बात एक रात की compleet

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 04:07

raj sharma stories

बात एक रात की--31

गतान्क से आगे.................

"नही तुम्हारा दोस्त आ जाएगा रूको" संगीता गिड़गिडाई.

मोहित ने एक झटके में संगीता का नाडा खोल दिया और उसकी सलवार नीचे सरका दी. उसने कोई पॅंटी नही पहनी थी इसलिए अब उसकी नंगी गान्ड मोहित की आँखो के सामने थी.

"बहुत सुंदर गान्ड है आपकी" मोहित ने कहा.

"धीरे बोलिए...आपके दोस्त से सुन लिया तो"

"सुन लेने तो आपकी तारीफ़ ही तो कर रहा हूँ" मोहित ने कहा.

मोहित ने संगीता की चूत में उंगली डाल दी.

"आअहह क्या डाल दिया तुमने." संगीता कराह उठी.

"उंगली डाली है बस अभी...तुम तो एकदम तैयार हो...खूब चिकनी हो रखी है तुम्हारी चूत."

मोहित ने अपनी ज़िप खोली और अपने लंड को संगीता की नंगी गान्ड पर रगड़ने लगा.

संगीता को अपनी गान्ड पर बहुत भारी भरकम चीज़ महसूस हो रही थी. उस से रहा नही गया और उसने पीछे मूड कर मोहित के लंड पर नज़र डाली.

"ओह माइ गोद इट्स सो बिग" संगीता ने कहा.

"पसंद आया क्या?" मोहित ने पूछा.

"मैने अब तक ऐसा पॉर्न मूवीस में ही देखा है" संगीता ने कहा.

"ह्म्म तो हक़ीकत में देख कर कैसा लग रहा है" मोहित ने कहा.

"मुझे डर लग रहा है"

"हे..हे..हा..हा..अच्छा मज़ाक कर लेती हो चलो झुक जाओ" मोहित ने कहा.

"मैं मज़ाक नही कर रही"

"डरो मत संगीता थोड़ा झुक जाओ..... कुछ नही होगा ट्रस्ट मे."

"तुम्हारा दोस्त आ गया तो" संगीता ने कहा.

"वो नही आएगा तुम चिंता मत करो झुक जाओ" मोहित ने कहा.

संगीता मोहित के आगे किचन की स्लॅब का सहारा ले कर झुक गयी. मोहित ने देर ना करते हुए फ़ौरन अपना लंड उसकी चूत के होल पर रख दिया.

"अपनी टांगे खोल लो... लेने में आसानी होगी" मोहित ने कहा.

संगीता ने अपनी टांगे खोल ली और मोहित ने ज़ोर से अपने लंड को पूस किया.

"आआययईीीईईई मर गयी....दिस ईज़ टू बिग फॉर मे" संगीता कराह उठी.

संगीता की आवाज़ राज को भी सुनाई दी.

"लगता है गुरु हो गया शुरू और मुझे खबर तक नही की" राज ने कहा.

"टू बिग...हा..हा...हे...हे." मोहित हस्ने लगा.

"तुम बात-बात पर हंसते क्यों हो मैं क्या मज़ाक कर रही हू क्या तुम्हे नही पता कि तुम्हारा कुछ ज़्यादा ही बड़ा है" संगीता ने कहा.

"मुझे पता है ये बड़ा है....वैसे ही तुम्हारी बात पर हंस रहा था आअहह" मोहित ने बात करते करते पूरा का पूरा लंड संगीता की चूत में उतार दिया.

"उउउउय्य्य्य्यीईइ मा क्या अभी और भी बचा है." संगीता ने कहा.

"नही बस घुस्स गया पूरा...नाउ आइ आम रेडी टू स्मॅश युवर पुसी" मोहित ने कहा.

"अभी तक क्या कर रहे थे....मी पुसी ईज़ स्मॅश्ड ऑलरेडी आहह"

"अभी तो शुरूवात है संगीता जी बहुत ज़ोर-ज़ोर से मारने वाला हूँ मैं आपकी"

"आअहह ऐसा मत कहो मुझ डर लग रहा है....उउउहह" संगीता कराहते हुए बोली.

मोहित ने संगीता की छूट में लंड के धक्को की बरसात शुरू कर दी. संगीता की गान्ड को पकड़ कर वो बार-बार अपने मोटे लंड को संगीता की चूत में धकेल रहा था.

राज से रहा नही गया और वो उठ कर किचन की और चल दिया. पर किचन के अंदर का नज़ारा देख कर वो दरवाजे पर ही रुक गया.

संगीता ने राज को देख लिया पर वो मोहित के धक्को में इतना खोई थी कि कुछ देर कुछ नही बोल पाई. अचानक वो बोली, "आअहह तुम्हारा दोस्त देख रहा है....उउउहह हटो"

"देख लेने दो बेचारे को इसने आज तक ब्लू फिल्म नही देखी" मोहित ने राज की तरफ आँख मार कर कहा.

राज ने मोहित की तरफ थंब्स-अप का इशारा किया और बोला, "लगे रहो गुरु"

"इस से कहो बीच में बोले मत मुझे वैसे ही शरम आ रही है आआहह हो सके तो इसे यहा से भेज दो" संगीता ने कहा.

"मूवी देखनी है तो चुपचाप देखो शोर क्यों मचाते हो" मोहित ने राज को फिर से आँख मार कर कहा.

राज ने अपने मूह पर उंगली रख ली. संगीता ने उसकी तरफ देखा तो उसने गर्दन हिला कर इसारे में पूछा, 'अब ठीक है'

"स्टुपिड कही का आआहह" संगीता बड़बड़ाई.

मोहित लगातार संगीता की चूत मारे जा रहा था और राज खड़ा खड़ा खूब तमासा देख रहा था.

"आआहह फीनिस इट अप आआअहह" संगीता कराहते हुए बोली.

"अभी तो शुरूवात हुई है संगीता जी....आअहह" मोहित ज़ोर-ज़ोर से अपने लंड को पूस करते हुए बोला.

"नहियीईई....आआआहह आइ आम कमिंग" संगीता ने पहला ऑर्गॅज़म महसूस किया.

"लगता है खूब मज़े ले रही हो...आअहह" मोहित ने कहा.

"उुउऊहह आअहह ओह ... फक" संगीता ने कहा.

मोहित के धक्को की स्पीड अचानक बढ़ती चली गयी और स्पीड बढ़ते ही संगीता ने सीरीस ऑफ ऑर्गॅज़म को महसूस किया. मोहित ने अचानक संगीता की गान्ड को ज़ोर से जाकड़ लिया और बहुत तेज धक्के मारते हुए उसने अपना पानी संगीता की चूत की गहराई में छ्चोड़ दिया.

"आआहह इट वाज़ आ फॅंटॅस्टिक फक उऊहह" मोहित ने संगीता की गान्ड को मसल्ते हुए कहा.

मोहित कुछ देर तक यू ही संगीता की चूत में लंड डाले खड़ा रहा और राज उन दोनो को आँखे फाडे देखता रहा.

राज सोच रहा था, "मेरा नंबर कब आएगा."

जब संगीता का नशा उतरा तो उसे अहसास हुआ कि वो किस हालत में है. मोहित अभी भी उसकी गान्ड पकड़े खड़ा था और उसका लंड किसी तरह से अभी भी संगीता की चूत में टीका हुआ था. राज दरवाजे पर खड़ा मुस्कुरा रहा था.

"फिर कभी लंड्रोच सताए तो मुझे तुरंत कॉल करना मैं उसकी हड्डी पसली एक कर दूँगा" मोहित ने कहा.

"तुमने अभी तो उस लंड्रोच को जाने दिया और मेरी हड्डी पसली एक कर दी...ना बाबा ना ऐसी मदद नही चाहिए मुझे" संगीता ने कहा.

लंड्रोच भी जैसे सब सुन रहा था. ना जाने कहा से निकला और फुर्ती से वापिस चीनी के डिब्बे पर चढ़ गया.

"अरे ये तो फिर से आ गया...शुउऊ शुउ" संगीता बोली.

"इस बार मैं मदद करूँगा...ये लंड्रोच बहुत शातिर है" राज ने कहा.

मोहित ने धीरे से संगीता की चूत से लंड बाहर खींच लिया और बोला,"हां-हां तुम सम्भालो खबीस लंड्रोच को"

जैसे ही मोहित ने लंड बाहर निकाला संगीता ने अपनी सलवार उपर करके नाडा बाँध लिया.

"अरे ये क्या गजब कर रही हैं आप रहने दीजिए ना ये सलवार नीचे मेरी मदद भी तो देख लीजिए" राज ने कहा.

"लगता है ये लंड्रोच तुम दोनो के साथ है...आज तक मैने इसे यहा नही देखा...जो भी हो अब ये नही बचेगा." संगीता ने अपने हाथ में अपनी चप्पल ले कर कहा.

संगीता ने लंड्रोच पर वार किया पर शरारती लंड्रोच चप्पल लगने से पहले ही वाहा से रफू चक्कर हो गया. वो स्लॅब के नीचे कही घुस्स गया. संगीता हाथ में चप्पल लिए स्लॅब के आगे झुक कर लंड्रोच को ढूँढने लगी.

"अफ क्या मजेदार झुकी है...इसी पोज़िशन में बस सलवार नीचे कर ले तो मज़ा आ जाए." राज ने मन ही मन कहा.

