माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

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The Romantic
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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 30 Oct 2014 08:10

मैं अपना हाथ उसके चूतडो तक ले गया और उसके चूतड को महसूस करने लगा। क्या मोटे और गोल मटोल चूतड थे रजनी की रजनी का रंग काला था और उसके काले चूतड सोच कर मेरे लंड मे तूफान उठ गया था। मुझे काले रंगे के चूतड बहुत पंसद थे। भारी चूतडो वाली औरत मुझे बहुत भाती थी। रजनी का थोडा पेट भी निकला था इसका मतलब उसकी नाभी भी बडी गहरी होगी ये सोच कर ही मेरे शरीर में एक मस्ती की लहर दौड गयी। उसकी गहरी नाभी में जीभ घुसा कर चाटने के इच्छा मेरे अंदर जन्म लेने लगी। फिर मैंने रजनी के चूतड को हाथ मे पकड कर मसल दिया बडा ही मांसल चूतड था रजनी का दबाने में मजा आया। रजनी की कपडो मे लिपटे जिस्म को अपने नंगे जिस्म से लिपटा कर मुझे बडा ही अच्छा महसूस हुआ। रजनी भी कम नंही थी और अपने हाथो मेरे नंगे बदन पर चला रही थी और मेरे चूतड जांघे और कमर को छू कर उसको प्यार से सहला रही थी। जैसे एक औरत अपने मर्द को उत्तेजित करने के लिये करती है।

रीमा नंगी ही हुम दोनो को निहार रही थी और अपने हाथो से अपनी चूचीयो से खेल रही थी हमारा मिलन उसको उत्तेजित कर रहा था। और उसकी घुंडिया एक दम तन कर खडी थी। थोडी देर हम दोनो ऐसे ही एक दूसरे के आलिंगन मे बधे रहे और मैं रजनी के मस्त चूतडो को सहलाता हुआ उसके बदन का अहसास उसको अपने से चिपका कर करता रहा। मेरे लंड जो के एक दम तन कर खडा था और उसमे से थोडा सा पानी जो मूत्र छिद्र से निकल रहा था रजनी की स्कर्ट पर लग रहा था। अरे मेरे प्यारे बेटे अपनी माँसी को एक चुम्बन नंही देगा क्या क्या तू अपनी माँसी से पहली बार मिल रहा है और तूने मुझे अभी तक प्यार भरा एक चुम्बन भी नंही लेने दिया अपनी माँसी पंसद नंही आयी क्या मेरे लाडले रजा बेटे को। नंही माँसी आप तो बहुत ही सुंदर हो ले लो मेरा चुम्बन और जो करना है करो मै तो आपका बेटा ही हूँ क्या अपने बेटे को चुम्बन लेने के लिये आपको पूछना थोडी ही पडेगा। ये तो आप का हक है जो आपकी मर्जी वोह कर सकती है मेरे साथ। ये क्या मेरे लाल मैं सिर्फ सुंदर हूँ एक सेक्सी मस्तानी चुदक्कड औरत नंही लगती क्या तेरे को क्या माँसी के इस माँसल भरपूर मोटे जिस्म से तुझे प्यार नंही है क्या मेरा ये मस्ताना बदन जो कपडो मे नंही समा पता और बाहर निकलने को बेताब है तुझे प्यारा नंही है। तेरी माँ तो कहती है तुझे थोडी मोटी औरतें पंसद है फिर भी तूने मुझे सिर्फ सुंदर कहा या फिर इस बात से घबरा रहा था कि कंही माँसी क्या कहेगी अगर तूने ऐसे शब्दो का इसतमाल किया बोल बेटा रजनी की बात सुन कर मैं तो थोडा सकपका गया बात भी ठीक थी मैंने इसलिये उसकी सुंदरता का पूरा वर्णन नंही किया था की पता नंही रजनी क्या सोचे मेरे बारे मैं मैंने अपना सर हिला कर उसकी बात में अपने सहमती जाहिर कर दी।

