खेल खिलाड़ी का compleet

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 12 Nov 2014 04:30

उसकी पीठ सहलाते,उसके बालो को चूमते उसने उसे फिर से संभलने का वक़्त दिया & फिर उसे पलट के अपने नीचे किया.1 बार फिर वो उसकी टाँगो के बीच अपने घुटनो पे बैठा था.दिव्या अधमुंदी पॅल्को से उसे देख रही थी.उसने उसकी दाई टांग को पकड़ मोड़ कर उसे भी अपने जिस्म की दूसरी तरफ दिव्या की बाई टांग के उपर किया.फिर दिव्या का उपरी बदन भी बाई करवट पे कर फ़ौरन उसके पीछे आ उसकी पीठ से आ लगा.इस सब के दौरान उसका लंड दिव्या की चूत से बाहर नही निकला था.

उसने फिर से उसे चोदना शुरू किया & 1 बार फिर दिव्या मस्ती के सफ़र पे चल पड़ी.दिव्या अपनी बाई कोहनी पे उचक गयी & प्रोफेसर ने अपना दया हाथ उसकी कमर पे डाल दिया & उसकी चूचने मसलने लगा.दोनो 1 दूसरे को चूमते हुए चुदाई कर रहे थे.इस पोज़िशन मे लंड पूरा अंदर नही जा रहा था & दिव्या को थोड़ा आराम था.उसकी चूत अभी भी प्रोफेसर के लंड की आदि नही हुई थी.प्रोफेसर ने हाथ को छातियो से हटा उसकी चूत के दाने को पकड़ लिया तो दिव्या ने भी अपना दाया हाथ पीछे ले जाते हुए उसके आंडो पे फिराना शुरू कर दिया.प्रोफेसर के धक्के उसकी इस हरकत से तेज़ हो गये & उसकी उंगली की रफ़्तार भी.1 बार फिर दिव्या की चूत ने प्रोफेसर के लंड को अपनी गिरफ़्त मे कसा & वो आहे भरने लगी.

प्रोफेसर ने फ़ौरन उसके दाने को छ्चोड़ा & उसकी कमर पकड़ उसे उल्टा कर उसके उपर चढ़ गया.फिर उसने अपने घुटने मोड & अपने साथ दिव्या की कमर उठा उसे डॉगी स्टाइल मे चोदने लगा.बिस्तर की मूडी-तूडी चादर मे सर धंसाए दिव्या अब आधी बेहोशी की हालत मे थी.प्रोफेसर की चुदाई उसे मस्ती की उन ऊँचाइयो पे ले गयी थी जिनके वजूद के बारे मे उसे पता बी नही था.बस आहे भरती वो उस से चुदती रही .प्रोफेसर उसकी चूचियों को दबाता उसके उपर लेट गया & गहरे धक्के लगाने लगा.दिव्या झाड़ चुकी थी & शांत पड़ी थी.

अब प्रोफेसर को अपने अंदर उबल रहा लावा रुकता नही नज़र आ रहा था.वो उठा & उसने दिव्या को अपने साथ फिर से बाई करवट पे किया.उसने उसकी दाई टांग उठाई & घुटनो पे होता हुआ उसकी टाँगो के बीच आ गया.ऐसा करते ही दिव्या ने उसे अपने उपर खींच लिया & अपनी बाहो & टाँगो मे उसे कस लिया.वो समझ गयी थी कि इस बार प्रोफेसर झदेगा & वो उसके साथ झड़ना चाहती थी.

"चोदो मुझे जानू..और चोदो...हाआंन्‍नणणन्..अंदर तक..ऊओवव्वव.....रुकना मत मेरी जान..!",दिव्या प्रोफेसर की पीठ से लेके गंद तक अपने नखुनो के निशान छ्चोड़ रही थी & अपनी टाँगो को उसकी जाँघ से उठाके उसकी कमर पे क्रॉस कर के कस रही थी.प्रोफेसर उसके चेहरे को चूमता,उसके कानो मे जीभ फिराता उसकी बातो & आहो से पागल हो रहा था.तभी दिव्या की चूत ने कुच्छ ज़्यादा ही ज़ोर से उसके लंड को कसा & इस बार प्रोफेसर ने अपने उपर कोई काबू नही रखा.उसके लंड से वीर्य की मोटी धार फुट पड़ी जिसे दिव्या ने सीधा पानी कोख के अंदर जाते महसूस किया.वो ज़ोर-2 से सूबक रही थी,प्रोफेसर का गाढ़ा वीर्य च्छुटे ही जा रहा था & हर फव्वारे पे उसके बदन मे मज़े की 1 और लहर दौड़ जाती,इतना मज़ा जो वो बर्दाश्त नही कर पा रही थी!प्रोफेसर की भी आहे निकल गयी थी.ऐसी कसी चूत उसने ज़िंदगी मे नही चोदि थी & उसके एहसास ने उसे भी मज़े की नयी दुनिया दिखाई थी.दोनो प्रेमी अपने प्यार का इकरार करते 1 दूसरे से लिपटे पड़े थे & दीवारो पे लगी राजा & रानी की तस्वीरे उनके प्यार को देखते हुए मुस्कुरा रही थी.

............................

"इतनी जल्दी नींद आ रही है तुम्हे?",मेघना बिस्तर मे घुसते ही बाई करवट पे लेटे अजीत से पीछे से चिपक गयी.

"हूँ..",अजीत अपने सीने पे चलते उसके दाए हाथ को सहलाने लगा.

"कल भी ऐसे ही सो गये थे.",अपनी बात पे मेघना को खुद ही शर्म आ गयी & उसने अजीत की पीठ मे मुँह च्छूपा लिया.

"थक गया था कल.",अजीत ने झूठ बोला.दिव्या के साथ की गयी मस्ती के दौरान उसने जो उसकी पीठ पे खरोंच के निशान छ्चोड़े थे,उसे उनका ख़याल आ गया था & इस वजह से वो कल रात सो गया था.निशान तो अभी भी उसकी पीठ पे मौजूद थे मगर कमरे मे अंधेरा था & मेघना को वो नज़र नही आते.

