Holi sexi stories-होली की सेक्सी कहानियाँ

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The Romantic
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Re: Holi sexi stories-होली की सेक्सी कहानियाँ

Unread post by The Romantic » 26 Dec 2014 08:07

ननद ने खेली होली--1

सबसे पहले तो मुझे अप सब लोगों का धन्यवाद देना चाहिए की अप ने किस तरह से मैंने अपनी किशोर ननद को ट्रेन किया ....लेकिन अचानक हम लोगों को वापस आना पड़ा| जैसा की तय हुआ था की होली में जब हम लोग आएंगे तब तक उस का इन्ट्र्कोरस मेरा मतलब है इंटर का कोर्स खत्म हो चुका होगा और वो साल भर के लिए हम लोगों के पास आके रहेगीं जब हम उस की अच्छी तरह कोचिंग करायेंगें|

शादी में आप सब को ये भी याद होगा की मेरी ननद गुड्डी ने अपने जीजा जित से भी वादा किया था की ....इस साल जब वो होली में आयेंगे तो वो उनसे जम के होली खेलेगी,और आखिर खेलेगी भी क्यों नहीं, क्यों की उन्होंने ही तो उसकी सील पहले पह्लाल तोडी थी, और उस के बाद जो उसने चलना शुरू किया तो अपने प्यारे भइया और मेरे सेक्सी सैंया के साथ चुदावा के दम लिया. लेकिन वादा होली का इस लिए भी था की जब वो नौवें में थी और जीत उस के जीजा पहली बार होली खेलने आये तो , होली में जीत का हाथ साली के चिकने गाल से फिसल के फ्राक के अन्दर नए उभरते मॉल तक पहुँच गया और एक बार जब जीजा का हाथ साली के मॉल तक पहुँचा जाय, मामला होली का हो, भंग की तरंग का हो, तो बिना रगडन मसलन के ....लेकिन बुद्धू साली बुरा मान गई ....और वो तो जब शादी के माहोल में अपनी उस बुद्धू ननद को बुर के मजे के बारे में बताया तो ख़ुद वो अपने जीजा से सैट और पट गई ....लेकिन ये सारी बातें तो मैं आपको बता ही चुकी हूँ ननद की ट्रेनिंग में ....अब दास्ताँ उसके आगे की ....कैसे होली में हम फ़िर दुबारा उनके , राजीव के मायके गए, और राजीव मेरी ननद कम .गुड्डी के लिए तो ललचा रहे ही थे, मेरी नई बनी बहन और अपनी एक लौटी छोटी साली, मस्त पंजाबी कुड़ी अल्पना और ....उस से भी ज्यादा उस की छोटी बहन कम्मो के लिए, जिसके लिए मैंने कहा था की होली में जब आयेंगे तो ....मैं उस की भी दिल्वौंगी . तो क्या हुआ जब होली में मैं अपने ससुराल गई साजन के साथ और कैसे मनी होली मेरी ननद की ....तो ये साडी दस्ताना ....ननद ने खेली होली ...

राजीव बड़े बेताब थे और बेताब तो मैं भी थी .होली का मजा तो ससुराल में ही आता है ....ननद, नन्दोई, देवर ....और एक तरह से अब वो उनकी भी ससुराल ही हो गयी थी ....नहीं मैं सिर्फ़ उनके माल के बारे में बात नहीं कर रही थी, आख़िर वहाँ मेरी मुंहबोली छोटी बहन अल्पी भी तो थी ....जिसने ना सिर्फ़ उनकी साल्ली का पूरा पूरा हक़ अदा किया था, बल्की मेरी ननद को फंसाने पटाने में भी ....और उसकी छोटी बहन कम्मो ....थी तो अभी कच्ची कली ....लेकिन टिकोरे निकालने तो शुरू ही हो गये थे और जब से उन्होंने एक सेक्स सर्वे में ये पध्हा था की मंझोले शहरों में भी २ फीसदी लडकियां अपना पहला सेक्स संबध १४ से १६ साल की उमर में बना लेती हैं तो बस ....एक दम बेताब हो रहा था उनका हथियार. मैं चिढाती भी थी ....तय कर लो होली किसके साथ खेलनी है मेरी छिनाल ननद गुड्डी के साथ या सेक्सी साली अल्पी के साथ या सबसे छोटी साली उस कमसिन कम्मो के साथ .तो वो हंस के बोलते तीनों के साथ।

