Jaal -जाल compleet

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raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 13 Dec 2014 02:10

जाल पार्ट--4

गतान्क से आगे.

रवि ने ही उसे अपने पिता के दोस्त के दफ़्तर मे नौकरी दिलवाई & ये नया किराए का घर भी.बदले मे उसे अपना कुँवारापन उसे सौंपना पड़ा.रवि तो उसका दीवाना हो गया & उसपे तॉहफो की बरसात करने लगा.रवि पहला मर्द था जिसने रंभा को चोदा था & उसके साथ कुच्छ दिनो की चुदाई के बाद ही उसे अपने बारे मे 1 अहम बात पता चली-उसे चुदाई बहुत पसंद थी.रवि के आने से उसकी ज़िंदगी आसान हो गयी थी मगर ये उसकी मंज़िल नही थी.वो 1 छ्होटे शहर के दुकानदार की बीवी बनके उसके भरोसे नही रहना चाहती थी.उसकी ख्वाहिश आसमान च्छुने की थी & वो यहा मुमकिन नही था.

"रवि..उठो.ट्रेन का टाइम हो गया.",उसने उसे जगाया & अपना सूटकेस & बॅग उठाके दरवाज़े के पास रखा.

"क्या यार..इतनी जल्दी..अरे बहुत वक़्त हो गया..",वो उठके जल्दी-2 कपड़े पहनने लगा,"..क्यू जा रही है,रंभा..मैं कैसे रहूँगा यहा..तू भी ना!",रंभा ने कमरा बंद किया & चाभी रवि को दी.

"मैं क्या करू इसका?"

"तू ही रख.अब जल्दी चल.",रवि ने अपनी गाड़ी मे उसका समान डाला & कुच्छ देर बाद वो उसी समान को ट्रेन मे चढ़ा रहा था.

"पहुँच के फोन कर दीजियो.",गाड़ी स्टेशन छ्चोड़ रही थी.जवाब मे रंभा मुस्कुराती रही.

"रवि..",गाड़ी अब थोड़ा रफ़्तार पकड़ रही थी.रवि उसकी खिड़की के पास आया & धीरे-2 दौड़ने लगा.

"क्या हुआ?कुच्छ भूल गयी क्या?"

"नही.कुच्छ भूली नही.",गाड़ी और तेज़ हो गयी,"..मेरा इंतेज़ार मत करना.मैं अब यहा लौट के नही आ रही."

"क्या?",रवि अब दौड़ रहा था,"..क्या मज़ाक कर रही है?"

"मज़ाक नही,रवि.मैं हमेशा के लिए जा रही हू.अब यहा नही लौटूँगी.गुडबाइ!"

"रंभा!..रंभा..!",गाड़ी अब स्टेशन से बाहर निकल चुकी थी.रवि हांफता खड़ा उसे जाते देख रहा था.

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"सब समझ गयी,सोनम?",ब्रिज कोठारी पिच्छले 3 दिनो से रोज़ सोनम को उसके इंटरव्यू के लिए तैय्यार कर रहा था.

"हाँ,लेकिन.."

"लेकिन क्या?"

"मान लीजिए,वो मुझे नही चुनता है तो?"

"तो यहा जाय्न कर लेना."

"तो यही कर लेती हू वाहा जाने की क्या ज़रूरत है?"

"तुम बहुत डरती हो!",ब्रिज उसके करीब आया & उसे बाहो मे भर लिया,"..देखो सोनम,तुम मुझे नही जानती...आज से तुम मुझे नही जानती मुझसे कभी मिली भी नही..हूँ..ऐसा सोचते हुए वाहा जाना.एजेन्सी वाले 4 लड़कियो को वाहा भेज रहे हैं.तुम्हारा बाइयडेटा उन सब से अच्छा है & तुम उन सब से कही ज़्यादा होशियार हो.अगर तुम्हे इस बात से भी तसल्ली नही हो रही तो ये सुनो मैने उन सभी लड़कियो की तस्वीरे भी निकलवा ली हैं & कोई भी तुम जितनी हसीन नही.",उसने उसके होंठो को चूम लिया.सोनम ने भी उसकी किस का जवाब दिया & उसके सीने से लग गयी.कुच्छ ही पलो मे दोनो नंगे खड़े थे & 1 दूसरे को बड़ी गर्मजोशी से चूम रहे थे.सोनम उम्र & कद,दोनो मे उसके सामने बच्ची जैसी थी मगर उसका भरा-2 जिस्म किसी भी मर्द के पसीने च्छुड़वाने के काबिल था.

साँवली सोनम की 36 साइज़ की छातियो को मुँह मे भरते हुए ब्रिज ने उसे गोद मे उठा के अपने बिस्तर पे लिटा दिया & फिर इतमीनान से उसकी चूचिया चूसने लगा.सोनम बेचैनी से उसके सर के बालो को नोचती हुई मस्ती की राह पे आगे बढ़ती रही.ब्रिज का बाया हाथ उसकी टाँगो के बीच उसकी चिकनी चूत के अंदर घुस खलबली मचा रहा था.अपने दाने पे उसकी गुस्ताख उंगलियो की रगड़ से सोनम बहाल हो गयी & अपनी 26 इंच की कमर उचकाने लगी.ब्रिज ने उंगलियो की रफ़्तार बढ़ा उसकी बेचैनी को और बढ़ा दिया & तब तक उसके दाने को रगड़ता रहा जब तक वो झाड़ ना गयी.

"1 बात बताइए..",साँसे संभालती सोनम को ब्रिज ने उसके पेट के बल लिटा दिया & उसकी मखमली पीठ को चूमते हुए उसकी 36 साइज़ की मोटी गंद पे आ गया,"..ऊहह..हाआनन्न....आपको मेहरा का ऐसा क्या राज़ जानना है?....उउन्न्नःनह..!",ब्रिज की ज़ुबान गंद की दरार की सैर करने लगी थी.

"आज से कोई 6 महीने बाद सरकार डेवाले से 20 किमी की दूरी पे बने 1 बहुत बड़े ज़मीन के हिस्से को स्पेशल एकनामिक ज़ोन यानी कि सेज़ के लिए किसी प्राइवेट पार्टी को देने का टेंडर निकालने वाली है.इस बात की जानकारी मुझे है..",सोनम अब बहुत मचल गयी थी.उसने करवट बदली & अपनी चूत चाटते ब्रिज के बालो को पकड़ उसे उपर खींचा.भारी-भरकम ब्रिज ने उसे अपने लंबे चौड़े शरीर के नीचे दबाते हुए उसके होंठो को अपनी गिरफ़्त मे ले लिया.सोनम ने उसे बाहो मे भर लिया & अपने जिस्म पे उसके जिस्म को और दबाने की कोशिश करने लगी.

"..& विजयंत मेहरा को भी ये ज़रूर पता होगा.कोठारी ग्रूप अभी से उस टेंडर की रकम तैय्यार करने मे जुटा हुआ है जबकि अभी तक सरकार ने कोई फरमान भी जारी नही किया है & यही सब ट्रस्ट ग्रूप भी कर रहा होगा.",अपनी प्रेमिका की हर्कतो का इशारा समझते हुए ब्रिज ने अपने दाए घुटने से उसकी टाँगो को फैलाया & अपना 9 इंच का तगड़ा लंड उसकी छ्होटी सी चूत की दरार पे टीका के धक्का दिया.

"ऊव्ववव..दर्द होता है ना!..हां..ऐसे ही आराम से करिए....हाईईईईई.....",लंड अंदर घुस चुका था & सोनम की चुदाई शुरू हो चुकी थी.

"आप चाहते हैं की मैं उनके टेंडर की रकम आपको पहले ही बता दू & ये भी कि वो क्या तैय्यारिया कर रहे हैं?....ययत्त्त....!",ब्रिज के तगड़े लंड की ज़ोरदार चुदाई ने आख़िरकार उसे झाड़वा ही दिया था.ब्रिज कोठारी ने फ़ौरन अपनी प्रेमिका को बाहो मे भर लिया & उसे लिए दिए अपने घुटनो पे बैठ गया.उसकी गर्दन मे बाहे डाली सोनम ने अपनी टाँगे उसकी गंद के पीछे आपस मे फँसा रखी थी & उन्ही के सहारे 1 बार फिर वो अपने मालिक के लंड पे कूदने लगी थी.

"बस मेरी जान तुम मेरा ये काम कर दो फिर कोठारी ग्रूप मे सीनियर पोज़िशन & पैसे तो मिलने ही हैं तुम्हे.",उसकी कसी गंद को दबोचता जिस्म अपने घुटनो पे बैठ अपनी कमर हिलाने लगा था.मेहरा को हराने के ख़याल से ही उसका दिल 1 अजब सी खुशी से भर गया था & वो अब दुगुने जोश के साथ चुदाई कर रहा था.सोनम अब उस से बिल्कुल चिपात गयी थी & उसके बाए कंधे पे सर टीका के उसके सर को ज़ोर से आहें भरते हुए चूम रही थी.उसके हाथ ब्रिज की पीठ पे बेसब्री से चल रहे थे & वो उसके हर धक्के पे मज़े से पागल हो रही थी.1 ज़ोरदार चीख के साथ दोनो प्रेमी 1 साथ झाड़ गये.सोनम के चेहरे पे बहुत सुकून का भाव था.कुच्छ देर बाद ब्रिज ने उसे गोद से उतार बिस्तर पे लिटाते हुए अपना सिकुदा लंड उसकी चूत से निकाला & अपने कपड़े पहनने लगा.

"जा रहे हैं?",सोनम ने बाया हाथ बढ़ा के बिस्तर के बगल मे खड़े पॅंट का हुक लगा रहे ब्रिज के बालो भरे पेट को प्यार से सहलाया.

"हां."

"कंग्रॅजुलेशन्स & बेस्ट ऑफ लक.",सोनम ने पॅंट के उपर से उसके लंड को 1 बार दबाया तो ब्रिज ने मुस्कुराते हुए सवालिया निगाहो से उसे देखा,"..इस रविवार को आपकी शादी है ना तो उसी की बधाई दे रही हू.",ब्रिज तो सचमुच भूल ही गया था इस बारे मे!सोनम के जिस्म & उसे मेहरा के यहा सेंडमरी के लिए तैय्यार करने मे वो इतना मशगूल हो गया था कि वो शीतल के बारे मे तो वो भूल ही गया था.

"तुम्हारी वजह से मैं अपनी मंगेतर को भी भूल गया!",ब्रिज ने बनावटी गुस्सा किया तो सोनम हंस पड़ी & उठ के उसके करीब आ गयी फिर टेबल से वाइन की बॉटल उठा ग्लास मे डाली & ब्रिज को पिलाई,"ये आपकी शादी के नाम..",फिर अगला घूँट खुद भरा,"..& ये मेरी ट्रस्ट ग्रूप मे नौकरी लगने के नाम.",दोनो हंस पड़े & 1 बार फिर गले लग गये.

विजयंत मेहरा चाहे जितनी भी अययाशिया करे,अगर वो डेवाले मे होता था तो सोता अपने घर मे ही था.अभी 3-4 साल पहले ही वो अपने नये बंगल मे रहने लगा था.अब उसे बुंगला कहना शायद ठीक नही होगा.1 बहुत बड़े मैदान को पहले ऊँची दीवार से घेरा गया फिर उस मैदान की लॅंडस्केपिंग की गयी & 1 छ्होटा 9 होल गोल्फ कोर्स,स्विम्मिंग पूल & काफ़ी बड़ा लॉन बनाया गया.इस मैदान के बीचोबीच 1 बड़ा बुंगला बना & उसके दोनो तरफ उस से थोड़े से ही छ्होटे 2 छ्होटे बुंगले बनाए गये.बीच वाला बुंगला विजयंत & उसकी बीवी रीता का था.दाई तरफ का बुंगला समीर के लिए बनवाया गया था & विजयंत चाहता था की शादी के बाद समीर अपने परिवार के साथ उसी बंगल मे रहे.बाई तरफ के बंगल मे विजयंत की पहली औलाद,उसकी बेटी शिप्रा अपने पति प्रणव के साथ रहती थी.

"हाई,डॅडी!",विजयंत ने जैसे ही बंगल के हॉल मे कदम रखा,उसकी बेटी उसके गले से लग गयी.

"हाई,बेटा.अभी तक सोई नही?",1 नौकर ने विजयंत का कोट & उसके ड्राइवर से उसका ब्रीफकेस ले लिया.

"नही,मेरे साथ बैठी तुम्हारा इंतेज़ार कर रही थी.",पिंक कलर के ड्रेसिंग गाउन मे रीता वाहा आई.रीता की उम्र 48 बरस थी लेकिन पति की तरह ही वो भी उम्र से छ्होटी दिखती थी & अभी भी किसी को यकीन नही होता था कि वो 1 शादीशुदा बेटी & जवान बेटे की मा है.वो अपनी जवानी मे 1 ब्युटी क्वीन रह चुकी थी & आज भी उसका हुस्न ग़ज़ब का था.

