हिन्दी में मस्त कहानियाँ

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rajaarkey
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Re: हिन्दी में मस्त कहानियाँ

Unread post by rajaarkey » 01 Nov 2014 07:27


मैं बहुत खुश हो गयी . मैंने आवाज़ लगा कर कहा :- अरी मेरी बुर चोदी सोफिया जल्दी आ न ? तू क्या अपनी झांटें गिन रही है बैठे बैठे ?
वह बोली :- नहीं मेरी माँ की लौड़ी मोनिका ? लो देखो मैं आ गयी .
मैं बोली ;- सुन, आज रात भर तेरा भोषडा चुदवाऊँगी मैं ? वह ख़ुशी के मारे उछल पड़ी .
शाम को निकोलस आ गया . हम तीनो बैठ कर व्हिस्की पीने लगे . इतने में किसी ने नॉक किया . मैंने दरवाजा खोला तो देखा की सामने दो लड़के खड़े है . उन्हें देख कर सास बोलीं अरी मोनिका मैंने इन्हे बुलाया है इनको भी व्हिस्की में शामिल करो . मैंने कहा ये कौन लोग है सोफिया ? उसने मेरे कान में कहा ये दोनों मेरी बहू की बुर चोदने आये है . यह सुनकर मेरे तन बदन की आग और भड़क गयी . मैंने कहा तो फिर खुल कर बताओ न सबको ? तब वह बोली यह है मैथ्यू और यह है जैकी . दोनों जॉनसन के स्टूडेंट्स है . ये दोनों आज तेरी बुर चोदेंगे मोनिका ?
सब लोग एकाएक हंस पड़े ?
मेरी और मेरी सास का मन बस निकोलस के लण्ड पर रखा था . जबसे उसकी तारीफ सुनी तबसे हम दोनों कि चूत में आग लगी हुई है . अब तो मर्द और सामने है इनके लौड़ों के बारे में अभी कुछ भी नहीं मालूम . खोल कर देखूँगी तब पता चलेगा . अचानक निकोलस बोला सोफिया भाभी ज़रा कुछ डांस हो जाये ? मैंने म्यूज़िक ऑन कर दिया और डांस शुरू हो गया . सास तो निकोलस के सामने नाचने लगी और मैं उन दोनों के सामने . मेरी चूंचियां मुझसे ज्यादा नाच रही थी , मेरी सास की चूंचियां तो मुझसे बड़ी है . मैंने कहा सोफिया बुर चोदी तेरी गांड से ज्यादा तेरी चूंचियां झूम रही है . वह बोली तू भी हिला न भोसड़ी वाली अपनी चूंचियां . तेरी भी तो बड़ी बड़ी हो गयी है . तू तो रोज़ ही मर्दों नोचवाती है अपनी चूंचियां ? फिर हमारी निगाहें मर्दों के लौड़ों पर टिक गयी . मैंने कहा साला कोई लौड़ा अभी तक बाहर नहीं आया ? तब तक मेरी जींस की दोनों बटन खुल गयी और मेरी छोटी छोटी झांटे दिखने लगी . मेरी आधी गांड भी दिखने लगी . मैं मस्त होकर नाच रही थी . एकाएक मेरी जींस नीचे गिर पड़ी . इतने में जैकी से उसे दूर फेंक दिया और बोला भाभी तेरी चूत बड़ी प्यारी लग रही है . मैथ्यू बोला हां भाभी तेरी गांड भी बड़ी मस्त है . मेरा लौड़ा खड़ा हो गया साला . मैं बोली मुझे कैसे की तेरा लौड़ा खड़ा हो गया खोल के दिखाओ न मादर चोद . ऐसा कह कर मैंने उसकी पैंट खींच ली और कर दिया उसे नंगा ? उसका लौड़ा भी बहन चोद नाचने लगा . मैं मुड़ी तो देखा की मेरी सास तो निकोलस अंकल का लौड़ा चूस रही है . मुझे जोश आ गया और मैंने मैथ्यू को भी नंगा किया और उसका लौड़ा हिलाने लगी .
नज़र मेरी तीनो लण्ड पर थी पर मुझे वाकई निकोलस का लण्ड बड़ा लगा . लेकिन मुझे इन दोनों के लण्ड भी मज़ा दे रहे थे . मैं कभी मैथ्यू का लण्ड चूसती कभी जैकी का लण्ड ? दोनों के सुपाड़े बड़े जबर्दस्त थे . एकदम चिकने चिकने लाल टमाटर जैसे . मैंने मैथ्यू को नीचे लिटा दिया और झुक कर उसका लण्ड चूसने लगी . मेरी गांड उठी हुई थी . जैकी ने पीछे से लण्ड मेरी बुर में ठोंक दिया . वो चोदने लगा और मैं चुदाने लगी . इतने में मेरे कानों में सासू की आवाज़ पड़ी . वह बोल रही थी अबे मादर चोद तूने एकदम से पेल दिया इतना बड़ा लौड़ा ? माना की मेरा भोसड़ा बड़ा है लेकिन हाथी का लौड़ा खाने के लिए तो नहीं है न माँ के लौड़े निकोलस ? तेरी माँ की चूत साले ठीक से चोद . पहले धीरे से पेल दे पूरा लौड़ा और फिर धक्के मारना शुरू कर ? इतनी सी बात नहीं मालूम तझे बहन चोद ? हां अब ठीक है . अब गांड से जोर लगा भकाभक चोदो . जैसे तू कैंडी की बुर चोदता है .कैंडी की माँ का भोसड़ा चोदता है . आज पहली बार हम सास बहू एक साथ चुदवा रही थी .
सास बोली :- मोनिका तू तो बहुत बढ़िया चुदवा लेती है बुर चोदी ?
मैं बोली :- हां मेरी माँ की लौड़ी सोफिया पर मैं चुदवाना तुमसे सीख रही हूँ आज . मेरी माँ भी इसी तरह चुदवाती है . थोड़ी देर में सोफिया ने निकोलस का लौड़ा अपने बुर से निकाल कर मेरी बुर में घुसा दिया . और मेरी बुर से मैथ्यू का लौड़ा खींच कर अपनी बुर में पेल लिया . ठीक वैसे ही जैसा मेरी माँ करती है . हम दोनों ने लण्ड अदल बदल कर चुदाना शुरू किया तो मज़ा दोगुना हो गया .
दूसरे दिन जब मैं ऑफिस गयी तो शाम को आते वख्त मेरा बॉस मुझसे बातें करने लगा .
वह बोला:- मोनिका अपनी सास की बुर दिलाओ यार , मैंने जबसे उसे देखा है , तबसे उसे चोदने का मन कर रहा है . तुम्हे तो मैं कभी भी चोद लेता हूँ पर तेरी सास को चोदना रोज़ रोज़ तो होगा नहीं ?
मैंने वही कह दिया अच्छा आज शाम को ८ बजे आ जाना . तो वो तो आता होगा . आज चुदेगा तेरा भोसड़ा ? यह बात मैंने सास को जोर से कह कर बताई .
वह दौड़ी दौड़ी मेरे पास आयी और बोली क्या आज तुम मेरा भोसड़ा चुदाओगी . तुम मेरी बुर में लण्ड पेलोगी . तो मैं क्या ऐसे ही पेलवा लूंगी ? अरी मेरी भोषड़ी वाली मोनिका मैं भी आज घुसाऊँगी तेरी चूत में अपने दोस्त जॉनसन का लण्ड . उसने फोन कर कर के मेरी गांड में दम कर रखा है . हर बार कहता है कि अपनी बहू की बुर मुझे दो . मैं चोदूंगा उसे . मैं उसकी बुर लूँगा . मैं उसे लौड़ा चुसाऊँगा . उससे बात करते करते मेरी गांड फटी जा रही है . अब तू जल्दी से चुदवा ले और फ़ड़वा ले अपनी बुर जॉनसन से तो मेरी गांड बचे ? वैसे मैंने आज ही उसे बुला लिया है . वो अभी आता ही होगा . तैयार हो जा तू चुदाने के लिए ? मैंने कहा मैं कोई कमजोर नहीं हूँ , मैं हमेशा तैयार रहती हूँ सोफिया ? तुम जब चाहो तब और जिसका चाहो उसका लण्ड पेल दो मेरी बुर में ?
थोड़ी देर में जॉनसन आ गया और उसके थोड़ी देर बाद विक्रम मेरा बॉस भी आ गया . मैंने दोनों का आपस में परिचय कराया और फिर ड्रिंक्स का दौर चलने लगा . बात चीत होने लगी ,
मैंने अपने बॉस विक्रम से कहा :- देखो सर तुम तो मुझे जब कब चोद्ते रहते हो आज मैंने तुम्हे अपनी सास का भोसड़ा चोदने के बुलाया है . और जॉनसन अंकल तुम मेरी सास चोदते रहते हो . पर आज मेरी सास ने तुम्हे मेरी बुर चोदने के लिए बुलाया है . अब यह बताओ कि तुम दोनों एक ही कमरे में चोदोगे कि अलग अलग कमरे में ? विक्रम बोला :- यार मैं तो ग्रुप में चोद कर ज्यादा मज़ा लेता हूँ .
जॉनसन बोला :- मैं भी ग्रुप में चोदने का खिलाडी हूँ .

बस फिर क्या एक ही कमरे में मैं जॉनसन से चुदवाने लगी और मेरी सास विक्रम से चुदवाने लगी . हम दोनों ने एक दूसरे को देख देख कर खूब मस्ती से रात भर चुदवाया .


=०=०=०=०=०=०=०=०=०=०=०=०=०=०=०=०=०=० समाप्त

The Romantic
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Re: हिन्दी में मस्त कहानियाँ

Unread post by The Romantic » 14 Dec 2014 13:34

सबिहा और सेल्समैन

लेखक:- अन्जान

सबिहा: (फोन पर अपने शौहर से बात करते हुए) क्या, तुम्हें कुछ दिन और दुबई में रहना पड़ेगा?



रिज़वान: हाँ यार, रहना तो पड़ेगा, काम ही इतना ज़रूरी है। दो महीने और लग जायेंगे।



सबिहा: क्या दो महीने और! प्लीज़ यार, मैं तो अकेले बिलकुल बोर हो चुकी हूँ।



रिज़वान: और मेरा हाल तो तुम पूछो मत। रात को नींद भी नहीं आती तुम्हारे बिना।



सबिहा: रात को नींद तो मुझे भी नहीं आती आज कल।



रिज़वान: हाँ सिर्फ़ तुम्हारे बारे मे सोचता रहता हूँ और प्लान बनाता रहता हूँ की घर आने पर तुम्हारे साथ क्या-क्या करूँगा।



सबिहा: अच्छा तो बताओ क्या-क्या करोगे?



रिज़वान: वो तो सरपराईज़ ही रहने दो अभी। फिलहाल तो मैं मुठ मार के ही काम चला रहा हूँ।



सबिहा: चल झूठे। तुमने कोई लडकी फँसा ली होगी अब तक।



रिज़वान: अभी तक तो नहीं मगर वो जो मेरा दोस्त बिलाल रहता है ना यहाँ? उसकी बीवी ज़हरा मेरे को लाईन देती रहेती है।



सबिहा: अरे वाह तो तुम्हारी तो ऐश है। तो तुम भी लाईन दो ना।



रिज़वान: तुम्हे बुरा नहीं लगेगा?



