खेल खिलाड़ी का compleet

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 15:48

खेल खिलाड़ी का पार्ट--40

गतान्क से आगे............-

दिव्या ने पोटली खोली तो उसमे से 2 हीरे निकाले जिन्हे उसने प्रोफेसर दीक्षित की ओर बढ़ा दिया.उसने उन्हे देख बस सर हिला दिया.दिव्या ने अपने बॅग से उस हार की तस्वीर निकाली जोकि सेठ मोहन लाल की दुकान से लूटा गया था,"देखिए,हीरे बिल्कुल वैसे ही हैं."

"यानी हार तोड़ के हीरे-पन्ने बेचे जा रहे हैं.",फ़राज़ तस्वीर देख रहा था,"दिव्या जी,मैं अपने आदमियो को इस पैसे का पता लगाने के लिए लगा देता हू.इस वक़्त पूरे शहर की पोलीस 1 ऐसे आदमी की तलाश मे है जिसकी दाई बाज़ू पे गोली लगी है.साथ ही उसकी बाइक & उसके हुलिए की पूरी जानकारी उनके पास है.हुमारी गिरफ़्त मे आते ही हम आपको ज़रूर इत्तिला करेंगे."

"थॅंक यू.हम भी वापस डेवाले लौट रहे हैं & अगर हमे कुच्छ पता चला तो हम भी आपके साथ ज़रूर उसे बाँटेगे.",दिव्या अपना बॅग उठाके खड़ी हो गयी थी मगर प्रोफेसर वैसे ही बैठा हुआ था.

"आप दोनो को क्या लगता है..",वो अपने पुराने अंदाज़ मे अपने होठ के उपर अपनी उंगली & अंगूठा फिरा रहा था,"..इतने दीनो की खामोशी के बाद अचानक ये हीरे बेचने की ऐसी कौन सी ज़रूरत आ पड़ी थी उसे?",उसने दोनो की ओर देखा,"..& वो अकेला केवल अपने हिस्से का माल बेच रहा था या अपने पूरे गॅंग के लिए वाहा आया था?"

"ये तो उसके पकड़ मे आने के बाद ही साफ होगा.",फ़राज़ मुस्कुराया.

"फिर भी एसीपी साहब आप सोचते क्या हैं?"

ह्म्म..",फ़राज़ ने सांस भरी,"..मैं सोचता हू कि वो अकेला अपने हिस्से के हीरे बेच रहा था.मुझे नही लगता कि अगर 5 लोगो का गॅंग है तो वो ऐसे काम मे अपने साथी को यू अकेला भेजेंगे.1 तो ख़तरा है दूसरे पैसो के मामले शरीफ लोग किसी का भरोसा नही करते ये तो फिर भी बदमाश हैं."

"तो क्या गॅंग टूट चुका है?"

"हो सकता है & नही भी.हो सकता है इतना लंबा हाथ मारने के बाद सब आराम कर रहे हैं & इस शख्स को जिसे आज गोली लगी है,कोई ज़रूरत आन पड़ी हो या फिर उसने सारे पैसे उड़ा दिए हो."

"हूँ,वैसे 1 बात है जो मैने आपलोगो को अभी तक नही बताई है."

"क्या?",दिव्या & फ़राज़ 1 साथ बोले.

"उसके गले पे 1 टॅटू था."

"क्या?कैसा?..उसका डिज़ाइन बताइए..पोलीस आर्टिस्ट को बुलाओ..",फ़र्ज़ ने हुक्म दिया,"..फ़ौरन..!"

"उसकी ज़रूरत नही,मैं ही बना देता हू स्केच.",प्रोफेसर ने पॅड & पेन्सिल उठा लिया & हाथ चलाने लगा,"..उसकी गर्दन पे ठीक नीचे गर्दन के गिर्द टॅटू ऐसे बना था जैसे उसने कोई चॉकर पहना हो.पीछे से मुझे लगा भी कि उसने चॉकर पहना है मगर वो 1 साँप का टॅटू था जोकि उसके गले के गिर्द लिपटे बैठा था & उसका मुँह सामने ..",प्रोफेसर ने अपने गले के नीचे के गड्ढे के ठीक उपर इशारा किया,"..यहा ऐसे था..",उसने स्केच बनाया,"..सामने देखता हुआ फन काढ़े हुए."

"ग्रेट प्रोफेसर!फ़ौरन ये जानकारी विरेलेस्स पे दो.",फ़राज़ ने हुक्म सुनाया.प्रोफेसर डिक्सिट मुस्कुराया & उस से हाथ मिलके अपनी प्रेमिका के साथ वाहा से निकल आया.

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"जैसे बताया था,फोटो वैसे ही वापस रख दी ना",अपने ड्रॉयिंग रूम मे नीना बिल्कुल नंगी सोफे पे बैठी थी.उसने बाई टांग सोफे के उपर तलवा जमा के रखी थी & दाई गाळीचे पे.उसके दाए हाथ मे रिमोट था & वो टीवी के चॅनेल चेंज कर रही थी.

"हूँ.",उसके सामने अपने घुटनो पे उसके जैसे ही नंगा बैठा हीरा अपनी जीभ से उसकी दाई अन्द्रुनि जाँघ चाट रहा था,"..उसकी मेज़ की दराज़ के अंदर जो आल्बम का आख़िरी पन्ना था उसकी निचली 2 फोटोस के बीच मे.",उसकी लपलपाति जीभ नीना की गुलाबी चूत पे पहुँच गयी & उसे चाटने लगी.

"उउन्न्ञणन्..गुड..",नीना कसमसाई & अपनी दाई टांग उठा हीरा के बाए कंधे के उपर चढ़ा दी.वो तस्वीर बड़ी काम की थी.उसने उसकी कॉपी बनवा के उसे वापस महेश अरोरा के घर मे रखवा दिया था.अब ये सोचना था कि उस तस्वीर का इस्तेमाल कैसे किया जाए.हीरा की लपलपाति जीभ ने उसके जिस्म को पूरी तरह से मस्त कर दिया था.उसकी चूत से रस बहने लगा था & वो सोफे पे रखी हुई अपनी मखमली गंद धीरे-2 हिला रही थी.उसने चैनल चेज किए & स्क्रीन पे बलदेव काबरा उर्फ भाय्या जी नज़र आने लगे & उसके दिमाग़ मे 1 तरकीब आ गयी.उसका दिल घुशी से झूम उठा.अब उसका काम हो जाएगा.

उसी वक़्त हीरा की जीभ ने अपना कमाल दिखाया & वो झाड़ गयी.उसके झाड़ते ही हीरा खड़ा हो गया & उसकी दोनो टाँगे फैला दी & अपना लंड उसकी चूत मे घुसाते हुए उसके उपर झुक गया....ये कमीना & महेश बस चुनाव तक उसके काम के थे,1 बार मुकुल जीत जाए बस....".ऊव्ववव....!",हीरा ने अपना तगड़ा लंड बड़ी ज़ोर से अंदर धकेला तो रिमोट गाळीचे पे गिरा उसने अपनी बाहे उसकी गर्दन मे डाल दी & उसके चौड़े कंधे सहलाने लगी..उसके बाद इन्हे वो दूध मे पड़ी मक्खी की तरह निकाल फेंकेगी..तब तक जसजीत भी हार चुका होगा & डेवाले सिर्फ़ उसका होगा..सिर्फ़ उसका..!

मगर तब तक इन दोनो मर्दो को काबू मे रखना ज़रूरी था..",ओह.....हीरा..",नीना ने अपना गाल उसके गाल से सटा के रगड़ा & उसकी पीठ पे ऐसी अड़ा से अपने हाथ चलाए कि हीरा तो बस खुशी से पागल हो गया,"..आन्न्न्नह...ज़ोर से...और ज़ोर से.....हाआंन्‍नणणन्......हीराआआ.......!",वो मस्ती मे पागल होने का नाटक करती आहे निकालने लगी & उस से चिपेट गयी.हीरा ये सोच के जोश से पागल हुए जा रहा था कि ऐसी रईस,खूबसूरत,ऊँची सोसाइटी की औरत उसके जिस्म,उसकी चुदाई से मस्ती मे बहाल हो रही है जबकि उसके बाए कंधे पे ठुड्डी टिकाए वो बस टीवी पे नज़र आ रहे भाय्या जी को देख रही थी.

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स्ट्रीट.पॅट्रिक'स कॉलेज के मैं गेट पे गाडियो की लंबी कतार अंदर जाने का इंतेज़ार कर रही थी.आज आन्यूयल चॅरिटी बॉल था जिसमे केवल पुराने स्टूडेंट्स को ही आने की इजाज़त थी & स्टूडेंट्स भी इस खास मौके मे ज़रूर शरीक होते थे.सभी को टिकेट खरीदना होता था & इन टिकेट्स की बिक्री से जमा हुए पैसे ज़रूरतमंडो के भले मे लगाए जाते थे.आज शाम भी हर साल की तरह सभी यहा इकट्ठा होते थे उसके बाद कुच्छ गेम्स खेले जाते थे,2-3 लोग भाषण देते थे & उसके बाद खाना होता था लेकिन सबसे ज़रूरी चीज़ होती थी खाने के ठीक पहले का बॉल.आज से 100 साल पहले कॉलेज के तब के प्रिन्सिपल ने इस बॉल की शुरुआत की थी.तब तो केवल अँग्रेज़ ही इसका हिस्सा होते थे & बॉल डॅन्स उनकी तहज़ीब का हिस्सा था लेकिन आज भी उस बरसो पुरानी परंपरा को कॉलेज ने अपनाया हुआ था & इसमे शामिल होने वाले सभी लोगो को भी इसमे काफ़ी मज़ा आता था.

आज की शाम तो 1 ही इंसान सभी की नज़रो का केन्द्र बना हुआ था-जसजीत प्रधान.सभी को उमीद थी कि अगला CM वही बनेगा & इसलिए सभी उसके करीब आना चाह रहे थे.जसजीत के भी यहा आने का मक़सद केवल इस नेक काम का हिस्सा बनना नही था.वो सबसे पहले 1 राजनेता था & उसके लिए सबसे ज़रूरी चीज़ आने वाला चुनाव जितना था.सबसे ज़रूरी था कि उसे हमारे समाज के सबसे नीचे तबके के लोगो का साथ मिले & इसलिए अपनी हर तक़रीर मे वो वो ज़्यादातर उनके भले & फ़ायदे की ही बात करता था लेकिन इस सबसे ऊँचे,रईस तबके को भी वो नज़रअंदाज़ नही कर सकता था जिसके दिए गये पैसो से ही वो ये चुनाव लड़ पाता था & ये बॉल उन लोगो से मिल उनका शुक्रिया अदा करने का सबसे बढ़िया मौका था.

"लॅडीस & गेंटल्मन..",लोगो से घिरे जसजीत & अंजलि ने जब फादर विनसेंट की आवाज़ माइक पे सुनी तो उनका ध्यान उधर गया,"..अब मैं आज की शाम के हमारे खास मेहमान & उनकी पत्नी को यहा बुलाना चाहूँगा.प्लीज़ वेलकम मिसेज़.अंजलि & मिस्टर.जसजीत प्रधान.",तालियो की गड़गड़ाहट के बीच पति-पत्नी फादर के पास पहुँचे,"..प्लीज़ लेड दा कपल्स ऑन दा फ्लोर.",फादर के इशारे पे जसजीत & अंजलि सबसे पहले डॅन्स फ्लोर पे पहुँचे & उसके बीचोबीच खड़े हो गये.उनके पीछे बाकी जोड़े भी वाहा आए & बॅंड ने म्यूज़िक बजाना शुरू कर दिया जिसकी ताल पे जोड़ो ने बॉल डॅन्स शुरू किया.

अंजलि ने क्रीम कलर की सारी पहनी थी & स्लीव्ले ब्लाउस.उस लिबास मे उसका गोरा रंग और चमक रहा था.पति के साथ यू सबके सामने बाहो मे बाहे डाल के नाचने से उसे थोड़ी शर्म आ रही थी & उसके गोरे रंग के साथ घुली हया की लाली ने उसके रूप को और भी दिलकश बना दिया था,"ऐसे मत देखो ना.कोई देख लेगा तो!",पति की तारीफ भरी निगाहो का रुख़ उसने मोड़ने की कोशिश की.

"तो क्या हुआ?अपनी बीवी को ही देख रहा हू...",जसजीत ने बीवी की संगमरमरी कमर को हल्के से दबाया,"..& मुझे टोक रही हो,उनको को कुच्छ क्यू नही कहती जो तुम्हे देखे जा रहे हैं?"

"मुझे बस तुमसे मतलब है,उनसे नही.",अंजलि मुस्कुराइ....जसजीत के हाथो की छुअन मे कितना सुकून था.

"अच्छा?"

"हां.",तभी जसजीत के चेहरे का रंग बदल गया & मुस्कान गायब हो गयी.

"क्या हुआ?",अंजलि ने पति की नज़रो का पीछा किया तो उसे नाचते हुए पास आ गया 1 जोड़ा दिखा-ये नीना & मुकुल थे.

"हाई!नीना..हाई!मुकुल भाय्या..कैसे हैं?",अंजलि मुस्कुराइ.

"हाई.",नीना ने ठंडे पन से जवाब दिया.आसमानी रंग के 1 स्ट्रॅप वाले लंबे,फ्लोयिंग गाउन मे वो भी बड़ी खूबसूरत लग रही थी.

"अच्छा हू,भाभी.तुम कैसी हो?"

"बढ़िया.नीना,तुम बड़ी खूबसूरत लग रही हो?",जसजीत भाई को देख भी नही रही थी.

"थॅंक्स.",मुकुल ने बीवी से कुच्छ कहा जो शायद उसे पसंद नही आया लेकिन फिर भी उसने शायद बात मान ली.

"भाय्या,मे आइ?",भाभी के साथ डॅन्स की इजाज़त माँगता मुकुल भाई के पीच्चे खड़ा था.जसजीत को भी मजबूरन उसकी बात माननी पड़ी & उसने अपने छ्होटे भाई की बीवी की ओर हाथ बढ़ाया.

"भाभी,भाय्या मुझसे नाराज़ है ना?",अंजलि ने कोई जवाब नही दिया.