"तुमने उठाया क्यू नही कल आज की तरह?",उसने करवट बदल अपनी बीवी को बाहो मे भर लिया तो प्यासी मेघना ने फ़ौरन अपना दाया हाथ उसके कुर्ते मे घुसा दिया.

"इतनी भी मतलबी नही हू कि तुम्हारी थकान का ख़याल ना करू.",वो उसके कुर्ते से झाँक रहे सीने के बालो मे अपनी नाक घुमा रही थी कि अजीत ने उसका चेहरा उपर किया & उसके होंठ चूम लिए.मेघना ने उसके कुर्ते से हाथ निकाला & उसके पीछे बढ़के साइड-टेबल पे रखे लॅंप को जलाने लगी.

"क्या कर रही हो?!",अजीत ने किस तोड़ उसका हाथ रोका.

"लाइट जला रही थी.",दिव्या ने 1 बार फिर उसके सीने मे मुँह च्छूपा लिया,"तुम बिना लाइट के करते कहा हो?",उसकी लरजती आवाज़ मे प्यार,पति के जिस्म की चाहत & शर्म की मिठास घुली थी.

"आज ऐसे ही प्यार करूँगा तुम्हे..",अजीत ने उसे सीधा लिटाया & उसके उपर झुक उसकी गोरी गर्दन को चूमने लगा,"..पूरे चाँद की रोशनी मे देखूँगा तुम्हारे जिस्म को..!",1 पल को उसका दिल ग्लानि से भर गया,वो अपनी बीवी से झूठ बोल रहा था..उसे डर था कि मेघना कही उसकी पीठ के निशान ना देख ले & इसी वजह से वो बत्ती नही जला रहा था.उसने उस बीवी से झूठ बोला था जो उसे बेहद चाहती थी & सिर्फ़ उसे चाहती थी बल्कि.आज उसने खुद प्यार के लिए पहल की थी & जैसे उसे पसंद था वैसे ही अंदाज़ मे प्यार कर भी रही थी....इसी बात की तलाश थी ना उसे..इसीलिए वो दिव्या की बाहो मे दुबारा गया था ना..क्या होता अगर वो बेवफ़ाई करने से पहले थोड़ा सोच लेता तो..उसकी बीवी खुद को उसी के साँचे मे ढाल रही थी केवल इसलिए कि वो उसे अपना सब कुच्छ मानती थी..

तभी मेघना ने उसका सर थोड़ा नीचे अपने सीने पे किया & अजीत उन गोलाईयों मे खो अपनी जद्दोजेहद भूल गया.

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दोस्तो कैसी रही दिव्या और प्रोफ़ेसर की मस्त चुदाई बताना मत भूलना आपका दोस्त राज शर्मा

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क्रमशः........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 12 Nov 2014 04:30

KHEL KHILADI KA paart--33

kuchh palo baad jab vo hosh me ayi to usne professor ko khud ko niharte paya.usne apna baya hath uski or badhaya to professor ne use thama & utha ke bitha liya fir vo khada hua & apna underwear utar diya & fir ghutno pe khada ho gaya.divya ki nazre professor ke lund se chipak ke reh gayi.lund 9.5 inch lumba & lagbhag 1.5-2 inch mota tha.professor ke seene se jo balo ki lakir neeche ki or badhi thi vo lund ke uapr khatm ho gayi thi kyuki professor ne apni jhanto & lund ke aas-paas ke balo ko shave kar liya tha.

is vajah se lund aur lumba lag raha tha & uske neeche latke ande golf balls ki tarah lag rahe the.divya ne apni zindagi me aisa lund nahi dekha tha & khud ba khud uska hath aage badha & usne lund ko tham liya.lund bahut garm tha & uska ehsas divya ko bahut bhala laga.usne uspe mutthi kasi to paya ki uski ungliya & angutha bamushkil lund ko gher pa rahe hain.usne 1 baar dhire se hilaya to professor ki aah nikal gayi.divya ne hilane ki raftar thodi badhayi & thdoa aage ho uske supade ko halke se chum liya,professor ne maze me uske sar ko pakad liya & uske baal sehlane laga.lund precum se gila tha jise divya ne chat liya.

divya ne lund ko professor ke pet se sata diya & uski jud se leke nok tak apni jibh ki nok fira di.professor ne 1 aur aah bhari.divya ne jibh vapas neeche firayi & professor ke bina balo ke ando ko bari-2 se munh me bhar zor se chus liya.professor ne ab tez aah bhari.divya ne lund ko thama & hilate hue apne munh me bhar liya.lund ke aakar ne use madhosh kar diya tha.lund ko hilate,ando ko dabate vo lund ko chumte apni hi duniya me kho gayi thi jaha bas vo lund tha & kuchh nahi,use to lund ke malik ka bhi hosh nahi tha.kuchh der baad jab lund precum se fir gila hua jise usne khush-2 chata to use khayal aaya ki koi uska munh chodne ki koshish nahi kar raha hai.

aamtaur pe uske chusne se pagal hoke uske premi uska sar pakad uska munh chodne lagte the lekin professor aisa nahi kar raha tha.lund munh me bhare divya ne upar dekha to mushkil se apne upar kabu rakhe,apni kamar ko hilne se roke professor ka chehta use dikha.professor ne haule se lund uske munh se khincha to vo ghutno pe khadi ho gayi & professor ke bazu tham liye.use uska itna khayal tha is baat se uske dil me uske liye bahut pyar unmad aaya tha.dono agle hi pal 1 dusre ki baaho me the.