सबिहा: नहीं इतने दिन हो गये हैं, मैं समझती हूँ की तुमसे नहीं रहा जा रहा होगा।



रिज़वान: और तुम? तुम कैसे काबू करती हो अपने आप को?



सबिहा: हा.. हा… हा… मैं भी अपनी अँगुली या बैंगन, खीरे वगैरह से अपनी चूत के साथ थोड़ा खेल लेती हूँ रात को सोने से पहेले।



रिज़वान: तो तुम भी कोई ढूँढो ना अपने टाइम पास के लिये।



सबिहा: तुम्हें अच्छा लगेगा?



रिज़वान: हाँ मुझे ज़हरा के साथ चुदाई करने में और भी मज़ा आयेगा जब मैं सोचूँगा की तुम भी वहाँ किसी स्टड के साथ मजे ले रही हो।



सबिहा: ठीक है, तो मैं भी ढूँढती हूँ कोई।



रिज़वान: हाँ फिर हम दोनों फोन पर एक दूसरे को अपना अपना एक्सपीरियंस बतायेंगे। बहुत मज़ा आयेगा।



सबिहा: इससे हमारे रिश्ते मे कोई दिक्कत तो नहीं आ जायेगी?



रिज़वान: अरे नहीं पगली, बल्कि हमारा रिश्ता और गहरा हो जायेगा।



सबिहा: सच?



रिज़वान: हाँ बिलकुल। और सोचो जब हम मिलेंगे और अपने साथ हुए तजुर्बों को एक दूसरे को तफसील से एकटिंग कर के बयान करेंगे को हमारी चुदाई कितनी धमाकेदार होगी।



सबिहा: (हँसते हुए) हैवान कहीं के!



रिज़वान: अरे मेरी जान, हैवानियत तो मैं तुम्हे मिलने पर दिखाऊँगा जब तब तुम मुझे किसी स्टड को सिड्यूस करने वाली घटना बताओगी।



सबिहा: और तुम भी मेरा सेक्स की प्यासी शेरनी वाली सूरत देखोगे जब तुम मुझे बताओगे कि तुमने ज़हरा को कैसे अपने साथ चुदाई के लिये राज़ी किया।



रिज़वान: ठीक है, आइ मिस यू! बॉय!



दो दिनों बाद, सबिहा बाज़ार से शॉपिंग करके लौटी थी और नींबू के साथ वोडका का तगड़ा सा पैग बना कर चुसकियाँ ले रही थी। उसका इरादा एक-दो पैग पीने के बाद अपने कपड़े उतार कर बिस्तर में जा कर कोई ब्लू-फिल्म देखते हुए अपनी चूत को मोटे से केले से चोदने का था। एक पैग खत्म करने के बाद सबिहा दूसरा पैग बनाने के लिये उठी ही थी कि उसे दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ आयी।



सबिहा: अरे ये कौन आ गया? चलो देखा जायेगा... अच्छा हुआ अभी मैंने कपड़े नही उतारे थे।



सबिहा मार्बल के फर्श पर अपने सैंडल की हील खटखटाती बेमन से दरवाज़े की तरफ बढ़ी। उसने दरवाज़ा खोला तो एक लगभग २० साल के नौजवान और गठीले लड़के को खडा पाया। उसे देखते ही सबिहा के शरीर मे एक लहर सी दौड़ गयी।



सबिहा: जी कहिये?



सेल्समैन: गुड मार्निंग मैडम! मैं अपनी कम्पनी के समान का प्रचार कर रहा हूँ।



सबिहा: अच्छा, क्या बेच रहे हो?



सेल्समैन: जी हमारी कम्पनी लेडीज़ पैन्टीज़ और ब्रा बनाती है।



सबिहा: अच्छा, तो फिर तुम्हारी कम्पनी सेल्स गर्ल्ज़ को क्यों नहीं भेजती बेचने के लिये?



सेल्समैन: जी मैडम, आज कल की लेडीज़ तो हेन्डसम सेल्समैन की ही डिमान्ड करती हैं। अगर आप को कोई ऐतराज़ है तो मैं चला जाता हूँ और कल किसी सेल्स गर्ल को भेज दूँगा।



सबिहा: नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, मुझे तुम से कोई प्राब्लम नहीं है।



सेल्समैन: वैरी गुड। थैंक यू मैडम!



सबिहा: आओ इधर बैठ जाओ। पानी पियोगे या वोडका...?



सेल्समैन: जी नहीं, थेन्क यू।



सबिहा: कितने सालों से तुम ये काम कर रहे हो?



सेल्समैन: दो साल हो गये हैं लगभग।



सबिहा: (हँसते हुए) तो काफ़ी एक्सपीरियंस है!



सेल्समैन: जी हाँ।



सबिहा: तो फिर तो तुम काफ़ी लेडीज़ को खुश कर चुके हो... हा। हा। हा।



सेल्समैन: (थोड़ा शर्माते हुए) जी हाँ कस्टमर्स.. ऑय मीन लेडीज़ को खुश करना ही मेरा काम है।



सबिहा: चलो देखते हैं। मेरी पसन्द थोडी हट के है।



सबिहा ने अपने लिये दूसरा पैग तैयार किया और फिर एक सिप ले कर बोली।



सबिहा: वैसे एक बात तुमने सही कही थी की तुम्हारी कम्पनी के सेल्समैन हेन्डसम हैं।



सेल्समैन: थेन्क यू वेरी मच।



सबिहा: चलो तो दिखाओ अपना सामान।



सेल्समैन: जी??? जी अच्छा मगर पहले बताइये कि आप का साईज़ क्या है। दर असल सारे गार्मेन्ट्स मेरी गाड़ी मे बक्सों मे पड़े हैं और मैं ठीक साईज़ वाला बक्सा निकाल के ले आऊँगा।



सबिहा: (नासमझी की एकटिंग करते हुए) किस का साईज़?



सेल्समैन: आप कौन सा ब्रा साईज़ और कौन सा पैन्टी साईज़ पहनती हैं?



सबिहा: मेरे खयाल से ब्रा साईज़ थर्टी-सिक्स है। अच्छा देखतें हैं तुम कितने अच्छे सेल्समैन हो। मुझे देख कर बताओ मेरा साईज़ क्या होगा?



सेल्समैन: (सबिहा के बूब्स को घूरते हुए) जी मेरे खयाल से थर्टी-फोर होना चाहिये। आप कहें तो मैं नाप के बताऊँ?



सबिहा: हाँ नाप के देखो।



सेल्समैन ने इंची टेप को सबिहा की पीठ के दोनो तरफ़ से कन्धों के नीचे से घुमा कर उसके बूब्स के नीचे दोनो सिरों को जोड दिया। उसकी अँगुलियाँ सबिहा के बूब्स को हल्के से छूईं और साईज़ पढने के लिये वो अपना मुँह टेप के बिल्कुल पास ले आया। सबिहा ने उसकी गरम साँसें अपने बूब्स पर महसूस कीं और उसी समय यह तय कर लिया की रिज़वान के साथ बनाये प्लैन को वो आज हकीकत में बदल देगी।



सेल्समैन: आपका अंदाज़ा बिलकुल सही था। आपका साईज़ थर्टी-सिक्स ही है।



सेल्समैन: अच्छा मैडम, आपको अपना कप साईज़ तो मालुम होगा?



सबिहा: (जानबूझ कर) नहीं, मुझे नहीं मालुम।



सेल्समैन: तो फिर आप अपना कोई पुराना ब्रा दे दीजिये। मैं देख कर पता लगा लूँगा।



सबिहा: नहीं, मेरे पुराने ब्रा मे कोई भी ऐसा नहीं है जो मुझे बिलकुल फ़िट आता हो, तुम अपने हाथों से नाप के ही देख लो ना।



सेल्समैन: (थोडे आश्चर्य के साथ) ज..जी.. मैडम?



सबिहा का दूसरा पैग भी करीब-करीब खत्म होने आया था और उसे हल्का सा मीठा सुरूर महसूस हो रहा था। जो थोड़ी बहुत हिचकिचाहट थी वो भी दूर हो गयी थी।



सबिहा: सॉरी अगर मैं तुम्हें अन-कमफरटेबल कर रही हूँ तो। मेरे शौहर मुल्क के बहार गयें हैं और मैं बोर हो रही थी, इसलिये तुम्हें जल्दी जाने देना नहीं चाहती।



सेल्समैन: आप चिंता मत करो। आप जब तक चाहें मैं यहीं आप के साथ रहुँगा। अच्छा कितने दिनों से बाहर हैं आप के हस्बैंड?



सबिहा: तीन महीने हो गयें हैं और अभी दो-तीन महीने और लगेंगे।



सेल्समैन: ओ माई गाड! ये तो बहुत लम्बा टाईम है!



सबिहा: हाँ! अब तो हद हो गयी है। आखिर मेरी भी कुछ ज़रूरतें हैं।



सेल्समैन: जी मैं समझ सकता हूँ।



सबिहा: तुम्हारी शादी हुई है?



सेल्समैन: जी अभी तो मैं काफी छोटा हूँ शादी के लिये।



सबिहा: कोई गर्लफ़्रेन्ड?



सेल्समैन: नहीं वो भी नहीं।



सबिहा: तो फिर तुम कुछ नहीं समझ सकते। वैसे तुम जैसे हेन्डसम लडके की कोई गर्लफ़्रेन्ड कैसे नहीं है?



सेल्समैन: जी मेरे पास टाईम ही नहीं है। दिन में मैं कालेज जाता हूँ और शाम को मैं ये पार्ट टाईम जाब करता हूँ।



सबिहा: ओके समझी। चलो छोडो… ले लो मेरा नाप।



सेल्समैन: जी अच्छा।



सेल्समैन सबिहा के करीब आया और इंची टेप को सबिहा की पीठ के दोनो तरफ़ से कन्धों के नीचे से घुमा कर इस बार उसके बूब्स की गोलाइयों के साईज़ का अंदाज़ा लगाने की कोशिश करने लगा।



सबिहा: (हल्की से मुस्कुराहट देते हुए) अगर तुम दूर से इतनी लूज़ली साईज़ नापोगे तो कैसे पता चलेगा?



सेल्समैन: (अब कम भय के साथ) आप ठीक कह रहीं हैं मैडम।



सेल्समैन ने अब अपने हाथ सबिहा के टॉप के उपर से उसके बूब्स पर रख दिये और थोड़ा सा दबाया।



सेल्समैन: जी मेरे हिसाब से आपका कप साईज़ डीडी होना चाहिये। आपके टॉप और ब्रा की वजह से थोड़ा ज़्यादा आ रहा है।



सबिहा: नहीं नहीं... मुझे बिलकुल ठीक साईज़ ही चाहिये। मैं टॉप और ब्रा उतार देती हूँ और तुम नाप लो।



सेल्समैन: (आश्चर्य के साथ) ज..जी.. मैडम? आप जैसा कहें मैडम।



सबिहा: जब मैं इतना सब कर रही हूँ तो तुम मुझे सबिहा बुला सकते हो।



सेल्समैन: जी.. मैं कैसे... मैं तो आपसे काफी छोटा हूँ...?

