जुली को मिल गई मूली compleet

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raj..
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Re: जुली को मिल गई मूली

Unread post by raj.. » 11 Oct 2014 03:57

मैने महसूस किया कि उनका कड़क लॉडा मेरी नन्ही सी चूत खत खता रहा है. मैने देखा कि हालाँकि उनकी कमर नही हिल रही थी पर उनका लंबा लंड उपर-नीचे हो रहा था. मैं उस समय ये नही जान पाई कि उनका लंड अपने आप कैसे हिल रहा है पर अब जानती हूँ कि ये तो नॅचुरल है. एक खड़ा हुआ लंड इसी तरह हिलता है और नाचता है. मैं सोच रही थी कि चाचा मुझे चोद क्यों नही रहे है, चोद्ने मे इतना समय क्यों लगा रहे है. मैं आपे से बाहर होने लगी चुदाई करवाने के लिए मैने अपना हाथ उनके लंड पर रखा. ओह., माइ गॉड, वो बहुत ही कड़क था. एक दम लोहे की रोड जैसा. मैने पहली बार एक लंड को हाथ लगाया था. पहली बार किसी मर्द का लंबा, मोटा, कड़क और गरम खड़ा हुआ लंड मेरे हाथ मे था और मैं सोच रही थी कि अब क्या करूँ उस लंड का. मैने एक बार मा को पापा का लॅंड पकड़े हुए देखा था. मैने भी वैसा ही किया. मैने उनके लंड को ज़ोर से, टाइट पकड़ लिया. उनकी आँखें आनंद से बंद हो गई. मीं चाचा के लंड को देख नही पा रही थी क्यों कि हम एक दूसरे से चिपके हुए बैठे थे. वो थोड़ा सरके और बिस्तर पर उपर होकर पीछे तकिया लगा कर बैठ गये. उन्होने अपनी टांगे सीधी करली थी. उनका लंबा लंड हवा मे खंबे की तरह नाच रहा था.

उन्होने मुझे नज़दीक खींचा और मैं अपने पैर फोल्ड करके उनकी कमर के पास बैठ गई तो उन्होने अपना लंड फिर से मुझे दिया. क्या शानदार लंड था उनका. मैने फिर से उनका लंड अपने हाथ मे पकड़ा. उनका लंड इतना लंबा था कि मेरा एक हाथ आधे से भी कम लंड को कवर कर रहा था. उनका लंड नीचे से मेरे हाथ मे था और उपर का भाग अभी भी मेरी पकड़ के बाहर था. मैने देखा उनके लंड के चारों तरफ छ्होटे छ्होटे काले बाल थे. उन के लंड का मुँह गुलाबी था और कुछ पानी जैसे कलर का चिकना रस उनके लंड के मुँह से बाहर आ रहा था. हालाँकि वो मेरे चाचा थे पर जिस हालत मे हम उस समय थे, मैने सारी शरम छ्चोड़ दी. मैं चुदाई को पूरा समझना चाहती थी. मैने उनसे पूछा " पापा का लंड आप के लंड से अलग कैसे दिखता है ? उन के लंड के आगे का भाग दिखता है पर आप के लंड पर पूरी चॅम्डी है ? ऐसा क्यो ?"

चाचा मुस्काराए और उन्होने मुझे अपना लंड उपर से टाइट पकड़ कर नीचे करने को कहा. मैने वैसा ही किया. मैं हैरान हो गई कि उनकी चॅम्डी जो कि पूरे लंड को कवर थी, अब नीचे आ गई है और उनके लंड का गुलाबी सूपड़ा अब साफ साफ दिख रहा है, बिल्कुल मेरे पापा के लंड जैसा. मेरे ऐसा करने पर उनके लंड से निकलने वाला रस मेरे हाथ पर लग गया और मैने उसको अपनी नाक के पास ले जा कर सूँघा. बहुत ही प्यारी खुसबू आ रही थी उनके लंड रस की. उन्होने मुझे उसको टेस्ट करने को कहा. मैने टेस्ट किया. बहुत ही स्वदिस्त था उनका लंड रस. मुझे पसंद आया. उन्होने मुझे बताया कि लंड के उपर की चॅम्डी अपने आप नीचे हो जाती जब ये चूत मे जाता है. कुछ लोग तो उपर की चॅम्डी को अलग अलग रीज़न्स से कटवा लेटें है. मैं समझ गई. उन्होने आगे बताया कि हर मर्द चाहता है की उसकी साथी लड़की/औरत उसके लंड को मुँह मे ले और उसको मज़ा दे. मैने कहा... " हां. मैने बहुत बार देखा है कि मा ने पापा का लंड मुँह मे लिया है, पर मुँह मे लेने के बाद क्या करते है?" वो मुस्कराए और बोले " मेरी नन्ही डार्लिंग, तुम को अभी बहुत कुछ सीखना है. मैं तुम को सब सिखाउन्गा और एक पर्फेक्ट चुदाई एक्सपर्ट बना दूँगा. मेरे लंड को अपने मुँह मे लो और उसी तरह चूसो जिस तरह तुम ने मेरी चुचि को चूसा था. हम दोनो को मज़ा आएगा."