"समीर के लौटने की पार्टी प्लान कर रही है ये..",उसने कंधे तक लंबे बाल झटके & सोफे पे बैठ गयी.विजयंत को अपने लंड मे हरकत होती महसूस हुई.रीता की भारी आवाज़ ऐसी लगती थी जैसे फँसे गले से आ रही हो.विजयंत को उसकी आवाज़ बड़ी मस्तानी लगती थी.

"तो ये तो हमेशा से तुम्हारा ही डिपार्टमेंट रहा है,बेटा.",विजयंत सोफे पे बैठा तो शिप्रा 1 नोटपेड़ ले उसके साथ बैठ गयी,"..मैं क्या करू इसमे?"

"ये मेहमानो की फेहरिस्त तो आप ही फाइनल करते हैं.",उसने नोटपेड़ उसकी गोद मे पटका.

"ओह्ह..",विजयंत ने थके होने का इशारा करते हुए सर पीछे सोफे की बॅक पे रखा,"..अभी नही बेटा."

"प्लीज़,पापा!..फिर सबको इन्विटेशन देर से मिलेंगे & हमारी पार्टी बिल्कुल फ्लॉप हो जाएगी.",वो बच्चों की तरह मछली.विजयंत हंसा,उसकी बेटी अभी तक 1 बच्ची जैसी ही थी.

"ओके,मेडम.जैसा आपका हुक्म!",उसने नाटकिया अंदाज़ मे कहा & पॅड उठा लिस्ट देखने लगा.रीता मुस्कुराइ & अपनी कॉफी का कप उठाके 1 घूँट भरा.विजयंत मेहरा अपने बच्चों की कोई बात नही टालता था,वो उसकी ज़िंदगी थे.वो अपनी बीवी से शायद हर रोज़ बेवफ़ाई करता था लेकिन आज तक उसने किसी लड़की को रीता का दर्जा नही दिया था.उसका मानना था कि परिवार की जगह कोई नही ले सकता & शायद यही वजह थी कि उसका परिवार इतना खुशाल था.

"हेलो!",5'9" कद का 1 चश्मा लगाए गोरा,भले सी शक्ल वाला जवान मर्द हॉल मे दाखिल हुआ.

"हाई!प्रणव.",रीता ने जवाब दिया तो विजयंत ने पॅड से नज़र उठाई & दामाद को देख के मुस्कुराया.2 साल पहले प्रणव कपूर उसकी बेटी का पति बना था.वो अमेरिका मे किसी कंपनी मे काम करता था & वही छुट्टी मना रही शिप्रा से उसकी मुलाकात हुई थी.दोनो 1 दूसरे को चाहने लगे थे & जब शिप्रा ने उस से शादी करने की ख्वाहिश जताई तो विजयंत नही माना था.उसे भरोसा नही था शायद की उसकी बेटी सही फ़ैसला ले सकती है.

कितना ग़लत था वो!पहली मुलाकात मे ही उसने भाँप लिया था कि प्रणव 1 अच्छा लड़का है & जब उसने उसे शादी के बाद ट्रस्ट ग्रूप जाय्न करने को कहा तो उसने सॉफ मना कर दिया था.इस बात ने विजयंत के सारे शुबहे दूर कर दिए.शिप्रा शादी कर अमेरिका चली गयी लेकिन विजयंत ने अपने दामाद से वापस आ उसे जाय्न करने की गुज़ारिश नही छ्चोड़ी.1 बरस पहले प्रणव उसकी बात मान गया & तब से सब साथ रहे थे.

"क्या हो रहा है?",उसने नौकर से पानी का ग्लास लिया & सोफे पे बैठ गया,"..डॉन'ट टेल मी!..शिप्रा पार्टी प्लान कर रही है..& कभी ये इतनी खुश हो ही नही सकती!",सभी हँसने लगे & शिप्रा ने पति को बनावटी गुस्से से देखा.

"ये लो भाई तुम्हारी गेस्ट लिस्ट.कम ऑन,प्रणव.खाना खाते हैं."

"& जो हमारे डाइनिंग टेबल पड़ा है,उसका क्या होगा?",शिप्रा ने पति के दाई बाँह मे अपनी बाई बाँह फँसा दी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--4

gataank se aage.

ravi ne hi use apne pita ke dost ke daftar me naukri dilwayi & ye naya kiraye ka ghar bhi.badle me use apna kunwarapan use saunpna pada.ravi to uska deewana ho gaya & uspe tohfo ki barsat karne laga.ravi pehla mard tha jisne rambha ko choda tha & uske sath kuchh dino ki chudai ke baad hi use apne bare me 1 aham baat pata chali-use chudai bahut pasand thi.ravi ke aane se uski zindagi aasan ho gayi thi magar ye uski manzil nahi thi.vo 1 chhote shehar ke dukandar ki biwi banke uske bharose nahi rehna chahti thi.uski khwahish aasmaan chhune ki thi & vo yaha mumkin nahi tha.

"ravi..utho.train ka time ho gaya.",usne use jagaya & apna suitcase & bag uthake darwaze ke paas rakha.

"kya yaar..itni jaldi..are bahut waqt ho gaya..",vo uthke jaldi-2 kapde pehanane laga,"..kyu ja rahi hai,rambh..main kaise rahunga yaha..tu bhi na!",rambha ne kamra band kiya & chabhi ravi ko di.

"main kya karu iska?"

"tu hi rakh.ab jaldi chal.",ravi ne apni gadi me uska saman dala & kuchh der baad vo usi saman ko train me chadha raha tha.

"pahunch ke fone kar dijiyo.",gadi station chhod rahi thi.jawab me rambha muskurati rahi.

"ravi..",gadi ab thoda raftar pakad rahi thi.ravi uski khidki ke paas aaya & dhire-2 daudne laga.

"kya hua?kuchh bhul gayi kya?"

"nahi.kuchh bhuli nahi.",gadi aur tez ho gayi,"..mera intezar mat karna.main ab yaha laut ke nahi aa rahi."

"kya?",ravi ab daud raha tha,"..kya mazak kar rahi hai?"

"mazak nahi,ravi.main humesha ke liye ja rahi hu.ab yaha nahi lautngi.goodbye!"

"rambha!..rambha..!",gadi ab station se bahar nikal chuki thi.ravi hanfta khada use jate dekh raha tha.

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"sab samajh gayi,Sonam?",Brij Kothari pichhle 3 dino se roz sonam ko uske interview ke liye taiyyar kar raha tha.

"haan,lekin.."

"lekin kya?"

"maan lijiye,vo mujhe nahi chunta hai to?"

"to yaha join kar lena."

"to yahi kar leti hu vaha jane ki kya zarurat hai?"

"tum bahut darti ho!",brij uske karib aaya & use baaho me bhar liya,"..dekho sonam,tum mujhe nahi janti.pk..aaj se tum mujhe nahi janti mujhse kabhi mili bhi nahi..hun..aisa sochte hue vaha jana.agency vale 4 ladkiyo ko vaha bhej rahe hain.tumhara biodata un sab se achha hai & tum un sab se kahi zyada hoshiyar ho.agar tumhe is baat se bhi tasalli nahi ho rahi to ye suno maine un sabhi ladkiyo ki tasvire bhi nikalwa li hain & koi bhi tum jitni haseen nahi.",usne uske hontho ko chum liya.sonam ne bhi uski kiss ka jawab diya & uske seene se lag gayi.kuchh hi palo me dono nange khade the & 1 dusre ko badi garmjoshi se chum rahe the.sonam umra & kad,dono me uske samne bachchi jaisi thi magar uska bhara-2 jism kisi bhi mard ke paseene chhudwane ke kabil tha.

sanwli sonam ki 36 size ki chhatiyo ko munh me bharte hue brij ne use god me utha ke apne bistar pe lita diya & fir itmina se uski chhatiya chusne laga.sonam bechaini se uske sar ke baalo ko nochti hui masti ki raah pe aage badhti rahi.brij ka baya hath uski tango ke beech uski chikni chut ke andar ghus khalbali macha raha tha.apne dane pe uski gustakh ungliyo ki ragad se sonam behal ho gayi & apni 26 inch ki kamar uchkane lagi.brij ne ungliyo ki raftar badha uski bechaini ko aur badha diya & tab tak uske dane ko ragadta raha jab tak vo jhad na gayi.

"1 baat bataiye..",sanse sambhalti sonam ko brij ne uske pet ke bal lita diya & uski makhmali pith ko chumte hue uski 36 size ki moti gand pe aa gaya,"..oohhhhh..haaaannn....aapko mehra ka iasa kya raaz jaanana hai?....uunnnhnhhhh..!",brij ki zuban gand ki darar ki sair karne lagi thi.

"aaj se koi 6 mahine baad sarkar devalay se 20 km ki duri pe bane 1 bahut bade zamin ke hisse ko special economic zone yani ki SEZ ke liye kisi private party ko dene ka tender nikalne wali hai.is baat ki jankari mujhe hai..",sonam ab bahut machal gayi thi.usne karwat badli & apni chut chhatate brij ke baalo ko pakad use upar khincha.bhari-bharkam brij ne use apne lambe chaude sharir ke neeche dabatae hue uske hotho ko apni giraft me le liya.sonam ne use baaho me bhar liya & apne jism pe uske jism ko aur dabane ki koshish karne lagi.

"..& vijayant mehra ko bhi ye zarur pata hoga.kothari group abhi se us tender ki rakam taiyyar karne me juta hua hai jabki abhi tak sarkar ne koi farman bhi jari nahi kiya hai & yehi sab Trust group bhi kar raha hoga.",apni premika ki harkato ka ishara samajhte hue brij ne apne daye ghutne se uski tango ko failaya & apna 9 inch ka tagda lund uski chhoti si chut ki darar pe tika ke dhakka diya.

"oow.dard hota hai na!..haan..aise hi aaram se kariye....haiiiiii.....",lund andar ghus chuka tha & sonam ki chudai shuru ho chuki thi.

"aap chahte hain ki main unke tender ki rakam aapko pehle hi bata du & ye bhi ki vo kya taiyyariya kar rahe hain?....yaaaahhhhhhhhh....!",brij ke tagde lund ki zordar chudai ne aakhirkaar use jhadwa hi diya tha.brij kothari ne fauran apni premika ko baaho me bhar liya & use liye diye apne ghutno pe baith gaya.uski gardan me baahe dali sonam ne apni tange uski gand ke peechhe aapas me fansa rakhi thi & unhi ke sahare 1 baar fir vo apne malik ke lund pe kudne lagi thi.

"bas meri jaan tum mera ye kaam kar do fir kothari group me senior position & paise to milne hi hain tumhe.",uski kasi gand ko dabochta jism apne ghutno pe baith apni kamar hilane laga tha.mehra ko harane ke khayal se hi uska dil 1 ajab si khushi se bhar gaya tha & vo ab dugune josh ke sath chudai kar raha tha.sonam ab us se bilkul chipat gayi thi & uske baye kandhe pe sar tika ke uske sar ko zor se aahen bharte hue chum rahi thi.uske hath brij ki pith pe besabri se chal rahe the & vo uske har dhakke pe maze se pagal ho rahi thi.1 zordar chikh ke sath dono premi 1 sth jhad gaye.sonam ke chehre pe bahut sukun ka bhav tha.kuchh der baad brij ne use god se utar bistar pe litate hue apna sikuda lund uski chut se nikala & apne kapde pahanane laga.

"ja rahe hain?",sonam ne baya hath badha ke bistar ke bagal me khade pant ka hook laga rahe brij ke baalo bhare pet ko pyar se sehlaya.

"haan."

"congratulations & best of luck.",sonam ne pant ke upar se uske lund ko 1 baar dabaya to brij ne muskurate hue sawaliya nigaho se use dekha,"..is ravivar ko aapki shadi hai na to usi ki badhai de rahi hu.",brij to sachmuch bhul hi gaya tha is bare me!sonam ke jism & use mehra ke yaha sendhmari ke liye taiyyar karne me vo itna mashgul ho gaya tha ki vo Sheetal ke bare me to vo bhul hi gaya tha.

"tumhai vajah se main apni mangetar ko bhi bhul gaya!",gbrij ne banawati gussa kiya to sonam hans padi & uth ke uske karib aa gayi fir table se wine ki bottle utha glass me dali & brij ko pilayi,"ye aapki shadi ke naam..",fir agla ghunt khud bhara,"..& ye meri trust group me naukri lagne ke naam.",dono hans pade & 1 baar fir gale lag gaye.