अरे मेरी बहन के शर्मीले बेटे अपनी माँसी के सामने नंगा खडा है और उसके कपडो मे कैद बदन को देखकर ही तेरे लंड का ये हाल है जो कि तेरे माँसी को तेरी सारी कहानी बयान कर रहा है फिर भी तू शर्मा रहा है। अरे मेरे लाडले अपनी माँ माँसी से भी कोई शर्म करता है क्या बोल तू जो भी बोलना है तुझे और जो भी करना है तुझे कर अब कभी शर्माना नंही समझा। रीमा बहन तुमने लगता है इसकी शर्म अभी तक निकाली नंही है तभी तो देखो अभी भी लडकियो की तरह शर्मा रहा है। लगता है हम दोनो को मिल कर इसकी ये शर्म दूर करनी होगी। हाँ रजनी तू सही कह रही है कल से कह रही हूँ इसको कि इतनी शर्म काहे की पर सुनता हि नंही अब तू आ गयी है न निकाल दे इसकी शर्म। हम दोनो अभी भी एक दूसरे के आलिंगन मै बधें अभी भी खडे थे। ला अब चुम्बन तो दे की चुम्बन भी नंही देगा अपनी माँसी को पहले ही इतना तडपाया है तूने मुझे और अपनी माँ को इतने सालो हमसे दूर रहा और अब चुम्बन भी नंही दे रहा। मैं भी रजनी के होठों का चुम्बन लेने को बेताब था। रजनी के होंठ रीमा की तरह थोडे मोटे तो नंही थे पर फिर भी रस भरे थे। मैंने अपने चेहरे को आगे बढाया और रजनी के होंठो पर रख दिया और उसके होंठो का एक चुम्बन ले लिया। ये हुयी न कुछ मेरे बेटे जैसी बात सीधा मेरे होंठो पर चुम्बन लिया तूने। चल अब मैं तुझे प्यार करूगी। रजनी ने फिर मेरे चहरे पर चुम्बनो की बौछार कर दी मेरे गाल माथे पर कयी चुम्बन लिये जिससे उसकी लिप्सटिक के निशान मेरे चहरे पर बन गये।

क्रमशः..................

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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 30 Oct 2014 08:11

गतांक आगे ...................

देख कितना सुंदर लग रहा है न हमारा लाल हाँ रजनी तू ठीक कह रही है। चल अब दूर हटो तुम दोनो एक दूसरे से बडी भूख लगी है हम लोग अब खाना खाते है बडी भूख लगी है खाने के बाद दोनो प्यार से मिलना ठीक है। हम दोनो का मन तो नंही था अलग होने का पर पेट पूजा करना भी जरूरी था क्योकी बडी जोर से भूख जो लगी थी। तकी आगे होने वाली कारवाही के साथ पूरी तरह से न्याय किया जा सके। रजनी ने मेरे होठों का फिर से एक चुम्बन लिया और और मैंने उसके मोटे चूतड को हलके से मसला और हम दोनो अलग हो गये। फिर हम तीनो ने मिल कर खाना टेबल पर लगाया और दोनो ने मुझे अपने बीच मे बैठने को कहा रीमा तो पहले से ही नंगी थी पर रजनी ने अपने कपडे नंही उतारे और फिर हम ने मिल कर खाना खाया। इस बीच रजनी रीमा से पूछती रही की कल क्या हुआ और रीमा उसको बता रही थी पर जान बूझ कर उसने मूत पीने वाली बात रजनी हो नंही बतायी। और दोनो औरतो ने बडे ही प्यार से मुझे अपने हाथो से खाना भी खिलाया जैसे वो दोनो अपनी ममता मुझ पर लुटाना चाहाती हों।