और मैं हंस के बोलती लालची ....और गप्प से उनके मोटे मस्ताये लंड का सुपाड़ा गडप कर लेती.

तो हम लोग पहुँच गये होली के ६ दिन पहले ससुराल मैं ये नहीं बताऊंगी की होली के पहले मैंने क्या तैयारी की, भांग की गुझिया, गुड्डी, अल्पी और कम्मो के लिए खूब सेक्सी ड्रेसेस और भी बहोत सारी चीजें ....ये सब मैं अपने सुधी पाठकों के लिए छोड़ती हूँ, होली का किस्सा सुनाने की जल्दी मुझे भी है और सुनाने की बेताबी आपको भी ....हाँ एक बात जरुर ज़रा कान इधर लाइये थोडी प्राइवेट बात है ....ससुराल पहुँचने के पहले बेचारे वो पाँच दिन पूरे उपवास पे थे...मेरी मासिक छुट्टी जो थी, और मैं बस उनसे ये कहती थी अरे चलिए ना वहाँ मेरी ननद बेताब होगी, इस होली में अपने भैया की पिचकारी का सफ़ेद रंग घोंटने के लिए.

सबसे पहले रास्ते में अल्पी का घर पङता था. मैंने कहा, पहले अल्पी के यहाँ रुक लेते हैं, वो बिचारी बेताब भी होगी और उसके लिए जो गिफ्ट लिया था वो दे भी देंगें।

उनकी तो बांछे खिल गयीं...अरे नेकी और पूछ पूछ...और गाडी उस के घर की और मोड़ ली।

शाम होने को थी, उसके घर पहुँच के हमने दस्तक दी, और दरवाजा खोला कम्मो ने,

सफ़ेद ब्लाउज और नेवी ब्लू स्कर्ट में क्या गजब लग रही थी. राजीव बिचारे उनकी निगाहें तो बस दोनों...अब टिकोरे नहीं रह गये थे....कबूतर के बच्चे...और चोंचें भी हल्की हल्की ...टेनिस बाल की साइज...

अल्पी है....दरवाजे पे खडे खडे उन्होंने पूछा।

और अगर मैं कह दूँ नहीं है तो....बढ़ी अदा से अपने दोनों हाथ उभारों के नीचे क्रॉस कर उन्हें और उभारते हुए वो आँख नचा के बोली, तो क्या फ़िर आप अन्दर नहीं आयेंगें. और फ़िर दोनों हाथों से उनका हाथ पकड़ के बडे इसरार से बोली,

जीजू अरे अन्दर आइये ना,कब तक खडे रहेंगे बाहर और फ़िर आख़िर आपकी सबसे छोटी साली तो मैं ही हूँ ना.

एकदम....और फ़िर साली अन्दर बुलाए और जीजा मना कर दे ये तो हो नहीं सकता. राजीव कौन सा मौका चुकने वाले थे. वो बोले और हम दोनों अन्दर घुस गये।

असल में जीजी एक गाइड कैंम्प में गयी है, कल दोपहर तक आयेगी. मैं भी अभी स्कूल से आई ही हूँ. सोफे पे राजीव के ठीक सामने बैठ के वो बोली. उसने टाँगे एक के ऊपर एक चढ़ा रखी थीं, जिससे स्कर्ट और ऊपर चढ़ गयी. उसकी गोरी गोरी जांघे साफ साफ दिख रही थीं, खूब चिकनी और थोड़ी मांसल भी हो गयी थीं. उसने दोनों हाथों से पकड़ के स्कर्ट थोड़ी नीचे भी करने की कोशिश की पर....