Vijayant Mehra chahe jitni bhi ayyashiya kare,agar vo Devalay me hota tha to sota apne ghar me hi tha.abhi 3-4 saal pehle hi vo apne naye bungle me rehne laga tha.ab use bungla kehna shayad thik nahi hoga.1 bahut bade maidan ko pehle oonchi deewar se ghera gaya fir us maidan ki landscaping ki gayi & 1 chhota 9 hole golf course,swimming pool & kafi bada lawn banaya gaya.is maidan ke beechobeech 1 bada bungla bana & uske dono taraf us se thode se hi chhote 2 chhote bungle banaye gaye.beech vala bungla vijayant & uski biwi Rita ka tha.dayi taraf ka bungla Sameer ke liye banwaya gaya tha & vijayant chahta tha ki shadi ke baad sameer apne parivar ke sath usi bungle me rahe.bayi taraf ke bungle me vijayant ki pehli aulad,uski beti Shipra apne pati Pranav ke sath rehti thi.

"hi,daddy!",vijayant ne jaise hi bungle ke hall me kadam rakha,uski beti uske gale se lag gayi.

"hi,beta.abhi tak soyi nahi?",1 naukar ne vijayant ka coat & uske driver se uska briefcase le liya.

"nahi,mere sath baithi tumhara intezar kar rahi thi.",peach colour ke dressing gown me rita vaha aayi.rita ki umra 48 baras thi lekin pati ki tarah hi vo bhi umra se chhoti dikhti thi & abhi bhi kisi ko yakin nahi hota tha ki vo 1 shadishuda beti & jawan bete ki maa hai.vo apni jawani me 1 beuty queen reh chuki thi & aaj bhi uska husn gazab ka tha.

"sameer ke lautne ki party plan kar rahi hai ye..",usne kandhe tak lambe baal jhatke & sofe pe baith gayi.vijayant ko apne lund me harkat hoti mehsus hui.rita ki bhari aavaz aisi lagti thi jaise phanse gale se aa rahi ho.vijayant ko uski aavaz badi mastani latgti thi.

"to ye to humesha se tumhara hi department raha hai,beta.",vijayant sofe pe baitha to shipra 1 notepad le uske sath baith gayi,"..main kya karu isme?"

"ye mehmano ki fehrist to aap hi final karte hain.",usne notepad uski god me patka.

"ohh..",vijayant ne thake hone ka ishara karte hue sar peechhe sofe ki back pe rakha,"..abhi nahi beta."

"please,papa!..fir sabko invitation der se milenge & humari party bilkul flop ho jayegi.",vo bachchon ki tarah machli.vijayant hansa,uski beti abhi tak 1 bachchi jaisi hi thi.

"ok,madam.jaisa aapka hukm!",usne natkiya andaz me kaha & pad utha list dekhne laga.rita muskurayi & apni coffee ka cup uthake 1 ghunt bhara.vijayant mehra apne bachchon ki koi baat nahi talta tha,vo uski zindagi the.vo apni biwi se shayad har roz bewafai karta tha lekin aaj tak usne kisi ladki ko rita ka darja nahi diya tha.uska maanana tha ki parivar ki jagah koi nahi le sakta & shayad yehi vajah thi ki uska parivar itna khushaal tha.

"hello!",5'9" kad ka 1 chashma lagaye gora,bhale si shakl vala jawan mard hall me dakhil hua.

"hi!pranav.",rita ne jawab diya to vijayant ne pad se nazar uthayi & damad ko dekh ke muskuraya.2 saal pehle Pranav Kapur uski beti ka pati bana tha.vo America me kisi company me kaam karta tha & vahi chhutti mana rahi shipra se uski mulakat hui thi.dono 1 dusre ko chahne lage the & jab shipra ne us se shadi karne ki khwahish jatayi to vijayant nahi mana tha.use bharosa nahi tha shayad ki uski beti sahi faisla le sakti hai.

kitna galat tha vo!pehli mulakat me hi usne bhanp liya tha ki pranav 1 achha ladka hai & jab usne use shadi ke baad Trust group join karne ko kaha to usne saaf mana kar diya tha.is baat ne vijayant ke sare shubahe door kar diye.shipra shadi kar america chali gayi lekin vijayant ne apne damad se vapas aa use join karne ki guzarish nahi chhodi.1 baras pehle pranav uski baat maan gaya & tab se sab sath rahe the.

"kya ho raha hai?",usne naukar se pani ka glass liya & sofe pe baith gaya,"..don't tell me!..shipra party plan kar rahi hai..& kabhi ye itni khush ho hi nahi sakti!",sabhi hansne lage & shipra ne pati ko banawati gusse se dekha.

"ye lo bhai tumhari guest list.come on,pranav.khana khate hain."

"& jo humare dining table pada hai,uska kya hoga?",shipra ne pati ke dayi banh me apni bayi banh fansa di.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 13 Dec 2014 02:11

जाल पार्ट--5

गतान्क से आगे.

"अरे छ्चोड़ो उसको,आज यहा खाने दो.",विजयंत ने बेटी के बालो मे हाथ फिराया.

"उन..डॅडी!मैं अब बच्ची नही हू!नही..आज तो वही खाएगा..चलो!",उसने पति को फिर से उसी बनावटी गुस्से से देखा & वाहा से चली गयी.विजयंत & रीता ने मुस्कुराते हुए अपने बच्चो को देखा & फिर खाने की मेज़ की ओर चले गये.

"उम्म..छ्चोड़ो!",शिप्रा ने खुद को अपनी ओर खींचते प्रणव को झिड़का.विजयंत के बंगल से शिप्रा का बुंगला 1 बड़े ही खूबसूरत रास्ते से जुड़ा था जिसके दोनो तरफ खूबसूरत फूलो की क्यारियाँ थी & दोनो उसी पे चले जा रहे थे.

"अरे अब क्यू नाराज़ हो गयी?",प्रणव ने बीवी को मनाने की कोशिश की मगर वो खामोश रही,"अरे बाबा1 तो पार्टीस अरेंज करना तुम्हे पसंद नही..& फिर तुम्हे छेड़ने मे बड़ा मज़ा आता है!",उसने बीवी की ठुड्डी पकड़ के प्यार से हिलाया तो उसने चेहरा झटक दिया.

"ओफ्फो!अब मान भी जाओ.",उसने बीवी को बाहो मे भर के चूम लिया.

"क्या करते हो?कोई देख लेगा!",वो छितकी मगर प्रणव ने उसे फिर से अपनी ओर खींचा & इस बार बाहो मे जाकड़ के फिर से उसके गुलाबी होंठ चूम लिए.

"देखने दो.",शिप्रा को पति का यू प्यार जताना अच्छा तो लग रहा था मगर उसे डर भी था की कही कोई देख ना ले.

"घर के अंदर तो चलो..उउम्म्म्म..!",शिप्रा के ड्रेसिंग गाउन के उपर से ही प्राणव ने अपनी बीवी की गंद दबा दी थी.शिप्रा का रंग मा जैसा ही गोरा था मगर वो उतनी खूबसूरत नही थी ना ही उसका जिस्म उतना दिलकश नही था.इसका ये मतलब नही की वो हसीन नही थी या फिर मस्त नही थी.

"ऊऊहह..प्रणव...डार्लिंग.....!",अपने बंगल की बाहरी दीवार से अपनी बीवी की पीठ लगा प्रणव ने उसके गाउन की बेल्ट खोली & अपने जिस्म को उसके जिस्म पे दबा दिया.उसके हाथ अभी भी शिप्रा की 34 साइज़ की गंद दबा रहे थे & होंठ उसकी गोरी गर्दन चूम रहे थे.वो भी जानता था कि उनकी आवाज़ें सुनके कोई नौकर वाहा आ सकता था लेकिन यही तो मज़ा था इस खेल का!

"नो....प्रणव नही.....आहह....नाआआ.....!",प्रणव के दाए हाथ ने गाउन के नीचे उसकी नाइटी को उठा उसकी टाँगो के बीच उसकी गोरी,गुलाबी चूत को ढूंड लिया था & उसे कुरेद रहा था.

"मुझे पता था कि तुमने पॅंटी नही पहनी होगी,जानेमन!",उसने जोश से लड़खड़ाती आवाज़ मे कहा & अपने मुँह को नाइटी के गले मे से दिख रहे बीवी के क्लीवेज से लगा दिया & चूसने लगा.उसकी ज़ुबान ऐसे चल रही थी मानो वो अपनी ज़ुबान से ही खींच के उसकी 34सी साइज़ की चूचियो को बाहर खींच लेना चाहता हो.शिप्रा पति के हाथ की कारस्तानी से मजबूर हो कमर हिला रही थी.उसकी चूत मे मस्ती भरी कसक अपने शबाब पे पहुँच गयी थी.उसने पति की पीठ को भींचते हुए सर झुका के उसके दाए कान मे पागलो की तरह अपनी जीभ फिराई.

"आन्न्‍न्णनह..नही..प्रणव यहा नही..पागल....अंदर चलो....ओह..!",प्रणव ने बीवी का दाया हाथ अपनी पीठ से अलग किया & ज़िप खोल उसे अपनी पॅल्ट मे घुसा के तब तक दबाए रखा जब तक कि वो उसके लंड को हिलाने नही लगी,"..उउन्न्ह..डार्लिंग..कितना गर्म है ये..अंदर चलो प्लीज़..!",प्रणव का लंड 8.5 इंच लंबा था & बहुत ही मोटा.शिप्रा को अपने हाथ मे उसका एहसास पागल करने वाला लग रहा था.वो अपने को दुनिया की सबसे खुशनसीब लड़की मानती थी.उसे इतना प्यार करने वाला पति मिला था & उसका लंड तो उफफफ्फ़..!

तभी प्रणव ने उसका हाथ उपर खींचा & 1 बार फिर उसके गुलाबी होंठ चूमने लगा.कुच्छ देर तक उसके हाथ बीवी की 26 इंच की पतली कमर से लिपटे उसे सहलाते रहे फिर अचानक उसने उसकी दोनो जाँघो को थाम लिया.शिप्रा समझ गयी की वो क्या करने वाला था.

"नही..प्रणव..कोई सुन लेगा..आ जाएगा!..ओईईईई..!",बीवी की बात अनसुनी करते हुए प्रणव ने उसकी जंघे हवा मे उठाते हुए अपना लंड उसकी चूत मे घुसा दिया.लंड ने जैसे ही जान-पहचानी गीली चूत की दरार च्छुआ जैसे वो अपनेआप ही अंदर घुस गया.शिप्रा पूरी तरह मदहोश थी मगर इतना होश था उसे कि चीखे ना.उसने अपने होंठ पति के बाए कंधे के उपर कोट पे दबा दिए & आहे उसमे दफ़्न करने लगी.प्रणव के धक्के उसे मस्ती की ऊँचाहियो पे ले जा रहे थे.उसके होंठ उसकी गर्दन के बाई तरफ & उसके बाए गाल & कान को चूम रहे थे.तभी शिप्रा ने अपने नाख़ून अपने पति के दोनो कंधो पे गढ़ा दिए & चिहुनकि.वो झाड़ रही थी.उसके झाड़ते ही प्रणव ने अपनी कमर और ज़ोर से हिलाना शुरू कर दिया & कुच्छ पॅलो बाद उसकी चूत मे अपना वीर्य छ्चोड़ने लगा.

"तुम पागल हो!",प्रणव ने उसे गोद मे उठा लिया तो उसने अपनी बाहे उसके गले मे डाल प्यार से चूमा.अभी भी उसके चेहरे पे खुमारी सॉफ दिख रही थी,"..इतना बड़ा घर है हमारा लेकिन जनाब को उसके बाहर प्यार करना है!",उसने हल्के से उसके बाए गाल पे काटा.

"तो ठीक है,अब घर के अंदर प्यार करते हैं!",बंगल के अंदर दाखिल होते हुए उसने शिप्रा को चूमा.बंगल का दरवाज़ा बंद हो गया मगर कुच्छ देर तक दोनो के हँसने की आवाज़ें बाहर तक आती रही फिर खामोशी च्छा गयी & अगर कोई गौर से सुनता तो थोड़ी देर बाद फिर से दोनो की मस्तानी आहो की बड़ी धीमी आवाज़ बाहर तक आने लगी थी & ये आवाज़ें देर तक आती रही.

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"ऑफीस से कोई 1 पैंटिंग लेके आया था..",रीता बाथरूम मे दाखिल हुई तो देखा की विजयंत अपना नगा बदन तौलिए से पोछ रहा था.विजयंत ने दीवार पे लगे आदमकद शीशे मे उसे देखा & सर हिलाया.शीशे मे पति के अक्स से आँखे मिलाते हुए हल्के से मुस्कराते हुए रीता ने अपने कंधो से अपनी नाइटी की डोरिया सरका दी.उसका गोरा जिस्म शीशे मे जगमगा उठा.उम्र के साथ शरीर थोड़ा भारी हो गया था लेकिन शायद और दिलकश भी.उसने बाए हाथ से अपनी 36डी साइज़ की छातियों को दबाया & दाए को 1 बार अपनी चूत पे फेरा.उसकी कमर 32 इंच की हो गयी थी & गंद 38 की लेकिन ना वो मोटी लगती थी ना ही उसका जिस्म भद्दा.वो पति के करीब आई & उसके हाथो से तौलिया ले उसका जिस्म सुखाने लगी.