"भाभी,मैं मजबूर था.मेरे भी कुच्छ अरमान है.मैं तो भाय्या के खिलाफ जाने की सोच भी नही सकता इसलिए तो बद्डल से इनडिपेंडेंट खड़ा हो गया."

"भाय्या,1 बार उनको बोल तो देते.",अंजलि ने देवर को देखा.

"भाभी,आपसे मैने कभी कुच्छ च्छुपाया है.नही ना?..आप अच्छी तरह जानती हैं कि आजतक मैं किसी की उमीद पे खरा नही उतरा..ना मम्मी-पापा की,ना भाय्या की & ना ही नीना की.अगर भाय्या को बताता तो वो मानता क्या?..कभी नही..मगर मैं जानता हू भाभी कि इस बार मैं कामयाब हो जाऊँगा & क्या अब मुझे ये कहने की ज़रूरत है कि मैं भी तो भाय्या के ही परिवार का हिस्सा हू."

"भाय्या..",अंजलि की आँखो मे दर्द का भाव था,"..ऐसी बाते मत कीजिए.औरो की और जाने मेरा तो इकलौता देवर हमेशा मेरी ज़रूरत के वक़्त मेरे साथ खड़ा रहा है & मेरे लिए वो इस दुनिया का दूसरा सबसे भरोसेमंद इंसान है क्यूकी पहले तो उसके भाय्या हैं!",अंजलि की बात पे मुकुल हंस पड़ा,"..बस ऐसे ही खुश रहिए."

"जानते हैं,भाय्या ये उलझने क्यू हो रही हैं?",कुच्छ देर बाद अंजलि ने बात आगे बढ़ाई,"..क्यूकी हम लोग मिलते-जुलते नही."

"भाभी..",मुकुल ने अपने बड़े भाई के साथ नाचती अपनी बीवी की ओर देखा,"..आप तो सब जानती हैं."

"वो ठीक है पर बच्चे तो मिल सकते है ना & फिर खास मौके पे भी अब तो आपने आना बंद कर दिया."

"आप भी तो नही आती?",मुकुल के कहने के अंदाज़ से अंजलि को अपनी शादी के ठीक बाद का वक़्त याद आया जब मुकुल उसके आगे-पीछे लगा रहता था & कभी-कभार भाई-भाभी से बच्चो की तरह ज़िद कर बैठता था.

"अच्छा बाबा,मैं ही आऊँगी पहले.अब खुश?",अंजलि हँसी तो मुकुल के चेहरे पे शायद महीनो बाद सच्ची खुशी वाली मुस्कान फैल गयी.

"मुकुल को बद्डल से खड़ा होने के लिए तुम ही ने कहा है?",जसजीत ने नीना को देखा.

"मुकुल कोई दूध पीता बच्चा तो है नही,भाई साहब.उसकी मर्ज़ी हुई वो खड़ा हो गया!"

"नीना..",जसजीत ने बड़ी मुश्किल से गुस्सा ज़ब्त किया हुआ था.उसे हमेशा लगता था कि इस औरत की वजह से उसका भाई उस से दूर हो गया & ये बात बहुत हद तक सच भी थी.उसका हाथ थोडा उसकी पीठ पे कस गया तो नीना चिहुनकि.वो भी इस इंसान से नफ़रत करती थी मगर अभी ना जाने क्यू उसका जिस्म उसके दिल की नही सुन रहा था.उसे 1 अजीब सा मज़ा आ रहा था जसजीत के यू करीब खड़े उसके साथ नाचने मे,"..तमीज़ से बोलो..& फिर उस महेश अरोरा से मदद लेने की क्या ज़रूरत थी?"

"जब आपने हाथ खींच लिए तो गैरो का सहारा लेना ही पड़ता है.",नीना ने मुँह फेर लिया.

"जो काम उसके बस का नही उसमे हाथ क्यू डालता है मुकुल बार-2?",जसजीत ने होंठ भींच लिए.

"जब काम करेगा ही नही तो पता कैसे चलेगा कि बस का है या नही?",नीना ने सर उठा जेठ की नज़रो से नज़रे मिला दी.जसजीत कुच्छ पॅलो तक उसे वैसे ही देखता रहा.नीना को चूत मे कसक महसूस हो रही थी & वो हैरान थी कि जिस से वो नफ़रत करती थी उसके करीब होने से उसे ऐसा कैसे महसूस हो सकता था.

"नीना,उसे उसके परिवार से दूर मत करो.",नीना ने कुच्छ नही कहा बस गर्दन घुमा मुकुल की ओर देखा & वाहा का ऩज़ारा वो मुस्कुरा दी लेकिन जसजीत का चेहरा सख़्त हो गया.

"मे आइ?",मुकुल ने गर्दन घुमाई तो देखा महेश खड़ा है 1 औरत के साथ जिसे वो भी पहचानता था,"हेलो,पूजा."

"कैसी हो?",महेश ने अंजलि की कमर मे बाँह डाल दूसरा हाथ अपने हाथ मे लिया.अंजलि के चेहरे की खुशी गायब थी.मुकुल अब पूजा के साथ डॅन्स कर रहा था.

"जवाब नही दोगि?चलो कोई बात नही..1 वक़्त था अंजलि जब तुम मेरे सवालो का इंतेज़ार किया करती थी."

"महेश,वो वक़्त और था.वो सब बहुत पहले ख़त्म हो चुका है."

"तुम्हारे लिए.मेरे लिए वो सब अभी भी ज़िंदा है.",महेश दबी आवाज़ मे मुस्कुराने का नाटक करता बोल रहा था,"मेरी बाहो मे तुम्हारा शरमाना,तुम्हारे रेशमी जिस्म का एहसास,तुम्हारा मुझसे लिपटना..जोश मे झाड़ते वक़्त मेरा नाम लेना.अपने खूबसूरत अंग मुझे सौंपना & मेरे अंग को हाथो मे भर लेना..-"

"-..महेश,प्लीज़!मैं 2 बच्चो की मा हू अब!"

"वो 2 बच्चे मेरे क्यू नही हैं?..क्यू अंजलि क्यू?..मुझे क्यू छ्चोड़ा तुमने?"

"मैने छ्चोड़ा तुम्हे?..",अंजलि ने धिक्कार भरी हँसी हँसी,"..पुरानी आदत है तुम्हारी अपनी ग़लती दूसरो पे थोपने की.मैने सब सौंपा था तुम्हे इस विश्वास के साथ की पूरी ज़िंदगी तुम्हारे साथ बिताउन्गी मगर तुम ही ने झूठ बोला था पापा से कि तुम्हारी नौकरी लग गयी है अमेरिका मे जब कि तुम नित्थल्ले थे & वो जो धोखाधड़ी की थी तुमने."

"सब तुम्हारे लिए."

"क्यू?मैने तुमसे हमेशा कहा था कि मेरे पापा को सब सच बता दो कि तुम्हारी माली हालत ठीक नही.कोई भी ढंग की नौकरी पकड़ लो,मेरे घरवाले नही भी मानेंगे तो भी मैं तुम्हारे साथ चलूंगी लेकिन तुम्हारे झूठ ने सब गड़बड़ कर दिया.पापा कैसे भरोसा करते 1 बेरोज़गार झूठे पे,बोलो?..अपनी औलाद होगी तो समझोगे,महेश.मेरी सलाह मानो,अपना इलाज कर्वाओ & मुझे भूल जाओ.",अंजलि की ईमानदारी भरी निगाहो का तेज झेलने की हिम्मत नही थी महेश मे,उसने सर घुमा लिया,"..मुकुल.",अंजलि ने बगल से नाचते हुए जा रहे अपने देवर को आवाज़ दी & 1 बार फिर उसके साथ हो ली.महेश अपना मुँह लेके खड़ा रहा.

जसजीत के जिस्म मे आया तनाव नीना ने महसूस किया & उसे बहुत खुशी हुई,तस्वीर मे उसकी जेठानी ही थी महेश के साथ....भाई साहब,आपकी प्यारी पत्नी & आपके सुखी संसार मे देखिए कैसे तूफान लाती हू मैं..वो तूफान आपका करियर भी तहस-नहस कर देगा & फिर बस मैं करूँगी इस शहर पे राज सिर्फ़ मैं!

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--40

gataank se aage............-

Divya ne potli kholi to usme se 2 heere nikle jinhe usne Professor Dixit ki or badha diya.usne unhe dekh bas sar hila diya.divya ne apne bag se us haar ki tasvir nikali joki Seth Mohan Lal ki dukan se loota gaya tha,"dekhiye,heere bilkul vaise hi hain."

"yani haar tod ke heere-panne beche ja rahe hain.",faraz tasvir dekh raha tha,"divya ji,main apne aadmiyo ko is paise ka pata lagane ke liye laga deta hu.is waqt pure shehar ki police 1 aise admi ki talash me hai jiski dayi bazu pe goli lagi hai.sath hi uski bike & uske huliye ki puri jankari unke paas hai.huamri giraft me aate hi hum aapko zarur ittila karenge."

"thank you.hum bhi vapas Devalay laut rahe hain & agar hume kuchh pata chala to hum bhi aapke sath zarur use baantege.",divya apna bag uthake khadi ho gayi thi magar professor vaise hi baitha hua tha.

"aap dono ko kya lagta hai..",vo apne purane andaz me apne hoth ke upar apni ungli & angutha fira raha tha,"..itne dino ki khamoshi ke baad achanak ye heere bechne ki aisi kaun si zarurat aa padi thi use?",usne dono ki or dekha,"..& vo akela keval apne hisse ka maal bech raha tha ya apne pure gang ke liye vaha aaya tha?"

"ye to uske pakad me aane ke baad hi saaf hoga.",faraz muskuraya.

"fir bhi ACP sahab aap sochte kya hain?"

hmm..",faraz ne sans bhari,"..main sochta hu ki vo akela apne hisse ke heere bech raha tha.mujhe nahi lagta ki agar 5 logo ka gang hai to vo aise kaam me apne sathi ko yu akela bhejenge.1 to khatra hai dusre paiso ke mamle sharif log kisi ka bharosa nahi karte ye to fir bhi budmash hain."

"to kya gang tut chuka hai?"

"ho sakta hai & nahi bhi.ho sakta hai itna lumba hath marne ke baad sab aram kar rahe hain & is shakhs ko jise aaj goli lagi hai,koi zarurat aan padi ho ya fir usne sare paise uda diye ho."

"hun,vaise 1 baat hai jo maine aaplogo ko abhi tak nahi batayi hai."

"kya?",divya & faraz 1 sath bole.

"uske gale pe 1 tattoo tha."

"kya?kaisa?..uska design bataiye..police artist ko bulao..",farz ne hukm diya,"..fauran..!"

"uski zarurat nahi,main hi bana deta hu sketch.",professor ne pad & pencil utha liya & hath chalane laga,"..uski gardan pe thik neeche gardan ke gird tattoo aise bana tha jaise usne koi choker pehna ho.peechhe se mujhe laga bhi ki usne choker pehna hai magar vo 1 sanp ka tattoo tha joki uske gale ke gird lipte baitha tha & uska munh samne ..",professor ne apne gale ke neeche ke gaddhe ke thik upar ishara kiya,"..yaha aise tha..",usne sketch banaya,"..samne dekhta hua fan kadhe hue."

"great professor!fauran ye jankari wireless pe do.",faraz ne hukm sunaya.professor dixit muskuraya & us se hath milake apni premika ke sath vaha se nikal aaya.

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"jaise bataya tha,foto vaise hi vapas rakh di na",apne drawing room me Nina bilkul nangi sofe pe baithi thi.usne bayi tang sofe ke upar talva jama ke rakhi thi & dayi galiche pe.uske daye hath me remote tha & vo tv ke channel change kar rahi thi.

"hun.",uske samne apne ghutno pe uske jaise hi nanga baitha Hira apni jibh se uski dayi andruni jangh chaat raha tha,"..uski mez ki daraz ke andar jo album ka aakhiri panna tha uski nichli 2 fotos ke beech me.",uski laplapati jibh nina ki gulabi chut pe pahunch gayi & use chaatne lagi.

"uunnnnn..good..",nina kasmasai & apni dayi tang utha hira ke baye kandhe ke upar chadha di.vo tasvir badi kaam ki thi.usne uski copy banwa ke use vapas Mahesh Arora ke ghar me rakhwa diya tha.ab ye sochna tha ki us tasvir ka istemal kaise kiya jaye.hira ki laplapati jibh ne uske jism ko puri tarah se mast kar diya tha.uski chut se ras behne laga tha & vo sofe pe rakhi hui apni makhmali gand dhire-2 hila rahi thi.usne channle chnage kiye & screen pe Baldev Kabra urf Bhaiyya ji nazar aane lage & uske dimagh me 1 tarkib aa gayi.uska dil ghushi se jhum utha.ab uska kaam ho jayega.

usi waqt hira ki jibh ne apna kamal dikhaya & vo jhad gayi.uske jhadte hi hira khada ho gaya & uski dono tange faila di & apna lund uski chut me ghusate hue uske upar jhuk gaya....ye kamina & mahesh bas chunav tak uske kaam ke the,1 baar Mukul jeet jaye bas....".oow...!",hira ne apna tagda lund badi zor se andar dhakela to remote galiche pe gira usne apni baahe uski gardan me daal di & uske chaude kandhe sehlane lagi..uske baad inhe vo doodh me padi makkhi ki tarah nikal fenkegi..tab tak Jasjit bhi haar chuka hoga & devalay sirf uska hoga..sirf uska..!

magar tab tak in dono mardo ko kabu me rakhna zaruri tha..",ohhhhh.....hira..",nina ne apna gaal uske gaal se sata ke ragda & uski pith pe aisi ada se apne hath chalaye ki hira to bas khushi se pagal ho gaya,"..aannnnhhhhhh...zor se...aur zor se.....haaaannnnnn......hiraaaaaa.......!",vo masti me pagal hone ka natak karti aahe nikalne lagi & us se chipat gayi.hira ye soch ke josh se pagal hue ja raha tha ki aisi raees,khubsurat,oonchi society ki aurat uske jism,uski chudai se masti me behal ho rahi hai jabki uske baye kandhe pe thuddi tikaye vo bas tv pe nazar aa rahe bhaiyya ji ko dekh rahi thi.