राज संगीता की गान्ड पर अपना तना हुआ लंड लगा कर सॅट गया और बोला,"मैं कुछ मदद करूँ"

"जी नही आपके दोस्त ने बहुत मदद कर ली हट जाओ मेरे पीछे से." संगीता ने कहा.

मोहित ने राज को पकड़ा और उसे खींच कर संगीता के पीछे से हटाया और उसके कान में बोला,"तुझे नही देगी ये चल निकलते हैं यहा से कही कुछ गड़बड़ हो जाए"

"गुरु प्लीज़ थोड़ा ट्राइ तो करने दो...तुम्हे मिल गयी तो मुझे भी मिल सकती है" राज ने कहा.

"तुम दोनो अब जाओ यहा से...भैया वापिस आएँगे तो उन्हे मेसेज दे दूँगी अपना नाम और मोबाइल नो बता दो." संगीता ने कहा.

"इसका मतलब हमे चाय नही मिलने वाली" राज ने कहा.

संगीता ने गहरी साँस ली और बोली,"ठीक है बैठो 2 मिनट अभी लाती हूँ चाय"

"मैं आपके हाथो की चाय पी कर ही जाउन्गा" राज ने कहा और मोहित के साथ बाहर आ गया.

संगीता कुछ ही देर में चाय ले आई.

"मैं आपको लंड्रोच को हॅंडल करने का बहुत अच्छा तरीका बताता हूँ" राज ने कहा.

"हां बोलो क्या है?"

"जैसे ही आपको लंड्रोच दीखे उसे आप पकड़ लीजिए. अब उसे फार्स पर पीठ के बल लेटा दीजिए. फिर आप उंगली से उसके पेट में गुदगुदी कीजिए. लंड्रोच हँसे बिना नही रह पाएगा देर सबेर मूह खोलेगा ही. जैसे ही वो हँसने के लिए मूह खोले उसके मूह में फिनायल डाल दीजिए...वो तुरंत ढेर हो जाएगा."

"हा..हा..हा...हे..हे...क्या तरीका है...वाह मान गये." संगीता लॉट पॉट हो गयी.

"बहुत आजमाया हुआ तरीका है आप कहें तो अभी करके दीखा दू" राज ने कहा.

"रहने दीजिए वो लंड्रोच बहुत शातिर है...बहुत अच्छे से जानती हूँ मैं उसे"

"आप तो कह रही थी कि आज ही देखा है आपने उसे" राज ने कहा.

"मज़ाक कर रही थी...ये तो उसका रोज का काम है" संगीता ने कहा.

"मेरी तरह कौन आता है रोज मदद करने" मोहित ने कहा.

"कोई नही मैं खुद उसे भगा देती हूँ" संगीता ने कहा.

"जो भी हो आपने मुझे मोका नही दिया आज" राज ने कहा.

"मोका तो लेना पड़ता है दिया नही जाता." संगीता ने कहा.

राज ने मोहित की तरफ देखा और आँखो ही आँखो में पूछा, "क्या कहते हो गुरु ले लू मोका"

मोहित ने आँखे झपका कर हां का इशारा किया.

राज ने फ़ौरन आगे बढ़ कर संगीता को गोदी में उठा लिया.

"अरे क्या कर रहे हो?" संगीता ने कहा.

"मोका ले रहा हूँ...आपका बेडरूम कहा है" राज ने कहा.

"फिर कभी मोका लेना तुम्हारे दोस्त ने वैसे ही बहुत थका रखा है" संगीता ने कहा.

"फिर कभी...फिर कभी ही रह जाता है...आज ही ठीक रहेगा" राज ने कहा.

"नही ये भैया का कमरा है...मेरा बेडरूम उधर है" संगीता ने कहा.

"कोई बात नही इस में ही चलते हैं अब वेट नही हो रहा" राज ने कहा.

राज ने संगीता को बेड पर लेटा दिया और जल्दी से अपने कपड़े उतार दिए.

"ओह माइ गोद " संगीता ने राज के लंड को देखते हुए कहा.

"क्या हुआ?"

"इट्स ह्यूज" संगीता ने कहा.

राज संगीता के उपर चढ़ गया और बोला,"कभी अनल किया है?"

"एक बार... क्यों पूछ रहे हो?...अगर तुम सोच रहे हो कि मैं इतना बड़ा वाहा लूँगी तो भूल जाओ"

"मेरे दोस्त को चूत दी है तुमने मुझे कुछ अलग ही दोगि ना. क्या दोनो को एक ही गिफ्ट दोगि"

"बहुत खूब तुम दोनो दोस्त उस लंड्रोच से भी शातिर हो" संगीता ने कहा.

राज ने संगीता के उपर के कपड़े फुर्ती से उतार दिए और उसके बूब्स मसल्ने लगा और बोला,"लंड्रोच का मुकाबला हम कहा कर सकते हैं वो तो सच में बहुत शातिर है. लगता है तुम्हारा आशिक है...बच के रहना कही गान्ड मार ले तुम्हारी"

क्रमशः........................

......

BAAT EK RAAT KI--31

gataank se aage.................

"nahi tumhaara dost aa jaayega ruko" sangeeta gidgidaayi.

Mohit ne ek jhatke mein sangeeta ka naada khol diya aur uski salwaar neeche sarka di. Usne koi panti nahi pahni thi isliye ab uski nangi gaanD mohit ki aankho ke saamne thi.

"bahut shunder gaanD hai aapki" mohit ne kaha.

"dheere boliye...aapke dost se shun liya to"

"shun lene to aapki taarif hi to kar raha hun" mohit ne kaha.

Mohit ne sangeeta ki chut mein ungli daal di.

"aaahhhh kya daal diya tumne." sangeeta karaah uthi.

"ungli daali hai bas abhi...tum to ekdam taiyaar ho...khub chikni ho rakhi hai tumhaari chut."

mohit ne apni zip kholi aur apne lund ko sangeeta ki nangi gaanD par ragadne laga.

Sangeeta ko apni gaanD par bahut bhaari bharkam cheez mahsus ho rahi thi. Us se raha nahi gaya aur usne peeche mud kar mohit ke lund par nazar daali.

"oh my god its so big" sangeeta ne kaha.

"pasand aaya kya?" mohit ne pucha.

"maine ab tak aisa porn movies mein hi dekha hai" sangeeta ne kaha.

"hmm to hakeekat mein dekh kar kaisa lag raha hai" mohit ne kaha.

"mujhe dar lag raha hai"

"he..he..ha..ha..achcha majaak kar leti ho chalo jhuk jaao" mohit ne kaha.

"main majaak nahi kar rahi"

"daro mat sangeeta thoda jhuk jaao..... kuch nahi hoga trust me."

"tumhaara dost aa gaya to" sangeeta ne kaha.

"vo nahi aayega tum chinta mat karo jhuk jaao" mohit ne kaha.

Sangeeta mohit ke aage kitchen ki slab ka sahaara le kar jhuk gayi. Mohit ne der na karte hue fauran apna lund uski chut ke hole par rakh diya.

"apni taange khol lo... lene mein asaani hogi" mohit ne kaha.

Sangeeta ne apni taange khol li aur mohit ne jor se apne lund ko pus kiya.

"aaaayyyiiiiiii mar gayi....this is too big for me" sangeeta karaah uthi.

sangeeta ki awaaj Raj ko bhi shunaayi di.

"lagta hai guru ho gaya shuru aur mujhe khabar tak nahi ki" Raj ne kaha.

"too big...ha..ha...he...he." mohit hasne laga.

"tum baat-baat par hanste kyon ho main kya majaak kar rahi hu kya tumhe nahi pata ki tumhaara kuch jyada hi bada hai" sangeeta ne kaha.

"mujhe pata hai ye bada hai....vaise hi tumhaari baat par hans raha tha aaahhh" mohit ne baat karte karte pura ka pura lund sangeeta ki chut mein utaar diya.

"uuuuyyyyyiiiii ma kya abhi aur bhi bachcha hai." sangeeta ne kaha.

"nahi bas ghuss gaya pura...now i am ready to smash your pussy" mohit ne kaha.

"abhi tak kya kar rahe the....my pussy is smashed already aahhh"

"abhi to shuruvaat hai sangeeta ji bahut jor-jor se maarne waala hun main aapki"

"aaahhh aisa mat kaho mujh dar lag raha hai....uuuhhhh" sangeeta karaahte hue boli.

Mohit ne sangeeta ki chut mein lund ke dhakko ki barsaat shuru kar di. Sangeeta ki gaanD ko pakad kar vo baar-baar apne mote lund ko sangeeta ki chut mein dhakail raha tha.

Raj se raha nahi gaya aur vo uth kar kitchen ki aur chal diya. Par kitchen ke ander ka nazaara dekh kar vo darvaaje par hi ruk gaya.

Sangeeta ne Raj ko dekh liya par vo mohit ke dhakko mein itna khoyi thi ki kuch der kuch nahi bol paayi. Achchaanak vo boli, "aaahhhh tumhaara dost dekh raha hai....uuuhhhh hato"

"dekh lene do bechaare ko isne aaj tak blue film nahi dekhi" mohit ne Raj ki taraf aankh maar kar kaha.

Raj ne mohit ki taraf thumbs-up ka ishaaraa kiya aur bola, "lage raho guru"

"is se kaho beech mein bole mat mujhe vaise hi sharam aa rahi hai aaaahhhhh ho sake to ise yaha se bhej do" sangeeta ne kaha.

