मर्दों की दुनिया compleet

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raj..
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Re: मर्दों की दुनिया

Unread post by raj.. » 12 Dec 2014 14:56

"कर तो सकता हूँ लेकिन तुम्हे मज़ा नही आएगा. तुम्हारे ये बाल मेरी

नाक मे घुसते रहेंगे और मुझे बार बार छींक आती रहेगी." मेने

कहा.

"आप इसे सॉफ कैसे करेंगे? मैने तो पहले कभी ऐसा किया नही

है." उसने कहा.

"में इन्हे शेव कर दूँगा." मेने जवाब दिया.

"नहिी... आअप ऐसा नही करेंगे." वो ज़ोर से चिल्लाई, उसे लगा कि

इसके लिए में उसे नंगा करूँगा. लेकिन उसे ये नही समझ आया कि

चूत चूस्ते वक्त भी तो में उसकी चूत देख लूँगा.

"नही में खुद ही सॉफ कर लूँगी." उसने कहा.

"नही तुम नही करोगी, कहीं कट कुटा गया तो तकलीफ़ होगी, रूको

मेरे पास दूसरा उपाय है," कहकर मेने उसे माला की अन्न-फ्रेंच क्रीम

दे दी और उसे समझा दिया की कैसे लगाकर सॉफ करना है.

"ठीक है में बाद मे कर लूँगी." उसने मुस्कुराते हुए कहा.

दूसरे दिन मेने उसकी सारी मे हाथ डाल उसकी चूत को छुआ तो लगा

कि जैसे में किसी कामसीँ काली की चूत को पकड़े हुए हूँ. बिना

बालों की मुलायम चूत बहोत ही अच्छी लग रही थी.

"उस रात मेने माला से कहा कि कल चुदाई दिवस है, तो वो

बोली, "ऐसी भी क्या जल्दी है."

"कल में उसकी चूत चूसूंगा," मेने मुस्कुराए हुए कहा.

"और तुम समझते हो की चूत चूसने के बाद वो तुम्हे चोदने देगी."

उसने कहा.

"हमेशा से तो यही होता आया है...." मेने हंसते हुए कहा. फिर

हम प्लान बनाने लगे की माला कैसे वो सब नज़ारा देख सकेगी.

दूसरे दिन में जब में घर पहुँचा तो माला मुझे घर के बाहर

ही मिल गयी. प्लान के अनुसार में सीधा किचन मे गया और माला

चुपके से बेडरूम मे जाकर दरवाज़े के पीछे छिप गयी. उसने

बेडरूम का दरवाज़ा खुला रख छोड़ा था.

दस मिनिट के बाद में सोना को अपनी गोद मे उठाए हॉल मे लाया और

उसे सोफे पर लीटा दिया और उसके कपड्ड़े खोलने लगा.

"आप मेरे कपड़े क्यों उतार रहे है?" वो चिल्लाई.

"अगर तुम कपड़े पहने रहोगी तो में तुम्हारी चूत कैसे चूसूंगा?"

मैने कहा.

"आप मुझे चोदेन्गे?" उसने बड़े भोलेपन से पूछा.

"अगर तू कहेगी तो में तुझे चोद भी दूँगा." मेने अपने खड़े

लंड को बाहर निकालते हुए कहा.

"नही में आपको चोदने नही दूँगी," उसने मेरे खड़े लंड की ओर

देखते हुए कहा, " मुझे डर लगता है कही में प्रेगञेन्ट हो गयी

तो."

"तुम प्रेगञेन्ट नही होवॉगी, में वादा करता हूँ," मेने उसे आश्वासन

देते हुए कहा, "में ध्यान से करूँगा."

"ऐसे ही मोहन ने रानी से कहा था कि वो प्रेग्नानॅट नही होगी लेकिन

रानी प्रेग्नेंट हो गयी." उसने कहा.

"अब ये मोहन और रानी कौन है?" मेने पूछा.

रानी मेरी सबसे प्यारी सहेली है जो गाओं मे रहती है, मोहन गाओं

मे ही रहता है. वो 50 साल का है, वो शादी शुदा है और उसके

तीन बच्चे भी है. उसकी लड़की की शादी पास के गाँव मे हुई है और

उसके दोनो लड़कों की भी शादी हो चुकी है." सोना ने कहा.

"पर हुआ क्या था?" मेने पूछा.

