खेल खिलाड़ी का compleet

Discover endless Hindi sex story and novels. Browse hindi sex stories, adult stories ,erotic stories. Visit webvitaminufa.ru
raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 15:52

खेल खिलाड़ी का पार्ट--43

गतान्क से आगे............-

"आ गयी वापस?",अजीत ने बाथरूम मे जाके मोबाइल अपने कान से लगाया.

"हां,आज सवेरे ही आई.",दिव्या प्रोफेसर दीक्षित के बेडरूम मे पलंग पे नंगी पड़ी थी.प्रोफेसर किचन से कुच्छ खाने को लाने गया था.उस वक़्त दिव्या ने जब अपना मोबाइल चेक किया तो अजीत की मिस्ड कॉल्स पाई तो उसने उसे फोन किया.

"कल तो छुट्टी है?"

"हूँ.",दिव्या सोच रही थी कि अगर अजीत कल मिलने को काहे तो वो क्या बहाना बनाएगी.कल का पूरा दिन वो बस प्रोफेसर की बाहो मे बिताना चाहती थी.

"तो परसो मिलेंगे,ठीक है ना?",अजीत ने खुद ही उसकी मुश्किल आसान कर दी.

"ओके."

"बाइ!"

"बाइ!",अजीत ने फोन बंद किया & कपड़े बदलने लगा.बाथरूम के बाहर खड़ी मेघना की आँखो से 2 बूंदे उसके गालो पे ढालाक गयी..अभी कितना वक़्त ही हुआ था दोनो की शादी को & अजीत अभी से ही..बड़ी मुश्किल से उसने अपनी रुलाई रोकी.वैसे ना उसे मालूम था ना अजीत को & ना ही दिव्या को कि अजीत & दिव्या की अगली मुलाकात कल ही होनी थी & मेघना भी कल रात ही अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी उलझन से रूबरू होने वाली थी.

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

अगले रोज़ शाम के 6 बजे थे & अंजलि की कार स्पोर्ट्स कॉंप्लेक्स के बाहर आ कर रुक गयी थी.स्पोर्ट्स कॉंप्लेक्स 1 तिराहे पे था.1 सड़क तो उसके मैं गेट के साथ-2 दाए से बाए जा रही थी & 1 छ्होटी सड़क सीधी उसके गेट तक आती थी.ये छ्होटी सड़क साँप की तरह 2 बार घूमती थी & इसी सड़क के पहले घूमाओ पे बल्लू अपने 3 आदमियो के साथ 1 क़ुआलिस मे बैठा था.उसकी नज़रो से ओझल अंजलि की कार कुच्छ ही दूरी पे पार्किंग मे वॅन मे वरुण बैठा था & इन सभी से थोड़ी दूरी पे सड़क के दूसरी ओर अपने 1 साथी के साथ 1 वॅन मे हीरा बैठा था.बल्लू का 1 आदमी कॉंप्लेक्स के सामने की सड़क के दूसरी ओर उगी झाड़ियो मे च्छूपा बैठा गेट पे नज़र रखे था.जैसे ही अंजलि की कार वापस निकलने के लिए घूमती तो वो अपने फोन से उसे इशारा कर देता.

वरुण ने देखा कि अनीश की प्रॅक्टीस हो चुकी है & वो अपना काइट्बॅग उठाए अपनी मा के साथ बाहर आ रहा था.सभी चौक्कने हो गये.वरुण का दिल ज़ोरो से धड़क रहा था.वो अपराधी नही था मगर आज वो 1 जुर्म करने जा रहा था,1 संगीन जुर्म & अब वो नर्वस हो रहा था.उसने लंबी साँस ली & खुद को शांत करने लगा.अंजलि बेटे के साथ गेट से बाहर आई,अनीश ने अपना काइट्बॅग कार की डिकी मे डाला & मा के साथ पिच्छली सीट पे बैठ गया.ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट की & जैसे ही उसने छ्होटे रास्ते की तरफ गाड़ी घुमाई अपनी वॅन से निकल वरुण कार के सामने कूद पड़ा.

ड्राइवर ने ज़ोर से ब्रेक लगाया & दरवाज़ा खोल बाहर निकला,उसे लगा की उसने आक्सिडेंट कर दिया है & उसकी गाड़ी से टकराए शख्स को चोट आई है.उसने सड़क पे पड़े वरुण को उठाने के लिए उसके कंधे पे हाथ रखा तो वरुण तेज़ी से उठा & 1 मुक्का उसके जबड़े पे जड़ दिया.ड्राइवर कुच्छ हैरानी & कुच्छ मुक्के के ज़ोर से पीछे गिरा & वरुण ने फुर्ती से कार का पिच्छला दरवाज़ा खोल उतने ही भौंचक्के अनीश को बाहर खींचा.अंजलि का दिमाग़ तो जैसे सुन्न हो गया था,उसे कुच्छ समझ मे नही आ रहा था कि ये हो क्या रहा है?सब कुच्छ किसी फिल्म की तरह उसकी नज़रो के सामने घट रहा था.

"मम्मी..!",वरुण की गिरफ़्त मे छट-पटाया अनीश चीखा तो वो जैसे जाग उठी.

"अनीश..!हेल्प....बचाओ..गार्ड...!",उसने कॉंप्लेक्स के गार्ड को चीख के बुलाया.वरुण अनीश के मुँह पे हाथ रखे उसे अपनी वॅन तक ले गया की तभी पीछे से किसी ने उसके कंधे पे वार किया & जैसे ही उसकी गिरफ़्त अनीश पे ढीली हुई 2 जोड़ी हाथो ने अनीश को उसके क़ब्ज़े से छीन लिया & कुच्छ दूरी पे खड़ी अपनी गाड़ी मे डाल वो मैं गेट के साथ वाली सड़क पे भाग गये.

वरुण जब तक संभाला उसने देखा कि कॉंप्लेक्स से भागते लोग उसकी ओर आ रहे हैं.उसने फ़ौरन अपनी वॅन का दरवाज़ा खोला & ड्राइविंग सीट पे बैठा,एंजिन उसने बंद किया नही था,उसने वॅन गियर मे डाली & जल्दी से वाहा से भागा.वो पसीने से तरबतर था..वो कौन लोग थे?..कहा गये वो?..वो पागलो की तरह वॅन भगाए जा रहा था.थोड़ा आगे जाके उसने 1 सड़क के किनारे वॅन लगाई & अपनेआप को संभालने लगा....सब गड़बड़ हो गया था & उसे लोगो ने देख भी लिया था..अब क्या करेगा वो?..मूसा भी जैल से 4 दीनो बाद निकलने वाला था लेकिन तब तक वो क्या करेगा..सबसे पहले तो उसे इस वॅन को छ्चोड़ना पड़ेगा लेकिन कहा..ऐसी जगह जहा ये जल्दी बरामद ना हो..हा 1 जगह थी..उसने वन स्टार्ट की & आगे बढ़ा.

"भाई,सब गड़बड़ हो रहा है!",बल्लू का आदमी अपने च्छूपने की जगह से भागता हुआ निकला,"..हमारा समान कोई और उठा रहा है!"

"क्या?!गाड़ी भगा गेट की तरफ!",बल्लू के हुक्म पे अगले ही पल गाड़ी कॉंप्लेक्स के पास पहुँची & बल्लू ने वरुण की भागती वॅन को देखा.उसने दरवाज़ा खोला & उसका आदमी कार के अंदर कुदा & गाड़ी वरुण की वॅन के पीछे लग गयी.

"भाई,समान उसमे नही दूसरी गाड़ी मे है."

"क्या?"

"हां,भाई.उस वॅन मे 1 अकेला लड़का था जिसने समान को उठाया मगर फिर अचानक दूसरी तरफ से 2 आदमी आए,दोनो सर से पाँव तक काले लिबास मे थे,चेहरे पे काले नक़ाब भी थे.उन्होने उस लड़के से समान को छीना & अपनी सफेद क़ुआलिस मे डाल के निकल गये.नंबर प्लेट पे कीचड़ लगा था."

"कोई हमारी बिरादरी का लगता है.",बल्लू सोच मे डूबा था,"..मगर कौन है जो हमारे मुँह से नीवाला छीन रहा है.कौन है साला?!",बल्लू ने आगे की सीट की बॅक पे हाथ मारा.

ये सब खामोशी से देखता हीरा अपने साथी के साथ वाहा से निकल गया.उसने अपने साथी को 1 बस स्टॅंड पे उतरा & फिर नीना को फोन लगाया.

"हो गया काम?"

"नही.",बल्लू ने उसे सारा हाल सुनाया.

"हूँ..कोई बात नही,अब महेश को सब बता दो.",हीरा ने ऐसा ही किया.

"क्या?!बेटे को किडनॅप कर लिया!..अरे..तो तुमने अंज-..आइ मीन प्रधान की बीवी को क्यू नही उठाया?",महेश बौखला गया था,"..मैने तुम्हे बीवी को उठाने को बोला था ना!"

"साहब,वाहा भीड़ इकट्ठा हो गयी थी,उसमे मैं कैसे करता ये काम & फिर मुझे क्या पता था कि हमारी तरह कोई और भी इस चक्कर मे पड़ा है."

"मगर..",महेश को बहुत खिज हो रही थी,सारे किए-कराए पे पानी फिर गया था,"..तुम यहा आओ अबी!"

"ठीक है,साब ."

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

"क्या?!",भाय्या जी अपनी कुर्सी से उठ खड़े हुए,"..रघु,ऐसे हुआ कैसे?"

"कुच्छ समझ नही आ रहा,बलदेव.ये साला किसकी हिम्मत हुई कि मेरे काम मे अड़ंगा डाला."

"रघु,ऐसा हो नही सकता कि किसी को हमारे प्लान के बारे मे पता हो.",भाय्या जी अब संभाल चुके थे & वापस कुर्सी पे बैठ गये थे,"..ये इत्तेफ़ाक़ है."

"ऐसे कैसे मान लू की इत्तेफ़ाक़ है!और कौन उठाना चाहेगा प्रधान के लौंदे को और क्यू?"

"सही सवाल किया तुमने रघु..क्यू?",भाय्या जी का पैना दिमाग़ तेज़ी से चल रहा था,"इस क्यू का जवाब ढूनडते हैं,रघु,कौन का जवाब अपनेआप मिल जाएगा."

"सही बोला,भाई..सही बोला."

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

वरुण ने कार को डेवाले रेलवे स्टेशन की पार्किंग मे लगाया & वाहा से बाहर निकला.रास्ते मे कही भी कोई चेकिंग नही हो रही थी मगर उसे पता था कि उसका हुलिया अब तक पूरी डेवाले की पोलीस को पता होगा,उसे अब इसका भी कुच्छ करना होगा.जहा तक हो सका उसने वॅन मे से अपने उंगलियो के निशान मिटाने की कोशिश की थी मगर अब उसे यहा से किसी तरह निकल जाना था..क्यू ना कोई भी ट्रेन पकड़ के निकल ले यहा से?..हा ये सही रहेगा..मगर पोलीस तो यहा से जाने वाली गाडियो & उनके स्टेशन्स पे भी नज़र रख सकती है..पहले हुलिया बदलना होगा.वो स्टेशन से बाहर निकला & पास के बाज़ार मे घुस गया.