मैने उनका लंड अपने मुँह मे लेने की कोशिश की तो उनका लंबा और मोटा लंड थोड़ा सा ही मेरे मुँह मे आया. मुझे वो गरम लगा. मैं उसको चूसने लगी और वो और कड़क होता गया. कुछ देर बाद वो बोले कि मैं उनकी जगह बैठ जाऊ और अपने पैर उपर करके, घुटने मोड़ कर चौड़े करलूँ. वो मेरे चौड़े किए हुए पैरों के बीच मे आए और और उनकी आँखें चौड़ी हो गई मेरी नन्ही सी, कुँवारी, प्यारी सी, टाइट और गुलाबी बिन चुदी चूत को देख कर. मेरी चूत पर तब बाल नही आए थे. उन्होने कहा " मेरी जान, मैं पहली बार एक कुँवारी, बिन चुदी, बिना बालों की टाइट चूत देख रहा हूँ. तुम्हारी चूत भी तुम्हारी तरह बहुत सुंदर है. मेरी किस्मत अच्छी है कि पहली बार मैं तुम को चोदुन्गा. मैने सपने मे भी ऐसी प्यारी चूत नही देखी है. तुम को खुद को पता नही है कि तुम्हारी चूत कितनी प्यारी और सुंदर है. तुम्हारी गंद भी कितनी प्यारी है और मैं तो पागल हुआ जा रहा हूँ."

उन्होने अपना हाथ बढ़ाया और मेरी चूत के होठों को छुआ. मेरे बदन मे करेंट सा दौड़ गया. मैं ऐसी पोज़िशन मे थी कि मैं अपनी चूत सॉफ देख पा रही थी और ये भी देख रही थी कि चाचा क्या कर रहें है. उन्होने अपनी उंगली मेरी चूत के बीच मे रखी और उसको नीचे से उपर की तरफ ले गये. ऐसे पहले आंजेलीना ने भी किया था और मैने खुद कई बार किया था पर जो सुख मुझे अभी मिल रहा था एक मर्द के हाथों से मेरी चूत पर, वो मैं लिख नही सकती. मेरे लिए ये एक नया और मज़ेदार अनुभव था. वो अपनी उंगली मेरी चूत के बीच मे तेज़ी से फिराने लगे और मैं गरम होती चली गयी. मेरी कमर उनकी उंगली के फिरने के साथ साथ उपर नीचे होने लगी थी. मेरी चूत से लगातार चूत रस निकल रहा था जिस से चाचा को मेरी चूत के बीच मे उंगली घुमाने मे आसानी हो रही थी. उन्होने महसूस किया था कि मैं काफ़ी गरम हो चुकी हूँ और झरने वाली हूँ. उन्होने अपनी उंगली मेरी चूत के बीच मे से निकाल ली और अपने होंठ रख दिए मेरी गरम और गीली चूत पर.

वो मेरी चूत चाटने लगे और मेरी चूत का रस भी. उन्होने धीरे से अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर डाली और उसको अंदर बाहर करने लगे. मैं बहुत गरम हो चुकी थी और वो मेरी चूत को अपनी जीभ से चोद रहे थे. मेरी कमर उपर - नीचे ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी. और.......... और... अचानक मैं झर गई. मैं वहाँ पहुँच चुकी थी जहाँ आनंद ही आनंद होता है. मैने अपने पैर टाइट कर लिए थे. उनकी गर्दन मेरे पैरों के बीच मे थी और वो मेरी चूत का रस लगातार पिए जा रहे थे, चाट ते जा रहे थे मेरी बिना चुदी चूत को.