"मोहन ने भी रानी को चोद्ते वक़्त यही कहा था की वो ध्यान रखेगा

और उसे प्रेग्नेंट नही करेगा फिर भी वो हो गयी." सोना ने बताया.

"मुझे ज़रा सब खुल कर बताओ की क्या और कैसे हुआ?" मैने उसे अपनी

गोद मे बिठाकर चूमते हुए कहा.

** जो कुछ उसने बताया वो इस प्रकार था.

"ये करीब दो साल पहले की बात है, एक दिन शाम को मेने रानी को

मोहन के घर से छिपते छिपते देखा तो चौंक गयी. रानी का इस

समय मोहन के घर मे क्या काम, उसकी बीवी तो खेतों मे काम रही

थी. "

"मेने उससे मिली और उससे पूछा कि वो मोहन के घर मे क्या कर रही

थी? पहले तो वो मुझे टालती रही फिर मेरे ज़िद करने पर उसने बता

की वो मोहन से चुदवा रही थी."

"तुम इस बदमाश के चंगुल मे कैसे फँस गयी," मेने कहा, क्योंकि

कई बार मोहन मुझे भी फँसाने की कोशिश कर चुका था.

"छेह महीने पहेले की बात है मा ने मुझे इसकी दुकान से सब्जी

लाने को कहा. में दुकान पर पहुँची तो दुकान बंद थी, में दुकान

के पीछे इसके घर मे चली गयी तो देखा कि ये दारू पिए हुए है

और काफ़ी नशे मे था, बस वहीं उसने मुझे पकड़ लिया और मेरे साथ

ज़बरदस्ती कर मुझे चोद दिया." रानी कहते हुए रोने लगी.

"अब रोना बंद करो और मुझे बताओ की आगे क्या हुआ?" मैने उसे डाँटते

हुए पूछा.

"कुछ दिन बाद मोहन मुझे बेज़ार मे मिल गया और उसने मुझे उसके

घर चलने को कहा." रानी ने अपनी जारी रखते हुए कहा.

"नही में नही चलूंगी, तुम मुझे फिर से चोदोगे?"

"हां चोदुन्गा तो सही, पर तुम्हे भी तो मज़ा आया था ये तुम्ही ने

कहा था." मोहन ने जवाब दिया.

"हां कहा तह लेकिन में प्रेगणनाट नही होना चाहती." मेने कहा.

"पर मुझे तो लगता है कि तुम प्रेग्नेंट हो चुकी हो." उसने हंसते

हुए कहा.

"हे भगवान! में चौंक गयी, "लेकिन तुम्हे कैसे पता है?"

"जिस तरह से तुम चल रही हो," उसने कहा, "लेकिन सही पता तुम्हारी

चूत देखकर ही लगेगा."

"में इतना डरी हुई थी की मुझे उसकी बात पर विश्वास हो गया और

में उसके साथ उसके घर चली गयी. उसने मुझसे मेरी सलवार उतारने

को कहा जिससे वो मेरी चूत देख सके."

"पहले तो उसने अपन उंगली मेरी चूत के अंदर डाल देखने लगा फिर

उंगली को अंदर बाहर करने लगा. मुझे इतना मज़ा आ रहा था की

मेने अपनी आँखे बंद कर ली थी पर जब तक मुझे पता चलता उसने

अपनी उंगली की जगह अपने लंड को अंदर घुसा दिया औट मुझे चोदने लगा

था."

"सच कहूँ तो मुझे भी बहोत मज़ा आ रहा था इसलिए मैने उसे मन

मानी करने दी. जब उसने मुझे चोद लिया तो मेने उससे कहा, "ओह

मोहन तुमने फिर मुझे चोद दिया, अगर में पहले प्रेग्नेंट नही थी

तो इस बार ज़रूर हो जाउन्गि."

"अरे पगली नही होवॉगी," मोहन हंसा और अपने लॉड की ओर इशारा

करते हुए बोला, "देख इसे."

मेने देखा की मोहन ने अपने लंड पर कोई रब्बर जैसे चीज़ चढ़ा

रखी थी, "ये क्या है?" मेने पूछा.

