बाप बेटी की कहानी - पापा की हेल्पिंग बेटी compleet

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rajaarkey
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Re: बाप बेटी की कहानी - पापा की हेल्पिंग बेटी

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 04:55

Yeh kehtay huay papa ne mujhay apni gaud main bhar liya; is tarah ke meri dono taangain unho ne apni kamar (waist) ke gird lapait leen, aur meray dono baazu apni neck ke gird lapait liay, aur is tarah meri gaand ko neechay se pakartay huay woh bed se utar kar mujhay gaud main le kar farsh per kharay ho gaye. Papa ka lund usi tarah se pura meri choot main phansa hua tha.

Isi tarah uthaey huay papa mujhay dressing room ke full size mirron ke saamnay le gaye.

"Jaanu, dekho mirron main. Kaisay lag rahay hain hum dono baap beti?"

Main mirror main dekh kar buri tarah sharma gayee.

"Papa ... aap barey woh hain ..."

Papa mirror ke saamnay is tarah kharay thay ke meri back side mirror ki taraf thi. Main ne ek bar phir apni neck ghuma kar mirror ki taraf dekha. Hum dono baap beti bilkul nungay thay. Main papa ki gaud main bandarya ki tarah chimti hui thi. Papa ne apnay dono haathon se meri gaand ko thama hua tha. Papa ki unglian mujhay apni gaand ke gosht ke andar ghusti hui dikhai de rahi theen. Meri gaand ka surakh puri tarah se khula hua tha. Aur uskay neech papa ka mota sakht lund jur tak meri choot main phansa hua tha. Meri choot ke ched ne papa ke lund ko rubber band ki tarah grip kia hua tha.

"Kaisi buri lag rahi hoon main papa .... "

"Nahi jaanu, tum bhot haseen lag rahi ho. Bilkul utni haseen jitni ek larki mazey le kar chudwatey huay lagti hai.... Itna haseen jisam hay meri beti ka .... bilkul Blue Band Margarine ki tarah .. Dekho mirron main, kaisay papa ne apni beti ki moti tazi gaand ko pakra hua hay ... aur mera lund kaisa lag raha apni jaanu beti ki tight choot main ...."

Papa ne yeh kehtay huay meri gaand ko ooper uthaya, yahan tak ke unka lund khinchta hua topi tak bahar aa gaya.

"Bhot tight choot hay meri beti ki. Uf maza aa gaya jaanu .... is tarah tau 3 ya 4 dhakkon main he meri money nikal jai gi"

Yeh kehtay huay papa ne meri gaand ko neechay kartay huay apnay lund ko meri choot main push kia. Phir bahar nikala, phir kia. Aur phir baghair rukay teezi se woh apnay lund ko meri choot ke andar bahar kartay rahey. Papa puri tarah josh aur masti main aa gaye that. Unkay galey se ajeeb ajeeb awazain nikal rahi theen. Mujhay ab pata chala ke chud rahi hoon. Isay chodna kehtay hain. Meri apni haalat ghair ho chuki thi. Meray munh se bhi hai hai ki aur billi ki tarah ghurraney ki awaz nikal rahi thi.

"Chod raha hoon apni jaanu ko .... Lund ja raha teri choot main jaanu ... chud meray lund se .... Chud apnay papa ke lauray se .... Maza aar raha se .... Tight choot hai meri beti ki .... "

"Papa chodain apni beti ko .... Chodain mujhay ..... phaar dain meri choot ko ..... uf margai papa ... bohat sakht lund hay aap ka ...... uf lund pait main chala gaya meray ..... papa phat gai meri choot .... Chodain ..... chodain ..... uf chud gai main mummy. O' mummy papa ne chod dia mujhay ...... Papa zor se chodain .... Aur zor se chodain ..... dhakkay lagain zor zor se ...... maza aa raha hai ..."

Ab mera jism akarna shru ho raha tha. Mujhay apna dimag ghoomta hua mehsus ho raha tha. Meri choot ke saarey muschle akarnay lagay thay. Aur choot ke andar papa ka lund phoolnay aur pitchaknay laga tha.

"Uf jaanu meri money nikal rahi teri choot main." Is kay saath he papa ka jism buri tarah mujhay gaud main liay jhatkay marnay laga. Meri gaand ko pura neechay kheench kar apnay lund ke saath jama dia, aur neechay se apnay puri tarah meri choot main phansa dia.

Papa ki garam garam money ki pitchkarian mujhay apni choot ki gahraiyon main jaati hui saaf mehsus ho rahi thi. Is kay saath he main bhi khatam ho rahi thi aur meri choot ne paani chorna shru kar dia tha.