मैने धीरे से अपनी पकड़ ढीली की और फिर से पैर चौड़े कर लिए. वो मेरी चूत का सारा रस चाट चुके थे और मेरी चूत बाहर से बिल्कुल सॉफ हो चुकी थी. उन्होने मेरी तरफ देखा और मेरी आँखों मे चुदाई की चमक देख कर बोले " जूली, मैं जानता हूँ कि तुम जल्दी से जल्दी चुद्वाना चाहती हो पर मुझे तुम्हारा पूरा पूरा ख़याल रखना है. तुम्हारी चूत छ्होटी सी है और कुँवारी है. मेरा लंड तुम्हारी बिन चुदी छोटी सी चूत के लिए काफ़ी लंबा औट मोटा है. तुम को पता नही है कि ये इतना आसान नही है जैसे कि तुम्हारे पापा तुम्हारी मा को चोद्ते हैं. तुम को बहुत दर्द होने वाला है. मैं कोशिश करूँगा कि तुम को कम से कम तकलीफ़ हो और ज़्यादा से ज़्यादा मज़ा आए. दर्द तो होगा, लेकिन सिर्फ़ पहली बार. उस के बाद तुम बिना दर्द के चुदाई का मज़ा ले सकती हो. क्या तुम एक दर्द भरी चुदाई के लिए तय्यार हो?" तो दोस्तो आपने देखा कैसे चाचा इस कमसिन जुली को चोदने की तैयारी कर रहा है क्या ये चुदाई सपूर्ण हो पाएगी आपका दोस्त राज शर्मा

क्रमशः…………………

raj..
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Re: जुली को मिल गई मूली

Unread post by raj.. » 12 Oct 2014 03:27

जुली को मिल गई मूली—4

गतान्क से आगे……………………………..

मैं पूरी तरह उनकी बात को समझ नही पाई. ये तो मैं उनका लंबा और मोटा लंड देखते ही जान गई थी कि उस लंड का पूरा मेरी छोटी सी चूत मे जाना मुश्किल है, पर मैं ये नही जानती थी कि ये इतना दर्द भरा होगा जैसे कि वो बता रहे थे. खैर, चुदाई तो करवानी ही थी, मैने उनको आँखों ही आँखो मे चोद्ने का इशारा किया. मैं चुद्वाने के लिए पूरी तरह तय्यार थी. मेरी पहली चुदाई होने वाली थी.

उन्होने बेड के कोने मे रखी जेल्ली की ट्यूब को उठाया और उसे खुद लंड पर लगाया. फिर उन्होने बहुत सारी जेल्ली मेरी चूत पर लगाई. मैं उनको ये सब करते हुए देख रही थी. उन्होने अपनी उंगली की सहायता से मेरी चूत के होल मे लगाई. उन्होने मुझे अपने लंड पर क्रीम मलने को कहा तो मैने बहुत सारी क्रीम उनके खड़े हुए लंड पर अपने दोनो हाथो से लगाई.

मैं अपनी पीठ के बल बिस्तर पर अपनी टाँगे चौड़ी कर के लेटी थी और अपनी चुदाई का इंतेज़ार कर रही थी. वो मेरी दोनो टाँगों के बीच मे बैठ गये और उनका मोटा ताज़ा लंड उनके हाथ मे था. उन्होने अपने लंड का टोपा मेरी चूत के दरवाजे पर लगाया तो मैं सिहर उठी. क्या गजब का एहसास था. लंड मेरी चूत के दरवाजे पर खड़ा था. मैने मुस्करा के चाचा की तरफ देखा तो वो भी मुस्काराए. उन्होने कहा " अपनी साँस रोक लो मेरी नन्ही चूत वाली, मैं अपने लंड को तुम्हारी छ्होटी सी चूत मे डालने जा रहा हूँ. थोडा दर्द होगा पर आवाज़ मत करना नही तो भाई - भाभी जाग जाएँगे."

