच्छ नही बोलता था मगर हर बार खाना बहुत बढ़िया होता था.उसे पता नही था कि वाहा कितने लोग थे क्यूकी बस अरशद ही उसके कमरे मे आता था.उसने अभी तक बस सुना ही था किडनॅपिंग्स के बारे मे आज वो खुद 1 शिकार था.उसे पहले लगता था कि बहुत डर लगता होगा मगर नही डर से ज़्यादा उसे बोरियत हो रही थी.उसे पता था कि उसके पापा किडनॅपर्स की माँग पूरी कर उसे घर ले ही जाएँगे.

तभी दरवाज़ा खुला & वाइटबोर्ड लिए नक़ाबपोश अरशद अंदर आया,"तुम अंकुर से अपने चॉक्लेट्स कहा च्छूपाते हो?",अनीश को सवाल पढ़ के रोना आ गया.घर पे हर वक़्त वो अंकुर से लड़ता रहता था.उसे अपना बल्ला या कोई भी समान नही च्छुने देता था & पिच्छले 2 दिनो से वो मम्मी के साथ-2 सबसे ज़्यादा उसे ही मिस कर रहा था....पर अंकुर भी तो बहुत शरारती था..हमेशा उसके हिस्से के चॉक्लेट्स खा जाता था..तभी तो वो उन्हे.."अपने बाथरूम के सबसे उपर के शेल्फ पे शॅमपू & पॉडर की बॉटल्स के पीछे 1 डब्बे मे.",उसका जवाब सुन अरशद बाहर आया.

"बोल दिया उसने ?",दस्ताने पहने बी & डी ताश खेल रहे थे.

"हां.",उसने धीरे से कहा & बोर्ड रख दिया,"..1 घंटे मे आप दोनो फ्री हो जाएँगे.खाना खा के आराम कर लेना फिर 3 बजे से आप ही को जागना है."

"ठीक है."

"आपकी बाँह कैसी है अब?",जवाब मे बालू ने पूरी बाँह उपर उठा दी & मुस्कुराया तो अरशद भी मुस्कुरा के वाहा से चला गया.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--54

gataank se aage............-

"are..tum to bura maan gayi!",unhone uski janghe pakad use khud se alag hone se roka,"..main to bas chhed raha tha..chalo ab narazgi chhodo & shuru karo..karo na!",bhaiya ji ke kafi israr ke bad nina ne apni kamar hilana shuru kiya.bhaiya ji aahe bharte uski tarif ke kaside padhte uski choochiyo se khelne lage.thodi hi der me nina ki raftar badhne lagi & uski khumari bhi.

"unhhh..unnhhh...oohh...aannhhhh...!",tez aahe bharte hue vo apne aashiq ke lund pe uske seene ko masalte hue kud rahi thi.khumari kuchh aur badhi to nina sar jhatakne lagi & bhaiya ji ke seene ko kharochne lagi.1 baar fir vo unke lund se jhad rahi thi.jhadte hie vo unke seene pe gir gayi & lumbi- sanse lene lagi.bhaiya ji uski kamar ko tham neeche se dhakke lagane lage.

"ab ho gaya.ab jane djiye na..oow.!",nina 1 baar fir apni khumari se bahar aayi.

"abhi kaise janeman!abhi to tumhe & mast hona hai.",bhaiya ji uchak ke uski 1 moti choochi peene lage.

"please..ab bahut der ho gayi hai..main kya jawab dungi..aaiyyyeeee....ghar pe...uffffff..!",bhaiya ji ko bhi ehsas hua ki sach me kafi waqt ho gaya tha lekin vo majbur the.nina ke jism ka unpe ajib sa nasha chadh gaya tha.chunav ki vajah se vo bahut zyada masruf the magar fir bhi vo aaj us se milne se khud ko rok nahi paye the.unhone uski kamar thamte hue use apne sath uthaya & bistar pe le gaye.

apne neeche litate hue unhone uski chudai jari rakhi.jane dene ki minnato ka natak karti nina unke dhakko se fir se pagal hone lagi.is baar usne apni tange uthake unki kamar pe lapet di & bechaini se apne hath unki pith pe chalane lagi.bhaiya ji uske masti me dube chehre ko dekhte hue,chumte hue dhakke tez kar rahe the.unke ando me vahi mitha dard hone laga jo kal bhi nina ki chudai karte waqt hua tha.unke jism me khushi ke lehar daud padi & vo bahut shadeed dhakke lagane lage.kamre me ab dono ki aaho ka shor fail gaya.dono 1 dusre ko chum rahe the,kaat rahe the.unke hath 1 dusre ke jismo pe betabi se ghum rahe the & nina ke nakhun uske aashiq ki gand me dhans gaye the.vo ab subak rahi thi.

bhaiyya ji ne uski gand ko daboch liya & apna sar utha liya & aahe bharte hue dhakke lagane lage.nina bhi subakte hue kamar uchaka rahi thi ki tabhi vo bistar se uthate hue apne premi se chipak gayi & vo bhi uske upar jhatke khate hue jhadne lage.dono sath-2 apne safar ke anjam tak pahunch gaye the.