वैसे रीमा दीदी ये तो नांसाफी है तुमने कल पूरे दिन अपने बेटे के साथ अकेले मजा किया और मुझे तुम्हारे साथ मिल कर मजा लेना होगा मैं तो ठीक से मिल भी ना पाऊंगी अरे मेरी जान नाराज क्यो होती है अभी खाना खा ले फिर तुम दोनो आपस में ढंग से मिल लेना और भोग लेना एक दूसरे को अच्छे से मैं बेठ कर देखूंगी और जब। और फिर अभी तो मेरा लल्ला यंही है कुछ दिन मेरे जाने के बाद बुला लियो अपने घर और जी भर के भोगना एक दूसरे को। ठीक है दीदी बात तो सही है चल जैसे तू बोले। और ये तो मेरा बेटा है माँ ही तो सिखायेगी इसको चुदायी तभी तो तेरे को मजा दे पायेगा कल तक तो बेचारे ने नंगी औरत तक नंही देखी थी चोदना तो दूर की बात है इसलिये इसको कुछ ज्ञान तो देना ही था ना नही तो तू बोलती कैसी माँ है इतना बडा हो गया लडका और अभी तक चूत चोदना भी नंही आया बोल बोलती की नंही। वह दोनो इसतरह की बाते कर रही थी और साथ ही साथ खाना भी खा रही थी और मेरे लंड के साथ भी खेल रही थी कभी रजनी मेरे लंड को हाथ मे पकड लेती तो कभी रीमा दोनो ने मेरे लंड को एकदम मस्त खडा कर रखा था। वह दोनो मुझे बिल्कुल गर्म रखाना चाहाती थी और मैंने कल देखा ही था की रीमा को लंड को तडपाने में कितना मजा आता था और मुझे लंड पर कंट्रोल सिखाने के लिये उसने मेरा लंड नाडे से भी बाँध दिया था। लगता आज भी दोनो का मेरे साथ वही करने का इरादा था पर श्याद मैं भी यही चाहाता था क्योकी मुझे भी तडपने में बहुत मजा आता था।

हम लोगो ने इसी तरह मस्ती की बांते करते हुये खाना खत्म किया और बाथरूम मे जाकर अपने हाथ धोये रजनी से सारे बर्तन ट्रे में रखे और ट्रे को कमरे के बाहर रख दिया और दरवाजे पर डू नॉट डिस्टर्ब का बोर्ड लगा दिया। अब हम लोगो को कोई भी तंग नही करेगा। और हम आराम से मजा कर सकते है चलो सोफे पर बैठते है रीमा ने कहा और खुद जाकर छोटे सोफे पर बैठ गयी और रजनी और मैं बडे सोफे पर। लो अब तुम दोनो शुरु हो जाओ फिर मत कहना की मुझे समय नंही दिया हाँ बेटा मिल ले ढंग से अपनी मासी से बडा रस है इसके बदन मे पी ले रसीला आम। रजनी और मैं एक दूसरे के बगल में बैठे थे मैंने अपने हाथ रजनी की जांघो पर रखे और उसकी और देखते हुये प्यार से उसकी जांघो पर हाथ फेरने लगा। हम दोनो के दूसरे की तरफ देख रहे थे दोनो की आँखो मे वासना भरती जा रही थी रजनी ने भी अपना हाथ मेरी नंगी जाँघ पर रख दिया था और प्यार से मेरी जाँघ को सहला रही थी उसका हाथ धीरे धीरे मेरे लंड की तरफ बढ रहा था और इन सब हरकतो के कारण अभी भी पूरी तरह मस्त तन कर एक सिपाही की तरह खडा था।