Hum dono baap beti ka jisam ab dheela parta ja raha tha. Paseenay main hum dono naha chukay thay. Meri choot main bilkul thand per gai thi. Papa ka lund bhi dheela parnaey laga tha. Magar abhi tak meri choot main hee.

Papa isi tarah mujhay gaud main liay liay, sofay per baith gaye, aur main apnay papa ke seenay ke saath unhi chipki rahi. Meri paseenay main bheegi hui chaatiyan papa ke balon bhary seenay se chimti hui theen.

Papa ka lund akhir naram ho kar meri choot se bahar nikal aaya, aur iskay saath hee meri choot se papa ki money beh beh kar bahar aaney lagi.

Sofa kharab na ho jaaye, is khayal se main ne neechay apni choot per haath rakh dia, aur papa ki money apnay haaton main le le kar apnay pair or boobs per malnay lagi.


rajaarkey
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Re: बाप बेटी की कहानी - पापा की हेल्पिंग बेटी

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 04:56

पापा की हेल्पिंग बेटी--भाग -2

हेल्लो दोस्तों आप लोगों ने इस कहानी के पहले भाग को काफी पसंद किया मेरे पास काफी मेल भी आए

सबने यही कहा इस कहानी का अगला भाग जल्दी मेल करो मुझे बहूत खुशी हुयी की आपको कहानी पसंद आयी

अब मैं आपको और ज्यादा बोर नहीं करूँगा क्यौकी मैं जानता हूँ आप की कहानी का मजा किरकिरा हो रहा हैं

आपका दोस्त राज शर्मा

पापा और मैं अब थक चुके थे. हम दोनो बाप बेटी बेड पेर जा कर एक दूसरे की बाँहों मैं लिपट कर लेट गाए. मैं पाप के सीने से बरी तरह चिप टी हुई थी, और पापा के होंठों को किस कर रही थी. मेरे टिट्स पापा के सीने से मिले हुए थे.

"कैसा लगा मेरी जानू को?" पापा ने आहिस्ता से मेरे कान से मुँह लगा कर पूछा.

"आप को कैसा लगा पापा?

"जानू, मुझे टॉ बहुत अछा लगा. तुम्हारी अम्मी के बाद आज तुम ने वो मज़ा दिया हे के बता नहीं सकता. बहुत टाइट चूत हे मेरी नूरी की. आज मुझे पता चला के मेरी बेटी का जिस्म कितना सेक्सी हे. जी चाहता के बस अपनी नूरी जानू को चोदता रहूं." यह कहते हुए पापा ने मेरी गाड़ की दोनो गोलाईयों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.

मैं ने अपनी एक टाँग पापा के दोनो टाँगों के बीच मैं डाल कर पापा को अपने से और क़रीब कर लिया, के पापा का लंड मेरी चूत के उपर रगर खाने लगा.

मैं नंगी थी और पापा भी नंगे थे. हमारे दोनो के नंगे जिस्मों मैं फिर से आग दहकने लगी. मैं तो आज इतनी छोटी सी उमर मैं पहली दफ़ा चुदी थी, इस लिये मुझे बहुत ज़ियादा अब बार बार चुड़वाने की खाविश हो रही थी. मेरा बस नही चल रहा था के मैं पापा के कहूँ के बस वो मुझे चोदते रहाीन.

मैं अपनी गांद को आगे की तरफ पुश कर कर के अपनी चूत को पापा के लंड से रगर रही थी. पापा का लंड फिर से तन कर सख़्त हो गया था.

"जानू फिर से चोदू तुम्हे?" पापा मेरी हरकतों से शायद समझ गये थे.

"हून …" मैं इस हून के साइवा कुछ और ना बोल सकी और शरमा कर मैं ने अपना मुँह पापा के सीने मे छुपा लिया, और एक हाथ से पापा का सख़्त लंड मुथि मैं जकर लिया. पापा का लंड मेरी मुथि मैं आते ही बुरी तरह से मचलने लगा.

"मैं अब अपनी प्यारी सी बेटी को पीछे की तरफ से घोरी बना कर चोदूगा" पापा ने यह कहते हुआी मुझे औंधी हो कर गांद ऊपर उठाने को कहा.

मैं बेड पेर औंधी हो गई और गाड़ बिल्कुल ऊपर उठा दी. पापा ने पीछे से मेरी गोल गोल गांद को अपने दोनो हाथों मैं थाम लिया और बजाए अपना लंड मेरी चूत मैं डालने के, उन्हो ने अपनी ज़बान से मेरी चूत चाटनी श्रु करदी.

पीछे से मेरी चूत चाटने की वजह से मेरा बुरा हाल हो गया और मेरे पूरे जिस्म मैं जैसे करेंट सा दौरने लगा.

