माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

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The Romantic
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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 15:49

ओह हाँ मेरे बेटे चूस चूस मेरी चूत के दाने को हाँ बेटा ओहऽऽऽ और जोर से चूस ले बेटा यही तो तेरी माँ के मजे का सोत्र है। इसी से तो तेरी माँ को मजा मिलता है। चूस ले बेटा खा जा मेरी चूत का दाना साला बडा परेशान करता है मुझे मेरी नीदं हराम कर दी है इसने रातो को सोने नही देता और बोलता है मुझे मजा दो। चूस चूस जोर से हाँ ऐसे ही। उसकी हालत बहुत खराब थी और अब वह कभी भी झड सकती थी। और वह पागलो की तरह जोर जोर से चिल्ला रही थी। फिर उसने अपनी टाँगी उठा कर मेरे कंधो पर रख दी और मेरा सर पकड कर अपनी चूत पर दबा लिया। और मस्ती मे अपनी टाँगे मेरी पीठ पर पटकने लगी जिससे उसकी ऊँची ऐडी की सैंडल मेरी पीठ पर जोर जोर से लग रही थी और थोडा दर्द भी हो रहा था।

पर मैं पुरे जोश से उसकी चूत चाटने मे जुटा हुआ था मेरा लंड पर नाडा बंधा था पीठ पर उसकी सैंडलो कि मार पड रही थी और मेरा लंड और पीठ दोनो दर्द कर रहे थे। पर इस दर्द मे भी उसकी चूत चाटने से मेरी मस्ती बढती जा रही थी। अब मैं भी रीमा को झडा देना चहाता था। यह सोच कर मैंने उसकी चूत के उपरी भाग को मुँह मे भरा और अपने दाँतो के बीच दबा लिया। मेरे दाँतो के बीच उसकी चूत का दाना आ गया और रीमा एक दम दर्द और मस्ती मे फडफडा उठी। और उसके मुँह से एक जोरदार चीख निकल गयी और बोली हाय रे मार डाला जालिम मै गयी मेरा पानी छुट रहा है रे क्या मस्त काटा रे मेरे लाल। झड गयी ओह उसके पुरे शरीर मे कपकपी छुट गयी थी।

फिर उसने अपने चूतड को उछाल कर उसने और मेरे मुँह से सटा दिया और मेरे सर के बाल पकड कर कस कर मेरे मुँह को अपनी चूत पर दबा लिया। और मेरे सिर को अपनी गोरी गोरी माँसल जाँघो मे दबा लिया। मेरा गले से उपर का हिस्सा पूरी तरह से उसकी कैद मे आ गया। मुझे ऐसा लग रहा था की मेरा दम ही घुट जायेगा। रीमा बहुत जोर से झड रही थी। उसकी चूत से पानी निकल कर उसकी पैन्टी को भीगो रहा था। और उस पानी को मैं पी रहा था। रीमा अपनी आँखे बंद करके झडने का मजा ले रही थी। और फिर हम दोनो थोडी देर तक ऐसे ही पडे रहे और मैं उसकी चूत का रस पीता रहा। थोडी देर बाद जब वह पूरी तरह से शांत हुयी और धीरे धीरे उसने अपनी टाँगो कि पकड ठीली कर दी। तब जाकर मुझे कुछ साँस आया।

फिर हम काफी देर तक इसी तरह से पडे रहे और हम मे से कोई भी कुछ नही बोला। रीमा की चूत से सारा रस निकल चुका था और उसको मे पैन्टी के जरिये पी गया था। जब वह पूरी तरह से शान्त हो गयी तो उसने अपन मुँह उठाया और मेरे तरफ़ देख कर बोली हाय रे मेरे लाल क्या कमाल है तेरे मुँह मे क्या मस्त झडाया है तुने मैं तो पुरी निहाल हो गयी रे। बहुत मजा आया रे जालिम तुझे मजा आया बेटा ये तेरी पहली चूत चटायी थी न। मैंने कहा हाँ माँ मुझे मजा आया तुम्हारी चूत का रस तो शरबत है माँ बडा मजा आया इसको पीने मे। इस पर रीमा ने कहा हाँ बेटा अभी तो बहुत शरबत बचा है मेरी चूत मे तेरे लिये चिंता मत कर अच्छी तरह से तुझको खूब शरबत पिलाऊँगी।