"कहा से खरीदी?",तौलिए को छ्चोड़ते हुए 5'6" कद की रीता पति के सामने आई & अपने पंजो पे उचक के उसके होंठो को चूमने लगी.

"नीलामी मे.",विजयंत बीवी की किस का जवाब देते हुए उसकी मांसल कमर को दबाने लगा.

"यानी की फिर उस कोठारी से टक्कर हुई तुम्हारी?",रीता झुक के उसके बालो भरे सीने पे अपने होंठो के निशान छ्चोड़ते हुए नीचे जाने लगी.उसकी मंज़िल थी विजयंत का तगड़ा लंड.रीता ने उसे हिलाया & फिर अपना मुँह लंड के उपर विजयंत के पेट मे घुसा दिया & उसे चूमते हुए लंड हिलाने लगी.

"हां,उसी से जीती है.",वो रीता के बालो मे हाथ फिराने लगा.रीता जीभ से लंड के सूपदे को चाट रही थी फिर उसने उसे मुँह मे भरा & चूसने लगी.विजयंत ने सर नीचे झुकाया तो बीवी के चेहरे पे उसे मस्ती दिखाई दी.लंड को मज़बूती से हिलाते हुए वो बड़ी गर्मजोशी से उसे चूस रही थी.

"आख़िर क्यू नफ़रत करते हो तुम उस से इतनी?..ओह....आननह..!",कयि पॅलो तक लंड से खलेने के बाद वो उठी & उसके उठते ही विजयंत ने उसके हाथ अपने कंधो पे रखे & उसकी जंघे उठा के अपना लंड 1 ही झटके मे उसकी चूत मे उतार दिया.2 बच्चो की मा होने के बावजूद रीता की चूत उतनी ढीली नही हुई थी & विजयंत को अभी भी उसे चोदने मे मज़ा आता था.उसकी गंद थामे बाहो मे झूलते हुए उसने 4-5 धक्के लगाए.

"क्यूकी हर बार वो मेरे रास्ते मे खड़ा हो जाता है..",विजयंत ने अपने होंठ रीता के लाबो से सटा दिए तो वो मस्ती मे बहाल हो अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे घुसा उसकी जीभ से खेलने लगी,"..जो मुझे चाहिए वही उसी पे उसकी नज़र भी रहती है.",विजयंत ने किस तोड़ी & बात पूरी कर उसे फिर से चूमते हुए बिस्तर पे ले आया & लिटा के उसके उपर लेटते हुए उसे चोदने लगा.

"आहह....एससस्स....जाआंणन्न्...चोदो & ज़ोर से....ऊऊओह....थोडा संतोष करना सीखो जान...उउन्न्ञणन्.....",विजयंत ने अपने होंठ उसकी बाई चूची के हल्के भूरे निपल से लगाए तो उसने बाए हाथ मे छाती को पकड़ उसे उसके मुँह मे भर दिया,"..क्या हुआ अगर वो जीत ही गया तो?..इतना सब कुच्छ तो है हमारे पास......आन्न्‍नणणनह..!",विजयंत के धक्को से मदमस्त हो उसने अपनी टाँगे उसकी कमर पे चढ़ाते हुए उसकी पीठ पे बेसब्री से हाथ फिराना शुरू कर दिया था & अपनी कमर भी हिला रही थी.

"नही....",उसने रीता के निपल को हल्के से काटा,"..1 बार जीता तो हर बार जीतेगा & फिर सब ख़त्म हो जाएगा..मैं उसे कभी भी किसी कीमत पे जीतने नही दे सकता.",विजयंत ने बहस ख़त्म की & अपनी पत्नी की दूसरी चूची का रुख़ किया.रीता भी समझ गई थी कि हर बार की तरह भी इस बार भी उसकी बात का कोई असर नही होने वाला है.वो उस बात को छ्चोड़ अब इस रोमानी लम्हे पे ध्यान देने लगी.उसकी चूत मे उधम मचाता पति का मोटा लंड उसे मदहोश किए जा रहा था.उसने बहाल हो विजयंत के दाए कान को काटा & उसकी गंद मे नाख़ून धँसाते हुए उसकी चुदाई का लुत्फ़ उठाने लगी.

रंभा लंच मे दफ़्तर से निकल आई.डेवाले आए उसे 6 महीने हो चुके थे.जिस सहेली के भरोसे वो यहा आई थी उसने उसकी काफ़ी मदद की थी.उसने उसे पहले प्लेसमेंट एजेन्सी के बारे मे बताया जहा से उसे 1 कंपनी मे स्क्रेटरी की नौकरी मिल गयी & साथ ही 1 वर्किंग विमन'स हॉस्टिल मे रहने की जगह भी दिलवा दी.जब वो अपने शहर मे थी तभी उसने करेस्पॉंडेन्स से एमबीए करना शुरू किया था,वो भी अब पूरा होने वाला था.कोई और लड़की होती तो खुशी-2 काम करती रही है मगर रंभा के ख्वाब तो आसमान च्छुने के थे & वो ये सब बहुत जल्दी कर लेना चाहती थी.

यही उसकी परेशानी का सबब था.1 महीने पहले हॉस्टिल की लड़कियो से उसे पता चला कि ट्रस्ट ग्रूप के मालिक विजयंत मेहरा की सेक्रेटरी की पोस्ट के लिए एजेन्सी लड़कियो को चुन रही है.एजेन्सी ने ये बात खोली नही थी & चुप-चाप कर रही थी लेकिन किसी को पता चल गया & उसने ये बात लीक कर दी.रंभा अगले ही दिन एजेन्सी पहुँची & अपना CV भी वाहा भेजने को कहा लेकिन उसे साफ मना कर दिया गया.उसने हार नही मानी & वाहा के चक्कर लगाती रही लेकिन नतीजा कुच्छ भी नही निकला.

"मैं कुच्छ नही कर सकती..आप सीनियर मॅनेजर साहब से बात कीजिए.",ये टका सा जवाब दिया था उसकी कन्सल्टेंट ने उस से & सीनियर मॅनेजर कभी मिलता ही नही था.इन्ही ख़यालो मे गुम वो सड़क पे चली जा रही थी.ज़िंदगी मे पहली बार उसे ऐसा लगा था कि वो हार जाएगी.तभी 1 रिक्षेवला उसके बहुत करीब से गुज़रा.थोड़ा और करीब होता तो वो गिर ही जाती.

"आए!अँधा है क्या!",वो झल्लाई मगर वो रिक्षेवाला तेज़ी से आगे चला गया.चिढ़ते हुए वो आगे बढ़ी,फूटपाथ पे 1 आदमी रेहदी लगाके आईने बेच रहा था & रंभा ने अपना अक्स 1 शीशे मे देखा-सामने उसे 1 चिड़चिड़ी लड़की नज़र आई.वो खड़ी होके खुद को देखने लगी..ऐसी क्यू हो गयी थी वो?

उसकी चिड़चिड़ाहट का 1 कारण और भी था.डेवाले आने के बाद से उसने 1 बार भी चुदाई नही की थी.कहा अपने शहर मे वो अपने बाय्फ्रेंड को चुदाई के लिए तड़पाती रहती थी & कहा यहा डेवाले मे वो खुद 1 अदद लंड के लिए तरस रही थी.ऐसा नही था की यहा लड़के उसके करीब नही आना चाहते थे.दरअसल जिनको वो चाहती थी वो अपनी हैसियत की लड़कियो के साथ घूमते रहते थे & वो कोई उसके शहर की लड़कियाँ तो थी नही डेवाले की तेज़-तर्रार लड़किया थी,अपने बाय्फ्रेंड को अपने चंगुल से ऐसे कैसे निकलने देती.फिर भी कुच्छ लड़को ने उसके करीब आने की कोशिश की थी मगर या तो वो उसे पसंद नही थे या फिर उनके साथ सोने मे उसे कोई फ़ायदा नही नज़र आया.

उसने शीशे मे देखा & चेहरे पे हल्की सी मुस्कान लाई..हां ये बेहतर था..उसने अपने कंधे पे बॅग ठीक किया & आगे बढ़ी..चाहे कुच्छ भी हो जाए वो एजेन्सी के उस सीनियर.मॅनेजर से मिलके रहेगी & 1 बार तो ट्रस्ट मे इंटरव्यू ज़रूर देगी.ये मलाल वो मन मे नही रखना चाहती थी कि उसने कोशिश नही की..हां,कल सवेरे उस मॅनेजर को उस से मिलना ही होगा!

वो आगे बढ़ी,जहा इलाक़े के सब-डिविषनल मॅजिस्ट्रेट का कोर्ट था.वाहा कुच्छ गहमा-गहमी थी.उसने देखा कोई जोड़ा शादी कर के कोर्ट से बाहर आ रहा था & उनके साथ के लोग उनके पीछे थे.भीड़ की वजह से उनकी शक्ल नही दिखी.उसने देखा कुच्छ फोटोग्राफर्स भी उनकी तस्वीरे खींचना चाह रहे थे.जोड़ा जल्दी से कार मे बैठ के निकल गया.रंभा उनकी शक्ल नही देख पाई.उसने घड़ी देखी,लंच टाइम ख़त्म हो रहा था.वो वापस दफ़्तर जाने को घूम गयी.

वो शादीशुदा जोड़ा & कोई नही ब्रिज मेहरा & उसकी नयी-नवेली दुल्हन सोनिया थे.रंभा को खबर नही थी कि आने वालो दिनो मे उसकी ज़िंदगी के तार कयि और लोगो की ज़िंदगियो के तारो से जुड़ने वाले थे & उनमे ब्रिज & सोनिया भी शामिल थे.

सोनिया फूलो से सजे अपने कमरे मे आई & शीशे के सामने खड़ी हो गयी.अभी-2 उसकी शादी की रिसेप्षन पार्टी ख़त्म हुई थी.कोर्ट मे शादी करने के बाद वो शाम की पार्टी के लिए तैय्यार होने मे लग गयी थी & अब पार्टी ख़त्म होने के बाद वो काफ़ी थक गयी थी.पार्टी बड़ी शानदार रही थी & उसे बहुत अच्छा लगा था.

सोनिया ने सुर्ख लाल रंग का लहंगा-चोली पहना था जोकि उसके गोरे रंग पे खूब फॅब रहा था.उसने गौर से अपने रूप को आईने मे देखा.वो 30 बरस की हो चुकी थी & ये उसकी दूसरी शादी थी लेकिन शायद ही कोई उसे देख ये बता सकता था.उसके पिता फौज के बड़े अफ़सर रहे थे & उन्होने ही उसकी शादी 1 फ़ौजी से ही करवाई थी लेकिन सोनिया को उस ज़िंदहगी से ऊब हो चुकी थी.पति तो हर वक़्त मुल्क की हिफ़ाज़त मे जुटा रहता & वो घर बैठी उकताने लगी.इसी बात को लेके मिया-बीवी मे तकरार शुरू हुई जोकि तलाक़ पे ही जाके ख़त्म हुई.

उसके बाद वो डेवाले आ गयी & अपनी 1 सहेली के साथ मिलके इवेंट मॅनेज्मेंट का काम करने लगी.अपने काम के सिलसिले मे ही 1 पार्टी मे उसकी मुलाकात ब्रिज कोठारी से हुई जिसकी ज़िंदादिली ने उसके उपर बड़ी गहरी छाप छ्चोड़ी.वो उसके पिता की उम्र का था लेकिन ये उम्र का फासला भी उनके प्यार के बीच आने ना पाया & जब ब्रिज ने उस से शादी के लिए कहा तो उसने फ़ौरन हां कर दी.उसके मा-बाप को तो उसका तलाक़ देना ही नागवार गुज़रा था,इतनी उम्र वाले आदमी से शादी की बात सुनी तो उन्होने उस से रिश्ता ही ख़त्म कर लिया मगर उसपे इस बात का कोई असर नही पड़ा & उसने ब्रिज से शादी का फ़ैसला नही बदला.

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क्रमशः.......

JAAL paart--5

gataank se aage.

"are chhodo usko,aaj yaha khane do.",vijayant ne bti ke baalo me hath firaya.

"un..daddy!main ab bachchi nahi hu!nahi..aaj to vahi khayega..chalo!",usne pati ko fir se usi banawati gusse se dekha & vaha se chali gayi.vijayant & rita ne muskurate hue apne bachcho ko dekha & fir khane ki mez ko or chale gaye.