"movie dekhni hai to chupchaap dekho sor kyon machchaate ho" mohit ne Raj ko phir se aankh maar kar kaha.

Raj ne apne muh par ungali rakh li. Sangeeta ne uski taraf dekha to usne gardan hila kar isaare mein pucha, 'ab theek hai'

"stupid kahi ka aaaahhhhhhh" sangeeta badbadaayi.

Mohit lagaataar sangeeta ki chut maare ja raha tha aur Raj khada khada khub tamaasa dekh raha tha.

"aaaahhhh finis it up aaaaahhhhh" sangeeta karaahte hue boli.

"abhi to shuruvaat huyi hai sangeeta ji....aaahhhhh" mohit jor-jor se apne lund ko pus karte hue bola.

"nahiiiiii....aaaaaahhhhhhh i am coming" sangeeta ne pahla orgasm mahsus kiya.

"lagta hai khub maje le rahi ho...aaahhh" mohit ne kaha.

"uuuuhhhh aaahhhh oh ... Fuck" sangeeta ne kaha.

Mohit ke dhakko ki speed achchaanak badhti chali gayi aur speed badhte hi sangeeta ne series of orgasm ko mahsus kiya. Mohit ne achchaanak sangeeta ki gaanD ko jor se jakad liya aur bahut tej dhakke maarte hue usne apna paani sangeeta ki chut ki gahraayi mein chhod diya.

"aaaahhhhh it was a fantastic fuck uuhhhh" mohit ne sangeeta ki gaanD ko masalte hue kaha.

mohit kuch der tak yu hi sangeeta ki chut mein lund daale khada raha aur Raj un daono ko aankhe phaade dekhta raha.

Raj soch raha tha, "mera number kab aayega."

jab sangeeta ka nasha utra to use ahsaas hua ki vo kis haalat mein hai. Mohit abhi bhi uski gaanD pakde khada tha aur uska lund kisi tarah se abhi bhi sangeeta ki chut mein tika hua tha. Raj darvaaje par khada muskura raha tha.

"phir kabhi lundroach sataaye to mujhe turant call karna main uski haddi pasli ek kar dunga" mohit ne kaha.

"tumne abhi to us lundroach ko jaane diya aur meri haddi pasli ek kar di...na baba na aisi madad nahi chaahiye mujhe" sangeeta ne kaha.

Lundroach bhi jaise sab shun raha tha. Na jaane kaha se nikla aur furti se vaapis cheeni ke dibbe par chadh gaya.

"arey ye to phir se aa gaya...shuuu shuu" sangeeta boli.

"is baar main madad karunga...ye lundroach bahut shaatir hai" Raj ne kaha.

Mohit ne dheere se sangeeta ki chut se lund baahar kheench liya aur bola,"haan-haan tum sambhaalo abis lundroach ko"

jaise hi mohit ne lund baahar nikaala sangeeta ne apni salwaar upar karke naada baandh liya.

"arey ye kya gajab kar rahi hain aap rahne dijiye na ye salwaar neeche meri madad bhi to dekh lijiye" Raj ne kaha.

"lagta hai ye lundroach tum done ke saath hai...aaj tak maine ise yaha nahi dekha...jo bhi ho ab ye nahi bachchega." sangeeta ne apne haath mein apni chappal le kar kaha.

Sangeeta ne lundroach par vaar kiya par sharaarti lundroach chappal lagne se pahle hi vaha se rafoo chakkar ho gaya. Vo slab ke neeche kahi ghuss gaya. Sangeeta haath mein chappal liye slab ke aage jhuk kar lundroack ko dhundhne lagi.

"uff kya majedaar jhuki hai...isi position mein bas salwaar neeche kar le to maja aa jaaye." Raj ne man hi man kaha.

Raj sangeeta ki gaanD par apna tana hua lund laga kar sat gaya aur bola,"main kuch madad karun"

"ji nahi aapke dost ne bahut madad kar li hat jaao mere peeche se." sangeeta ne kaha.

Mohit ne Raj ko pakda aur use kheench kar sangeeta ke peeche se hataaya aur uske kaan mein bola,"tujhe nahi degi ye chal nikalte hain yaha se kahi kuch gadbad ho jaaye"

"guru please thoda try to karne do...tumhe mil gayi to mujhe bhi mil sakti hai" Raj ne kaha.

"tum dono ab jaao yaha se...bhaiya vaapis aayenge to unhe message de dungi apna naam aur mobile no bata do." sangeeta ne kaha.

"iska matlab hame chaaye nahi milne waali" Raj ne kaha.

Sangeeta ne gahri saans li aur boli,"theek hai baitho 2 minat abhi laati hun chaaye"

"main aapke haatho ki chaaye pee kar hi jaaunga" Raj ne kaha aur mohit ke saath baahar aa gaya.

Sangeeta kuch hi der mein chaaye le aayi.

"main aapko lundroach ko handle karne ka bahut achcha tareeka bataata hun" Raj ne kaha.

"haan bolo kya hai?"

"jaise hi aapko lundroach deekhe use aap pakad lijiye. Ab use fars par peeth ke bal leta dijiye. Phir aap ungli se uske pet mein gudgudi kijiye. Lundroach hanse bina nahi rah paayega der saber muh kholega hi. Jaise hi vo hansne ke liye muh khole uske muh mein phinaayal daal dijiye...vo turant dher ho jaayega."

"ha..ha..ha...he..he...kya tareeka hai...vaah maan gaye." sangeeta lot pot ho gayi.

"bahut aajmaaya hua tareeka hai aap kahein to abhi karke deekha du" Raj ne kaha.

"rahne dijiye vo lundroach bahut shaatir hai...bahut achche se jaanti hun main use"

"aap to kah rahi thi ki aaj hi dekha hai aapne use" Raj ne kaha.

"majaak kar rahi thi...ye to uska roj ka kaam hai" sangeeta ne kaha.

"meri tarah kaun aata hai roj madad karne" mohit ne kaha.

"koi nahi main khud use bhaga deti hun" sangeeta ne kaha.

"jo bhi ho aapne mujhe moka nahi diya aaj" Raj ne kaha.

"moka to lena padta hai diya nahi jaata." sangeeta ne kaha.

Raj ne mohit ki taraf dekha aur aankho hi aankho mein pucha, "kya kahte ho guru le lu moka"

mohit ne aankhe jhapka kar haan ka ishaaraa kiya.

Raj ne fauran aage badh kar sangeeta ko godi mein utha liya.

"arey kya kar rahe ho?" sangeeta ne kaha.

"moka le raha hun...aapka bedroom kaha hai" Raj ne kaha.

"phir kabhi moka lena tumhaare dost ne vaise hi bahut thaka rakha hai" sangeeta ne kaha.

"phir kabhi...phir kabhi hi rah jaata hai...aaj hi theek rahega" Raj ne kaha.

"nahi ye bhaiya ka kamra hai...mera bedroom udhar hai" sangeeta ne kaha.

"koi baat nahi is mein hi chalte hain ab wait nahi ho raha" Raj ne kaha.

Raj ne sangeeta ko bed par leta diya aur jaldi se apne kapde utaar diye.

"oh my god " sangeeta ne Raj ke lund ko dekhte hue kaha.

"kya hua?"

"its huge" sangeeta ne kaha.

Raj sangeeta ke upar chadh gaya aur bola,"kabhi anal kiya hai?"

"ek baar... kyon puch rahe ho?...agar tum soch rahe ho ki main itna bada vaha lungi to bhool jaao"

"mere dost ko chut di hai tumne mujhe kuch alag hi dogi na. Kya dono ko ek hi gift dogi"

"bahut khub tum dono dost us lundroach se bhi shaatir ho" sangeeta ne kaha.

Raj ne sangeeta ke upar ke kapde furti se utaar diye aur uske boobs masalne laga aur bola,"lundroach ka mukaabla hum kaha kar sakte hain vo to sach mein bahut shaatir hai. Lagta hai tumhaara aashik hai...bach ke rahna kahi gaanD maar le tumhaari"

Kramashah..............................

rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 04:08

raj sharma stories

बात एक रात की--32

गतान्क से आगे.................

"आअहह माइ बूब्स आर टेंडर डोंट स्क्वीज़ देम सो हार्ड" संगीता ने कहा.

"ओके...वैसे जवाब नही दिया आपने मेरी बात का....गान्ड दोगि कि नही" राज ने संगीता की गर्दन को चूमते हुए कहा.

"यहा माँगे से कुछ नही मिलता मिस्टर सब लेना पड़ता है" संगीता ने कहा.

"बहुत अच्छी फिलॉसोफी है आपको मज़ा आएगा आपकी गान्ड लेने में" राज ने कहा.

"पर क्या इतना बड़ा जाएगा वाहा मैने सुना है कि अनल सेक्स में बड़ा साइज़ दिक्कत करता है." संगीता ने कहा.

"सब बकवास है अफवाहॉ पर ध्यान नही दिया करते...मेरी एक फ़्रेंड है नगमा बड़े आराम से ले लेती है वो मेरा अपनी गान्ड में...वैसे भी तुमने पहले कर ही रखा है"

"मेरे उस बॉय फ्रेंड का इतना बड़ा नही था...था तो ठीक ठाक पर ऐसा नही था." संगीता ने कहा.