"मेरी जान इसे कॉंडम कहते है," उसने मुझे समझाया, "जब मेरा

वीर्या छूटता है तो वो इसके अंदर ही रह जाता है और तुम्हारी चूत

मे नही जाता. अब हम बिना किसी परेशानी के हमेशा चुदाई कर

सकते है."

raj..
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Re: मर्दों की दुनिया

Unread post by raj.. » 12 Dec 2014 14:56

"सोना उसके बाद मे मोहन के पास बराबर जाने लगी, सही मे बहोत

मज़ा आता है चुदाई करने मे, में तो कहती हूँ तुम भी चलो

बहोत मज़ा आएगा." रानीने मुझसे कहा और ज़िद करने लगी साथ चलने

के लिए.

"नही मुझे नही जाना तुम्हारे साथ, में जैसी हूँ ठीक हूँ." मेने

कहा, "हां लेकिन एक बात तुम याद रखना अगर कहीं कुछ गड़बड़ हो

गयी तो तुम्हारी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी."

"सोना में भी कॉंडम लगा के करूँगा" मेने उससे कहा कि शायद वो

तय्यार हो जाएगी.

"शाब्ज्ी तकदीर का कोई भरोसा नही," सोना ने आगे बताते हुए

कहा, "दो महीने बाद रानी प्रेग्नानॅट हो गयी. जब मेने उससे पूछा की

ये सब कैसे हो गया तो उसने बताया की एक दिन कॉंडम फॅट गया और

उनका वीर्या मेरी चूत मे गिर गया." रानी ने रोते हुए बताया था.

"पहले तो रानी ने अपने माता पिता को कुछ नही बताया लेकिन जब उसका

पेट फूलने लगा तो उसे सब कुछ बताना पड़ा. उसके पिता ने गाँव के

मुखिया से बात की और मोहन को उससे शादी करनी पड़ी. लेकिन उसकी

बीवी उससे बहोत नाराज़ है और उसके साथ गुलामो जैसा व्यवहार करती

है. आज वो दो बच्चो की मा हो गयी है पर वो खुश नही है."

सोना ने कहानी पूरी करते हुए कहा.

ये बात तो साफ हो गयी थी सोना मुझे चोदने नही देगी इसलिए मेने

सोचा कि क्यों ना कम से कम उसकी चूत देख ली जाए.

"ठीक है में तुम्हे नही चोदुन्गा लेकिन क्या तुम मुझे तुम्हारी चूत

चूसने दोगि जिससे तुम्हे भी मज़ा मिल सके." मैने कहा.

"सोना थोड़ी देर सोचती रही फिर बोली, "ठीक है लेकिन पहले आप इसे

अंदर कर ले," उसने मेरे खड़े लंड की ओर इशारा किया.

सोना ने अपने कपड़े उतारे और सोफे पर लेट गयी. मेने अपने लंड को

वापस अपनी पॅंट के अंदर कर लिया था. में उसकी टाँगो के बीच आ

गया और उसकी टाँगो को फैला उसकी चूत को पहेल तो चूमा फिर अपनी

जीब उसपर फिराने लगा.

"ऑश साआबजी कितना अचहाअ लग रहा है..." वो सिसक पड़ी.

उसकी सिसकी सुनकर मेने अपनी जीब उसकी चूत के अंदर घुसा दिया उर

गोल गोल घूमा उसकी चूत को चूसने लगा. वो भी अपनी कमर उठा

अपनी चूत को मेरे मुँह पर दबाने लगी. उसकी सिसकियाँ तेज होने

लगी थी होंठ फड़फड़ने लगे थे.

"ओह साआजी मज़ाअ आगेया ऑश अयाया हां चूसिए और ज़ोर से

चूसिए... रुकियगा मत ऑश हां और तेज़ी से घुसा दीजिए अपनी

जीएब

को ऑश मेरा तो छूटनाआ."

उसकी चूत पानी छोड़ चुकी थी फिर भी में उसकी चूत को चूस्ता

गया और उसकी चूत ने दो बार और पानी छोड़ दिया.

"मज़ाअ आया तुम्हे?" मैने उससे पूछा.

'श साबजी बता नही सकती बहोत मज़ा आया." उसने कहा.

"सोना एक बार चुदवा लो, सही मे तुम्हे इससे भी ज़्यादा मज़ा आएगा."

मेने उससे ये सोच कर कहा कि शायद वो तय्यार हो जाएगी.

"साबजी मुझे आप पर विश्वास है, लेकिन रानी ने भी यही कहा

था," सोना ने कहा, "में भी आपको मज़ा देना चाहती हू और मज़ा

लेना चाहती हूँ. पर मुझे डर लगता है, काश हम बिना किसी डर

के चुदाई कर सकते." सोना ने मुझसे कहा.