"umm..chhodo!",shipra ne khud ko apni or khinchte pranav ko jhidka.vijayant ke bungle se shipra ka bungla 1 bade hi khubsurat raste se juda tha jiske dono taraf khubsurat phoolo ki kyariyan thi & dono usi pe chale ja rahe the.

"are ab kyu naraz ho gayi?",pranav ne biwi ko manane ki koshish ki magar vo khamosh rahi,"are baba1 to parties arrange karna tumhe pasand nahi..& fir tumhe chhedne me bada maza aata hai!",usne biwi ki thuddi pakad ke pyar se hilaya to usne chehra jhatak diya.

"offoh!ab maan bhi jao.",usne biwi ko baaho me bhar ke chum liya.

"kya karte ho?koi dekh lega!",vo chhitki magar pranav ne use fir se apni or khincha & is baar baaho me jakad ke fir se uske gulabi honth chum liye.

"dekhne do.",shipra ko pati ka yu pyra jatana achha to lag raha tha magar use darr bhi tha ki kahi koi dekh na le.

"ghar ke andar to chalo..uummmm..!",shipra ke dressing gown ke upar se hi pranva ne apni biwi ki gand daba di thi.shipra ka rang maa jaisa hi gora tha magar vo utni khubsurat nahi thi na hi uska jism utna dilkash nahi tha.iska ye matlab nahi ki vo haseen nahi thi ya fir mast nahi thi.

"oooohhhhh..pranav...darling.....!",apne bungle ki bahri deewar se apni biwi ki pith laga pranav ne uske gown ki belt kholi & apne jims ko uske jism pe daba diya.uske hath abhi bhi shipra ki 34 size ki gand daba rahe the & honth uski gori gardan chum rahe the.vo bhi janta tha ki unki aavazen sunke koi naukar vaha aa sakta tha lekin yehi to maza tha is khel ka!

"no....pranav nahi.....aahhhh....naaaaaa.....!",pranav ke daye hath ne gown ke neeche uski nighty ko utha uski tango ke beech uski gori,gulabi chut ko dhoond liya tha & use kured raha tha.

"mujhe pata tha ki tumne panty nahi pehni hogi,janeman!",usne josh se ladkhadati aavaz me kaha & apne munh ko nighty ke gale me se dikh rahe biwi ke cleavage se laga diya & chusne laga.uski zuban aise chal rahi thi mano vo apni zuban se hi khinch ke uski 34C size ki chhatiyo ko bahar khinch lena chahta ho.shipra pati ke hath ki karastani se majboor ho kamar hila rahi thi.uski chut me masti bhari kasak apne shabab pe pahunch gayi thi.usne pati ki pith ko bhinchte hue sar jhuka ke uske daye kaan me paglo ki tarah apni jibh firayi.

"aannnnnhhhhhhh..nahi..pranav yaha nahi..pagal....andar chalo....ohhhhhh..!",pranav ne biwi ka daya hath apni pith se alag kiya & zip khol use apni pamt me ghusa ke tab tak dabaye rakha jab tak ki vo uske lund ko hilane nahi lagi,"..uunnhhhh..sarling..kitna garm hai ye..andar chalo please..!",pranav ka lund 8.5 inch lumba tha & bahut hi mota.shipra ko apne hath me uska ehsas pagal karne vala lag raha tha.vo apne ko duniya ki sabse khushnasib ladki manti thi.use itna pyar karne vala pati mila tha & uska lund to uffff..!

tabhi pranav ne uska hath upar khincha & 1 baar fir uske gulabi honth chumne laga.kuchh der tak uske hath biwi ki 26 inch ki patli kamar se lipte use sehlate rahe fir achanak usne uski dono jangho ko tham liya.shipra samajh gayi ki vo kya karne vala tha.

"nahi..pranav..koi sun lega..aa jayega!..ouiiiiiii..!",biwi ki baat ansuni karte hue pranav ne uski janghe hawa me uthate hue apna lund uski chut me ghusa diya.lund ne jaise hi jaan-pehchani gili chut ki darar chhua jaise vo apneaap hi andar ghus gaya.shipra puri tarah madhosh thi magar itna hosh tha use ki chikhe na.usne apne honth pati ke baye kandhe ke upar coat pe daba diye & aahe usme dafn karne lagi.pranav ke dhakke use masti ki oonchahiyo pe le ja rahe the.uske honth uski gardan ke bayi taraf & uske baaye gaal & kaan ko chum rahe the.tabhi shipra ne apne nakhun apne pati ke dono kandho pe gada diye & chihunki.vo jhad rahi thi.uske jhadte hi pranav ne apni kamar aur zor se hilana shuru kar diya & kuchh palo baad uski chut me apna virya chhodne laga.

"tum pagal ho!",pranav ne use god me utha liya to usne apni baahe uske gale me daal pyar se chuma.abhi bhi uske chehre pe khumari saaf dikh rahi thi,"..itna bada ghar hai humara lekin janab ko uske bahar pyar karna hai!",usne halke se uske baye gaal pe kata.

"to thik hai,ab ghar ke andar pyar karte hain!",bungle ke andar dakhil hote hue usne shipra ko chuma.bungle ka darwaza band ho gaya magar kuchh der tak dono ke hansne ki aavazen bahar tak aati rahi fir khamoshi chha gayi & agar koi gaur se sunta to thodi der baad fir se dono ki mastani aaho ki badi dhimi aavaz bahar tak aane lagi thi & ye aavazen der tak aati rahi.

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"office se koi 1 painting leke aaya tha..",rita bathroom me dakhil hui to dekha ki vijayant apna naga badan tauliye se pocnhh raha tha.vijayant ne deewar pe lage aadamkade shishe me use dekha & sar hilaya.shishe me pati ke aks se aankhe milate hue halke se muskrate hue rita ne apne kandho se apni nighty ki doriya sarka di.uska gora jism shishe me jagmaga utha.umra ke sath sharir thoda bhari ho gaya tha lekin shayad aur dilkash bhi.usne baye hath se apni 36D size ki chhatiyo ko dabaya & daye ko 1 baar apni chut pe fera.uski kamar 32 inch ki ho gayi thi & gand 38 ki lekin na vo moti lagti thi na hi uska jim bhadda.vo pati ke karib aayi & uske hatho se tauliya le uska jism sukhane lagi.

"kaha se kharidi?",tauliye ko chhodte hue 5'6" kad ki rita pati ke samne aayi & apne panjo pe uchak ke uske hotho ko chumne lagi.

"nilami me.",vijayant biwi ki kiss ka jawab dete hue uski mansal kamar ko dabane laga.

"yani ki fir us kothari se takkar hui tumhari?",rita jhuk ke uske baalo bhare seene pe apne hotho ke nishan chhodte hue neeche jane lagi.uski manzil thi vijayant ka tagda lund.rita ne use hilaya & fir apna munh lund ke upar vijayant ke pet me ghusa diya & use chumte hue lund hilane lagi.

"haan,usi se jeeti hai.",vo rita ke baalo me hath firane laga.rita jibh se lund ke supade ko chat rahi thi fir usne use munh me bhara & chusne lagi.vijayant ne sar neeche jhukaya to biwi ke chehre pe use masti dikhayi di.lund ko mazbooti se hilate hue vo badi garmjoshi se use choos rahi thi.

"aakhir kyu nafrat karte ho tum us se itni?..ohhhhhh....aannhhhhhhhhhhhh..!",kayi palo tak lund se khlene ke baad vo uthi & uske uthate hi vijayant ne uske hath apne kandho pe rakhe & uski janghe utha ke apna lund 1 hi jhatke me uski chut me utar diya.2 bachcho ki maa hone ke bavjood rita ki chut utni dhili nahi hui thi & vijayant ko abhi bhi use chodne me maza aata tha.uski gand thame baaho me jhulate hue usne 4-5 dhakke lagaye.

"kyuki har baar vo mere raste me khada ho jata hai..",vijayant ne apne honth rita ke labo se sata diye to vo masti me behal ho apni zuban uske munh me ghusa suki jibh se khelne lagi,"..jo mujhe chaiye vahi usi pe uski nazar bhi rehti hai.",vijayant ne kiss todi & baat puri kar use fir se chumte hue bistar pe le aaya & lta ke uske upar letate hue use chodne laga.

"aahhhhh....yessss....jaaaannnn...chodo & zor se....ooooohhhhhhhh....thoda santsoh karna seekho jaan...uunnnnn.....",vijayant ne apne honth uski bayi chhati ke halke bhure nipple se lagaye to usne baye hath me chhati ko pakd use uske munh me bhar diya,"..kya hua agar vo jeet hi gaya to?..itna sab kuchh to hai humare paas......aannnnnnhhhhhh..!",vijayant ke dhakko se madmast ho usne apni tange uski kamar pe chadhate hue uski pith pe besabri se hath firana shuru kar diya tha & apni kamar bhi hila rahi thi.

"nahi....",usne rita ke nipple ko halke se kata,"..1 baar jeeta to har baar jeetega & fir sab khatm ho jayega..main use kabhi bhi kisi keemat pe jeetane nahi de sakta.",vijayant ne bahas khatm ki & apni patni ki dusri choochi ka rukh kiya.rita bhi samajh gaui thi ki har baar ki tarah bhi is baar bhi uski baat ka koi asar nahi hone wala hai.vo us baat ko chhod ab is romani lamhe pe dhyan dene lagi.uski chut me udham machata pati ka mota lund use madhosh kiye ja raha tha.usne behal ho vijayant ke daye kaan ko kata & uski gand me nakhun dhansate hue uski chudai ka lutf utahne lagi.

Rambha lunch me daftar se nikal aayi.Devalay aaye use 6 mahine ho chuke the.jis saheli ke bharose vo yaha aayi thi usne uski kafi madad ki thi.usne use pehle placement agency ke bare me bataya jaha se use 1 comapny me scretary ki naukri mil gayi & sath hi 1 working women's hostel me rehne ki jagah bhi dilwa di.jab vo apne shehar me thi tabhi usne correspondence se MBA akrna shuru kiya tha,vo bhi ab pura hone wala tha.koi aur ladki hoti to khushi-2 kaam karti rehi hai magar rambha ke khwab to aasmaan chhune ke the & vo ye sab bahut jaldi kar lena chahti thi.

yehi uski pareshani ka sabab tha.1 mahine pehle hostel ki ladkiyo se use pata chala ki Trust group ke malik Vijayant Mehra ki secertary ke post ke liye agency ladkiyo ko chun rahi hai.agency ne ye baat kholi nahi thi & chup-chap kar rahi thi lekin kisi ko pata chal gaya & usne ye baat leak kar di.rambha agle hi din agency pahunchi & apna CV bhi vaha bhejne ko kaha lekin use saaf mana kar diya gaya.usne haar nahi mani & vaha ke chakkar lagati rahi lekin natija kuchh bhi nahi nikla.

"main kuchh nahi kar sakti..aap senior manager sahab se baat kijiye.",ye taka sa jawab diya tha uski consultant ne us se & senior manager kabhi milta hi nahi tha.inhi khayalo me gum vo sadak pe chali ja rahi thi.zindagi me pehli baar use aisa laga tha ki vo haar jayegi.tabhi 1 rikshewala uske bahut karib se guzra.thoda aur karib hota to vo gir hi jati.

"aye!andha hai kya!",vo jhallayi magar vo rikshewala tezi se aage chala gaya.chidhte hue vo aage badhi,footpath pe 1 aadmi rehdi lagake aaine bech raha tha & rambha ne apna aks 1 shishe me dekha-samne use 1 chidchidi ladki nazar aayi.vo khadi hoke khud ko dekhne lagi..aisi kyu ho gayi thi vo?

uski chidchidahat ka 1 karan aur bhi tha.devalay aane ke baad se usne 1 baar bhi chudai nahi ki thi.kaha apne shehar me vo apne boyfriend ko chudai ke liye tadpati rehti thi & kaha yaha devalay me vo khud 1 adad lund ke liye taras rahi thi.aisa nahi tha ki yaha ladke uske karib nahi aana chahte the.darasal jinko vo chahti thi vo apni haisiyat ki ladkiyo ke sath ghumte rehte the & vo koi uske shehar ki ladkiyan to thi nahi devalay ki tez-tarrar laadkiyan thi,apne boyfriend ko apne changul se aise kaise nikalne deti.fir bhi kuchh ladko ne uske karib aane ki koshish ki thi magar ya to vo use pasand nahi the ya fir unke sath sone me use koi fayda nahi nazar aaya.

usne shishe me dekha & chehre pe halki si muskan layi..haan ye behtar tha..usne apne kandhe pe bag thik kiya & aage badhi..chahe kuchh bhi ho jaye vo agency ke us sr.manager se milke rahegi & 1 baar to trust me interview zarur degi.ye malal vo man me nahi rakhna chahti thi ki usne koshish nahi ki..haan,kal savere us manager ko us se milna hi hoga!

vo aage badhi,jaha ilake ke sub-divisional magistrate ka court tha.vaha kuchh gehma-gehmi thi.usne dekha koi joda shadi kar ke court se bahar aa raha tha & unke sath ke log unke peechhe the.bhid ki vajah se unki shakl nahi dikhi.usne dekha kuchh photographers bhi unki tasveere khinchna chah rahe the.joda jaldi se car me baith ke nikal gaya.rambha unki shakl nahi dekh payi.usne ghadi dekhi,lunch time khatm ho raha tha.vo vapas daftar jane ko ghum gayi.

vo shadishuda joda & koi nahi Brij Mehra & uski nayi-naveli dulhan Soniya the.rambha ko khabar nahi thi ki aane valo dino me uski zindagi ke taar kayi aur logo ki zindagiyo ke taro se judne vale the & unme brij & sonia bhi shamil the.