मैं भी रजनी की स्कर्ट को धीरे धीरे उपर खिसका रहा था जिससे मैं उसकी जाँघो को सही से स्पर्श कर सकूं। रजनी ने काले रंग की स्टाकिंग भी पहनी हुयी थी मैंने उसकी स्कर्ट को थोडा सा उपर कर दिया और उसकी स्टाकिंग मै कैद मोटी जाँघो पर हाथ फेरने लगा ज्यादा उपर मैं उसकी स्कर्ट को नंही कर पाया क्योकी उस्की स्कर्ट काफी टाईट थी। रजनी का हाथ भी अब मेरे लंड पर था और वह अपनी उंगलियो से उसे प्यार से सहला रही थी। कभी लंड के उपर अपनी उंगलियाँ चलाती तो कभी लंड के नीचे तो कभि मेरे टट्टो पर। रीमा की तरह रजनी को भी श्याद लंड से खेलना बहुत पंसद था। हम दोनो पूरा समय लेकर एक दूसरे के बदन का मजा लेना चाहते थे। बडा मस्त हो रहा है तेरा लंड मुझे देखकर अभी तो मैं नंगी भी नंही हुयी अभी तेरा ये हाल है तो नंगी हो गयी तो क्या होगा झड तो नंही जायेगा मुझे नग्न रुप में देख कर नंही माँसी माँ ने कल मुझे लंड खडा रखने की अच्छी शिक्षा दी है अब मैं काफी देर तक अपने लंड को संयम मे रख सकता हूँ और मैं पूरी कोशिश करूंगा की आपको पूरा मजा देने के बाद ही मेरा लंड झडे आपको बिल्कुल भी निराश नंही करूंगा माँसी। चल देखते है रीमा दीदी बडा ही आज्ञाकारी बेता है तुम्हारा देख कैसे बोल रहा है की अपने पर पूरा संयम रखूंगा रीमा की तरफ देखते हुये रजनी ने कहा रीमा सोफे पर बैठी हम लोगो को देख रही थी और अपने हाथ अपने नंगे बदन पर फिरा रही थी उसकी घुडियाँ तन कर खडी हो गयी थी। इसका मतलब था वह हम दोनो को देख कर गर्म हो रही थी।

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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 30 Oct 2014 08:11

हाँ मेरे अच्छे भाग्य की मुझे दीपक जैसा बेटा मिला जो अपनी माँ से इतना प्यार करता है कि अपने मजे पर भी काबू रखने को तैयार है। रजनी और मैं एक दूसरे के बहुत पास बैठे थे मेरी जांघे रजनी की टाँगो से स्पर्श कर रही थी। और उसकी स्टाकिंग मे लिपटे पैरो पर मेरे नंगे पैरो का स्पर्श मुझे बहुत भा रहा था और मेरे लंड को उत्तेजित भी कर रहा था। मैंने रजनी के स्कर्ट के अंदर अपना हाथ डाला और उस्की स्कर्ट को खींच कर और भी उपर कर दिया जिससे एक तरफ से उसकी स्टाकिंग जहाँ बेल्ट से जुडी थी वह दिखायी देने लगा और उसकी काली मोटी जांघे भी नग्न हो गयी। रजनी की जांघे रीमा से भी मोटी थी अगर मैं कहूँ की रजनी का बदन रीमा के बदन से हर जगह पर मोटा था तो गलत ना होगा बहुत से लोग रजनी को मोटी और बेडोल कहते पर मेरे लिये तो वह किसी अप्सरा से कम नंही थी। और आज हम दोनो वासना के पूजारी एक दूसरे को भोगने के लिये तैयार थे। मैंने रजनी की टाँगो पर अपनी टाँग रगडते हुये उसकी नंगी जांघ पर अपने हाथ को फिराने लगा मैं अपने उगलियाँ उसकी जांघ पर फिरा रहा था और कभी अपने पूरी हाथ से उसकी जांघ सहलाने लगता। इसका सीधा असर शायद उसकी चूत पर हो रहा था क्योकी अब उसके हाथ भी मेरे लंड पर जबर्दस्त जोर जोर से चल रहे थे। हम दोनो से एक दूसरे की तरफ देखा हम दोनो की आंखे नशीली हो चुकी थी और वासना की गर्मी मे धध्क रही थी। मैंने उसकी आंखो मे देखा फिर उसके होंठो की तरफ देखा जो मस्ती मे थोडे कपकपा रहे थे जो चूमे जाने को बेताब थे और रस से भरपूरे भर चुके थे और कह रहे थी आओ कोई मर्द तो आओ और अपने होंठो मे हमको भर लो और हमारे रस को पी लो।