फिर रीमा बोली बेटा सच सच बता अगर तुझे मजा आ रहा है ना मेरे साथ। मैंने कहा हाँ माँ। अगर मैं तुझसे पूछूँ अभी कि अगर तू मेरी चूत फिर से चाटेगा कि मुझे चोद कर चूत कर मजा लेगा तो बता तू क्या पंसन्द करेगा। मैंने कहा मेरी प्यारी चुदक्कड माँ मैं तुम्हारी चूत चूस कर तुमको मजा देना पंसन्द करूँगा। मेरे बात सुनकर रीमा बहुत खुश हुयी और मेरे माथे पर किस कर लिया जैसे एक माँ प्यार से अपने बेटे का चुम्बन लेती है। फिर बोली बेटा मैं बहुत खुश हूँ कि तुमने अपने मजे से ज्यादा मेरे मजे के बारे मे सोचा। ठीक हैं आज एक ही बार मैं चूत चटा कर छोड देती हूँ पर अगली बार पूरी तरह से कई आसन मे चूत चटा कर पूरा मजा लूँगी।

मैं अभी भी उसकी टाँगो के बीच बैठा था।

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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 15:51

रीमा ने कहा मेरे राजा बेटे चल अब मेरे बाकी के कपडे उतार कर मुझको पूरा नंगा कर दे। और अपने धैर्य का इनाम यानी के मेरा नंगे बदन का भोग कर ले बेटा। फिर मैं उठ कर खडा हो गया और रीमा भी मेरे सामने उठ कर खडी हो गयी और बोली ले बेटा उतार दे मेरे कपडे कर दे मुझे नंगा। मैंने आगे बढ कर उसके मम्मो की दोनो घूडीयो को एक एक चुम्बन दिया फिर उसके पीछे चला गया और उसकी बाँहो के नीचे से हाथ डाल कर उसके ब्रा के हुक पकडने की कोशिश करने लगा। इस पर रीमा बोली बेटा तू बडा ही शैतान है। मेरे मम्मो को महसूस करने के लिये और अपना लंड मेरी टाँगो से भिडा कर उससे मजा लेने के लिये पीछे से मेरी ब्रा के हुक खोल रहा है। मैं रीमा की बात सुनकर हंस दिया और बोला हाँ माँ। फिर रीमा ने मेरे हाथ पकड कर अपनी ब्रा की हुक पर रख दिये।

बोली ले उतार अब इनको बडे नखरे करता है। मैंने पहले उसका एक हूक फिर दुसरा हुक खोल दिया उसकी ब्रा एक झटके से खुल गयी और उसके कबूतर पिजरे से आजाद हो गये। मैंने ब्रा के दोनो हिस्से पकड कर उसकी ब्रा उतार दी उसने भी अपने हाथ उपर उठा कर मुझे ब्रा उतारने मे सहायता की। ब्रा उतार कर मैंने उसको गहरी साँस लेकर सुघने लगा उसके दोनो कपो को भी सुंघा फिर उन कपो को एक एक किस करके रीमा को वापस दे दिया। उसकी पीठ अभी भी मेरी तरफ थी। रीमा बोली बेटा ब्रा को प्यार करके अपने थूक से गिला नही करेगा क्या। मैंने कहा करूँगा माँ पर अभी नही बाद मे। रीमा ने कहा ठीक है। और उसने ब्रा दूसरे कपडो के पास फेंक दी।

अब वह समय आ गया था जब मैं उसके मम्मो को नाप तोल के देखना चाहता था। उनको दबा कर देखना चहाता था। लेकिन सबसे पहले मैं उसके मम्मो को जी भर के देखना चाहता था। मैंने रीमा से कहा माँ अब तूम पलट कर खडे हो जाओ क्योकी मैं तुमहारे मम्मो को जी भर कर देखना चाहता हूँ। रीमा बोली ठीक है। फिर रीमा ३-४ कदम आगे बढी और फिर पलट कर खडी हो गयी। और मेरी आँखो के सामने रीमा का दूसरा सबसे सुन्दर अंग आ गया। पहला सबसे सुन्दर अंग उसके चूतड और उसकी गाँड का छेद था। उसके भारी भरकम चूचीयाँ मेरे सामने थी। उमर के कारण और इतनी भारी होने के कारण उसकी चूचीयाँ थोडी लटक गयी थी पर देखने मे बहुत ही कडी लगती थी। उसकी घुडीयाँ गहरे भूरे रंग की थी और मस्त होकर खडी थी और करीब १ इन्च लम्बी थी। उसकी घुडीयो के चारो और गहरे भूरे रंग का गोला था और वह काफी बडा था।