और मम्मी कहाँ हैं...सो रही हैं क्या मैंने पूछा।

जैसे मेरे सवाल के जवाब में फोन की घंटी बज उठी.

अच्छा मम्मी....नहीं कोई बात नहीं....कम्मो बोल रही थी.

हाँ मैं अभी स्कूल से आई...आप ६ सात बजे तक आंटी के यहाँ से आने वाली थीं ना....क्या सब लोग उस के बाद सेल में....हाँ आज तो आख़िरी दिन है....

साध्हे सात, आठ तक....कोई बात नहीं ....अरे मेरी चिंता मत करिये ....अब मैं बड़ी हो गयी हूँ.

धत मम्मी ....कोई बात नहीं दूध पी लूंगी मैं. बाई...और उसने फोन रख दिया. और अब की आके सीधे राजीव के पास ....एक दम सट के बैठ गयी और बोली ....मम्मी का फोन था।

इतना तो हम भी समझ गये थे.


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Re: Holi sexi stories-होली की सेक्सी कहानियाँ

Unread post by The Romantic » 26 Dec 2014 08:08

ननद ने खेली होली--2

अरोडा आंटी के यहाँ आज किटी थी....तो साध्हे छ तक लेकिन वहाँ से सेल में जा रही हैं साढे सात आठ तक....

मेरी निगाह सामने रखी घड़ी पे पढी....साढे चार...इसका मतलब....कम से कम तीन घंटे पूरे ....आल लाइन क्लियर....और जिस तरह से वो फोन पे मम्मी के लेट आने की बात जोर से दुहरा रही थी और फ़िर अब ख़ुद....और अचानक मैंने बाहर के दरवाजे की और देखा...सिटकनी भी बंद...अब इससे ज्यादा वो क्या सिगनल दे सकती थी और इसका मतलब वो सिर्फ़ शरीर से ही नहीं मन से भी बढ़ी...

और राजीव भी ये सब इशारे अच्छी तरह समझ रहे थे. वो एक दम सट के बैठ गये थे और एक हाथ कंधे के ऊपर....

जाइये जीजू मैं आपसे नहीं बोलती, इतरा के वो बोल रही थी. आपने कहा था ना की होली में जरुर आयेंगें...जब से फागुन लगा.....और जब से अल्पी दीदी के बोर्ड के इम्तहान खत्म हुए...हर रोज हम दोनों गिनते थे होली अब कितने दिन है....

आ तो गया ना अपनी प्यारी साली से होली खेलने....उसके किशोर गुलाबी गाल पे दो उंगलिया रगड़ते वो बड़े प्यार से बोले।

पता है जीजू, मेरी क्लास की लडकियां सब किस्से सुनाती थीं, उन्होंने जीजू के साथ कैसे होली खेली, कैसे जीजू को बुध्दू बना के अच्छी तरह रंगा और उनके जीजू ने भी....खूब कस कस के उनके साथ....मेरा तो कोई जीजा था नहीं...पर अबकी ....मैंने खूब उन सबों से बोला....मेरे जीजू इत्ते हैंडसम हैं स्मार्ट हैं....

अरे तू अपने जीजू की इत्ती तारीफ कर रही है ज़रा इनसे पूछ की होली के लिए कोई गिफ्ट विफ्त लाए हैं की नहीं....या इत्ती मेरी सुंदर सी बहन से वैसे ही मुफ्त में होली खेल लेंगें, मैंने कम्मो को चढाया।

बढ़ी उत्सुकता से उसने राजीव की और देखा।

एकदम लाये हैं....मेरी हिम्मत...और अब उनका एक हाथ खुल के उस किशोर साली के गुलाबी गाल छू रहा था सहला रहा था और दूसरा....उसकी बस खिलने वाली कलियों के उपरी और....एक दम चिपक के वो बैठे थे...लेकिन पहले मेरी एक पहेली बूझो....