मैं भी उनका रस पीने को बेताब था अब उन लाल लाल होंठो से दूर रहना मेरे लिये बहुत कठिन था। मैंने अपना दूसरा हाथ रजनी के गर्दन पर रखा और उसकी गर्दन पर हाथ फेरने लगा जैसे मैं उसे जता देना चाहाता था की अब मैं क्या करने वाला हूँ। वह भी मेरी इच्छा हो समझ गयी थी इसलिये उसने एक हाथ से मेरा लंड हाथ मे थामा और प्यार से धीरे धीरे मुठ मारने लगी और एक हाथ मेरी छाती पर फिराने लगी। उसकी मुलायम उंगलिया मेरी घुंडियो से भी टकरा रही थी जो कि उत्तेजना के कारण एक दम खडी हो गयी थी। थोडी देर हम दोनो एक दूसरे को निहारते रहे और जब काबू करना बिल्कुल मुश्किल हो गया तब मैंने अपने हाथो से उसकी गर्दन को अपनी और खींचा जिस्से उसका चेहरा मेरे चेहरे के बिल्कुल पास आ गया और उसके कपकपाते होंठ बिल्कुल मेरे होंठो के सामने थे। मैंने अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिये हमारे होंठ से होंठ मिल गये और हम कुछ देर ऐसे ही एक दूसरे की आँखो मे आँखे डाल कर चुप चाप एक दूसरे को देखते रहे होंठो के गर्मी हमारे बदन की प्यास को और जगा रही थी। फिर मैने रजनी के होंठो का एक चुम्बन लिया और अपना हाथ उसकी जांघो से हटा कर उसकी मोटी कमर पर रख दिया और उस्की कमर को सहलाते हुये मैंने उसके होंठो पर फिर से अपने होंठ रखे और बेतहाशा उसे चूमने लगा। वह भी मुझे चूम रही थी उसने एक हाथ मेरी कमर में डाल कर मेरी पीठ सहला रही थी और दूसरा हाथ अभी लंड पर था जिस्से वह मेरे लंड का मुठ मार रही थी।

मैं उसके होंठो को अपने होंठो मे भर कर चूस रहा था कभी दोनो होंठ अपने होंठो मे भर कर चूमता तो कभी एक होंठ को रजनी भी मेरे होंठो को साथ ऐसा ही कर रही थी हम दोनो एक दूसरे के प्यार मे पागल हो रहे थे। उसकी लिप्सटिक मेरे होंठो पर लग गयी थी। मैं होंठ चूसते हुये अब उसकी कमर मसलने लगा था उसकी कमर में काफी माँस था जिसको मसलने मे मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैंने अपना दूसरा हाथ उसकी गर्दन से निकाल कर उसके बदन पर फेरने लगा कमर पीठ फिर मेरा हाथ जाकर उसकी मोटी चूचीयो पर ठहरा। मैंने पहले उसकी चूचीयो के मोटायी को अपनी हाथ से महसूस किया ये जानने को कोशिश की की उसकी चूचीया कितनी बडी और भारी है। उसकी चूची बहुत ही मोटी थी जो कि मेरी हथेली में नंही समा पा रही थी। थोडी देर अपना हाथ उसकी चूचीयो पर फिराने के बाद मैंने अपना हाथ वहाँ से हटा लिया और फिर से उसकी गर्दन पर ले गया। और फिर मैंने उसके चेहरे को और अपनी तरफ खीच लिया हम दोनो के होंठ एक दूसरे से कस कर चिपक गये और रजनी ने तो मस्ती मे अपनी आँखे ही बंद कर ली। हम करीब १ मिनट तक ऐसे ही एक दूसरे के होंठो से होंठ चिपकाये रहे क्या मस्ती थी रजनी हाथ कभी भी नंही रूका और मेरे लंड हो हिलाता ही रहा। फिर हमारे लिये साँस लेना थोडा मुश्किल हो गया तो हम एक दूसरे से अलग हुये।