तुरंत मेरे दिमाग़ मे एक उपाय आया और में बाथरूम मे जाकर माला

की गर्भ निरोधक गोलियाँ ले आया.

"ये लो और लेबल पर लीखे अनुसार इन्हे बराबर लेती रहना ये पूरी

तरह सुरख़्शिट है." मेने उससे कहा.

"क्या आपको पक्का विश्वास है?" सोना ने पूछा.

"हां तुम्हारी मेडम इन्हे बराबर लेती है और आज तक प्रेग्नानॅट नही

हुई." मेने उससे कहा.

"ठीक है में आप पर विश्वास करके इन्हे बराबर ले लूँगी. मुझे

इन्हे चुदाई के पहले चूत मे डालना है या चुदाई के बाद." उसने

पूछा.

"अरे बेवकूफ़ ये गोलियाँ है इन्हे तुम पानी के साथ निगल लेना. लेबल

पर लीखे अनुसार लेना और एक महीने मे तुम सुरख़्शिट हो जाओगी."

मैने उसे समझाते हुए कहा.

"क्या? हमे एक महीने तक रुकना पड़ेगा." उसने पूछा.

"अब सुरक्षित रहने के लिए इतनी कीमत तो चुकानी ही पड़ेगी." मेने

कहा.

"क्या मेडम को इन गोलियों की ज़रूरत नही पड़ेगी?" उसने पूछा.

"नही अब वो गोलियाँ नही ले रही है, हम एक और बच्चे की सोच रहे

है," मेने उसे बताया.

उसी समय माला दीदी ने कहना शुरू किया, "उस रात जब हम बिस्तर मे

थे तो मेने विजये से पूछा, तो तुम एक महीने तक रुकोगे?"

"क्या कर सकता हूँ, फिर एक महीना कोई बड़ा तो नही." विजय ने

कहा

"तो हम लोग एक और बच्चे की सोच रहे है." मेने हंसते हुए कहा.

"अब कुछ तो उससे कहना ही था, चिंता मत करो तुम्हारी लिए में कल

दूसरी शीशी ले आयुंगा." विजय ने मुझे बाहों मे भरते हुए कहा

था.

"नही मुहे अब वो गोलियाँ नही लेनी है, अब में बच्चे की ही

सोचूँगी." मेने मज़ाक करते हुए कहा था.

"और संजोग से दूसरे दिन तुम्हारा फोन आ गया." माला दीदी ने

कहा. "और मेने विजय को तुम्हारी समस्या बताई.

"विजय अब अमित के लिए कुँवारी लड़की का इंतेज़ाम कहाँ से करेंगे?"

मेने पूछा था.

"दूसरी लड़की ढूढ़ने की क्या ज़रूरत है, हमारे पास सोना है ना."

विजय ने कहा था.

"लेकिन सोना की चूत तो तुम फाड़ना चाहते हो?" मेने कहा.

"लेकिन ये सब अनु का फोन आने से पहले की बात है. एक बात याद

रखो मेरी एक ही साली है, और उसकी खुशी के लिए में कुछ भी

कर सकता हूँ. ऐसी एक सोना तो क्या में हज़ार सोना भी उसकी खुशी

पर नौछावर कर सकता हूँ." विजय ने कहा था.

"श जीजाजी सच मे आपने ऐसा कहा था? अनु जीजाजी को अपनी बाहों मे

भरती हुई बोली.

"फिर क्या हुआ?" मेने पूछा.

जीजाजी ने कहा, "आने वाले एक महीने तक में उसकी चूत को चूस्ता

रहा. एक महीने के बाद भी जब मेने उसे चोदने की कोशिश नही की

तो एक दिन उसने मुझसे कहा, "साबजी एक महीना पूरा हो गया है."

मैने उससे कहा कि अभी दस दिन और रुक जाते है, लेकिन जब डूस दिन

पूरे हो गये तो उसने मुझे फिर से याद दिलाया.

तब मैने उसे समझाते हुए कहा, "सोना यहाँ पर तुम्हारी मेडम का

डर है. ऐसा ही की अगले हफ्ते हम छुट्टियों के लिए शिमला जा रहे

है वहीं मौका देख कर हम चुदाई करेंगे."