"कोई बात नही आप बिलककुल चिंता मत करो आपकी गान्ड मेरे लंड के नीचे बिल्कुल सुरक्षित रहेगी"

राज ने संगीता की सलवार उतार दी और उसे अपने नीचे घुमा कर पेट के बल लेटा दिया और उसके उपर लेट गया. राज का लंड संगीता की गान्ड की दरार पर टकरा रहा था.

"आअहह आइ लाइक अनल" संगीता ने कहा.

"अच्छा फिर भी अभी तक एक बार ही गान्ड दी है" राज ने पूछा.

"कोई ट्राइ करेगा तभी ना होगा ऐसे कैसे मुमकिन है" संगीता ने कहा.

राज ने संगीता की गान्ड फैला कर उसके होल पर थूक लगा दिया और कुछ थूक अपने लंड पर भी रगड़ लिया.

"ओके मैं ट्राइ करने जा रहा हूँ रोकना मत मुझे. अगर आपको अनल पसंद है तो ये पूरा लंड आपको लेना पड़ेगा." राज ने कहा.

"आइ विल ट्राइ माइ बेस्ट....आअहह"

राज ने लंड के अगले हिस्से को संगीता की गान्ड के छेद पर टिकाया और खुद को आगे की ओर पूस किया.

"ऊऊओह कीप इट स्लो." संगीता ने कहा.

"या या ओफ़कौरसे...." राज ने कहा.

अभी लंड बाहर ही था. हल्के हल्के धक्को से काम नही बन रहा था.

"मुझे थोड़ा ज़ोर तो लगाना ही पड़ेगा...ये तो घुस्स ही नही रहा." राज ने कहा.

"आर यू शुवर की तुम्हारी फ्रेंड ले लेती है इसे आराम से" संगीता ने कहा.

राज ने ज़ोर का धक्का मारा और बोला,"उस से क्या फरक पड़ता है आपकी गान्ड में तो इसे हर हाल में घुस्सना है"

"आआययईीीई मर गयी....आआहह"

राज का आधा लंड संगीता की गान्ड में उतर जाता है.

"ये क्या किया जान निकाल दी मेरी"

"गान्ड में लंड घुस्सता नही घुस्साना पड़ता है...आपकी ही फिलॉसोफी ट्राइ कर रहा था."

"इट्स फीलिंग गुड...बस ये दर्द कम हो जाए" संगीता ने कहा.

राज ने संगीता की गान्ड में आधा ही लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.

"आअहह मज़ा आ रहा है...कीप डूयिंग इट" संगीता ने कहा.

हर एक धक्के के साथ राज का लंड संगीता की गान्ड में और गहरा उतरता चला गया.

"आअहह सेक्सी गान्ड है आपकी" राज ने कहा.

राज के आँड अब हर धक्के के साथ संगीता की गान्ड से से टकरा रहे थे.

"ओह माइ गॉड आइ आम फीलिंग युवर बॉल्स क्या पूरा अंदर है अब" संगीता हैरानी में बोली.

"बिल्कुल आपकी गान्ड ने पूरा निगल लिया मेरे लंड को आअहह"

इधर मोहित ड्रॉयिंग रूम में ही बैठा था.

"कितना वक्त लगा रहा है ये राज...कही कुछ गड़बड़ ना हो जाए." मोहित बड़बड़ाया.

अचानक मोहित को घर के बाहर कार के रूकने की आवाज़ सुनाई दी. मोहित ने खिड़की से झाँक कर देखा. "ओह नो ये तो परवीन ही लग रहा है"

मोहित फ़ौरन वाहा से बेडरूम की तरफ भागा. जब उसने बेडरूम का दरवाजा खोला तो हैरान रह गया. राज संगीता के उपर लेता हुआ ताबड़तोड़ उसकी गान्ड में लंड घुमा रहा था.

"अच्छा गान्ड मारने में मगन हैं जनाब तभी कहु इतना टाइम क्यों लग रहा है."

मोहित फ़ौरन अंदर आया और राज के कंधे पर हाथ रखा.

राज फ़ौरन रुक गया "क..कौन है?"

संगीता ने भी मूड कर देखा, "क्यों डिस्टर्ब कर रहे हो"

मोहित ने राज के कान में कहा, "परवीन आ गया है...चल उठ जल्दी"

ये सुनते ही राज ने खुद को तूफान मैल बना दिया और संगीता की गान्ड में ज़ोर ज़ोर से लंड घीसने लगा.

"बस थोड़ा सा टाइम और आआहह" राज ने कहा.

"अबे मरवाएगा क्या...चल फिर कभी पूरा कर लेना बाकी का काम" मोहित ने कहा.

"तुमने पूरा नही किया क्या अपना काम इसे भी पूरा कर लेने दो आआहह कीप डूयिंग इट आअहह" संगीता ने कहा.

"तेरा भाई आ गया है मेरी मा इसलिए बोल रहा हूँ" मोहित ने कहा.

"क..क...क्या हटो...रूको...हट जाओ आअहह" संगीता घबराई हुई बोली.

"आपने इतना साथ दिया बस थोड़ा और आआहह" राज बोला.

"मेरे भाई ने देख लिया तो मेरी जान ले लेगा रुक जाओ बाद में आ जाना...आअहह"

तभी घर की बेल बज उठी.

"आअहह मुझे जाना होगा." संगीता ने कहा.

मोहित ने राज की पीठ पर एक मुक्का मारा,"राज रुकते हो कि नही"

इत्तेफ़ाक से उसी वक्त राज ने अपने वीर्य से संगीता की गान्ड को भर दिया.

राज ने फ़ौरन कपड़े पहने. संगीता भी झट से कपड़े पहन कर तैयार हो गयी.

"तुम्हारे घर में कोई पीछे से रास्ता है क्या." मोहित ने पूछा.

"हां है...पर क्या तुम भैया से नही मिलोगे" संगीता ने पूछा.

"अभी नही फिर कभी उन्हे कही शक ना हो जाए कि हमने तुम्हारी..." मोहित ने कहा.

"ठीक है ठीक है जल्दी आओ मेरे साथ" संगीता ने कहा.

संगीता ने मोहित और राज को पीछले गेट से निकाल दिया. और ब्भाग कर वापिस आ कर दरवाजा खोला.

"क्या कर रही थी दरवाजा खोलने में इतनी देर क्यों लगा दी" परवीन ने पूछा.

"भैया मैं बाथरूम में थी सॉरी"

"ह्म्म पसीने क्यों आ रहे हैं तुम्हे जाओ पानी ले कर आओ"

"जी भैया अभी लाई"

"बॉल बॉल बच गयी..." संगीता ने किचन की ओर जाते हुए सोचा.

..............................

.................................

"फोटो लाया कि नही या फिर मस्ती में सब भूल गया" मोहित ने पूछा.

"लाया हूँ गुरु लाया हूँ ये देखो" राज ने जेब से फोटो निकाल कर दीखाई.

"शूकर है"

"गुरु मेरी पीठ पर इतनी ज़ोर से मारने की क्या ज़रूरत थी"

"तू रुक ही नही रहा था...और क्या करता मैं"

राज और मोहित बाते करते हुए घर वापिस आ गये. राज ने परवीन की फोटो पद्‍मिनी को थमा दी.

पद्‍मिनी ने फोटो को गौर से देखा

"यही है ना वो ?" राज ने पूछा.

"नही ये वो नही है" पद्‍मिनी ने गहरी साँस ले कर कहा.

"क्या? ऐसा कैसे हो सकता है पूजा तो कह रही थी कि यही कातिल है" राज ने कहा.

मोहित अपना सर पकड़ कर बैठ गया, "सारी मेहनत बेकार गयी"

कमरे में सन्नाटा हो गया. राज कुछ देर तक तस्वीर को निहारता रहा

फिर उसने तस्वीर वापिस अपनी जेब में रख ली.

"फेंक दो इस तस्वीर को अब क्या करोगे इसका" मोहित ने कहा.

"वापिस कर देंगे गुरु....अच्छा थोड़ी लगता है की किसी की तस्वीर चुरा कर डॅस्टबिन में फेंक दो"

पद्‍मिनी हतास और निराश हो कर बेड पर बैठ गयी और किन्ही ख़यालो में खो गयी. उसके चेहरे पर चिंता और परेशानी सॉफ झलक रही थी. "क्या होगा अब?" पद्‍मिनी ने कहा.

राज ने मोहित की तरफ देखा पर उसने भी अपना चेहरा अपने हाथो में छिपा लिया.

"आज गुरु पहली बार इतना परेशान लग रहा है" राज ने सोचा.

तभी दरवाजे पर नॉक होती है.

"कौन हो सकता है" राज ने कहा.

"दरवाजा खोलो और देख लो" मोहित ने कहा.

राज ने दरवाजा खोला. सामने पूजा खड़ी थी.

"पूजा तुम आओ...आओ" राज ने कहा.

पूजा अंदर आ गयी और पद्‍मिनी के पास बैठ गयी.

"क्या हुआ तुम सब खामोस क्यों हो" पूजा ने पूछा.

"जिसे तुम कातिल बता रही थी वो भी कातिल नही है" मोहित ने कहा.

"क्या! ऐसा नही हो सकता" पूजा ने कहा.

"ऐसा ही है पूजा" पद्‍मिनी ने कहा.

"सॉरी मैने तुम लोगो का वक्त बर्बाद किया" पूजा ने कहा.

"कोई बात नही इसी बहाने हमे आपका साथ मिल गया." मोहित ने कहा.