Jhadne ke thodi der baad hi Nina ne Bhaiya ji ko apne upar se dhakela & karwat le takiye me munh chhupa sisakne lagi.

"are,kya ho gaya?",bhaiya ji uski banh pakad uska chehra apni or karne ki koshish karne lage magar nina unki na sunte hue subakte hi rahi,"offoh!chup ho jao,nina.batao to sahi baat kya hai?",is baar bhaiya ji ne use apni or ghuma hi liya.

"kuchh nahi.mujhe jane dijiye.",nina bistar se aansu ponchhte uthne lagi.

"aise kaise jane du!",bhaiya ji ne nina ki banh pakad li,"chalo,batao.",nina ruthne ka natak karti rahi & kuchh der baad hi mani.

"aapke liye to main bas 1 khilona hu..",nina hatho me chehra chhupa sisakne lagi,"..bas mujhse khleiye.main janti hu aap vo kabhi nahi karenge jiska bharosa aapne mujhe dilaya hai!",nina gusse se boli hai.

"aise kyu soch rahi ho?",bhaiya ji uske achanak badle rukh ko samajh nahi pa rahe the & yehi to nina ki chaal thi.vo unhe har waqt yu hi uljhaye rakhna chahti thi.

"kal se bas keh rahe hain ki bhaiya yani jeth ji nahi jitenge magar aisa namumkin mumkin kaise hoga ye to bata nahi rahe!"

"tum jaan ke kya karogi!pareshan kyu hoti ho?..kaha na ho jayega.",bhaiya ji ne use fir se agosh me lene ki nakam koshish ki.

"jaiye!chhodiye mujhe..samjhungi ki meri badkismati thi..lekin ab nahi milungi aapse.",nina bistar se utarne lagi to bhaiya ji ne use khinch ke bistar pe lita diya.

"ye kya ho gaya hai tumhe!",unhone uske chhere ko sehlaya.vo bahut pareshan lag rahe the.nina ko fir na chhu pane ke khayal ne unhe pagal kar diya tha.

"achha suno..",unhone uske baal sehlaye,"..Jasjit ka beta agar chunav se pehle mil jata hai to voters symapthy use mil jayegi isliye beta chunav ke baad mile ye zaruri hai.main is koshish me laga hu ki kisi tarah police se pehle bachcha mere hath lag jaye.",bhaiya ji ne aajtak jo nahi kiya tha vo 1 aurat ke jism ki hawas me aaj kar diya.

unki kamyabi ka 1 bahut bada raaz ye tha ki unke daye hath ko nahi pata hota tha ki baya kya kar raha hai.aaj tak na jane kitni aurato ko unhone choda tha.Ramya to unki party ki hi thi magar use bhi vo kuchh nahi batate the.aur to aur unki biwi ko kuchh nahi pata chal pata tha kyuki unka niyam tha ki apni chaalen & raaz kisi ko bhi na batana magar nina ke jism ki vasna me andhe ho aaj unhone apna ye niyam aaj tod diya tha.

"..main police ke apne sutro ke zariye ye pata lagane ki koshish kar raha hu.",unhone uski chhatiyo ko sehlaya,"..vaise abhi tak kidnappers ka kuchh fone nahi aya na?"

"nahi,aur aapne tv pe dekha nahi kya?"

"kya?..vo fone number?"

"haan."

"haan,to baat to jasjit hi karega na?"

"nahi,police ne kisi Professor ko dhund nikala hai joki shayad is kaam ka expert hai."

"kya?",bhaiya ji chaunk uthe.apne policevale ki khabar leni hi padegi unhone socha.har mahine paise lene me sabse aage rehta hai,transfer rukwana ho to din-raat unke pairo me baitha rehta hai & itni badi baat chhupai!

"hun..to ab to bata diya na maine ki main sab kuchh karunga use harane ke liye.ab to naraz nahi ho?",nina ne inkar me sar hilaya & uth ke apne kapde pehanane lagi.bhaiya ji bistar pe lete aage ke bare me sochte rahe.

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Arshad ne armse dealer ke bataye din sham ko usi number pe fone kiya,"hello,mujhe us aadmi se baat karni hai jo mujhse deal karega.",call lene vali operator ko paseena aa gaya.vo samajh gayi thi ki saikdo bakwas calls ke baad ab sahi call aayi hai.

"ji,aap line pe rahiye.",usne fauran call forward ki.

"hello.",Divya & namit ke sath baith ke sham ki chai peete professor ne lapak ke pehli hi ghanti pe fone uthaya.