सबिहा: सबिहा नहीं तो सबिहा जी तो कह सकते हो?



सेल्समैन: ओके सबिहा जी … आप भी मुझे विकास बुला सकती हैं।



सबिहा ने अपना टॉप खींच कर उतार दिया और पीछे लगे ब्रा के हुक्स खोलने का प्रयास करने लगी।



सबिहा: अरे विकास, हुक्स खोलने मे मेरी मदद करो ना।



सबिहा पीछे घूम गयी और विकास ने उसके ब्रा की पट्टी को दोनो हाथों से पकड़ कर हुक्स खोल दिये। सबिहा अब टॉपलेस हो कर विकास की तरफ़ घूम गयी। विकास ने उसके बूब्स को कुछ देर निहारा और फिर अपने हाथों को उसके बूब्स पर रख कर नापने लगा। उसने सबिहा के बूब्स को थोड़ा दबा दिया। सबिहा ने अपनी आँखें बन्द करके हलकी सी आह भरी। विकास अब तक सबिहा के इरादे समझ चुका था कि ये चुदाई की भूखी औरत उससे क्या चाहती है!



विकास: सबिहा जी आपका बस्ट साईज़ आपके बैंड साईज़ से छः इंच ज्यादा है… तो आपका कप साईज़ डीडी है । वाह ३६ डीडी तो हर लडकी का सपना होता है। आप बहुत लकी हो।



सबिहा: (आँख मारते हुए) हाँ विकास, थेन्क यू। मगर इस समय तो मुझे तुम लकी लग रहे हो



विकास: यह तो सच है। अच्छा पैन्टी का साईज़ भी नाप लें?



सबिहा: हम, मगर यहाँ नहीं। बेडरूम मे चलते हैं। पर उसके पहले वोडका-निंबू का एक-एक जाम हो जाये।



विकास: ठीक है।



सबिहा ने दो पैग तैयार किये। दोनों ने अपने-अपने पैग खत्म किये और सबिहा विकास का हाथ पकड़ कर उसे बेडरूम मे ले गयी और बेड के किनारे पर बैठ गयी। सबिहा तो तीन पैग के बाद पूरी मस्ती में थी।



सबिहा: हाँ अब तुम मेरी पैन्टी क साईज़ नाप सकते हो।



विकास ने सबिहा की स्कर्ट उठाया और उसकी पैन्टी के उपर से उसकी कमर पर हाथ फेरा।



विकास: सबिहा ये स्कर्ट बीच मे अड़ रही है। इसे उतारना पड़ेगा।



सबिहा: तो सोच क्या रहे हो?



विकास ने सबिहा की स्कर्ट की साईड पर लगी ज़िप को खोल दिया और खींचने लगा। सबिहा ने भी अपनी गाँड उठा कर स्कर्ट उतारने मे उसकी मदद की। सबिहा ने एक छोटी सी पैन्टी पहनी हुई थी जिसमे से उसकी चूत की शेप उभर के दिखायी पढ़ रही थी। विकास से रहा नहीं गया और वो पैन्टी के उपर से सबिहा की चूत को सहलाने लगा। सबिहा के बदन में उत्तेजना की एक लहर सी दौड गयी और उसने अपने घुटनों को जोड़ते हुए विकास का हाथ को अपनी जाँघों के बीच मे जकड लिया।



सबिहा: क्यों कैसी लगी मेरी पैन्टी?



विकास: अच्छी है, मगर मुझे उतार के देखनी पड़ेगी।



सबिहा: अरे वाह, मैं तुम्हारे सामने सिर्फ़ पैन्टी और सैंडल पहने बैठी हूँ और तुमने पूरे कपड़े पहन रखे हैं। ये तो ठीक नहीं है।



विकास: तो उतार लो ना जो आपको उतारना है। मना किसने किया है।



सबिहा ने विकास की शर्ट के बटन खोले और अपने हाथ उसकी कसी हुई चेस्ट पर फेरने लगी।



सबिहा: वाह! तुम्हारी बोडी तो बड़ी मैस्क्यूलीन है।



विकास: हाँ मैं हर रोज़ ऐक्सरसाईज़ करता हूँ।



सबिहा ने फिर विकास की बेल्ट उतारी और उसकी पेन्ट आगे से खोल कर नीचे खींच दी। विकास का तना हुआ लन्ड उसके अन्डरवियर में से तोप की तरह उभर रहा था। सबिहा ने अन्डरवीयर के उपर से विकास के लन्ड को अपनी मुठी मे जकड़ लिया।



सबिहा: या अल्लाह! तुम्हारा लन्ड तो बहुत ही मोटा और तगड़ा है। इसकी भी रोज़ ऐक्सरसाईज़ करते हो क्या?



विकास: हाँ इसकी भी रोज़ मालिश होती है मेरी मुट्ठी में।



सबिहा: चलो अब हम एक जैसी हालत मे हैं - अपने अपने अन्डरवीयर में। आओ मुझे अपने आगोश में ले लो ना।



यह कह कर सबिहा खड़ी हो कर और विकास से चिपट गयी। विकास ने कस कर सबिहा को अपनी बाँहों में जकड़ लिया। सबिहा के बूब्स उसकी छती पर बुरी तरह से दबने लगे। विकास का खड़ा लन्ड अंडरवीयर के नीचे से सबिहा की जाँघों के बीच मे उसकी पैन्टी पर रगड़ने लगा। फिर विकास ने सबिहा के गले की साईड पर एक किस किया तो सबिहा ने एक लम्बी आह भरी। अब तक दोनो ही बहुत गरम हो चुके थे। विकास सबिहा की पैन्टी के उपर से उसकी गाँड पर हाथ फेरने लगा तो सबिहा ने विकास के होंठों को चूसना शुरू कर दिया। फिर विकास ने सबिहा की पैन्टी के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूत पर अँगुली फिरायी। सबिहा की चूत अब तक काफ़ी भीग चुकी थी।



सबिहा: आआआआआआआहहहहहहह विकास मेरी पैन्टी उतार दो ना। मेरे साथ जो करना है कर लो। आज मैं सिर्फ़ तुम्हारी हूँ।



विकास: तो फिर मेरा अन्डरवीयर उतारो और मेरे लन्ड को किस करो।



सबिहा झुक कर अपने घुटनो पर बैठ गई और विकास का अन्डरवीयर खींचने लगी मगर विकास के खड़े लन्ड में वो अड़ गया। सबिहा ने अपना हाथ अन्डरवीयर के अन्दर डाला और लन्ड को अज़ाद कर दिया। लन्ड इतना तन कर खड़ा था की सबिहा की मुठी मे पूरा भी नहीं आ रहा था।



सबिहा: सुभानल्लाह! कितना बडा और मोटा है!



विकास: तो किस करो ना इसे।



सबिहा ने लन्ड की टोपी को चूसा और फ़िर पूरा सुपाड़ा मुँह के अन्दर ले लिया। विकास ने उसका सिर पकड़ा और लन्ड को उसके मुँह मे धकेल दिया। सबिहा उसे चूसने लगी। विकास लन्ड को सबिहा के मुँह के अन्दर बाहर करने लगा। बीच-बीच मे सबिहा उसे निकाल कर लन्ड की पूरी लम्बाई चाटती। थोडी देर बाद विकास को अपना लन्ड बाहर निकालना पडा जिस से वो जल्दी न झड़ जाये।



सबिहा: क्यों मज़ा आया?



विकास: हाँ बहुत! आप बहुत अच्छा चूसती हो... अब मुझे अपनी चूत दिखाओ ना?



सबिहा से अब रहा नहीं जा रहा था। वो वोडका और वासने के नशे में झूम रही थी। उसने जल्दी से अपनी पैन्टी उतार दी और हाई हील के सैंडल के अलावा पूरी नंगी खड़ी हो गई - विकास के तने लन्ड के सामने। सबिहा की चूत का रस उसकी टाँगों से बह रहा था। विकास ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उस पर चढ़ कर उसके बूब्स बुरी तरह चूसने लगा।



सबिहा: उउउउईईईई उउफ़फफ़आ..हहह..आआहहहहहह प्लीज... थोड़ा धीरे चूसो ना।



विकास ने अब अपनी जीभ उसकी नाभी से डाली। सबिहा उसके मुँह को अपनी चूत की तरफ़ धकेलने लगी। विकास उसका इशारा समझ गया और अपना मुँह उसकी चूत की ओर ले गया। फ़िर वो उसकी चूत को चाटने लगा और उसकी क्लिट पर अपनी जीभ की नोक फिराने लगा। फ़िर जीभ की नोक को उसकी चूत के होंठों के बीच डाल कर उन्हें खोलने लगा ।



सबिहा अब बहुत ज़्यादा तडप रही थी और उसका बदन उत्तेजना में जोर ज़ोर से काँप रहा था। वो बहुत आवाज़ें भी निकल रही थी।



सबिहा: ममममम... ऊऊईईईई... आआआ मैं मर... जाऊँगी... प्लीज! ये जिस्म तुम्हारा है... आआआहहहहह॥॥॥!!!!!! चढ़ जाओ मेरे जिस्म पर और मेरी चूत को चीर डालो अपने लन्ड से।



विकास उठा और सबिहा के नंगे बदन पर चढ गया और उसके बूब्स को मसलते हुए उसकी जाँघें फैलायी और लन्ड को चूत के मुख पर रख कर थोड़ा ज़ोर लगया। एक जोर के झटके ने लन्ड के सुपाड़े का आधा भाग अन्दर कर दिया। इतना लम्बा और मोटा लन्ड होने की वजह से सबिहा के मुँह से दर्द-भरी सिसकी निकली पर अब उसे किसी चीज़ की परवाह नहीं थी और उसने अपनी टाँगें और फ़ैला दीं। विकास ने अपना लन्ड आहिस्ता-आहिस्ता सबिहा की चूत मे पूरा घुसा दिया।



सबिहा: ऊऊऊऊऊईईईईईई... ममममम.... अल्लाह... इस लन्ड ने तो मुझे मार डाला !