professor ne use chumte hue use bistar pe litaya & 1 baar fir uske hotho se uske pet tak ka safar tay kiya.is baar uske pet ko chumne ke baad usne uski panty ki waistband me ungliya fansayi to usne pani gand uchka di & agle hi pal uska husn apne pure shabab me professor ki aankho ke samne tha.professor ghutno pe baith ke use niharne laga & fir uski dayi tang utha li.apne honth usne uske daye panv se lagaye & uski ungliyo ko bhi vaise hi chusa jaise hatho ki ungliyo ko chusa tha.ungliya chuste hue jab usne uski ras se bhigi panty utha ke use chuma to divya ki masti fir badh gayi.

professor ne dono panvo ko bari-2 vaise hi chuma & fir uski tango ko chumta hua uske ghutno tak aa gaya.uske ghutno ko ji bhar ke chumne ke baad usne uski tange failayi & uski dayi andruni jangh ko chumta hua uski chut tak pahunch gaya.vaha pahunch usne chut ke aas-pas tab tak chuma jab tak divya bechain ho uske sar ko pakad apni chut pe dabane ki koshish karte hue apni kamar nahi hilane lagi.

"aannhhhh..!",professor ne uski tange apne kandho pe chadhai & bistar pe pet ke bal let gaya.uski jangho ke bahri hisso ko sehlate hue jaise hi usne apne hotho ko divya ki chut pe rakh us se beh rahe ras ko kutte ki tarah laplapati jibh se chaatne laga to divya ne aah bhari.professor ki jibh uski chut ke andar dakhil ho uske ras ko piye ja rahi thi & vo bechaini me aahe bhar rahi thi.thodi der baad rpofessor ne jibh chut se nikal uske dane pe rakh di & use chatne laga & thik usi waqt apni 2 ungliya chut me ghusa chut ko chodne laga.

"oonnnhhhhh..!",divya is dohre humle ko nahi jhel payi & jhad gayi.jhadte hi uski kasi chut & zyada kas gayi & professor ki ungliyo ko apne bhitar qaid kar liya.professor ko uski kasavat pe badi hairat hui & uske dil me khayal aaya ki uski ungliyo ki jagah kuchh hi der me uska lund hoga & us waqt ke maze ke ehsas se vo muskura utha.

Divya jhad rahi thi & Professor Dixit ne apni ungliyo & zuban ko uski chut se laag kar liya tha & uski tango ke beech baitha use dekh raha tha.kuchh palo baad jab divya ne aankhe kholi & professor ko uske sambhalne ka intezar karta paya to vo uski kayal ho gayi..kitna khayal tha use uska!..koi aur hota to abhi tak uske upar savar ho chuka hota!

"professor..",divya ne apni tange thodi aur failayi & apne hath apne sar ke peechhe le jake faila apni oonchi chhatiyo ko aur ubhar diya,"..mujhe chodo.",apni mehbooba ki baat bhala professor kaise taal sakta tha.usne uske ghutne mode to divya ne apne nichle honth ke baye kone ko apne danto tale daba liya.professor ne apne baye hath me lund ko thama & uski chut ki darar pe rakha & 1 dhakka diya & supade ko andar dhakela.

"aahhhhh..!",mote supade ne uski chut ko faila diya tha & divya ko halka dard mehsus hua tha.professor ruk gaya tha.divya ne use dekha & aankho se lund ko andar dalne ka ishara kiya to professor dhire-2 lund ko andar dhakelne laga.divya ne aankhe meench li.use dard ho raha tha.professor ka lund na keval behad lumba tha magar kuchh zyada hi mota tha & uski chut ko bahut zyada faiala raha tha.

"oohhhhh..!",lund jab 7 inch se aage gaya to divya dard se karah uthi.professor ruk gaya & usne lund ko aage nahi thela.divya ne use khinch ke apne upar lita liya to professor utne hi lund se uske baye kaan & gaal ko chumta use chodne laga.divya halki-2 aahe bharne lagi & kuchh der baad uske upar masti chhane lagi.usne apne pairo ke talvo ko professor ki mazbut tango pe jama diya.

"professor..",usne apne chehre ke dayi taraf pade professor ke mazbut bazu ke daule ko chuma,"..apna pura lund andar ghusao na!"

"tumhe dard nahi hoga?",professor ne apne chehre se uske chehre ko seedha kar uske honth chume & uski aankho me jhanka.

"umra bhar ke maze ke liye npal bhar ke dard ko seh lungi main!",is baat ne professor ke dil me pyar & jism me josh ki lehar dauda di & 1 hi dhakke me usne bacha hua lund bhi divya ki chut me ghusa diya.

"OOWW.!",divya chikh uthi.lund vaha pahuncha tha jaha abhi tak koi bhi lund nahi pahuncha tha-uski kokh ke munh tak.professor ruk gaya tha & uske chehre ko chum raha tha.use pata tha ki divya abhi taklif me hai & vo use sambhalne ka waqt de raha tha.thodi der baad divya ne apne chehre ke bagal me faile uske mazbut bazuo pe pane hath firate hue uske kandho ko sehlaya & fir uski pith sehlane lagi.

"ruk kyu gaye?chodo na!",divya ne uske baye kaan me apni jibh firayi to professor hne 1 baar fir uski chudai shuru kar di.pehle to vo tez dhakke laga raha tha magar lund ko bas 2 inch hi bahar nikal ke.thodi der baad jab usne pure lund ko bahar nikal ke andar dalna shuru kiya to divya pagal hi ho gayi.kokh pe padti har chot uske jism me bijli dauda deti.vo pagalo ki tarah chikh raha thi & professor ki pith ko kharonch rahi thi.kuchh hi palo me professor ko apne lund pe uski chut bashut zyada kastui hui mehsus hui & vo samajh gaya ki vo jhad rahi hai.divya uske badan se chipki hui subak rahi thi & apni kamar hila rahi thi.