1 सलून दिखा तो वो उसके अंदर चला गया,"ज़रा शेव & कटिंग करानी है."

"ज़रूर,सर.बैठिए.",नाई ने दराज़ से अपना समान निकालना शुरू किया,कैसी कटिंग करू,सर?",उसके गर्दन तक के लंबे,घुंघराले बालो को उसने पानी से गीला किया.

"छ्होटे कर दो & ये सामने से स्पाइक..ऐसे..ठीक है."

"ठीक है,सर.",जब वरुण सलून से निकला तो उसके बॉल बिल्कुल छ्होटे थे & सामने के बॉल स्पाइक्ड.अपनी दाढ़ी भी उसने पूरी साफ करा ली थी & अब उसे उमीद थी कि कोई उसे नही पहचानेगा.वो वापस स्टेशन गया मगर अब वाहा का नज़ारा बदल चुका था.चप्पे-2 पे पोलीस थी & उनके साथ खोजी कुत्ते भी थे.उसकी हिम्मत नही पड़ी कि वो उनकी नज़र बचाके आगे बढ़े & वो वाहा से निकल लिया.8 बज चुके थे & उसे ख़याल आया कि उसे अपने कपड़े भी बदलने हैं.वापस अपने वीरान बिल्डिंग वाले अड्डे पे जाना अभी संभव नही था क्यूकी वो जगह यहा से दूर थी & उसके पास सवारी भी नही थी,टॅक्सी वो इस्तेमाल करना नही चाहता था.इसी उधेड़बुन मे वो वाहा से निकला & सड़क पे चलने लगा.कुच्छ ही दूर उसे 1 माल दिखा जहा से उसने 1 सस्ती सी शर्ट & जींस खरीदे फिर 1 पब्लिक टाय्लेट मे अपने कपड़े बदल वो बाहर आ गया.उसकी समझ मे नही आ रहा कि रात कहा काटे & आगे क्या करे.पिच्छले 45 मिनिट से वो कभी इस गली तो कभी उस सुनसान सड़क पे पैदल चला जा रहा था.प्रधान के घर के सामने वाले बंगले मे जाना भी मुमकिन नही था क्यूकी इस वक़्त वो पूरा इलाक़ा तो पोलीस से भरा होगा.तभी उसकी नज़र सामने गयी,वो पोलीस ऑफिसर्स कॉलोनी के पास आ गया था.

वो मुझे शहर या उस से बाहर ढूंड रहे हैं मगर अपने ही घर मे ढूढ़ने का तो उन्हे ख़याल भी नही आएगा.हां,यही ठीक रहेगा & वो कॉलोनी मे घुसने का कोई आसान रास्ता ढूँढने लगा.

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

"उउम्म्म्म...उउन्न्ह....!",कमरे मे चूमने की मस्त आवाज़े गूँज रही थी.दिव्या प्रोफेसर की दाई तरफ अपनी बाई करवट पे लेटी थी & उसके दाए हाथ मे प्रोफेसर का लंड था.प्रोफेसर अपनी दाई करवट पे था & दिव्या की ज़ुबान को चूस्ता हुआ उसकी चूचियाँ मसल रहा था कि दिव्या का मोबाइल बजा.

"ओफ्फो..!",दिव्या ने बेमान से किस तोड़ी & अपने महबूब का मस्त लंड छ्चोड़ फोन उठाया,"हेलो."

"दिव्या,फ़ौरन हेडक्वॉर्टर्स पहुँचो!",डीसीपी वेर्मा की आवाज़ मे चिंता & बेसब्री सॉफ झलक रही थी.

"यस.सर.",दिव्या बिस्तर पे बैठ गयी,"..हुआ क्या है.सर?"

"हुआ क्या है!",डीसीपी साहब थोड़े बौखलाए लगे,"..तुम्हे अभी तक नही पता.तुम हो कहा?!न्यूज़ देखो & फ़ौरन यहा पहुँचो."

"सर.."

"हां?"

"प्रोफेसर दीक्षित को.."

"नही,अभी नही."

"सर."

"क्या हुआ,दिव्या?"

"पता नही,ज़रा टीवी खोलो.मुझे फ़ौरन हेडक्वॉर्टर्स पहुचना है.",दिव्या अपने कपड़े पहनने लगी.कुच्छ पलो बाद दोनो ही संजीदगी से टीवी को देख रहे थे.

"पहले मुझे घर जाना होगा,ऐसे लिबास मे दफ़्तर नही जा सकती ना.",दिव्या ने अपनी शॉर्ट ड्रेस की ओर इशारा किया.

"हूँ.",प्रोफेसर बहुत ही गंभीर हो गया था.

"ओके,मैं जाती हू.जो भी होगा तुम्हे बताती रहूंगी.",दिव्या पंजो पे उचकी & प्रोफेसर के होंठ चूम लिए.प्रोफेसर ने भी जवाब दिया मगर उस किस मे कुच्छ कमी थी,दिव्या को लगा कि प्रोफेसर इस खबर से परेशान हो गया.उसने सोचा कि उस से इस बारे मे पुच्छे मगर उसके पास वक़्त नही था & वो वाहा से निकल आई.

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

"ऐसा आख़िर हुआ कैसे?",डेवाले के पोलीस कमिशनर गुस्से से बहाल थे,"..उनकी फॅमिली की सेक्यूरिटी थी कहा?",उनका सवाल VईP सेक्यूरिटी के जॉइंट कमिशनर की तरफ था.

"सर,हमने कयि बार उन्हे कहा था लेकिन वो कभी मानते ही नही थे.अब हमारे आदमी ज़बरदस्ती तो उनके पीछे लग नही सकते थे."

"डॅम इट.",कमिशनर के चुप होते ही मीटिंग हॉल मे सन्नाटा पसर गया.

"ओके.",कुच्छ पॅलो बाद वो बोले,"..बच्चा अगवा हो चुका है,अब हमारी सबसे पहली प्राइयारिटी है उसे सही-सलामत उसके घर पहुचाना.सिंग साहब..",वो जॉइंट कमिशनर(क्राइम) से मुखातिब हुए,"..ये आपकी ज़िम्मेदारी है."

"यस,सर.आपकी इजाज़त हो तो मैं निकलु?"

"यस & गुड लक."

"थॅंक यू,सर."

--------------------------------------------------------------------------------------------------------

कामुक कहानियाँ

--------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--43

gataank se aage............-

"aa gayi vapas?",Ajit ne bathroom me jake mobile apne kaan se lagaya.

"haan,aaj savere hi aayi.",Divya Professor Dixit ke bedroom me palang pe nangi padi thi.professor kitchen se kuchh khane ko lane gaya tha.us waqt divya ne jab apna mobile check kiya to ajit ki missed calls payi to usne use fone kiya.

"kal to chhutti hai?"

"hun.",divya soch rahi thi ki agar ajit kal milne ko kahe to vo kya bahana banayegi.kal ka pura din vo bas professor ki baaho me bitana chahti thi.

"to parso milenge,thik hai na?",ajit ne khud hi uski mushkil aasan kar di.

"ok."

"bye!"

"bye!",ajit ne fone band kiya & kapde badalne laga.bathroom ke bahar khadi Meghna ki aankho se 2 boonde uske gaalo pe dhalak gayi..abhi kitna waqt hi hua tha dono ki shadi ko & ajit abhi se hi..badi mushkil se usne apni rulayi roki.vaise na use maloom tha na ajit ko & na hi divya ko ki ajit & divya ki agli mulakat kal hi honi thi & meghna bhi kal raat hi apni zindagi ki sabse badi uljhan se rubaru hone vali thi.

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

agle roz sham ke 6 baje the & anjali ki car sports complex ke bahar aa kar ruk gayi thi.sports complex 1 tirahe pe tha.1 sadak to uske main gate ke sath-2 daye se baye ja rahi thi & 1 chhoti sadak seedhi uske gate tak aati thi.ye chhoti sadak sanp ki tarah 2 baar ghumti thi & isi sadak ke pehle ghumao pe Ballu apne 3 aadmiyo ke sath 1 Qualis me baitha tha.uski nazro se ojhal anjali ki carse kuchh hi doori pe parking me van me Varun baitha tha & in sabhi se thodi doori pe sadak ke doosri or apne 1 sathi ke sath 1 van me Hira baitha tha.ballu ka 1 aadmi complex ke samne ki sadak ke dusri or ugi jhadiyo me chhupa baitha gate pe nazar rakhe tha.jaise hi anjali ki cara vapas nikalne ke liye ghumti to vo apne fone se use ishara kar deta.

varun ne dekha ki Anish ki practice ho chuki hai & vo apna kitbag uthaye apni maa ke sath bahar aa raha tha.sabhi chaukkane ho gaye.varun ka dil zoro se dhadak raha tha.vo apradhi nahi tha magar aaj vo 1 jurm karne ja raha tha,1 sangin jurm & ab vo nervous ho raha tha.usne lumbi saaans li & khud ko shant karne laga.anjali bete ke sath gate se bahar aayi,anish ne apna kitbag car ki dicky me dala & maa ke sath pichhli seat pe baith gaya.driver ne gadi start ki & jaise hi usne chhote raste ki taraf gadi ghumai apni van se nikal varun car ke samne kud pada.

driver ne zor se brake lagaya & darwaza khol bahar nikla,use laga ki usne accident kar diya hai & uski gadi se takraye shakhs ko chot aayi hai.usne sadak pe pade varun ko uthane ke liye uske kandhe pe hath rakha to varun tezi se utha & 1 mukka uske jabde pe jad diya.driver kuchh hairani & kuchh mukke ke zor se peechhe gira & varun ne furti se car ka pichhla darwaza khol utne hi bhaunchakke anish ko bahar khincha.anjali ka dimagh to jaise sunn ho gaya tha,use kuchh samajh me nahi aa raha tha ki ye ho kya raha hai?sab kuchh kisi film ki tarah uski nazro ke samne ghat raha tha.

"mummy..!",varun ki giraft me chhatpatata anish chikha to vo jaise jag uthi.

"anish..!help....bachao..guard...!",usne complex ke guard ko chikh ke bulaya.varun anish ke munh pe hath rakhe use apni van tak le gaya ki tabhi peechhe se kisi ne uske kandhe pe vaar kiya & jaise hi uski giraft anish pe dhili hui 2 jodi hatho ne anish ko uske kabze se chhin liya & kuchh doori pe khadi apni gadi me daal vo main gate ke sath vali sadak pe bhag gaye.

varun jab tak sambhala usne dekha ki complex se bhagte log uski or aa rahe hain.usne fauran apni van ka darwaza khola & driving seat pe baitha,engine usne band kiya nahi tha,usne van gear me dali & jaldi se vaha se bhaga.vo paseene se tarbatar tha..vo kaun log the?..kaha gaye vo?..vo paglo ki tarah van bhagaye ja raha tha.thoda aage jake usne 1 sadak ke kinare van lagayi & apneaap ko sambhalne laga....sab gadbad ho gaya tha & use logo ne dekh bhi liya tha..ab kya karega vo?..Musa bhi jail se 4 dino baad nikalne vala tha lekin tab tak vo kya karega..sabse pehle to use is van ko chhodna padega lekin kaha..aisi jagah jaha ye jaldi baramad na ho..haa 1 jagah thi..usne van start ki & aage badha.