"Anish Pradhan humare kabze me hai.uski salamti chah..-"

"1 minute dost,2 din se main bakwas calls sun-2 ke pagal ho gaya hu.har koi kehta hai ki use anish ka pata malum hai.tum mujhe kal sham tak is sawal ka jawab de do & agar jawab sahi hua to main tumhari mange uske pita tak phuncha dunga.ok",professor ne fone rakh diya.

"aapne fone rakh diya!",namit ki aankhe hairat se phati hui thi.divya ka munh bhi aashcharya se khula tha.

"haan,to kya tumhari force ke himmati magar kamakl logo se use dara deta kya!",professor apni chai khatm karne me jut gaya.control room me baithe police ke experts ne 8 second ke bhitar hi pakad liya tha ki call Kanha Extension ilake ke 1 booth se ki ja rahi thi.15 second hote-2 1 bike pe nazdiki thane ka 1 inspector tezoi se us booth ki or badha & 35 second hote hue vaha pahunch gaya magar professor ne call 30 second me hi kaat di thi & unhi 5 seconds me nakli dadhi-munchh & chashme me arshad vaha se nikal chuka tha.

DCP Verma apne dost ke tariko se achhi tarah se vakif the & apne department ke baki logo ke hairat & khij bhare comments sun bas muskura rahe the.

"Verma ji,ye kya bakwas kar raha hai Ajinkya!",JCP Singh ne unhe apne cabin me talab kiya.

"sir,aap pareshan mat hoiye.ye uska tarika hai."

"bhaad me gaya uska tarika!mujhe us se baat karni hai abhi isi waqt!",vo gusse se dahade.

"sir.",verma ji ne peechhe khade constable ko ishara kiya to usne bungle pe call lagwayi.

"professor sahab,zara hume samjhane ki taklif karenge ki aapne fone kyu kata?"

"sir,main aapka gussa samajh sakta hu magar pehle aap mere 1 sawal ka jawab den.aapko bachcha sahi-salamat chahiye ya nahi?"

"haan."

"to sir,aapko kya lagta hai ki jo aadmi fone kar raha tha usne apne pakde jane ki surat nahi sochi hogi?",ab singh sahab soch me pad gaye.

"sir,use hum pakad lete magar shayad bachche ko kho dete.hum ye na bhulen to behtar hoga sir ki apne ko khatre me dekh ye darinde us bachche ki jaan lene me 1 pal ko bhi na hichkchenge.aap pareshan na hon,vo kal zarur fone karega."

"thik hai,ajinkya.jaisa tum keh rahe ho vaisa hi ho.",professor bahut tez dimagh tha,ye baat unhe maanani hi padi.usne 1 hi raat me sare bugs nakaam kar diye the & police ko bhanak bhi nahi lagi thi.ab aaj bungle se bahar nikla hi nahi ki un bugs ko thik kiya ja sake.unhe hasni bhi aayi.

"kya hua,sir?",apne senior ko chup-chap aise hanste dekh verma sahab thoda chintit ho gaye.unhone kaam ke dabav me kayi logo ko dimaghi bimariyo se jujhte dekha tha.

"hun..kuchh nahi.you may go now."

"sir."

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anish ka darr ab thoda kam ho gaya tha.vo aadmi us se kuchh nahi bolta tha magar har baar khana bahut badhiya hota tha.use pata nahi tha ki vaha kitne log the kyuki bas arshad hi uske kamre me aata tha.usne abhi tak bas suna hi tha kidnappings ke bare me aaj vo khud 1 shikar tha.use pehle lagta tha ki bahut darr lagta hoga magar nahi darr se zyada use boriyat ho rahi thi.use pata tha ki uske papa kidnappers ki mang puri kar use ghar le hi jayenge.

tabhi darwaza khula & whiteboard liye naqabposh arshad andar aaya,"TUM ANKUR SE APNE CHOCOLATES KAHA CHHUPATE HO?",anish ko sawal padh ke rona aa gaya.ghar pe har waqt vo ankur se ladta rehta tha.use apna balla ya koi bhi saman nahi chhune deta tha & pichhle 2 dino se vo mummy ke sath-2 sabse zyada use hi miss kar raha tha....par ankur bhi to bahut shararati tha..humesha uske hisse ke chocolates kha jata tha..tabhi to vo unhe.."apne bathroom ke sabse upar ke shelf pe shampoo & poder ki bottles ke peechhe 1 dabbe me.",uska jawab sun arshad bahar aaya.

"bol diya usne ?",dastane pehne B & D tash khel rahe the.

"haan.",usne dhire se kaha & board rakh diya,"..1 ghante me aap dono free ho jayenge.khana kha ke aaram kar lena fir 3 baje se aap hi ko jagna hai."

"thik hai."

"aapki banh kaisi hai ab?",jawab me Balu ne puri banh upar utha di & muskuraya to arshad bhi muskura ke vaha se chala gaya.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........