अब विकास सबिहा के ऊपर लेट गया और उसके होंठों को अपने होंठों से चूसने लगा। वो अपने हाथों से उसकी चूचियों के साथ खेलने लगा। अपने लन्ड को थोडी तेज़ी से सबीहा की चूत मे अन्दर-बाहर करने लगा। सबिहा ने अपनी जाँघें विकास की कमर पर बाँध लीं और अपने चूतड़ उठा-उठा कर चुदवाने लगी। कुछ समय चुदाई के बाद सबिहा ने एक लम्बी चींख मारी और उसका बदन झटके मारने लगा। विकास समझ गया की सबिहा को ओरगैज़्म आ गया है।



विकास ने अब अपनी चुदाई की रफ़्तार बढ़ाई और लम्बे-लम्बे स्ट्रोक्स लेने लगा। साथ ही अपने होंठों से वो सबिहा के बूब्स को ज़ोर से चूसने लगा। सबिहा की चूत इतनी गीली हो चुकी थी की जब भी विकास का लन्ड अन्दर जाता तो एक फच्च-फच्च की अवाज़ आती।



सबिहा: ऊउउहहहहऊऊऊऊऊऊहहहहहह... आआऊऊ... आआऊओ... चोदो मुझे और जोर से!!! आआहह फ़क मी हार्ड.... उउउउहहहहह... आआआआआआआँआँआँआँ।



सबिहा को एक बार और झटके खाते हुए ओरगैज़्म आ गया। उसने विकास को उसे डोगी-स्टायल में चोदने के लिये कहा। वो बिस्तर पर घुटनों के बल, अपनी गाँड उठा कर झुक गयी। विकास ने भी घुटनो के बल बैठ कर पीछे से उसके बूब्स को जकड लिया और अपना लम्बा लन्ड उसकी चूत मे दे दिया। अब लन्ड सबिहा की चूत की काफ़ी गहरायी तक अन्दर जाने लगा। इस तरह लगभग दस मिनट और चुदाई चलती रही। फ़िर विकास से रहा नहीं गया और उसका पूरा बदन बुरी तरह अकड़ गया। उसके लन्ड का साईज़ और फूलने लगा और वो हार्ड भी ज़्यादा होने लगा। एक लम्बी से आह भर के उसने एक आखरी स्ट्रोक लिया और उसके लन्ड ने विस्फोट के साथ अपना सारा स्पर्म सबिहा की चूत मे छोड़ दिया। सबीहा भी उसके टाईट लन्ड की आखरी स्ट्रोक के साथ तीसरी बार झड़ गयी। दोनों संतष्ट हो कर थोड़ी देर बिस्तर पर चिपक के लेट गये।



विकास: क्यों सबिहा जी मज़ा आया?



सबिहा: उफ़फ़फ़फ़फ़... बहुत मज़ा आया। आज के बाद तुम रोज चोदने आ जाया करो। जब तक मेरे शौहर नहीं आ जाते... आओगे ना...?



विकास: हाँ क्यों नहीं। आप जब कहोगी मैं हाज़िर हो जाऊँगा। मगर आपके शौहर को पता चल गया तो?



सबिहा: उसकी चिंता तुम मत करो। उन्हें पता है की मैं किसी गैर-मर्द के साथ चुदाई करने वाली हूँ।



विकास: सच में? और उन्हें इस मे कोई ऐतराज़ नहीं है?



सबिहा: नहीं। हम ने सोच कर ही ये फ़ैसला किया था की जब तक हम एक दूसरे से दूर हैं तो ऐसे ही अपनी अपनी प्यास बुझायेंगे।



विकास: आप और आपके शौहर तो बहुत ही खुले विचारों के हैं।



सबिहा: हाँ... और शायद उनके आने के बाद मैं उन्हें थ्रीसम के लीये भी राज़ी कर लूँ तुम्हारे साथ। तुम्हे ये अच्छा लगेगा? मेरी कब से तमन्ना है कि मैं अपने गाँड और चूत में एक साथ दो लंड लूँ।



विकास: बहुत अच्छा। मेरी तो किसमत ही खुल गयी है।



अगले दिन दोबारा मिलने का प्लान बना कर विकास ने सबिहा के होंठों को चूमा और चला गया। जाने से पहले उसने सबिहा को एक सुन्दर नीले रंग का ब्रा और पैन्टी का सेट उपहार मे दिया जो की बिल्कुल जालीदार था और बहुत छोटा भी। सबिहा ने उसे अगले दिन उसी सेट में मिलने की प्रोमिस किया।



उसके जाते ही सबिहा ने रिज़वान को फोन किया और सारी बात बतायी। रिज़वान ने भी उसे बताया की वो अपने दोस्त की बीवी के साथ चुदाई कर चुका है। दोनों ने वादा किया की मिलने पर वो अपनी सेक्स लाईफ़ को ऐसे ही रोमाँचक बनाये रखेंगे।



!!! समाप्त !!!

The Romantic
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Re: हिन्दी में मस्त कहानियाँ

Unread post by The Romantic » 14 Dec 2014 13:35

तीन बहनों की एक साथ चुदाई

लेखक:- अन्जान

ठाकुर जस्पाल सिंघ की शानदार हवेली लखनऊ के सबसे आधुनिक इलाके में बनी हुई थी। जस्पाल सिंघ एक ५० वर्ष के बहुत ही रोबिले और रुतबेदार ठाकुर थे। गरम राजपूती खून उनकी रगों में था और इस ५० वर्ष की अधेड़ उम्र में भी उनका बदन जवानों को मात देता था। लंबा कसरती कद, सिर पर स्याह काले बाल और घनी मूँछें देखकर कोई भी उनसे आँखें नहीं मिला पाता। जब ठाकुर जी २८ वर्ष की उम्र के थे तब उनका विवाह हुआ। पर ठकुराईन उनकी तरह तन्दुरूस्त नहीं निकली। वह जब से हवेली में आईं अक्सर बिमार ही रहती। विवाह के १५ साल बाद यानि कि जब जस्पाल सिंघ ४३ वर्श के थे तभी ठकुराईन उन्हें औलाद का मुँह दिखाये बिना रन्डुआ बना कर ऊपर चली गयी। फिर जस्पाल सिंघ ने दूसरा विवाह नहीं किया।



विधुर जस्पाल सिंघ की हवेली फिर भी चहचहाटों से भरी हुई थी। हवेली में हर समय तीन खुबसूरत हसीन बहनों की हँसी मज़ाक कि आवाज़ ही सुनाई पड़ती थी। ये तीन हसीन बहनें ठाकुर जस्पाल सिंघ के स्वर्गीय बड़े भाई की निशनी थीं। लेकिन इन तीन लड़कियों के बाप ठाकुर जस्पाल सिंघ ही थे। आज से ३० साल पहले जस्पाल सिंघ की भाभी इस हवेली में आई थीं। हवेली खुशियों से भर उठी थी। फिर ५ साल बाद ही भाभी उदास रहने लगीं। जस्पाल सिंघ भाभी का बहुत आदर करते थे, पर देवर होने के नाते देवर भाभी के मजाकों से भी नहीं चूकते थे। जबसे भाभी खोई-खोई रहने लगी तो जस्पाल सिंघ भाभी के और निकट आ गये।



तभी उन्हें पता चला कि उनके बड़े भाई में भाभी की गोद भरने की हिम्मत नहीं है। उस समय जस्पाल २५ साल के बहुत ही तन्दुरुस्त आकर्षक नवयुवक थे। बड़े भाई साहब ज्यादातर राजनिती में रहते थे। देवर भाभी एक दूसरे से खुल के दिल का हाल कहने लग गये थ। और एक बार बडे भैया जब एक सप्ताह के लिये दिल्ली गये तो देवर भाभी के सारे सब्र के बान्ध टूट गये। और यह रिश्ता आज से पन्द्रह साल पहले तक चला जब बडे भैया और भाभी दोनों एक साथ ट्रेन दुर्घटना में मारे गये। तो जस्पाल सिंघ के अपनी भाभी से नाजायज़ सम्बन्ध १० साल तक कायम रहे। यानी कि जस्पाल की २५ वर्ष से लेकर ३५ वर्ष की उम्र तक।



देवर भाभी के इस मधुर सम्बन्ध ने भाभी की गोद में एक एक करके तीन हसीन लड़कियाँ डाली । सबसे बड़ी नीता है जो आज २७ साल की एक बहुत ही खूबसूरत नवयुवती बन चुकी है। अभी वह लखनऊ की मशहूर गर्ल्स कॉलेज में हिन्दी की प्रोफेसर है और साथ-साथ पी.एच.डी भी कर रही है। दूसरी निशा है, उम्र २५ साल और चेहरे और उसकी अदाओं में हमेशा हरियाली छाई रहती है। जब देखो तब खिले हुये गुलाब सा मुस्कराता चेहरा। वह भी गर्ल्स कॉलेज में एम. ए. कर रही है। तीसरी का नाम नन्दिनी है; उम्र २२ साल और गर्ल्स कॉलेज में इसी बी.ए. फाईनल इयर में आई है। सबसे छोटी नन्दिनी टमाटर सी लाल और बहुत ही गदराये बदन की है। सबसे छोटी होने के नाते उसे हवेली में सबसे ज्यादा दुलार मिला। कहानी का लेखक अंजान है!



जस्पाल सिंघ इस हकीकत से अच्छी तरह वाकिफ़ थे कि ये तीनों लड़कियाँ उन्हीं का खून हैं और जब वे विधुर हो गये तो उन्होंने दूसरी शादी नहीं की और अपनी तीनों बेटियों की हर खुशी को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। बे-औलाद जस्पाल सिंघ ने अपने ही खून इन तीनों बेटियों को बाप से भी ज्यादा प्यार दिया है। नतीजा यह हुआ कि तीनों के पंख लग गये। तीनों बहनों का बदन बहुत ही सेक्सी था। उनकी चूचियाँ और चुत्तड़ बहुत फुले -फुले थे और कोई भी मर्द उनको देख कर विचलित हुये बिना नहीं रहता। इनके चाचा का लखनऊ में बहुत दबदबा था और इसलिये कोई लड़का इनकी तरफ अपनी आँख भी उठा कर दखने की जुर्रत नहीं करता।



तीनों बहनों के पास सारी सुख सुविधायें मौजूद थी। जस्पाल ने इन्हें आलिशान इम्पोर्टेड कार दे रखी थी। तीनों लड़कियाँ एक रविवार को शाम ४ बजे के करीब कार में सवार होकर शहर में मस्ती करने निकली हुई थीं। कार की ड्राइविंग नीता कर रही थी। कार अचानक एक जोरदार झटके के साथ रुक गयी। साथ बैठी निशा ने नीता से पूछा, “नीता क्या बात है, तुमने अचानक कार क्यों रोक दी।” नीता बोली, “ज़रा कार के सामने का नज़ारा तो देखो। कितना नशीला नज़ारा है।” तब निशा और नन्दिनी ने सामने देखा कि कार के सामने बीच सड़क पर एक कुत्ता एक कुत्तिया पर चढ़ने की कोशीश कर रहा है। कुत्ते का लगभग चार इन्च लंबा नोकिला लंड बाहर निकला हुआ था। कुछ देर की कोशीश के बाद कुत्ते ने अपना लंड कुतिया की चूत में डाल दिया। अब कुत्ता कुत्तिया पर पीछे से चढ़ा हुआ उसे मस्ती से चोद रहा था। तब निशा ने कहा “यार नीता! तुम ऐसा कोई भी मौका नहीं छोड़ती!” नीता बोली, “हमसे तो किस्मत वाले यह कुत्ते कुत्तिया ही है। ना जगह देखते ना मौका। जहाँ मन किया शुरू हो गये। देखो! कुत्तिया क्या मस्ती से अपनी चूत चुदवा रही है।” तब नन्दिनी बोली, “हाँ हमारे चाचा जस्पाल सिंघ के डर के मारे कोई लड़का हमारी और आँख भी उठा कर नहीं देखता। लगता है कि अपने नसीब में कुंवारी ही रहना है और अपनी चूत की आग अपनी अंगुलिओं से ही बुझनी है।”