इट इज लांग, हार्ड एंड ....लिक्स....बताओ क्या...और इगलिश में ना आए तो.....

धत जीजू....मैं इंग्लिश मीधियम कान्वेंट में पढ़ती हूँ और दो साल में कालेज में पहुँच जाउंगी...मुझे सोचने दीजिये...लांग....लंबा है कडा है....और क्म्मों की निगाहें जाने अनजाने राजीव के बल्ज की और चली गयी।

टाईट लीवैस की जींस में साफ दिख रहा था...और ऊपर से राजीव का एक हाथ अब सीधे वहीं पे....दो उंगलियाँ उस उत्तेजित शिष्ण के किनारे....

अब फंस गयी लौन्डीया ....मैंने सोचा और भुस में और आग लगाई....

देखो....तुम्हारे जीजा के पास है और मेरे पास नहीं,

हाँ और लडकियां जब हाथ में काढा काढा पकड़ती हैं तो उन्हें अच्छा लगता है, कुछ तो होंठों से भी लगा लेती हैं, वो बोले।

धत जीजू आप भी...जाइये मैं नहीं बोलती आप ऐसी वैसी बातें करते हैं....कम्मो बोली, लेकिन निगाह अभी भी टेंट पोल से चिपकी।

अरे इसमें शरमाने की क्या बात है.....जीजा साली में क्या शरम और वो भी होली में....आख़िरी क्लू .....वो होली में तुम्हारा गिफ्ट भी है....वो बेचारी और शरमा गयी.

लो पकडो ये पे....देखो है ना लांग और हार्ड ...और जब तुम अपने हाथ से ले के दबाओगी तो लीक भी करेगा....है ना.....इम्पोर्टेड है....वैसे तुम क्या सोच रही थी लांग और हार्ड....उन्होंने उसे और छेडा।

अरे लिख के देख ले कहीं तुम्हारे जीजा ने नुमाइश का माल न पकड़ा दिया हो. मैंने उसे चढाया।

ठीक कहती हो दीदी....क्या भरोसा...और लिखने के लिए उसने एक कागज़ निकालते हुए उन्हें चिढाया, इम्पोर्टेड ...चीन का बना है क्या....बारह आने वाला...क्यों जीजू।

अरे वाटरमैन है नामी देखो उस पे नाम लिखा भी है, चलो अच्छा लिखो।

क्या....पेन कागज़ पे लगा के वो बैठी...

आई उन्होंने बोला.

आई बोल के उसने लिखा और उनकी और सिर उठा के देखा. किशोर होंठों पे पेन लगाए वो बढ़ी सुंदर लग रही थी।

एल ओ वी ई वाई.....वो बोल रहे थे...

और वो ध्यान से लिख रही थी... एल ओ वी ई वाई

अचानक वो समझ गयी ...ये क्या लिखवा रहे हैं...और अचानक पेन के पिछले हिस्से से ढेर सारा गुलाबी रंग सीधे उसके चहरे......

हंसते हुए वो बोले अरे बुरा ना मानना साली जी होली है....होली की आपके लिए ख़ास गिफ्ट...मैंने सोचा होली की शुरुआत सबसे पहले सबसे छोटी साली के साथ करते हैं....

उसके गाल गुलाब हो हाय थे. और रंग सिर्फ़ उसके गुलाबी गालों पे नहीं पढा था बल्की सफ़ेद ब्लाउज पे भी, और उसके अधखिले उरोज भी लाल छीन्टो से.....बस लग रहा था अचानक जैसे कोई गुलाब खिल उठा हो. कुछ तो वो शरमाई, सकुचाई पर अगले ही पल, कातिल निगाहों से उन्हें देख के बोली,

मुझे क्या मालुम था की....जीजू का इतनी जल्दी, हाथ में पकड़ते ही गिर पढेगा।

उस का ये द्वि अर्थी दाय्लोग सुन के मुझे लगा की सच में ये मेरी छोटी बहन होने के काबिल है. मुस्कराके मैंने उसे और चढाया,