uske jhadne ke baad professor uske upar se utha & apni kohniyo pe apna vazan tika ke uski choochiya chusne laga.divya uske baal sehla rahi thi & vo use bahut dhire-2 chod raha tha.divya ko apni chut puri bhari mehsus ho rahi thi & is ehsas se uska dil khushi se bhar gaya tha.professor ne uski chhatiyo ko apne hotho ke nishan se bhar diya & fir uth ke apne ghutno pe ho gaya & uski chhatiya maslate uski tange sehlate use chodne laga.kuchh hi palo me divya fir se hawa me ud rahi thi & uske gale se mastani aahe nikal rahi thi.

professor ne uski upri baahe thami & use upar khinch apne seene se laga liya.divya chaunk uthi & usne apni baahe uske gale me daal di.furti se professor ne apni tange 1-1 karke samne failayi & puth ke bal let gaya.ab uski mehbooba uske upar thi.divya ne uske seene pe hatheliya jamai & apni kamar hilane lagi.uski baho se dabi uski choochiya bade mastane andaz me chhalchhala rahi thi.professor ne apne mazbut hatho se unhe goondhna shuru kiya to divya ne apna sar masti me peechhe fenk diya & zor-2 se kamar hilane lagi.professor ne uski chhatiya chhodi to uski gand ki kasi fanko ko pakad liya & unhe maslane laga.

unhe pakad vo kabhi bahar ki taraf khinchta to kabhi unhe 1 sath aapas me daba deta.divya ke liye ye sara ehsas naya tha & vo masti me muskurati apne premi ke hatho ka lutf utha rahi thi.tabhi professor ne uski gand ko bilkul chhod diya & apne daye hath ki bas 1 ungli ko uski gand ki dara pe bahut haule se fira diya.hatho ke shadid ehsaso ke baad itna halka sa mulayam ehsas!divya ke andar jaise bijli ki koi nayi dhara phut padi & professor ko dobare apne lund pe uski chut ki shadid kasavat mehsus hui.professor ke lund ne use dusri baar jhadwa diya tha.vo hanfti hui uske seene pe gir gayi magar professor ka kaam abhi pura nahi hua tha.

uski pith sehlate,uske baalo ko chumte usne use fir se sambhalne ka waqt diya & fir use palat ke apne neeche kiya.1 baar fir vo uski tango ke beech apne ghutno pe baitha tha.divya adhmundi palko se use dekh rahi thi.usne uski dayi tang ko pakd mod kar use bhi apne jism ki dusri taraf divya ki bayi tang ke upar kiya.fir divya ka upri badan bhi bayi karwat pe kar fauran uske peechhe aa uski pith se aa laga.is sab ke dauran uska lund divya ki chut se bahar nahi nikla tha.

usne fir se use chodna shuru kiya & 1 baar fir divya masti ke safar pe chal padi.divya apni bayi kohni pe uchak gayi & professor ne apna daya hath uski kamar pe daal diya & uski chhatiya maslane laga.dono 1 dusre ko chumte hue chudai kar rahe the.is position me lund pura nadar nahi ja raha tha & divya ko thoda aaram tha.uski chut abhi bhi professor ke lund ki aadi nahi hui thi.professor ne hath ko chhatiyo se hata uski chut ke dane ko pakad liya to divya ne bhi apna daya hath peechhe le jate hue uske ando pe firana shuru kar diya.professor ke dhakke uski is harkat se tez ho gaye & uski ungli ki raftar bhi.1 baar fir divya ki chut ne professor ke lund ko apni giraft me kasa & vo aahe bharne lagi.

professor ne fauran uske dane ko chhoda & uski kamar pakad use ulta kar uske upar chadh gaya.fir usne apne ghutne mode & apne sath divya ki kamar utha use doggy style me chodne laga.bistar ki mudi-tudi chadar me sar dhansaye divya ab aadhi behoshi ki halat me thi.professor ki chudai use masti ki un oonchaiyo pe le gayi thi jinke vajud ke bare me use pata bi nahi tha.bas aahe bhari vo us se chud rahi .professor uski chhatiyo ko dabata uske upar let gaya & gehre dhakke lagane laga.divya jhad chuki thi & shant padi thi.

ab professor ko apne andar ubal raha lava rukta nahi nazar aa raha tha.vo utha & usne divya ko apne sath fir se bayi karwat pe kiya.usne uski dayi tang uthayi & ghutno pe hota hua uski tango ke beech aa gaya.aisa karte hi divya ne use apne upar khinch liya & apni baaho & tango me use kas liya.vo samjh gayi thi ki is baar professor jhadega & vo uske sath jhadna chahti thi.

"chodo mujhe janu..aur chodo...haaannnnnn..andar tak..ooow....rukna mat meri jaan..!",divya professor ki pith se leke gand tak apne nakhuno ke nishan chhod rahi thi & apni tango ko uski jangh se uthake uski kamar pe cross kar ke kas rahi thi.professor uske chehre ko chumta,uske kano me jibh firata uski baato & aaho se pagal ho raha tha.tabhi divya ki chut ne kuchh zyada hi zor se uske lund ko kasa & is baar professor ne apne upar koi kabu nahi rakha.uske lund se virya ki moti dhar phut padi jise divya ne seedha pani kokh ke andar jate mehsus kiya.vo zor-2 se subak rahi thi,professor ka gadha virya chhute hi ja raha tha & har favvare pe uske badan me maze ki 1 aur lehar daud jati,itna maza jo vo bardasht nahi kar pa rahi thi!professor ki bhi aahe nikal gayi thi.aisi kasi chut usne zindagi me nahi chodi thi & uske ehsas ne use bhi maze ki nayi duniya dikhayi thi.dono premi apne pyar ka ikrar karte 1 dusre se lipte pade the & deewaro pe lagi raja & rani ki tasvire unke pyar ko dekhte hue muskura rahi thi.

"Itni jaldi nind aa rahi hai tumhe?",Meghna bistar me ghuste hi bayi karwat pe lete Ajit se peechhe se chipak gayi.