मुझे बडे उम्र की औरत की बडी बडी लटकी हुयी चूचीयाँ बहुत अच्छी लगती है। तो मेरे लिये तो उसकी चूचीयाँ वरदान थी। एक मीठा फल थी और मैं उस फल को खाने के लिये बेताब था। फिर मैं आगे बढ कर उसके पास चला गया और रीमा से बोला माँ तुमने अपना ये किमती जेवर इतनी देर तक मुझसे क्यो छुपा कर रखा था। रीमा ने कहा बेटा मैंने थोडी ये जेवर छुपा कर रखा था तुम ही इसकी तरफ नही देख रहे थे। माँ क्या मैं तुम्हारे इन मस्ताने गोरे गोरे बडे बडे बॉल्स को अपने हाथो मे लेकर देख सकता हूँ। हाँ बेटा क्यो नही मेरे इन बॉल्स पर सबसे पहला हक तुम्हारा है क्योकी तुम मेरे बेटे हो मेर लाल हो।

तुम जब चाहे मेरे किसी भी अंग को छू सकते हो पर जिस तरह से तुम पहली बार मेरे अंग को छूने के लिये इज्जात माँग रहे हो मुझे बडा अच्छा लगा। मैं भी यही चाहती थी अपने बेटे से। लेकिन पहली बार समझे आगे से हक से जो चाहे जब चाहे करना समझे मैं कभी भी मना नही करुगी ठीक है बेटा मैंने कहा हाँ माँ। फिर रीमा ने कहा फिर खडा खडा देख क्या रहा है। पकड ले मेरे मम्मे अपने हाथो मे खेल इनके साथ। फिर मेने अपने हाथ सबसे पहले उसकी गोलाईयो पर फिराने शुरु किये। उसकी गोलाईयाँ बहुत ही चिकनी और मुलायम थी। मैंने अपने हाथ उसके दोनो मम्मो के बीच मे रखे और धीरे धीरे उसकी पूरी गोलाईयो के चारो और फिराने लगा।

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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 15:51

रीमा मेरे को मस्ती भरी निगाँहो से देख रही थी। उसकी आँखो मे फिर से वासना के डोरे पडने लगे थे। मैं अभी भी उसकी गोलाईयो पर हाथ फेर रहा था जिससे उसकी घुडियाँ मेरी हथेली से टकरा रही थी। उसकी कडी कडी घुडीयाँ मेरी मस्ती और बढा रही थी मेरा लंड तो कब से लौहे की रॉड के तरह खडा था जैसे रीमा सुन्दरता की देवी को सलामी दे रहा हो। फिर मैंने अपने अपने हाथो को उसके मम्मो के नीचे रख दिया और उसके मम्मो को उठा कर उनका वेट पता करना चाहता था। जैसे ही मैंने उसके मम्मो को अपने हाथो से उठाय तो मेरे हाथ उसके मम्मो के भार से नीचे हो गये। रीमा ने यह देख लिया और बोली थोडे भारी है बेटा तुमको पहली बार मे थोडी दिक्कत होगी मैं कुछ मदद करू क्या इनको उठने मे।मैंने कहा हाँ माँ तुम्हारे मम्मे तो बहुत भारी है। तुम्हारा एक एक मम्मा १ किलो से कम नही होगा। रीमा बोली हाँ बेटा इतने बडे और भारी हैं तभी तो सबकी नजर इन पर रहती। ला बेटा तू पहली बार मम्मो को छू रहा है इसलिये तु इस काम मे थोडा अनाडी है। २-४ बार मेरे मम्मो से खेलेगा तो सीख जायेगा भारी मम्मो को उठाना फिर तेरी माँ है किस लिये तुझे सीखाने के लिये ही तो। मैं कहा तुम ठीक कहती हो माँ। रीमा ने बडे प्यार से मेरी तरफ देखा जैसे एक माँ अपने बटे की तरफ देखती है और कहा बेटा ला इन मोटी मोटी गोलाईयो का भार मुझे दे दे। तेरे अनाडी हाथ इनका बोझ अभी नही उठा सकते। तू पहले देख तेरी ये माँ कैसे इनको उठाती है और कैसे इनको अपने हाथो मे सम्भाल कर रखती जिस देख कर तू भी कुछ दिनो मैं सीख जायेगा की मेरी मस्त गोलाईयो का भार उठाना।

रीमा का इस तरह से मुझे अनाडी कहना पता नही मुझे क्यो अच्छा लगा। और बात भी सही थी रीमा इतने सारे लंडो को अपनी चूत मे लील चूकी थी कि उसे पता था की एक जवान छोकरा पहली बार एक मस्ताने बदन के साथ खेलने मे क्या क्या गलती कर सकता है। और मे अपने आप को बहूत खुशकिसमत समझ रहा था की रीमा से मुझे चुदायी का ज्ञान मिल रहा है। फिर मैंने अपने अपने हाथ रीमा के मम्मो पर से हटा लिये और मेरे हाथ हटाने से उसके मम्मे एक झटके के साथ नीचे गिरे। फिर रीमा बोली ला बेटा मैं तुमको दिखाती हूँ कि मेरी इन बडी बडी गोलाईयो के साथ किस तरह से खेलते हैं। मेरी आँखे तो सिर्फ उसकी चूचीयो पर ही जमी हुयी थी।