Soniya phoolo se saje apne kamre me aayi & shishe ke samne khadi ho gayi.abhi-2 uski shadi ki reception party khatm hui thi.court me shadi karne ke baad vo sham ki party ke liye taiyyar hone me lag gayi thi & ab party khatm hone ke baad vo kafi thak gayi thi.party badi shandar rahi thi & use bahut achha laga tha.

soniya ne surkh laal rang ka lehanga-choli pehna tha joki uske gore rang pe khub fab raha tha.usne gaur se apne roop ko aaine me dekha.vo 30 baras ki ho chuki thi & ye uski dusri shadi thi lekin shayad hi koi use dekh ye bata sakta tha.uske pita fuaj ke bade afsar rahe the & unhone hi uski shadi 1 fauji se hi karwayi thi lekin soniya ko us zindahgi se oob ho chuki thi.pati to har waqt mulk ki hifazat me juta rehta & vo ghar baithi uktane lagi.isi baat ko leke miya-biwi me takrar shuru hui joki talaq pe hi jake khatm hui.

uske baad vo Devalay aa gayi & apni 1 saheli ke sath milke event management ka kaam karne lagi.apne kaam ke silsile me hi 1 party me uski mulakat Brij Kothari se hui jiski zindadili ne uske up[ar badi gehri chhap chhodi.vo uske pita ki umra ka tha lekin ye umra ka fasla bhi unke pyar ke beech aane na paya & jab brij ne us se shadi ke liye kaha to usne fauran haan kar di.uske maa-baap ko to uska talaq dena hi nagawar guzra tha,itni umra wale aadmi se shadi ki baat sun to unhone us se rishta hi khatm kar liya magar uspe is baat ka koi asar nahi pada & usne brij se shadi ka faisla nahi badla.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 13 Dec 2014 02:11

जाल पार्ट--6

गतान्क से आगे.

दोनो ने ही कोर्ट मे शादी करने का फ़ैसला किया.सोनिया की पिच्छली शादी रीति-रिवाजो के मुताबिक हुई थी मगर वो नाकामयाब रही & उसका उन रिवाजो पे विश्वास नही था फिर उसकी सहेली का कहना था कि कोर्ट मे क़ानूनी शादी उसे खुदा ना ख़स्ते अगर आगे कोई मुसीबत आती है तो उस हालत मे तलाक़ के वक़्त काफ़ी काम आ सकती है.और ब्रिज को इस उम्र मे धूम-धड़ाके के साथ शादी करना थोड़ा जाँचा नही.वैसे उसके करीबी लोगो ने कहा भी की वो कब से दुनिया की परवाह करने लगा मगर दुनिया की नही उसे खुद की परवाह थी & उसे कोर्ट मॅरेज धूम-धाम की शादी से बेहतर ही लगी.दोनो ने शादी के बाद रिसेप्षन मे अपने दोस्तो & जानकारो को बुलाने का फ़ैसला किया था.

सोनिया ने शीशे मे अपनी 26 इंच की कमर पे हाथ रख थोड़ा सा घूम के खुद को देखा.उसकी शक्ल तो बड़ी खूबसूरत थी ही,जिस्म भी कम क़ातिल नही था.उसने अपनी 38 इंच की गंद को देखा & हल्के से मुस्कुराइ,ब्रिज को ना जाने कितनी बार उसने चोर निगाहो से अपनी गंद को घूरते पाया था.

ब्रिज बहुत चाहता था उसे & जब उसने उसका हाथ माँगा & देर तक उसने जवाब नही दिया तो वो 53 बरस का आदमी किसी नौजवान की तरह नर्वस अपने हाथ मालता खड़ा उसे क़तर निगाहो से देखता रहा था.कितनी हँसी आई थी उसकी हालत देख के उसे & उसने फ़ौरन हां कर दी थी....तो क्या उसने ब्रिज पे तरस खाया था?..उसके अक्स ने उस से सवाल किया..धात!..मैं चाहती हू उसको!..सोनिया के दिल ने जवाब दिया..सचमुच?..आईने मे उसका अक्स उसे मुँह चिढ़ाता नज़र आ रहा था.

"रहम खाओ शीशे पे,मेरी जान!",ब्रिज कमरे मे दाखिल हुआ,"..इतना हुस्न बर्दाश्त नही कर पाएगा & टूट जाएगा!",सोनिया हँसती हुई उसकी तरफ आई तो ब्रिज ने उसे बाहो मे भर लिया & चूमने लगा.

"उउन्न्ञन्..छ्चोड़ो ना इतनी भी क्या जल्दी है!",सोनिया ने पति को परे धकेला.

"शादी के पहले कहती थी कि शादी के बाद करना & अब शादी हो गयी है तो कहती हो जल्दी क्या है!",ब्रिज ने अपनी नयी-नवेली दुल्हन को बाहो मे भरा & लहँगे & चोली के बीच की नंगी जगह पे अपने मज़बूत हाथो से सहलाते हुए उसे फिर से चूमने लगा,"..बहुत इंतेज़ार कराया है तुमने,सोनिया!",वो उसके रसीले,गुलाबी होंठो को चूमने लगा.उसके गर्म हाथ & आतुर होंठ सोनिया को भी मस्त करने लगे.उसने अपने हाथ पति के कंधो पे जमाते हुए उसकी गर्दन थाम ली & उसकी किस का जवाब देने लगी.ब्रिज उसकी कमर & पीठ को सहलाते हुए उसके मुँह मे अपनी ज़बान घुसा रहा था.

सोनिया ने किस तोड़ने की कोशिश की लेकिन ब्रिज के ज़िद्दी होंठो ने उसकी 1 ना सुनी & हार कर सोनिया को अपनी जीभ उसकी जीभ से लड़ानी ही पड़ी.हर बार की तरह इस बार भी ब्रिज की किस ने उसके होश उड़ा दिए.उसके जिस्म मे मस्ती भरने लगी & चूत परेशान हो उठी.हमेशा वो इसी लम्हे खुद को पीछे खींच लेती थी लेकिन आज तो हर हद्द पार करने की रात थी.आज वो अपने महबूब को खफा नही करना चाहती थी & नतीजा ये हुआ कि सोनिया मदहोश होने लगी & उसकी टाँगे जवाब देने लगी.

मस्ती से आहत हो उसने किस तोड़ी तो ब्रिज ने उसे गोद मे उठा लिया & बिस्तर की ओर बढ़ा,"1 बात पुच्छू ब्रिज?",उसकी आँखो मे अब मदहोशी के लाल डोरे थे.

"नही,अभी नही.",ब्रिज ने उसे बिस्तर पे लिटाया & उसकी बगल मे आ गया.उसकी बाई बाँह सोनिया की गर्दन के नीचे थी,"..पहले मुझे तुम्हे जी भर के प्यार कर लेने दो फिर उम्र भर सवाल पूछती रहना,मैं जवाब देता रहूँगा."

"ओह,ब्रिज.",1 बार फिर दोनो 1 दूसरे के आगोश मे खो गये.ब्रिज के होतो की शरारत ने सोनिया को बहुत ज़्यादा मस्त कर दिया & वो बेचैनी से अपनी जंघे रगड़ अपनी कसमसाती चूत को शांत करने लगी.ब्रिज पुराना खिलाड़ी था & जानता था की उसकी बीवी अब मस्ती के नशे मे पूरी तरह डूब चुकी है.उसने उसके होंठ छ्चोड़े & उसके बाए हाथ को थाम उसमे अपने दाए हाथ की उंगलिया फँसा ली & उसे उठा अपने होंठो तक ला चूमने लगा.

सोनिया के चेहरे पे हल्की सी मुस्कान फैल गयी & वो आँखे बंद कर अपने आशिक़ की हर्कतो का मज़ा लेने लगी.ब्रिज ने दाए पैर के अंगूठे से उसके डाए पाँव को सहलाना शुरू कर दिया.सोनिया ने पाँव खींचने की कोशिश की मगर ब्रिज ना माना & अपने अंगूठे को उसके पैर से सताए ही रखा.

ये सोनिया की दूसरी सुहागरात थी मगर जो खुमारी,जो नशा अभी से ही उसपे चढ़ गया था ऐसा तो शायद पहली के अंजाम तक पहुँचने पे भी उसे महसूस नही हुआ था.उसका पहला पति तो उसे नंगी कर उसके उपर सवार हो उसके कुंवारेपन को तोड़ बस अपनी मर्दानगी के सबूत को उसकी चूत मे छ्चोड़ना चाहता था.

"हुन्ह..!",उसकी उंगलियो को चूसने के बाद ब्रिज उसकी कलाई से कंगन उतार रहा था.कंगन उतार के उसने उसकी कलाई के अन्द्रुनि हिस्से को चूमा तो वो सिहर उठी फिर उसने कुच्छ चूड़ियाँ उतारी & फिर लबो को उसकी कलाई से लगाया,सोनिया फिर से सिहरी,फिर ब्रिज ने बाकी चूड़िया उतारी & थोड़ा और नीचे उसकी बाँह पे चूमा,सोनिया का बदन अब जोश से कांप रहा था,फिर उसने चूड़ियो के साथ लगा दूसरा कंगन उतारा & उसकी कोहनी से ज़रा सा उपर थोड़ा सा चूस्ते हुए उसकी बाँह के अन्द्रुनि कोमल हिस्से को चूमा तो सोनिया तड़प उठी.

ब्रिज उसकी बाँह को चूमते हुए उसके कंधे से होता फिर से उसके हसीन चेहरे तक पहुँचा & इस बार सोनिया ने अपने लब खुद ही अपने पति के लिए खोल दिए.उसे चूमते हुए ब्रिज अपने दाए हाथ की 1 उंगली को उसके पेट की चौड़ाई पे उसकी नाभि के नीचे & लहँगे के उपर बहुत हल्के से चलाने लगा.

अब बात सोनिया के बर्दाश्त के बाहर जा रही थी.उसका जिस्म अब मचल रहा था.ब्रिज की उंगली पेट पे घूमते हुए उसकी नाभि के गिर्द दायरा बनाते हुए आख़िर उसमे घुस ही गयी & जब उसने उसे कुरेदा तो सोनिया चीख मारते हुए झाड़ गयी & दूसरी तरफ करवट ले शर्म से अपना चेहरा तकिये मे च्छूपा लिया.

ब्रिज के सामने अब उसकी पीठ थी.मुस्कुराते हुए ब्रिज ने पहले अपना कुर्ता निकाला & फिर उसकी दाई बाँह की लंबाई पे अपनी वही 1 उंगली फिराने लगा.सोनिया फिर से सिहर गयी.ब्रिज ने उसकी बाँह उठाके उसकी कलाई से कंगन निकालते हुए वही हरकत दोहराई जो उसने बाए हाथ के साथ की थी.सोनिया करवट लिए तकिये मे मूँछ छिपाए तड़प रही थी.जिस्म मे ऐसा एहसास उसे पहली बार हो रहा था.चूड़िया उतारने के बाद ब्रिज ने उसके चेहरे को अपनी ओर घुमा के उसके गुलाबी होंठ चूमे & फिर उसके बदन को मोड़ अपनी ओर किया.

अब सोनिया बाई कवट पे थी & ब्रिज दाई पे उसे अपनी बाहो मे भरे उसके गले को चूम रहा था & उसका हार उतार रहा था.हार उतारने के बाद उसने उसके बाए कान से झुमके को उतारा,"आज समझ मे आया तुम औरतें इतने गहने क्यू पहनती हो.",उसने उसके कान को काटा & फिर दाए कान से झुमका निकाला.

"क्यू?",सोनिया ने पति के चेहरे को हाथो मे भर के उसकी आँखो मे देखा.