"hun..",ajit apne seene pe chalte uske daye hath ko sehlane laga.

"kal bhi aise hi so gaye the.",apni baat pe meghna ko khud hi sharm aa gayi & usne ajit ki pith me munh chhupa liya.

"thak gaya tha kal.",ajit ne jhuth bola.Divya ke sath ki gayi masti ke dauran usne jo uski pith pe kharonch ke nishan chhode the,use unka khayal aa gaya tha & is vajah se vo kal raat so gaya tha.nishan to abhi bhi uski pith pe maujood the magar kamre me andhera tha & meghna ko vo nazar nahi aate.

"tumne uthaya kyu nahi kal aaj ki tarah?",usne karwat badal apni biwi ko baaho me bhar liya to pyasi meghna ne fauran apna daya hath uske kurte me ghusa diya.

"itni bhi matlabi nahi hu ki tumhari thakan ka khayal na karu.",vo uske kurte se jhank rahe seene ke baalo me apni naak ghuma rahi thi ki ajit ne uska chehra upar kiya & uske honth chum liye.meghna ne uske kurte se hath nikala & uske peechhe badhake side-table pe rakhe lamp ko jalane lagi.

"kya kar rahi ho?!",ajit ne kiss tod uska hath roka.

"light jala rahi thi.",divya ne 1 baar fir uske seene me munh chhupa liya,"tum bina light ke karte kaha ho?",uski larajti aavaz me pyar,pati ke jism ki chahat & sharm ki mithas ghuli thi.

"aaj aise hi pyar karunga tumhe..",ajit ne use seedha litaya & uske upar jhuk uski gori gardan ko chumne laga,"..pure chand ki roshni me dekhunga tumhare jism ko..!",1 pal ko uska dil glani se bhar gaya,vo apni biwi se jhuth bol raha tha..use darr tha ki meghna kahi uski pith ke nishan na dekh le & isi wajah se vo batti nahi jala raha tha.usne us biwi se jhuth bola tha jo use behad chahti thi & sirf use chahti th.aaj usne khud pyar ke liye pehal ki thi & jaise use pasand tha vaise hi andaz me pyar kar bhi rahi thi....isi baat ki talash thi na use..isiliye vo divya ki baaho me dubara gaya tha na..kya hota agar vo bewafai karne se pehle thoda soch leta to..uski biwi khud ko usi ke sanche me dhaal rahi thi keval isliye ki vo use apna sab kuchh manti thi..

tabhi meghna ne uska sar thoda neeche apne seene pe kiya & ajit un golaiyo me kho apni jaddojehad bhul gaya.

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kramashah........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 15:41

खेल खिलाड़ी का पार्ट--34

गतान्क से आगे............

"प्रोफेसर..",सवेरे के सूरज की रोशनी अब महाराजा सुजान सिंग के महल के उस खास कमरे को रोशन कर रही थी.प्रोफेसर पीठ के बल लेटा था & दिव्या उसके पेट पे सर रखे लेटे थी.बाहे पीछे की ओर मोड़ उसने दाया हाथ प्रोफेसर के चेहरे को सहलाने मे लगाया हुआ था & बाया उसके पेट के नीचे लंड के ठीक उपर के हिस्से को,"..तुमने प्लान किया था ना यहा लाके मुझे चोदने का?",उसने हल्के से अपना सर दाई तरफ घुमाया.

"मैने प्लान किया था तुम्हे ये कमरा दिखाने का..",प्रोफेसर अपने हाथो मे उसका मुलायम हाथ ले हौले-2 उसे चूम रहा था,"..इस कमरे की कहानी सुनाने का..क्यूकी तुम इसकी हक़दार थी.तुम मेरी चाह समझ उसे मानोगी इसकी ख्वाहिश थी मुझे लेकिन उमीद नही."

"क्यू?"

"तुम्हारे जैसी हुसनपरी मेरे जैसे इंसान पे अपनी नज़रे करम की इनायत करेगी इसका यकीन नही था मुझे.",प्रोफेसर की बात पे दिव्या मुस्कुराइ & अपना हाथ उसके हाथो से छुड़ाया & करवट ले अपने पेट के बल हो गयी & अपनी टाँगे घुटनो से मोड़ हवा मे उठा दिलकश अंदाज मे हिलाने लगी & प्रोफेसर को देखते हुए वही पे चूमने लगी जहा थोड़ी देर पहले उसका बाया हाथ था.प्रोफेसर ने हाथ अपने सर के अगल बगल फैला लिए & आहे भरने लगा.उसने नीचे देखा तो दिव्या का चेहरा उसके बालो से च्छूप गया था.दाए हाथ से उसने वो आब्नुसि चिल्म हटाई & उस मस्ती मे डूबे चेहरे का दीदार किया जो अब उसके तने लंड को अपने होंठो की शबनम से भिगो रहा था.

दिव्या का दाया हाथ प्रोफेसर की मोटे तने जैसी मज़बूत जाँघो के बालो मे घूम रहा था & बाया लंड की जड को पहली उंगली & अंगूठे के दायरे मे कसे हुए था.हाथ की बाकी उंगलिया प्रोफेसर के बड़े,बिना बालो के आंडो पे जमी हुई थी,"क्या यहा हम हमेशा नही रह सकते?",अपनी बचकानी बात पे 1 बार फिर लंड को मुँह मे लेने से पहले दिव्या खुद ही ह्नस दी.

"काश ऐसा होता,दिव्या.",प्रोफेसर ने प्यार से उसके बालो को उसके चेहरे से हटाया & फिर गाल को सहलाया,"..तुम्हारी बाहो मे तुम्हे प्यार करते हुए मरना तो जीने से कही बेहतर होगा."

"उउंम...अपनी किताबी बाते यहा मत करो..!".दिव्या ने आंडो को दबाते हुए लंड के छेद को जीभ की नोक से छेड़ प्रोफेसर को पागल कर दिया.उसने प्रोफेसर को प्यार भरी झिड़की तो दी थी मगर उसकी बात से उसके दिल मे खुशी की लहर फुट पड़ी थी,बताओ ना!कब तक हैं हम यहा?"