फिर रीमा ने अपनी दोनो हथेलियो को एक दम सीधा कर लिया और उनको अपनी चूचीयो की गोलाईयो के बिलकुल नीचे रख लिया और फिर मेरे तरफ देखते हुये अपनी हथेलियो के अपनी गोलाईयो को उपर उठा लिया। जिससे उसकी थोडी लटकी हुयी चूचीयाँ उपर को उठ कर सीधी हो गयी और उनकी घुडीयाँ एक दम तन कर नूकीली होकर मेरे तरफ शरारत भरी नजर से देखने लगी जैसे कह रही हो देखा रीमा ने कितने प्यार से हमको अपनी हथेलियो से सीधा कर दिया। इस समय जिस तरह से रीमा ने अपनी चूचीयो को अपने हाथो से उठा रखा था ऐसा लग रहा था जैसे वह अपनी इस मस्त चूचीयो को थाली मे परोस कर मुझे दे रही है और कह रही हे ले बेटा ये तेरी माँ तेरी जिंदगी का सबसे मस्त खिलौना तेरे लिये लेकर आयी है।

फिर रीमा ने कहा देखा बेटा तेरी माँ ने कैसे इनको अपनी हथेली मे उठा लिया। हाँ माँ देखा अगली बार मैं भी ऐसे ही इनको उठाउगाँ। फिर रीमा ने कहा ले बेटा अब मैं इनको इसी तरह उठा कर रखती हूँ तु मेरी चूचीयो के साथ खेल ले जैसे खेलना चाहता है। मेरे मुँह से उसकी चूचीयो को देख कर लार निकल रही थी। मेरे सामने गोरी गोरी बडी बडी चूचीयाँ थी जिन के साथ खेलने के मैंने कितने सपने देखे थे क्या क्या करने का सोचा था आज मैं वह सब कर सकता था। फिर मैंने उसकी चूचीयो पर अपने हाथ रख दिये और उनपर अपने हाथ फिराने लगा मेरा मन बहुत उनको मसलने का कर रहा था पर सबसे पहले मै उसकी चूचीयो पर हाथ फेर कर उनकी गोलाईयाँ नापना चाहता था।

फिर मैं इसी तरह उसकी चूचीयो के साथ खेलता रहा रीमा फिर से मस्त हो चली थी। और आँखे बंद करा कर अपनी चूचीयो कि मुझसे हाथ फिरवा रही थी। रीमा मस्ती मे बोली बेटा तेरे हाथो मै क्या जादू है तूने तो फिर से मेरे बदन मे मस्ती भर दी। लगता है तुझे मेरी चूचीयाँ पंसन्द आयी है। मैंने कहा हाँ माँ बहुत। मुझे उसके मम्मो पर हाथ फेरते हुये बहुत देर हो गयी थि अब मैं उसके मम्मो को मसल देना चाहता था। रीमा भी अपनी चूचीयो कि कूटायी करना चाहती थी बोली बेटा अब बहुत देर हो गयी इनपर हाथ फेरते हुये अब जरा इनको मसल भी मजा ले पूरा इनको मसल कर पता कर कितनी कडी है मेरे चूचीयाँ।

हाँ तुम ठीक कहती हो माँ मेरा भी मन बहुत कर रहा है इनको मसलने का पर मैं क्या करु इन चूचीयो ने मुझको समोहित कर लिया है और बस मैं इनकी सुन्दरता को ही निहारता जा रहा हूँ। हाँ मैं समझ सकती हूँ बेटा एक तो तूने आज तक चूचीयाँ नही देखी और देखी तो मेरी गोरी बडी भारी चूचीयाँ। मेरी चूचीयाँ देख कर तो अच्छे अच्छे खिलाडियो का होश गुम हो जाता है फिर तुने तो इस विधालय मे अभी दाखिला लिया है। फिर रीमा बोली बेटा अब मुझसे खडा नही हुआ जा रहा है। अब मैं सोफे पर अपनी टाँग फैला कर बैठती हूँ फिर तू मेरी चूचीयो को मसल और प्यार कर। फिर वह पलट कर अपनी कमर हिलाती हुयी सोफे के पास गयी और पलट कर सोफे पर बैठ गयी और फिर उसने अपनी टाँगे फैला ली।