"पापा …. मार गई …. उफ़ पापा …. काइया कर रहे हैं मेरी चूत मैं ….. मार जाऊंगी ….. चोदिए मुझे …… चोदिए पापा …… मेरी छूट को छोदान ….. लंड डालैन अपना मेरी छूट मैं …..!!"

पापा ने आख़िर एक हाथ से मेरी गांद पकरी और दूसरे हाथ से अपने लंड की टोपी मेरी चूत के छेड़ से लगाते हुआी कहा: "नूरी …. डालूं लंड तेरी चूत मैं .. .. .. उफ़ नूरी कितनी चिकनी और गुलाबी चूत हे मेरी बेटी की …." पापा मेरी चूत पेर अपना लंड फेर रहे थे. मेरी चूत के दाने से लंड की टोपी जुब टच होती तो मैं बुरी तरह मज़े मैं काँपने लगती .

rajaarkey
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Re: बाप बेटी की कहानी - पापा की हेल्पिंग बेटी

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 05:01

"छोदिए ना पापा …. डालै ना अपना लंड अपनी बेटी की चूत मैं …… मार जाऊंगी ….. पूरी ताक़त से चोदै मुझे ….. आग लग रही हे मेरी चूत मैं पापा …."

पापा ने फिर एक ही धक्के मैं अपना पूरा लंड मेरी चूत मैं डाल दिया और मेरी गोल गोल गोरी गोरी गांद को पाकर कर अपने लंड को तेज़ी से मेरी चूत के अंदर बाहर करते रहे. पापा के लौरे का एक एक झटका मुझे जन्नत की सैर करवा रहा था. मैं अपनी गांद को पापा के हर झटके पेर पीछे पापा के लंड पेर मार रही थी. पापा ने मेरी गांद पेर से हाथ हटा कर मेरी टिट्स को अपनी मुति मैं कस कर पाकर मेरी चूत को चोदना जारी रखा.

मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी. मैं अपनी आंखें बन्द किये चुदाई का भरपूर मज़ा ले रही थी.

"उफ़ जानू तेरी चूत …. मज़ा आ रहा मुझे अपनी बेटी को चोदने का ….. नूरी चुद मेरे लंड से …. चुद मेरे लंड से ….. नूरी तेरी मया की चूत को चोदु …. उफ़ मेरी बेटी की चिकनी चिकनी टाइट चूत को चोद रहा हूँ."

इधर मेरा भी बुरा हाल था. "पापा चोदिये …. चोदिये …. चोद मुझे …. ज़ोर ज़ोर से …. चोद …. चोदो ….. फार दो मेरी चूत को …. उफ़ काइया करूँ ….. मार गई …. ख़तम होने वाली हून पापा …. छूटने वाली हून …."

मेरी चूत ने पापा के लंड को ग्रिप कर लिया. एक दूं पापा ज़ोर से चीखे. "मनी निकल रही हे मेरी ….. अपनी बेटी की चूत मैं …"

एक दूं से मुझे पापा के लंड से मनी का तेज़ गरम गरम फवर अपनी चूत मैं निकलता हस महसूस हुआ. और इधर मैं भी छूटने लगी. पापा और मेरा जिसम साथ साथ झटके मार रहा था.

पापा की मनी निकलने से उनका लंड ढीला परने लगा और गहरी गहरी साँसें लेते हुआी पापा मेरे ऊपर मुझे अपने बॉडी के नीचे दबाते हुआी लेट गाए. मेरी साँसाइन भी तेज़ तेज़ चल रही तीन.

"उफ़ … मज़ा … आ गया …. नूरी."

हम दोनो कुछ देर योही लेते रहे. फिट सीधे हो कर एक दूसरे की बाहों मैं लिपट कर सो गाए. नींद आने से पहले जो चीज़ मुझे महसूस हुई, वो पापा की मनी थी, जो मेरी चूत से आहिस्ता आहिस्ता बाहर मेरी राणो पेर निकल कर बह रही थी. मैं ने हाथ नीचे ले जा कर पापा की बहती हुई मनी अपनी चूत और राणो पेर मालनी शुरू की, और फिर पता नहीं कब सो गई.

सुबा जुब मेरी आंक खुली तो अछी ख़ासी रोशनी हो चुकी थी. आँख खुली तो देखा के मैं ने पापा का तना हुआ लंड अपने हाथ मैं जाकरा हुआ था. मेरी मुथि मैं से पापा के लंड की टोपी फूल कर पर्पल कलर की हो रही थी और चमक रही थी. ट्रॅन्स्परेंट कलर का पानी पापा के लंड के छेद से निकल रहा था. मैं ने अपनी उंगली से पानी को छुआ टॉ लेसदार पानी था, चिकना चिकना.

पापा भी उठ गाए और उठे ही मुझे अपने जिसम से चिपेट कर किस करने लगे.