और उन्होने अपने लंड को मेरी चूत के दरवाजे पर थोड़ा दबाया. थोड़ा दर्द तो हुआ मुझे और लगा कि उनके मोटे और लंबे लंड का थोडा हिस्सा मेरी चूत के अंदर गया है. उन्होने थोडा और ज़ोर लगाया तो मुझे दर्द ज़्यादा होने लगा. मैने अपना सिर उपर कर के देखा तो पाया कि अभी तो उनके लंबे लंड का मुँह ही मेरी चूत मे गया है. बाकी का सारा का सारा लंड तो अभी बाहर ही है. अब मेरी समझ मे आया कि वो बार बार दर्द की बात क्यों कर रहे थे. अभी तो उनके लंबे लंड का सिर्फ़ थोड़ा सा अगला भाग ही अंदर गया है और मुझे इतना दर्द हो रहा है, पूरा लंड अंदर जाने पर तो शायद मेरी छोटी सी चूत फट ही जाएगी और मैं सिर्फ़ दर्द का अंदाज़ा ही लगा सकती थी. उन्होने कहा " अब सावधान जूली डार्लिंग, अपने होंठ मजबूती से बंद कर्लो और बहुत ज़्यादा दर्द सहन करने के लिए तय्यार हो जाओ. तुम्हारी चूत क्यों कि कुँवारी है इस लिए दर्द भी होगा और खून भी निकलेगा. घबराओ मत, तुम्हारी चूत फटने वाली नही है, जब किसी कुँवारी लड़की की सील टूट ती है तो खून निकलता है. लेकिन ये दर्द और खून सिर्फ़ पहली बार मे ही होता है. फिर चुदाई का मज़ा ही मज़ा आता है."

मैने अपने होंठ मजबूती से बंद कर लिए और उनके लंड का अपनी चूत पर धक्के का इंतेज़ार करने लगी. मैं अपनी पहली चुदाई के लिए पूरी तरह तय्यार थी. आज तो चुदना ही है. उन्होने ज़ोर लगाना चालू किया और उनका लंड धीरे धीरे मेरी छ्होटी सी चूत मे जाने लगा. दर्द भी बढ़ता गया. और वो थोडा रुके. कहा कि " अब जाता हूँ मैं अंदर, तय्यार हो जाओ."

उन्होने अपना लंड थोड़ा सा बाहर निकाला और एक जोरदार धक्का मारा. उनका लंड इस धक्के से मेरी चूत के अंदर काफ़ी घुस गया और मेरे मुँह से चीख निकलने वाली थी दर्द के मारे, तो उन्होने अपना हाथ मेरे मुँह पर रख कर मेरी चीख को अंदर ही रोक दिया. ओह मेरी मा....... मरगई मैं तो दर्द के मारे. मेरा मुँह तो बंद कर्दिया था चाचा ने और मेरी आवाज़ नही निकल रही थी पर दर्द के मारे मेरी आँखों से आँसू बहने लगे. बहुत ही ज़्यादा दर्द हो रहा था मेरी चूत मे और लगता था कि चाचा ने मेरी चूत अपने मोटे और लंबे लंड से फाड़ कर दो भागों मे कर्दिया है. मैं तो मर ही गयो थी दर्द के मारे. ओह मेरी मा........ ओह भगवान.......... ऐसी भी क्या चुदाई जिसमे जान निकल जाए. मेरा दर्द बढ़ता ही जा रहा था और मुझे लगा कि आज तो मैं चुदाई का मज़ा लेने की बजाय मर ही जाओंगी. वो तो अच्छा था कि चाचा ने अपने लंड का और धक्का नही मारा. चाचा मेरे पर झुके और मेरे गाल पर किस किया क्यों कि मेरे होंठो पर तो उनका हाथ था. मैने अपनी आँखों से उनको अपना लंड बाहर निकालने की रिक्वेस्ट की. वो मेरे कान मे धीरे से बोले " ओके डार्लिंग. मैं अपना लंड बाहर निकाल रहा हूँ. रोना बंद करो और अपने मुँह से आवाज़ मत निकालना. मेरा विश्वास करो डियर, सब ठीक है और सब ठीक होगा."