पर सोना ने मेरी बात का दूसरा मतलब निकाला, "साबी मुझे पता है

कि अब में आपको अछी नही लगती." उसने नाराज़ होते हुए कहा.

"नही ऐसी बात नही है." मेने कहा.

"मुझे आप पर विश्वास नही है," उसने मुझे धँकते हुए

कहा, "अगर आपने वहाँ भी कुछ नही किया तो याद रखिएगा किसी

और से चुदवा लूँगी."

"अब मामला यहाँ आ कर अटका हुआ है." विजय जीजाजी ने बात ख़तम

करते हुए कहा.


raj..
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Re: मर्दों की दुनिया

Unread post by raj.. » 12 Dec 2014 14:57

mardon ki duniya paart--8

Ek minute ruko." Seema didi ne hanste hue kaha, phir unhone ghanti

bajayi.

Thodi der bad ek 18 saal ki Nepali ladki kamre me aayi. Wo itni

sunder to nahi thi lekin phir bhi uske naak naksh kafi kateele the.

Rang gora. 5"2 inch lambi aur choti lekin narangi jaise chuchiyon.

"Madam aapne bulaya?" Usne kaha.

"Haan Sona, ye meri behne hai. Anu aur Sumi apne pati ke sath kuch

din hamare yahan hi rahengi. Ye dono inki naukraniya hai Mona aur

Reema.

Naukraniyon ko kitchen me le jakar inhe chai naashta do phir inhe

apna kamra deekha do, ye tumhare sath rahenge.

"Thik hai malkin." Sona ne kaha.

"Jara Tina se kehna ki yahan chai de jaye," Mala didi ne use

hukum diya.

"Jaisa aap kahen maalkin." kehkar wo hamari naukraniyon ko sath

lekar kamre se chali gayi.

"Meine is ladki ko pehle kahin dekha hai." meine apne deemag par jor

dete hue kaha, "lekin yaad nahi aa raha."

"Tumne ise meri shaadi me dekha hoga," Anu ne kaha, "ye Mala didi ki

naukarani hai."

"Ohhh han ab yaad aaya," meine kaha, "lekin kya ise pata hai ki ise

yahan kyon laya gaya hai."

"Haan ise pata hai ki ise yahan iski choot phadwane ke liye laaya

gaya hai," Mala didi ne kaha, "lekin ye samajhti hai ki iski kunwari

choot Vijay phadega."

"Lekin ise aisa kyon lag raha hai iski choot jijaji phadenge." Anu

ne pucha.

"Ye ek lambi kahani hai." Mala didi ne kaha.

"Didi please sunaiye na." Anu ne kaha.

"Abhi nahi baad me sunaungi, pehle tum dono Tina se mil lo," Seema

didi ne kaha, "wo abhi aati hi hogi."

Tabhi hame ek madhur awaaz sunai di."Madam please jara darwaza khol

dijiye mere dono hath bhare hue hai."

"Wo Tina hi hogi, jaroor chai lekar aayi hogi," Mala didi ne

kaha, "Sumi jara darwaza to kholna."

Jab meine darwaza khola to ek pal ke liye meri aankhe pathra gayi.

Tina itni sunder thi ki mein kya bataun. Kamre me hum sab me wahi

sabse sunder thi. Wo Sona ki hi umra ki hogi par usse umara me choti

deekh rahi thi. Gol gol maasum aankhe, lambe kale bal itna sudaul

jism ki mans naam matra ka bi uske badan par nahi tha. Badi aur

bhari bhari chuchiyon, agar use mauka mile to jaroor World Miss

Contest jeet sakti thi.

Seema didi ne usse hamara parichay karaya aur usse kaha ki hamare

pati kal aayenge. Usne ham sabhi ko namaste kiya aur chai dene ke

bad kamre se chali gayi.

"Seema didi tumhari Tina to bahot hi sunder hai, kahan se mil gayi

ye?" meine pucha.

"Tumhari shaadi ke bad meine apni purani naukarani ko nikaal diya

tha." Seema didi ne jawab diya, "har samay apne dard ke bare me hi

kehti rehti thi aur sara samay T.V dekhti rehti thi."

"Ye mili kahan se" meine phir pucha.