पूजा ने मोहित की तरफ देखा और बोली,"मैं पद्‍मिनी का साथ दे रही हूँ ना कि तुम्हारा"

"बात तो एक ही है हम सब साथ हैं" मोहित ने कहा.

"पद्‍मिनी आइ आम रियली सॉरी...मैं तो बस तुम्हारी मदद करना चाहती थी." पूजा ने पद्‍मिनी के कंधे पर हाथ रख कर कहा.

"इट्स ओके पूजा...थॅंक्स फॉर युवर लव आंड सपोर्ट" पद्‍मिनी ने कहा.

"हां हां आपका लव और सपोर्ट हमे हमेशा याद रहेगा" मोहित ने कहा.

"ये गुरु को क्या हो गया अभी तो मूह लटकाए बैठा था अभी पूजा से फ्लर्ट कर रहा है." राज ने सोचा.

"अच्छा मैं चलती हूँ...मैं तो बस हाल चाल पूछने आई थी तुम्हारा" पूजा ने कहा और उठ कर चल दी.

"रूको मैं तुम्हे घर छ्चोड़ देता हूँ" मोहित ने कहा.

"जी नही उसकी कोई ज़रूरत नही है मैं चली जाउन्गि" पूजा ने कहा और दरवाजा खोल कर बाहर निकल गयी.

मोहित पूजा के मना करने के बावजूद उसके साथ चल दिया.

राज कुण्डी लगा ले मैं अभी आता हूँ. राज कुण्डी बंद करने लगा तो पद्‍मिनी अचानक बोली,"नही खुली रहने दो उसे"

"क्यों क्या हुआ पद्‍मिनी जी कुण्डी तो हमारी सुरक्षा के लिए है" राज ने कहा.

"मैं तुम्हारे साथ इस बंद कमरे में नही रहूंगी समझे" पद्‍मिनी ने कहा.

राज ने दरवाजा बंद तो कर दिया पर कुण्डी नही लगाई.

"आपको मुझसे क्या डर है पद्‍मिनी जी" राज ने पूछा.

"मैं खूब जानती हूँ कि तुम किस फिराक में हो" पद्‍मिनी ने कहा.

"मैं तो बस आपकी मदद कर रहा हूँ" राज ने कहा.

अब पद्‍मिनी कैसे बताए कि उसने सपने में क्या देखा था. वो तो सपने को हर हाल में टालना चाहती थी. राज हैरान और परेशान हो रहा था की आख़िर पद्‍मिनी ऐसा बिहेव क्यों कर रही है उसके साथ.

...............................................................

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--32

gataank se aage.................

"aaahhh my boobs are tender dont squeeze them so hard" sangeeta ne kaha.

"ok...vaise jawaab nahi diya aapne meri baat ka....gaanD dogi ki nahi" Raj ne sangeeta ki gardan ko chumte hue kaha.

"yaha maange se kuch nahi milta mr sab lena padta hai" sangeeta ne kaha.

"bahut achi philosophy hai aapki maja aayega aapki gaanD lene mein" Raj ne kaha.

"par kya itna bada jaayega vaha maine shuna hai ki anal sex mein bada size dikkat karta hai." sangeeta ne kaha.

"sab bakvaas hai afvaaho par dhyaan nahi diya karte...meri ek freind hai nagma bade araam se le leti hai vo mera apni gaanD mein...vaise bhi tumne pahle kar hi rakha hai"

"mere us boy friend ka itna bada nahi tha...tha to theek thaak par aisa nahi tha." sangeeta ne kaha.

"koi baat nahi aap bilkkul chinta mat karo aapki gaanD mere lund ke neeche bilkul surakshit rahegi"

Raj ne sangeeta ki salwaar utaar di aur use apne neeche ghuma kar pet ke bal leta diya aur uske upar let gaya. Raj ka lund sangeeta ki gaanD ki daraar par takra raha tha.

"aaahhh i like anal" sangeeta ne kaha.

"achcha phir bhi abhi tak ek baar hi gaanD di hai" Raj ne pucha.

"koi try karega tabhi na hoga aise kaise mumkin hai" sangeeta ne kaha.

Raj ne sangeeta ki gaanD faila kar uske hole par thuk laga diya aur kuch thuk apne lund par bhi ragad liya.

"ok main try karne ja raha hun rokna mat mujhe. Agar aapko anal pasand hai to ye pura lund aapko lena padega." Raj ne kaha.

"i will try my best....aaahhh"

Raj ne lund ke agle hisse ko sangeeta ki gaanD ke ched par tikaaya aur khud ko aage ki aur pus kiya.

"ooooohhhhhh keep it slow." sangeeta ne kaha.

"ya ya ofcourse...." Raj ne kaha.

Abhi lund baahar hi tha. Halke halke dhakko se kaam nahi ban raha tha.

"mujhe thoda jor to lagaana hi padega...ye to ghuss hi nahi raha." Raj ne kaha.

"are you sure ki tumhaari friend le leti hai ise araam se" sangeeta ne kaha.

Raj ne jor ka dhakka maara aur bola,"us se kya farak padta hai aapki gaanD mein to ise har haal mein ghussna hai"

"aaayyyiiii mar gayi....aaaahhhh"

Raj ka aadha lund sangeeta ki gaanD mein utar jaata hai.

"ye kya kiya jaan nikaal di meri"

"gaanD mein lund ghussta nahi ghussaana padta hai...aapki hi philosophy try kar raha tha."

"its feeling good...bas ye dard kam ho jaaye" sangeeta ne kaha.

Raj ne sangeeta ki gaanD mein aadha hi lund ander baahar karna shuru kar diya.

"aaahhhh maja aa raha hai...keep doing it" sangeeta ne kaha.

Har ek dhakke ke saath Raj ka lund sangeeta ki gaanD mein aur gahra utarta chala gaya.

"aaahhh sexy gaanD hai aapki" Raj ne kaha.

Raj ke aand ab har dhakke ke saath sangeeta ki gaanD se se takra rahe the.

"oh my god i am feeling your balls kya pura ander hai ab" sangeeta hairaani mein boli.

"bilkul aapki gaanD ne pura nigal liya mere lund ko aaahhhh"

idhar mohit drawing room mein hi baitha tha.

"kitna vakt laga raha hai ye Raj...kahi kuch gadbad na ho jaaye." mohit badbadaaya.

Achchaanak mohit ko ghar ke baahar car ke rookne ki awaaj shunaayi di. Mohit ne khidki se jhaank kar dekha. "oh no ye to parveen hi lag raha hai"

mohit fauran vaha se bedroom ki taraf bhaaga. Jab usne bedroom ka darvaaja khola to hairaan rah gaya. Raj sangeeta ke upar leta hua taabadtod uski gaanD mein lund ghuma raha tha.

"achcha gaanD maarne mein magan hain janaab tabhi kahu itna time kyon lag raha hai."

mohit fauran ander aaya aur Raj ke kandhe par haath rakha.

Raj fauran rook gaya "k..kaun hai?"

sangeeta ne bhi mud kar dekha, "kyon disturb kar rahe ho"

mohit ne Raj ke kaan mein kaha, "parveen aa gaya hai...chal uth jaldi"

ye shunte hi Raj ne khud ko toofaan mail bana diya aur sangeeta ki gaanD mein jor jor se lund gheesne laga.

"bas thoda sa time aur aaaahhhh" Raj ne kaha.

"abe marvaayega kya...chal phir kabhi pura kar lena baaki ka kaam" mohit ne kaha.

"tumne pura nahi kiya kya apna kaam ise bhi pura kar lene do aaaahhhh keep doing it aaahhh" sangeeta ne kaha.

"tera bhai aa gaya hai meri ma isliye bol raha hun" mohit ne kaha.

"k..k...kya hato...ruko...hat jaao aaahhhh" sangeeta ghabraayi huyi boli.

"aapne itna saath diya bas thoda aur aaaahhhhh" Raj bola.

"mere bhai ne dekh liya to meri jaan le lega ruk jaao baad mein aa jaana...aaahhh"

tabhi ghar ki bell baj uthi.

"aaahhh mujhe jaana hoga." sangeeta ne kaha.

Mohit ne Raj ki peeth par ek mukka maara,"Raj rukte ho ki nahi"

ittefaak se usi vakt Raj ne apne virya se sangeeta ki gaanD ko bhar diya.

Raj ne fauran kapde pahne. Sangeeta bhi jhat se kapde pahan kar taiyaar ho gayi.

"tumhaare ghar mein koi peeche se raasta hai kya." mohit ne pucha.

"haan hai...par kya tum bhaiya se nahi miloge" sangeeta ne pucha.

"abhi nahi phir kabhi unhe kahi shak na ho jaaye ki hamne tumhaari..." mohit ne kaha.

"theek hai theek hai jaldi aao mere saath" sangeeta ne kaha.

Sangeeta ne mohit aur Raj ko peechle gate se nikaal diya. Aur bbhaag kar vaapis aa kar darvaaja khola.

"kya kar rahi thi darvaaja kholne mein itni der kyon laga di" parveen ne pucha.

"bhaiya main bathroom mein thi sorry"

"hmm pasine kyon aa rahe hain tumhe jaao paani le kar aao"

"ji bhaiya abhi laayi"

"baal baal bach gayi..." sangeeta ne kitchen ki aur jaate hue socha.

...............................................................

"photo laaya ki nahi ya phir masti mein sab bhool gaya" mohit ne pucha.

"laaya hun guru laaya hun ye dekho" Raj ne jeb se photo nikaal kar deekhaayi.