मैने अपना हाथ नीचे ले जा कर चेक किया तो पाया कि उनका करीब आधा लंड मेरी चूत मे घुस चुका है और आधा अभी भी बाहर है. मैं सोच रही थी कि अगर पूरा ही घुसा देते तो मैं तो मर ही जाती. मैने अपनी उंगलियों पर कुछ महसूस किया, चिप चिपा सा कुछ, और हाथ उपर कर के देखा तो वो खून था. लाल और गाढ़ा खून जो मेरी चूत से निकल रहा था. वो बोले " मैने कहा था कि थोड़ा खून निकलेगा. ये तुम्हारी कुँवारी सील का खून है. लेकिन चिंता मत करो. अभी सब ठीक हो जाएगा. मैं हाथ हटाता हूँ तुम्हारे मुँह पर से, आवाज़ मत करना. मैं अपना लंड भी बाहर निकाल रहा हूँ. ओके ? कंट्रोल करो डार्लिंग."

मैने अपना सिर हिलाया तो उन्होने अपना हाथ मेरे मुँह पर से हटा लिया और मेरे होंठो पर अपने गरम गरम होंठ रख दिए और मेरे होंठो को धीरे धीरे चूसने लगे. किस करते हुए मैने फील किया कि वो अपना लंड भी मेरी खून भरी चूत से बाहर निकाल रहें है. मेरा दर्द कुछ कम हुआ और मैने रोना बंद कर्दिया था पर मेरी आँखों से अभी भी पानी निकल रहा था. उन्होने किस पूरा किया और बोले " हम थोड़ी देर रुकतें है तब तक तुम्हारा दर्द भी कम हो जाएगा. उस के बाद तुम को भी चुदाई का मज़ा आएगा."

मैने कहा " नही चाचा. कोई चुदाई नही अब. आप ने तो लगता है मेरी चूत ही फाड़ दी है. इतने दर्द मे, खून निकलती हुई चूत मे क्या मज़ा आएगा चुदाई का?"

वो मुश्कराए और कहा " थोड़ी देर रुकतें है डियर. लंड भी मैने बाहर निकाल लिया है. केवल मेरे लंड का टोपा अंदर है तुम्हारी चूत के. तुम खुद देख लो."

मैने चेक किया तो पाया कि वो सच बोल रहें है. मेरा दर्द थोड़ा सा कम हुआ था. धीरे धीरे मेरा दर्द काफ़ी कम हो गया था. हम करीब 15 मिनिट उसी पोज़ीशन मे पड़े रहे.

फिर उन्होने कहा " सुरू करें? दर्द तो थोड़ा फिर से होगा तुम को पर तुम को मज़ा आना भी सुरू हो जाएगा तो तुम दर्द को भूल जाओगी और कुछ देर बाद दर्द नही रहेगा. सिर्फ़ मज़ा और मज़ा रहेगा."

मैं थोड़ा हिचकिचाई पर मुझे चाचा पर पूरा विस्वास था कि वो सब अच्छी तरह ही करेंगे. मैने अपनी मुस्कान से उनकी बात का जवाब दिया.

उन्होने अपना लंड एक बार पूरा बाहर निकाला और फिर से मेरी चूत के दरवाजे पर रख कर एक हल्का सा धक्का दिया. लंड थोड़ा सा मेरी चूत मे गया. फिर से उन्होने लंड थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर से एक धक्का मारा. मुझे दर्द तो हो रहा था पर ज़्यादा नही. वो अपने लंड को इसी तरह अंदर बाहर करने लगे धीरे धीरे. अब मुझे भी थोड़ा थोड़ा मज़ा आने लगा था. उन्होने लंड की धक्का मारने की स्पीड बढ़ा दी तो मेरा मज़ा भी बढ़ने लगा. उन का लंड मेरी चूत मे रगड़ ख़ाता हुआ अंदर जा रहा था और बाहर आ रहा था और मैं अपना दर्द भूलने लगी और चुदाई का मज़ा लेने लगी. अब मज़ा ज़्यादा था और दर्द कम. चाचा ने ठीक ही कहा था. मैं चुद रही थी वो मज़ा ले रही थी जो मैने पहले कभी नही लिया था. मेरी कुँवारी चूत मेरे चाचा के द्वारा चोदि जा रही थी.