"Do din ke bad hamare padosi ne ise mere pas bheja. Mein to ise

rakhna hi nahi chahti thi karan ise kuch bhi nahi aata tha na hi

khana banana na bachon ki dekhbhal karna," Seema didi ne

kaha, "lekin tumhare jiju ne kaha ki agar koi ise kaam par nahi

rakhega to ise anhubav kahan se aayega," "lekin mujhe to lagta hai

ki tumhare jiju ko iski surat aur gaon ki kori choot pasand aa gayi

thi."

"Didi ye itni sunder aur pyaari hai ki mujhe to dar lag raha hai ki

hamare pati iske liye aapas me jhagada na karne lag jaye." Anu ne

khilkhilate hue kaha.

"Jhagda karne se bhi kuch hone wala nahi hai, kyonki Tina apni kori

choot Sumit se hi phadwayegi." Seema didi ne khulasa karte hue kaha.

"Sumit hi kyon Amit kyon nahi, wo to dono se nahi mili hai," Anu ne

thoda jalan bhare swar me kaha.

"Iske peeche bhi ek kahani hai," Seema didi mukurate hue boli.

"Phir ek kahani hai, acha chaliye batayiye kya kahani hai?" meine

kaha.

"Wo to mein bata dungi lekin pehle Mala se to sun le ki Sona Vijay

se hi kyon chudwana chahti hai?" Seema didi ne kaha.

"Ye tumhari shaadi ke ek hafte baad ki baat hai, jab hum ghar

pahunche to meine dekha ki jab bhi Sona kamre me hoti thi to Vijay

use ghorta rehta tha." Mala didi ne kahani sunate hue kaha.

Us raat jab hum dono bistar me the to meine Vijay se kaha, "Ye tum

mardon ko kya ho jata hai jahan gori chamdi dekhi nahi ki tum logon

ka lauda khada ho jata hai."

"Aisa kuch nahi hai meri jaan," Vijay ne jawab diya, "ye gori chamdi

ke karan khada nahi ho raha hai, balki kori pahadi ladki ki choot

dekh kar khada ho raha hai, upar se meine aaj tak kisi Nepali ladki

ko nahi choda hai isliye khada ho raha hai."

"Kya tum use chodna chahte ho?" meine Vijay se seedhe seedhe pucha.

"Are meri jaan mara jaa raha hun use chodne ke liye." Usne mera hath

apne khade lund par rakhte hue kaha tha, "dekho uska naam lene se

lund maharaj kaise uchal rahe hain."

"Thik hai mein nahi rokti tumhe, jao aur chod do use." meine kaha.

"Tumhe bura nahi lagega na," Vijay ne mujhe bahon me bharte hue kaha

tha. "Sach me jaan me isi liye tumhe duniya ki sabse acchi biwi kaha

karta hun."

"Bas.... bas ab maska lagana chodo. " meine muskurate hue

kaha, "lekin ek hi shart par tum use chod sakte ho."

"Thik kaho kya shart hai?' Vijay ne kaha.

"Mein dekhna chahti hun ki tum uski kori choot ko kaise phadte ho?"

meine kaha.

"Are tum apni baat karti ho, to dekh sakti ho." Vijay ne kaha, "aur

chaho to apni kuch sahleliyon ko bula sakti ho dekhne ke liye."

"Nahi mein hi kafi hun," meine usse kaha, "mein nahi chahti ki baad

me tum meri sahleliyon ko bhi chodo."

"Waise tumhara khayal bura nahi hai, tumhari kuch saheliyan to sahi

me pataka hai....." Vijay ne mere upar chadh apne lund ko meri choot

me ghusate hue kaha tha.

Ohhh ladkiyon mein bata nahi sakti ki wo raat kaise thi, kai dino ke

baad Vijay ne meri choot itni kas kar mari thi, us raat unka lauda

jhadne ka naam hi nahi le raha tha. Pata nahi Sona ka khayal tha ya

phir meri saheliyon ka." meine kaha.

"Hai didi kahin jijaji ne Sona ko chod to nahi diya?" Anu ne chinta

karte hue kaha.

"Ghabrao mat unhone abhi tak use choda nahi hai," meien kaha, "wo

abhi bhi kunwari hai."

Doosre din jab tumhare jijaji kaam par se waapas aaye to meine unhe

ishara karte hue kaha, "Sona kitchen me bartan dho rahi hai."

Mera ishara samajh tumhare jijaji kitchen me gaye aur Sona ko peeche

se bahon me bhar liya, "Sona me ghar aa gaya hun ek cup chai bana

do." kehkar wo uske gaalon ko choomne lage."