"bhai,sab gadbad ho raha hai!",ballu ka aadmi apne chhupne ki jagah se bhagta hua nikla,"..humara saman koi aur utha raha hai!"

"kya?!gadi bhaga gate ki taraf!",ballu ke hukm pe agle hi pal gadi complex ke paas pahunchi & ballu ne varun ki bhagti van ko dekha.usne darwaza khola & uska admi car ke andar kuda & gadi varun ki van ke peechhe lag gayi.

"bhai,saman usme nahi dusri gadi me hai."

"kya?"

"haan,bhai.us van me 1 akela ladka tha jisne saman ko uthaya magar fir achanak dusri taraf se 2 aadmi aaye,dono sar se panv tak kale libas me the,chehre pe kale naqab bhi the.unhone us ladke se saman ko chhena & apni safed qualis me daal ke nikal gaye.number plate pe kichad laga tha."

"koi humari biradri ka lagta hai.",ballu soch me duba tha,"..magar kaun hai jo humare munh se nivala chhin raha hai.kaun hai sala?!",ballu ne aage ki seat ki back pe hath mara.

ye sab khamoshi se dekhta hira apne sathi ke sath vaha se nikal gaya.usne apne sathi ko 1 bus stand pe utara & fir nina ko fone lagaya.

"ho gaya kaam?"

"nahi.",ballu ne use sara haal sunaya.

"hun..koi baat nahi,ab mahesh ko sab bata do.",hira ne aisa hi kiya.

"kya?!bete ko kidnap kar liya!..are..to tumne anj-..i mean pradhan ki biwi ko kyu nahi uthaya?",mahesh baukhla gaya tha,"..maine tumhe biwi ko uthane ko bola tha na!"

"sahab,vaha bhid ikattha ho gayi thi,usme main kaise karta ye kaam & fir mujhe kya pata tha ki humari tarah koi aur bhi is chakkar me pada hai."

"magar..",mahesh ko bahut khij ho rahi thi,sare kiye-karaye pe pani fir gaya tha,"..tum yaha aao abi!"

"thik hai,sa'ab."

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

"kya?!",Bhaiyya ji apni kursi se uth khade hue,"..Raghu,aias hua kaise?"

"kuchh samajh nahi aa raha,Baldev.ye sala kiski himmat hui ki mere kaam me adanga dala."

"raghu,aisa ho nahi sakta ki kisi ko humare plan ke bare me pata ho.",bhaiyya ji ab sambhal chuke the & vapas kursi pe baith gaye the,"..ye ittefaq hai."

"aise kaise maan lu ki ittefaq hai!aur kaun uthana chahega pradhan ke launde ko aur kyu?"

"sahi sawal kiya tumne raghu..kyu?",bhaiyya ji ka paina dimagh tezi se chal raha tha,"is kyu ka jawab dhundte hain,raghu,kaun ka jawab apneaap mil jayega."

"sahi bola,bhai..sahi bola."

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

varune car ko Devalay Railway Station ki parking me lagaya & vaha se bahar nikala.raste me kahi bhi koi checking nahi ho rahi thi magar use pata tha ki uska huliya ab tak puri devalay ki police ko pata hoga,use ab iska bhi kuchh karna hoga.jaha tak ho saka usne van me se apne ungliyo ke nishan mitane ki koshish ki thi magar ab use yaha se kisi tarah nikal jana tha..kyu na koi bhi train pakad ke nikal le yaha se?..haa ye sahi rahega..magar police to yaha se jane vali gadiyo & unke stations pe bhi nazar rakh sakti hai..pehle huliya badalna hoga.vo station se bahar nikla & paas ke bazar me ghus gaya.

1 saloon dikha to vo uske andar chala gaya,"zara shave & cutting karani hai."

"zarur,sir.baithiye.",nai ne daraz se apna saman nikalna shuru kiya,kaisi cutting karu,sir?",uske gardan tak ke lumbe,ghunghrale baalo ko usne pani se gila kiya.

"chhote kar do & ye samne se spike..aise..thik hai."

"thik hai,sir.",jab varun saloon se nikla to uske baal bilkul chhote the & samne ke baal spiked.apni dadhi bhi usne puri saaf kara li thi & ab use umeed thi ki koi use nahi pehchanega.vo vapas station gaya magar ab vaha ka nazara badal chuka tha.chappe-2 pe police thi & unke sath khoji kutte bhi the.uski himmat nahi padi ki vo unki nazar bachake aage badhe & vo vaha se nikal liya.8 baj chuke the & use khayal aaya ki use apne kapde bhi badalne hain.vapas apne viran building vale adde pe jana abhi asmbhav nahi tha kyuki vo jagah yaha se door thi & uske paas savari bhi nahi thi,taxi vo istemal karna nahi chahta tha.isi udhedbun me vo vaha se nikla & sadak pe chalne laga.kuchh hi door use 1 mall dikha jaha se usne 1 sasti si shirt & jenas kharide fir 1 public toilet me apne kapde badal vo bahar aa gaya.uski samajh me nahi aa raha ki raat kaha kaate & aage kya kare.pichhle 45 minute se vo kabhi is gali to kabhi us sunsan sadak pe paidal chala ja raha tha.pradhan ke ghar ke samne vale bungle me jana bhi mumkin nahi tha kyuki is waqt vo pura ilaka to police se bhara hoga.tabhi uski nazar samne gayi,vo police officers colony ke paas aa gaya tha.

vo mujhe shehar ya us se bahar dhoond rahe hain magar apne hi ghar me dhoondane ka to unhe khayal bhi nahi aayega.haan,yehi thik rahega & vo colony me ghusne ka koi aasan rasta dhoondane laga.

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

"uummmm...uunnhhhhh....!",kamre me chumne ki mast aavaze goonj rahi thi.divya professor ki dayi taraf apni bayi karwat pe leti thi & uske daye hath me professor ka lund tha.professor apni dayi karwat pe tha & divya ki zuban ko chusta hua uski chhatiya masal raha tha ki divya ka mobile baja.

"offoh..!",divya ne beman se kiss todi & apne mehboob ka mast lund chhod fone uthaya,"hello."

"divya,fauran headquarters pehuncho!",DCP Verma ki aavaz me chinta & besabri saaf jhalak rahi thi.

"yes.sir.",divya bistar pe baith gayi,"..hua kya hai.sir?"

"hua kya hai!",DCP sahab thode baukhlaye lage,"..tumhe abhi tak nahi pata.tum ho kaha?!news dekho & fauran yaha pahuncho."

"sir.."

"haan?"

"professor dixit ko.."

"nahi,abhi nahi."

"sir."

"kya hua,divya?"

"pata nahi,zara tv kholo.mujhe fauran headquarters pahuchana hai.",divya apne kapde pehanane lagi.kuchh palo baad dono hi sanjida se tv ko dekh rahe the.

"pehle mujhe ghar jana hoga,aise libas me daftar nahi ja sakti na.",divya ne apni short dress ki or ishara kiya.

"hun.",professor bahut hi gambhir ho gaya tha.

"ok,main jati hu.jo bhi hoga tumhe batai rahungi.",divya panjo pe uchki & professor ke honth chum liye.professor ne bhi jawab diya magar us kiss me kuchh kami thi,divya ko laga ki professor is khabar se pareshan ho gaya.usne socha ki us se is bare me puchhe magar uske paas waqt nahi tha & vo vaha se nikal aayi.

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

"aisa aakhir hua kaise?",devalay ke Police Commissioner gusse se behal the,"..unki family ki security thi kaha?",unka sawal VIP security ke Joint Commissioner ki taraf tha.

"sir,humne kayi baar unhe kaha tha lekin vo kabhi mante hi nahi the.ab humare aadmi zabardasti to unke peechhe lag nahi sakte the."

"damn it.",commissioner ke chup hote hi meeting hall me sannata pasar gaya.

"ok.",kuchh palo baad vo bole,"..bachcha agwa ho chuka hai,ab humari sabse pehli priority hai use sahi-salamat uske ghar pahuchana.Singh sahab..",vo joint commissioner(crime) se mukhatib hue,"..ye aapki zimmedari hai."

"yes,sir.aapki ijazat ho to main niklu?"

"yes & good luck."

"thank you,sir."

--------------------------------------------------------------------------------------------------------

kaamuk kahaaniyaan

--------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah........


raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 15:53

खेल खिलाड़ी का पार्ट--44

गतान्क से आगे............-

"मिस्टर.वेर्मा,ये केस मैं आपके सुपुर्द कर रहा हू.",क्प सिंग ने अपने कॅबिन पहुँचते ही डीसीपी वेर्मा को तलब किया.

"सर."

"तो कितने लोग चाहिए आपको?"

"सर,मैं 3 एसीपी & उनकी टीम को इस काम पे लगा दूँगा लेकिन.."

"लेकिन?"

"लेकिन,सर मुझे 1 ऐसा आदमी चाहिए जोकि उन लोगो से बात कर सके?"

"साफ-2 कहिए,वेर्मा जी."

"सर,अपहरण हुआ है तो फिरौती की माँग तो आएगी ही.तो मुझे 1 ऐसा आदमी चाहिए जोकि उनसे डील कर सके."

"हूँ..वेरी गुड पॉइंट.आप खुद क्यू नही करते ये काम?"

"सर,पहले तो मुझे तजुर्बा नही इस बात का,दूसरे मैं पोलीसवाला हू.ऐसे केसस मे हमे अगवा करनेवालो को ये तो भरोसा दिलाना होगा कि हम उन्हे नुकसान नही पहुचाएँगे.अब बच्चे के परिवार वाले तो उसकी कैसी भी माँग मान जाएँगे लेकिन 1 पेशेवर आदमी उस से सही तरीके से बात करेगा."

"कोई ऐसा शख्स है तुम्हारी नज़र मे?"

"है सर पर वो शायद माने नही."

"कौन है वो वेर्मा जी?आप नाम बताइए,मैं मनाउन्गा उसे!"

"प्रोफेसर दीक्षित."

"क्या?ये कौन है?कहा पढ़ता है?"

"सर,मैं अजिंक्या दीक्षित की बात कर रहा हू."

"अजिंक्या?..कौन..",मगर जैसे सिंग साहब को सब याद आ गया,"..आप ठीक कह रहे थे,वो शायद ही माने."

"मैं कोशिश करू,सर?"

"ज़रूर,वेर्मा जी लेकिन कुच्छ ठीक नही लगता कि अजिंक्या को फिर से.."

"सर,हो सकता है इस बार ये हादसा उसे उसके उस गम से उबार दे."

"ओके.",उन्होने 1 ठंडी सांस ली,"..आप मिलिए उस से & बाकी टीम के बारे मे बताइए."