अरी कम्मो, सुन अरे ज़रा अपने जीजा को भी रंग लगा दे सीधे अपने गाल से उनके गाल पे, वो भी क्या याद करेंगें किस साली से पाला पढा है।

एक दम दीदी और आगे बढ़ के उसने अपने गोरे गुलाबी रंग से सने गाल ....सीधे उनके गालों पे, ....राजीव की तो चांदी हो गयी. इस चक्कर में अब वह कैसे उनके सीधे गोद में आ गयी उस बिचारी को पता भी नहीं चला.और गालों से गाल रगड़ते अचानक दोनों के होंठ एक पल के लिए ....कम्मो को तो जैसे करेंट लग गया ....वो वहीं ठिठुर गयी ....पर राजीव कौन रुकने वाले थे. उसके उरोजों की और साफ साफ इशारा कर के बोले,

अरी साली जी रंग तो यहाँ भी लगा है ....ज़रा इससे भी लगा दीजिये ना

वो बिचारी क्या बोलती, मैं बोली उस की और से।

अरे सब काम साली ही करेगी आख़िर तुम जीजा किस बात के हो और फ़िर तो सीधे उनके हाथ उस नव किशोरी के उभरते जोबन पे

चालाक वो बहुत थी. तुरंत बात पलटते हुए बोली ।

अरे जीजू आप इत्ती देर से आए हैं आप को अभी तक पानी भी पिलाया ....आप क्या सोचेंगें की अल्पना दीदी नहीं है तो कोई पूछने वाला नहीं है और उन की गोद से उठ के वो हिरनी ये जा ....वो जा।

और पीछे से उसके कड़े कड़े छोटे मटकते गोल नितम्बो को देख के तो राजीव की हालत ही ख़राब हो गयी. उनका बालिष्ट भर का खूंटा अब जींस के काबू में नहीं आ र्रहा था।

उसके पीछे पीछे मैं भी किचेन में पहुँची, आ चल थोड़ी तेरी हल्प करा दूँ और पास में आ के उस के कान में हल्के से कहा, अरे तू भी तो अपने जीजू का जवाब दे दे। होली का मौका है कया ऐसे ही सूखे सूखे जाने देगी उनको।

वही तो कर रही हूँ दीदी। और उसने ग्लास की और इशारा किया। जब मैंने ग्लास में झांका तो मुस्कराये बिना नहीं रह सकी।

अच्छा ये बता की कुछ कोल्ध ध्रिंक विंक है क्या। ... मैं नाश्ते का इतजाम करती हूँ और तू कर अपने जीजा का।

मेरी अच्छी दीदी. ...कोल्ध ध्रिंक फ्रिज में है और फ्रिज . वो बोली।

अरे मालुम है मुझे पहली बात नहीं आ रही हूँ, और मैं बगल के कमरे में गयी जहा फ्रिज रखा था।


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Re: Holi sexi stories-होली की सेक्सी कहानियाँ

Unread post by The Romantic » 26 Dec 2014 08:09

ननद ने खेली होली--3

स्प्राईट की एक बढ़ी बोतल निकाल के तीन ग्लास में। तब तक मेरी निगाह बगल में रखी ड्रिंक कैबिनेट पे पढी. ...उसे खोला तो वोडका। ... जिन - फ़िर क्या था. ...स्प्राईट के साथ. कुछ स्नैक्स रख के जब मैं बाहर पहुँची तो कम्मो बढ़ी अदा से सीधे अपने उरोजों से सटा के ग्लास रख के पूछ रही थी,