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Re: जुली को मिल गई मूली

Unread post by raj.. » 12 Oct 2014 03:28

चाचा थोड़ा रुके और कहा " अब कैसा लग रहा है जूली. अभी भी मैने अपना पूरा लंड तुम्हारी चूत मे नही डाला है. अभी तक मैं अपना आधा लंड अंदर डाल कर ही तुम्हारी चूत चोद रहा हूँ. क्या तुम और ज़्यादा मेरा लंड अपनी चूत के अंदर ले सकती हो ? तुम को मज़ा आएगा."

मैने कहा " हां चाचा. और अंदर डालो लेकिन धीरे धीरे. दर्द मत करना, अभी ही तो मज़ा आना सुरू हुआ है."

अब चाचा के धक्के ज़रा ज़ोर ज़ोर से लगने लगे थे और मैने फील किया कि उनका लॅंड काफ़ी अंदर तक मेरी चूत मे जा रहा है और अंदर किसी ऐसी जगह से टकरा रहा है जहाँ से मुझे वैसा मज़ा आ रहा था जो मैने पहले कभी नही पाया था. इसी तरह धक्का लगाते लगाते उन्होने अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत मे उतार दिया था. वो बोले " जूली, तुम्हारी चूत छोटी ज़रूर है पर देखो, मेरा पूरा लंड ले लिया. मैने अपना हाथ नीचे अपनी चूत पर ले जा कर चेक किया तो पता लगा कि जब भी चाचा धक्का लगाते थे, उनका लंबा और मोटा लंड पूरी तरह मेरी चूत मे घुस रहा था. उनके लंड के नीचे की गोलियाँ मेरी गंद को लग रही थी जब भी वो धक्का लगाते थे. मुझे अब दर्द नही हो रहा था और मैं महसूस कर रही थी कि जैसे मैं स्वर्ग की सैर कर रही हूँ जहाँ मेरे चोदु चाचा ले गये है. चाचा इसी तरह धक्के पे धक्का लगाते रहे और अपनी स्पीड बढ़ाते गये. मेरा बदन अकड़ने लगा और मैं अपने झड़ने की मंज़िल की तरफ बढ़ने लगी. चाचा समझ गये कि मैं झड़ने वाली हूँ. वो बोले " डार्लिंग, तुम्हारा लगता है होने वाला है पर मुझे थोड़ा टाइम और लगेगा. मैं तुम्हारा होने के बाद रुक जाऊ या चालू रखूं."

मैने कहा " चाचा, जब तुम मुझे इतना मज़ा दे रहे हो चुदाई का तो मैं भी तुम्हे पूरा मज़ा देना चाहती हूँ."

और मेरा बदन अब टाइट होने लगा और....... और........ अचानक मैं झाड़ गई. मैने वो पाया जो पहले कभी नही मिला था. झड़ी तो मैं कई बार थी अपनी चूत मे उंगली करके पर इस बार जो चुदाई मे झड़ी थी वो मज़ा मैं सिर्फ़ महसीस कर सकती हूँ , लिख नही सकती. चाचा मुझे लगातार चोद रहे थे ज़ोर ज़ोर से धक्का लगाते हुए, अपने लंबे और मोटे खंबे जैसे लंड को मेरी चूत मे अंदर बाहर करते हुए. अचानक वो रुक गये और उन्होने अपना लंड मेरी चूत मे गहराई तक घुसा दिया. मैने फील किया कि मेरी छूट मे कुछ गरम गरम हो रहा है. ऐसे लगता था जैसे कोई गरम पानी का फव्वारा मेरी चूत मे छ्चोड़ रहा है. मैं समझ गई कि चाचा भी झाड़ चुके है और अपना लंड रस मेरी चूत मे डाल रहें है. वो मेरे उपर मुझसे चिपक कर लेटे थे और उनका लंबा मोटा लंड मेरी चूत मे नाचता हुआ अपना रस बरसा रहा था.

चाचा मेरे उपर लेटे हुए थे मुझ को ख़ुसी मे कस कर पकड़े हुए. मैं बहुत खुस थी कि मुझे जिंदगी मे पहली बार किसी मर्द से चुदाई करवाने का पूरा पूरा मज़ा मिला था. मेरी चूत मे फिर से थोड़ा थोड़ा दर्द होना सुरू हो गया था जो कि मेरे चाचा ने महसूस किया. उन्होने मेरे होंठो का चुंबन लिया और कहा " धन्यवाद मेरी छ्होटी डार्लिंग जूली अपनी कुँवारी चूत देने के लिए और मुझे मौका देने के लिए कि मैं तुम्हे लड़की से औरत बना सका."