यह सुनकर निता ने कार स्टार्ट कर दी। वोह किन्ही ख्यालों में खो गई। तीनों बहनें आपस में काफी खुली हुई थीं और एक दूसरे को दोस्त की तरह ट्रीट करती थीं। निता तो हमेशा सैक्सी मूड में रहने वाली लड़की थी ही और उसकी बातों का टॉपिक हमेशा सैक्स ही रहता था। तीनों बहनें खास सहेलियों की तरह खुल के सैक्स पर बात करतीं। तीनों बहनों का हवेली में एक आलीशान कमरा मिला हुआ था जिस पर तीनों बहनें एक साथ सोती थीं और एक बड़ा बाथरूम अटैचड् था। तीनों बहनें रात को मिल कर इन्टरनेट पर ब्लू फिल्म और दूसरी सैक्सी साइट्स डाउनलोड करतीं और आपस में एक दूसरे की चूँचियाँ मसलती, चूत चाटतीं और अपनी या एक दूसरे की चूतों को बैंगन/मोमबत्ती इत्यादि से चोदतीं। तीनों बहनें अक्सर अपने कमरे की प्राइवेसी में शराब-सिगरेट का शौक भी पूरा करती थीं।



निता कुत्ते कुत्तिया की चुदाई देख कर पूरी गरम हो गई थी। उसे तालाश थी तो एक लंड की; वोह चाहे जिस किसी का भी हो। उसके दिमाग में तब एक आईडीया आया और निता ने कार प्रोफ़ेसर अमित के घर के तरह मोड़ दी। प्रोफ़ेसर अमित की उम्र उस समय लगभग पैंतीस साल की थी और उसकी शादी अभी नहीं हुई थी। वो बहुत ही रंगीन मिज़ाज़ का था मतलब वो एक बहुत चोदू आदमी था । उनके लंड की लंबाई सात इंच और मोटाई चार इंच की थी और यह बात कॉलेज की लगभग सभी लड़कियों और मैडमों को मालूम थी। उसे अपने लंड और अपनी चुदाई की कला पर बहुत गर्व था और कॉलेज की कई लड़कियां और मैडम उससे अपनी चूत चुदवा चुकी थीं। अमित इन सब लड़कियों और मैडमों को बातों में फंसा कर अपने घर ले जाया करता था और फिर उनको नंगी करके उनकी चूत चोदा करता था और यह बात इन तीन बहनों को मालूम थी।



इन तीन बहनों ने अपनी कार प्रोफ़ेसर अमित के घर के सामने जा कर रोकी। प्रोफ़ेसर अमित उस समय अपने घर पर ही था और एक लुंगी पहन कर शराब की चुस्कियाँ लेते हुए और अपना लंड सहलाते हुए एक ब्लू फ़िल्म देख रहा था। कॉल बैल बजी तो प्रोफ़ेसर अमित ने टीवी की आवाज़ म्यूट करके दरवाज़ा खोला क्योंकि टीःवी उनके बेडरूम में था। सामने तीनों बहनों को देख कर बोला, “अहा आज तो हमारे भाग ही खुल गये!” अमित ने तीनों को बाहर के कमरे में बैठाया। टी.वी. उनके बेडरूम में था जिसका दरवाज़ा सामने था पर जहाँ तीनों बहनें बैठी थीं वहाँ से टी.वी. दिखायी नहीं पड़ रहा था। तभी नीता ने कहा, “मैं पिछली बार जब आपसे अपनी थीसिस में गाइडैंस के लिए आयी थी तो आपने काफी मदद की थी और बहुत अच्छे टिप्स दिये थे। आज भी मैं इसी सिलसिले में आयी हूँ। अगर आप हिन्दी साहित्य के रीति-काल से सम्बन्धित कुछ रैफ्रैन्सिस चाहिए।” पिछली बार जब निता यहाँ एक और मैडम के साथ आयी थी तो बेडरूम में बैठ कर थीसिस डिस्कस की थी। तभी निता वहाँ से उठी और सीधे प्रोफ़ेसर अमित के कमरे की और मुड़ गयी। उसके साथ-साथ निशा और नन्दिनी भी हो ली। तभी अमित को कुछ याद आया और हड़बड़ा के बोला, “अरे रुको तो, वहाँ कहाँ जा रही हो तुम लोग।” पर तब तक देर हो चुकी थी। कहानी का शीर्षक ’तीन बहनों की एक साथ चुदाई’ है!



कमरे में टी.वी. पर उस समय एक गरमागर्म चुदाई का सीन चल रहा था जिस में एक आदमी दो लड़कियों को अपने लंड और अपनी जीभ से चोद रहा था। लड़कियां अपनी चूत चुदते समय अपनी अपनी कमर उछाल कर लंड और जीभ अपनी चूत में ले रही थीं। कहानी का लेखक अंजान है!



प्रोफ़ेसर अमित इन तीन बहनों के सामने घबड़ाहट दिखाते हुए बोला “अरे! अचानक तुम लोग यहाँ क्यों पहूँच गयीं?” निता जो पहले से ही पूरी गरम थी, टी.वी पर यह दृश्य देख कर और गरम हो गयी। उसने निशा की आँखों में देखा और आँखों ही आँखों में कह दिया कि कुछ करो। तब निता बोली, “आप तो टी.वी पर रीति-काल से सम्बन्धित ही फ़िल्म देख रहे हैं। यहाँ तो नायक नायिकाओं की रास-रीति साक्षात चल रही है।” प्रोफ़ेसर अमित ने उन तीनों बहनों के चेहरे देख कर उनकी मन की बात पहचान ली और उनसे पूछा, “मैं जो कुछ टी.वी. पर देख रहा था, क्या तुम लोग भी शूरू से देखना चहोगी?” तीनों बहनों ने एक साथ अपना-अपना सर हिला कर हामी भर दी। प्रोफ़ेसर अमित ने फिर टी.वी. ऑन कर दिया और सब लोग पलंग और सोफे पर बैठ कर ब्लू फ़िल्म देखने लगे। अमित ने उन्हें शराब ऑफर की और तीनों बहनों ने सहर्ष स्वीकार कर ली। अमित एक सोफे पर बैठा था और उसकी बगल वाले सोफे पर निशा और नन्दिनी बैठी थी और पलंग पर नीता बैठी थी। उधर प्रोफ़ेसर अमित ने देखा कि ब्लू फ़िल्म की चुदाई का सीन देख कर तीनों बहनों का चेहरा लाल हो गया और उनकी साँस भी जोर-जोर से चल रही थी। उनकी साँसों के साथ-साथ उनकी चूचियाँ भी उनके कपड़ों के अन्दर उठ-बैठ रही थी। एक साथ तीन जोड़ी चूचियाँ एक साथ उठ-बैठ रही थीं और साँसें गर्म हो रही थीं। क्या हसीन नज़ारा था। तीनों बहनों पर शराब का भी सुरूर छा रहा था। कुछ देर के बाद नीता, जो कि इन बहनों में सबसे बड़ी थी, अपना हाथ अपने बदन पर और चूची पर फेरने लगी। प्रोफ़ेसर अमित उठ कर नीता के पास पलंग पर बैठ गया। उसने पहले नीता के सर पर हाथ रखा और एक हाथ से उसके कन्धों को पकड़ लिया। इससे नीता का चेहरा प्रोफ़ेसर अमित के सामने हो गया। अमित ने धीरे से नीता के कानों के पास अपना मुँह रख के पूछा, “क्या बहुत गर्मी लग रही है, पंखा चला दूँ?” नीता बोली, “नहीं ठीक है,” और फिर अमित सर के चेहरे को आँखें गड़ा कर देखने लगी। अमित ने पलंग से उठ कर पंखा फ़ुल स्पीड में चला दिया। पंखा चलते ही नीता की साड़ी का आंचल उड़ने लगा और उसकी दोनों चूचियाँ साफ़- साफ़ दिखने लगी।



अमित फिर पलंग पर नीता के बगल में अपनी जगह बैठ गया। उसने नीता का एक हाथ अपने हाथ में ले लिया और धीरे से पूछा, “क्या मैं तुम्हारे हाथ को चूम सकता हूँ?” नीता यह सुनते ही पहले अपनी बहनों के तरह देखी और फिर अपना हाथ अमित के हाथों में ढीला छोड़ दिया। अमित ने भी फ़ुर्ती से नीता का हाथ खींच कर उसकी हथेली पर एक चुम्मा दे दिया। चुम्मा दे कर वो बोला, “बहुत मीठा है तुम्हारा हाथ और हमें मालूम है कि तुम्हारे होंठों का चुम्मा इससे भी मीठा होगा।” यह कह कर अमित नीता की आँखों में देखने लगा । नीता तो पहले कुछ नहीं बोली, फिर अपना हाथ अमित के हाथों से खींचते हुए अपना मुँह उसके पास कर दिया और बोली, “जब आपको मालूम है कि मेरे होंठों का चुम्मा और भी मीठा होगा और आपको शुगर की बिमारी नहीं है, तो देर किस बात की और मीठा खा लीजिये।” नीता की बात सुन कर अमित ने अपने होंठ नीता के होंठ पर रख दिये । फिर अमित अपने होंठों से नीता के होंठ खोलते हुए नीता का निचला होंठ चूसने लगा। नीता ने अपने होंठ चुसाई से गर्म हो कर अमित के कन्धों पर अपना सर रख दिया। अमित ने नीता का रिएक्शन देख कर धीरे से अपना हाथ बढ़ा कर नीता की एक चूची ब्लाउज़ के ऊपर से पकड़ ली। अमित एक हाथ से नीता की एक चूची सहला रहा था और दुसरा हाथ उसके चूतड़ पर फेर रहा था। नीता उसकी इस हरकत पर पहले तो थोड़ा कसमसाई और अपनी बहनों की तरफ़ देखते हुए उसने भी अमित को जोर से अपनी बाँहों में भींच लिया। अमित ने अब नीता की दोनों चूचियों पर अपने दोनों हाथ रख दिये और नीता की दोनों चूचियों को पकड़ कर मसलने लगा। यह पहली बार था कि किसी मर्द का हाथ नीता के शरीर को छू रहा था और ऊपर से शराब का सुरूर। वो बहुत गर्म हो गयी और उसकी साँसें जोर-जोर से चलने लगी। अमित नीता के चूची को मसलते हुए नीता को होंठों को चूमने लगा।



अमित इधर नीता को चोदने की तैयारी कर रहा था कि उसने देखा कि निशा और नन्दिनी भी अपना- अपना बदन सहला रही हैं और बड़े गौर से अमित और नीता का चल रहा जवानी का खेल देख रही हैं। अमित समझ गया कि वो अब इन तीनों बहनों के साथ कुछ भी कर सकता है और यह तीनों बहनें अब उसके काबू में हैं और वो जो भी चाहेगा वही कर सकता है। अमित ने फिर से अपना ध्यान नीता के शरीर पर डाला। अमित ने नीता की चूची को ब्लाउज़ के ऊपर से मसलते हुए अपना हाथ उसके ब्लाउज़ के अन्दर ले गया और जोर-जोर से नीता की दोनों चूचियों को पकड़ कर दबाने लगा। कभी-कभी वो अपनी दो अंगुली के बीच नीता की निप्पल को लेकर मसल रहा था और नीता अमित के कन्धो से लिपटी चुप चाप आँखें बंद करके अपनी चूची मलवा रही थी। अमित ने फिर धीरे-धीरे नीता की ब्लाउज़ और ब्रा को खोल दिया और नीता की कसी-कसी चूची को देखने लगा। कहानी का शीर्षक ’तीन बहनों की एक साथ चुदाई’ है!