"बस दोपेहर तक.शाम को क्लब वियेन्ना नही जाना?",दिव्या उसके लंड को छ्चोड़ प्रोफेसर के पेट को चूमती हुई उसके सीने तक आ पहुँची थी.उसने अपने गदराए मगर सुडोल बदन को प्रोफेसर के जिस्म की लंबाई पे जमा दिया.उसके मुलायम जिस्म के एहसास ने प्रोफेसर को पागल कर दिया & उसके हाथ दिव्या की पीठ से लेके उसकी गंद तक घूमने लगा.प्रोफेसर के हाथ बेचैन हो गये थे,उन्हे समझ नही आ रहा था कि दिव्या के नशीले बदन के किस हिस्से को सहलाए & किसे दबाएँ!

"उउम्म्म्म....!",दिव्या का भी यही हाल था.वो प्रोफेसर के होंठो को चूम रही थी,उसकी जीभ से खेल रही थी लेकिन उसका मन भर ही नही रहा था..उसका दिल कर रहा था कि उम्र भर अपनी ज़ुबान को उसकी आतुर ज़ुबान से यू ही मिलाती रहे,"..जाना है पर जब तक यहा हैं तब तक मैं बस इसके..",प्रोफेसर के उपर से उतर वो अपनी दाई करवट पे हुई & अपना बाया हाथ प्रोफेसर के चेहरे पे फिरा उसकी ओर इशारा किया,"..& इसके..",उसने अपनी बाई टांग प्रोफेसर की दाई टांग के उपर चढ़ा दी & अपना बाया हाथ उसके चेहरे से नीचे ले जा उसके लंबे लंड को दबा दिया,"..बारे मे सोचना चाहती हू."

बिना 1 पल गवाएँ प्रोफेसर ने दाए हाथ से उसकी गंद की बाई फाँक को थामा & नीचे से अपना आधा लंड उसकी चूत मे घुसा दिया.

"औउईईई....!",दिव्या दर्द से कराही & अपना सर पीछे झटका.प्रोफेसर ने अगले धक्के मे लंड को पूरा उसकी चूत मे घुसा दिया & सर झुका के उसके गुलाबी निपल्स को चूस्ते हुए उसे चोदने लगा.

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ग्लोरीया अपार्टमेंट्स-4 आलीशान टवर सुंदर गेट & ऊँची दीवारो के पीछे खड़े थे.सभी टवर्स 14 मंज़िल के थे.पहले 4 टवर्स मे 2 कमरो से लेके 3 कमरो तक के फ्लॅट्स थे.पाँचवे टवर मे 6 कमरो के पेंटहाउसस बने हुए थे & इसी के सातवी मंज़िल के पेंटहाउस के बारे मे जानने अजीत वाहा आया था.

"सलाम साब.",मेन गेट पे बने कॅबिन मे 2 गार्ड्स मे से 1 ने उसकी वर्दी देख उसे सलाम किया.

"हूँ..कब से यहा काम कर रहे हो?"

"2 साल से उपर हो गया,साहब.",अजीत कॅबिन के अंदर घुस गया & वाहा रखी चीज़े देखने लगा.

"इधर यहा औरत के बॅग & चैन छीनने के केसस के बारे मे सुना है."

"हां,साहब.बाइक पे लड़के कर रहे हैं ये सब."

"किसी की शक्ल देखी है?"

"कहाँ साहब!हेल्मेट लगाए रहते हैं."

"अच्छा!अपार्टमेंट ब्लॉक के अंदर तो कोई तकलीफ़ नही होती ना?"

"नही साहब."

"क्या करें भाई!उपर से ऑर्डर आया है कि ज़रा यहा का राउंड लगाऊं.काफ़ी बड़े लोग रहते हैं ना यहा!"

"वो तो है साहब.हमारी भी हालत खराब रहती है."

"यही रिजिस्टर है जिसमे आने-जाने वालो का रेकॉर्ड रखते हो?",अजीत गार्ड की कुर्सी पे बैठ गया & रिजिस्टर उठा लिया.

"जी साहब..",दूसरा गार्ड बोला,"..बाहर से आनेवाले का नाम,पता,उसकी गाड़ी का नंबर,फोन नंबर,आने का टाइम,जाने का टाइम & जिस फ्लॅट मे आया है वाहा का नंबर लिखते हैं."अजीत रिजिस्टर के पन्ने पलट रहा था.सतपाल ने उसे बताया था कि CM मधुकर अत्रे अक्सर पेंटहाउस ब्लॉकके की सातवी मंज़िल के फ्लॅट नंबर 700 मे आया करता था.फ्लॅट के अंदर केवल वो जाया करता था & कोई नही.सतपाल & बाकी बॉडीगार्ड्स बाहर ही खड़े रहते थे.वैसे भी उस मंज़िल पे 1 ही फ्लॅट था.जब भी CM यहा आता था तो वो अपनी प्राइवेट कार मे आता था जिसपे कोई भी सरकारी निशान नही होता था,उसके साथ की पाइलट & सेक्यूरिटी कार्स थोड़ा पहले ही रुक जाती थी & अपार्टमेंट के अंदर बस उसी की कार जाती थी.अभी 7 दिन पहले भी वो यहा आया था शाम को 8 बजे के करीब.

अजीत ने पन्ने पलटते हुए उस दिन का रेकॉर्ड खोला & शाम के 8 बजे की एंट्री पे निगाह डाली-'ए.कुमार,फ्लेट नंबर.123,वसुधा अपार्टमेंट,संदेश कॉलोनी,डेवाले',फिर 1 फोन नंबर & फ्लॅट के मालिक का नाम 'आर.एस.अवस्थी'.कॅबिन की दीवार पे होर टवर मे रहने वालो के नाम & उनके इंटरकम नंबर्स की लिस्ट लगी थी.गार्ड अपने इंटरकम से फ्लॅट वालो को उनके यहा आने वाले मेहमान की खबर दे देता था.उस लिस्ट पे नज़र डाली & वाहा भी वही नाम था.अजीत को 1 बार फिर पसीने छूट गये.उसने रिजिस्टर बंद किया & वाहा से निकल आया.