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St.Patrick's College ke main gate pe gadiyo ki lumbi katar andar jane ka intezar kar rahi thi.aaj Annual Charity Ball tha jisme keval purane students ko hi aane ki ijazat thi & students bhi is khas mauke me zarur sharik hote the.sabhi ko ticket kharidna hota tha & in tickets ki bikri se jama hue paise zaruratmando ke bhale me lagaye jate the.aaj sham bhi har saal ki tarah sabhi yaha ikattha hote the uske baad kuchh games khele jate the,2-3 log bhashan dete the & uske baad khana hota tha lekin sabse zaruri chiz hoti thi khane ke thik pehle ka ball.aaj se 100 saal pehle college ke tab ke principal ne is ball ki shuruat ki thi.tab to keval angrez hi iska hissa hote the & ball dance unki tehzib ka hissa tha lekin aaj bhi us barso purani parampara ko college ne apnaya hua tha & isme shamil hone vale sabhi logo ko bhi isme kafi maza aata tha.

aaj ki sham to 1 hi insan sabhi ki nazro ka kendra bana hua tha-Jasjit Pradhan.sabhi ko umeed thi ki agla CM vahi banega & isliye sabhi uske karib aana chah rahe the.jasjit ke bhi yaha aane ka maqsad keval is nek kaam ka hissa banana nahi tha.vo sabse pehle 1 rajneta tha & uske liye sabse zaruri chiz aane vala chunav jitna tha.sabse zaruri tha ki use humare samaj ke sabse neeche tabke ke logo ka sath mile & isliye apni har takrir me vo vo zyadatar unke bhale & fayde ki hi baat karta tha lekin is sabse oonche,raees tabke ko bhi vo nazarandaz nahi kar sakta tha jiske diye gaye paiso se hi vo ye chunav lad pata tha & ye ball un logo se mil unka shukriya ada karne ka sabse badhiya mauka tha.

"ladies & gentleman..",logo se ghire Jasjit & Anjali ne jab Father Vincent ki aavaz mike pe suni to unka dhyan udhar gaya,"..ab main aaj ki sham ke huamre khas mehman & unki patni ko yaha bulana chahunga.please welcome Mrs.anjali & mr.jasjit pradhan.",taliyo ki gadgadahat ke beech pati-patni father ke paas pahunche,"..please lead the couples on the floor.",father ke ishare pe jasjit & anjali sabse pehle dance floor pe pahunche & uske beechobeech khade ho gaye.unke peechhe baki jode bhi vaha aaye & band ne music bajana shuru kar diya jiski taal pe joo ne baal dance shuru kiya.

anjali ne cream color ki sari pehni thi & sleeveless blouse.us libas me uska gora rang aur chamak raha tha.pati ke sath yu sabke samne baaho me baahe daal ke nachne se use thodi sharm aa rahi thi & uske gore rang ke sath ghuli haya ki lali ne uske roop ko aur bhi dilkash bana diya tha,"aise mat dekho na.koi dekh lega to!",pati ki tarif bhari nigaho ka rukh usne modne ki koshish ki.

"to kya hua?apni biwi ko hi dekh raha hu...",jasjit ne biwi ki sangmarmari kamar ko halke se dabaya,"..& mujhe tok rahi ho,ungairo ko kuchh kyu nahi kehti jo tumhe dekhe ja rahe hain?"

"mujhe bas tumse matlab hai,unse nahi.",anjali muskurayi....jasjit ke hatho ki chhuan me kitna sukun tha.

"achha?"

"haan.",tabhi jasjit ke chehre ka rang badal gaya & muskan gayab ho gayi.

"kya hua?",anjali ne pati ki nazro ka peechha kiya to use nachte hue paas aa gaya 1 joda dikha-ye nina & mukul the.

"hi!nina..hi!mukul bhaiyya..kaise hain?",anjali muskurayi.

"hi.",nina ne thande pan se jawab diya.asmani rang ke 1 strap wale lumbe,flowing gown me vo bhi badi khubsurat lag rahi thi.

"achha hu,bhabhi.tum kaisi ho?"

"badhiya.nina,tum badi khubsurat lag rahi ho?",jasjit bhai ko dekh bhi nahi rahi tha.

"thanx.",mukul ne biwi se kuchh kaha jo shayad use pasand nahi aaya lekin fir bhi usne shayad baat maan li.

"bhaiyya,may i?",bhabhi ke sath dance ki ijazat mangta mukul bhai ke peechhe khada tha.jasjit ko bhi majburan uski baat manani padi & usne apne chhote bhai ki biwi ki or hath badhaya.

"bhabhi,bhaiyya mujhse naraz hai na?",anjali ne koi jawab nahi diya.

"bhabhi,main majbur tha.mere bhi kuchh arman hai.main to bhaiyya ke khilaf jane ki soch bhi nahi sakta isliye to Baddal se independent khada ho gaya."

"bhaiyya,1 baar unko bol to dete.",anjali ne devar ko ekha.

"bhabhi,aapse maine kabhi kuchh chhupaya hai.nahi na?..aap achhi tarah janti hain ki aajtak main kisi ki umeed pe khara nahi uta..na mummy-papa ki,na bhaiyya ki & na hi nina ki.agar bhaiyya ko batata to vo manta kya?..kabhi nahi..magar main janta hu bhabhi ki is baar main kamyab ho jaoonga & kya ab mujhe ye kehne ki zarurat hai ki main bhi to bhaiyya ke hi parivar ka hissa hu."

"bhaiyya..",anjali ki aankho me dard ka bhav tha,"..aisi baate mat kijiye.auro ki aur jane mera to iklauta devar humesha meri zarurat ke waqt mere sath khada raha hai & mere liye vo is duniya ka dusra sabse bharosemand insan hai kyuki pehle to uske bhaiyya hain!",anjali ki baat pe mukul hans pada,"..bas aise hi khush rahiye."

"jante hain,bhaiyya ye uljhane kyu ho rahi hain?",kuchh der baad anjali ne baat aage badhayi,"..kyuki humlog milte-julte nahi."

"bhabhi..",mukul ne apne bade bhai ke sath nachti apni biwi ki or dekha,"..aap to sab janti hain."

"vo thik hai par bachche to mil sakte hai na & fir khas mauke pe bhi ab to aapne aana band kar diya."

"aap bhi to nahi aati?",mukul ke kehne ke andaz se anjali ko apni shadi ke thik baad ka waqt yaad aaya jab mukul uske aage-peechhe laga rehta tha & kabhi-kabhar bhai-bhabhi se bachcho ki tarah zid kar baithata tha.

"achha baba,main hi aaoongi pehle.ab khush?",anjali hansi to mukul ke chehre pe shayad mahino baad sachchi khushi vali muskan fail gayi.

"mukul ko baddal se khada hone ke liye tum hi ne kaha hai?",jasjit ne nina ko dekha.

"mukul koi doodh pita bachcha to hai nahi,bhai sahab.uski marzi hui vo khada ho gaya!"

"nina..",jasjit ne badi mushkil se gussa zabt kiya hua tha.use humesha lagta tha ki is aurat ki vajah se uska bhai us se door ho gaya & ye baat bahut hadd tak sach bhi thi.uska hath thoda uski pith pe kas gaya to nina chihunki.vo bhi is insan se nafrat karti thi magar abhi na jane kyu uska jism uske dil ki nahi sun raha tha.use 1 ajib sa maza aa raha tha jasjit ke yu karib khade uske sath nachne me,"..tamiz se bolo..& fir us mahesh arora se madad lene ki kya zarurat thi?"

"jab apne hath khinch len to gairo ka sahara lena hi padta hai.",nina ne munh fer liya.

"jo kaam uske bas ka nahi usme hath kyu dalta hai mukul baar-2?",jasjit ne honth bhinch liye.

"jab kaam karega hi nahi to pata kaise chalega ki bas ka hai ya nahi?",nina ne sar utha jeth ki nazro se nazre mila di.jasjit kuchh palo tak use vaise hi dekhta raha.nina ko chut me kasak mehsus ho rahi thi & vo hairan thi ki jis se vo nafrat karti thi uske karib hone se use aisa kaise mehsus ho sakta tha.

"nina,use uske parivar se door mat karo.",nina ne kuchh nahi kaha bas gardan ghuma mukul ki or dekha & vaha ka nazara vo muskura di lekin jasjit ka chehra sakht ho gaya.

"may i?",mukul ne gardan ghumai to dekha mahesh khada hai 1 aurat ke sath jise vo bhi pehchanta tha,"hello,Puja."

"kaisi ho?",mahesh ne anjali ki kamar me banh daal dusra hath apne hath me liya.anjali ke chehre ki khushi gayab thi.mukul ab puja ke sath dance kar raha tha.

"jawab nahi dogi?chalo koi baat nahi..1 waqt tha anjali jab tum mere sawalo ka intezar kiya karti thi."

"mahesh,vo waqt aur tha.vo sab bahut pehle khatm ho chuka hai."

"tumhare liye.mere liye vo sab abhi bhi zinda hai.",mahesh dabi aavaz me muskurane ka natak karta bol raha tha,"meri baaho me tumhara sharmana,tumhare reshmi jism ka ehsas,tumhara mujhse lipatna..josh me jhadte waqt mera naam lena.apne khubsurat ang mujhe saunpna & mere ang ko hatho me bhar lena..-"

"-..mahesh,please!main 2 bachcho ki maa hu ab!"

"vo 2 bachche mere kyu nahi hain?..kyu anjali kyu?..mujhe kyu chhoda tumne?"

"maine chhoda tumhe?..",anjali ne dhikkar bhari hansi hansi,"..purani aadat hai tumhari apni galti dusro pe thopne ki.maine sab saunpa tha tumhe is vioshwas ke sath ki puri zindagi tumhare sath bitaungi magar tum hi ne jhuth bola tha papa se ki tumhari naukri lag gayi hai America me jab ki tum nitthale the & vo jo dhokhadhadi ki thi tumne."

"sab tumhare liye."

"kyu?maine tumse humesha kaha tha ki mere papa ko sab sach bata do ki tumhari mali halat thik nahi.koi bhi dhang ki naukri pakad lo,mere gharwale nahi bhi manenge to bhi main tumhare sath chalungi lekin tumhare jhuth ne sab gadbad kar diya.papa kaise bharosa karte 1 berozgar jhuthe pe,bolo?..apni aulad hogi to samjhoge,mahesh.meri salah mano,apna ilaj karwao & mujhe bhul jao.",anjali ki imandari bhari nigaho ka tej jhelne ki himmat nahi thi mahesh me,usne sar ghuma liya,"..mukul.",anjali ne bagal se nachte hue ja rahe apne devar ko aavaz di & 1 baar fir uske sath ho li.mahesh apna munh leke khada raha.

jasjit ke jism me aaya tanav nina ne mehsus kiya & use bahut khushi hui,tasvir me uski jethani hi thi mahesh ke sath....bhai sahab,aapki pyari patni & aapke sukhi sansar me dekhiye kaise toofan lati hu main..vo toofan aapka career bhi tehas-nehas kar dega & fir bas main karungi is shehar pe raaj sirf main!

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kramashah........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 15:50

खेल खिलाड़ी का पार्ट--41

गतान्क से आगे............-

नीना ने महसूस किया कि उसके जेठ का हाथ उसकी पीठ पे कस गया है.उसने उसकी ओर देखा तो पाया कि वो अंजलि & महेश को ही देख रहा था & उसका चेहरा बहुत ही सख़्त था.जसजीत प्रधान को शायद होश नही था कि वो इस वक़्त अपने छ्होटे भाई की बीवी के साथ है.उसका हाथ थोड़ा और कसा & नीना उसके जिस्म से सॅट गयी.नीना ने अपने पेट पे अपने जेठ की मर्दानगी को महसूस किया तो उसकी सांस जैसे रुक सी गयी.उसके जिस्म मे झुरजुरी दौड़ गयी & उस पल उसने अपने जेठ को 1 दूसरी ही नज़र से देखा.

जैसे ही मुकुल ने वापस अपनी भाभी की बाहे थामी जसजीत का तनाव ख़त्म हो गया & 1 बार फिर नीना & उसके जिस्म मे दूरी बन गयी.नीना को ये अच्छा नही लगा.वो मन ही मन खुद पे मुस्कुराइ....आख़िर कितनी गर्मी भरी थी उसके जिस्म मे कि वो अपने जेठ के बारे मे भी गुस्ताख ख़याल सोचने लगी थी!

इन जोड़ो को नाचते हुए 2 आँखे बड़े गौर से देख रही थी.वरुण को पता था की जसजीत प्रधान यहा आएगा मगर आज उसका मक़सद उसे देखना नही था,आज तो वो अपने प्यार को देखने आया था.उसे यकीन था कि मोना आज अपने पति के साथ यहा ज़रूर आएगी.अभी खास मेहमान ही फ्लोर पे थे.उनके हटने के बाद बारी-2 से 10-10 करके बाकी जोड़े आते जिन्होने इस शाम के लिए टिकेट्स खरीदे थे.

वरुण को वो दिन याद आया जब मोना ने उस से कहा था कि 1 दिन वो दोनो भी इसी तरह यहा 1 साथ नाचेंगे,"..लॅडीस & गेंटल्मन,अब मैं हमारे सबसे खास मेहमान,हमारे मुल्क के नंबर.1 क्रिकेटर,दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाज़,मिस्टर.वरुण अवस्थी को यहा आने की दावत देता हू..",मोना ने फादर की नकल उतारी थी तो दोनो हंस पड़े थे.

वरुण यहा चोरी से घुसा था & 1 पर्दे की ओट से सब देख रहा था.कुच्छ देर बाद वो जिसकी तलाश मे आया था वो उसे नज़र आ ही गयी.मोना अपने पति के साथ डॅन्स कर रही थी.हल्के पीले गाउन मे बला की खूबसूरत लग रही थी..& कितनी खुश..उसके दिल मे टीस सी उठी.उसके पति के हाथ उसके नाज़ुक बदन पे देख वो जलन से भर गया..ये सब तो उसका हक़ था..मोना ने अपना कुँवारापन उसे दिया था..उसके जिस्म के हर हिस्से पे उसके होंठो ने अपने निशान छ्चोड़े थे..मगर आज सब ख़त्म हो चुका था & बीता हुआ कल 1 सपना बन के रह गया था.उसने लंबी सांस ली & वाहा से हट गया.इस सब का ज़िम्मेदार प्रधान कल अपने किए की सज़ा भुगेतेगा...उसने आँखे बंद कर अपने इरादे के बारे मे सोचा & वाहा से चला गया.