"सर,एसीपी अजीत चौहान प्रधान साहब के बंगल पे है & उनकी सभी कॉल्स मॉनिटर कर रहा है.मैने एसीपी दिव्या माथुर को क्राइम सीन पे फोरेन्सिक वालो के साथ भेजा है & एसीपी नामित भट्ट को कंट्रोल रूम से मिलने वाली किसी भी लेड को फॉलो करने के काम पे लगाया है."

"गुड.इस वक़्त ये केस हमारी टॉप प्राइयारिटी है & हमे इसे जल्द से जल्द सुलझाना है.आप अजिंक्या से मिलिए."

"ओके,सर.",वेर्मा साहब कॅबिन से निकल गये.

"तो यहा 5 गाडिया थी.",दिव्या बुदबुदाई.फोरेन्सिक लॅब के एक्सपर्ट्स ने टाइर्स के निशान & ब्रेक लगाने से पड़े स्किड मार्क्स को देख के ये अंदाज़ा लगाया था.1 टीम ने अंजलि की गाड़ी के टाइयर चेक कर 1 निशान को तो कन्फर्म कर लिया था मगर बाकियो के बारे मे बस अंदाज़ा ही लगा पाए थे अब तक.

"1 तो कोई बड़ी गाड़ी है,दिव्या जी..कोई सुव..",एक्सपर्ट सड़क पे पड़े स्किड मार्क्स को गौर से देख रहा था.पूरा इलाक़ा पोलीस ने फ्लड लाइट से जगमग कर रखा था,"..ये देखिए इधर से आई & यहा पे ब्रेक मार के रुकी फिर निकल गयी.",एक्सपर्ट को पता नही था मगर वो बल्लू की क़ुआलिस की बात कर रहा था,"..फिर ये वॅन जिसकी पोलीस तलाश कर रही है वो यहा खड़ी थी & उसके बाद उसका ड्राइवर ज़रूर बौखलाया हुआ था नही तो टाइयर के निशान ऐसे टेढ़े-मेढ़े क्यू पड़ते?",ये निशान वरुण की वॅन के थे.

"अब 1 और वॅन यहा थी लेकिन उसके निशान बहुत साफ नही हैं?"

"आपको कैसे यकीन कि वो वॅन ही थी?"

"क्यूकी हमे ये पता है कि जिस आदमी ने बच्चे को पकड़ा वो वॅन से भागा था & ये उसके टाइयर्स के निशान हैं & ये देखिए ये भी बिल्कुल वैसे ही निशान है यानी की दोनो गाडिया 1 जैसी थी."

"ह्म्म."

"यहा आइए..",अब सब कॉंप्लेक्स से थोड़ा दूर बढ़ चुके थे,"..यहा पे भी कोई सुव खड़ी थी लेकिन उसे कोई बौखलाहट नही थी बस जल्दी थी.ज़ोर से आयलरेटर दबाने से यहा सड़क किनारे की मिट्टी कुच्छ ज़्यादा उड़ी & ये हल्का सा गड्ढा बन गया है."

"थॅंक्स.",दिव्या ने सारी नयी जानकारी कंट्रोल रूम को पहुचाई.पोलीस ज़ोर-शोर से सभी गाडियो की तलाश मे लगी थी.हीरा ने महेश अरोरा की दी वॅन उसकी फॅक्टरी पहुँचा दी थी.बल्लू की गाड़ी अब बाबा की हवेली मे महफूज़ थी,वरुण ने वॅन स्टेशन की पार्किंग मे छ्चोड़ दी थी & उसका कोई इरादा नही था वापस वाहा जाने का & वो गाड़ी मे जिसमे अनीश अगवा हुआ था इस वक़्त धू-धू करके जल रही थी.

किडनॅपर्स बहुत शातिर थे,आमतौर पे बच्चो को अगवा करनेवाले सवेरे उनके स्कूल जाते वक़्त ये गलिज काम करना पसंद करते हैं क्यूकी उस वक़्त ट्रॅफिक भी कम होता है & पोलीस भी उतनी मुस्तैद नही रहती लेकिन जिन लोगो को अपहरण का ख़तरा होता है वो तो उस वक़्त अपनी हिफ़ाज़त का इंतेज़ाम रखते हैं.जसजीत प्रधान भी इधर कुच्छ दीनो से बच्चो को स्कूल छ्चोड़ने & वापस लाने के वक़्त किसी सेक्यूरिटी वाले को ज़रूर उनके साथ कर देता था मगर अंजलि ऐसा नही करती थी & इसी बात ने किडनॅपर्स को मौका दिया.

वो 4 थे,अनीश को बेहोश कर उन्होने बॅक्सीट के फ्लोर पे उसे डाल 1 कंबल से उसे ढँक दिया & उसके उपर पैर रख 2 आदमी बैठ गये.सभी ने अपने नक़ाब उतार लिए & अपनी काली टी-शर्ट्स के उपर अलग-2 रंगो की कमीज़े पहन ली & टाइ लगा ली.सिर्फ़ 1 ने हाइ नेक टी-शर्ट पहनी थी,उसने 1 कोट अपनी टी-शर्ट के उपर डाल लिया था.अब सभी किसी दफ़्तर से निकले एंप्लायीस लग रहे थे.वो हाइ नेक शर्ट वाला आदमी बार-2 अपनी दाई बाँह को छु रहा था.वो आगे की पॅसेंजर सीट पे बैठा था.उसके साथ बैठा गाड़ी चला रहे आदमी ने उसे देखा & सर हिलाया..ये कभी नही सुधरेगा!..वो बुदबुडाया & कार को डेवाले से बाहर निकलती गाडियो की भीड़ मे घुसा दिया.

डेवाले के आस-पास के इलाक़े अब काफ़ी बस गये थे & इस वक़्त शाम को डेवाले के दफ़्तरो से निकला हुजूम अपने-2 घरो के लिए उन रिहयशी इलाक़ो की तरफ बढ़ जाता था.वो गाड़ी भी इसी भीड़ मे वाहा से निकल गयी & उस वक़्त तक पोलीस तो बस 1 वॅन की तलाश मे थी ना कि किसी हाइयंड आक्सेंट की.किडनॅपर्स ने इस गाड़ी को भी बहुत सोच-समझ के चुना था.डेवाले से बाहर निकलते ही हाइवे पे कोई 10 किमी चलने के बाद ड्राइवर ने कार को 1 साइड रोड पे उतार दिया & तब तक चलता रहा जब रिहयशी इलाक़ो के बाद खेत नही दिखने लगे.

उसने कार को 1 खेत के बगल से मोड़ा & वाहा तक ले गया जहा 1 झोपड़ी नुमा मगर बड़ी इमारत थी.उसने कार रोकी & आस-पास देखा.झोपड़ी के दूसरी ओर से 1 इंनोवा आती दिखी.ड्राइवर के होंठो पे मुस्कान आ गयी.उसके इशारे पे सभी नीचे उतर गये.पीछे बैठे 1 शख्स ने अनीश को कंबल मे लपेटे हुए ही उठा लिया.इंनोवा की ड्राइवर साइड का दरवाज़ा खोल जब उसे चलाने वाली लड़की उतरी तो आक्सेंट के ड्राइवर की मुस्कानओर बड़ी हो गयी.पीछे खड़े शख्स ने अनीश को इंनोवा की डिकी मे डाल दिया.

आक्सेंट के ड्राइवर ने अपनी गाड़ी को उस घास-फूस के छप्पर & लकड़ी की दीवारो वाली इमारत मे घुसा दिया जिसका इस्तेमाल उसका मालिक शायद कॅटाइ के बाद फसल रखने के लिए करता था.तब तक वो लड़की वापस इंनोवा मे बैठ गयी थी मगर इस बार आगे की पॅसेंजर सीट पे.उस लड़की ने किसी दफ़्तर जाने वाली लड़की की तरह फॉर्मल शर्ट & पॅंट पहनी हुई थी.आक्सेंट का ड्राइवर थोड़ी देर तक उस इमारत मे रहा & फिर बाहर आके इंनोवा स्टार्ट कर वापस उधर ही चल पड़ा जिधर से वो आए थे.

कार जब वापस हाइवे पे आई तो पीछे बैठे उस शख्स ने जिसने अनीश को उठाके इस कार मे डाला था & शायद कार मे बैठे सभी लोगो मे सबसे कम उम्र का था,गर्दन घुमा के पीछे द्देखा तो उसे दूर कुच्छ धुआँ उठता दिखा.वो मुस्कुरा दिया & अपने साथियो को देखा.सभी मुस्कुरा रहे थे.कार वापस डेवाले की ओर जा रही थी & यही वो बात थी जोकि उनके प्लान की सबसे मज़बूत & कमाल की बात थी.पोलीस तो यही सोच रही थी कि अगवा करके किडनॅपर्स शहर से बाहर भागेंगे मगर किडनॅपर्स ने बिल्कुल उल्टा किया वो वापस शहर के अंदर घुस रहे थे.

चेक नाके पे डेवाले से बाहर जाती गाडियो की जम के तलाशी हो रही थी मगर अंदर आने वाली गाडियो की तरफ किसी का ध्यान नही था & इसी बात का फ़ायदा उठाके किडनॅपर्स अनीश को अपनी गिरफ़्त मे रखने मे कामयाब रहे.डेवाले के बाहरी किनारे की 1 नयी बन रही पॉश कॉलोनी के 1 बंगल के अंदर कार घुसी.कार के सारे शीशे काले थे & किसी को भी ये नही दिखा होगा कि अंदर कितने लोग हैं.बंगले के गेट पे रुक कार चलाने वाले ने खुद गेट खोला & कार को अंदर किया फिर अंदर बने गॅरेज का दरवाज़ा खोला & फिर कार को उसके अंदर किया.इस सब के दौरान कार के अंदर से कोई नही उतरा.

गॅरेज का दरवाज़ा लगाने के बाद सारे लोग कार से उतरे & गॅरेज के दीवार मे बने 1 दरवाज़े से जो घर को गॅरेज से जोड़ता था,उस से घर के अंदर चले गये.कार चलाने वाले शख्स ने उनके अंदर जाते ही फिर से गॅरेज का दरवाज़ा खोला & बाहर आके उसे लॉक किया & फिर घर के मेन दरवाज़े का ताला खोल अंदर गया.अब अगर किसी ने उसे देखा भी होगा तो यही समझेगा कि उस घर मे 1 अकेला शख्स रहता है.

"अभी भी बेहोश है?",घर के अंदर सबने फिर से अपने नकाब पहन लिए थे.

"हां."

"ठीक है.इसे इसके कमरे मे पहुँचा दो."

"ओके.",वो शख्स जोकि हाइशनेक टी-शर्ट पहने था,उसने अपनी दाई बाँह फिर से च्छुई.

"अब,क्या ज़रूरत थी अभी उन हीरो को ठिकाने लगाने की?कही कुच्छ हो जाता तो?"

"तुम ही ने कहा था कि हमे पंचमहल मे कोई भी सुराग नही छ्चोड़ना है.मेरे पैसे ख़त्म हो गये थे,जुए का कर्ज़ा नही चुकाता तो पोलिसेवालो से ज़्यादा परेशानी खड़ी कर देते वो यहा!"