और उन्होने धीरे से मेरी चूत से अपना लंड निकाल लिया. मैने देखा कि उनका लंड पूरा खून मे सना था. खून के साथ और भी सफेद सफेद सा लगा हुआ था उनके लंड पर. मैं जान गई थी कि वो सफेद सफेद सा उनके लंड का रस है जो मेरी चूत मे उन्होने छोड़ा था. मैने देखा कि हालाँकि उनका लंड अब भी उतना ही बड़ा था जीतना चोद्ते समय था पर वो अब उतना कड़क नही रहा था. थोड़ा मुलायम हो गया था. उनके लंड का मुँह नीचे की तरफ था जो कि चोद्ते वक़्त उपर था. मेरी चूत मे दर्द फिर बढ़ना सुरू हो गया था.

मैने देखा कि बेडशीट पर भी लाल लाल धब्बा लगा हुआ था. मेरी चूत के खून के साथ उनके लंड रस का धब्बा. उन्होने बेड शीट खींच ली बेड से तो मैने पाया कि गद्दे पर भी लाल धब्बा था. उन्होने अपना खून और लंड रस से भरा हुआ लंड चादर से पोंच्छा और मेरी चूत का बाहरी भाग भी उसी चादर से साफ किया. फिर उन्होने वो चादर एक प्लास्टिक की बॅग मे डाल दी. मेरी चूत का दर्द और भी बढ़ गया जब उन्होने उसको चादर से साफ किया था. मैं बड़ी मुश्किल से खड़ी हुई पर मैं बिल्कुल भी चल नही पाई. मेरी चूत से खून और उनका लंड रस अभी भी निकल रहा था और मैं बाथरूम जाकर मेरी चूत को सॉफ करना चाहती थी. चाचा मुश्कराए और उन्होने मुझे अपने हाथों मे एक बच्चे की तरह उठा लिया और बाथरूम की तरफ बढ़े. उन्होने मुझे बाथ टब के अंदर खड़ा किया और बोले " मैं तुम्हारी हेल्प करता हूँ सफाई करने मे."

उन्होने हॅंड शवर चालू किया और मुझे पैर चौड़े करने के लिए कहा. हॅंड शवर से उन्होने मेरी चूत पर पानी डाला तो मुझे बहुत अच्छा लगा. फिर उन्होने अपने हाथ का इस्तेमाल करके मेरी चूत और पैर पूरी तरह सॉफ कर्दिये. मैने उन्हे साबुन लगाने को कहा तो उन्होने मना कर्दिया और कहा कि अगर इस समय साबुन लगाया तो बहुत दर्द और बहुत जलन होगी. फिर वो भी बाथ टब के अंदर आ गये और और अपना लंड साबुन और शवर के पानी से सॉफ किया. हम बाथ टब से बाहर आए और अपना नंगा बदन टवल से पोंच्छा. उन्होने फिर से मुझे अपने हाथों मे उठाया और बेडरूम मे ले आए. उन्होने मुझे एक कुर्सी पर बिठाया और बिस्तर को पलंग पर पलट दिया.

अब मेरी चूत के खून का धब्बा बिस्तर पर नही दिख रहा था. वो बिस्तर के पलटने से नीचे छुप गया था. उन्होने एक नई चादर निकाली और उसको बिस्तर पर लगाया. उन्होने फिर से मुझे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया. थोड़ा ठीक लग रहा था पर चूत मे दर्द अभी भी हो रहा था. वो वाइन की बॉटल लाए और दो ग्लास मे डाली वाइन एक ग्लास मुझे थमाया. मैने अभी तक कभी वाइन नही पी थी. एक कॅतोलिक होने के नाते हमारे घर पर वाइन होना या पीना आम बात थी पर मैने अभी तक टेस्ट नही की थी. वो बोले " ये प्योर् इटॅलियन रेड वाइन है. नुकसान नही करती है. पी लो. तुम्हे दर्द से आराम मिलेगा. मैं तो तुम्हारी चूत को भी ये वाइन पिलाने वाला हूँ." और वो हंस पड़े. मैने सोचा शायद मज़ाक कर रहें है. उन्होने कुछ कॉटन ( रूई) ली और उसको वाइन मे डुबोया. फिर वो बोले" थोड़ी जलन होगी पर जल्दी ही सब ठीक हो जाएगा."