नीता ने तब अपनी आँखें अमित की आँखों में डाल कर पूछा, “सर, कैसी है हमारी चूचियाँ, आपको पसंद तो हैं?” अमित नीता की चूची को देख कर पहले ही पागल सा हो गया था और उसकी चूची को सहलाते हुए बोला, “नीता मैडम, तुम मेरी पसंद नापसंद पुछ रही हो? और आज तक मैंने इतनी सुंदर चूची कभी नहीं देखी है। तुम्हरी चूची बहुत सुंदर है और यह मुझे पागल बना रही है। इनको देख कर मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा हूँ।” नीता बोली, “मेरी चूची देख कर आपको क्या हो रहा है?” अमित बोला, “हाय! मैं अब तुम्हारी इन चूचियों को चूसना और काटना चाहता हूँ,” और यह कह कर नीता की एक चूची अपने मुँह में भर ली और मज़े ले ले कर चूसने लगा।



अपनी चूची की चुसाई शुरु होते ही नीता पगला सी गयी और अपने हाथ बढ़ा कर अमित का लंड उसकी लुंगी के ऊपर से ही पकड़ कर मरोड़ने लगी। नीता की गर्मी देख कर अमित ने अपने हाथ से अपनी लुंगी उतार दी और फिर से नीता की एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरी चूची अपने हाथों में लेकर मसलने लगा। नीता अब अपने आप को रोक नहीं पाई और अपने हाथ से अमित का अंडरवियर उतार दिया। अमित का अंडरवियर उतारते ही अमित का सात इंच का लंड बाहर आ कर अपने आप झूमने लगा मानो वो इन हसीन बहनों को अपना सलाम बज़ा रहा हो। तीनों बहनें अमित का लंबा और मोटा लंड देख कर दंग रह गयी।कहानी का लेखक अंजान है!



अमित ने अब नीता को अपनी गोद में उठाया और फिर पलंग पर लिटा दिया। नीता को लिटाने के बाद अमित ने नीता की साड़ी को उसकी कमर से खींच कर निकाल दिया और नीता पलंग पर सिर्फ़ पेटीकोट पहने चित्त लेटी हुई थी। अमित नीता की चूत को उसके पेटीकोट के ऊपर से पकड़ कर दबाने लगा। नीता की चूत अपने हाथों से दबाते हुए उसने नीता के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। नीता ने भी पेटीकोट का नाड़ा खुलते ही अपनी कमर ऊपर कर दी जिससे कि अमित उसके पेटीकोट को उसके चूतड़ के नीचे से आसानी से निकाल सके। अमित ने नीता का पेटीकोट उसके फुले-फुले चूतड़ के नीचे कर दिया और फिर उसको नीता के पैर से अलग कर पलंग के नीचे फेंक दिया। अब नीता अमित के सामने अपने गुलाबी रंग की पैंटी और वही गुलाबी रंग की ऊँची हील वाली सैंडल पहन कर लेटी हुई थी। अमित अब अपना मुँह नीता की चूत के पास ले गया और उसकी पैंटी के ऊपर से उसको चूमने लगा। इधर अमित नीता को नंगा कर रहा था उधर नीता भी चुप नहीं थी। नीता अमित का लंड हाथ में लेकर ऊपर नीचे करने लगी और फिर उसके लंड का सुपाड़ा खोल कर उसको अपने मुँह में ले लिया और जीभ से चाटने लगी। अमित का लंड अब और भी कड़क हो गया। तब तक अमित, नीता की चूत उसकी पैंटी के ऊपर से ही अपनी नाक लगा कर सूंघ रहा था और चूम रहा था। जैसे ही नीता अमित का लंड अपने मुँह में भर कर चूसने लगी, अमित ने नीता की पैंटी भी उतार कर, नीता को पुरी तरह से नंगी कर दिया। नीता के शरीर पर अब उसकी सैक्सी सैण्डल के अलावा और कुछ भी नहीं था। नंगी होने से वह अब शरमा रही थी और अपना चेहरा अमित की छाती में छुपा लिया। इसी दौरान अमित ने नीता की चूची को चूसना फिर से चालू कर दिया। नीता की चूचियाँ अब पत्थर के समान कड़ी हो गयी थीं। तब अमित ने नीता को फिर बिस्तर पर चित्त लिटा दिया और नीता की चूत को अपने जीभ से चाटने लगा। वो अपनी जीभ नीता के चूत के अन्दर बाहर करने लगा। अपनी चूत में अमित की जीभ घुसते ही नीता को बहुत मज़ा आने लगा और वो जोर से अमित का सर अपने चूत के ऊपर पकड़ दबाने लगी और थोड़ी देर के बाद अपनी कमर ऊपर-नीचे करने लगी। अमित जो कि चुदाई के मामले में बहुत माहिर था, समझ गया कि अब नीता अपने चूत में उसका लंड पिलवाना चाहती है।



उसने नीता का मुँह चूम कर धीरे से उसके कान पर मुँह रख कर पूछा, “हाय! नीता रानी, अपनी कमर क्यों उछाल रही हो? क्या तुम्हारी चूत में कुछ कुछ हो रहा है?” नीता बोली, “हाँ मेरे सनम, मेरे राजा तुम सही कह रहे हो, मेरी चूत में चीटियाँ रेंग रही हैं। मेरा सारा बदन टूट रहा है, अब तुम ही कुछ करो।” फिर अमित ने पूछा, “क्या तुम अपनी चूत मेरे लंड से चुदवाना चाहती हो?” नीता बोली, “अरे मेरे कपड़े सब उतार दिये और अपने कपड़े भी उतार दिये और अब भी पुछते हो क्या हम लोग चुदाई करेंगे?”



“ठीक है अब मैं तुमको चोदुँगा, लेकिन पहले थोड़ा दर्द होगा पर मैं तुम्हे बहुत ही प्यार से धीरे धीरे चोदुँगा और तुमको दर्द महसूस नहीं होने दुँगा,” अमित ने नीता से कहा। यह सुन कर अमित उठा और नीता के दोनों पैर उठा कर घुटने से मोड़ दिये और दोनों पैर अपने हाथों से फैला दिये। फिर उसने ढेर सारा थूक अपने हाथ में लेकर पहले अपने लंड पर लगाया फिर नीता की चूत पर लगाया। थूक से सना अपना खड़ा लंड चूत के मुँह पर रखा और धीरे से कमर को आगे बढ़ा कर अपना सुपाड़ा नीता की चूत में घुसा दिया और नीता के ऊपर चुपचाप पड़ा रहा। थोड़ी देर के बाद जब नीता नीचे से अपनी कमर हिलाने लगी तो अमित ने धीरे-धीरे अपना लंड नीता की चूत में डालना शुरु किया। नीता का बदन दर्द से कांपने लगा और वो चिल्लाने लगी, “बाहर निकालो, मेरी चूत फटी जा रही है। हाय! मेरी चूत फटी जा रही है। तुम तो कह रहे थे कि थोड़ा सा दर्द होगा और तुम आराम से चोदोगे। मुझे नहीं चुदवाना है, तुम अपना लंड बाहर निकालो।” अमित ने नीता के मुँह में अपना हाथ रख कर बोला, “बस रानी बस, अभी तुम्हारा दर्द खतम हो जयेगा और तुम्हे मज़ा आने लगेगा। बस थोड़ा सा और बर्दाश्त करो।”



“हाय! मेरी चूत फटी जा रही है और तुम कह रहे हो कि थोड़ा और बर्दाश्त करो। अरे मुझे नहीं चुदवानी है अपनी चूत, तुम अपना लौड़ा मेरी चूत से बाहर निकालो,” नीता बोली और उसकी आँखों से आँसू आ गये। इतनी देर में अमित ने अपनी कमर उठा कर एक जोरदार धक्का मारा और उसने महसूस किया कि उसका सारा का सारा लंड नीता की चूत में घुस गया है। नीता मारे दर्द के तड़पने लगी और अमित को अपने हाथों से अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी। लेकिन अमित नीता को मज़बुती से पकड़े हुए था और उसका हाथ नीता के मुँह के ऊपर था इसी लिये नीता कुछ न कर सकी बस तड़प कर रह गयी। अमित ने अपना लंड नीता की चूत के अन्दर ही थोड़ी देर के लिये रहने दिया। उसने नीता की एक चूची को अपने मुँह में लेकर जीभ से सहलाना शुरु कर दिया और दूसरी चूची को हाथ से सहलाना शुरु कर दिया। थोड़ी देर बाद नीता का दर्द गायब हो गया, अब उसे मज़ा आने लगा और नीचे से अपनी कमर को ऊपर नीचे करना शुरु किया। कहानी का शीर्षक ’तीन बहनों की एक साथ चुदाई’ है!



अमित अब धीरे-धीरे अपनी कमर हिला हिला कर अपना लौड़ा नीता की चूत में अन्दर-बाहर करने लगा। नीता ने भी अब जोरदार धक्के देना शुरु किया और जब अमित का लंड उसकी चूत में होता तो नीता उसे कस कर जकड़ लेती और अपनी चूत को सिकोड़ लेती थी। अब अमित समझ गया कि नीता को अब मज़ा आने लगा है तो वो अपनी कमर को ऊपर खींच कर अपना लंड पूरा का पूरा नीता की चूत से बाहर निकाल लेता, सिर्फ़ अपना सुपाड़ा अन्दर छोड़ देता और फिर जोर दार झटके के साथ अपना लंड नीता की चूत में पेल दे रहा था। नीता बुरी तरह अमित से लिपटी हुई थी और उसने अमित को अपने हाथ और टाँगों से जकड़ रखा था । सारे कमरे में नीता और अमित की सिसकारी और उनकी चुदाई की ‘फच’ ‘फच’ की आवाज गूँज रही थी। नीता अपने मुँह से “आह! आह! ओह! ओह! हाँ! हाँ! और जोर से, और जोर से… हाँ हाँ ऐसे ही अपना लंड मेरी चूत में पेलते रहो,” बोल रही थी। अमित फ़ुल स्पीड से नीता की चूत में अपना लंड अन्दर-बाहर करके उसको चोद रहा था और नीता बुरी तरह से अमित से चिपकी हुई थी। इतनी देर से नीता की चूत चोद रहा अमित अब झड़ने वाला था और उसने अब ८-१० धक्के काफ़ी जोरदार लगाये और अमित के लौड़े से ढेर सारा पानी नीता की चूत में गिरा और समा गया। अमित के झड़ने के साथ ही साथ नीता की चूत ने भी पानी छोड़ दिया और उसने अपने बाँहों और टाँगों से अमित को जकड़ लिया। अमित हाँफते हुए नीता के ऊपर गिर गया और थोड़ी देर तक दोनों एक दूसरे से चिपके रहे। फिर नीता उठ कर अपनी चूत में हाथ लगाये बाथरूम की तरफ़ अपनी सैण्डल खटकाती भाग गयी।