मेघना भी वाहा मौजूद थी.वो इस कॉलेज की पुरानी स्टुदेंट थी & अजीत के ना-नुकर करने के बावजूद वो उसे यहा खींच ही लाई थी,"कॉलेज तो शानदार है तुम्हारा!",अजीत मुस्कुराया,"..और तुम्हारी सहेलिया भी!"

"अच्छा!मेरी सहेलियो मे बहुत दिलचस्पी हो रही है?",अजीत को मेघना की बात मे मज़ाक के साथ-2 थोड़ा तंज़ भी मिला लगा.

"सालिया लगती है हमारी,भाई!",अजीत मज़ाक करता रहा मगर मेघना खामोश हो गयी,"क्या हुआ?",अजीत ने चुप्पी तोड़ी,"..आए..!",उसने अपने 1 हाथ से उसका चेहरा अपनी ओर किया,"..क्या बात है?कोई बाय्फ्रेंड याद आ रहा है क्या?",वो हंसा मगर मेघना बिल्कुल संजीदा हो गयी.

"सॉरी,मेघना..मैं तो मज़ाक कर रहा था..तुम्हे बुरा लगा क्या?"

"नही.",नीना थोड़ा आगे झुकी & डॅन्स करते हुए अपना सर अपने पति के सीने पे रख दिया..वो तो अब केवल अजीत की थी मगर क्या वो भी उसी का था?..कैसे सुलझेगी ये उलझन कैसे?

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जो सितारो पे यकीन करते हैं वो ये कहेंगे कि ज़रूर उस वक़्त सितारो का कुच्छ ऐसा मेल था कि कॉलेज हॉल मे नाच रहे सभी जोड़े थोड़े नाखुश थे & अपने-2 साथी को लेके थोड़ा शक़ भी कर रहे थे.

हमारी कहानी का बस 1 जोड़ा बिना किसी बदगुमानी के,बिना किसी उलझन के 1 दूसरे की बाहो मे क़ैद 1 दूसरे को चूम रहे थे.दिव्या प्रोफेसर दीक्षित की बाहो मे क़ैद अपने गुलाबी होंठो को उसको सौंपे खड़ी थी.बस अभी-2 ही वो उसके बुंगले मे दाखिल हुई थी & उसने उसे अपने आगोश मे भर लिया था.दोनो सवेरे ही डेवाले वापस लौटे थे & दिन भर काम करने के बाद दिव्या अपने घर चली गयी थी प्रोफेसर को ये वादा करके कि कुच्छ ही देर मे वो उसके साथ होगी & पूरी रात उसके साथ बिताएगी.

"उउम्म्म्म..छ्चोड़ो..",दिव्या ने प्रोफेसर के सीने पे हाथ रख उसे थोडा दूर किया,"..ऐसे पेश करते हैं घर आए मेहमान से?!",शर्ट के गले मे से झाँकते सीने के बालो को उसने हल्के से खींचा.

"मेहमान ऐसा हसीन हो तो उसके इस्तेक्बाल का तो यही सबसे जायज़ तरीका है.",प्रोफेसर ने उसकी कमर को दबाया & दोबारा आगे उसे चूमने के लिए झुकने लगा.

"उउन्ण..नही..",दिव्या ने हाथ उसके होंठो पे रख उसे रोका,"..पहले अपना घर दिखाओ.कितना शानदार लगता है बाहर से.क्या अंदर से भी तुमने इसे वैसे ही सजाया है?"

"ये तो तुम देख के खुद ही तय करना..",प्रोफेसर ने अपनी बाहो से उसे आज़ाद किया & अपने हाथो मे उसके हाथ ले लिए,"..मगर पहले ज़रा 1 नज़र तुम्हे देख तो लू.",प्रोफेसर के साथ ने दिव्या के अंदर ना जाने क्या जगा दिया था की उसे सजने-सवरने की तमन्ना होने लगी थी.उसका दिल करने लगा था कि वो अपने लिबास,अपनी अदाओ से अपने महबूब को तड़पाए,रिझाए..वो उसकी तारीफ करे & फिर दोनो प्यार मे डूब जाएँ.आज उसने 1 छ्होटी ब्लेक ड्रेस निकाली थी.ड्रेस बस सीने तक कसी थी & नीचे ढीली थी & उसके घुटनो के उपर आधी जाँघो तक आती थी.प्रोफेसर उसे सर से पाँव तक देखने लगा तो हया की लाली ने फिर से उसके गालो को और सुर्ख कर दिया.

प्रोफेसर ने उसकी नंगी बाहो पे अपने हाथ फिराए तो उसका जिस्म थरथरा उठा & होंठ खुद बखुद खुल गये.प्रोफेसर ने उन्हे चूमा & फिर बाई बाँह के घेरे मे उसके जिस्म को भर लिया,"चलो,तुम्हे ये घर दिखाता हू."

"ये है हॉल.",आलीशान से ड्रॉयिंग कम डाइनिंग हॉल मे दीवारो पे बड़ी अच्छी पेंटिंग्स लगी थी.कुच्छ आंटीक पीसस भी थे मगर किसी चीज़ को देख के ऐसा नही लगता था कि हॉल मे दौलत की नुमाइश लगी हो उसका कारण था कि प्रोफेसर ने हर चीज़ तभी खरीदी थी जब उसकी किसी बात ने उसे बहुत प्रभावित किया था,"दिव्या,ये पैंटिंग देखो.कालिदास के मेघ्ड़ूत के बारे मे तो तुमने सुना ही होगा?..उसमे 1 यक्ष जो अपनी प्रेमिका से दूर है मेघ यानी बादल से अपने प्यार का संदेश अपनी महबूबा को भेजता है.तो इस तस्वीर मे पेंटर ने ये कल्पना की है कि जब बादल ने उसका ये संदेश उसकी प्रेमिका तक पहुचेया होगा तो उसे कैसा लगा होगा.",तस्वीर मे 1 बादल बरस रहा था & नीचे 1 खूबसूरत लड़की उस बारिश मे भीग रही थी.उसके चेहरे पे खुशी थी,संतोष था साथ-2 प्रेमी के मिलने की आस भी थी.उसके गीले कपड़ो मे उसका भीगा जिस्म का 1-1 आकार नुमाया हो रहा था.

दिव्या का जिस्म उस पैंटिंग को देख के मचल उठा & उसी वक़्त प्रोफेसर का बाया हाथ उसकी बाई उपरी बाज़ू पे कसा & 1 बार फिर दोनो 1 दूसरे को चूमने लगे.इस बार प्रोफेसर ने उसकी ड्रेस के बाए स्ट्रॅप को कंधे से नीचे सरका दिया,अब बाए कंधे पे उसके काले ब्रा का स्ट्रॅप चमक रहा था.

"ये देखो..",1 टेबल पे 1 बस्ट रखा था यानी 1 इंसान के चेहरे को दिखती मूर्ति,"..ये है फिलॉसफर सॉक्रटेस या सुक्रत जिसे सिर्फ़ इसलिए मार दिया गया था क्यूकी ये उस खुदा को नही मानता था जिसे इसके राज्य के लोग मानते थे.समझती हो दिव्या,कितना हिम्मत का काम है बहाव के खिलाफ तैरना?",दिव्या ने हां मे सर हिलाया.प्रोफेसर की शख्सियत का 1 दूसरा पहलू उसके सामने था-1 समझदार गहरी सोच वाले इंसान का.

"ये तस्वीर मुझे इसे बनाए वाले ने तोहफे मे दिया था..",मुल्क के झंडे के तीनो रंगो को मिला के कुच्छ ऐसी कलाकारी की गयी थी कि उसमे से सभी रंग निकलते दिखते थे & फिर 1 सफेद रंग मे तब्दील होते लगते थे.अब तुम बताओ इस तस्वीर के बारे मे?",दिव्या हल्के से मुस्कुराइ & तस्वीर को देखने लगी.

"एकता..अनेकता मे एकता..तीनो रंगो से अलग-2 रंग निकले & फिर 1 रंग मे तब्दील हो गये..सफेद रंग..अमन..प्यार.",उसने प्रोफेसर को सवालिया निगाहो से देखा तो वो हंस पड़ा.

"जान,तस्वीर कोई पढ़ाई का सवाल थोड़े ही है कि 1 ही सही जवाब हो..",वो उसके पीछे आया & उसे बाहो मे भरा तो दिव्या का सीना उसकी ड्रेस के गले मे से छलक्ने को बेताब हो उठा,"..हर देखनेवाला उसका अपना अलग मतलब निकालने को आज़ाद है.वैसे मैं भी कुच्छ तुम्हारी ही तरह सोचता हू इस तस्वीर के बारे मे.",प्रोफेसर ने उसकी गर्दन पे दाई तरफ चूमा तो दिव्या ने आँखे बंद कर दाई बाँह पीछे ले जा उसका सर सहलाया.कुच्छ ही पलो मे दूसरा स्ट्रॅप भी कंधे से सरक चुका था & दिव्या के कंधे प्रोफेसर के होंठो की तपिश से जलने लगे थे.दिव्या का जिस्म कांप रहा था.वो पलटी & प्रोफेसर के गले मे बाहे डाल उसके चेहरे को चूमने लगी.चूमते-2 वो नीचे आई & उसकी कमीज़ के बटन्स खोल दिए.अगले ही पल प्रोफेसर के गथे हुए जिस्म की मांसपेशियो पे उसके हसरत भरे हाथ घूम रहे थे.

प्रोफेसर ने उसे सीने से लगा लिया & फिर उसे हॉल मे राकीड दूरी चीज़े दिखाने लगा.दिव्या थोड़ी-2 देर पे उसके चौड़े सीने पे जगह-2 चूम लेती.उसने अपनी दाई बाँह अपने आशिक़ की कमर मे डाल रखी थी,"ये है मेरी स्टडी.",दोनो अब 1 दूसरे कमरे मे आ गये थे जिसकी दीवारो से लगे फर्श से छत तक के लंबे शेल्फ किताबो से भरे हुए थे.

"वाउ!",दिव्या की आँखे हैरत से भरी हुई थी,"ये तो कोई छ्होटी सी लाइब्ररी लगती है!",1 तरफ ज़मीन पे 1 गद्दा लगा था जिसपे तकिये रखे हुए थे & दूसरी तरफ 1 डेस्क लगी थी जिसपे 1 कंप्यूटर & लिखने का समान रखा था.इस कमरे मे वो बेतर्तीबी थी जो रोज़ाना इस्तेमाल करने पे होती है,"लगता है तुम्हारा ज़्यादातर वक़्त यही पे गुज़रता है?",दिव्या के सवाल पे प्रोफेसर ने मुस्कुराते हुए हां मे सर हिलाया,"वो क्या है,अजिंक्या?",कमरे के 1 कोने मे 1 बंद अलमारी थी.

"ऐसे ही कुच्छ बेकार का समान पड़ा है.",प्रोफेसर ने सवाल टालने की कोशिश की.

"मुझे देखना है.",दिव्या बच्चो की तरह मचलती हुई उसके सीने के बाल खींचने लगी.

"अच्छा.",लंबी सांस भर प्रोफेसर ने अलमारी खोली तो दिव्या को वाहा कयि शील्ड्स,ट्रोफीस & सर्टिफिकेट्स धूल खाते नज़र आए.

"अजिंक्या!तुम भी ना!..ये सब तुमने ऐसे रखा है..& ये..ये बेकार की चीज़े हैं?"

"हां..क्या काम है इनका..& तुम क्या चाहती हो इनकी नुमाइश लगाऊं."

"नही,नुमाइश मत लगाओ.",दिव्या ने उसे बाहो मे भर अपनी मोटी छातियाँ उसके सीने पे दबा दी,"..पर लोगो ने तुम्हे इज़्ज़त बक्शी है उस बात की तो कद्र करो.कम से कम इन्हे सहेज के तो रखो."

"ओके,कर दूँगा.",प्रोफेसर ने उसे बाँहो मे भर लिया & उसकी मोटी गंद दबाते हुए उसे चूमने लगा.

"ओह्ह्ह्ह...छ्चोड़ो ना..",दिव्या के गाल जोश से और गुलाबी हो गये.मस्ती की शिद्दत ना बर्दाश्त कर पाने के चलते उसने किस तोड़ी & अपने महबूब के आगोश मे छट-पटाने लगी,"..आहह...ना....अजिंक्या...आहह..!",प्रोफेसर ने उसकी ड्रेस के अंदर हाथ घुसा उसकी गंद को दबोच लिया था & उसकी गर्दन & कंधे चूमे जा रहा था.दिव्या के हाथ अभी अब प्रोफेसर के फौलादी जिस्म पे अपनी मस्ती जताते घूम रहे थे.तभी प्रोफेसर ने उसकी गंद की कसी फांको को दबोच उसे थोड़ा उपर उठा खुद से ऐसे सताया की दिव्या की चूत उसके लंड से दब गयी & दिव्या के जिस्म मे फुलझड़िया फूटने लगी.दिव्या की आहे बंद हो गयी & वो प्रोफेसर की बाहो मे झूल गयी.वो झाड़ रही थी.उसे हैरत हो रही थी कि वो इतनी आसानी से कैसे झाड़ गयी मगर अगले ही पल उसे अपनी ड्रेस उतरती महसूस हुई & वो आने वाले मस्त पॅलो की खुमारी मे खो गयी.

प्रोफेसर ने उसे बाहो मे उठा लिया & कमरे से बाहर ले आया,"ये है मेहमानो कमरा.",दिव्या ने अपनी बाहे उसके गले मे डाल दी & उसके चेहरे को चूमने लगी,"..& ये है रसोई.",प्रोफेसर ने उसे किचन के स्लॅब पे बिठा दिया तो दिव्या ने अपनी टाँगे खोल उसे अपनी बाहो मे भर लिया.