उन्होने मुझे मेरे पैर चौड़े करने को कहा और मेरे ऐसा करने पर मेरी चूत की तरफ देखते हुए बोले, "थोड़ी सूजन है, कोई सीरीयस बात नही है." उन्होने वाइन मे डूबा कॉटन मेरी चूत मे डाल दिया और मुझे पैर सीधे करने को कहा. उन्होने मुझे सहारा दे कर बेड पर पीछे तकिया लगा कर दीवार के सहारे बिठा दिया. मैं आराम से बैठी हुई थी. मेरी चूत मे थोड़ा दर्द और थोड़ी जलन हो रही थी. जलन शायद वाइन से हो रही थी जो अब मेरी चूत के अंदर तक जा चुकी थी. लेकिन धीरे धीरे मुझे काफ़ी ठीक लगने लगा. चाचा ने मेरा वाइन ग्लास मुझे दिया और अपना ग्लास ले कर मेरे पास मेरे जैसे ही बैठ गये.

वो बोले " चियर्स!! मेरी जूली की पहली चुदाई के नाम. और ऐसी ही कई और चुदाई के नाम जो आने वाले समय मे होने वाली है. तुम्हारे चोदु चाचा की तरफ से ऑल दा बेस्ट." मैने भी कहा " चियर्स !! मेरे चोदु चाचा के नाम."

मैं वाइन पीते हुए उनका लंड देख रही थी. उनका लंड अब कोई चूहे जैसा लग रहा था जो उनकी गोलियों पर बैठा था. अब मुझे सब पता है लेकिन उस समय मैं इस के बारे मैं पूरी तरह नही जान ती थी. कारण कि मैने तब तक सिर्फ़ दो ही लंड देखे थे, एक अपने पापा का और दूसरा अपने चोदु चाचा का और दोनो को ही तने हुए, खड़े हुए देखा था. मैने कभी भी किसी लंड को उसकी नॉर्मल पोज़िशन मे आज के पहले नही देखा था. पहले मैं सोचती थी कि मर्द का लंड हमेशा ही खड़ा रहता है और तब मैने कई बार अपने पापा के लंड को उनकी पॅंट के अंदर देखने की कोशिश की थी और मैं समझ नही पाई थी कि अपने लंबे लंड को वो कैसे च्छूपाते थे पॅंट के अंदर. खड़े हुए लंड का उभार मुझे कभी भी उनकी पॅंट के उपर से नज़र नही आया था. मैं लगातार चाचा के बैठे हुए लंड की ओर देखे जा रही थी और सोच रही थी कि शायद ये मर्द के बस मे होता होगा कि जब चाहे खड़ा कर लिया और जब चाहे बिठा लिया.

मैने अपना एक हाथ बढ़ा कर उनके लंड को पकड़ा. उसको मेरी उंगलियों के बीच मसला, ओह........ क्या मस्त फीलिंग्स थी मेरी. ये तो बहुत ही नरम था, बिल्कुल मेरी चुचियों की तरह, सच कहूँ तो मेरी चुचियों से भी मुलायम. मैने जब चाचा से पूछा कि आप इसको जब चाहे लंबा और जब चाहे छोटा बना सकते है, तो वो धीरे से हँसे लगे. फिर उन्होने मुझे असली बात समझाई कि मर्द का लंड कैसे और कब खड़ा होता है और कैसे बैठता है. मर्द के लंड के खड़ा होने के पीछे उसकी चुदाई की सोच होती है. फिर उन्होने एक बहुत ही मज़े दार बात कही " ये लंड एक ऐसी चीज़ है दुनिया मैं जो सबसे हल्की भी है और सब से भारी भी. हल्की इसलिए कि सिर्फ़ सोच से खड़ा हो जाता है और सबसे भारी इसलिए कि जब खड़ा नही होता तो दुनिया की कोई ताक़त इसको पकड़ कर या उठा कर खड़ा नही कर सकती." दोस्तो ये बात सही है या ग़लत आप ही बताइए आपका दोस्त राज शर्मा

क्रमशः…………………