अवस्थी कॅबिनेट सेक्रेटरी था यानी राज्य का सबसे ऊँचा सिविल सर्वेंट या सरकारी अफ़सर & CM का खास आदमी....आख़िर माजरा क्या था?..वो टेंटवाला,CM,अवस्थी ये सब क्या खेल खेल रहे थे?..इतने बड़े लोगो का इस मामले से जुड़ा होना..ये सब ठीक नही था..उसे डीसीपी साहब को बता देना चाहिए अब..लेकिन उस से क्या होगा..सब सावधान हो जाएँगे & वो आर्म्स डीलर भी..CM,अवस्थी जैसे लोगो को तो वो हाथ लगा ही नही सकता लेकिन वो हथ्यारो का कारोबारी तो उसकी गिरफ़्त मे आ ही सकता है..1 बार सबूतो के साथ पकड़ा गया तो इन बड़े लोगो को उस से पल्ला झाड़ते देर नही लगेगी & उसका मक़सद पूरा हो जाएगा..अभी बात खुद तक रखनी ही ठीक है..अजीत ने जीप स्टार्ट की & दफ़्तर के लिए चल पड़ा.

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8 बजते ही दिव्या प्रोफेसर के साथ क्लब वियेन्ना पहुँच गयी थी.अपने करियर मे पहली बार दिव्या को काम करने का दिल नही कर रहा था.महल मे सवेरे की चुदाई के बाद दोपहर को वाहा से निकलने के वक़्त तक दोनो नंगे 1 दूसरे की बाहो मे पड़े रहे थे.खाना भी उन्होने उसी हालत मे खाया.महल से फ्लॅट तक के कार के सफ़र मे दिव्या प्रोफेसर से सटके बैठी थी & 1 पल के लिए भी अलग नही हुई.फ्लॅट पे पहुँचते ही दोनो ने 1 बार फिर चुदाई की थी & मिनिट्स मे तैय्यार होने वाली दिव्या को आज आधा घंटा लगा था क्यूकी तैय्यार होने से ज़्यादा उसका दिल अपने महबूब की किस्सस & हाथो की हर्कतो मे लग रहा था.

"यही है डीजे छाज़े..",1 बआउन्सर ने दोनो को 1 लंबे बालो वाले शख्स के सामने ला खड़ा किया.उस शख्स ने गोटी रखी हुई थी & कानो & दाई भौं के अलावा उसका निचला होंठ भी पियरस्ड था वाहा रिंग लगा था.दिव्या ने उसे अपना & प्रोफेसर का परिचय दिया & शोभा की तस्वीर दिखाई.तस्वीर देखते ही छाज़े के चेहरे पे गम के बदल च्छा गये.

"क्या आप मेरे शो के बाद मिल सकते हैं?",उसकी आवाज़ की गंभीरता सुन प्रोफेसर & दिव्या के पास और कोई चारा नही था,"..आप होटेल के इंडियन रेस्टोरेंट मे बैठिए,मैं वही मिलता हू आपसे 1 घंटे बाद."

"ओके."

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"तुम्हारा असली नाम क्या है?",दिव्या ने पुचछा.

"चंपक भुल्लर.",छाज़े उनके साथ बैठा था.दिव्या को नाम सुन हँसी आई जिसे उसने ज़ब्त कर लिया.

"इस लड़की को कैसे जानते थे?"

"दीप्ति..मेरा पहला प्यार थी.",छाज़े अपने ड्रिंक के ग्लास को बस घुमा रहा था,पी नही रहा था.

"कहा मुलाकात हुई थी तुम्हारी?"

"2 साल पहले 1 कॉलेज फेस्ट मे मैं डीजे कॉन्सोल हॅंडल कर रहा था,वही मिली थी.उसी वक़्त मुझे क्लब नीयान मे डीजे का काम मिला था.हम हर शाम वाहा मिलते थे,मेरे शो के बाद हम साथ डिन्नर करते &.."

"और?",प्रोफेसर ने सवाल किया.

"..& वही करते जो प्यार मे पागल 2 जवान लोग करते हैं."

"1 बात बताओ..",दिव्या ने अपनी कोहनिया मेज़ पे टिकाई,"..उसके परिवार वालो को ऐतराज़ नही था तुम दोनो के रिश्ते पे?"

"वो अपनी मा के साथ यहा रहती थी & कहती थी कि मैं उस बात की परवाह ना करू,उसकी मा कभी हमारे बीच नही आएगी."

"फिर क्या हुआ?जुदा कैसे हुए तुम दोनो?",छाज़े कयि पॅलो तक खामोश बस अपने ड्रिंक को देखता रहा.

"आप पोलिसेवाले हैं तो उसके बारे मे क्यू पुच्छ रहे हैं?"

"1 केस के सिलसिले मे."

"उसका क्या लेना-देना है इस से?"

"देखो,चंपक..",दिव्या की आवाज़ मे पुलिसिया लहज़ा आ गया,"..तुम्हारी एक्स-गर्लफ्रेंड 1 ख़तरनाक लड़की है & अगर तुम ये सोच रहे हो कि हमसे झूठ बोलके उसे बचा अपना प्यार साबित करोगे & वो तुम्हारी बाहो मे दौड़ी चली आएगी तो तुमसे बड़ा बेवकूफ़ इस दुनिया मे कोई नही!",बेबाकी से कहे गये सच ने छाज़े को चौंका दिया.