"खाना कौन बनाता है तुम्हारे लिए & इस घर को इतना साफ कौन रखता है?",दिव्या उसकी पॅंट खोलते हुए उसके होंठ चूम रही थी.

"नौकर हैं.काम करके चले जाते हैं.",दिव्या ने झटपट प्रोफेसर की पंत & अंडरवेर को उतारा & उसके लंड को बाहो मे भर लिया.

"अजिंक्या,मैने सोचा था कि कभी तुमसे ये सवाल नही करूँगी..",वो लंड को हिला रही थी,"..तुम चाहो तो जवाब मत देना.ये मत समझना कि तुम्हारी ज़ाति ज़िंदगी मे दखल दे रही हू..मगर..",उसने उसके आंडो को हौले से दबाया & फिर लंड को रगड़ने लगी,"..तुम्हे इतने बड़े घर मे अकेलापन महसूस नही होता?"

"ये तो सोच पे है,दिव्या..",प्रोफेसर ने उसकी काले ब्रा मे क़ैद संगमरमरी चूचियाँ आपस मे मिलते हुए दबा दी,"..इंसान भीड़ मे भी अकेला हो सकता है & तन्हाई मे भी तन्हा नही रह सकता.",आ भरती दिव्या के माथे पे शिकन पड़ गयी.

"यहा मेरी यादें है मेरी तन्हाई मिटाने को मेरे साथ.",वो आगे झुका & उसे बाहो मे भर उसके होंठ चूम लिए.दिव्या समझ गयी कि इस रोमानी अंदाज़ मे उसके होंठ बंद करने का मतलब यही था कि वो नही चाहता था कि इस बारे मे आगे बात हो.दिव्या को भी इस बात पे कोई ऐतराज़ नही था,उसने उसके फ़ैसले की कद्र की & उसकी किस का लुत्फ़ उठाने लगी.प्रोफेसर ने उसके ब्रा को खोला & उसकी नुमाया चूचियो को अपने हाथो की मेहेरबानी पे छ्चोड़ दिया.दिव्या की आहे तेज़ हो गई तो वो झुका & उन्हे छूने लगा.उसके होंठो के एहसास से दिव्या मुस्कुरा उठी.स्लॅब के पीछे की दीवार से टेक लगाके बैठ वो आँखे बंद कर उस एहसास का पूरा मज़ा उठाने लगी.उसके निपल्स को अपने होंठो से छेड़ने के बाद वो नीचे गया & उसके सपाट पेट को जी भर के चूमा.

दिव्या की नाभि की गहराइयो को उसने पता नही कितनी बार अपनी ज़ुबान से नापा & फिर नीचे आ उसकी मांसल जाँघो को चूमने लगा.उसके सॅंडल्ज़ को उतार उसने उसके पैरो की उंगलियो को चूमा तो दिव्या सिहर उठी.उसकी चूत मे कसक और तेज़ हो गयी & स्लॅब पे ही कसमसाने लगी.प्रोफेसर खड़ा हुआ & उसे फिर से बाहो मे उठा लिया,"चलो,तुम्हे अपना बेडरूम दिखाता हू.",दोनो की आँखे नशे मे डूबी 1 दूसरे से मिल . दिव्या ने उसके गले मे बाहे डाल दी & अपना सर उसके बाए कंधे पे टीका दिया.

दिव्या बिल्कुल मदहोश थी मगर उस मदहोशी मे भी उसकी तेज़ निगाहो से 1 बात च्छूपी नही रह सकी.प्रोफेसर का कमरा बिल्कुल सॉफ-सुथरा & करीने से था मगर उसे देख के ऐसा लगता था मानो उसे कोई इस्तेमाल नही करता हो.बड़े से पलंग पे सजे बिस्तर को देख के ऐसा लगता था मानो रोज़ उसकी चादर बदली जाती हो मगर उसपे सलवटें डालने वाला कोई ना हो.आख़िर क्यू?..दिव्या के ज़हन मे सवाल कौंधा..प्रोफेसर की ज़िंदही मे औरतो की कमी नही थी फिर वो कमरा ऐसा क्यू लग रहा था..& फिर अगर वो यहा नही आता & किसी को नही लाता तो फिर उसे क्यू लाया था?

प्रोफेसर ने उसे बिस्तर पे लिटाया & उसके उपर झुक उसकी फूल सी कोमल चूचियो को चूसने लगा.दिव्या बाहे फैलाए आहे भरने लगी.प्रोफेसर के आतुर होंठ तो जैसे उसकी मोटी चूचियो से चिपक ही गये थे!दिव्या कमर उचकाते हुए तड़पने लगी....कमाल का मर्द था!....बिना खुद झाडे वो कितनी आसानी से उसे इतनी बार झाड़वा देता था!..उसका जिस्म फिर से मस्ती की ऊँचाइयो को च्छू रहा था की तभी प्रोफेसर ने उसकी चूचिया छ्चोड़ी & नीचे जाने लगा.दिव्या का दिल खुशी से भर उठा,अब उसकी चूत की बारी थी अपने महबूब से प्यार पाने की.

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--41

gataank se aage............-

Nina ne mehsus kiya ki uske jeth ka hath uski pith pe kas gaya hai.usne uski or dekha to paya ki vo Anjali & Mahesh ko hi dekh raha tha & uska chehra bahut hi sakht tha.Jasjit Pradhan ko shayad hosh nahi tha ki vo is waqt apne chhote bhai ki biwi ke sath hai.uska hath thoda aur kasa & nina uske jism se sat gayi.nina ne apne pet pe apne jeth ki mardangi ko mehsus kiya to uski sans jaise ruk si gayi.uske jism me jhurjhuri daud gayi & us pal usne apne jeth ko 1 dusri hi nazar se dekha.

jaise hi Mukul ne vapas apni bhabhi ki baahe thami jasjit ka tanav khatm ho gaya & 1 baar fir nina & uske jism me duri ban gayi.nina ko ye achha nahi laga.vo man hi man khud pe muskurayi....aakhir kitni garmi bhari thi uske jism me ki vo apne jeth ke bare me bhi gustakh khayal sochne lagi thi!

in jodo ko nachte hue 2 aankhe bade gaur se dekh rahi thi.Varun ko pata tha ki Jasjit Pradhan yaha aayega magar aaj uska maqsad use dekhna nahi tha,aaj to vo apne pyar ko dekhne aaya tha.use yakin tha ki Mona aaj apne pati ke sath yaha zarur aayegi.abhi khas mehman hi floor pe the.unke hatne ke baad bari-2 se 10-10 karke baki jode aate jinhone is sham ke liye tickets kharide the.

varun ko vo din yaad aaya jab mona ne us se kaha tha ki 1 din vo dono bhi isi tarah yaha 1 sath nachenge,"..ladies & gentleman,ab main humare sabse khas mehman,humare mulk ke no.1 cricketer,duniya ke behtarin ballebaz,Mr.Varun Awasthi ko yaha aane ki dawat deta hu..",mona ne father ki nakal utari thi to dono hans pade the.

varun yaha chori se ghusa tha & 1 parde ki ot se sab dekh raha tha.kuchh der baad vo jiski talash me aya tha vo use nazar aa hi gayi.mona apne pati ke sath dance kar rahi thi.halke peele gown me bala ki khubsurat lag rahi thi..& kitni khush..uske dil me tees si uthi.uske pati ke hath uske nazuk badan pe dekh vo jalan se bhar gaya..ye sab to uska haq tha..mona ne apna kunwarapan use diya tha..uske jism ke har hisse pe uske hotho ne apne nishan chhode the..magar aaj sab khatm ho chuka tha & beeta hua kal 1 sapna ban ke reh gaya tha.usne lumbi sans li & vaha se hat gaya.is sab ka zimmedar pradhan kal apne kiye ki saza bhugetega...usne aankhe band kar apne irade ke bare me socha & vaha se chala gaya.

Meghna bhi vaha maujood thi.vo is college ki purani stuident thi & Ajit ke na-nukar karne ke bavjud vo use yaha khinch hi layi thi,"college to shandar hai tumhara!",ajit muskuraya,"..aur tumhari saheliya bhi!"

"achha!meri saheliyo me bahut dilchaspi ho rahi hai?",ajit ko meghna ki baat me mazak ke sath-2 thoda tanz bhi mila laga.

"saliya lagti hai humari,bhai!",ajit mazak karta raha magar meghna khamosh ho gayi,"kya hua?",ajit ne chuppi todi,"..aye..!",usne apne 1 hath se uska chehra apni or kiya,"..kya baat hai?koi boyfriend yaad aa raha hai kya?",vo hansa magar meghna bilkul sanjida ho gayi.

"sorry,meghna..main to mazak kar raha tha..tumhe bura laga kya?"

"nahi.",nina thoda aage jhuki & dance karte hue apna sar apne pati ke seene pe rakh diya..vo to ab keval ajit ki thi magar kya vo bhi usi ka tha?..kaise suljhegi ye uljhan kaise?

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jo sitaro pe yakin karte hain vo ye kahenge ki zarur us waqt sitaro ka kuchh aisa mel tha ki college hall me nach rahe sabhi jode thode nakhush the & apne-2 sathi ko leke thoda shaq bhi kar rahe the.

humari kahani ka bas 1 joda bina kisi badgumani ke,bina kisi uljhan ke 1 dusre ki baaho me qaid 1 dusre ko chum rahe the.Divya Professor Dixit ki baaho me qaid apne gulabi hotho ko usko saunpe khadi thi.bas abhi-2 hi vo uske bungle me dakhil hui thi & usne use apne agosh me bhar liya tha.dono savere hi Devalay vapas laute the & din bhar kaam karne ke baad divya apne ghar chali gayi thi professor ko ye vada karke ki kuchh hi der me vo uske sath hogi & puri raat uske sath bitayegi.

"uummmm..chhodo..",divya ne professor ke seene pe hath rakh use thoda dur kiya,"..aise pesh karte hain ghar aaye mehman se?!",shirt ke gale me se jhankte seene ke baalo ko usne halke se khincha.

"mehman aisa haseen ho to uske istekbal ka to yehi sabse jayaz tarika hai.",professor ne uski kamar ko dabaya & dobara aage use chumne ke liye jhukne laga.

"uunn..nahi..",divya ne hath uske hotho pe rakh use roka,"..pehle apna ghar dikhao.kitna shandar lagta hai bahar se.kya andar se bhi tumne ise vaise hi sajaya hai?"

"ye to tum dekh ke khud hi tay karna..",professor ne apni baaho se use azad kiya & apne hatho me uske hath le liye,"..magar pehle zara 1 nazar tumhe dekh to lu.",professor ke sath ne divya ke andar na jane kya jaga diya tha ki use sajne-sawarne ki tamanna honae lagi thi.uska dil karne laga tha ki vo apne libas,apni adao se apne mehboob ko tadpaye,rijhaye..vo uski tarif kare & fir dono pyar me doob jayen.aaj usne 1 chhoti balck dress nikali thi.dress bas seene tak kasi thi & neeche dhili thi & uske ghutno ke upar aadhi jangho tak aati thi.professor use sar se panv tak dekhne laga to haya ki lali ne fir se uske galo ko aur surkh kar diya.

professor ne uski nangi baaho pe apne hath firaye to uska jism tharthara utha & honth khud bakhud khul gaye.professor ne unhe chuma & fir bayi banh ke ghere me uske jism ko bhar liya,"chalo,tumhe ye ghar dikhata hu."

"ye hai hall.",aalishan se drawing cum dining hall me deewaro pe badi achhi paintings lagi thi.kuchh antique pieces bhi the magar kisi chiz ko dekh ke aisa nahi lagta tha ki hall me daulat ki numaish lagi ho uska karan tha ki professor ne har chiz tabhi kharidi thi jab uski kisi baat ne use bahut prabhavit kiya tha,"divya,ye painting dekho.Kalidas ke Meghdoot ke bare me to tumne suna hi hoga?..usme 1 yaksh jo apni premika se door hai megh yani badal se apne pyar ka sandesh apni mehbooba ko bhejta hai.to is tasvir me painter ne ye kalpana ki hai ki jab badal ne uska ye sandesh uski premika tak pahuchaya hoga to use kaisa laga hoga.",tasvir me 1 badal baras raha tha & neeche 1 khubsurat ladki us barish me bhig rahi thi.uske chehre pe khushi thi,santosh tha sath-2 premi ke kilne ki aas bhi thi.uske gile kapdo me uska bhiga jism ka 1-1 aakar numaya ho raha tha.

divya ka jism us painting ko dekh ke machal utha & usi waqt professor ka baya hath uski bayi upri bazu pe kasa & 1 baar fir dono 1 dusre ko chumne lage.is baar professor ne uski dress ke baye strap ko kandhe se neeche sarka diya,ab baye kandhe pe uske kale bra ka strap chamak raha tha.

"ye dekho..",1 table pe 1 bust rakha tha yani 1 insan ke chehre ko dikhati murti,"..ye hai philosopher Socrates ya sukrat jise sirf isliye maar diya gaya tha kyuki ye us khuda ko nahi manta tha jise iske rajya ke log mante the.samajhti ho divya,kitna himmat ka kaam hai bahav ke khilaf tairna?",divya ne haan me sar hilaya.professor ki shakhsiyat ka 1 dusra pehlu uske samne tha-1 samajhdar gehri soch vale insan ka.

"ye tasvir mujhe ise banae vale ne tohfe me diya tha..",mulk ke jhande ke teeno rango ko mila ke kuchh aisi kalakari ki gayi thi ki usme se sabhi rang nikalte dikhate the & fir 1 safed rang me tabdil hote lagte the.ab tum batao is tasvir ke bare me?",divya halke se muskurayi & tasvir ko dekhne lagi.

"ekta..anekta me ekta..teeno rango se alag-2 rang nikle & fir 1 rang me tabdil ho gaye..safed rang..aman..pyar.",usne professor ko sawaliya nigaho se dekha to vo hans pada.