Aage ki kahani tumhare jijaji ki jubani.

"Ohh shaab, please aisa mat kariye, madam ne dekh liya to gazab ho

jayega," usne phusphusate hue kaha aur meri pakad se chootne ki

koshish karne lati.

"Tumhari madam kahan hai?" meine pucha.

"Apne bedroom me." Sona ne kaha.

"Thik hai chai wahin lekar aa jao." meine usse kaha.

Kamre me pahunch kar meine Mala ko bataya ki kitchen me kya hua

tha. "Hmmm tumne aisa kiya to wo na to chillayi na hi tum par gussa

hui, sirf tumhe mujhse agah kiya" Mala ne kaha, "iska matlab samjhte

ho?"

"Haan bahot achi tarah se samjhta hun," meine hanste hue kaha, "iska

matlab hai ki tumhari saheliyon ko muft ka private sex shoe deekhne

ko milne wala hai."

"Haan mujhe bhi aisa hi lagta hai," mala bhi hanste hue boli.

"Darling mein chahta hun ki kal se mein jab kaam par se wapas aayun

to tum ghar par na ho." meine kaha.

"Kahan jaungi mein?" Mala ne pucha.

"Mujhe nahi pata, shopping ke liye chali jao, ya phir Seema ke paas

chali jao bas tum ghar par mat rehna." miene kaha.

"Sujhav accha hai, shayad Ajya bhi tab ta ghar par aa huka hoga."

Mala ne hanste hue kaha.

Doosre din jab mein ghar pahuncha to meine Sona se pucha, "Mala

kahan hai?" to usne kaha ki abhi abhi bahar gayi hai. Meine use

turant bahon me bhar liya aur uske galon ko choomne laga

"Ohh sahb mat kariye na.." Sona ne virodh kiya, lekin na to usne

apne aap ko mujhse chudaya aur na hi kuch kaha.

Thodi der use choomne ke baad meine kaha, "mein hall me baitha hun,

chai wahin le aana."

Sona ne chai hall me lakar mujhe de dee. Mein chai ki sip lene laga.

ki tabhi usne pucha, "Saabji chai kaisi bani hai?"

"Bahot achi bahi hai." meine kaha aur subah ka akhbar padhne laga.

Waise mein chahta to uske sath aur aage bhi badh sakta tha lekin

kahin wo dar na jaye isliye meine dheere dheere hi age badhna uchit

samjha.

Thode din tomein uske gaalon ko hi choomte hi raha fir ek din meine

uske hothon ko choom liya, "Ohhh saab aapko aisa nahi karna chaiye

tha?" usne sharmate hue kaha lekin virodh nahi kiya.

Mein sirf hans kar reh gaya aur hall me baith kar apni chai ka

intezar karne laga. Chai ka sip lete hi usne pucha, "Saab chai kaisi

bani hai?" jaisi iki har roz puchti hai.

"Hmm aaj kuch meethi jyada hai, kitni chamach shakkar dali thi?'

meine pucha.

"Ek chamach jaise har roz dalti hun." usne jawab diya.

"Hmm fir tumhare hothon ki meethas hogi." meine apne hothon par jeeb

firate hue kaha.

"Ohhh" kehkar wo sharmati hui kitchen me bhaag gayi. Mein bhi uske

peeche peeche kitchen me aa gaya aur use bahon me bharte hue

bola, "Sona ek bar aur tumhare hothon ki meethas lene do na?" aur

meine uske hothon ko choom liya.

Phele to usne halka virodh kiya lekin phir usne mujhe choomne diya.

Meine bhi is bar uske hothon ko choomte hue apni jeeb uske munh daal

di aur wo bhi mere hothon ko choosne lagi.

Thodi der bad hum jab alag hue to hamari sanse tej ho gayi

thi. "Hothon ko chosna accha lagta hai na?" mene pucha.

"Haan bahot accha lagta hai." usne sharmate hue kaha.

Chooma chaati ab roz hi hone lagi. Mala ghar me hoti to bhi hum

mauka dekh ek doosre ko choom lete. Ab mujhe uski chuchiyon ki aur

badhna tha. Fir ek din meine ek plan banaya aur Mala ko apna plan

samjhaya.

"Are mere chudakkad Raja chinta mat karo mein sab intezam kar

doongi," Mala ne kaha, "kal tumhe Sona ki chuchiyan mil jayengi. "