"shukar hai"

"guru meri peeth par itni jor se maarne ki kya jaroorat thi"

"tu ruk hi nahi raha tha...aur kya karta main"

Raj aur mohit baate karte hue ghar vaapis aa gaye. Raj ne parveen ki photo padmini ko thama di.

Padmini ne photo ko gaur se dekha

"yahi hai na vo ?" Raj ne pucha.

"nahi ye vo nahi hai" padmini ne gahri saans le kar kaha.

"kya? Aisa kaise ho sakta hai puja to kah rahi thi ki yahi kaatil hai" Raj ne kaha.

Mohit apna sar pakad kar baith gaya, "saari mehnat bekaar gayi"

kamre mein sannaata ho gaya. Raj kuch der tak tasveer ko nihaarta raha

phir usne tasveer vaapis apni jeb mein rakh li.

"fenk do is tasveer ko ab kya karoge iska" mohit ne kaha.

"vaapis kar denge guru....achcha thodi lagta hai ki kisi ki tasveer chura kar dastbin mein fenk do"

padmini hataas aur niraas ho kar bed par baith gayi aur kinhi khayaalo mein kho gayi. Uske chehre par chinta aur pareshaani saaf jhalak rahi thi. "kya hoga ab?" padmini ne kaha.

Raj ne mohit ki taraf dekha par usne bhi apna chehra apne haatho mein chipa liya.

"aaj guru pahli baar itna pareshaan lag raha hai" Raj ne socha.

Tabhi darvaaje par knock hoti hai.

"kaun ho sakta hai" Raj ne kaha.

"darvaaja kholo aur dekh lo" mohit ne kaha.

Raj ne darvaaja khola. Saamne puja khadi thi.

"puja tum aao...aao" Raj ne kaha.

Puja ander aa gayi aur padmini ke paas baith gayi.

"kya hua tum sab khaamos kyon ho" puja ne pucha.

"jise tum kaatil bata rahi thi vo bhi kaatil nahi hai" mohit ne kaha.

"kya! Aisa nahi ho sakta" puja ne kaha.

"aisa hi hai puja" padmini ne kaha.

"sorry maine tum logo ka vakt barbaad kiya" puja ne kaha.

"koi baat nahi isi bahaane hame aapka saath mil gaya." mohit ne kaha.

Puja ne mohit ki taraf dekha aur boli,"main padmini ka saath de rahi hun na ki tumhaara"

"baat to ek hi hai hum sab saath hain" mohit ne kaha.

"padmini i am really sorry...main to bas tumhaari madad karna chaahti thi." puja ne padmini ke kandhe par haath rakh kar kaha.

"its ok puja...thanks for your love and support" padmini ne kaha.

"haan haan aapka love aur support hame hamesa yaad rahega" mohit ne kaha.

"ye guru ko kya ho gaya abhi to muh latkaaye baitha tha abhi puja se flirt kar raha hai." Raj ne socha.

"achcha main chalti hun...main to bas haal chaal puchne aayi thi tumhaara" puja ne kaha aur uth kar chal di.

"ruko main tumhe ghar chhod deta hun" mohit ne kaha.

"ji nahi uski koi jaroorat nahi hai main chali jaaungi" puja ne kaha aur darvaaja khol kar baahar nikal gayi.

Mohit puja ke mana karne ke baavjood uske saath chal diya.

Raj kundi laga le main abhi aata hun. Raj kundi band karne laga to padmini achchaanak boli,"nahi khuli rahne do use"

"kyon kya hua padmini ji kundi to hamaari suraksha ke liye hai" Raj ne kaha.

"main tumhaare saath is band kamre mein nahi rahungi samjhe" padmini ne kaha.

Raj ne darvaaja band to kar diya par kundi nahi lagaayi.

"aapko mujhse kya dar hai padmini ji" Raj ne pucha.

"main khub jaanti hun ki tum kis phiraak mein ho" padmini ne kaha.

"main to bas aapki madad kar raha hun" Raj ne kaha.

Ab padmini kaise bataaye ki usne sapne mein kya dekha tha. Vo to sapne ko har haal mein taalna chaahti thi. Raj hairaan aur pareshaan ho raha tha ki aakhir padmini aisa behave kyon kar rahi hai uske saath.

...............................................................

Kramashah..............................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 04:09

raj sharma stories

बात एक रात की--33

गतान्क से आगे.................

"मैने कहा ना मैं चली जाउन्गि मेरे पीछे मत पाडो" पूजा ने कहा.

"तुमसे ज़रूरी बात करनी थी" मोहित ने कहा.

"मैं जानती हूँ तुम्हारी ज़रूरी बात, मेरा पीछा छ्चोड़ दो मुझे तुम्हारे अंदर कोई इंटेरेस्ट नही है" पूजा ने कहा.

"तुम कैसे तैयार हो गयी ड्प के लिए हमसे तो बात भी करने को तैयार नही हो" मोहित ने कहा.

"ड्प मतलब...मुझे कुछ समझ नही आया." पूजा ने कहा.

"ड्प मतलब डबल पेनेट्रेशन एक लंड चूत में और एक गान्ड में आया समझ अब. मैं तो हैरान हूँ कि तुमने ये सब किया."

पूजा के पाँव के नीचे से जैसे ज़मीन निकल गयी. वो हैरान थी कि आख़िर मोहित को ये सब कैसे पता चल गया.

"तुम्हे किसने बताया ये सब?"

"उस से क्या फरक पड़ता है ये सच है कि नही ये बताओ" मोहित ने कहा.

"मैं तुम्हे क्यों बताउ कौन होते हो तुम ये सब पूछने वाले"

"मैं तुम्हारा आशिक हूँ और मैं जान-ना चाहता हूँ कि तुमने ये सब क्यों किया." मोहित ने कहा.

"आइ वांटेड टू डिक्स अट दा सेम टाइम. आइ आम स्लट आंड वन ईज़ नोट एनफ फॉर मी. ईज़ दट फाइन वित यू...नाउ गेट दा हेल आउट ऑफ हियर"

"ये सच नही है...तुम्हारी कोई मजबूरी रही होगी" मोहित ने कहा.

"उस से तुम्हे क्या लेना देना मुझे परेशान मत करो...लीव मी अलोन" पूजा ने कहा.

"देखो पूजा मेरा यकीन करो मैं सच में तुम्हे चाहने लगा हूँ और तुम्हारा भला चाहता हूँ. मुझे सारी बात बताओ मैं तुम्हारी मदद करूँगा"

"मुझे किसी की मदद की ज़रूरत नही है...अब मैं उस मुसीबत से निकल चुकी हूँ"

"क्या तुम्हे ब्लॅकमेल किया गया था?"

पूजा ने गहरी साँस ली और बोली, "हां...लेकिन अब मेरी बात ध्यान से सुनो...तुम बहुत अच्छा फ्लर्ट कर लेते हो...मुझे ये फ्लर्ट बिल्कुल पसंद नही"

"बट दिस ईज़ नोट फ्लर्ट.... ये मेरा प्यार है" मोहित ने कहा.

"अच्छा कितनी लड़कियों को बोल चुके हो ये लाइन ये भी बता दो"

"तुम तीसरी हो"

"शूकर है तुमने सच तो बोला." पूजा ने कहा.

"पर उन दोनो के लिए मैं इतना पागल नही था जितना तुम्हारे लिए हूँ"

मेरा घर आ गया...अब तुम जाओ.

"मूवी देखने चलोगि मेरे साथ" मोहित ने पूछा.

"ऑफ कोर्स नोट" पूजा ने कहा और अपने घर की तरफ चल दी.

मोहित खड़ा खड़ा उसे जाते हुए देखता रहा. "असली मज़ा तो ऐसी लड़की को ठोकने का है बाकी सब तो बकवास है" मोहित ने सोचा.

जैसे ही पूजा घर में घुसी नगमा ने पूछा, "कहा रह गयी थी तू पूजा"

"दीदी मैं वो पद्‍मिनी से मिलने गयी थी" पूजा ने कहा.

"पद्‍मिनी को तुम कैसे जानती हो?"

"बस जानती हूँ दीदी"

"क्या राज और मोहित भी थे वाहा"

"हां वो भी थे"

"देखो उन दोनो से बचके रहना उनकी बातो में मत आना."

"दीदी जो बाते मुझे सीखा रही हो अगर खुद भी सीख लो तो ज़्यादा अच्छा है मैं सब जानती हूँ कि आप क्या करती हैं"

"पूजा ये क्या कह रही हो?"

"राज तो था ही तुम मोहित के साथ भी ची"

"ये तुम्हे किसने बताया?"

"दीदी आप बस संभाल जाओ दुनिया ठीक नही है"

"मैं जानती हू पूजा पर तू मुझे ग़लत मत समझ"

"आप क्यों करती हैं फिर ऐसा?"

"पिता जी अभी तक नही आए" नगमा ने कहा.

"उनका फोन आया था उनकी ट्रेन रद्द हो गयी अब वो अगले हफ्ते ही आएँगे" पूजा ने कहा.

"मुझे बता तो देती मैं यू ही परेशान हो रही हूँ"

"आप बात टाल रही हो दीदी"

"ठीक है तू खाना खा ले बाद में बात करते हैं" नगमा ने कहा.

एक और रात घिर आई थी और सहर में सन्नाटा छाने लगा था. हर कोई यही सोच रहा था कि क्या आज की रात भी कोई हादसा होगा. सब यही दुवा कर रहे थे की किल्लर जल्दी पकड़ा जाए और सहर में शांति आए.