क्यों जीजू बहोत प्यास लगी है।

हाँ. ...बहोत। कौन जीजा मना करता।

गुलाबी रंग से उसका सफ़ेद ब्लाउज एक दम चिपक गया था और उसके किशोर उभारों की पुरी रूप रेखा, कटाव यहाँ तक की ब्रा की लाइन भी साफ साफ दिख रही थी। रगड़ा रगडी में ऊपर के एक दो बटन भी खुल गए थे। और हल्का हल्का क्लिवेज - साफ साफ. ...और जैसे ये काफी ना हो, उसने दांतों से हलके से अपने गुलाबी होंठ काटते फ़िर पूछा।

तो जीजा बुझा दूँ. ...ना

और जैसे ही उन्होंने हाथ बढाया. ...पूरा पूरा का ग्लास भर। जाडा लाल रंग उनकी झाक्काक सफ़ेद रंग की शर्त पुरी तरह लाल। और हम दोनों जोर जोर से हंसने लगे।

ये हुयी ना पूरी होली। ...देखा मेरी बहन का बदला। तुमने तो पूरा ही ढाला था और यहाँ इस ने पूरा का पूरा और क्या जीजी। और अभी तो ये होली की शुरू आत है। ... हंस के वो मेरे पीछे छिपती हुयी बोली।

अरे साली. ...बताता हूँ तुझे. ...और पकड़ के अब वो दुबारा उनकी गोद में. ...और इस धर पकड़ में स्कूल ड्रेस की ब्लाउज के एकाध बटन और...

अच्छा चलो. ...पहले ये कोल्ड ड्रिंक पी के थोड़ा गरमी कम करो. ...और मैंने आँख मार के राजीव को इशारा किया, और उन्होंने पकड़ के ग्लास कम्मो के होंठों पे. ...जबरन ...

स्प्राईट बुझाये प्यास बाकी सब बकवास। ...मैं हंस के बोली.

स्प्राईट कम। वोडका ज्यादा।

उन्ह। ...उन्ह. ...ये तो उसने बुरा सा मुंह बनाया.

अरे पी ले पी ले वरना ये मुझे चिढायेंगे. ...कैसी साली है ज़रा सा जीजा के हाथों. ...मैं बोली और राजीव को मौका मिल गया, एक हाथ से कास के उसकी ठुड्डी पकड़ के दूसरे से ग्लास आधी से ज्यादा खाली कर दी।

अरे आप भी तो पीजिए और अब कम्मो का नम्बर था उसने बाकी बची ग्लास अपने हाथों से अपने जीजा के मुंह से लगा के खाली कर दी.

चल अब जैसे तूने अपने गाल का रंग मेरे गालों पे रगड़ा था ना मेरी शर्त का रंग. वो लाख ना नुकुर करती रही लेकिन अपनी चौढी मजबूत छाती से उसका सीना. ...मैं जानती थी ना उनकी पकड़ की ताकता. ...अच्छी खासी औरतें भीं और ये तो बिचारी अभी बछ्डी थी।

उसके ब्लाउज के सारे बटन टूट ....यहाँ तक की सफ़ेद टीन ब्रा के स्ट्रैप भी हल्की हल्की गुलाबी हो रही थी।

अच्छा चलो अब बहोत हो गया. ...इत्ती सीधी साधी साली मिल गयी तो. ...चलो कुछ खा पी लो. ...ले कम्मो. ...मेरे हाथ से. ...और मैंने एक समोसा उस के मुंह में डाल दिया।

ओन्ह्म्मा. ...उसने मुंह बनाया तो मैंने हड़का लिया. ...अरे अभी जीजा डालते तो पूरा का पूरा गप्प कर लेती और यहाँ मैं दे रही हूँ तो मुंह बना रही है।

वो यहाँ लगी थी और उधर उन्होंने अपनी जेब से गाढ़ा लाल रंग निकाल के दोनों हाथों पे ...