अमित इस समय बुरी तरह से थक चुका था और बेड पर पड़ा रहा, लेकिन उसका लंड अभी भी खड़ा था। उधर निशा और नन्दिनी दोनों एक दूसरे को बुरी तरह से चूम रही थीं। निशा की कमीज़ और ब्रा दोनों ज़मीन पर पड़े हुए थे और वो कमर के ऊपर बिल्कुल नंगी थी। दोनों बहनें एक दूसरे को चूमते हुए एक दूसरे की चूचियाँ भी मसल रही थीं। अमित अपनी जगह से उठ कर उन दोनों के पास चला गया और निशा के ऊँची हील वाले सैण्डल में कसे हुए चिकने पैर पर अपना हाथ फेरने लगा। निशा जो पहले ही मदहोश थी अपने पैर पर अमित का हाथ लगते ही अपने आप पर काबू नहीं रख सकी। निशा नन्दिनी को छोड़ कर अमित की तरफ़ मुड़ गयी और उसके सामने अमित बिल्कुल नंगा अपना खड़ा लंड लिये खड़ा था। अमित एक बार फिर चोदने के मूड में था। निशा ने अमित के चूतड़ को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपना मुँह उसके लंड पर रगड़ने लगी। अमित का लंड अब भी नीता की चूत की चुदाई से भीगा हुआ था। अमित भी निशा को अपने दोनों हाथों में बांध कर चूमने लगा। अमित का हाथ निशा के नंगे सेक्सी शरीर पर घुम रहा था, उसका हाथ निशा की चूची पर गया और वो उन खड़ी-खड़ी चूचियों को अपने हाथों में ले कर मसलने लगा। निशा अपनी चूचियों पर अमित का हाथ पड़ते ही और जोश में आ गयी और अपना हाथ अमित के लौड़े पर रख दिया । अमित का लंड निशा की मुट्ठी में आते ही अमित निशा की एक चूची अपने मुँह में भर कर चूसने लगा और दूसरी चूची अपने हाथ में लेकर उसकी निप्पल मसलने लगा। थोड़ी देर तक निशा ने अमित के लंड को अपने हाथों में लेकर उसके सुपाड़े को खोला और बंद किया फिर एका एक उसने सुपाड़े को अपने मुँह में भर कर चाटने लगी। जैसे ही निशा ने अमित का लंड अपनी मुँह में लिया वैसे ही अमित ने खड़े खड़े अपनी कमर हिला कर अपना लंड निशा के मुँह के अन्दर पेला और बोला, “ले ले मेरी रानी, मेरा लंड अपने मुँह में लेकर इसको खूब चूस…फिर बाद में मैं इसको तुम्हारी चूत में डाल इसे चूत से चुसवाऊँगा।”



निशा ने अपनी मुँह से अमित का लंड निकाल कर कहा, “बस सिर्फ़ हमारी चूत से ही अपना लंड चुसवाओगे, गाँड से नहीं? मैं तो तुम्हारा लंड अपनी चूत और गाँड से खाऊँगी। क्या तुम मुझको अपना लंड दोनों छेदों से खिलाओगे न? थोड़ी देर के बाद, अमित ने निशा को पलंग पर ले जाकर चित्त कर के लेटा दिया और उसके पैरों के पास बैठ कर उसकी सलवार को खोलने लगा। सलवार खोलने में निशा ने अमित की मदद की और अपने चूतड़ को उठा कर अपनी सलवार को अपनी गाँड से नीचे कर के अपने पैरों से अलग कर दिया। फिर अमित ने निशा की पैंटी भी उतार दी और उसकी पैंटी उतारते ही निशा की गुलाबी कुँवारी चूत उसकी चमकती चिकनी जांघों के बीच चमकने लगी। ऊँची पेंसिल हील के काले रंग के सैंडल पहने निशा बिकुल नंगी अमित के सामने लेटी हुई थी और निशा की गुलाबी चूत को अमित अपना दम साधे देखने लगा और अपनी जीभ होंठों पे फेरने लगा। कहानी का लेखक अंजान है!



अमित ने झुक कर निशा की चूत पर चुम्मा दिया और अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत की घुंडी को तीन-चार बार चाट दिया। फिर अमित ने निशा की टाँगों को फ़ैलाया और ऊपर उठा कर घुटने से मोड़ दिया और अपना लंड निशा की चूत के दरवाजे पर रख दिया। थोड़ी देर के बाद अमित अपना लंड निशा की चूत के ऊपर रगड़ने लगा और निशा मारे चुदास से अपनी कमर उठा-उठा कर अमित का लंड अपनी चूत में लेने की कोशिश करती रही। जब निशा से नहीं रहा गया तो वो बोली, “अब क्यों तड़पाते हो, कबसे तुम्हारा लंड अन्दर लेने के लिये मेरी चूत बेकरार है और तुम अपना लंड सिर्फ़ मेरी चूत के ऊपर-ऊपर ही रगड़ रहे हो। अब जल्दी करो और मुझको चोदो, फाड़ दो मेरी कुँवारी चूत को। आज मैं लड़की से औरत बनना चाहती हूँ, अब ज्यादा परेशान मत करो। जल्दी से मुझे चोदो और मेरी चूत की आग को बुझाओ।”



निशा की इतनी सेक्सी मिन्नत सुनते ही अमित ने एक तकिया बेड से उठा कर निशा की चूतड़ के नीचे लगा दिया, जिससे कि निशा की चूत और ऊपर हो गयी और खुल गयी। तब अमित ने एक जोरदार धक्का अपने लंड से निशा की चूत में मारा और उसका पूरा लंड निशा की चूत में जड़ तक घुस गया। निशा के मुँह से चीख निकल गयी। निशा ने अमित को जोरो से जकड़ लिया और अपनी टाँगें अमित की कमर पर कस ली। अमित निशा की एक चूची चूसते हुए एक हाथ से दूसरी निप्पल को मसलने लगा। धीरे-धीरे निशा का दर्द कम होने लगा और उसकी गर्मी फिर बढ़ने लगी जिससे कि वो अपनी कमर ऊपर-नीचे करने लगी। अमित भी अब अपनी कमर चला कर निशा की चूत में अपना लंड अन्दर-बाहर करने लगा। थोड़ी देर के बाद निशा बोली, “क्या कर रहे हो? और जोर से चोदो मुझे, आने दो तुम्हारा पूरा लंड मेरी चूत मे। मेरी चूत में अपना लंड जड़ तक पेल दो। और जोर जोर से धक्का मारो।” यह सुनते ही अमित ने चुदाई फ़ुल स्पीड से शुरु कर दी और बोलने लगा, “क्या मेरी रानी, चुदाई कैसी लग रही है। चूत की आग बुझ रही है कि नहीं?”



निशा नीचे से अपनी कमर उछालते हुए बोली, “अभी बात मत करो और मन लगा कर मेरी चूत मारो। चुदाई के बाद जितना चाहे बात कर लेना, अभी तुम्हारा पूरा का पूरा लंड मेरी चूत को खिलाओ। इस समय मेरी चूत बहुत भुखी है और उसको बस लंड की ठोकर चाहिये।” अमित और निशा इस समय एक दूसरे को जोर से अपने बाँहों और टाँगों से जकड़े हुए थे और दोनों फ़ुल स्पीड से एक दूसरे को अपने अपने लंड और चूत से धक्का मार रहे थे। पूरे कमरे में उनकी सिसकियाँ और चुदाई की आवाज गुंज रही थी। निशा की चूत बहुत पानी छोड़ रही थी और इसी लिये अमित के हर धक्के के साथ उसकी चूत से बहुत आवाज निकल रही थी। निशा अचानक बहुत जोरों से अपनी कमर उछालने लगी और वो फिर निढाल हो कर बिस्तर पर अपने हाथ पैर फ़ैला कर ढीली पड़ गयी। निशा अब झड़ चुकी थी और उसमे और चुदने की हिम्मत नहीं थी। अमित ने भी निशा के झड़ जाने के बाद जोर दार चार-पांच धक्के लगाये और निशा की चूत में अपना लंड घुसेड़ कर निशा के ऊपर गिर गया। अमित भी झड़ चुका था और अब वो निशा के ऊपर आँख बंद करके लेटा था और हाँफ रहा था। थोड़ी देर के बाद अमित ने अपना लंड निशा की चूत से बाहर निकाला और लंड के बाहर निकलते ही निशा की चूत से ढेर सारा सफ़ेद गाढ़ा-गाढ़ा पानी निकलने लगा। निशा यह देख कर चूत में अपनी पैंटी खोंस कर उठ कर बाथरूम की तरफ़ भागी।



प्रोफ़ेसर अमित काफ़ी थक चुका था । वो आज लगातर दो कुंवारी लड़कियों के साथ चुदाई कर चुका था। उसने अपना मुँह घुमा कर देखा कि नीता और नन्दिनी आपस में चिपकी हुई बैठी थीं। नीता नन्दिनी की चूची उसके कपड़ों के ऊपर से ही दबा रही थी। नीता ने नन्दिनी के कपड़े बहुत ढीले कर दिये थे और नन्दिनी के कपड़े आधे खुले हुए थे। नीता ने इस दौरान अपने कपड़े नहीं पहने थे और बस ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने बिल्कुल नंगी थी। नीता ने फिर नन्दिनी की जीन्स और टी-शर्ट उतार दी थी और अब नन्दिनी सिर्फ़ अपनी ब्रा और पैंटी और सैंडलों में थी। नन्दिनी की चूचियाँ बहुत ही सेक्सी थीं। उसकी चूचियाँ बहुत बड़ी तो नहीं थीं पर थीं बहुत गठी और गोल-गोल। उसके निप्पल इस समय बिल्कुल फूल कर खड़े और कड़क हो गये थे । नन्दिनी का एक निप्पल नीता अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और अपने हाथ नन्दिनी की जांघों के बीच में घुमाने लगी। नीता ने फिर नन्दिनी की पैंटी भी उतार दी और अपना मुँह नन्दिनी की चूत पर रख दिया। थोड़ी देर के बाद नीता ने अपनी जीभ निकाल कर नन्दिनी की चूत के अन्दर कर दी। नन्दिनी इतनी गरम हो गयी कि अपने हाथों से अपनी निप्पल मसल रही थी। कहानी का शीर्षक ’तीन बहनों की एक साथ चुदाई’ है!



यह सब देख कर अमित के अन्दर वासना का ज्वार फिर से आने लगा और चुदाई के लिये उसका लंड फिर से गरम होने लगा। वो उठ कर नीता और नन्दिनी के पास पहुँच गया और दोनों बहनों की काम लीला ध्यान से देखने लगा। दोनों बहनों को देखते-देखते उसने अपना हाथ नन्दिनी की चूचियों पर रख दिया और उनकी निप्पल अपने हाथों में लेकर अपनी उंगलियों के बीच रख कर मसलने लगा। नन्दिनी अब अमित की तरफ़ मुड़ी और उसने देखा कि अमित उसके बगल में नंगा खड़ा है और उसका लंड अब गरम हो कर खड़ा होने लगा है। उसने अमित का लंड अपने हाथों में ले कर अमित से पूछा, “क्या अब मुझ को भी चोदोगे? मैं भी अपनी दीदीयों की तरह अपनी चूत तुमसे चुदवाना चाहती हूँ। प्लीज़ मुझे भी अपने लंड से चोदो । लेकिन तुम्हारे लंड को क्या हो गया है? क्या अब यह हमारी चूत में घुसने के काबिल है?”