नगमा और पूजा बिस्तर लगा कर लेट चुके हैं.

"दीदी पिछली दो रात तुम कहा थी" पूजा ने पूछा.

"देख पूजा तू मेरे मामले में ज़्यादा टाँग मत अड़ा समझी तू कॉलेज जाती है क्या तू मस्ती नही करती"

तभी पूजा की आँखो के सामने वो सभी सीन घूम गये जो उसने विक्की के साथ बिताए थे. विक्की से मिलने के लिए उसने काई बार कॉलेज भी बंक किया था.

"क्या हुआ चुप क्यों हो गयी" नगमा ने पूछा.

पूजा की आँखो में आँसू उतर आए. वो प्यार में खाए धोके को लेकर भावुक हो गयी.

नगमा पूजा की आँखो में आँसू देख कर फ़ौरन अपने बिस्तर से उठ कर पूजा के पास आ गयी.

"अरे क्या हुआ तू तो बुरा मान गयी मैं तो यू ही कह रही थी. क्या मुझे नही पता कि तू दोनो साल फर्स्ट आई थी कॉलेज में"

"हां पर आपकी बात सच भी थी...मैं एक लड़के के झुटे प्यार में पड़ गयी थी."

"तो क्या हुआ झूठा प्यार ही तो था कुछ ऐसा वैसा तो नही हुआ ना"

पूजा ने नगमा की आँखो में देखा. नगमा समझ गयी.

"चल कोई बात नही?"

"पर आप तो कमाल कर रही हैं दीदी ऐसा कोई करता है क्या जैसा आप कर रही हैं"

"तू मेरी चिंता मत कर आगे से ध्यान रखना कही फिर कोई मजनू बन कर तुम्हारी ले ले हे हे"

"मैं दुबारा प्यार के चक्कर में नही पड़ूँगी...पर आप ये बताओ क्या मोहित ने भी आपके साथ"

"हां एक बार...बहुत मोटा है उसका."

"ची आप भी ना कैसी बाते करती हैं."

"अब जब मुद्दा छिड़ ही गया है तो सॉफ-सॉफ बात करनी चाहिए...तू अपनी कहानी सुना मैं अपनी सुनाती हूँ" नगमा ने कहा.

"नही मेरी कोई लंबी चौड़ी कहानी नही है...और ना ही मैं सुनाना चाहती हूँ"

"मुझे पता था कि कोई ना कोई तेरी ज़रूर ले रहा है बड़ी साज धज के जाती थी तू कॉलेज हा"

"दीदी ऐसी बाते मत करो मुझे वो दिन याद मत दिलाओ."

"अच्छा मेरी कहानी सुनेगी."

"बिल्कुल भी नही जाओ सो जाओ."

पर नगमा कहा मान-ने वाली थी उसने कहानी सुनानी शुरू कर दी.

(तुझे याद होगा मैं 3 साल पहले बापू के साथ देल्ही गयी थी शादी में. वाहा शादी में एक अंकल मेरे पीछे पड़ गया. हर वक्त मुझे घूरता रहता था. काई बार उसने मुझसे बेवजह बात भी करने की कोशिस की. पर मैं बिना कोई जवाब दिए निकल लेती थी. पर वो तो जैसे मेरे पीछे ही पड़ा था. जहा भी जाओ वही आ जाता था. मैं तंग आ कर शादी के माहॉल को छ्चोड़ कर जिनके यहा हम गये थे उनके घर की छत पर आ गयी. बापू अपने दोस्तो में व्यस्त थे. पर उस अंकल ने वाहा भी मेरा पीछा नही छ्चोड़ा. मेरे पीछे पीछे वही आ गया. शाम का वक्त था छत पर कोई नही था. मैने सोचा की मैं तो बुरी तरह फँस गयी. मैं मूड कर वापिस जाने लगी.

अंकल ने मुझे पीछे से आवाज़ दी, "बेटा आप मुझसे डर क्यों रहे हो."

"एक तो मुझे बेटा कहते हो और उपर से मुझ पर ग़लत नज़र रखते हो शरम नही आती आपको"

अंकल मेरे पास आया और बोला,"बेटा ऐसी बात नही है...मैं तो तुझे तुझे अपने बेटे की बहू बनाना चाहता हूँ. अब शादी के लिए बहू को तो अच्छे से देखना ही पड़ता है ना."

मुझे बात कुछ अटपटी सी तो लगी पर फिर भी मैने ना जाने क्यों मान ली.

"मुझे अभी शादी नही करनी अंकल"

"कोई बात नही बेटा अभी सगाई कर लो शादी बाद में कर लेना. मेरा बेटा बिल्कुल मेरे जैसा ही है" अंकल ने कहा.

"वो सब ठीक है पर मेरा कोई इरादा नही अभी"

"अभी तक कुँवारी हो क्या."

"क्यों आपको क्या लेना देना"

"तभी बोल रही हो जिसे गरम बिस्तर मिल जाता है वो शादी से मना नही करता"

"गरम बिस्तर?"

"आदमी का लंड देखा है तूने कभी"

मैं तो वाहा से भाग खड़ी हुई और वापिस शादी की भीड़ में शामिल हो गयी. पर अंकल फिर मेरे पीछे पीछे. थक कर मैने पूछ ही लिया "क्या चाहिए आपको?"

"तुम्हारी चूत चाहिए.... दोगि क्या?" अंकल ने जवाब दिया.

मुझे समझ नही आया की क्या जवाब दू अंकल को. मैं चुप ही रही.

अंकल ने मेरा हाथ पकड़ा और बोला, "चल मेरे साथ शर्मा मत तुझे बहुत मज़ा आएगा."

मैने पूछा, "आप तो कह रहे थे कि आप मुझे अपने बेटे के लिए देख रहे है अब ये सब क्या है"

"मैं मज़ाक कर रहा था चल आजा शर्मा मत"

मुझ पर ना जाने क्या जादू किया अंकल ने मैं उनके साथ चल दी.

"छत ही ठीक रहेगी क्यों क्या कहती हो" अंकल ने कहा.

मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या कहु. अंकल वापिस मुझे उसी छत पर ले आया.

अंकल ने छत पर आते ही अपना लंड बाहर निकाल लिया और मेरे हाथ में रख दिया. पहली बार मेरे हाथ में लंड था. मैं हैरानी मे उसे हर तरफ छू कर देख रही थी.

अंकल ने मेरा नाडा खोल दिया और बोला, "चल जल्दी से काम ख़तम करते हैं कही कोई आ जाए."

मुझे क्या पता था कि काम क्या है और कैसे होगा मैं तो अपने हाथ में लंड पा कर ही खुस थी. अंकल ने मुझे घुमा कर अपने आगे झुका दिया और बोला, "सच बता कुँवारी है क्या तू."

"हां" मैने कहा.

"तब तो बहुत मज़ा आएगा"

अंकल ने मेरी चूत पर थूक लगाया और लंड घुस्सा दिया. लंड राज के जितना बड़ा तो नही था फिर भी बहुत दर्द हुआ. पहली बार जो ले रही थी.

मेरे मूह से चीन्ख ना निकले इसलिए उसने मेरे मूह पर हाथ रख लिया था और पूरे ज़ोर से मेरी चूत में लंड डाल दिया था. दर्द तो बहुत हुआ पर मैने अंकल को रोका नही. थोड़ी ही देर में मज़ा भी आने लगा. अंकल मेरी चुचियों को पकड़ कर मेरी चूत में बार बार लंड के धक्के मार रहा था और मेरी सिसकिया निकल रही थी. कोई 10 मिनट तक वो मेरी चूत में लंड घुमाता रहा फिर अचानक रुक गया. मुझे मेरी चूत में गरम गरम महसूस हुआ. उसने अपना सारा पानी मेरी चूत में डाल दिया था.

क्रमशः........................

......

BAAT EK RAAT KI--33

gataank se aage.................

"maine kaha na main chali jaaungi mere peeche mat pado" puja ne kaha.

"tumse jaroori baat karni thi" mohit ne kaha.

"main jaanti hun tumhaari jaroori baat, mera peecha chhod do mujhe tumhaare ander koi interest nahi hai" puja ne kaha.

"tum kaise taiyaar ho gayi DP Ke liye hamse to baat bhi karne ko taiyaar nahi ho" mohit ne kaha.

"DP matlab...mujhe kuch samajh nahi aaya." puja ne kaha.

"DP matlab double penetration ek lund chut mein aur ek gaanD mein aaya samajh ab. Main to hairaan hun ki tumne ye sab kiya."

puja ke paanv ke neeche se jaise jameen nikal gayi. Vo hairaan thi ki aakhir mohit ko ye sab kaise pata chal gaya.

"tumhe kisne bataaya ye sab?"

"us se kya farak padta hai ye sach hai ki nahi ye bataao" mohit ne kaha.

"main tumhe kyon bataaun kaun hote ho tum ye sab puchne waale"

"main tumhaara aashik hun aur main jaan-na chaahti hun ki tumne ye sab kyon kiya." mohit ne kaha.

"i wanted two dicks at the same time. i am slut and one is not enough for me. Is that fine with you...now get the hell out of here"

"ye sach nahi hai...tumhaari koi majboori rahi hogi" mohit ne kaha.

"us se tumhe kya lena dena mujhe pareshaan mat karo...leave me alone" puja ne kaha.