अरे ये भी तो ले देख सट से अन्दर चला जायेगा. ...और फ़िर वोड़का मिली स्प्राईट. ...आधी ग्लास एक झटके में।

वो दोनों हाथ से ग्लास पकडे थी की उनका लाल रंग पुता हाथ पहले इस कमसिन किशोरी के चिकने गाल और जब तक वो समझे सम्हाले. ...सीधे ब्रा के अन्दर घुस के उस के उभारों को लाल. ...कुछ रंग से कुछ रगड़ से. ...बिचारी के दोनों हाथ तो फंसे थे. ...और राजीव ने एक हाथ से कास के उसकी पतली कमर पकड़ रखी थी।

जीजू ये फाउल है. ...ग्लास रख के वो बोली।

सब कुछ जायज है. ...होली में और साली के साथ. ...और उन के हाथ उस के अधखिले कच्चे गुलाबों का. ...रस ले रहे थे।

वो छटपटा रही थी. ...कसमसा रही थी. ...मचल रही थी

जीजू. छोडो ना. ...क्या करते हो वहाँ नहीं. ...गंदे. ...ओह्ह नहीनीई. ...ओह्ह हाँ हाँ

और तब तक इस खींचा तानी में उस की फ्रंट ओपन ब्रा का हुक टूट गया. ...और।

वो जवानी की गोलाइयां. ...गोर्री गोरी हलके हलके रंग में लिथड़ी...

ये. .अरे तू भी लगा ना मैं साथ देती हूँ अपनी बहन का. ...और उन की जेब से वार्निश की ट्यूब निकाल के कम्मो के दोनों हाथ जबरन फैला के पोत दिए और बोली, ले लगा अपने जीजू को. ...वो बिचारी. ...दोनों हाथ मेरी पकड़ में थे और उन्होंने अब ब्रा पुरी की पुरी खोल दी.

छोटे छोटे कड़े जवानी के उभार. ...सूरज उगने के पहले की लाली से निपल

बिचारे राजीव. ...आंखो और हाथ में जंग हो रही थी. ...देंखे की रगड़ें मसले. ...और जीत हाथों की हुयी।

ये फाउल है. ...उस बिचारी को टाप लेस कर दिया और ख़ुद अबकी मैं बोली. ...और उनकी शर्ट के बटन खोल के शर्ट फर्श पे. बनियान तो उन्होंने पहनी नहीं थी

ले कम्मो लगा उनकी छाती पे. ...और कम्मो भी जोश में आके उनके सीने पे रगड़ने मसलने लगी

कुछ नई आई चढ़ती जवानी का जोश

कुछ स्प्राईट में वोड़का का जोश और सबसे बाद के

जीजा के साथ होली में रगड़न मसलन का जोश

कम्मो कस कस के उनके सिने में रंग लगा रही थी और वो कम्मो की कच्ची कलियों में रस भरने में लगे थे.

ब्रा का हुक तो पहले ही टूट चुका था और ब्लाउज भी स्कर्ट से बाहर निकली बटन सार्रे खुले,

अरे कपडे क्यो बरबाद करते हो बिचार्री के होली खेलना है तो साली से खेलो कहाँ भागी जा रही है बिचार्री और ये कह के मैंने एक साथ ही उस के ब्लाउज और ब्रा को पकड़ के खींच दिया,

अरे सिने से सीना रागादो तभ हो ना जीजा साली की होली, मैंने दोनों को ललकारा।

राजीव को तो किसी ललकार की जरूरत नहीं थी...सीधे से उन्होंने कम्मो को बांहों में भर लिया और वो भी अब सीधे से. ...उनके चौड़े मजबूत सिने में उसकी नवांकुर छातियां दब रही थीं.

थोड़े ही देर में दोनों फर्श पे थे. मैंने सोफे से कुषाण निकाल के कम्मो के छोटे छोटे चूतादों और सर के निचे लगा दिया और राजीव उसके ऊपर....मौका देख के मैंने उसकी स्कूल की नेवी ब्लू स्कर्ट पकड़ के खीची और उतार दी। अब वो बस एक छोटी सी सफ़ेद पैंटी और स्कूल के जूतों में...अब राजीव उसकी उन छोटी उभरती हुई चून्चियों को निहार रहे थे. ...जिसके बार्रे में सोच के ही उनका मस्ताना लैंड तन्ना जाता था.और इती छोटी भी नहीं...बस मुट्ठी में समा जायं..और उसके बिच में छोटे से प्यार्रे गुलाबी चूचुक....