"ताकि कोई मर्द तुम्हारे करीब ना आ पाए.कम्बख़्त,कितना चुभते हैं ये!",दोनो हंस पड़े & सोनिया उसके गले से लग गयी.ब्रिज उसके बाए कंधे के उपर से देखते हुए उसकी चोली के हुक्स खोलने लगा तो सोनिया चिहुनकि.

"नही."

"क्यू?",उसे चूमते हुए ब्रिज ने हुक्स खोल उसके ब्रा स्ट्रॅप के उपर से अपने हाथ को उसकी पीठ पे फिराया तो सोनिया ने सर झुका के उसके नंगे सीने मे मुँह च्छूपा लिया.ब्रिज के जिस्म से आती मर्दाना खुसबु उसे बहुत भली लग रही थी.बालो से भरा सीना कितना चौड़ा था & कितना मज़बूत!शरमाते हुए उसने अपना हाथ सीने पे रखा तो ब्रिज ने उसकी चोली को उसके कंधे से उतारते हुए उसकी बाई बाँह से खींच ली.सोनिया ने शरमाते हुए बाँह मोड रखी मगर इन बातो से ब्रिज को कोई फ़र्क नही पड़ रहा था.थोड़ी ही देर बाद सोनिया का लाल लेस ब्रा मे ढका सीना उसके सामने था.सोनिया ने शर्म के मारे आँखे बंद की हुई थी.अगर आँखे खोलती तो देखती कि ब्रिज कैसे 1 तक उसके खूबसूरत अंग को देखे जा रहा था.ब्रिज ने सोनिया की कमर के बगल मे लगे लहँगे के हुक्स को खोला तो सोनिया उसकी गिरफ़्त से छूटने की कोशिश करने लगी मगर ब्रिज ने उसे सीने से लगाके रोक लिया.

उसे सीने से लगाए उसके सर को चूमता वो उसकी पीठ & कमर को सहलाने लगा.सोनिया उस से चिपकी बहुत हल्के हाथो से उसके सीने को सहला रही थी.कमरे मे बिल्कुल खामोशी थी बस 2 आतुर जिस्मो की गर्म सांसो की आवाज़ आ रही थी.थोड़ी देर के बाद सोनिया के हाथ अपने पति के जिस्म के गिर्द बँध गये & ब्रिज अपने गाल उसके गालो के साथ रगड़ने लगा.दोनो करवट से लेटे थे & ब्रिज का पाजामे मे क़ैद लंड सोनिया को अपनी चूत के उपर दबा महसूस हो रहा था.उसके ज़हन मे लंड की लंबाई को लेके सवाल कौंधा & वो अपनेआप से ही शर्मा गयी.लंड के एहसास ने उसे मस्त कर दिया.आनेवाली खुशी के एहसास से उसका रोमांच बढ़ गया & तभी ब्रिज ने उसका ढीला लहंगा नीचे सरका दिया.

"हुंग....नही..प्लीज़!",नशे & शर्म से सोनिया ने आँखे बंद कर ली.ब्रिज ने लहँगे को उतार फेंका & लाल लेस ब्रा & पॅंटी मे सजे सोनिया के नशीले जिस्म को निहारने लगा.चूत से बहुत सा पानी रिसा था & पॅंटी सामने से बिल्कुल गीली हो चूत से चिपकी हुई थी.ब्रिज ने बहुत धीरे से हाथ बढ़ा के सोनिया की बाई जाँघ पे रखा मानो डर रहा था कि कही उसका गोरा जिस्म मैला ना हो जाए.उसके छुने से सोनिया चिहुनकि.38 साइज़ की बड़ी चूचियाँ जिस्म की मदहोशी की दास्तान कहती तेज़ धड़कनो के साथ उपर-नीचे हो रही थी & जंघे आपस मे भींची या तो चूत को च्छुपाने की कोशिश कर रही थी या फिर उसकी बेचैनी को शांत करने की कोशिश.काफ़ी देर तक निहारने के बाद जैसे ब्रिज नींद से जागा.उसने अपना पाजामा उतार दिया,अब वो बिल्कुल नंगा था.उसी वक़्त सोनिया ने अभी आँखे खोली जोकि सामने का नज़ारा देख हैरत से फैल गयी.ब्रिज का प्रेकुं से गीला लंड 9 इंच लंबा उसकी नज़रो के सामने तननाया खड़ा था.

उस वक़्त खुशी,मज़े,रोमांच & डर के मिले-जुले भाव ने सोनिया की धड़कनो को & बढ़ा दिया..ये लंड अब उसकी जागीर था..सिर्फ़ उसकी!..ये अब हमेशा उसी के लिए खड़ा होगा..उसकी चूत को मज़े & अपने रस से भर देगा ये..लेकिन कितना बड़ा है..बहुत दर्द होगा..उफफफ्फ़..!"..सोनिया के दिल मे खलबली मचा दी थी ब्रिज के लंड ने!

ब्रिज झुका तो सोनिया ने अपनी बाहे फैला उसे अपने आगोश मे ले लिया.पति का फौलादी जिस्म अब पूरा नंगा उसकी बाहो मे था & वो & मस्त हो गयी थी.उसका लंड उसके पेट पे दबा हुआ था ब्रिज ने हाथ पीछे ले जाके पहले उसकी ब्रा के हुक्स ढीले किए & फिर उसकी पीठ & कमर को मसल्ने लगा.उसके हाथो से उसके जोश की खबर मिल रही थी.सोनिया भी बेसब्री से उसकी पीठ पे अपने हाथो को फिरा रही थी.ब्रिज का दाया हाथ उसकी पॅंटी मे घुस गया & उसकी गंद की फांको को दबोचने लगा तो वो आहे भरने लगी.

"रूप की रानी हो तुम,सोनिया!"ब्रिज ने गंद की फाँक को दबाया तो सोनिया ने उसके बाए कंधे पे काट लिया.ब्रिज का हाथ उसकी गंद की दरार से होता पीछे से ही चूत पे पहुँचा तो सोनिया ने मस्ती से बहाल हो अपनी बाई टांग अपने महबूब की टांग के उपर चढ़ा दी.ब्रिज थोडा आगे हुआ & अपने लंड को उसकी पॅंटी पे दबा दिया & पीछे से उसकी चूत मे उंगली करते हुए उसे चूमने लगा.सोनिया ज़ोर-2 से आहे भरने लगी.उसकी चूत पे दोतरफ़ा मार पड़ रही थी & वो उसे बहुत देर तक नही झेल पाई.

"ब्रिज.....आआअन्न्न्नह...नाआअ......उफफफ्फ़.......हाईईईईईईईईईईईई..!",वो झाड़ गयी & ब्रिज ने उसकी पॅंट नीचे सरका दी.सोनिया का दाया हाथ दोनो जिस्मो के बीच दबा था & ब्रिज ने उसमे अपना लंड थमा दिया तो सोनिया ने शर्मा के उसे छ्चोड़ दिया.ब्रिज अपनी लाजाति बीवी की अदाएँ देख जोश से पागल हो गया & उसे चूमते हुए अपना लंड उसके हाथ मे दबा दिया.सच तो ये था कि 1 बार पहले भी शादी होने के बावजूद सोनिया इन मामलो मे ज़रा अनाड़ी थी.तलाक़ के बाद उसने सिर्फ़ अपनी उंगली से ही काम चलाया था & अपने पहले पति के लंड को केवल अपनी चूत मे ही महसूस किया था.ब्रिज ने उसके हाथ मे लंड पकड़वाया तो उसके गर्म,नर्म & कठोर एहसास ने उसे हैरत से भर दिया.ब्रिज के इशारे पे उसने उसे हिलाना शुरू किया तो ब्रिज मस्ती मे आहे भरने लगा.

सोनिया को बड़ा मज़ा आ रहा था यू ब्रिज को मस्त करने मे.ब्रिज लेट गया तो वो बैठ के लंड हिलाने लगी.उसका खुला ब्रा उसके कंधो पे लटका हुआ था.वो अनाड़ी थी & बहुत ज़ोर से लंड को हिला रही थी.ब्रिज जब झड़ने की कगार पे पहुँचा तो उसने उसका हाथ थाम लिया & उठ बैठा,"आइ लव यू,सोनिया!",उसने उसके चेहरे पे किस्सस की झड़ी लगा दी.सोनिया की समझ मे नही आया कि ऐसा उसने क्या किया जो ब्रिज को उसपे इतना प्यार आ रहा था.बस कुच्छ ही दिनो मे वो समझ जाने वाली थी कि मर्द के दिल का रास्ता उसके पेट से नही उसके लंड से होता है.जो भी औरत उसके अपने हाथो से & मुँह से उसके लंड को खुश करना जानती है वो उस मर्द के दिल मे खास जगह बना लेती थी.

ब्रिज ने उसके कंधो से उसका ब्रा उतारा तो सोनिया फिर से शर्मा गयी,अब वो पति के सामने पूरी तरह से नंगी जो थी.उसके हल्के भूरे निपल्स बिल्कुल तने हुए थे बड़ी चूचियाँ बिल्कुल कस गयी थी.ब्रिज ने मुँह झुकाया & उन्हे चूम लिया तो वो चिहुनक उठी.बदन मे बहुत सा रोमांच भर गया.छातियो को चूमना कब चूसने मे तब्दील हुआ,उसे पता ही ना चला.उसे बस ये होश था कि वो फिर से बिस्तर पे लेटी हुई थी & ब्रिज उसकी चूचियो की तारीफ के कसीदे पढ़ता हुआ उन्हे अपनी ज़ुबान से चूमे,चूसे,चाते जा रहा था,"..कमाल है तुम्हारी चूचियाँ,सोनिया..कितने मस्त निपल्स हैं!..इतनी रसीली चूचिया मैने आज तक नही देखी..उम्म्म्मममममम....जी करता है इन्हे चूस्ता ही रहू...दबाने पे दिल मे अजीब सा मज़ा भर जाता है..म्‍म्मम्मूऊऊुआहह..!"

उसकी चूत फिर से मचलने लगी थी.ब्रिज ने उसके सीने से सर उठाया & उसकी टाँगे फैला उनके बीच आ गया.सोनिया ने आँखे बंद कर सर बाई तरफ घुमा लिया.उसे भी बस अब इसी पल का इंतेज़ार था.ब्रिज ने लंड को दरार पे रख के पहले उसकी चूत को सहलाया & जब बेचैनी मे उसने अपनी कमर उचकाई तो उसने सूपदे को अंदर घुसा दिया.

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क्रमशः.......

JAAL paart--6

gataank se aage.

dono ne hi court me shadi karne ka faisla kiya.soniya ki pichhli shadi riti-rivajo ke mutabik hui thi magar vo nakamyab rahi & uska un rivajo pe vishwas nahi tha fir uski saheli ka kehna tha ki court me kanooni shadi use khuda na khaste agar aage koi musibat aati hai to us halat me talaq ke waqt kafi kaam aa sakti hai.aur brij ko is umra me dhoom-dhadake ke sath shadi karna thoda jancha nahi.vaise uske karibi logo ne kaha bhi ki vo kab se duniya ki parvah karne laga magar duniya ki nahi use khud ki parvah thi & use court marriage dhoom-dham ki shadi se behtar hi lagi.dono ne shadi ke baad reception me apne dosto & jankaor ko bulane ka faisla kiya tha.

soniya ne shishe me apni 26 inch ki kamar pe hath rakh thoda sa ghum ke khud ko dekha.uski shakl to badi khubsurat thi hi,jism bhi kam qatil nahi tha.usne apni 38 inch ki gand ko dekha & halke se muskurayi,brij ko na jane kitni baar usne chor nigaho se apni gand ko ghurte paya tha.

brij bahut chahta tha use & jab usne uska hath manga & der tak usne jawab nahi diya to vo 53 baras ka aadmi kisi naujawan ki tarah nervous apne hath malta khada use qatar nigaho se dekhta raha tha.kitni hansi aayi thi uski halat dekh ke use & usne fauran haan kar di thi....to kya usne brij pe taras khaya tha?..uske aks ne us se sawal kiya..dhat!..main chahti hu usko!..soniya ke dil ne jawab diya..sachmuch?..aaine me uska aks use munh chidhata nazar aa raha tha.

"reham khao shishe pe,meri jaan!",brij kamre me dakhil hua,"..itna husn bardasht nahi kar payega & tut jayega!",soniya hansti hui uski taraf aayi to brij ne use baaho me bhar liya & chumne laga.

"uunnnn..chhodo na itni bhi kya jaldi hai!",soniya ne pati ko pare dhakela.