"1 बार मुझसे तो बोला होता.अच्छा..चलो अपना ज़ख़्म दिखाओ.",दोनो बंगल के 1 कमरे मे गये जहा 1 फर्स्ट-एड बॉक्स था,"..ये तो अच्छा हुआ कि गोली बस च्छू के निकल गयी है..",उसने पट्टी हटा के घाव को देखा,"..हूँ,अब तो काफ़ी ठीक है.मैं 1 बार फिर पट्टी कर देता हू & वो गोलिया खाते रहना.ये काम ख़त्म होने तक तुम फिर से इस हाथ से अपने पत्ते खेलने लगोगे.",दोनो ने ठहाका लगाया.दोनो को देख के लगता था कि दोनो की दोस्ती काफ़ी पुरानी है मगर जहा बी उम्र 40 के आस-पास लगती थी वही ए की उम्र 27-28 से ज़्यादा नही.

"इसे यहा रखो सी..हां इन्ही गद्दो पे.",उस लड़की ने कहा.तीनो सीढ़िया उतर बेसमेंट मे बने 1 कमरे मे आ गये थे.कमरे मे 1 दीवार से लगा के 2 गद्दे ज़मीन पे रखे थे.गद्दे के पास की ज़मीन मे 1 लोहे का मोटा पाइप लगा था जोकि छत तक पहुचा हुआ था.पाइप के आस-पास की ज़मीन देख के लगता था कि बस कुच्छ ही दिन पहले उसे सेमेंट से ज़मीन मे जाम किया गया है.कमरे मे कोई खिड़की नही थी बस बिल्कुल कोने मे 1 रोशनदन मे 1 एग्ज़ॉस्ट फॅन लगा हुआ था.

"ए,इसने अपनी पॅंट गंदी कर दी है.डर गया होगा ज़रूर."

"हूँ,तो बदल देते हैं.",उसने कमरे मे खड़े दूसरे आदमी की ओर देखा तो वो कमरे से बाहर चला गया & 5 मिनिट बाद 1 तौलिया & गर्म पानी लेके आया.तीनो ने मिलके अनीश की पॅंट उतार उसके बदन पे सुख चुके उसके पेशाब को पोंच्छा & फिर 1 दूसरा तौलिया उसकी कमर पे लपेट दिया फिर उसे गद्दे पे लिटा दिया.

"मैं यही कहने वाली थी,डी.",डी नाम का शख्स अनीश के बाए टखने मे 1 पट्टी बाँध रहा था.उसके बाद उन्होने 1 लंबी ज़ंजीर को फर्श मे लगे पाइप के गिर्द 2 बार लपेटा & फिर उसके सिरो को 1 काफ़ी बड़े ताले से बाँध दिया फिर 1 हथकड़ी ली & उसे ताले मे लगा दिया & फिर हथकड़ी की दूसरी कड़ी को अनीश के पट्टी लगे टखने मे बाँध दिया.ज़ंजीर इतनी बड़ी थी कि अनीश उठके कमरे मे रखी1 बाल्टी जो उसे टाय्लेट के लिए इस्तेमाल करनी थी,वही ताक़ जा सके या फिर गद्दे पे सो सके.

अनीश को बाँधने के बाद तीनो ने कमरे का मज़बूत & भारी दरवाज़ा बंद किया & उसमे लगे चारो लॉक्स को बंद किया & फिर उपर आ गये.

"1 बार फिर हम सभी बाते दोहरा लें.",ए नाम का शख्स जोकि अब साफ था कि इनका सरदार है उनसे कह रहा था,"..जब तक हम यहा है तब तक हम 1 दूसरे को हमेशा ए,बी,सी,डी,इन नामो से ही बुलाएँगे.बच्चे के सामने कोई कुच्छ नही बोलेगा & हमेशा काले लिबास मे & नक़ाब लगाके उसके सामने जाएगा.घर से बाहर सिर्फ़ मैं जाऊँगा & काम ख़त्म होने पे अपना-2 हिस्सा लेके हम सब यहा से अलग-2 जगहो पे निकल जाएँगे.कोई सवाल?"

"हां.",ये सी की आवाज़ थी जोकि इनमे सबसे कम उम्र का था,"..आ,खाने मे क्या है?",उसके सवाल पे सभी हंस पड़े & रसोई की ओर बढ़ गये.

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

"हेलो,अजिंक्या.",डीसीपी वेर्मा प्रोफेसर दीक्षित के घर के दरवाज़े पे खड़े थे.

"हेलो,प्रदीप.",उसने उन्हे अंदर बुलाया.

"अजिंक्या,तुम तो जानते ही हो कि मैं यहा क्यू आया हू.",प्रोफेसर ने कुच्छ जवाब नही दिया बस अपने हॉल मे बने बार पे जाके अपने दोस्त के लिए ड्रिंक बनाने लगा.

"तो तुम मेरा जवाब भी जानते होगे,प्रदीप.",प्रोफेसर ने ग्लास डीसीपी साहब को थमाया.

"हां मगर आज मैं ना सुनने नही आया हू."

"प्लीज़,प्रदीप.",प्रोफेसर ने 1 घूँट मे अपना ग्लास खाली कर दिया.

"कब तक ऐसे खुद से भगोगे,अजिंक्या?",वेर्मा साहब ने अपने दोस्त के कंधे पे हाथ रखा,"..ये तुम्हारा घर है मगर तुमने पिच्छले 15 सालो मे इसे किसी होटेल की तरह इस्तेमाल किया है.इस शहर मे आते हो,2-3 महीनो बाद चले जाते हो.क्या मैं इसकी वजह नही जानता?..मगर कब तक यू भागते रहोगे,अजिंक्या.प्लीज़,अजिंक्या उस बच्चे के बारे मे सोचो,उसके मा-बाप के बारे मे सोचो.",प्रोफेसर बार पे झुका अपने दोस्त की तक़रीर सुन रहा था.

"प्रदीप,फिर से वही सब..वही दर्द.."

"नही,इस बार नही मेरे दोस्त,इस बार नही.",प्रोफेसर बार पे झुक अपने हाथो मे अपना चेहरा च्छुपाए ना जाने कितनी देर तक खड़ा रहा.

"ठीक है,प्रदीप.मैं ये काम करूँगा मगर मेरी कुच्छ शर्ते हैं."

"ठीक है,मेरे साथ जेसीपी साहब के पास चलो."

--------------------------------------------------------------------------------------------------------

कामुक कहानियाँ

--------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--44

gataank se aage............-

"Mr.Verma,ye case main aapke supurd kar raha hu.",JCP singh ne apne cabin pahunchte hi DCP verma ko talab kiya.

"sir."

"to kitne log chahiye aapko?"

"sir,main 3 ACPs & unki team ko is kaam pe laga dunga lekin.."

"lekin?"

"lekin,sir mujhe 1 aisa aadmi chahiye joki un logo se baat kar sake?"

"saaf-2 kahiye,verma ji."

"sir,apharan hua hai to firauti ki mang to ayegi hi.to mujhe 1 aisa aadmi chahiye joki unse deal kar sake."

"hun..very good point.aap khud kyu nahi karte ye kaam?"

"sir,pehle to mujhe tajurba nahi is baat ka,dusre main policewala hu.aise cases me hume agwa karnevalo ko ye to bharosa dilana hoga ki hum unhe nuksan nahi pahuchayenge.ab bachche ke parivar vale to uski kaisi bhi mang maan jayenge lekin 1 peshevar aadmi us se sahi tarike se baat karega."

"koi aisa shakhs hai tumhari nazar me?"

"hai sir par vo shayad mane nahi."

"kaun hai vo verma ji?aap naam bataiye,main manaunga use!"

"Professor Dixit."

"kya?ye kaun hai?kaha padhata hai?"

"sir,main Ajinkya Dixit ki baat kar raha hu."

"ajinkya?..kaun..",magar jaise singh sahab ko sab yaad aa gaya,"..aap thik keh rahe the,vo shayad hi mane."

"main koshish karu,sir?"

"zarur,verma ji lekin kuchh thik nahi lagta ki ajinkya ko fir se.."

"sir,ho sakta hai is baar ye hadsa use uske us ghum se ubaar de."

"ok.",unhone 1 thandi sans li,"..aap miliye us se & baki team ke bare me bataiye."

"sir,ACP Ajit Chauhan pradhan sahab ke bungle pe hai & unki sabhi calls monitor kar raha hai.maine ACP Divya Mathur ko crime scene pe forensic valo ke sath bheja hai & ACP Namit Bhatt ko control room se milne vali kisi bhi lead ko follow karne ke kaam pe lagaya hai."

"good.is waqt ye case humari top priority hai & hume ise jald se jald suljhana hai.aap ajinkya se miliye."

"ok,sir.",verma sahab cabin se nikal gaye.

"To yaha 5 gadiya thi.",Divya budbudai.forensic lab ke experts ne tires ke nishan & brake lagaane se pade skid marks ko dekh ke ye andaza lagaya tha.1 team ne Anjali ki gadi ke tyre check kar 1 nishan ko to confirm kar liya tha magar bakiyo ke bare me bs andaza hi laga paye the ab tak.

"1 to koi badi gadi hai,divya ji..koi SUV..",expert sadak pe pade skid marks ko gaur se dekh raha tha.pura ilaka police ne flood light se jagmag kar rakha tha,"..ye dekhiye idhar se aayi & yaha pe brake maar ke ruki fir nikal gayi.",expert ko pata nahi tha magar vo Ballu ki Qualis ki baat kar raha tha,"..fir ye van jiski police talash kar rahi hai vo yaha khadi thi & uske baad uska driver zarur baukhlaya hua tha nahi to tyre ke nishan aise tedhe-medhe kyu padte?",ye nishan Varun ki van ke the.

"ab 1 aur van yaha thi lekin uske nishan bahut saaf nahi hain?"

"aapko kaise yakin ki vo van hi thi?"

"kyuki hume ye pata hai ki jis aadmi ne bachche ko pakda vo van se bhaga tha & ye uske tyres ke nishan hain & ye dekhiye ye bhi bilkul vaise hi nishan hai yani ki dono gadiya 1 jaisi thi."

"hmm."

"yaha aaiye..",ab sab complex se thoda door badh chuke the,"..yaha pe bhi koi SUV khadi thi lekin use koi baukhlahat nahi thi bas jaldi thi.zor se acclerator dabane se yaha sadak kinare ki mitti kuchh zyada udi & ye halka sa gaddha ban gaya hai."