"jaan,tasvir koi padhai ka sawal thode hi hai ki 1 hi sahi jawab ho..",vo uske peechhe aya & use baaho me bhara to divya ka seena uski dress ke gale me se chhalakne ko betab ho utha,"..har dekhnewala uska apna alag matlab nikalne ko azad hai.vaise main bhi kuchh tumhari hi tarah sochta hu is tasvir ke abre me.",professor ne uski gardan pe dayi taraf chuma to divya ne aankhe band kar dayi banh peechhe le ja uska sar sehlaya.kuchh hi palo me dusra strap bhi kandhe se sarak chuka tha & divya ke kandhe professor ke hotho ki tapish se jalne lage the.divya ka jism kanp raha tha.vo palti & professor ke gale me baahe dal uske chehre ko chumne lagi.chumte-2 vo neeche aayi & uski kamiz ke buttons khol diye.agle hi pal professor ke gathe hue jism ki manspeshiyo pe uske hasrat bhare hath ghum rahe the.

professor ne use seene se laga liya & fir use hall me rakhid duri chize dikhane laga.divya thodi-2 der pe uske chaude seene pe jagah-2 chum leti.usne apni dayi banh apne aashiq ki kamar me dal rakhi thi,"ye hai meri study.",dono ab 1 dusre kamre me aa gaye the jiski deewaro se lage farsh se chhat tak ke lumbe shelf kitabo se bhare hue the.

"wow!",divya ki aankhe hairat se bhari hui thi,"ye to koi chhoti si library lagti hai!",1 taraf zamin pe 1 gadda laga tha jispe takiye rakhe hue the & dusri taraf 1 desk lagi thi jispe 1 computer & likhne ka saman rakha tha.is kamre me vo betartibi thi jo rozana istemal karne pe hoti hai,"lagta hai tumhara zyadatar waqt yehi pe guzarta hai?",divya ke sawal pe professor ne muskurate hue haan me sar hilaya,"vo kya hai,Ajinkya?",kamre ke 1 kone me 1 band almari thi.

"aise hi kuchh bekar ka saman pada hai.",professor ne sawal talne ki koshish ki.

"mujhe dekhna hai.",divya bachcho ki tarah machlati hui uske seene ke baal khinchne lagi.

"achha.",lumbi sans bhar professor ne almari kholi to divya ko vaha kayi shields,trophies & certificates dhool khate nazar aaye.

"ajinkya!tum bhi na!..ye sab tumne aise rakha hai..& ye..ye bekar ki chize hain?"

"haan..kya kaam hai inka..& tum kya chahti ho inki numaish lagaoon."

"nahi,numaish mat lagao.",divya ne use baaho me bhar apni moti chhatiya uske seene pe daba di,"..par logo ne tumhe izzat bakshi hai us baat ki to kadr karo.kam se kam inhe sahej ke to rakho."

"ok,kar dunga.",professor ne use bahao me bhar liya & uski moti gand dabate hue use chumne laga.

"ohhhh...chhodo na..",divya ke gaal josh se aur gulabi ho gaye.masti ki shiddat na bardasht kar pane ke chalte usne kiss todi & apne mehboob ke agosh me chhatpatane lagi,"..aahhhhh...na....ajinkya...aahhhh..!",professor ne uski dress ke andar hath ghusa uski gand ko daboch liya tha & uski gardan & kandhe chume ja raha tha.divya ke hath abhi ab professor ke fauladi jism pe apni masti jatate ghum rahe the.tabhi professor ne uski gand ki kasi fanko ko daboch use thoda upar utha khud se aise sataya ki divya ki chut uske lund se dab gayi & divya ke jism me phuljhadiya futne lagi.divya ki aahe band ho gayi & vo professor ki baaho me jhul gayi.vo jhad rahi thi.use hairat ho rahi thi ki vo itni asani se kaise jhad gayi magar agle hi pal use apni dress utarti mehsus hui & vo aane vale mast palo ki khumari me kho gayi.

professor ne use baaho me utha liya & kamre se bahar le aaya,"ye hai mehmano kamra.",divya ne apni baahe uske gale me daal di & uske chehre ko chumne lagi,"..& ye hai rasoi.",professor ne use kitchen ke slab pe bitha diya to divya ne apni tange khol use apni baaho me bhar liya.

"khana kaun banata hai tumhare liye & is ghar ko itna saaf kaun rakhta hai?",divya uski pant kholte hue uske honth chum rahi thi.

"naukar hain.kaam karke chale jate hain.",divya ne jhatpat professor ki pant & underwear ko utara & uske lund ko baaho me bhar liya.

"ajinkya,maine socha tha ki kabhi tumse ye sawal nahi karungi..",vo lund ko hila rahi thi,"..tum chaho to jawab mat dena.ye mat samajhna ki tumhari zati zindagi me dakhal de rahi hu..magar..",usne uske ando ko haule se dabaya & fir lund ko ragadne lagi,"..tumhe itne bade ghar me akelapan mehsus nahi hota?"

"ye to soch pe hai,divya..",professor ne uski kale bar me qaid sangmarmari chhatiya aapas me milate hue daba di,"..insan bheed me bhi akela ho sakta hai & tanhai me bhi tanha nahi reh sakta.",aah bharti divya ke mathe pe shikan pad gayi.

"yaha meri yaaden hai meri tanhai mitane ko mere sath.",vo aage jhuka & use baaho me bhar uske honth chum liye.divya samajh gayi ki is romani andaz me uske honth band karne ka matlab yehi tha ki vo nahi chahta tha ki is bare me aage baat ho.divya ko bhi is baat pe koi aitraz nahi tha,usne uske faisle ki kadr ki & uski kiss ka lutf uthane lagi.professor ne uske bra ko khola & uski numaya chhatiyo ko apne hatho ki meherbani pe chhod diya.divya ki aahe tez ho agyi to vo jhuka & unhe chune laga.uske hotho ke ehsas se divya muskura uthi.slab ke peechhe ki deewar se tek lagake baith vo aankhe band kar us ehsas ka pura maza uthane lagi.uske nipples ko apne hontho se chhedne ke baad vo neeche gaya & uske sapat pet ko ji bhar ke chuma.

divya ki nabhi ki gehraiyo ko usne pata nahi kitni baar apni zuban se napa & fir neeche aa uski mansal jangho ko chumne laga.uske sandals ko utar usne uske pairo ki ungliyo ko chuma to divya sihar uthi.uski chut me kasak aur tez ho gayi & slab pe hi kasmasane lagi.professor khada hua & use fir se baaho me utha liya,"chalo,tumhe apna bedroom dikhata hu.",dono ki aankhe nashe me dubi 1 dusre se mil tgau. divya ne uske gale me baahe dal di & apna sar uske baye kandhe pe tika diya.

divya bilkul madhosh thi magar us madhoshi me bhi uski tez nigaho se 1 baat chhupi nahi reh saki.professor ka kamra bilkul saaf-suthra & karine se tha magar use dekh ke aisa lagta tha mano use koi istemal nahi karta ho.bade se palang pe saje bistar ko dekh ke aisa lagta tha mano roz uski chadar badli jati ho magar uspe salwaten dalne wala koi na ho.aakhir kyu?..divya ke zehan me sawal kaundha..professor ki zindahi me aurato ki kami nahi thi fir vo kamra aisa kyu lag raha tha..& fir agar vo yaha nahi aata & kisi ko nahi lata to fir use kyu laya tha?

professor ne use bistar pe litaya & uske upar jhuk uski phool si komal choochiy chusne laga.divya baahe failaye aahe bharne lagi.professor ke aatur honth to jaise uski moti choochiyo se chipak hi gaye the!divya kamar uchkate hue tadapne lagi....kamal ka mard tha!....bina khud jhade vo kitni asani se use itni baar jhadwa deta tha!..uska jism fir se masti ki oonchaiyo ko chhu raha tha ki tabhi professor ne uski choochiy chhodi & neeche jane laga.divya ka dil khushi se bhar utha,ab uski chut ki bari thi apne mehboob se pyar pane ki.

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kramashah........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 15:51

खेल खिलाड़ी का पार्ट--42

गतान्क से आगे............-

प्रोफेसर नीचे आया & उसकी पॅंटी के उपर से ही उसकी चूत को किस्सस से ढँक दिया.दिव्या बिस्तर पे हाथ बेचैनी से चलती अपना सर इधर-उधर हिला रही थी.अधखुली आँखो से उसने देखा की हर दीवार पे प्यार मे डूबे जोड़ो की तस्वीरे हैं.किसी मे कोई 1 दूसरे को चूम रहा है तो किसी मे बस दोनो प्रेमी 1 दूसरे के आगोश मे बैठे हैं.1 तस्वीर मे 1 बिल्कुल नंगी लड़की अपने प्रेमी से चुद रही थी.दोनो को देख ऐसा लगता था दोनो 1 साथ झाड़ रहे हैं.दिव्या को महसूस हुआ कि उसके प्रेमी ने उसकी पॅंटी उतार दी है.

"आननह....!",प्रोफेसर की ज़ुबान उसकी चूत से टकराई तो वो कराह उठी.प्रोफेसर ने उसकी गंद की बगलो मे हाथ लगा के उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया & उसे पागल कर दिया.वो अपनी ज़ुबान को उसकी चूत के अंदर घुसा के उस से बह रहे रस की 1-1 बूँद को चाते जा रहा था.बीच-2 मे उसकी ज़ुबान बाहर आ दिव्या के दाने पे चलती तो वो और ज़ोर से कराह रही .प्रोफेसर ने अपना बाया हाथ बगल से हटा के उसकी चूत के उपर के पेट के हिस्से पे दबाया & अपनी ज़ुबान अंदर फिराई तो दिव्या चीख उठी.बेचैनी से को बिस्तर की चादर को पकड़ के खींचती हुई कमर उचकाने लगी मगर प्रोफेसर के हाथ ने उसे बिस्तर पे दबाए रखा & उसकी चूत से वैसे ही खेलते रहा.दिव्या सिसकते हुए फिर से झड़ने लगी.

प्रोफेसर ने अपना चेहरा उसकी चूत से उठाया & उसकी फैली टाँगो के बीच आ गया.दिव्या ने अपनी टाँगे हवा मे उठा दी तो प्रोफेसर ने उसकी नज़रो मे झँकते हुए अपना लंड उसकी चूत मे उतारना शुरू कर दिया.दिव्या ने आँखे मींच ली & उसकी बाहे पकड़ ली & अपना सर पीछे कर लिया.प्रोफेसर का मोटा लंड उसकी चूत को बहुत ज़्यादा फैला देता था & शुरू मे उसे अभी भी थोड़ा दर्द होता था.प्रोफेसर ने बस 2 इंच लंड बाहर रखा & बहुत धीरे-2 अपनी प्रेमिका की चुदाई शुरू कर दी.वो थोड़ा नीचे झुका & उसकी गर्दन चूमने लगा तो दिव्या ने अपने सर के बगल मे पड़े उसके मज़बूत बाए बाज़ू से अपने होंठ लगा दिए.प्रोफेसर की लंड की रगड़ से जब उसकी चूत मस्त हो गयी तो उसकी टाँगो मे भी हरकत आने लगी.वो कभी प्रोफेसर की जाँघो पे चढ़ जाती तो कभी उसकी कमर पे.दिव्या अपनी आएडियो से प्रोफेसर की जाँघो के पिच्छले हिस्से को सहलाते हुए जब नीचे से अपनी कमर हिलाने लगी तो प्रोफेसर ने लंड को सूपदे तक खींचा & 1 ज़ोर का धक्का दिया.

"ऊव्वववववव.....!",लंड जड तक दिव्या की चूत मे समा गया था.दिव्या के हाथ 1 बार फिर बिस्तर की चादर पे अपनी बेचैनी की दास्तान कहते हुए सलवटें छ्चोड़ने लगे.प्रोफेसर उसके खूबसूरत जिस्म की गोलाईयो,उसकी लंबी गर्दन & हसीन चेहरे को चूमते हुए बस धक्के पे धक्के लगाए जा रहा था.प्रोफेसर थोड़ी देर बाद उसे उपर से उठा & अपनी हथेलिए उसके दोनो तरफ जमा उसकी चुदाई करने लगा.दिव्या तो मस्ती & मज़े से बहाल हो गयी थी & सिसक रही थी.आँखे खोली तो उसने अपने उपर उठे हुए धक्के लगाते प्रोफेसर को देखा.उसने सर नीचे किया तो उसकी चिकनी चूत को भेदता उसे प्रोफेसर का बिना बालो का मोटा,तगड़ा लंड नज़र आया तो जैसे उसके अंदर जोश की 1 नयी लहर उठ गयी.

उसने अपने हाथो से अपनी चूचिया मसल्ते हुए अपना सर उपर किया तो उसे प्रोफेसर का फौलादी सीना दिखा,उसने अपने हाथ उपर कर उसके जिस्म को पकड़ा & उचकते हुए अपने होंठ प्रोफेसर के बाए निपल से लगा दिए & चूसने लगी.प्रोफेसर को इसकी उमीद नही थी & उसने खुद को झड़ने से कैसे रोका ये वही जानता था.1 तो दिव्या की चूत अब उसके लंड पे बिल्कुल कस गयी थी उपर से उसकी ये मस्तानी हरकत!

वो बस झुका वैसे ही धक्के लगाता रहा कि तभी दिव्या को अपनी चूत मे बहुत तनाव महसूस हुआ.उसने प्रोफेसर का जिस्म छ्चोड़ दिया,उसके होंठ उसके निपल से अलग हुए & वो वापस बिस्तर पे गिर गयी.उसके दोनो हाथ पीछे पलंग के हेडबोर्ड से जा लगे & वो ज़ोर-2 से चीखने लगी.हाथ पीछे ले जाने से उसकी चूचिया & उभर गयी थी & प्रोफेसर को वो उसे दावत देती हुई लगी.वो झुका & अपनी महबूबा की चूचियो को मुँह मे भर लिया.

"आन्न्न्नह....!",1 आख़िरी चीख के साथ दिव्या झाड़ गयी.उसके झाड़ते ही प्रोफेसर ने फ़ौरन अपना लंड उसकी चूत से बाहर खींचा & उसकी गंद के नीचे हाथ लगा उसे हवा मे उठा दिया & इस से पहले की दिव्या कुच्छ समझती वो झुक के उसकी चूत चाटने लगा.