"अब मुँह बंद करो,ये देवदास वाला अंदाज़ छ्चोड़ो & सब तफ़सील से बताओ.",प्रोफेसर दिव्या के अंदाज़ पे मन ही मन मुस्कुराया.

"जी..",छाज़े ने थूक गटका,"..1 साल तक सब ठीक चलता रहा.हम जब मर्ज़ी,जैसे मर्ज़ी मिलते रहते.हम बहुत खुश थे लेकिन फिर दीप्ति की मुलाकात 1 दिन क्लब मे क्लब के मॅनेजर से हुई.इसके 1 महीने के बाद से वो मुझ से कटी-2 रहने लगी.मेरी समझ मे कुच्छ नही आ रहा था कि आख़िर बात क्या है फिर 1 रात शो के बाद मैं अपना 1 बॅग क्लब मे भूल गया.उसमे कुच्छ ज़रूरी काग़ज़ात थे जिनकी मुझे अगली सुबह ज़रूरत थी.मैं सवेरे-2 क्लब पहुँचा,अपना बॅग उठाया & निकल ही रहा था कि कुच्छ आवाज़ो से चौंक पड़ा जोकि मॅनेजर दिनेश सिंग के कॅबिन से आ रही थी.मैं सोच मे पड़ गया क्यूकी 12 बजे से पहले कभी वो क्लब आता नही था.."

"..नज़दीक गया तो मुझे एहसास हुआ कि वो किसी लड़की के साथ है.मैने सोचा की चलो देखते हैं कि किसके साथ अयाशि कर रहा है,दोस्तो के साथ हँसी-मज़ाक का अच्छा मसाला मिलेगा लेकिन जब मैने दरवाज़े को हल्के से खोल अंदर झाँका तो मेरा खून सुख गया,मेरी जान..मेरी दीप्ति बिल्कुल नंगी मॅनेजर के उपर उसके लंड को अपने अंदर लिए हँसती हुई उच्छल रही थी.",छाज़े की आँखो मे पानी आ गया मगर उस पानी के पीछे गुस्सा सॉफ दिख रहा था.

"फिर?"

"फिर क्या!मैने वो क्लब छ्चोड़ दिया & तब से यहा हू,मैने दीप्ति से भी मिलने की कोई कोशिश नही की.उसके बाद वो भी यहा से गायब हो गयी थी."

"तुम ज़रा दीप्ति का पता,नंबर,कॉलेज का नाम & जो भी कुच्छ जानते हो इस काग़ज़ पे लिख दो.",दिव्या ने काग़ज़ & कलम उसकी ओर बढ़ाया & प्रोफेसर की ओर देखा.दोनो जानते थे कि अब अगली मुलाकात दिनेश सिंग से करनी है.

1 बार फिर दिव्या & प्रोफेसर दीक्षित क्लब नीयान मे थे.इस वक़्त क्लब बिल्कुल भरा हुआ था & वाहा के स्टाफ को सांस लेने की भी फ़ुर्सत नही थी.स्टाफ के 1 मेंबर ने बाते की कुच्छ खास मेहमआनो की वजह से दिनेश सिंग बहुत मसरूफ़ है तो अगर वो बुरा ना माने तो रात 12 बजे उस से मिल ले या फिर अगले दिन का इंतेज़ार करें.दोनो ने तय किया कि दोनो 12 बजे का इंतेज़ार करेंगे.

समय काटने के लिए दोनो पहले 1 रेस्टोरेंट मे गये & खाना खाया & फिर प्रोफेसर की कार मे वही आस-पास चक्कर लगाने लगे.प्रोफेसर ने 1 सुनसान गली मे कार रोकी तो दिव्या खुद अपनी सीट से उठ उसकी गोद मे आ गयी.उसकी दाई बाँह प्रोफेसर की गर्दन मे झूल गयी & बाया हाथ उसकी पॅंट पे चलने लगा.प्रोफेसर ने भी उसे आगोश मे भरते हुए बाया हाथ उसकी गंद को दबाने मे लगाया & दाए से उसकी मस्त चूचियों को उसके टॉप के उपर से ही दबाने लगा.

चंद पॅलो मे ही दिव्या उसके हाथो की कारस्तानियो की वजह से झाड़ गयी.झाड़ते ही वो प्रोफेसर की गोद मे उसे अपने सीने से लगाके ज़ोर-2 से साँसे लेने लगी.किसी मर्द के लिए ऐसी दीवानगी.ऐसा जुनून उसने पहली बार महसूस किया था.ये सॉफ था कि दोनो 1 दूसरे के जिस्मो के पीछे पागल हैं लेकिन उनके इस रिश्ते मे केवल वासना नही थी.दोनो की चुदाई मे जिस्मो की 1 अंतहीन प्यास थी लेकिन उस प्यास के नशे मे ऐसा नही होता था कि दोनो को 1 दूसरे की तकलीफ़ का ख़याल ना हो.दोनो ने इस बात को अभी पूरी तरह से महसूस नही किया था मगर दोनो के दिलो के किसी कोने ने ये फिर जिसे अँग्रेज़ी मे सबकॉन्षियस कहते हैं,उसने इस बात को अच्छी तरह समझ लिया था.इस चलते जो लगाव पैदा हुआ था वही उनके रिश्ते को मज़बूती दे रहा था.

"ऊन्णन्न्....क्या कर रहे हो?..जींस उतार दो ना!",प्रोफेसर ने दिव्या की सीट को पूरा नीचे कर दिया था दिव्या को उसके उपर लिटा दिया था.दिव्या का टॉप उसके सीने के उपर चढ़ा हुआ था & ब्रा उसकी मोटी चूचियों के नीचे.गुलाबी निपल्स प्रोफेसर की ज़बान के रस से गीले चमक रहे थे & बिल्कुल सख़्त हो चुके थे.उनके आस-पास चूचियों पे हल्के & गहरे निशान प्रोफेसर के होंठो की करामात की गवाही दे रहे थे.

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क्रमशः........