"thanx.",divya ne sari nayi jankari control room ko pahuchayi.police zor-shor se sabhi gadiyo ki talash me lagi thi.Hira ne Mahesh Arora ki di van uski factory pahuncha di thi.ballu ki gadi ab Baba ki haweli me mehfuz thi,varun ne van station ki parking me chhod di thi & uska koi irada nahi tha vapas vaha jane ka & vo gadi me jisme Anish agwa hua tha is waqt dhu-dhu karke jal rahi thi.

kidnappers bahut shatir the,aamtaur pe bachcho ko agwa karnevale savere unke school jate waqt ye galiz kaam karna pasand karte hain kyuki us waqt traffic bhi kam hota hai & police bhi utni mustaid nahi rehti lekin jin logo ko apharan ka khatra hota hai vo to us waqt apni hifazat ka intezam rakhte hain.Jasjit Pradhan bhi idhar kuchh dino se bachcho ko school chhodne & vapas lane ke waqt kisi security vale ko zarur unke sath kar deta tha magar anjali aisa nahi karti thi & isi baat ne kidnappers ko mauka diya.

vo 4 the,anish ko behsoh kar unhone backseat ke floor pe use daal 1 kambal se use dhank diya & uske upar pair rakh 2 aadmi baith gaye.sabhi ne apne naqab utar liye & apni kali t-shirts ke upar alag-2 rango ki kamize pehan li & tie laga li.sirf 1 ne high neck t-shirt pehni thi,usne 1 coat apni t-shirt ke upar daal liya tha.ab sabhi kisi daftar se nikle employees lag rahe the.vo high neck shirt vala aadmi baar-2 apni dayi banh ko chhu raha tha.vo aage ki passenger seat pe baitha tha.uske sath baitha gadi chala raha aadmi ne use dekha & sar hilaya..ye kabhi nahi sudhrega!..vo budbudaya & car ko Devalay se bahar nikalti gadiyo ki bhid me ghusa diya.

devalay ke aas-paas ke ilake ab kafi bas gaye the & is waqt sham ko devalay ke daftaro se nikla hujum apne-2 gharo ke liye un rihayshi ilako ki taraf badh jata tha.vo gadi bhi isi bhid me vaha se nikal gayi & us waqt tak police to bas 1 van ki talash me thi na ki kisi Hyundai Accent ki.kidnappers ne is gadi ko bhi bahut soch-samajh ke chuna tha.devalay se bahar nikalte hi highway pe koi 10 km chalne ke baad driver ne car ko 1 side road pe utar diya & tab tak chalta raha jab rihayshi ilako ke baad khet nahi dikhne lage.

usne car ko 1 khet ke bagal se moda & vaha tak le gaya jaha 1 jhopdinuma magar badi imarat thi.usne car roki & aas-paas dekha.jhopdi ke dusri or se 1 Innova aati dikhi.driver ke hotho pe muskan tair gayi.uske ishare pe sabhi neeche utar gaye.peechhe baithe 1 shakhs ne anish ko kambal me lapete hue hi utha liya.innova ki driver side ka darwaza khol jab use chalane vali ladki utri to accent ke driver ki muskan & badi ho gayi.peechhe khade shakhs ne anish ko innova ki dicky me daal diya.

accent ke driver ne apni gadi ko us ghas-phus ke chhappar & lakdi ki deewaro vali imarat me ghusa diya jiska istemal uska malik shayad katai ke baad fasal rakhne ke liye karta tha.tab tak vo ladki vapas innova me baith gayi thi magar is baar aage ki passenger seat pe.us ladki ne kisi daftar jane vali ladki ki tarah formal shirt & pant pehni hui thi.accent ka driver thodi der tak us imarat me raha & fir bahar aake innova start kar vapas udhar hi chal pada jidhar se vo aaye the.

car jab vapas highway pe aayi to peechhe baithe us shakhs ne jisne anish ko uthake is car me dala tha & shayad car me baithe sabhi logo me sabse kam umra ka tha,gardan ghuma ke peechhe ddekha to use door kuchh dhuan uthta dikha.vo muskura diya & apne sathiyo ko dekha.sabhi muskura rahe the.car vapas devalay ki or ja rahi thi & yehi vo baat thi joki unke plan ki sabse mazbut & kamal ki baat thi.police to yehi soch rahi thi ki agwa karke kidnappers shehar se bahar bhagenge magar kidnappers ne bilkul ulta kiya vo vapas shehar ke andar ghus rahe the.

check nake pe devalay se bahar jati gadiyo ki jum ke talashi ho rahi thi magar andar aane vali gadiyo ki taraf kisi ka dhyan nahi tha & isi baat ka fayda uthake kidnappers anish ko apni giraft me rakhne me kamyab rahe.devalay ke bahri kinare ki 1 nayi ban rahi posh colony ke 1 bungle ke andar car ghusi.car ke sare sheeshe kale the & kisi ko bhi ye nahi dikha hoga ki andar kitne log hain.bungle ke gate pe ruk car chalane vale ne khud gate khola & car ko andar kiya fir andar bane garage ka darwaza khola & fir car ko uske andar kiya.is sab ke dauran car ke andar se koi nahi utra.

garage ka darwaza lagane ke baad sare log care se utre & garage ke deewar me bane 1 darwaze se jo ghar ko garage se jodta tha,us se ghar ke andar chale gaye.car chalane vale shakhs ne unke andar jate hi fir se garage ka darwaza khola & bahar aake use lock kiya & fir ghar ke main darwaze ka tala khol andar gaya.ab agar kisi ne use dekha bhi hoga to yehi samjhega ki us ghar me 1 akela shakhs rehta hai.

"abhi bhi behosh hai?",ghar ke andra sabne fir se apne naab pehan liye the.

"haan."

"thik hai.ise iske kamre me pahuncha do."

"ok.",vo shakhs joki highneck t-shirt pehne tha,usne apni dayi banh fir se chhui.

"B,kya zarurat thi abhi un heero ko thikane lagane ki?kahi kuchh ho jata to?"

"tum hi ne kaha tha A ki hume Panchmahal me koi bhi surag nahi chhodna hai.mere paise khatm ho gaye the,jue ka karza nahi chukata to policevalo se zyada pareshani khadi kar dete vo yaha!"

"1 baar mujhse to bola hota.achha..chalo apna zakhm dikhao.",dono bungle ke 1 kamre me gaye jaha 1 first-aid box tha,"..ye to achha hua ki goli bas chhu ke nikal gayi hai..",usne patti hatake ghav ko dekha,"..hun,ab to kafi thik hai.main 1 baar fir patti kar deta hu & vo goliya khate rehna.ye kaam khatm hone tak tum fir se is hath se apne patte khelne lagoge.",dono ne thahaka lagaya.dono ko dekh ke lagta tha ki dono ki dosti kafi purani hai magar jaha B ki umra 40 ke aas-paas lagti thi vahi A ki umra 27-28 se zyada nahi.

"ise yaha rakho C..haan inhi gaddo pe.",us ladki ne kaha.teeno sidhiya utar basement me bane 1 kamre me aa gaye the.kamre me 1 deewar se laga ke 2 gadde zamin pe rakhe the.gadde ke paas ki zamin me 1 lohe ka mota pipe laga tha joki chhat tak pahucnha hua tha.pipe ke aas-paas ki zamin dekh ke lagta tha ki bas kuchh hi din pehle use cement se zamin me jaam kiya gaya hai.kamre me koi khidki nahi thi bas bilkul kone me 1 roshandan me 1 exhaust fan laga hua tha.

"E,isne apni pant gandi kar di hai.darr gaya hoga zarur."

"hun,to badal dete hain.",usne kamre me khade dusre aadmi ki or dekha to vo kamre se bahar chala gaya & 5 minute baad 1 tauliya & garm pani leke aaya.teeno ne milke anish ki pant utar uske badan pe sukh chuke uske peshab ko ponchha & fir 1 dusra tauliya uski kamar pe lapet diya fir use gadde pe lita diya.

"main yehi kehne vali thi,D.",D naam ka shakhs anish ke baye takhne me 1 patti bandh raha tha.uske baad unhone 1 lumbi zanjeer ko farsh me lage pipe ke gird 2 baar lapeta & fir uske siro ko 1 kafi bade tale se bandh diya fir 1 hathkadi li & use tale me laga diya & fir hathkadi ki dusri kadi ko anish ke patti lage takhne me bandh diya.zanjir itni badi thi ki anish uthke kamre me rakhi1 balti jo use toilet ke liye istemal karni thi,vahi taak ja sake ya fir gadde pe so sake.

anish ko bandhne ke baad teeno ne kamre ke mazbut & bhari darwaza band kiya & usme lage charo locks ko band kiya & fir upar aa gaye.

"1 baar fir hum sabhi baate dohra len.",A naam ka shakhs joki ab saaf tha ki inka sardar hai unse keh raha tha,"..jab tak hum yaha hai tab tak hum 1 dusre ko humesha A,B,C,D,E namo se hi bulayenge.bachche ke samne koi kuchh nahi bolega & humesha kale libas me & naqab lagake uske samne jayega.ghar se bahar sirf main jaoonga & kaam khatm hone pe apna-2 hissa leke hum sab yaha se alag-2 jagaho pe nikal jayenge.koi sawal?"

"haan.",ye C ki aavaz thi joki inme sabse kam umra ka tha,"..A,khane me kya hai?",uske sawal pe sabhi hans pade & rasoi ki or badh gaye.

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

"hello,Ajinkya.",DCP Verma Professor Dixit ke ghar ke darwaze pe khade the.

"hello,Pradip.",usne unhe andar bulaya.

"ajinkya,tum to jante hi ho ki main yaha kyu aaya hu.",professor ne kuchh jawab nahi diya bas apne hall me bane bar pe jake apne dost ke liye drink banane laga.

"to tum mera jawab bhi jante hoge,pradip.",professor ne glass DCP sahab ko thamaya.

"haan magar aaj main naa sunane nahi aaya hu."

"please,pradip.",professor ne 1 ghunt me apna glass khali kar diya.

"kab tak aise khud se bhagoge,ajinkya?",verma sahab ne apne dost ke kandhe pe hath rakha,"..ye tumhara ghar hai magar tumne pichhle 15 salo me ise kisi hotel ki tarah istemal kiya hai.is shehar me aate ho,2-3 mahino bad chale jate ho.kya main iski wajah nahi janta?..magar kab tak yu bhagte rahoge,ajinkya.please,ajinkya us bachche ke bare me socho,uske maa-baap ke bare me socho.",professor bar pe jhuka apne dost ki taqrir sun raha tha.

"pradip,fir se vahi sab..vahi dard.."

"nahi,is baar nahi mere dost,is baar nahi.",professor bar pe jhuk apne hatho me apna chehra chhupaye na jane kitni der tak khada raha.

"thik hai,pradip.main ye kaam karunga magar meri kuchh sharte hain."

"thik hai,mere sath JCP sahab ke paas chalo."

--------------------------------------------------------------------------------------------------------

kaamuk kahaaniyaan

--------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah........


raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 15:54

खेल खिलाड़ी का पार्ट--45

गतान्क से आगे............-

अजीत प्रधान के बंगल के सारे स्टाफ से पुच्छ चुका था.आमतौर पे किडनॅपिंग केसस मे सबसे पहला शक़ परिवार वालो & करीबी लोगो पे ही जाता है.नीना & मुकुल भी श्लोक के साथ वाहा मौजूद थे.अजीत ने उनसे भी बात की थी मगर उसे यहा कुच्छ गड़बड़ नही लगी थी.

"सर,वो लोक विकास की राम्या सेन आई हैं.कहती हैं कि अंजलि जी से बिना मिले नही जाएँगी."

"अरे,उन्हे समझाओ ना!",अजीत हवलदार पे झल्लाया,"..जिस मा के हाथो से बच्चे को छिना गया है उसका क्या हाल होगा!"