"shadi ke pehle kehti thi ki shadi ke baad karna & ab shadi ho gayi hai to kehti ho jaldi kya hai!",brij ne apni nayi-naveli dulhan ko baaho me bhara & lehange & choli ke beech ki nangi jagah pe apne mazboot hatho se sehlate hue use fir se chumne laga,"..bahut intezar karaya hai tumne,soniya!",vo uske rasile,gulabi hotho ko chumne laga.uske garm hath & aatur honth soniya ko bhi mast karne lage.usne apne hath pati ke kandho pe jamate hue uski gardan tham li & uski kiss ka jawab dene lagi.brij uski kamar & pith ko sehlate hue uske munh me apni zaban ghusa raha tha.

soniya ne kiss todne ki koshish ki lekin brij ke ziddi hontho ne uski 1 na suni & haar kar soniya ko apni jibh uski jibh se ladani hi padi.har baar ki tarah is baar bhi brij ki kiss ne uske hosh uda diye.uske jism me masti bharne lagi & chut pareshan ho uthi.humesha vo isi lamhe khud ko peechhe khinch leti thi lekin aaj to har hadd paar karne ki raat thi.aaj vo apne mehboob ko khafa nahi karna chahti thi & natija ye hua ki soniya madhosh hone lagi & uski tange jawab dene lagi.

masti se aahat ho usne kiss todi to brij ne use god me utha liya & bistar ki or badha,"1 baat puchhu brij?",uski aankho me ab madhoshi ke laal dore the.

"nahi,abhi nahi.",brij ne use bistar pe litaya & uski bagal me aa gaya.uski bayi banh soniya ki gardan ke neeche thi,"..pehle mujhe tumhe ji bhar ke pyar kar lene do fir umra bhar sawal puchhti rehna,main jawab deta rahunga."

"oh,brij.",1 baar fir dono 1 dusre ke agosh me kho gaye.brij ke hotho ki shararat ne soniya ko bahut zyada mast kar diya & vo bechaini se apni janghe ragad apni kasmasati chut ko shant karne lagi.brij purana khiladi tha & janta tha ki uski biwi ab masti ke nashe me puri tarah doob chuki hai.usne uske honth chhode & uske baye hath ko tham usme apne daye hath ki ungliya fansa li & use utha apne hotho tak la chumne laga.

soniya ke chehre pe halki si muskan fail gayi & vo aankhe band kar apne aashiq ki harkato ka maza lene lagi.brij ne daye pair ke anguthe se uske daye panv ko sehlana shuru kar diya.soniya ne panv khinchne ki koshish ki magar brij na mana & apne anguthe ko uske pair se sataye hi rakha.

ye soniya ki dusri suhagrat thi magar jo khumari,jo nasha abhi se hi uspe chadh gaya tha aisa to shayad pehli ke anjam tak pahunchne pe bhi use mehsus nahi hua tha.uska pehla pati to use nangi kar uske upar sawar ho uske kunwarepan ko tod bas apni mardangi ke saboot ko uski chut me chhodna chahta tha.

"hunhh..!",uski ungliyo ko chusne ke baad brij uski kalai se kangan utar raha tha.kangan utar ke usne uski kalai ke andruni hisse ko chuma to vo sihar uthi fir usne kuchh choodiyan utari & fir labo ko uski kalai se lagaya,soniya fir se sihri,fir brij ne baki choodiya utari & thoda aur neeche uski banh pe chuma,soniya ka badan ab josh se kanp raha tha,fir usne choodiyo ke bada laga dusra kangan utara & uski kohni se zara sa upar thoda sa chuste hue uski banh ke andruni komal hisse ko chuma to soniya tadap uthi.

brij uski banh ko chumte hue uske kandhe se hota fir se uske haseen chehre tak pahuncha & is baar soniya ne apne lab khud hi apne pati ke liye khol diye.use shumte hue brij apne daye hath ki 1 ungli ko uske pet ki chaudai pe uski nabhi ke neeche & lehange ke upar bahut halke se chalane laga.

ab baat sonioya ke bardasht ke bahar ja rahi thi.uska jism ab machal raha tha.brij ki ungli pet pe ghumte hue uski nabhi ke gird dayra banate hue aakhir usme ghus hi gayi & jab usne use kureda to soniya chikh marte hue jhad gayi & dusri taraf karwat le sharm se apna chehra takiye me chhupa liya.

brij ke samne ab uski pith thi.muskurate hue brij ne pehle apna kurta nikala & fir uski dayi banh ki lambai pe apni vahi 1 ungli firane laga.soniya fir se sihar gayi.brij ne uski banh uthake uski kalai se kangan nikalte hue vahi harkat dohrayi jo usne baye hath ke sath ki thi.soniya karwat liye takiye me munch chhipaye tadap rahi thi.jism me aisa ehsas use pehli baar ho raha tha.choodiya utarne ke baad brij ne uske chehre ko apni or ghuma ke uske gulabi honth chume & fir uske badan ko mod apni or kiya.

ab soniya bayi kawat pe thi & brij dayi pe use apni baaho me bhare uske gale ko chum raha tha & uska haar utar raha tha.haar utarne ke baad usne uske baye kaan se jhunke ko utara,"aaj samajh me aaya tum auraten itne gehne kyu pehanti ho.",usne uske kaan ko kata & fir daye kaan se jhumka nikala.

"kyu?",soniya ne pati ke chehre ko hatho me bhar ke uski aankho me dekha.

"taki koi mard tumhare karib na aa paye.kambakht,kitna chubhte hain ye!",dono hans pade & soniya uske gale se lag gayi.brij uske baye kandhe ke upar se dekhte hue uski choli ke hooks kholne laga to soniya chihunki.

"nahi."

"kyu?",use chumte hue brij ne hooks khol uske bra strap ke upar se apne hath ko uski pith pe firaya to soniya ne sar jhuka ke uske nange seene me munh chhupa liya.brij ke jism se aati mardana khusbu use bahut bhali lag rahi thi.baalo se bhara seena kitna chauda tha & kitna mazboot!sharmate hue usne apna hath seene pe rakha to brij ne uski choli ko uske kandhe se utarte hue uski bayi banh se khinch li.soniya ne sharmate hue banh mode rakhi magar in baato se brij ko koi fark nahi pad raha tha.thodi hi der baad soniya ka laal lace bra me dhaka seena uske samne tha.soniya ne sharm ke mare aankhe band ki hui thi.agar aankhe kholti to dekhti ki brij kaise 1 tak uske khoobsurat ang ko dekhe ja raha tha.brij ne soniya ki kamar ke bagal me lage lehange ke hooks ko khola to soniya uski giraft se chhutne ki koshish karne lagi magar brij ne use seene se lagake rok liya.

use seene se lagaye uske sar ko chumta vo uski pith & kamar ko sehlane laga.soniya us se chipki bahut halke hatho se uske seene ko sehla rahi thi.kamre me bilkul khamoshi thi bas 2 aatur jismo ki garm sanso ki aavaz aa rahi thi.thdoi der ke baad soniya ke hath apne pati ke jism ke gird bandh gaye & brij apne gaal uske gaalo ke sath ragadne laga.dono karwat se lete the & brij ka pajame me qaid lund soniya ko apni chut ke upar daba mehsus ho raha tha.uske zehan me lund ki lambai ko leke sawal kaundha & vo apneaap se hi sharma gayi.lund ke ehsas ne use mast kar diya.aanevali khushi ke ehsas se uska romach badh gaya & tabhi brij ne uska dhila lehanga neeche sarka diya.

"hunh....nahi..please!",nashe & sharm se soniya ne aankhe band kar li.brij ne lehange ko utar fenka & laa lace bra & panty me saje soniya ke nashile jism ko niharne laga.chut se bahut sa pani risa tha & panty samne se bilkul gili ho chut se chipki hui thi.brij ne bahut dhire se hath badha ke soniya ki bayi jangh pe rakha mano darr raha tha ki kahi uska gora jism maila na ho jaye.uske chhune se soniya chihunki.38 size ki badi chhatiya jism ki madhoshi ki datan kehti tez dhadkano ke sath upar-neeche ho rahi thi & janghe aapas me bhinchi ya to chut ko chhupane ki koshish kar rahi thi ya fir uski bechaini ko shant karne ki koshish.kafi der tak niharne ke baad jaise brij nind se jaga.usne apna pajama utar diya,ab vo bilkul nanga tha.usi waqt soniya ne abhi aankhe kholi joki samne ka nazara dekh hairat se fail gayi.brij ka precum se gila lund 9 inch lumba uski nazro ke samne tannaya khada tha.

us waqt khushi,maze,romanch & darr ke mile-jule bhavo ne soniya ki dhadkano ko & badha diya..ye lund ab uski jagir tha..sirf uski!..ye ab humesha usi ke liye khada hoga..uski chut ko maze & apne ras se bhar dega ye..lekin kitna bada hai..bahut dard hoga..uffff..!"..soniya ke dil me khalbali macha di thi brij ke lund ne!

brij jhuka to soniya ne apni baahe faila use apne agosh me le liya.pati ka fauladi jism ab pura nanga uski baaho me tha & vo & mast ho gayi thi.uska lund uske pet pe daba hua tha brij ne hath peechhe le jake pehle uski bra ke hooks dile kiye & fir uski pith & kamar ko msalne laga.uske hatho se uske josh ki khabar mil rahi thi.soniya bhi besabri se uski pith pe apne hatho ko fira rahi thi.brij ka daya hath uski panty me ghus gaya & uski gand ki fanko ko dabochne laga to vo aahe bharne lagi.

"roop ki rani ho tum,soniya!"brij ne gand ki fank ko dabaya to soniya ne uske baye kandhe pe kaat liya.brij ka hath uski gand ki darar se hota peechhe se hi chut pe pahuncha to soniya ne masti se behal ho apni bayi tang apne mehboob ki tang ke upar chadha di.brij thoda aage hua & apne lund ko uski panty pe daba diya & peechhe se uski chut me ungli karte hue use chumne laga.soniya zor-2 se aahe bharne lagi.uski chut pe dotarfa maar pad rahi thi & vo use bahut der tak nahi jhel payi.

"brij.....aaaaannnnhhhh...naaaaa......uffff.......haiiiiiiiiiiiii..!",vo jhad gayi & brij ne uski pant neeche sarka di.soniya ka daya hath dono jismo ke beech daba tha & brij ne usme apna lund thama diya to soniya ne sharma ke use chhod diya.brij apni lajati biwi ki adayen dekh josh se pagal ho gaya & use chumte hue apna lund uske hath me daba diya.sach to ye tha ki 1 baar pehle bhi shadi hone ke bavjood soniya in mamlo me zara anadi thi.talaq ke baad usne sirf apni ungli se hi kaam chalaya tha & apne pehle pati ke lund ko keval apni chut me hi mehsus kiya tha.brij ne uske hath me lund pakadwaya to uske garm,narm & kathor ehsas ne use hairat se bhar diya.brij ke ishare pe usne use hilana shuru kiya to brij masti me aahe bharne laga.

soniya ko bada maza aa raha tha yu brij ko mast karne me.brij let gaya to vo baith ke lund hilane lagi.uska khula bra uske kandho pe latka hua tha.vo anadi thi & bahut zor se lund ko hila rahi thi.brij jab jhadne ki kagar pe pahuncha to usne uska hath tham liya & uth baitha,"i love you,soniya!",usne uske chehre pe kisses ki jhadi laga di.soniya ki samajh me nahi aaya ki aisa usne kya kiya jo brij ko uspe itna pyar aa raha tha.bas kuchh hi dino me vo samajh jane vali thi ki mard ke dil ka rasta uske pet se nahi uske lund se hota hai.jo bhi aurat uske apne hatho se & munh se uske lund ko khush karna janti hai vo us mard ke dil me khas jagah bana leti thi.

brij ne uske kandho se uska bra utara to soniya fir se sharma gayi,ab vo pati ke samne puri tarah se nangi jo thi.uske halke bhure nipples bilkul tane hue the badi chhatiya bilkul kas gayi thi.brij ne munh jhukaya & unhe chum liya to vo chihunk uthi.badan me bahut sa romanch bhar gaya.chhatiyo ko chumna kab chusne me tabdil hua,use pata hi na chala.use bas ye hosh tha ki vo fir se bistar pe leti hui thi & brij uski choochiyo ki tarif ke kaside padhta hua unhe apni zuban se chume,chuse,chate ja raha tha,"..kamal hai tumhari choochiyan,soniya..kitne mast nipples hain!..itni rasili choochiya maine aaj tak nahi dekhi..ummmmmmmmm....ji karta hai inhe chusta hi rahu...dabane pe dil me ajib sa maza bhar jata hai..mmmmmuuuuaahhhhhh..!"

uski chut fir se machalne lagi thi.brij ne uske seene se sar uthaya & uski tange faila unke beech aa gaya.soniya ne aankhe band kar sar bayi taraf ghuma liya.use bhi bas ab isi pal ka intezar tha.brij ne lund ko darar pe rakh ke pehle uski chut ko sehlaya & jab bechaini me usne apni kamar uchkayi to usne supade ko andar ghusa diya.

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kramashah.......