"dekho puja mera yakin karo main sach mein tumhe chaahne laga hun aur tumhaara bhala chaahta hun. Mujhe saari baat bataao main tumhaari madad karunga"

"mujhe kisi ki madad ki jaroorat nahi hai...ab main us musibat se nikal chuki hun"

"kya tumhe blackmail kiya gaya tha?"

puja ne gahri saans li aur boli, "haan...lekin ab meri baat dhyaan se shuno...tum bahut achcha flirt kar lete ho...mujhe ye flirt bilkul pasand nahi"

"but this is not flirt.... ye mera pyar hai" mohit ne kaha.

"achcha kitni ladkiyon ko bol chuke ho ye line ye bhi bata do"

"tum teesri ho"

"shukar hai tumne sach to bola." puja ne kaha.

"par un dono ke liye main itna paagal nahi tha jitna tumhaare liye hun"

mera ghar aa gaya...ab tum jaao.

"movie dekhne chalogi mere saath" mohit ne pucha.

"of course not" puja ne kaha aur apne ghar ki taraf chal di.

Mohit khada khada use jaate hue dekhta raha. "asli maja to aisi ladki ko thokne ka hai baaki sab to bakwaas hai" mohit ne socha.

Jaise hi puja ghar mein ghussi nagma ne pucha, "kaha rah gayi thi tu puja"

"didi main vo padmini se milne gayi thi" puja ne kaha.

"padmini ko tum kaise jaanti ho?"

"bas jaanti hun didi"

"kya Raj aur mohit bhi the vaha"

"haan vo bhi the"

"dekho un dono se bachke rahna unki baato mein mat aana."

"didi jo baate mujhe seekha rahi ho agar khud bhi seekh lo to jyada achcha hai main sab jaanti hun ki aap kya karti hain"

"puja ye kya kah rahi ho?"

"Raj to tha hi tum mohit ke saath bhi chi"

"ye tumhe kisne bataaya?"

"didi aap bas sambhal jaao duniya theek nahi hai"

"main jaanti hu puja par tu mujhe galat mat samajh"

"aap kyon karti hain phir aisa?"

"pita ji abhi tak nahi aaye" nagma ne kaha.

"unka phone aaya tha unki train radh ho gayi ab vo agle hafte hi aayenge" puja ne kaha.

"mujhe bata to deti main yu hi pareshaan ho rahi hun"

"aap baat taal rahi ho didi"

"theek hai tu khana kha le baad mein baat karte hain" nagma ne kaha.

Ek aur raat ghir aayi thi aur sahar mein sannaata chaane laga tha. Har koi yahi soch raha tha ki kya aaj ki raat bhi koi haadsa hoga. Sab yahi duva kar rahe the ki killer jaldi pakda jaaye aur sahar mein shaanti aaye.

nagma aur puja bistar laga kar let chuke hain.

"didi peechli do raat tum kaha thi" puja ne pucha.

"dekh puja tu mere maamle mein jyada taang mat ada samjhi tu college jaati hai kya tu masti nahi karti"

tabhi puja ki aankho ke saamne vo sabhi scene ghum gaye jo usne vikky ke saath bitaaye the. Vikky se milne ke liye usne kayi baar college bhi bunk kiya tha.

"kya hua chup kyon ho gayi" nagma ne pucha.

Puja ki aankho mein aansu utar aaye. Vo pyar mein khaaye dhoke ko lekar bhaavuk ho gayi.

Nagma puja ki aankho mein aansu dekh kar fauran apne bistar se uth kar puja ke paas aa gayi.

"arey kya hua tu to bura maan gayi main to yu hi kah rahi thi. Kya mujhe nahi pata ki tu dono saal first aayi thi college mein"

"haan par aapki baat sach bhi thi...main ek ladke ke jhute pyar mein pad gayi thi."

"to kya hua jhuta pyar hi to tha kuch aisa vaisa to nahi hua na"

puja ne nagma ki aankho mein dekha. Nagma samajh gayi.

"chal koi baat nahi?"

"par aap to kamaal kar rahi hain didi aisa koi karta hai kya jaisa aap kar rahi hain"

"tu meri chinta mat kar aage se dhyaan rakhna kahi phir koi majnu ban kar tumhaari le le he he"

"main dubaara pyar ke chakkar mein nahi padungi...par aap ye bataao kya mohit ne bhi aapke saath"

"haan ek baar...bahut mota hai uska."

"chi aap bhi na kaisi baate karti hain."

"ab jab mudda chid hi gaya hai to saaf-saaf baat karni chaahiye...tu apni kahaani shuna main apni shunaati hun" nagma ne kaha.

"nahi meri koi lambi chodi kahaani nahi hai...aur na hi main shunana chaahti hun"

"mujhe pata tha ki koi na koi teri jaroor le raha hai badi saj dhaj ke jaati thi tu college huh"

"didi aisi baate mat karo mujhe vo din yaad mat dilaao."

"achcha meri kahaani shunegi."

"bilkul bhi nahi jaao so jaao."

par nagma kaha maan-ne waali thi usne kahaani shunaani shuru kar di.

(tujhe yaad hoga main 3 saal pahle bapu ke saath delhi gayi thi saadi mein. Vaha shaadi mein ek uncle mere peeche pad gaya. Har vakt mujhe ghurta rahta tha. Kayi baar usne mujhse bevajah baat bhi karne ki koshis ki. Par main bina koi jawaab diye nikal leti thi. Par vo to jaise mere peeche hi pada tha. Jaha bhi jaao vahi aa jaata tha. Main tang aa kar shaadi ke maahol ko chhod kar jinke yaha hum gaye the unke ghar ki chatt par aa gayi. Bapu apne dosto mein vyast the. Par us uncle ne vaha bhi mera peecha nahi chhoda. Mere peeche peeche vahi aa gaya. Shaam ka vakt tha chatt par koi nahi tha. Maine socha ki main to buri tarah fans gayi. Main mud kar vaapis jaane lagi.

Uncle ne mujhe peeche se awaaj di, "beta aap mujhse dar kyon rahe ho."

"ek to mujhe beta kahte ho aur upar se mujh par galat nazar rakhte ho sharam nahi aati aapko"

uncle mere paas aaya aur bola,"beta aisi baat nahi hai...main to tujhe tujhe apne bete ki bahu banaana chaahta hun. Ab shaadi ke liye bahu ko to achche se dekhna hi padta hai na."

mujhe baat kuch atpati si to lagi par phir bhi maine na jaane kyon maan li.

"mujhe abhi shaadi nahi karni uncle"

"koi baat nahi beta abhi sagaayi kar lo shaadi baad mein kar lena. Mera beta bilkul mere jaisa hi hai" uncle ne kaha.

"vo sab theek hai par mera koi iraada nahi abhi"

"abhi tak kunvaari ho kya."

"kyon aapko kya lena dena"

"tabhi bol rahi ho jise garam bistar mil jaata hai vo shaadi se mana nahi karta"

"garam bistar?"

"aadmi ka lund dekha hai tune kabhi"

main to vaha se bhaag khadi huyi aur vaapis shaadi ki bheed mein shaamil ho gayi. Par uncle phir mere peeche peeche. Thak kar maine puch hi liya "kya chaahiye aapko?"

"tumhaari chut chaahiye.... dogi kya?" uncle ne jawaab diya.

Mujhe samajh nahi aaya ki kya jawaab du uncle ko. Main chup hi rahi.

Uncle ne mera haath pakda aur bola, "chal mere saath sharma mat tujhe bahut maja aayega."

maine pucha, "aap to kah rahe the ki aap mujhe apne bete ke liye dekh rahe hai ab ye sab kya hai"

"main majaak kar raha tha chal aaja sharma mat"

mujh par na jaane kya jaadu kiya uncle ne main unke saath chal di.

"chatt hi theek rahegi kyon kya kahti ho" uncle ne kaha.

Mujhe to kuch samajh nahi aa raha tha ki kya kahu. Uncle vaapis mujhe usi chatt par le aaya.

Uncle ne chatt par aate hi apna lund baahar nikaal liya aur mere haath mein rakh diya. Pahli baar mere haath mein lund tha. Main hairaani me use har taraf choo kar dekh rahi thi.

Uncle ne mera naada khol diya aur bola, "chal jaldi se kaam khatam karte hain kahi koi aa jaaye."

mujhe kya pata tha ki kaam kya hai aur kaise hoga main to apne haath mein lund pa kar hi khus thi. Uncle ne mujhe ghuma kar apne aage jhuka diya aur bola, "sach bata kunvari hai kya tu."

"haan" maine kaha.

"tab to bahut maja aayega"

uncle ne meri chut par thuk lagaaya aur lund ghussa diya. Lund Raj ke jitna bada to nahi tha phir bhi bahut dard hua. Pahli baar jo le rahi thi.

Mere muh se cheenkh na nikle isliye usne mere muh par haath rakh liya tha aur pure jor se meri chut mein lund daal diya tha. Dard to bahut hua par maine uncle ko roka nahi. Thodi hi der mein maja bhi aane laga. Uncle meri chuchiyon ko pakad kar meri chut mein baar baar lund ke dhakke maar raha tha aur meri siskiya nikal rahi thi. Koi 10 minat tak vo meri chut mein lund ghummata raha phir achchaanak ruk gaya. Mujhe meri chut mein garam garam mahsus hua. Usne apna saara paani meri chut mein daal diya tha.

Kramashah..............................