"मैं अच्छे से जानती हू,ऑफीसर.",राम्या हवलदार के पीछे हॉल तक आ गयी थी,"..मैं भी 1 माँ हू."

हा..",अजीत ने सांस भरी,"..ठीक है,आप प्रधान जी से मिल लीजिए फिर जैसा वो चाहें."

"ओके.",उन्हे अंदर जानेकी ज़रूरत नही पड़ी जसजीत वही आ गया था.

"नमस्ते,प्रधान जी.मैं जानती हू कि इस मुश्किल वक़्त मे मैं बस आपको अपने लफ़ज़ो से ही सहारा दे सकती हू."

"राम्या जी,इनका सहारा भी कोई कम नही होता है."

"प्रधान साहब,नारी उत्थान समिति के सिलसिले मे ही अंजलि जी & हमारी जान-पहचान गहरी हुई & मैं इस वक़्त उनका दर्द बहुत अच्छे से समझती हू."

"जी,राम्या जी.बहुत परेशान है वो.खुद को ज़िम्मेदार समझ रही है इस हादसे का.कहती है कि उसने अपने हाथो से अपने बच्चे को उन दरिंदो के हवाले कैसे कर दिया..बड़ी मुश्किल से डॉक्टर्स ने उसे दवा देके शांत किया है..वरना मैं आपको मिलवा देता उनसे."

"कोई बात नही,प्रधान जी.अगर मैं आपके किसी काम आ सकु तो ज़रूर याद करें."

"शुक्रिया,राम्या जी."

"सर,CM साहब आ रहे हैं.",राम्या के जाते ही प्रधान का पीए & अजीत के कॉन्स्टेबल ने 1 साथ दोनो को खबर दी.अजीत 1 कोने मे खड़ा हो गया.

"प्रधान साहब,मैने कमिशनर से खुद बात की है & पल-2 की खबर ले रहा हू..",CM मधुकर अत्रे सेक्रेटरी अवस्थी के साथ हॉल मे आया,"..हिम्मत रखिए बहुत जल्द ही अनीश हमारे साथ होगा.",तीनो बाते करने लगे तो अजीत के मन मे 1 ख़याल आया.वो हाल से बाहर आया & उसे बाहर ही सतपाल खड़ा मिल गया.

"सतपाल."

"साहब."

"CM साहब शाम को 6 बजे कहा थे?",सतपाल ने सर झुका लिया & खामोश हो गया.

"जी.."

"झिझको मत सतपाल.बोलो."

"जी..ग्लोरीया अपार्टमेंट."

"हूँ..ठीक है."

अजीत बंगले के लॉन मे आ गया & 1 सिगरेट सुलगा ली.उसके ज़हन मे 2 दिन पहले मुर्शिद से की गयी पुच्छ-ताछ घूम रही थी,"देखो,मुर्शिद.मैं जानता हू कि तुम अभी भी कुच्छ च्छूपा रहे हो."

"साहब,मैने सब बता दिया है आपको.",मुर्शिद गिड़गिडया.

"देखो,मैं समझता हू तुम्हारी मुश्किल इसलिए मैं बस सवाल करूँगा & तुम बस हा या ना मे सर हिलाना.इस तरह ना तुम्हे कुच्छ बोलना पड़ेगा ना कोई मुश्किल होगी. ठीक है?",मुर्शिद ने हां मे सर हिलाया.

"मुर्शिद,वो जो टेंटवल्ला & आर्म्स डीलर के साथ तुम्हारी मीटिंग थी वो तुम आनेवाले एलेक्षन्स के किसी काम के सिलसिले मे कर रहे थे?",मुर्शिद ने हा मे सर हिलाया.

"तुमसे सबसे पहले कॉंटॅक्ट किया टेंटवल्ले ने?",सर फिर हा मे हिला.

"लेकिन तुमने उसे मना कर दिया क्यूकी तुम्हे उसपे यकीन नही था?",फिर से हां.

"तो उसने 1 ऐसे शख्स का नाम लिया जिसे सुन तुम्हारी आँखे हैरत से ज़रूर फैली होंगी?",उस वक़्त का तो पता नही लेकिन हवालात मे अजीत के सामने मुर्शिद की आँखे ज़रूर फैल गयी थी अचंभे से.उसने हा मे सर हिलाया.

"उसने तुम्हे किसी तरह भरोसा दिलाया कि वो ताक़तवर शख्स ही ये काम करवाना चाहता है?",जवाब हा था.

"तुम्हे काम पता था क्या है?",उसने सर इनकार मे हिलाया.

"तो उस दिन की मीटिंग के बाद पता चलता?",जवाब 1 बार फिर से हां था.

"वो ताक़तवर शख्स कौन है मुर्शिद.कोई पोलिसेवला?",इनकार मे सर हिला.

"कोई सरकारी अफ़सर?",फिर से ना.

"कोई व्यापारी,बिज़्नेसमॅन?",1 बार फिर ना.

"कोई नेता?",बहुत धीरे से मुर्शिद ने हां मे सर हिलाया.

"कितना बड़ा,मुनिसिपल कॉर्पोरेशन के दर्जे का?",जवाब ना था.

"तो डिस्ट्रिक्ट लेवेल का?",फिर से ना.

"राज्य के लेवेल का?",मुर्शिद थोड़ी देर ऐसे ही बैठा रहा फिर उसने हा मे सर हिलाया.

"राजाइया मे कितना ऊँचा?क्या वो सरकार मे है?",जवाब हा था.

"कैसा मिनिस्टर है?छ्होटा-मोटा?",जवाब ना था.

"तगड़ा?",जवाब हा था.

"कितना तगड़ा?उपर से कौन से दर्जे पे रखें उसे?तीसरे?",जवाब ना था.

"दूसरे?",फिर से ना.

"पहले?सबसे ऊँचा?",बहुत हल्के से मुर्शिद ने हा मे सर हिलाया.

"शुक्रिया,मुर्शिद.अब तुम यहा महफूज़ हो."

हो ना हो CM अत्रे का इस आपहरण से कोई ना कोई लिंक तो है..वो सिगरेट का आख़िरी कश ले रहा था..अत्रे के पास वजह भी माकूल थी..क्या उसे वेर्मा साहब को सब बता देना चाहिए लेकिन अगर वो ज़रा भी ग़लत हुआ तो उसका करियर चौपट हो जाएगा..लेकिन फिर आज अत्रे ग्लोरीया क्यू गया था?..नही इस वक़्त उसे अत्रे पे खुद ही नज़र रखनी होगी & ठोस सबूत हाथ लगते ही वेर्मा साहब को इत्तिला देनी होगी.उसने सिगरेट लॉन की घास पे फेंक उसे मसला & वापस अंदर चला गया.

"बोलो अजिंक्या..",जेसीपी सिंग अपनी कुर्सी पे पीछे आड़ के बैठे थे,तनाव & थकान अब उनके चेहरे पे सॉफ झलक रहे थे,"..क्या शर्तें हैं तुम्हारी?"

"सबसे पहले तो मुझे अभी तक की सारी जानकारी चाहिए ना केवल अपहरण के बारे मे बल्कि बच्चे के स्कूल,उसके दोस्त & सबसे ज़रूरी उसके मा-बाप के बारे मे."

"मा-बाप तो माशूर हस्ती हैं,अजिंक्या.उनके बारे मे क्या जानना चाहते हो?"

"सर,हर इंसान के कुच्छ राज़ होते हैं & हो सकता है कि मा-बाप की किसी ग़लती की सज़ा बेचारा बच्चा भुगत रहा हो तो जैसे ही आपके लोगो को उनके बारे मे कुच्छ भी पता चले,मुझे ज़रूर बताएँ.मुझसे कुच्छ भी ना च्छुपाएँ."

"ओके.तुम्हे पूरे प्रधान परिवार के पिच्छले 2 से 3 महीने तक की मूव्मेंट्स & आने-जाने वकली जगहो,उनके करीबी लोग & बाकी जानकारी की फाइल दे दी जाएगी.और क्या चाहिए?"

"अभी तक अगवा करने वालो ने कोई फोन किया है या नही?"

"नही.ये तो हम सब अच्छे से जानते हैं कि जब तक मा-बाप पूरी तरह परेशान ना हो जाएँ,वो फोन करके अपनी माँग सामने नही रखेंगे."

"ह्म्म..मैं ये चाहता हू,सर की आप अभी सारे न्यूज़ चॅनेल्स & अख़बार वालो से बात करें कि वो इस केस के बारे मे बस रिपोर्ट करें अपनी अटकले ना लगाएँ.वो लोग टीवी & अख़बार के ज़रिए हमारी खबर ले रहे होंगे या फिर घर का कोई करीबी अगर मिला है तो उस से.ऐसे मे 1 छ्होटी सी अफवाह भी बच्चे के लिए ख़तरनाक हो सकती है."

"अजिंक्या,कमिशनर साहब ने पहले इस बारे मे सोच लिया था & अभी वो अपने दफ़्तर मे बैठे उन्ही लोगो को फोन कर रहे हैं."

"गुड,सर.मैं चाहता हू कि आप मुझे & मेरे साथियो को 1 ऐसे घर मे रखें जिसका पता कोई ना जानता हो.1 फोन नंबर मुझे दीजिए जिसकी 5-6 लाइन्स हो ताकि कोई भी कॉल करे तो नंबर मिल जाए."

"मगर क्यू,अजिंक्या?किडनॅपर्स प्रधान साहब के घर पे फोन करे तो क्या हर्ज़ है?"

"सर,उनका अपना खून मुसीबत मे है.वो नीच लोग जो भी कहेंगे वो मान लेंगे & उसके बाद भी उसके बचने की गॅरेंटी कितनी है हम अच्छे से जानते हैं..",सभी खामोश हो गये,बात बिल्कुल सही थी.अपनी जान बचाने के लिए वो बच्चे की जान लेने मे हिचकते तो बिल्कुल नही,"..इसलिए बेहतर होगा कि ये काम उनकी नज़रो से दूर हो & अगर कोई घर का आदमी इस गुनाह के पीछे है तो वो भी हमारी खबर उन तक नही पहुँचा सकता.."

"..आप बस नंबर को सारे न्यूज़ चॅनेल्स & अख़बारो मे दे दीजिए.टीवी वाले लगातार उस नंबर को दिखाएँगे & उसके बारे मे बताएँगे कि किडनॅपर्स उस नंबर पे बात करें.यही काम हर अख़बार के पहले पन्ने पे होगा."

"ओके लेकिन इस बारे मे 1 बार कमिशनर साहब से पुच्छना होगा &.."

"& क्या सर?"

"बच्चे के पिता से भी तो पुच्छना ही होगा ना."

"सर,मैं ये काम तब तक नही करूँगा जब तक कि जसजीत प्रधान मुझे इसकी इजाज़त खुद ना दें.मेरी अगली शर्त यही होने वाली थी."

"ठीक है तो तुम यहा से सीधा वाहा जाओ."

"2 शर्तें और हैं सर."

"बोलो."

"मैं एसीपी दिव्या माथुर को अच्छी तरह से जानता हू & चाहता हू कि आप उन्ही को मेरे साथ रखें."