बडी अच्छा चुम्बन लेता है तू तो मेरे रोम रोम मे मस्ती भर दी तेरे चुम्बन ने रजनी ने कहा हाँ रजनी ये तो बिना सिखाये ही इतना अच्छा चुम्बन लेता है लगता है ये इसके खून में है लगता है इसकी माँ बहूत बडी रंडी है जब ये पेट मे था तब भी जम कर अपने ग्राहको को खुश करती होगी तभी तो ये भी चुम्बन लेना पेट में ही सीख गया। तभी मुझे सिखाना नंही पडा ठीक कहती हो दीदी बडा ही अच्छा चुम्बन लेता है साला भोसडे की औलाद मन करता है कि बस अब चुम्बन लेते ही रहो तो और चुम्बन दो न माँसी अभी तो बस शुरुवात है बात तो तू ठीक कह रहा है वैसे भी तेरे ये रीमा माँ और मैं दोनो ही रंडीयाँ है और अगर अच्छा चुम्बन ना मिले तो हम गर्म ही नंही होती। तो मैं आपको और भी अच्छा चुम्बन दूंगा माँसी और अच्छी तरह से गर्म कर दूंगा तकी आप पूरा मजा ले सको चूदायी का हाँ चुदायी के लिये तुझे मुझे गर्म तो करना ही पडेगा तभी तो मजा आयेगा रंडी को बिना गर्म करे चोदेगा तो फिर मजा नंही आयेगा। हाँ माँसी ये तो आपने बिल्कुल सही कहा वैसे भी हम मर्दो को असली मजा तो रंडी के साथ ही आता है वह क्यों भला मेरे लाल वह इसलिये माँसी क्योकी रंडी पूरी तरह खुल कर पूरा सहयोग करते हुये जो चुदाती है तभी तो कहते है जो औरत अपने मर्द के साथ बिस्तर पर रंडी होकर चुदाती है उनके मर्द गुलाम बन कर रहते हैं अपनी औरत के जैसे मैंने अपनी रीमा माँ को वचन दिया है कि मैं जिंदगी भर उनका गुलाम बन कर रंहूगा सच दीदी रजनी ने पूछा।

हाँ रजनी दिया तो है मेरे लाल ने मुझे ये उपहार और ये है भी बडा आज्ञाकरी गुलाम बडी मुश्किल से मिलते है ऐसे मस्त चोदू गुलाम वाह दीदी तुम तो बहुत ही भाग्यवान हो की तुमको ऐसा जावान मर्द मिला वह भी इस उमर में हाँ और प्यार भी बहुत करता है ये मुझे मैं तो बहुत खुश हूँ कि मैंने इसे चुना। चलो दीदी मैं भी तो देखू इसमे क्या है की तुमने इसको चुना चल ले मेरी दीदी के गुलाम चुम्बन दे बडा मन कर रहा है। हम दोनो अभी भी एक दूसरे से चिपके बैठे थे और फिर हमारे होंठ एक दूसरे से चिपक गये। फिर मैंने अपने होंठ खोले और रजनी के दोनो होंठ अपने मुँह मे भर लिये और उनको चूसने लगा जैसे कोई रसीला आम हो और में उसका रस पी रहा हूँ। मैं रजनी के होंठो को जोर जोर से चूसने लगा मैं उसके होंठो पर अपना थूक लगता और फिर वही थूक चूस लेता रजनी को श्याद ये बहुत अच्छा लग रहा था इसलिये उसने अपने आप को थोडा ढीला छोड दिया और और खिसक के और मेरे पास आ गयी थी उसने अपना हाथ मेरी कमर मे डाल कर मुझे अपने और करीब कर लिया था श्याद वह मुझसे पूरी तरह चिपक कर बदन की गर्मी का अहसास करना चाहाती हो। मेरा हाथ भी उसकी कमर और पीठ पर चल रहा था और उसकी कमर हो कभी कभी मैं मसल कर उसके माँसल बदन का मजा लेता। रजनी के दोनो होंठ मैंने अपने मुँह मे भर रखे थे और उसको छोडने का मेरा कोई इरदा नंही था जैसे कोई छोटा बच्चा अपनी कैंडी को तब तक नंही छोडता जबतक की वह खत्म न हो जाये मेरा बस चलता तो मैं श्याद मस्ती में उसके होंठो को चबा कर खा ही जाता।

क्रमशः..................