"आननह...उउन्न्ह..हहुऊन्न्ह...न्न्नुउहह...!",जिस्म मे मस्ती जिस शिद्दत के साथ बह रही थी वो अब नकाबिले बर्दाश्त थी.दिव्या अब रो रही थी.जिस्म के मज़े को इस गहराई,इस तीव्रता से उसने कभी महसूस नही किया था.वो प्रोफेसर का सर अपनी चूत से हटाना चाह रही थी मगर वो था कि मन ही नही रहा था & उसकी चूत चाते चला जा रहा था.

"ऊन्न्नह....उउउन्न्ह.....!",दिव्या सुबक्ती हुई 1 बार फिर झाड़ गयी & उसने प्रोफेसर को दूर धकेल दिया & अपनी बाई करवट पे हो अपनी टाँगे मोड़ के घुटने अपने पेट पे लगा लिए & अपनी बाहे भींच के सिसकने लगी.प्रोफेसर उसकी पीठ से आ लगा & उसके बाल सहलाने लगा.कुच्छ पॅलो बाद उसने दिव्या के चेहरे से ज़ूलफे हटा उसके गाल को चूमा तो दिव्या ने उसकी तरफ देखा.प्रोफेसर ने उसका चेहरा अपनी ओर किया & बड़े प्यार से चूमा.दिव्या अब संभाल चुकी थी & उसकी किस का जवाब देने लगी थी.

प्रोफेसर ने वैसे ही करवट पे लेटे हुए उसकी दाई टांग को उठाया & 1 बार फिर दिव्या की चुदाई शुरू कर दी.दिव्या अपनी कोहनी पे उचक गयी & सर पीछे घुमा प्रोफेसर को चूमते हुए उस से चुदने लगी.उसका जिस्म 1 बार फिर मस्ती के सफ़र पे चल पड़ा था.प्रोफेसर का दाया हाथ कभी उसकी जाँघो को सहलाया तो कभी पेट को.वो कभी उसके दाने को मसलता तो कभी गुलाबी निपल्स को.जब उसने उसकी चूचियो को दबोच के मसलते हुए उसके कान मे जीभ फिराते हुए पीछे से तेज़ धक्के लगाने शुरू किए तो 1 बार फिर दिव्या की आहे कमरे को गुलज़ार करने लगी.उसी वक़्त दिव्या की नज़र कमरे के कोने मे रखी 1 मूर्ति पे गयी.कोई 4 फिट लंबी वो मूर्ति 1 स्टॅंड पे रखी थी.खजुराहो की मूर्ति की नकल उस मूर्ति मे ज़ेवरो से सजे 2 नंगे प्रेमी 1 दूसरे के आगोश मे थे & लड़के ने लड़की की दाई जाँघ उठाके उसके चेहरे को चूमते हुए अपना लंड उसकी चूत मे घुसाया हुआ था.इस नज़ारे ने आग मे घी का काम किया & जब प्रोफेसर ने उसके दाने को मसलते हुए उसके कान को हल्के से काटा तो दिव्या 1 बार फिर सूबक पड़ी & झाड़ गयी.

दिव्या निढाल हो पेट के बल बिस्तर पे गिर गयी & अपना चेहरा सलवटो से भरे बिस्तर मे दफ़्न कर सिसकने लगी की तभी 1 बार फिर प्रोफेसर दीक्षित ने पीछे से ही उसकी टाँगो को फैला के अपनी ज़ुबान उसकी चूत से लगा दी.दिव्या की सिसकिया और तेज़ हो गयी.प्रोफेसर की लपलपाति जीभ उसकी चूत से निकले पानी को लगातार चाते जा रही थी.

वो बेचैन हो कमर हिलाते हुए कसमसाने लगी मगर प्रोफेसर ने उसकी कमर को दबाए रखा & उसकी चूत तब तक चाटता रहा जब तक वो 1 बार और नही झाड़ गयी.इस बार झाड़ते ही दिव्या ने करवट बदली & सीधी हो गयी.

दोनो प्रेमी 1 दूसरे की आँखो मे झाँक रहे थे.प्रोफेसर ने उसके घुटने पकड़ उसकी टाँगे खोली तो दिव्या उसका इरादा भाँप गयी & फ़ौरन उठी & प्रोफेसर की कमर को अपने आगोश मे ले उसके पेट को चूमने लगी.प्रोफेसर उसकी इस हरकत से थोडा अचंभे मे पड़ गया.

दिव्या बिस्तर पे बैठे हुए दाई बाँह को उसकी कमर पे लपेटे हुए बाए से उसके लंड को पकड़ उसे चूसने लगी तो प्रोफेसर की आह निकल गयी.दिव्या ने उसके पेट को दबाते हुए उसे बिस्तर पे लेटने का इशारा किया तो प्रोफेसर ने उसकी बात मान ली.दिव्या ने उसके लेटते ही अपनी बाई बाँह को उसकी बाई जाँघ के नीचे से घुसाते हुए उस हाथ से उसके नडो को दबोचा & उसके बगल मे लेट दाई कोहनी को उसके पेट पे टिकाते हुए उसके लंड को मुँह मे भर लिया.उसकी इस अदा पे प्रोफेसर की आह निकल गयी.

दिव्या अपने नखुनो से उसके आंडो को हल्के-2 खरोचते उसके लंड को चूस रही थी.प्रोफेसर काफ़ी देर से बिना झाडे उसे चोद रहा था & अब दिव्या का यू उसके लंड से खेलना उसे झड़ने की ओर तेज़ी से ले जा रहा था.उसने बाए हाथ से दिव्या के बाल पकड़ लिए & उन्हे सहलाने लगा.दिव्या की कोमल ज़ुबान उसके सूपदे को छत रही थी.उसका हाथ अब अंदो से उपर लंड के गिर्द कस चुका था & उसे हिला रहा था.प्रोफेसर का मोटा सूपड़ा उसके होंठो फैला रहा था मगर उसे उसे चाटने,चूसने मे बहुत मज़ा आ रहा था.

उसने अपना बाया हाथ लंड से नीचे किया & प्रोफेसर की बाई जाँघ के नीचे अपनी उंगलियो के पोर से सहलाने लगी.प्रोफेसर मस्ती मे पागल हो अपनी टांग बेचैनी से उठाने लगा.दिव्या ने अपने हाथ को थोड़ा नीचे किया & जहा से अंडे प्रोफेसर के जिस्म से जुड़े थे,उसकी गंद की छेद के थोड़ा उपर,वाहा पे हल्के से चिकोटी काट ली.

"आहह....दिव्या.....रुक जाओ..वरना मैं झाड़ जाऊँगा..!",प्रोफेसर उठ बैठा & दिव्या के बाल पकड़ के उसके सर को उपर किया.

"तो झड़ो ना!"दिव्या की आँखो मे मस्ती के डोरे तार रहे थे,"मैं भी तुम्हारे प्यार का रस चखना चाहती हू आज.",दिव्या ने बिना अपनी पलके नीचे किए अपने आशिक़ के मोटे लंड के छेद पे 1 हल्की सी किस ठोंक दी.प्रोफेसर के जिस्म मे जोश की आग और भड़क उठी.उसने दिव्या की बाई बाँह अपनी जाँघ के नीचे से निकाल अपनी टाँगे फैला दी तो दिव्या उसकी टाँगो के बीच लेट गयी & थोड़ा उठ के उसके लंड को मुँह मे भर लिया.ज़ोर-2 से हिलाते हुए वो लंड को चूसे चली जा रही थी.आख़िर प्रोफेसर कितनी देर तक उसकी ऐसी हरकतें झेलता.उसके आंडो मे अब मीठा दर्द होना शुरू हो गया था.

"दिव्याआअ.....आहह....!",उसका जिस्म झटके खाने लगा & वो दिव्या का सर पकड़े हुए झड़ने लगा.दिव्या का मुँह उसके लंड से निकल रहे वीर्य से भरने लगा.दिव्या ने उसके साथ पिच्छले दीनो मे ना जाने कितनी बार चुदाई की थी मगर फिर भी प्रोफेसर के वीर्य की मात्रा कम नही होती थी.उसका मुँह भर रहा था मगर लंड अभी भी पिचकारियाँ छ्चोड़ रहा था.दिव्या उसके वीर्य की 1-1 बूँद को पी जाना चाहती थी.वो लंड को अभी भी चूसे जा रही थी.

जब उसने पूरे लंड को चाट के सॉफ कर दिया तब जाके उसे चैन पड़ा & वो उपर उठी.उसके उठते ही प्रोफेसर ने उसे अपनी बाँहो मे भर लिया & उसके प्यारे चेहरे को अपनी किस्सस से ढँक दिया.उसके होंठो पे अपने वीर्य का स्वाद चखना प्रोफेसर के लिए बड़ा मस्ती देने वाला एहसास था.उसने अपनी जवान प्रेमिका को अपने जिस्म से पूरा सटा लिया & बिस्तर पे लेट गया.ये तो आगाज़ था दोनो ही जानते थे कि आज रात के अंजाम तक दोनो मस्ती की नयी ऊँचाइयो को छु लेंगे.

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"वो महेश अरोरा था ना?"

"ह-हां..क्यू..?",वॉक-इन क्लॉज़ेट मे कपड़े उतारती अंजलि पति के सवाल से चौंक पड़ी.

"बस ऐसे ही.",जसजीत प्रधान उसकी ओर पीठ किए अपने कपड़े उतार रहा था.अगर वो उस वक़्त अपनी बीवी की ओर देखता तो पाता की क्रीम कलर के ब्रा के गले मे से उसका क्लीवेज उसके धड़कते दिल की घबराहट बयान कर रहा था.

"मुकुल का कॅंपेन वही फाइनान्स कर रहा है.",प्रधान ने पॅंट उतारी,"..मगर वो तुम्हारे साथ कैसे डॅन्स करने लगा?तुम उसे जानती हो क्या?"

"हूँ..हां....मेरा सीनियर था ना कॉलेज मे तो थोड़ी बहुत जान-पहचान थी,ही-हेलो तक & अब..",अंजलि ने पेटिकोट उतारा,"..तुम्हारी वजह से मैं भी तो मशहूर हो गयी हू इसलिए मेरे साथ डॅन्स करने आ गया."

"तुम्हे अच्छा नही लगा क्या?",जसजीत केवल अंडरवेर मे खड़ा था जब अंजलि ने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया.

"नही..",जसजीत घुमा & अंजलि की नंगी कमर को अपनी बाहो मे कस के मसला,"..तुम्हे किसी भी और की बाहो मे देखता हू तो पागल हो जाता हू.",उसने अपने होंठ अंजलि के क्लीवेज से लगा दिए.

"धात!....आहह....उम्म्म्म....बिस्तर पे चलो ने प्लीज़....ऊहह..!",पति की गुस्ताख हर्कतो ने उसकी बदगुमानी दूर कर दी थी लेकिन फिर भी अपने पति से,जिसे वो जान से भी ज़्यादा चाहती थी,झूठ बोलना उसे अच्छा नही लगा था मगर वो क्या करती,उसकी मा ने उसे शादी से पहले सख़्त हिदायत दी थी कि चाहे कुच्छ भी हो जाए वो जसजीत को महेश के बारे मे नही बताएगी वरना उसकी शादी बर्बाद भी हो सकती थी.

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"मैने भाभी से बात की आज.",मुकुल नीना के नंगे कंधे को चूम रहा था.दोनो अपने बिस्तर मे चादर के नीचे थे,नीना बाई करवट पे थी & मुकुल उस से पीछे से सटा था.

"तो?"

"भाभी नाराज़ नही हैं पर भाय्या है.",मुकुल उसके पेट को सहला रहा था....अफ..कुच्छ भी कर लो लेकिन ये आदमी बस अपने भाय्या-भाभी की माला ही जपेगा!नीना खिज उठी.

"तो बस मैं चुनाव जीत के भाय्या को ये साबित कर दूँगा कि मैं भी किसी लायक हू.",मुकुल नीना की गर्दन चूम तो रहा था मगर ऐसा लगता था मानो उसका दिल कही और था....ओह!तो ये बात है,मुकुल भी खुद को साबित करना चाहता है,"..& तुम्हे वो सब दूँगा जिसकी तुम हक़दार हो,नीना.",..नीना को ग्लानि महसूस हुई,वो तो सब केवल अपनी हस्रतो को पूरा करने के लिए कर रही थी मगर उसका पति उसकी & अपने परिवार की उमीदो पे खरा उतरने के लिए ये सब कर रहा था..वैसे भी मुकुल उसे पागलो की तरह चाहता था..मगर वो भी तो सब अपने परिवार की खुशी के लिए ही कर रही थी.

"ज़्यादा परेशान मत हो..",नीना ने करवट ली & मुकुल के चेहरे को अपने हाथो मे भर लिया,"..तुम जीतोगे & सब ठीक हो जाएगा & मेरी फ़िक्र मत किया करो.मैं खुश हू तुम्हारे साथ मुकुल.किसी और की बीवी बन के ज़िंदगी बिताने की तो मैं सोच भी नही सकती.",ज़माने बाद नीना की आवाज़ मे मुकुल ने वो नर्मी महसूस की थी.उसके दिल मे प्यार का सैलाब उमड़ आया & उसने अपनी प्यारी बीवी को अपने आगोश मे क़ैद कर लिया & उसके जिस्म को अपने प्यार से भिगोने लगा.उस रात अरसे बाद नीना अपने पति की चुदाई से 2 बार झड़ी.

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क्रमशः........

gataank se aage............-

professor neeche aya & uski panty ke upar se hi uski chut ko kisses se dhank diya.divya bistar pe hath bechiani se chalati apna sar idhar-udhar hila rahi thi.adhkhuli aankho se usne dekha ki har deewar pe pyar me dube jodo ki tasvire hain.kisi me koi 1 dusre ko chum raha hai to kisi me bas dono premi 1 dusre ke agosh me baithe hain.1 tasvir me 1 bilkul nangi ladki apne premi se chud rahi thi.dono ko dekh aisa lagta tha dono 1 sath jhad rahe hain.divya ko mehsus hua ki uske premi ne uski panty utar di hai.