अमित लड़कियों की चुदाई का पुराना खिलाड़ी था और उसने अपने लंड को हिलाते हुए कहा, “घबड़ाओ मत अभी तुम्हे अपने लंड का कमाल दिखाता हूँ।” यह कह कर अमित ने अपना लंड नन्दिनी के मुँह में दे दिया और बोला, “लो मेरी जान! मेरा लंड अपने मुँह में लेकर इसे चूसो।” नन्दिनी भी उसके लंड को अपने मुँह में लेकर उस पर अपनी जीभ चलाने लगी और कभी उस पर अपने दाँत गड़ाने लगी। नन्दिनी की लंड चुसाई से अमित को बहुत मज़ा आया और उनका लंड अब धीरे-धीरे खड़ा होने लगा। उधर नीता अपने एक हाथ से नन्दिनी की चूत सहला रही थी और दूसरे हाथ से अमित की गाँड में अपनी उंगली पेल रही थी। थोड़ी देर के बाद लंड चुसाई और गाँड में नीता उंगली होने से अमित का लंड पूरे जोश के साथ खड़ा हो गया और फिर चुदाई शुरु करने के लिये तैयार था। कहानी का लेखक अंजान है!



अमित ने अपना लंड नन्दिनी के मुँह से निकाला और नन्दिनी के पैर के बीच बैठ गया। उसने अपने दोनों हाथों से नन्दिनी की चूत को फ़ैलाया और उसके अन्दर अपनी जीभ डाल दी। अमित अपनी जीभ नन्दिनी की चूत के अन्दर-बाहर करने लगा और चूत की अन्दरुनी दीवारों के साथ अपनी जीभ से खेलने लगा। कभी-कभी अमित अपनी जीभ से नन्दिनी की भगनासा (क्लिटोरिस) भी चाट रहा था और कभी कभी उसको अपने दातों के बीच पकड़ कर जोर-जोर से चूस रहा था। नन्दिनी अब काफ़ी बेचैन थी और अपनी कमर हिला-हिला कर अपनी चूत को अमित के मुँह पर आगे पीछे कर रही थी। अमित समझ गया कि नन्दिनी की चूत अब लंड खाने के लिये तैयार है। अमित का लंड भी अब पहले जैसा तगड़ा हो गया था और नन्दिनी की चूत में घुसने के लिये उतावला था। अमित ने अपनी जीभ नन्दिनी की चूत से निकाल ली और अपना सुपाड़ा नन्दिनी की चूत पर रख कर एक हल्का सा धक्का दिया, लेकिन नन्दिनी जबरदस्त जोर से चिल्ला पड़ी। अमित का लंड नन्दिनी की छोटी चूत के हिसाब से बहुत मोटा था और नन्दिनी की यह पहली चुदाई थी। नन्दिनी अपने हाथों से अमित को रोक रही थी और अमित अपना लंड नन्दिनी की चूत में पेल नहीं पा रहा था। उसने नीता और निशा से नन्दिनी की चूची और चूत से खेलने को कहा जिससे कि नन्दिनी बहुत गरम हो गयी। अमित उठ कर एक नारियल के तेल की शीशी उठा लाया और अपने लंड पर अच्छी तरह से तेल मला। फिर उसने तेल को अपनी अंगुली में लेकर नन्दिनी की चूत पर भी लगाया। उसने तेल को चूत के अन्दर तक अपनी अंगुली से घुमा-घुमा कर लगाया।



तेल लगाने के बाद अमित अपनी अंगुली नन्दिनी की चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। कभी-कभी वो अपनी अंगुली से उसकी चूत की घुंडी भी रगड़ देता था। नन्दिनी की चूत अब पानी छोड़ रही थी और इससे उसकी चूत चुदाई के लिये तैयार हो गयी। अमित फिर नन्दिनी की टाँगें फ़ैला कर उनके बीच घुटने के बल बैठ गया और नन्दिनी को समझाया कि अब कोई चिन्ता की बात नहीं है… अब उसको कोई दर्द नहीं होगा। उधर नीता और निशा नन्दिनी की एक एक निप्पल अपने मुँह में लेकर चूस रही थी। अमित ने उसके दोनों पैर हवा में उठा दिये और उसकी कमर को कस कर पकड़ लिया जिससे कि फिर से छुट न जाये। अमित ने फिर नन्दिनी की चूत पर अपना लंड रख और नन्दिनी के कुछ समझने के पहले ही एक जोर दार झटका दिया। नन्दिनी की चूत तेल और चूत से निकले पानी की वजह से काफ़ी चिकनी हो गयी थी जिससे कि अमित का लंड एक ही झटके से पूरा का पूरा अन्दर चला गया।



नन्दिनी इस अचानक हमले से तो पहले चिखी और अमित को अपने ऊपर से हटाने के लिये धक्का मारा, लेकिन इस बर अमित की पकड़ बहुत ही मजबूत थी। अमित अपनी कमर आगे पीछे करके अपना लंड नन्दिनी की चूत में धीरे-धीरे पेलने लगा। थोड़ी देर के बाद नन्दिनी को भी मज़ा आने लगा और तब वो अपनी कमर उठा-उठा कर अमित को चुदाई में सहयोग करने लगी। अमित और नन्दिनी दोनों एक दूसरे को ऊपर और नीचे से धक्के मार रहे थे और नन्दिनी की चूत में अमित का लंड तेज़ी से आ-जा रहा था। नीता और निशा अब चुदाई के जोड़े से हट कर दोनों की चुदाई देख रही थी और एक दूसरे की चूत में अंगुली कर रही थी। नन्दिनी और अमित दोनों एक दूसरे से चूत और लंड के साथ जुड़े हुए थे। थोड़ी देर के बाद नन्दिनी की चूत से पानी निकलने लगा तो अमित ने अपनी चुदाई की स्पीड और तेज़ कर दी क्योंकि अमित भी अब झड़ने वाला था। उसने आखिर के चार-पांच धक्के जोर से नन्दिनी की चूत में अपनी लंड से मारे और फिर नन्दिनी की चूत के अन्दर पूरा का पूरा लंड ठेल कर के झड़ गया। नन्दिनी भी अब तक झड़ चुकी थी। अमित का सारा पानी नन्दिनी की चूत में समा गया। दोनों हाँफ रहे थे और एक दूसरे को चिपके पड़े हुए थे। फिर अमित ने अपने लंड को नन्दिनी की चूत से निकाला तो उससे ढेर सारा पानी निकलने लगा। नीता और निशा ने जल्दी से अपना अपना मुँह नन्दिनी की चूत पर लगा दिया और उससे निकल रहे अमित और उसकी चूत के पानी के मिश्रन को जीभ से चाट चाट कर पी गयी। कहानी का शीर्षक ’तीन बहनों की एक साथ चुदाई’ है!



थोड़ी देर के बाद नन्दिनी ने अपनी आँखें खोली और मुसकुरा कर अमित से बोली, “तुम्हारे लंड से चुदवा कर बहुत मज़ा आया। आज हम तीनों बहनों ने तुमसे अपनी-अपनी चूत चुदवायी। तुम्हें किसकी चूत सबसे अच्छी लगी और कौन सी बहन को चोदने में तुम्हें मज़ा आया। सच-सच बताना।” अमित ने नन्दिनी की चूची को मसलते हुए कहा, “अरे चुदी हुई लड़कियों, भई मुझे तो तुम तीनों बहनों ही की चूत बहुत अच्छी लगी, हाँ तुम्हारी चूत बहुत टाईट थी और मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी। लेकिन तुम तीनों बहनों ने आज दिल खोल कर अपनी-अपनी चूत चुदवायी है। मुझे तो तुम तीनों बहनों की चूत को चोदने में मज़ा आया।” इतना सुन कर तीनों बहनें मुसकुरा दीं और फिर बोलीं, “अब फिर कब हमारी चूत को आपके लंड का भोग मिलेगा। जल्दी से कोई दिन निकालो और फिर हम तीनों बहनें तुम्हारे लंड के धक्के अपनी -पनी चूत में खाने के लिये हाज़िर हो जायेंगी।”



अमित ने कुछ देर सोच कर कहा, “ऐसा करो कि मैं संडे को नई दिल्ली एक सेमिनार में चार-पांच दिन के लिये जा रहा हूँ, तुम तीनों बहनें मेरे साथ चलो। मैं तुम सब को वहाँ रोज सुबह शाम और रात को वायागरा की गोली खा-खा कर चोदुँगा और तुम्हारी चूतों को चोद-चोद कर भोसड़ा बना डालुँगा। हाँ, वहाँ और भी लोग आयेंगे तुम लोग अगर चाहोगी तो तुम्हे और भी लंड अपनी-अपनी चूत में पिलवाने को मिल जायेंगे और तुम तीनों बहनें मज़े से अपनी अपनी चूत को लम्बे-लम्बे और मोटे-मोटे लंड से चुदवा सकती हो।”



यह सुन कर तीनों बहनों ने अमित के साथ नई दिल्ली जाने का प्रोग्राम बना डाला। फिर तीनों बहनों ने अपने-अपने कपड़े पहन लिये और अमित ने सिर्फ़ एक लुन्गी अपनी कमर पर बांध ली। सबने बैठ कर नाश्ते के साथ एक-एक पैग और पिया। कहानी का लेखक अंजान है!



फिर अमित तीनों बहनों को बाहर छोड़ने गये। बाहर जाने के पहले दरवाजे के पास अमित ने उनको फिर से अपनी बाँहों में ले कर उनको चुम्मा दिया और इन तीन बहनों की चूचियाँ उनके कपड़ों के ऊपर से दबायी। नीता ने फिर अमित को अपनी बाँहों में लेकर चुमा और फिर अपनी साड़ी उठा कर अमित से अपनी चूत पर चुम्मा देने को कहा। अमित ने नीता की चूत पर एक जोर दार चुम्मा दिया और उसकी चूत की घुंडी को तीन-चार बार अपनी जीभ निकाल कर चाट दिया। निशा और नन्दिनी अपनी चूत पर अमित का चुम्मा नहीं ले सकी क्योंकि वो सलवार और जीन्स पहने हुए थी और इसीलिये वो अपनी चूत नहीं खोल सकी। फिर नीता ने अमित की लुंगी हटा कर उनके लंड का सुपाड़ा खोल कर चुमा। नीता की देखा देखी निशा और नन्दिनी ने भी अमित के लौड़े को चुमा और उनके सुपाड़े को मुँह में ले कर चुसा और फिर अपनी-अपनी चुदी हुई चूत में अमित के लंड से निकला हुआ चुदाई का पानी भर कर अपने घर को चली गयीं और अमित अपने कमरे में आकर सो गया। वो बहुत थक चुका था।



!!! समाप्त !!!