हे इसके सार्रे कपडे तुमने बरबाद कर दिए. ..अब नए कपडे देने होंगे...मैंने राजीव को छेड़ा।

एक दम दूंगा आख़िर मेरी सबसे छोटी साली है...और होली का गिफ्ट...तो दूंगा ही....लेकिन पहले बोलो तुम क्या दोगी...मेरी प्यार्री साली जी।

उसके भोले भोले चहर्रे पे बड़ी बड़ी रतनार्री आँखे कह रही थीं...जो तुम चाहो...और वैसे भी तुमने छोडा ही क्या है....

लेकिन उसके लरजते किशोर होंठों से बड़ी मुश्किल से निकला....मेरे पास है ही क्या।

अरे बहुत कुछ है। राजीव एक दम अपने पटाने वाले अंदाज में आ गए,

ये रसीले होंठ, ये गुदाज मस्त जोबन और अचानक चद्धि के ऊपर से ही उसकी चुन्मुनिया को दबोच के बोले, और ये कारूँ का खजाना.

वो बेचार्री चुप रही शायद पहली बार किसी मर्द का हाथ वहाँ पडा हो, लेकिन मैं बोल पड़ी,

अरे बोल दे वरना तू अपने जीजू को नहीं जानती....

चुप का मतलब हाँ इसका मतलब साली चाहती है की मैं तीनो ले लूँ....ये कह के कस के पैंटी के ऊपर से उन्होंने उसकी चुन्मुनिया मसल दी.

मैंने सर हिला के कम्मो की और ना का इशारा किया और होंठो पे जीभ फिराई।

उस बिचार्री ने भी उसी तरह...होंठो की और इशारा किया।

ऐसे थोडी साफ बता क्या देगी वरना और अब उनकी दो उंगलियाँ पैंटी के अन्दर घुस चुकी थीं.

मैंने हलके से फुसफुसा के बोला चुम्मी. .बोल चुम्मी ले लें।

वो बोली चुम्मी...तभ तक राजीव की निगाह हमार्री इशार्रे बाजी की और पड़ चुकी थी।

हे फाउल ये नहीं चलेगा....दोनों बहने मिल के तभी ये सस्ते में छूट गई...वो मुझसे बोले।

अरे तो मैं अपनी बहन का साथ नहीं दूँगी तो क्या तुम्हार्री उस छिनाल रंडी बहन गुडी का साथ दूँगी. हंस के मैं बोली. कम्मो भी मेरे साथ हंस ने लगी।

अच्छा चल मैं चुम्मी पे संतोस्छ कर लूंगा लेकिन बाद में ये नहीं बोलना की...नहीं जीजू नहीं....वो बोले।

ठीक है बोल दे रे कम्मो ये भी क्या याद कर्रेंगें की किसी दिल दार से पाला पडा था, मैंने चढाया।

ठीक है जीजू ले लीजिये चुम्मी आप भी क्या याद कर्रेंगें,

राजीव ने झुक के उसके अन छुए होंठों का एक हल्का सा चुम्बन ले लिया और फ़िर अगले ही पल उनके होंठों के बीच, उसके होंठ तगड़ी गिरफ्त में, कभी चूमते कभी चूसते...और थोडी देर में ही राजीव की जीभ ने उसके रसीले होंठों को फैला के सीधे अन्दर घुस गई।

मैं उसके सर के पास से हट के पैरों के पास चली गई।

उस बिचार्री को क्या मालूम उसने कितना खतरनाक फैसला किया है, राजीव के होंठ उनके बालिष्ट भर के लंड से किसी मामले में खतरनाक नहीं थे।