"aannhhhhhh....!",professo ki zuban uski chut se takrayi to vo karah uthi.professor ne uski gand ki baglo me hath laga ke uski chut chatna shuru kar diya & use pagal kar diya.vo apni zuban ko uski chut ke andar ghusa ke us se beh rahe ras ki 1-1 boond ko chate ja raha tha.beech-2 me uski zuban bahar aa divya ke dane pe chalti to vo aur zor se karah ithati.professor ne apna baya hath bagal se hata ke uski chut ke upar ke pet ke hisse pe dabaya & apni zuban andar firayi to divya chikh uthi.bechaini se co bistar ki chadar ko pakad ke khinchti hui kamar uchkane lagi magar professor ke hath ne use bistar pe dabaye rakha & uski chut se vaise hi khelte raha.divya sisakte hue fir se jhadne lagi.

professor ne apna chehra uski chut se uthaya & uski faili tango ke beech aa gaya.divya ne apni tange hawa me utha di to professor ne uski nazro me jhankte hue apna lund uski chut me utarna shuru kar diya.divya ne aankhe meench li & uski baahe pakad li & apna sar peechhe kar liya.professor ka mota lund uski chut ko bahut zyada faila deta tha & shuru me use abhi bhi thoda dard hota tha.professor ne bas 2 inch lund bahar rakha & bahut dhire-2 apni premika ki chudai shuru kar di.vo thoda neeche jhuka & uski gardan chumne laga to divya ne apne sar ke bagal me pade uske mazbut baye bazu se apne honth laga diye.professor ki lund ki ragad se jab uski chut mast ho gayi to uski tango me bhi harkat aane lagi.vo kabhi professor ki jangho pe chadh jati to kabhi uski kamar pe.divya apni aediyo se professor ki jangho ke pichhle hisse ko sehlate hue jab neeche se apni kamar hilane lagi to professor ne lund ko supade tak khincha & 1 zor ka dhakka diya.

"OOWWWW....!",lund jud tak divya ki chut me sama gaya tha.divya ke hath 1 baar fir bistar ki chadar pe apni bechaini ki dastan kehte hue salwaten chhodne lage.professor uske khubsurat jism ki golaiyo,uski lumbi gardan & haseen chehre ko chumte hue bas dhakke pe dhakke lagaye ja raha tha.professor thodi der baad use upar se utha & apni hatheliye uske dono taraf jama uski chudai karne laga.divya to masti & maze se behal ho gayi thi & sisak rahi thi.aankhe kholi to usne apne upar uthe hue dhakke lagate professor ko dekha.usne sar neeche kiye to uski chikni chut ko bhedta use professor ka bina balo ka mota,tagda lund nazar aaya to jaise uske andar josh ki 1 nayi lehar uth gayi.

usne apne hatho se apni choochiya masalte hue apna sar upar kiya to use professor ka fauladi seena dikha,usne pane hath upar kar uske jism ko pakda & uchakte hue apne honth professor ke baye nipple se laga diye & chusne lagi.professor ko iski umeed nahi thi & usne khud ko jhadne se kaise roka ye vahi janta tha.1 to divya ki chut ab uske lund pe bilkul kas gayi thi upar se uski ye mastani harkat!

vo bas jhuka vaise hi dhakke lagata raha ki tabhi divya ko apni chut me bahut tanav mehsus hua.usne professor ka jism chhod diya,uske honth uske nipple se alag hue & vo vapas bsitar pe gir gayi.uske dono hath peechhe palang ke headboard se ja lage & vo zor-2 se chikhne lagi.hath peechhe le jane se uski choochiya & ubhar gayi thi & professor ko vo use dawat deti hui lagi.vo jhuka & apni mehbooba ki choochiyo ko munh me bhar liya.

"AANNNNHHHHHH....!",1 aakhiri chikh ke sath divya jhad gayi.uske jhadte hi professor ne fauran apna lund uski chut se bahar khincha & uski gand ke neeche hath laga use hawa me utha diya & is se pehle ki divya kuchh samajhti vo jhuk ke uski chut chatne laga.

"AANNHHH...UUNNHHHH..HHHUUNNHHH...NNNUUHHHH...!",jism me masti jis shiddat ke sath beh rahi thi vo ab nakabile bardasht thi.divya ab ro rahi thi.jism ke maze ko is gehrayi,is teevrata se usne kabhi mehsus nahi kiya tha.vo professor ka sar apni chut se hatana chah rahi thi magar vo tha ki maan hi nahi raha tha & uski chut chate chala ja raha tha.

"OONNNHHHHHH....UUUNNHHHHHHH.....!",divya subakti hui 1 baar fir jhad gayi & usne professor ko door dhakel diya & apni bayi karwat pe ho apni tange mod ke ghutne pane pet pe laga liye & apni baahe bhinch ke sisakne lagi.professor uski pith se aa laga & uske baal sehlane laga.kuchh palo baad usne divya ke chehre se zulfe hata uske gaal ko chuma to divya ne uski taraf dekha.professor ne uska chehra apni or kiya & bade pyar se chuma.divya ab sambhal chuki thi & uski kiss ka jawab dene lagi thi.

professor ne vaise hi karwat pe lete hue uski dayi tang ko uthaya & 1 baar fir divya ki chudai shuru kar di.divya apni kohni pe uchak gayi & sar peechhe ghuma professor ko chumte hue us se chudne lagi.uska jism 1 baar fir masti ke safar pe chal pada tha.professor ka daya hath kabhi uski jangho ko sehlayta to kabhi pet ko.vo kabhi uske dane ko masalta to kabhi gulabi nipples ko.jab usne uski choochiyo ko daboch ke maslate hue uske kaan me jibh firate hue peechhe se tez dhakke lagane shuru kiye to 1 baar fir divya ki aahe kamre ko gulzar karne lagi.usi waqt divya ki nazar kamre ke kone me rakhi 1 murti pe gayi.koi 4 ft lumbi vo murti 1 stand pe rakhi thi.khajuraho ki murti ki nakal us murti me zevaro se saje 2 nange premi 1 dusre ke agosh me the & ladke ne ladki ki dayi jangh uthake uske chehre ko chumte hue apna lund uski chut me ghusaya hua tha.is nazare ne aag me ghee ka kaam kiya & jab professor ne uske dane ko maslate hue uske kaan ko halke se kata to divya 1 baar fir subak padi & jhad gayi.

Divya nidhal ho pet ke bal bistar pe gir gayi & apna chehra salwato se bhare bistar me dafn kar sisakne lagi ki tabhi 1 baar fir Professor Dixit ne peechhe se hi uski tango ko faila ke apni zuban uski chut se laga di.divya ki siskiya aur tez ho gayi.professor ki laplapati jibh uski chut se nikle pani ko lagatar chate ja rahi thi.

vo bechain ho kamar hilate hue kasmasane lagi magar professor ne uski kamar ko dabaye rakha & uski chut tab tak chatata raha jab tak vo 1 baar aur nahi jhad gayi.is baar jhadte hi divya ne karwat badli & seedhi ho gayi.

dono premi 1 dusre ki aankho me jhank rahe the.professor ne uske ghutne pakad uski tange kholi to divya uska irada bhanp gayi & fauran uthi & professor ki kamara ko apne agosh me le uske pet ko chumne lagi.professor uski is harkat se thoda achambhe me pad gaya.

divya bistar pe baithe hue dayi banh ko uski kamar pe lapete hue baye se uske lund ko pakad use chusne lagi to professor ki aah nikal gayi.divya ne uske pet ko dabate hue use bistar pe letne ka ishara kiya to professor ne uski baat maan li.divya ne uske letate hi apni bayi banh ko uski bayi jangh ke neeche se ghusate hue us hath se uske nado ko dabocha & uske bagal me let dayi kohni ko uske pet pe tikate hue uske lun dko munh me bhar liya.uski is ada pe professor ki aah nikal gayi.

divya apne nakhuno se uske ando ko halke-2 kharochte uske lund ko chus rahi thi.professor kafi der se bina jhade use chod raha tha & ab divya ka yu uske lund se khelna use jhadne ki or tezi se le ja raha tha.usne baye hath se divya ke baal pakad liye & unhe sehlane laga.divya ki komal zuban uske supade ko chat rahi thi.uska hath ab ando se upar lund ke gird kas chuka tha & use hila raha tha.professor ka mota supada uske hotho faila raha tha magar use use chatne,chusne me bahut maza aa raha tha.

usne apna baya hath lund se neeche kiya & professor ki bayi jangh ke neeche apni ungliyo ke pror se sehlane lagi.professor masti me pagal ho apni tang bechaini se uthane laga.divya ne apne hath ko thoda neeche kiya & jaha se ande professor ke jism se jude the,uski gand ki chhed ke thoda upar,vaha pe halke se chikoti kaat li.

"aahhhh....divya.....ruk jao..varna main jhad jaoonga..!",professor uth baitha & divya ke baal pakad ke uske sar ko upar kiya.

"to jhado na!"divya ki aankho me masti ke dore tair rahe the,"main bhi tumhare pyar ka ras chakhna chahti hu aaj.",divya ne bina apni palke neeche kiye apne aashiq ke mote lund ke chhed pe 1 halki si kiss thonk di.professor ka jism ki josh ki aag aur bhadak uthi.usne divya ki bayi banh apni jangh ke neeche se nikal apni tange faila di to divya uski tango ke beech let gayi & thoda uth ke uske lund ko munh me bhar liya.zor-2 se hilate hue vo lund ko chuse chali ja rahi thi.aakhir professor kitni der tak uski aisi harkaten jhelta.uske ando me ab meetha dard hona shuru ho gaya tha.

"divyaaaaa.....aahhhhhhh....!",uska jism jhatke khane laga & vo divya ka sar pakde hue jhadne laga.divya ka munh uske lund se nikal rahe virya se bharne laga.divya ne uske sath pichhle dino me na jane kitni baar chudai ki thi magar fir bhi professor ke virya ki matra kam nahi hoti thi.uska munh bhar raha tha magar lund abhi bhi pichlariyan chhod raha tha.divya uske virya ki 1-1 boond ko pi jana chahti thi.vo lund ko abhi bhi chuse ja rahi thi.

jab usne pure lund ko chat ke saaf kar diya tab jake use chain pada & vo upar uthi.uske uthate hi professor ne use apni bahao me bhar liya & uske pyare chehre ko apni kisses se dhank diya.uske hotho pe apne virya ka sad chakhna professor ke liye bada masti dene vala ehsas tha.usne apni jawan premika ko apne jism se pura sata liya & bistar pe let gaya.ye to aaghaz tha dono hi jante the ki aaj raat ke anjam tak dono masti ki nayi oonchaiyo ko chhu lenge.

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"Vo Mahesh Arora tha na?"

"h-haan..kyu..?",walk-in closet me kapde utarti Anjali pati ke sawal se chaunk padi.

"bas aise hi.",Jasjit Pradhan uski or pith kiye apne kapde utar raha tha.agar vo us waqt apni biwi ki or dekhta to pata ki cream color ke bra ke gale me se uska cleavage uske dhadakte dil ki ghabrahat bayan kar raha tha.

"Mukul ka campaign vahi finance kar raha hai.",pradhan ne pant utari,"..magar vo tumhare sath kaise dance karne laga?tum use janti ho kya?"

"hun..haan....mera senior tha na college me to thodi bahut jaan-pehchan thi,hi-hello tak & ab..",anjali ne petticoat utara,"..tumhari vajah se main bhi to mashoor ho gayi hu isliye mere sath dance karne aa gaya."

"tumhe achha nahi laga kya?",jasjit kewal underwear me khada tha jab anjali ne use peechhe se baaho me bhar liya.

"nahi..",jasjit ghuma & anjali ki nangi kamar ko apni baaho me kas ke masla,"..tumhe kisi bhi aur ki baaho me dekhta hu to pagal ho jata hu.",usne apne honth anjali ke cleavage se laga diye.

"dhat!....aahhhh....ummmm....bistar pe chalo ne please....oohhhhh..!",pati ki gustakh harkato ne uski badgumani door kar di thi lekin fir bhi apne pati se,jise vo jaan se bhi zyada chahti thi,jhuth bolna use achha nahi laga tha magar vo kya karti,uski maa ne use shadi se pehle sakht hidayat di thi ki chahe kuchh bhi ho jaye vo jasjit ko mahesh ke bare me nahi batayegi varna uski shadi barbad bhi ho sakti thi.

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"maine bhabhi se baat ki aaj.",mukul Nina ke nange kandhe ko chum raha tha.dono apne bistar me chadar ke neeche the,nina bayi karwat pe thi & mukul us se peechhe se sata tha.

"to?"

"bhabhi naraz nahi hain par bhaiyya hai.",mukul uske pet ko sehla raha tha....uff..kuchh bhi kar lo lekin ye aadmi bas apne bhaiyya-bhabhi ki mala hi japega!nina khij uthi.

"to bas main chunav jeet ke bhaiyya ko ye sabit kar dunga ki main bhi kisi layak hu.",mukul nina ki gardan chum to raha tha magar aisa lagta tha mano uska dil kahi aur tha....oh!to ye baat hai,mukul bhi khud ko asbit karna chahta hai,"..& tumhe vo sab dunga jiski tum haqdar ho,nina.",..nina ko glani mehsus hui,vo to sab keval apni hasrato ko pura karne ke liye kar rahi thi magar uska pati uski & apne parivar ki umeedo pe khara utarne ke liye ye sab kar raha tha..vaise bhi mukul use paglo ki tarah chahta tha..magara vo bhi to sab apne parivar ki khushi ke liye hi kar rahi thi.

"zyada pareshan mat ho..",nina ne karwat li & mukul ke chehre ko apne hatho me bhar liya,"..tum jeetoge & sab thik ho jayega & meri fikr mat kiya karo.main khush hu tumhare sath mukul.kisi aur ki biwi ban ke zindagi bitane ki to main soch bhi nahi sakti.",zamane baad nina ki aavaz me mukul ne vo narmi mehsus ki thi.uske dil me pyar ka sailab umad aya & usne apni pyari biwi ko apne agosh me qaid kar liya & uske jism ko apne pyar se bhigone laga.us raat arse baad nina apne pati ki chudai se 2 baar jhadi.

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kramashah........