"ठीक है."

"सर,मेरा काम बस बच्चे को सही सलामत वापस लाना है.उसके लिए मैं कुच्छ भी करू,उन किडनॅपर्स की जो भी बात मानु,उसपे कोई सवाल नही उठेंगे."

"मगर..",कमरे मे 1 और सीनियर अफ़सर बैठा था & उसने सवाल उठाया ही था मगर जेसीपी साहब ने उसे रोक दिया.

"मेरी जासूसी नही की जाएगी & मैं जो मांगू मिलेगा & हमारे अलावा किसी को भी पता नही चलना चाहिए कि मैं ये काम कर रहा हू."

"ठीक है."

"तो मैं काम शुरू करता हू,सर ."

"गुड लक,अजिंक्या.",दोनो ने हाथ मिलाया.

"थॅंक यू,सर.",वो जानता था कि इस शुभकामना की उसे बहुत ज़रूरत थी.

--------------------------------------------------------------------------------------------------------

कामुक कहानियाँ

--------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--45

gataank se aage............-

Ajit pradhan ke bungle ke sare staff se puchh chuka tha.aamtaur pe kidnapping cases me sabse pehla shaq parivar valo & karibi logo pe hi jata hai.Nina & Mukul bhi Shlok ke sath vaha maujood the.ajit ne unse bhi baat ki thi magar use yaha kuchh gadbad nahi lagi thi.

"sir,vo Lok vikas ki Ramya Sen aayi hain.kehit hain ki anjali ji se bina mile nahi jayengi."

"are,unhe samjhao na!",ajit hawaldar pe jhallaya,"..jis maa ke hatho se bachche ko chhina gaya hai uska kya haal hoga!"

"main achhe se janti hu,officer.",ramya hawaldar ke peechhe hall tak aa gayi thi,"..main bhi 1 maan hu."

huh..",ajit ne sans bhari,"..thik hai,aap pradhan ji se mil lijiye fir jaisa vo chahen."

"ok.",unhe andar janek kiz arurat nahi padi jasjit vahi aa gaya tha.

"namaste,pradhan ji.main janti hu ki is mushkil waqt me main bas main bas aapko apne lafzo se hi sahar de sakti hu."

"ramya ji,inka sahara bhi koi kam nahi hota hai."

"pradhan sahab,Nari Utthan Samiti ke silsile me hi anjali ji & humari jaan-pehchan gehri hui & main is waqt unka dard bahut achhe se samajhti hu."

"ji,ramya ji.bahut pareshan hai vo.khud ko zimmedar samajh rahi hai is hadse ka.kehti hai ki usne apne hatho se apne bachche ko un darindo ke hawale kaise kar diya..badi mushkil se doctors ne use dawa deke shant kiya hai..varna main aapko milwa deta unse."

"koi baat nahi,pradhan ji.agar main aapke kisi kaam aa saku to zarur yaad karen."

"shukriya,ramya ji."

"sir,CM sahab aa rahe hain.",ramya ke jate hi pradhan ka PA & ajit ke constable ne 1 sath dono ko khabar di.ajit 1 kone me khada ho gaya.

"pradhan sahab,maine commissioner se khud baat ki hai & pal-2 ki khabar le raha hu..",CM Madhukar Atre secretary Awasthi ke sath hall me aaya,"..himmat rakhiye bahut jald hi anish humare sath hoga.",teeno baate karne lage to ajit ke man me 1 khayal aaya.vo haal se bahar aaya & use bahar hi Satpal khada mil gaya.

"Satpal."

"sahab."

"CM sahab sham ko 6 baje kaha the?",satpal ne sar jhuka liya & khamosh ho gaya.

"ji.."

"jhijhko mat satpal.bolo."

"ji..gloria Apartment."

"hun..thik hai."

Ajit bungle ke lawn me aa gaya & 1 cigarette sulga li.uske zehan me 2 din pehle Murshid se ki gayi puchh-tachh ghum rahi thi,"dekho,murshid.main janta hu ki tum abhi bhi kuchh chhupa rahe ho."

"sahab,maine sab bata diya hai aapko.",murshid gidgidaya.

"dekho,main samajhta hu tumhari mushkil isliye main bas sawal karunga & tum bas haa ya naa me sar hilana.is tarah na tumhe kuchh bolna padega na koi mushkil hogi. thik hai?",murshid ne aahn me sar hilaya.

"murshid,vo jo tentwalla & arms dealer ke sath tum,hari meeting thi vo tum aanevale elections ke kisi kaam ke silsile me kar rahe the?",murshid ne haa me sar hilaya.

"tumse sabse pehle contact kiya tentwalle ne?",sar fir haa me hila.

"lekin tumne use mana kar diya kyuki tumhe uspe yakin nahi tha?",fir se haan.

"to usne 1 aise shakhs ka naam liya jise sun tumhari aankhe hairat se zarur faili hongi?",us waqt ka to pata nahi lekin hawalat me ajit ke samne murshid ki aankhe zarur fail gayi thi achambhe se.usne haa me sar hilaya.

"usne tumhe kisi tarah bharosa dilaya ki vo taqatwar shakhs hi ye kaam karwana chahta hai?",jawab haa tha.

"tumhe kaam pata tha kya hai?",usne sar inkar me hilaya.

"to us din ki meeting ke baad pata chalta?",jawab 1 baar fir se haan tha.

"vo taqatwar shakhs kaun hai murshid.koi policewala?",inkar me sar hila.

"koi sarkari afsar?",fir se naa.

"koi vyapari,businessman?",1 baar fir naa.

"koi neta?",bahut dhire se murshid ne haan me sar hilaya.

"kitna bada,municipal corporation ke darje ka?",jawab na tha.

"to district level ka?",fir se naa.

"rajya ke level ka?",murshid thodi der aise hi baitha raha fir usne haa me sar hilaya.

"rajya me kitna ooncha?kya vo sarkar me hai?",jawab haa tha.

"kaisa minister hai?chhota-mota?",jawab na tha.

"tagda?",jawab haa tha.

"kitna tagda?upar se kaun se darje pe rakhen use?teesre?",jawab na tha.

"dusre?",fir se naa.

"pehle?sabse ooncha?",bahut halke se murshid ne haa me sar hilaya.

"shukriya,murshid.ab tum yaha mehfuz ho."

ho na ho CM Atre ka is apharan se koi na koi link to hai..vo cigarette ka aakhiri kash le raha tha..atre ke baad vajah bhi makul thi..kya use Verma sahab ko sab bata dena chhaiye lekin agar vo zara bhi galat hua to uska career chaupat ho jayega..lekin fir aaj atre gloria kyu gaya tha?..nahi is waqt use atre pe khud hi nazar rakhni hogi & thos saboot hath lagte hi verma sahab ko ittila deni hogi.usne cigarette lawn ki ghas pe fenk use masla & vapas andar chala gaya.

"Bolo Ajinkya..",JCP Singh apni kursi pe peechhe ad ke baithe the,tanav & thakan ab unke chehre pe saaf jhalak rahe the,"..kya sharten hain tumhari?"

"sabse pehle to mujhe abhi tak ki sari jankari chahiye na kewal apharan ke bare me balki bachche ke school,uske dost & sabse zaruri uske maa-baap ke bare me."

"maa-baap to mashoor hasti hain,ajinkya.unke bare me kya jaanana chahte ho?"

"sir,har insan ke kuchh raaz hote hain & ho sakta hai ki maa-baap ki kisi galti ki saza bechara bachcha bhugat raha ho to jaise hi aapke logo ko unke bare me kuchh bhi pata chale,mujhe zarur batayen.mujhse kuchh bhi na chhupayen."

"ok.tumhe pure Pradhan parivar ke pichhle 2 se 3 mahine tak ki movements & aane-jane vakli jagaho,unke karibi log & baki jankari ki file de di jayegi.aur kya chahiye?"

"abhi tak agwa karne valo ne koi fone kiya hai ya nahi?"

"nahi.ye to hum sab achhe se jante hain ki jab tak maa-baap puri tarah pareshan na ho jayen,vo fone karke apni mang samne nahi rakhenge."

"hmm..main ye chahta hu,sir ki aap abhi sare news channels & akhbar valo se baat karen ki vo is case ke bare me bas report karen apni atkale na lagayen.vo log tv & akhbar ke zariye humari khabar le rahe honge ya fir ghar ka koi karibi agar mila hai to us se.aise me 1 chhoti si afwah bhi bachche ke liye khatarnak ho sakti hai."

"ajinkya,commissioner sahab ne pehle is bare me soch liya tha & abhi vo apne daftar me baithe unhi logo ko fone kar rahe hain."

"good,sir.main chahta hu ki aap mujhe & mere sathiyo ko 1 aise ghar me rakhen jiska pata koi na janta ho.1 fone number mujhe dijiye jiski 5-6 lines ho taki koi bhi call kare to number mil jaye."

"magar kyu,ajinkya?kidnappers pradhan sahab ke ghar pe fone kare to kya harz hai?"

"sir,unka apna khun musibat me hai.vo neech log jo bhi kahenge vo maan lenge & uske baad bhi uske bachne ki guarantee kitni hai hum achhe se jante hain..",sabhi khamosh ho gaye,baat bilkul sahi thi.apni jaan bachane ke liye vo bachche ki jaan lene me hichakte to bilkul nahi,"..isliye behtar hoga ki ye kaam unki nazaro se door ho & agar koi ghar ka aadmi is gunah ke peechhe hai to vo bhi humari khabar un tak nahi pahuncha sakta.."

"..aap bas number ko sare news channels & akhbaro me de dijiye.tv vale lagatar us number ko dikhayenge & uske bare me batayenge ki kidnappers us number pe baat karen.yehi kaam har akhbar ke pehle panne pe hoga."

"ok lekin is bare me 1 baar commissioner sahab se puchhna hoga &.."

"& kya sir?"

"bachche ke pita se bhi to puchhna hi hoga na."

"sir,main ye kaam tab tak nahi karunga jab tak ki Jasjit Pradhan mujhe iski ijazat khud na den.meri agli shart yehi hone wali thi."

"thik hai to tum yaha se seedha vaha jao."

"2 sharten aur hain sir."

"bolo."

"main ACP Divya Mathur ko achhi tarah se janta hu & chahta hu ki aap unhi ko mere sath rakhen."

"thik hai."

"sir,mera kaam bas bachche ko sahi salamat vapas lana hai.uske liye main kuchh bhi karu,un kidnappers ki jo bhi baat manu,uspe koi sawal nahi uthenge."

"magar..",kamre me 1 aur senior afsar baitha tha & usne sawal uthaya hi tha magar JCP sahab ne use rok diya.

"meri jasusi nahi ki jayegi & main jo mangu milega & humare alawa kisi ko bhi pata nahi chalna chahiye ki main ye kaam kar raha hu."

"thik hai."

"to main kaam shuru karta hu,sir ."

"good luck,ajinkya.",dono ne hath milaya.

"thank you,sir.",vo janta tha ki is shubhkamna ki use bahut zarurat thi.

--------------------------------------------------------------------------------------------------------

kaamuk kahaaniyaan

--------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah........